त्योहारों की तिथि याद रखनी हो तो पहले यह समझ लें कि कोई कैलेंडर सूर्य पर टिका है या चंद्रमा पर। यही फ़र्क़ बताता है कि हर पर्व अंग्रेज़ी तारीख़ पर एक जगह क्यों नहीं ठहरता। इस भाग में कालगणना व संवत्, विक्रम संवत्, ईस्वी सन्, शक संवत्, हिजरी सन् और अन्य संवत् दिए हैं, उसके बाद हिन्दू मास-वार त्योहारों में चैत्र मास तक की बात है।
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1. कालगणना व संवत्
दुनिया में समय गिनने के केवल दो आधार हैं — सूर्य (सौर वर्ष: 365/366 दिन) और चंद्रमा (चंद्र वर्ष: 354/355 दिन)। हर संवत् इन्हीं में से एक पर टिका है।
| संवत् / सन् | आधार | आरंभ |
|---|---|---|
| विक्रम संवत् | चंद्र | 57 ई.पू. |
| ईस्वी (ग्रेगोरियन) | सूर्य | 1 जनवरी से वर्ष |
| शक संवत् (राष्ट्रीय पंचांग) | सूर्य | 78 ई. |
| हिजरी सन् | चंद्र | 622 ई. |
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2. विक्रम संवत्
- अन्य नाम ➜ मालव संवत् · कृत संवत् · नव संवत्
- शुरुआत ➜ 57 ई.पू.
- साल का पहला दिन ➜ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
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विक्रम संवत् के महीनों का क्रम
- चैत्र
- वैशाख
- ज्येष्ठ
- आषाढ़
- श्रावण
- भाद्रपद
… शेष 6 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
- प्राकृत जैन ग्रंथ कालकाचार्य कथानक के अनुसार उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने गुजरात के शकों को हराकर 57 ई.पू. में यह संवत् चलाया।
- सबसे शुरुआती शिलालेखों में इसी संवत् का नाम “कृत संवत्” मिलता है।
- मालवों ने भी इसी को अपनाया, इसलिए इसे “मालव संवत्” भी कहते हैं।
याद रखें: वि.सं. 2081 का पहला दिन 9 अप्रैल 2024 था। (विक्रम संवत् = ईस्वी + 57; 2024 + 57 = 2081)
3. अंग्रेज़ी–देशी माह सारणी
हिन्दू महीना पूर्णिमा से पूर्णिमा तक चलता है और अंग्रेज़ी महीना 1 तारीख से 30/31 तक — इसलिए एक अंग्रेज़ी महीने में दो देशी महीनों के हिस्से पड़ते हैं।
| अंग्रेज़ी माह | देशी माह | अंग्रेज़ी माह | देशी माह |
|---|---|---|---|
| जनवरी | पौष–माघ | जुलाई | आषाढ़–श्रावण |
| फरवरी | माघ–फाल्गुन | अगस्त | श्रावण–भाद्रपद |
| मार्च | फाल्गुन–चैत्र | सितम्बर | भाद्रपद–आश्विन |
4. ईस्वी सन् (ग्रेगोरियन)
- अन्य नाम ➜ ग्रिगोरियन कैलेंडर · अंग्रेज़ी कैलेंडर
- वर्ष ➜ 1 जनवरी से 31 दिसम्बर; 12 माह
- आधार ➜ सूर्य — विश्व में सबसे अधिक प्रचलित
- ईसा मसीह के जन्म के लगभग 4 वर्ष बाद से इस सन् की गिनती मानी जाती है।
ध्यान दें: सुधार करने वाले पोप का क्रम XIII (तेरहवाँ) है — “ग्रेगोरी अष्टम” नहीं। यही 1582 का सुधार आज का कैलेंडर है।
5. शक संवत् — राष्ट्रीय पंचांग
- शुरुआत ➜ 78 ई.
- प्रवर्तक ➜ कुषाण शासक कनिष्क (78 ई. में गद्दी पर बैठे)
- आधार ➜ सूर्य; 12 माह (चैत्र से फाल्गुन)
याद रखें: 1947 शक संवत् का पहला दिन 22 मार्च 2025 रहा। (शक संवत् = ईस्वी − 78; 2025 − 78 = 1947)
6. हिजरी सन्
- प्रकृति ➜ इस्लामी कैलेंडर; चंद्र आधारित
- वर्ष ➜ 354 या 355 दिन; 12 माह
- आरंभ ➜ 16 जुलाई 622 ई. — जिस दिन पैगम्बर मोहम्मद साहब मक्का छोड़कर मदीना चले (हिजरत)
हिजरी महीने — क्रम से
- मुहर्रम
- सफर
- रबी-उल-अव्वल
- रबी-उल-सानी
- जमादि-उल-अव्वल
- जमादि-उल-सानी
- चाँद देखने का नियम ➜ महीने की 29वीं शाम को सूर्यास्त के ठीक बाद नया चाँद दिख जाए तो अगले दिन से नया महीना शुरू; चाँद दिखने की पुष्टि न हो तो चालू महीना 30वें दिन तक चलता है।
याद रखें: 8 जुलाई 2024 को 1446 हिजरी शुरू हुआ।
7. अन्य संवत् व दो आधार
| संवत् | किसने चलाया | कब |
|---|---|---|
| गुप्त संवत् | चन्द्रगुप्त प्रथम | 319–20 ई. |
| वर्धन संवत् | हर्षवर्धन | 606 ई. |
| इलाही संवत् | मुग़ल बादशाह अकबर | 1584 ई. में लागू; गणना अकबर के राज्यारोहण वर्ष 1556 से |
8. हिन्दू मास-वार त्योहार
| माह | मुख्य त्योहार |
|---|---|
| चैत्र | धुलण्डी · शीतला अष्टमी · घुड़ला · गणगौर · रामनवमी · महावीर जयन्ती · हनुमान जयन्ती |
| वैशाख – आषाढ़ | आखा तीज · बुद्ध पूर्णिमा · वट सावित्री · देवशयनी एकादशी · गुरु पूर्णिमा |
| श्रावण | नागपंचमी · हरियाली अमावस्या · हरियाली तीज · रक्षाबन्धन |
| भाद्रपद | बड़ी (कजली) तीज · जन्माष्टमी · गोगानवमी · तेजादशमी · जलझूलनी एकादशी |
नवरात्र वर्ष में चार बार
| नवरात्र | कब | नाम |
|---|---|---|
| चैत्र | चैत्र शुक्ल एकम से नवमी | बासंतीय (बड़ा नवरात्र) |
| आषाढ़ | आषाढ़ शुक्ल एकम से नवमी | गुप्त नवरात्र |
| आश्विन | आश्विन शुक्ल एकम से नवमी | शारदीय |
गुप्त नवरात्र आम लोग नहीं मनाते — इनकी पूजा के पीछे के रहस्यमय कारणों से ही इनका नाम “गुप्त” पड़ा। जिसे कोई विशेष साधना करनी हो या खास सिद्धियाँ पानी हों, वही इनमें पूजन करता है।
9. चैत्र मास
चैत्र में सबसे ज़्यादा पर्व पड़ते हैं। होली के अगले दिन चैत्र कृष्ण एकम से 18 दिन का गणगौर-क्रम शुरू होता है और चैत्र शुक्ल में नववर्ष, नवरात्र, रामनवमी, महावीर जयन्ती व हनुमान जयन्ती आती हैं।
चैत्र का क्रम
- कृ. 1 धुलण्डी
- कृ. 8 शीतला अष्टमी
- शु. 1 नववर्ष
- शु. 2 सिंजारा
- शु. 3 गणगौर
धुलण्डी · शीतला · घुड़ला
| तिथि | पर्व | ख़ास बातें |
|---|---|---|
| चैत्र कृष्ण एकम | धुलण्डी | इसी दिन से गणगौर पूजन और बसन्तोत्सव शुरू; मेले — बादशाह मेला (ब्यावर), फूलडोल मेला (शाहपुरा, भीलवाड़ा) |
| चैत्र कृष्ण अष्टमी | शीतला अष्टमी (बास्योड़ा) | बासी (ठण्डा) भोजन खाया जाता है; शीतला माता — “चेचक की देवी” — की पूजा; मेले — शील की डूँगरी (चाकसू, जयपुर) व केसरियानाथजी (धुलेव, उदयपुर) |
| चैत्र कृष्ण अष्टमी → चैत्र शुक्ल तृतीया | घुड़ला | मारवाड़ का त्योहार |
- शील की डूँगरी के मंदिर में शीतला माता की खण्डित (टूटी) प्रतिमा पूजी जाती है।
घुड़ला — कहानी
- अजमेर का हाकिम मल्लू खाँ 1492 ई. में पीपाड़ पर चढ़ आया और 140 कन्याओं को बंदी बनाकर ले चला।
- सूचना पाकर जोधपुर के शासक राव सातलदेव पहुँचे; कोसाणा में सेनापति घुड़ले खाँ (मल्लू खाँ का) हारा और कन्याएँ आज़ाद हुईं।
- ख़ुशी में कन्याओं ने घुड़ले खाँ का सिर अपने सिर पर रखकर नृत्य किया।
गणगौर
- किसकी पूजा ➜ गण / ईसर (शिव) और गौर / ईसरी (पार्वती)
- अर्थ ➜ पार्वती के “गौने” का सूचक
- कितने दिन ➜ 18 दिन का क्रम — होली के अगले दिन (चैत्र कृष्ण एकम) से शुक्ल तृतीया तक
- पूजा में होली की राख के गोले (पिण्ड) और जौ के अंकुर साथ रखे जाते हैं।
- गणगौर से एक दिन पहले, चैत्र शुक्ल द्वितीया को सिंजारा होता है — नवविवाहिता बेटी या बहू के लिए शृंगार का सामान और सुंदर परिधान उपहार में भेजे जाते हैं। कुछ जगह छोटी तीज से पहले भी सिंजारा भेजने की रीत है।
- उदयपुर की गणगौर सवारी का रोचक वर्णन कर्नल टॉड ने किया है; जयपुर की सवारी भी प्रसिद्ध है।
धींगा गवर (धींगा गणगौर)
- उदयपुर में मनाई जाती है; माना जाता है कि यह महाराणा अमरसिंह प्रथम के शासन में शुरू हुई।
- मान्यता ➜ धींगा गवर ईसर की उप-पत्नी थी जो “नाते” के रूप में आई।
- यह उदयपुर के साथ जोधपुर में भी होती है; वहाँ धींगा गवर बेंतमार मेला वैशाख कृष्ण तृतीया की रात लगता है।
जैसलमेर — सिर्फ़ गवर
जैसलमेर की गणगौर में पूजा सिर्फ़ गवर की होती है, ईसर की नहीं। कारण — जैसलमेर और बीकानेर रियासतों में तनाव रहता था और दोनों एक-दूसरे के इलाक़े में लूटपाट करते थे। एक बार गड़ीसर तालाब की ओर निकली गणगौर-सवारी पर बीकानेर वालों ने धावा बोल दिया; जैसलमेर वालों ने भिड़कर गवर को तो बचा लिया, पर ईसर की प्रतिमा बीकानेर वाले छीन ले गए। उसके बाद से जैसलमेर में केवल गवर की ही सवारी निकलती है।
जहाँ राजपरिवार गणगौर नहीं मनाता
| रियासत | कारण |
|---|---|
| बूँदी | जैतसागर झील में महाराव बुधसिंह के अनुज जोधसिंह राजपरिवार के सदस्यों व गणगौर-सवारी समेत डूब गए — हाथी ने नाव उलट दी। कहावत — “हाड़ो ले डूब्यो गणगौर” |
| जोधपुर | गणगौर के दिन ही राव सातलदेव चल बसे |
चैत्र शुक्ल पक्ष के पर्व
| तिथि | पर्व | विवरण |
|---|---|---|
| शुक्ल एकम (प्रतिपदा) | नवसंवत्सर | हिन्दू नववर्ष का आरंभ (विक्रम संवत्); महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा; मान्यता — इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि रची और राम का राज्याभिषेक हुआ |
| शुक्ल एकम से नवमी | बासंतीय नवरात्र | इसे “बड़ा नवरात्र” भी कहते हैं |
| शुक्ल द्वितीया | सिंजारा | गणगौर से एक दिन पहले |
| शुक्ल तृतीया | गणगौर | पिछली शाखा देखें |
10. रैपिड फायर तथ्य
- विक्रम संवत् की शुरुआत ➜ 57 ई.पू.; साल का पहला दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
- शक संवत् (राष्ट्रीय पंचांग) ➜ 78 ई., प्रवर्तक कनिष्क
- हिजरी सन् का आरंभ ➜ 622 ई.; चंद्र वर्ष 354 या 355 दिन का
- चंद्र आधार वाले ➜ विक्रम संवत् और हिजरी; सूर्य आधार वाले ईस्वी व शक
- गुप्त संवत् ➜ चन्द्रगुप्त प्रथम, 319–20 ई.
- वर्धन संवत् ➜ हर्षवर्धन, 606 ई.
- इलाही संवत् ➜ अकबर, 1584 ई. में लागू
- गणगौर ➜ 18 दिन का क्रम, चैत्र कृष्ण एकम से शुक्ल तृतीया तक
- जैसलमेर की गणगौर ➜ पूजा केवल गवर की, ईसर की नहीं
अगले भाग में वैशाख से फाल्गुन तक के त्योहार — तिथि, रीति-रिवाज और उनसे जुड़े राजस्थानी मेले, महीने के क्रम से।
पिछला भाग: राजस्थान की प्रथाएँ व रीति रिवाज: जौहर, सती और स्त्री-प्रथाएँ
अगला भाग: राजस्थान के त्योहार व मेले: हिन्दू मास-वार त्योहार (भाग 2)
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