मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती – Rajasthan Art and Culture Chapter 35

अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज़, नागौर के सूफ़ी संत तथा राजस्थान की प्रमुख मस्जिदें, दरगाहें, मक़बरे व मीनारें।

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In this chapter (15 sections)
  1. एक नज़र में
  2. जीवन-परिचय
  3. दरगाह का इतिहास
  4. दरगाह की इमारतें
  5. उर्स और सद्भाव
  6. अजमेर क्षेत्र
  7. नागौर के सूफ़ी संत
  8. नरहड़ · गलियाकोट · रसूलशाह
  9. राजस्थान की प्रमुख मस्जिदें
  10. जयपुर · शेखावाटी · दौसा
  11. हाड़ौती · मेवाड़-वागड़ · मध्य व पश्चिम
  12. अन्य दरगाहें
  13. प्रमुख मज़ार
  14. मक़बरे और मीनारें
  15. रैपिड फायर तथ्य

यह अध्याय दो बातों पर टिका है — कौन-सा सिलसिला राजस्थान में कहाँ पनपा, और हर संत की दरगाह किस जगह है। जगह और व्यक्ति की जोड़ी बैठ जाए तो अधिकांश प्रश्न आसान हो जाते हैं। यहाँ चिश्ती परम्परा के शब्दों से शुरू करके ख्वाजा साहब का जीवन, दरगाह का इतिहास, उर्स, नागौर के संत और नरहड़-गलियाकोट दिए गए हैं। अंत में मस्जिदें, दरगाहें, मज़ार, मक़बरे और मीनारें हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे, 4 चॉक-बोर्ड चित्र, 10 नक्शे, 25 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
माइंड मैप खोलें ➜

1. एक नज़र में

  • चिश्ती सिलसिला भारत का सबसे पुराना संगठित सूफ़ी सिलसिला है। राजस्थान में इसके दो बड़े केन्द्र अजमेर और नागौर रहे।
  • नागौर सुहरावर्दी सिलसिले का भी राजस्थान में मुख्य केन्द्र था।
  • नागौर में बड़े पीर साहब की दरगाह कादरिया शाखा से जुड़ी बताई जाती है।

चिश्ती परम्परा के शब्द

शब्दअर्थ
जायरीनतीर्थ-यात्री (दरगाह पर आने वाले)
वलीउत्तराधिकारी
मुरीदशिष्य
मुर्शीदगुरु

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: सूत्र — मुर्शीद (गुरु) से मुरीद (शिष्य) बनता है; दरगाह जाने वाला जायरीन, उसकी यात्रा ज़ियारत।

2. जीवन-परिचय

  • उपनाम ➜ गरीब नवाज़; चिश्त कस्बे से नाता होने के कारण नाम में चिश्ती
  • जन्म ➜ लगभग 1141–42 ई., संजर (सिस्तान)
  • माता-पिता ➜ ख्वाजा सैयद गयासुद्दीन · बीबी साहेनूर

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

काल / क्रमघटनाविवरण
~1141जन्मसिस्तान (संजर)
—भारत आगमनपृथ्वीराज चौहान तृतीय के काल में मुहम्मद गौरी के साथ; अजमेर को कर्मभूमि बनाया
1214दिल्ली प्रस्थानइल्तुतमिश के समय

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

उपाधियाँ और कृतियाँ

  • मुहम्मद गौरी ने उन्हें “सुल्तान-उल-हिन्द” की उपाधि दी।
  • भारत के सूफ़ियों ने उन्हें “आफ़ताब-ए-हिन्द” कहा।
  • अनीसुल अरवाह और कंजुल इसरार (1215 ई. में रचित) उनके ग्रन्थ हैं।

ट्रिक: दो साल याद रखें — 1214 (दिल्ली गए) और 1219 (अजमेर लौटे); उसके बाद जीवन भर अजमेर में ही रहे।

3. दरगाह का इतिहास

  • ख्वाजा साहब के निधन के बाद करीब ढाई सदी तक यहाँ कोई निर्माण नहीं हुआ; केवल ईंटों की सीधी-सादी मज़ार थी।
  • मुहम्मद बिन तुग़लक पहला सुल्तान था जो इस दरगाह पर ज़ियारत को आया।
  • पक्का मज़ार लगभग 1464 ई. में बना (इतिहासकार हरबिलास शारदा के अनुसार) — तब अजमेर मांडू के खिलजी सुल्तान के अधीन था।

बुलंद दरवाज़ा

  • ऊँचाई ➜ 75 फ़ुट
  • विशेषता ➜ दरगाह की सबसे पुरानी इमारत; मुग़ल-पूर्व स्थापत्य
  • बनवाया ➜ मांडू के सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी (1469–1500 ई.) ने

मुग़ल बादशाहों की भेंट

वर्षभेंटकिसने
1567ताँबे का विशाल कड़ाव — बड़ी देगअकबर
1571अकबरी मस्जिद का निर्माण (आदेश पर)अकबर
—दरगाह की व्यवस्थाओं के लिए 18 गाँवअकबर

आगे चलकर 1912 ई. में हैदराबाद के निज़ाम ने निज़ाम द्वार बनवाया; चाँदी का कटहरा जयपुर के सवाई जयसिंह ने दिया।

4. दरगाह की इमारतें

इमारतविवरण
निज़ाम द्वारमुख्य प्रवेश-द्वार; 1912 ई., हैदराबाद के निज़ाम मीर उस्मान अली खान; ऊपर दो बड़े नगाड़े (शहनाई आदि के साथ निश्चित समय पर बजते हैं) — मूलतः अकबर की भेंट
बुलंद दरवाज़ा75 फ़ुट ऊँचा; दरगाह की सबसे पुरानी इमारत
मुख्य मज़ार का भवननिर्माण का मुख्य श्रेय मांडू के गयासुद्दीन खिलजी को; काम 1537 ई. तक पूरा
बेगमी दालानमज़ार-भवन के प्रवेश के सामने; जहाँआरा (शाहजहाँ की बेटी) ने बनवाया; अमृतसर के गुरुद्वारे से उपहार में मिला झाड़ (झूमर) यहाँ टँगा है

देगें (बड़े कड़ाव)

बुलंद दरवाज़े से आगे बढ़ने पर दो विशाल देगें दिखती हैं। उर्स के समय इनमें चीनी, घी, चावल और मेवे डालकर तबर्रुक (प्रसाद) पकता है, जो श्रद्धालुओं में बँटता है।

परिसर की अन्य क़ब्रें

5. उर्स और सद्भाव

  • उर्स की तिथि ➜ रजब माह की 1 से 6 तारीख़ तक, अजमेर में
  • झंडे की रस्म ➜ बुलंद दरवाज़े पर झंडा चढ़ाना — भीलवाड़ा का गौरी परिवार निभाता है
  • कुल की रस्म ➜ रजब की 9वीं तारीख़ को; जायरीनों पर गुलाब जल के छींटे

ध्यान दें: उर्स 1 से 6 रजब; कुल की रस्म 9 रजब को — दोनों अलग तिथियाँ याद रखें।

6. अजमेर क्षेत्र

नामस्थानपरिचय
ख्वाजा फखरुद्दीन चिश्ती (फखरुद्दीन अबुल खैर)सरवाड़ (अजमेर)मोइनुद्दीन चिश्ती के ज्येष्ठ पुत्र
ख्वाजा हिसामुद्दीन चिश्तीसाँभर (जयपुर)मोइनुद्दीन चिश्ती के पौत्र; दरगाह साँभर झील के पास
अलाउद्दीन खान का मक़बरा (सोलह खम्भा)अजमेरतीन गुम्बद, 16 स्तम्भ → नाम सोला खम्भा; हिजरी 1070 में शेख अलाउद्दीन ने बनवाया

हिसामुद्दीन चिश्ती का उपदेश — ज्ञान (इल्म) वह है जो सूरज की तरह चमके और अपनी रोशनी से पूरी दुनिया को उजाला कर दे।

7. नागौर के सूफ़ी संत

संतपरिचय
शेख हम्मीदुद्दीन सवालीनागौरी भी कहलाते हैं; उपनाम — सुल्तान-उत-तारकीन (यानी त्यागियों के सम्राट), तारकीन शाह, संन्यासियों के सुल्तान; मोइनुद्दीन चिश्ती के शिष्य; असली नाम अबू अहमद सईदी; पत्नी बीबी खदीना
काज़ी हम्मीदुद्दीन नागौरीनागौर में सुहरावर्दी सिलसिले के संस्थापक; जन्म बुखारा; 3 साल नागौर के काज़ी; बग़दाद जाकर शेख शिहाबुद्दीन के शिष्य बने; इल्तुतमिश के बाद दिल्ली लौटकर कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की ख़ानक़ाह में; 1246 ई. में निधन
ख्वाजा मखदूम हुसैन नागौरीनागौर के चिश्ती संतों में प्रसिद्ध; हम्मीदुद्दीन नागौरी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी

सवाली से जुड़ी बातें

  • उन्होंने सुवाल गाँव (नागौर) को केन्द्र बनाकर शान्तिपूर्ण सूफ़ी मत फैलाया।
  • वे कच्चे मकान में रहते थे; उसके खण्डहरों को लोग “फूलमहल” कहते हैं।
  • अतारकीन का दरवाज़ा (नागौर) — इल्तुतमिश ने 1230 ई. में बनवाया।

मखदूम हुसैन के कार्य

  • पैग़म्बर मुहम्मद के नाम पर क़ुरान के 30 खण्ड तैयार करवाए, जिनका नाम “नूरुन्नबी” रखा।
  • नागौर में रसूल बाड़ी (उद्यान) और मुस्तफ़ा सागर (तालाब) बनवाया।

ध्यान दें: दो “हम्मीदुद्दीन” — सवाली (चिश्ती, सुवाल) और काज़ी (सुहरावर्दी, निधन 1246); दोनों को एक-दूसरे में न मिलाएँ।

8. नरहड़ · गलियाकोट · रसूलशाह

हाजिब शक्कर बार — नरहड़ (चिड़ावा, झुंझुनूं)

  • अन्य नाम ➜ बागड़ के धणी · शक्कर बाबा · नरहड़ के पीर; दरगाह = नरहड़ शरीफ़
  • उर्स ➜ कृष्ण जन्माष्टमी के दिन
  • गुरु-सम्बन्ध ➜ शेख सलीम चिश्ती के शिष्य (जिनके नाम पर अकबर ने पुत्र का नाम सलीम रखा)
  • साम्प्रदायिक सद्भाव का अनोखा स्थल।
  • लोग जाल वृक्ष पर मन्नत के डोरे बाँधते हैं।
  • यहाँ पागलों (मानसिक रोगियों) का इलाज किया जाता है।

पीर फखरुद्दीन — गलियाकोट (डूँगरपुर)

  • सम्प्रदाय ➜ दाउदी बोहरा समुदाय की आस्था का प्रमुख केन्द्र
  • मज़ार ➜ संत सैयद फखरुद्दीन की; “मज़ार-ए-फखरी”; सफ़ेद संगमरमर की; दीवारों पर उनकी सीख सुनहरे अक्षरों में अंकित
  • उर्स ➜ मोहर्रम के 27वें दिन

रसूलशाह

रसूलशाह ने रसूलशाही सम्प्रदाय चलाया। वे अलवर के पास बहादुरपुर के निवासी थे और संत नियामतुल्ला उनके गुरु थे। इस पंथ के अनुयायी सिर पर सफ़ेद या काला रूमाल बाँधते और शरीर पर भस्म लगाते हैं।

9. राजस्थान की प्रमुख मस्जिदें

मस्जिदस्थानविशेष
अढ़ाई दिन का झोंपड़ाअजमेरराजस्थान की सबसे प्राचीन मस्जिद; बीसलदेव चौहान (विग्रहराज चतुर्थ) ने संस्कृत पाठशाला बनवाई; कुतुबुद्दीन ऐबक ने तुड़वाकर मस्जिद बना दी; यहाँ फ़क़ीर पंजाबशाह का उर्स लगता है
अलाउद्दीन मस्जिदजालौरराजस्थान की दूसरी प्राचीन मस्जिद
जामा मस्जिदशाहबाद (बारां)राजस्थान की सबसे बड़ी मस्जिद; औरंगज़ेब के फ़ौजदार शेर अफ़गान ने बनवाई
शाही जामा मस्जिदमेड़ता (नागौर)औरंगज़ेब द्वारा निर्मित

10. जयपुर · शेखावाटी · दौसा

दरगाहस्थान
हिसामुद्दीन चिश्तीसाँभर झील (जयपुर)
हज़रत दौलत शाहचौमू (जयपुर)
हज़रत अमानीशाहजयपुर
मौलाना जियाउद्दीन साहबजयपुर

11. हाड़ौती · मेवाड़-वागड़ · मध्य व पश्चिम

दरगाहस्थान
अधर सिला दरगाहकोटा
हज़रत मीरा साहबबूँदी
संत मीठेशाह / हमीदुद्दीन चिश्ती — “पीर मीठे महाबली” भी कहलाते हैंगागरोन (झालावाड़)
हज़रत दीवान-ए-शाहकपासन (चित्तौड़गढ़)

12. अन्य दरगाहें

दरगाहस्थानविशेष
अमीर अली शाहदूदू (जयपुर)
हज़रत गद्दन शाहतिजारा (खैरथल-तिजारा)
सैयद सदरुद्दीनरणथम्भौर (सवाई माधोपुर)
कबीरशाहकरौली

13. प्रमुख मज़ार

मज़ारस्थानविशेष
भूरे खाँ की मज़ारमेहरानगढ़ (जोधपुर)
अब्दुला पीर की मज़ारभगवानपुरा (बाँसवाड़ा)बोहरा मुसलमानों के लिए ऐतिहासिक महत्त्व; अब्दुल रसूल की दरगाह भी कहलाती है
लैला-मजनूँ की मज़ारबिजौर (गंगानगर)

14. मक़बरे और मीनारें

प्रमुख मक़बरे

मक़बरास्थानविशेष
बीबी जरीनाधौलपुर
अलाउद्दीन आलमशाहतिजारा (खैरथल-तिजारा)
फतहजंग का गुम्बदअलवरशाहजहाँ के मंत्री फतहजंग का मक़बरा
गुलाब खाँजोधपुर

प्रमुख मीनारें

मीनारस्थान
सफ़दरगंज मीनारअलवर
नेहर खाँ की मीनारकोटा
गमता ग़ाज़ी मीनारजोधपुर

15. रैपिड फायर तथ्य

  • उपनाम ➜ गरीब नवाज़; मुहम्मद गौरी ने उन्हें «सुल्तान-उल-हिन्द» की उपाधि दी
  • बुलंद दरवाज़ा ➜ 75 फ़ुट ऊँचा, दरगाह की सबसे पुरानी इमारत; बनवाने वाले मांडू के गयासुद्दीन खिलजी
  • निज़ाम द्वार ➜ 1912 ई. में हैदराबाद के निज़ाम मीर उस्मान अली खान ने बनवाया
  • उर्स ➜ अजमेर में रजब माह की 1 से 6 तारीख़ तक; कुल की रस्म 9 रजब को
  • सबसे प्राचीन मस्जिद ➜ अजमेर का अढ़ाई दिन का झोंपड़ा; दूसरी अलाउद्दीन मस्जिद (जालौर)
  • सबसे बड़ी मस्जिद ➜ शाहबाद (बारां) की जामा मस्जिद, शेर अफ़गान ने बनवाई
  • नरहड़ के हाजिब शक्कर बार ➜ उर्स कृष्ण जन्माष्टमी के दिन; साम्प्रदायिक सद्भाव का स्थल
  • गलियाकोट (डूँगरपुर) ➜ दाउदी बोहरा समुदाय का केन्द्र; उर्स मोहर्रम के 27वें दिन

अगले भाग में सगुण-निर्गुण भक्ति का अन्तर, प्रमुख सम्प्रदायों का सार, फिर शैव व नाथ मत और रामानन्दी, रसिक, निम्बार्क व वल्लभ परम्पराएँ।

पिछला भाग: राजस्थान के मंदिर: जोधपुर व बीकानेर संभाग (भाग 2) एवं पैनोरमा व स्मारक

अगला भाग: राजस्थान के सम्प्रदाय व संत: शैव व नाथ सम्प्रदाय एवं वैष्णव सम्प्रदाय (भाग 1)

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इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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