अजमेर से जोधपुर तक के किलों में सबसे ज़्यादा उलझन नामों से होती है — तारागढ़ और गढ़बीठली एक ही किला है, और «काला पानी» मेवाड़ में सराड़ा को कहते हैं तो जोधपुर में माचिया को। इस भाग में तारागढ़, मैग्ज़ीन दुर्ग, नागौर, कुचामन, मांडलगढ़, मेहरानगढ़, मंडोर, बाड़मेर के किले और सिवाणा क्रमवार दिए गए हैं।
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1. तारागढ़ — अजमेर
- निर्माता ➜ अजयराज चौहान, 1113
- पहाड़ी ➜ बीठली
- ऊँचाई ➜ समुद्र तल से 2855 फ़ीट, ज़मीन से 1300 फ़ीट
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- हरविलास शारदा समेत कुछ इतिहासकार इसे 7वीं सदी में अजयपाल का बनवाया मानते हैं, जिसे बाद में अजयराज ने बढ़ाया; टॉड भी निर्माता अजयपाल बताते हैं। शारदा ने इसे भारत का पहला गिरि दुर्ग कहा।
- नाम “तारागढ़” ➜ मेवाड़ के कुँवर पृथ्वीराज (रायमल के बेटे) ने 1505 में यहाँ महल बनवाकर पत्नी ताराबाई के नाम पर रखा।
- नाम “गढ़बीठली” ➜ 17वीं सदी में शाहजहाँ के सामंत विट्ठलदास गौड़ ने 1644–56 में मरम्मत कराई।
- राज्य में सबसे ज़्यादा देशी हमले झेलने वाला किला; आज खंडित हालत में।
- बुर्जें ➜ घूँघट, गुगड़ी, फूटी, बांदरा, इमली, खिड़की, फतेह, नगारची, शृंगार चँवरी आदि (कुल 14)।
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| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1192 | मुहम्मद ग़ौरी | तराइन-II के बाद अधिकार; ग़ौरी लौटा तो पृथ्वीराज तृतीय के एक भाई ने फिर छीन लिया |
| 1195 | कुतुबुद्दीन ऐबक | फिर कब्ज़ा, सैयद हुसैन मशहदी किलेदार; बाद में गुजरात के भीमदेव से हारकर ऐबक ने यहीं शरण ली |
| 1505 | पृथ्वीराज (मेवाड़) | तारागढ़ नाम |
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ध्यान दें: “पूर्व का दूसरा जिब्राल्टर” — यह उपाधि बिशप हैबर से जुड़ी है; बैंटिक ने 1832 में इसे “दुनिया का दूसरा जिब्राल्टर” कहा।
2. मैग्ज़ीन व अजमेर-ब्यावर के अन्य
मैग्ज़ीन दुर्ग
- अकबर ने गुजरात-विजय की याद में 1570–73 के बीच शहर के बीचोंबीच बनवाया।
- छोटा चौकोर स्थल दुर्ग, चारों कोनों पर एक-एक बुर्ज; पूरी तरह मुस्लिम शैली का राज्य का एकमात्र दुर्ग; इस पर कभी हमला नहीं हुआ।
- 1573–79 के बीच अकबर जब भी अजमेर आया, यहीं ठहरा; 1576 में हल्दीघाटी की रणनीति यहीं पक्की हुई।
| दुर्ग | ज़िला | बात |
|---|---|---|
| किशनगढ़ किला | अजमेर | गुंदोलाव तालाब के किनारे किशनसिंह का बनवाया; भीतरी भाग जीवरक्खा |
| केहरीगढ़ | किशनगढ़ (अजमेर) | — |
| रूपनगढ़, करकेड़ी, सरवाड़, फतेहगढ़ | अजमेर | — |
3. नागौर का किला
- चौहान राजा सोमेश्वर के सामंत कैमास ने 1154 (वि.सं. 1211) में नींव रखी। ख्यातों की कथा — कैमास ने यहाँ भेड़ को भेड़िये से भिड़ते देखा और इसे वीर-भूमि का शकुन माना।
- महाभारत का अहिछत्रपुर — पांचाल नरेश द्रुपद का नगर, जिसे अर्जुन ने जीतकर गुरु द्रोणाचार्य को दिया। कई साल नागवंशी राज करते रहे, इसलिए पुराने अभिलेखों में नाम “नागौर”।
- धान्वन दुर्ग; चारों ओर कभी गहरी खाई थी (अब नहीं)।
- परकोटे में 28 गोल बुर्जें; बनावट ऐसी कि बाहर से दागे गोले महलों को छुए बिना ऊपर से निकल जाते।
- 6 द्वार ➜ सिराईपोल, बिचलीपोल, कचहरीपोल, सूरजपोल, धूपीपोल, राजपोल; शहर के चारों ओर भी परकोटा।
| दुर्ग | निर्माता / वर्ष | बात |
|---|---|---|
| खींवसर | राव करमसी, लगभग 1523 | औरंगज़ेब यहाँ रुका था |
| मालकोट (मेड़ता) | राव मालदेव, 1558 | उपनाम मेड़तकपुर दुर्ग |
| हरसौर किला | — | नागौर |
4. कुचामन व मारोठ
- कुचामन ➜ गिरि दुर्ग; उपनाम अणखला किला और “जागीरी किलों का सिरमौर“।
- नींव मेड़तिया ज़ालिमसिंह ने रखी, उनके वंशजों ने पूरा किया।
- यहाँ मारवाड़ की टकसाल थी — कुचामनी (इकतीसंदा) सिक्के ढलते थे।
याद रखें: कहावत — “ऐसा किला रानी जाये (राजा) के पास भले हो, ठुकरानी जाये (जागीरदार) के पास नहीं।”
5. भीलवाड़ा व टोंक के दुर्ग
मांडलगढ़ (भीलवाड़ा)
- जनश्रुति ➜ चानणा गुर्जर ने बनवाया और नाम मांडिया भील पर रखा; कुम्भा ने फिर से बनवाया। गिरि दुर्ग।
- शृंगी ऋषि शिलालेख ➜ मंडलाकार (कटोरे जैसा) होने से नाम मांडलगढ़; आकृति गोल।
- भीतर दो तालाब सागर और सागरी; पास में जालेश्वर और देवसागर तालाब।
| दुर्ग | ज़िला | बात |
|---|---|---|
| बनेड़ा | भीलवाड़ा | राज्य का एकमात्र किला जो बनने से आज तक मूल रूप में खड़ा है |
| अमीरगढ़ (असीरगढ़) | टोंक | भूमगढ़, “दक्खिन की चाबी“; 17वीं सदी में ब्राह्मण भोला ने शुरू किया, अमीर ख़ाँ पिंडारी ने पूरा |
| कांकोड़ | कनकपुरा (टोंक) | भीतर हाथी की मूर्ति — “हाथी भाटा“ |
6. मेहरानगढ़
- ज़िला ➜ जोधपुर
- निर्माता ➜ राव जोधा, 1459
- नींव ➜ करणी माता, 13 मई 1459
- लाल पत्थर से 1459 में बना; नींव करणी माता ने रखी। जोधा ने चारों ओर नगर बसाया — जोधपुर, जो मारवाड़ की नई राजधानी बना (पहले मंडोर; नया किला उससे लगभग 6 किमी दक्षिण)।
- मयूर (मोर) जैसी आकृति — मयूरध्वजगढ़; विशालता के कारण शायद “मेहरानगढ़”।
- पहाड़ी पंचेटिया — योगी चिड़ियानाथ की तपस्या-स्थली होने से चिड़ियाटूँक। गिरि दुर्ग; मारवाड़ के पहाड़ी दुर्गों में सबसे अहम।
द्वार
| द्वार | बात |
|---|---|
| लोहापोल | मुख्य व अंतिम द्वार; 1548 में मालदेव ने शुरू, विजयसिंह ने पूरा; यहाँ 1843 में मानसिंह की चिता पर सती हुई रानियों के हाथों के छापे; पास में मामा-भांजा की छतरी |
| जयपोल | उत्तर-पूर्व का बाहरी द्वार; मानसिंह राठौड़ ने 1808 में जयपुर-बीकानेर की संयुक्त सेना पर जीत की याद में; पास में कीरतसिंह सोढ़ा की छतरी |
| फतेहपोल | दक्षिण-पश्चिम, शहर की ओर; अजीतसिंह ने जोधपुर से मुगल ख़ालसा हटने की याद में |
महल
| महल | बात |
|---|---|
| मोती महल | सूरसिंह का; सुनहरी सजावट, सजीव चित्र; छत-दीवारों पर सोने की पॉलिश तख़्तसिंह ने करवाई |
| फूल महल | अभयसिंह, 1724; पत्थर पर बारीक खुदाई व भित्तिचित्र; दीवान-ए-ख़ास भी कहलाता |
| फतेह महल | अजीतसिंह — मुगल ख़ालसा हटने की याद |
| चोखेलाव महल | भित्तिचित्र |
मंदिर, मज़ारें
- नागणेची माता ➜ राठौड़ों की कुलदेवी; मूर्ति राव जोधा नगाणा (बालोतरा) से लाए।
- चामुंडा माता ➜ राव जोधा ने किले के साथ बनवाया; 1857 में बारूदख़ाने पर बिजली गिरने के धमाके से टूटा, तख़्तसिंह ने फिर बनवाया।
- मुरली मनोहर और आनन्दघन मंदिर — अभयसिंह के काल के।
तोपें
| सबसे घातक तीन | कैसे आई |
|---|---|
| किलकिला | अजीतसिंह ने अहमदाबाद का सूबेदार रहते बनवाई |
| शम्भूबाण | अभयसिंह ने सरबुलंद ख़ाँ से छीनी |
| गज़नीख़ाँ | गजसिंह को जालौर विजय में मिली |
जल और शहरपनाह
- रानीसर ➜ राव जोधा की रानी जसमादे (जसमा हाड़ी) ने किले के साथ बनवाया।
- पदमसागर (पदमसर) ➜ मेवाड़ी सेठ पदमचंद शाह के दिए धन से राव जोधा ने बनवाया। दोनों किले के पश्चिम में।
- नगर की शहरपनाह — 101 बुर्जें, 6 दरवाज़े: नागौरी, मेड़तिया, सोजती, सिवानची, जालौरी, चाँदपोल।
किसने क्या कहा
- जैकलिन कैनेडी ➜ दुनिया का आठवाँ आश्चर्य।
- रुडयार्ड किपलिंग (लंबा समय यहाँ रहे) — इसे परियों और देवताओं (फ़रिश्तों) ने बनाया।
- कर्नल टॉड ➜ जोधा के बेटे इसी महल की खिड़की से अपने राज की सीमा तक नज़र रख सकते थे।
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1544 | शेरशाह | गिरी-सुमेल के बाद |
| 1545–46 | मालदेव | वापस |
| 1565 | हसन कुली ख़ाँ | चन्द्रसेन से छीनकर मुगल अधिकार |
7. मंडोर, माचिया, फलौदी
| दुर्ग | ज़िला | बात |
|---|---|---|
| मंडोर (मांडव्यपुर दुर्ग) | जोधपुर | पहले नागवंश, फिर प्रतिहार, चौहान, फिर राठौड़ों का; भूकंप से नष्ट, इसलिए निर्माता का पक्का पता नहीं; बौद्ध शैली के खंभे, दरबार कक्ष, एक वैष्णव मंदिर के अवशेष; मारवाड़ की पुरानी राजधानी |
| माचिया | जोधपुर | तख़्तसिंह ने जंगली सूअरों के शिकार के समय ठहरने को बनवाया; “जोधपुर का काला पानी“ |
| फलौदी किला | फलौदी | — |
ट्रिक: “काला पानी” दो — सराड़ा = मेवाड़ का, माचिया = जोधपुर का।
8. बाड़मेर के दुर्ग
| दुर्ग | स्थान | बात |
|---|---|---|
| कोटड़े का किला | कोटड़ा गाँव, शिव तहसील | भाखरी पहाड़ी; किराड़ू के परमारों का; आकार जैसलमेर किले जैसा; यह जगह कभी प्रसिद्ध जैन नगर थी |
| जूना दुर्ग | बाड़मेर | परमार धरणीवराह के पुत्र बाहड़ (वाग्भट्ट), 1002; पुराना नाम बाहड़मेरु, बाहड़गिरि, जूना बाहड़मेर — “बाड़मेर” नाम भी बाहड़ राव से; परमारों-चौहानों की देन; अब किला और आदिनाथ जैन मंदिर के खंडहर ही बचे |
| हापाकोट | चौहटन | हापा चौहान — जालौर के कान्हड़देव के भाई का बेटा |
रोचक तथ्य: वीर दुर्गादास राठौड़ औरंगज़ेब के समय जूना दुर्ग में रहे और औरंगज़ेब के पोते बुलंद अख़्तर और पोती सफ़ियतुन्निसा को यहीं सुरक्षित रखा।
9. सिवाणा
- ज़िला ➜ बालोतरा
- निर्माता ➜ वीरनारायण परमार, 954
- पहाड़ी ➜ छप्पन की पहाड़ियाँ (हल्देश्वर)
- कूमट नाम की झाड़ी बहुत होने से “कूमट दुर्ग”।
- संकट में मारवाड़ के राजाओं की शरणस्थली — गिरी-सुमेल की हार के बाद शेरशाह की सेना पीछा कर रही थी तो मालदेव ने यहीं आश्रय लिया; चन्द्रसेन ने इसे केंद्र बनाकर लंबे समय तक मुगलों से लोहा लिया।
- भीतर ➜ कल्ला रायमलोत का थड़ा, अजीतसिंह का दरवाज़ा, हल्देश्वर महादेव मंदिर।
पहला साका — 1310
- जालौर जाते हुए अलाउद्दीन का सामना सातलदेव (शीतलदेव) से हुआ — कान्हड़देव का भतीजा।
- सेनापति भायला पंवार को किले का लालच देकर पीने के पानी के मुख्य तालाब भांडेलाव में गोमांस डलवा दिया।
- सातलदेव और सोमदेव केसरिया पहनकर लड़े; रानी मैणादे (मीणादे) के नेतृत्व में जौहर। अलाउद्दीन का सेनापति कमालुद्दीन गुर्ग।
दूसरा साका — 1582
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| अलाउद्दीन के बाद | जैतमाल | राव मल्लीनाथ के भाई जैतमाल और वंशजों का अधिकार |
| 1538 | राव मालदेव | राठौड़ डूँगरसी से छीना; सुरक्षा मज़बूत की, परकोटा बनवाया |
| 1575 | शाहबाज़ ख़ाँ | मुगल कब्ज़ा; अकबर ने मालदेव के बेटे रायमल को दिया; फिर बेटा कल्ला (कल्याणदास) रायमलोत |
रिवीजन पॉइंटर्स
- तारागढ़ (अजमेर) अजयराज चौहान ने 1113 में बीठली पहाड़ी पर बनवाया; शारदा ने इसे भारत का पहला गिरि दुर्ग कहा।
- तारागढ़ नाम 1505 में कुँवर पृथ्वीराज ने पत्नी ताराबाई के नाम पर रखा।
- मैग्ज़ीन दुर्ग अकबर का बनवाया है और पूरी तरह मुस्लिम शैली का राज्य का एकमात्र दुर्ग है।
- नागौर का किला धान्वन दुर्ग है; परकोटे में 28 गोल बुर्जें और 6 द्वार हैं।
- कुचामन गिरि दुर्ग है, «जागीरी किलों का सिरमौर»; यहाँ कुचामनी सिक्के ढलते थे।
- बनेड़ा (भीलवाड़ा) राज्य का एकमात्र किला है जो बनने से आज तक मूल रूप में खड़ा है।
- मेहरानगढ़ की नींव करणी माता ने 13 मई 1459 को रखी; निर्माता राव जोधा हैं।
- मेहरानगढ़ की तीन सबसे घातक तोपें — किलकिला, शम्भूबाण और गज़नीख़ाँ।
- सिवाणा (बालोतरा) वीरनारायण परमार ने 954 में बनवाया; इसका पहला साका 1310 में हुआ।
अगले भाग में जोधपुर संभाग के शेष किले — पाली, जालौर और सिरोही — तथा जैसलमेर और बीकानेर संभाग के जूनागढ़, भटनेर, चूरू आदि।
पिछला भाग: राजस्थान के दुर्ग: भरतपुर संभाग के दुर्ग एवं जयपुर संभाग के दुर्ग
अगला भाग: राजस्थान के दुर्ग: जोधपुर संभाग (मारवाड़) के दुर्ग (भाग 2) एवं थार के मरु-दुर्ग
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