संग्रहालयों वाले प्रश्न घूम-फिरकर एक ही बात पूछते हैं — कौन सबसे पुराना, कौन सबसे बड़ा, कौन पहला और कहाँ क्या रखा है। इसलिए इस भाग की शुरुआत उसी सूची से है, फिर दस नवलखा और उदयपुर, हाड़ौती, भरतपुर-डीग, जयपुर, अलवर-शेखावाटी, अजमेर-मेड़ता, जोधपुर, जैसलमेर-पाली-माउंट आबू, बीकानेर और अभिलेखागार के संग्रहालय आते हैं। पिछली परीक्षाओं में पूछे गए तथ्यों के साथ परीक्षा का नाम लिखा गया है।
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1. पहला · प्राचीन · सबसे बड़ा
| विशेषता | संग्रहालय | ब्योरा |
|---|---|---|
| सबसे प्राचीन | अल्बर्ट हॉल, जयपुर | राजस्थान का सबसे पुराना; आज़ादी के बाद केन्द्रीय संग्रहालय का दर्जा [परीक्षा: CET 10+2, 2024 — राजस्थान का सबसे प्राचीन संग्रहालय कौन-सा माना जाता है? ➜ अल्बर्ट हॉल] |
| सबसे बड़ा | अल्बर्ट हॉल, जयपुर | राजस्थान का सबसे बड़ा संग्रहालय भी यही |
| देश का पहला उद्योग-तकनीकी संग्रहालय | बिड़ला तकनीकी म्यूज़ियम, पिलानी | BITS परिसर में, 1954 |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ध्यान दें: अल्बर्ट हॉल = सबसे प्राचीन + सबसे बड़ा — दोनों जवाब एक ही। राजपूताना म्यूज़ियम (अजमेर, 1908) राज्य का दूसरा प्रमुख पुराना है।
2. दस नवलखा
| नवलखा | स्थान |
|---|---|
| नवलखा बावड़ी | डूँगरपुर |
| नवलखा झील | बूँदी |
| नवलखा महल | गुलाब बाग, उदयपुर |
| नवलखा भण्डार | चित्तौड़गढ़ दुर्ग |
… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: चित्तौड़ दुर्ग में दो नवलखा — भण्डार और बुर्ज। बाक़ी हर ज़िले में एक-एक।
3. सिटी पैलेस म्यूज़ियम
- स्थान ➜ उदयपुर का राजमहल, पिछोला के किनारे
- निर्माण ➜ 1559 ई., महाराणा उदयसिंह
- संग्रहालय की स्थापना ➜ महाराणा भगवंत सिंह
- अन्दर धूणी माता मन्दिर के आगे तीन कक्ष हैं — हल्दीघाटी, चेतक और प्रताप; इनमें हल्दीघाटी युद्ध के चित्र तथा राणा प्रताप के भाले, तलवारें, ढालें, कवच, बख्तर सजे हैं।
- चन्द्र महल (कर्णसिंह, 1620 ई.) — एक ही पत्थर से बना संगमरमर का कुण्ड। राजतिलक होने पर इसमें एक लाख चाँदी के सिक्के उँडेले जाते थे — इसी से इसका नाम “लक्खु कुण्ड” पड़ा।
- शिव प्रसन्न अमरविलास महल (अमरसिंह द्वितीय, 1699 ई.) — आज का बाड़ी महल; यहाँ दिल्ली दरबार (1903) की महाराणा फ़तेहसिंह की ऐतिहासिक कुर्सी रखी है।
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
ट्रिक: लक्खु कुण्ड → चन्द्र महल → कर्णसिंह (1620); बाड़ी महल → अमरविलास → अमरसिंह द्वितीय (1699)। “कर्ण-कुण्ड, अमर-बाड़ी”।
4. राजकीय संग्रहालय, उदयपुर
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| महारानी विक्टोरिया का स्वर्ण-जुबली | भवन का निर्माण | फ़तेहसिंह के समय गुलाब बाग में विक्टोरिया हॉल |
| 1890 | उद्घाटन | वायसराय लॉर्ड लैन्सडाउन ने; तब नाम विक्टोरिया हॉल म्यूज़ियम |
| प्रारम्भ से | क्यूरेटर | इतिहासकार गौरीशंकर हीराचन्द ओझा |
- संग्रह पाँच दीर्घाओं में बँटा है — शिलालेख, कलाकृतियाँ और मूर्तियाँ।
- घोसुण्डी शिलालेख और शहज़ादा खुर्रम की पगड़ी यहीं रखी है।
- मेवाड़ चित्रशैली का बड़ा संग्रह — लगभग 8000 चित्र; कलीला-दमना और मुल्ला दो प्याज़ा पर आधारित चित्र भी।
ध्यान दें: विक्टोरिया हॉल → प्रताप संग्रहालय → राजकीय संग्रहालय — एक ही संस्था के तीन नाम; क्यूरेटर ओझा।
5. लोक व जनजाति संग्रहालय
| संग्रहालय | स्थापना | क्या दिखता है |
|---|---|---|
| माणिक्यलाल वर्मा जनजाति संग्रहालय, उदयपुर | 30 दिसम्बर 1983 — शोध संस्थान (माणिक्यलाल वर्मा) ने शुरू किया | मेवाड़ का राजचिह्न; दीवारों पर बेणेश्वर मेला, मानगढ़ धाम और गवरी के चित्र; आदिवासी पोशाक, गहने, वाद्य और हथियार |
| भारतीय लोककला मण्डल संग्रहालय, उदयपुर | देवीलाल सामर के प्रयासों से | फड़ चित्र, कठपुतलियों का नृत्य, लोक कलाओं का संग्रह; तुर्रा-कलंगी, भवाई, रासलीला, गवरी, रामलीला की झाँकियाँ |
| आहड़ संग्रहालय, आहड़ (उदयपुर) | 1961; राजस्थान पुरातत्व विभाग चलाता है | 4000 वर्ष पुरानी आहड़ सभ्यता की सामग्री |
6. चित्तौड़, हल्दीघाटी, डूँगरपुर
| संग्रहालय | स्थापना | ब्योरा |
|---|---|---|
| राजकीय संग्रहालय, चित्तौड़गढ़ | 1968 से | चित्तौड़ दुर्ग के फ़तेहप्रकाश महल में; मेवाड़ के महाराणाओं के पूरे क़द के तैल चित्र, प्रतिमाएँ, सिक्के, शस्त्र; भील जोड़े व गाड़िया लोहारों के मॉडल; मीरां की तस्वीरें; बस्सी की लकड़ी की कारीगरी |
| हल्दीघाटी संग्रहालय, हल्दीघाटी (राजसमंद) | — | महाराणा प्रताप के जीवन की घटनाएँ; शिक्षक मोहनलाल श्रीमाली ने निजी ख़र्च से बनवाया; गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम |
| राजकीय संग्रहालय, डूँगरपुर | 1973 | डाक टिकटों से बने विजय स्तम्भ, कुतुबमीनार आदि |
7. हाड़ौती के संग्रहालय
| संग्रहालय | स्थापना | ब्योरा |
|---|---|---|
| राजकीय संग्रहालय, कोटा | 1946 | ब्रजविलास भवन में; चारचौमा, कन्सुआ और शीतलेश्वर महादेव (झालरापाटन) के शिलालेख; पुरानी मूर्तियाँ, पत्थर-युग के औज़ार; विष्णु के 24 रूपों वाली मूर्ति |
| राव माधोसिंह ट्रस्ट संग्रहालय, कोटा | 30 मार्च 1970 | कोटा के गढ़ के भीतर; हाड़ौती की लोक-संस्कृति के साथ राजस्थान की हर चित्र-शैली के चित्र और भित्ति चित्र |
| राजकीय संग्रहालय, झालावाड़ | 1 जून 1915 | शासक भवानीसिंह की पहल; शाही परिवार का सामान, पुराने सिक्के और लघुचित्र |
8. भरतपुर व डीग
राजकीय संग्रहालय, भरतपुर
- लोहागढ़ दुर्ग परिसर के कचहरी भवन में महाराजा ब्रजेन्द्र सिंह ने 1944 में बनवाया।
- शाही परिवार का सामान, नोह की यक्ष प्रतिमा, बयाना के गुप्तकालीन सिक्के, पाँच फ़ुट लम्बा एकमुखी शिवलिंग, पत्थर की प्रतिमाएँ।
- तोप, तलवार, कलात्मक हस्तशिल्प, प्राचीन पाण्डुलिपियाँ और पुराने रेवेन्यू स्टाम्प।
डीग संग्रहालय
- डीग के महाराजा और परिवार द्वारा उपयोग की गई वस्तुएँ, फ़र्नीचर आदि।
- सबसे उम्दा चीज़ें गोपाल भवन व किशन भवन में प्रदर्शित हैं। गोपाल भवन डीग महल की इमारतों में सबसे बड़ा और असरदार है — संग्रहालय का मुख्य हिस्सा वहीं है।
9. अल्बर्ट हॉल
- रामसिंह द्वितीय के शासन में फ़रवरी 1876 में भवन की नींव पड़ी; प्रिंस अल्बर्ट के नाम पर “अल्बर्ट म्यूज़ियम” कहलाया।
- माधोसिंह द्वितीय के समय 1887 में सर एडवर्ड ब्रैडफ़ोर्ड ने उद्घाटन करके आम जनता के लिए खोला।
- राजस्थान का सबसे प्राचीन और सबसे बड़ा संग्रहालय; आज़ादी के बाद केन्द्रीय संग्रहालय का दर्जा।
10. राजपरिवार के संग्रहालय
| संग्रहालय | स्थापना | क्या मिलेगा |
|---|---|---|
| सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय (सिटी पैलेस संग्रहालय) | 1959 | क़ीमती कालीन, राजस्थानी पोशाकें, पगड़ियाँ, आभूषण, मीनाकारी, राजपूत-मुग़ल अस्त्र-शस्त्र, राजपरिवार का संग्रह |
| राजकीय संग्रहालय, हवामहल | लोकार्पण 23 दिसम्बर 1983 | जयपुर के राजाओं-विभूतियों के चित्र; विराटनगर के यूनानी सिक्के, जमवा रामगढ़ के कुषाण सिक्के, टोंक के गुप्तकालीन सिक्के, चौहान-कछवाहा सिक्के; स्कन्द कार्तिकेय, रावण अनुग्रह, वामन अवतार की मूर्तियाँ |
| पोथीखाना संग्रहालय | 1952 | सवाई मानसिंह द्वितीय ने बनवाया |
11. विशेष संग्रहालय व संस्थाएँ
| संग्रहालय | स्थापना / संस्थापक | ब्योरा |
|---|---|---|
| आचार्य रामचरण प्राच्य विद्यापीठ एवं संग्रहालय | 1960, आचार्य रामचरण शर्मा | तंत्र-मंत्र विद्या का भण्डार, जड़ी-बूटियों के ग्रन्थ, जयपुर का सबसे पुराना अख़बार, जयपुर की रचना के नक़्शे |
| डॉल म्यूज़ियम / गुड़िया घर | 7 अप्रैल 1979, भगवानी बाई सेखसरिया चैरिटेबल ट्रस्ट | जे.एल.एन. मार्ग पर मूक-बधिर विद्यालय के परिसर में; 30 से अधिक देशों की गुड़ियाएँ और कठपुतलियाँ |
| प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय | कैलाश सांखला के प्रयासों से | रामनिवास बाग के जन्तुआलय में; जीव-जन्तुओं-पक्षियों का प्राकृतिक इतिहास; राजस्थान का एकमात्र ऐसा संग्रहालय |
12. राजकीय संग्रहालय, अलवर
विनय विलास महल में महाराजा तेजसिंह के समय 1940 में स्थापित। चार कक्ष —
| कक्ष | विषय |
|---|---|
| प्रथम | प्रस्तर प्रतिमाएँ और शिलालेख |
| द्वितीय | हस्तशिल्प कला |
| तृतीय | चित्रकला |
प्रतिमाएँ और शिलालेख
- नृत्य-मुद्रा में अष्टभुजी गणेश (वि.सं. 1101 का लेख), सप्ताश्व पर सूर्य, नन्दी पर शिव-पार्वती, ललितासन में शिव-पार्वती।
- मथनदेव (कन्नौज के शासक विजयपाल देव के गुर्जर-प्रतिहार मंत्री) का शिलालेख, वि.सं. 1016; राजोरगढ़ से रानी प्रभावती का शिलालेख (वि.सं. 1052); शाह हीरानन्द का (वि.सं. 1645); सवाई प्रतापसिंह (जयपुर) का (वि.सं. 1839); नौगाँव (अलवर) से बहलोल लोदी का शिलालेख।
हस्तशिल्प, ख़ास वस्तुएँ और चित्र
- महाराजाओं की पोशाकें; भानगढ़ के गुलाबी व बादामी पत्थर से बने हुक्के, सुराहियाँ और गिलास।
- लाला नन्द किशोर की बनाई चाँदी की मेज़ सबसे ज़्यादा लुभाती है।
- बानसूर (कोटपुतली-बहरोड़) में 1892 में गिरा उल्कापिण्ड; चरखी दादरी (हरियाणा) से मिला लरज़दार पत्थर; तिजारा के शासक बलवन्त सिंह के इन्द्र विमान का मॉडल।
13. शेखावाटी के संस्थान
| संस्था | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| श्री सरस्वती पुस्तकालय | फतेहपुर (सीकर) | वासुदेव गोयनका और बजरंग लाल लोहिया ने 14 मई 1910 को खड़ा किया; 500 से अधिक हस्तलिखित कृतियाँ, दुर्लभ ग्रन्थ, सभी सम्प्रदायों के साधु-सन्तों के 172 चित्र, बंगला-संस्कृत के ताड़पत्र [परीक्षा: RPSC ग्रेड III, 2007 — श्री सरस्वती पुस्तकालय कहाँ स्थित है? ➜ फतेहपुर (सीकर)] |
| स्वामी विवेकानन्द म्यूज़ियम | खेतड़ी (झुंझुनूँ) | विवेकानन्द की 150वीं जयन्ती पर जनवरी 2013 में बनाने की घोषणा; फतेहविलास महल में |
| बिड़ला तकनीकी म्यूज़ियम | पिलानी (झुंझुनूँ) | BITS परिसर में 1954 में; देश का पहला उद्योग-तकनीकी संग्रहालय; कोयला खानों और मशीनरी के मॉडल |
14. अजमेर व मेड़ता
- स्थान ➜ अजमेर का मैगज़ीन दुर्ग
- उद्घाटन ➜ 19 अक्टूबर 1908, राजपूताना के एजीजी कॉल्विन
- तब का नाम ➜ राजपूताना म्यूज़ियम
- शिलालेख ➜ बड़ली और नगरी; हरिकेली नाटक के अंश पट्टिकाओं पर।
- मोहनजोदड़ो सभ्यता की चीज़ें; बहुत-सी जैन मूर्तियाँ; 3000 सिक्कों का ज़ख़ीरा; काँच के दुर्लभ सिक्के।
- ललित विग्रहराज (सोमदेव) से जुड़े शिला-चौके; हर्षनाथ से मिली लिंगोद्भव महेश्वर की मूर्ति; बघेरा की 9वीं-12वीं सदी की मूर्तियाँ; अढ़ाई दिन के झोंपड़े की सामग्री। [परीक्षा: सहायक सांख्यिकी अधिकारी, 2024 — अजमेर संग्रहालय में रखी लिंगोद्भव मूर्ति कहाँ से मिली? ➜ हर्षनाथ]
मीरां संग्रहालय
मेड़ता सिटी (नागौर) में राव दूदागढ़ परिसर में स्थित।
15. जोधपुर के संग्रहालय
| संग्रहालय | स्थापना / ब्योरा |
|---|---|
| राजकीय संग्रहालय, मंडोर | 1968; मंडोर में मारवाड़ के राजाओं के चित्र, पुराने सिक्के और पत्थर की मूर्तियाँ |
| उम्मेद भवन पैलेस संग्रहालय | महाराजा उम्मेद सिंह ने अकाल राहत के तहत महल बनवाया; घड़ियों का अनूठा संग्रह, एयरक्राफ़्ट के मॉडल, राजपरिवार की क़ीमती वस्तुएँ |
| मेहरानगढ़ संग्रहालय | तालों का संग्रह, राजस्थान की पगड़ियाँ; शाही मुग़ल तम्बू लालडेरा (“वस्त्र का ताजमहल”) |
16. सरदार संग्रहालय
- 1909 में लॉर्ड किचनर के जोधपुर आने पर महाराजा सरदार सिंह ने स्थापित किया।
- 1914 में पण्डित विश्वेश्वर नाथ रेऊ सहायक अधीक्षक बने।
- 1935 में डीडवाना के सेठ मंगनीराम बाँगड़ ने वर्तमान भवन बनवाया; 17 मार्च 1936 को वायसराय लॉर्ड विलिंगडन ने उद्घाटन किया।
17. जैसलमेर, पाली, माउंट आबू
| संग्रहालय | स्थापना | ब्योरा |
|---|---|---|
| लोक सांस्कृतिक संग्रहालय, गड़ीसर तालाब, जैसलमेर | 1984 | लोक संस्कृति की अमूल्य वस्तुएँ |
| जैसलमेर युद्ध संग्रहालय | अगस्त 2015 (24 अगस्त) — भारतीय सेना | लोंगेवाला (भारत-पाक युद्ध) से जुड़ी सामग्री [परीक्षा: राजस्थान पुलिस, 2024 — राजस्थान के किस ज़िले में अगस्त 2015 में युद्ध संग्रहालय बना? ➜ जैसलमेर] |
| बाँगड़ राजकीय संग्रहालय, पाली | उद्घाटन 19 जुलाई 1991 | दस सिर और चौवन हाथ वाली सुगाली देवी की मूर्ति, वाद्य-आभूषण, इण्डो-सरसैनिक युग के सिक्के |
18. बीकानेर शहर के संग्रहालय
| संग्रहालय | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| करणी संग्रहालय | क़िले (जूनागढ़) के भीतर, गंगा निवास महल में | शासकों के जीवन की घटनाएँ, राज्य चिह्न, प्राचीन अस्त्र-शस्त्र; गंगासिंह की विदेशी वस्तुएँ; एक प्राचीन चन्दन सिंहासन; प्रथम विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश सरकार से मिला DH-9 हैवीलैण्ड हवाई जहाज़; शिकार के चित्र, भूसा भरे जानवरों के मॉडल, बीकानेर लघु चित्र शैली [परीक्षा: Pre B.Ed., 2005 — गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय कहाँ है? ➜ बीकानेर] |
| सार्दुल संग्रहालय | लालगढ़ महल | राजस्थान में कैमरे से लिया पहला चित्र (सरदार सिंह का); कुछ विदेशी सिक्के; 1 क्विंटल वज़नी पीतल की एक वस्तु; प्राचीन अस्त्र-शस्त्र और पाण्डुलिपियाँ |
| अनूप संस्कृत संग्रहालय | लालगढ़ महल | 6000 से ज़्यादा संस्कृत ग्रन्थ तथा लगभग 12000 हिन्दी-अंग्रेज़ी किताबें |
19. अभिलेखागार, चूरू व हनुमानगढ़
| संस्था | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| राजस्थान राज्य अभिलेखागार | बीकानेर | 1955 में जयपुर में खुला, 1960 में बीकानेर आ गया; स्थायी महत्त्व के अभिलेख यहाँ सुरक्षित; अन्य शाखाएँ — अजमेर, अलवर, उदयपुर, कोटा, जयपुर, भरतपुर; देश का पहला ई-अभिलेखागार |
| लोक संस्कृति शोध संस्थान संग्रहालय | चूरू | 1964 में रामनवमी को गोविन्द अग्रवाल ने बनाया; मुड़िया लिपि की बहियाँ, फ़ारसी दस्तावेज़, राजाओं-ब्रिटिश अधिकारियों के पत्र |
| नाहटा संग्रहालय | सरदारशहर (चूरू) | निजी क्षेत्र का; चन्दन की काष्ठ कला, हाथीदाँत की कलाकृतियाँ, लकड़ी की घड़ी में ताजमहल और विजय स्तम्भ |
20. रैपिड फायर तथ्य
- सबसे प्राचीन व सबसे बड़ा संग्रहालय ➜ अल्बर्ट हॉल, जयपुर
- देश का पहला उद्योग-तकनीकी संग्रहालय ➜ बिड़ला तकनीकी म्यूज़ियम, पिलानी (1954)
- राजपूताना म्यूज़ियम ➜ अजमेर, 1908
- विक्टोरिया हॉल म्यूज़ियम ➜ आज का राजकीय संग्रहालय, उदयपुर; क्यूरेटर गौरीशंकर हीराचन्द ओझा
- आहड़ संग्रहालय ➜ 1961, आहड़ सभ्यता की सामग्री
- जैसलमेर युद्ध संग्रहालय ➜ अगस्त 2015, लोंगेवाला से जुड़ी सामग्री
- सुगाली देवी की मूर्ति ➜ बाँगड़ राजकीय संग्रहालय, पाली
- राजस्थान का एकमात्र प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय ➜ जयपुर, रामनिवास बाग
- देश का पहला ई-अभिलेखागार ➜ राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर
पिछला भाग: राजस्थान के त्योहार व मेले: धार्मिक मेले — संभाग-वार (भाग 2) एवं पर्यटन मेले व महोत्सव
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पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय
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