राजस्थानी साहित्यकार व कृतियाँ: आधुनिक काल — कवि (भाग 1) – Rajasthan Art and Culture Chapter 4

1857 के बाद का राजस्थानी काव्य — सूर्यमल्ल मिश्रण, जागरण काल के कवि और आज़ादी के बाद के कवि, PYQ सहित।

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In this chapter (6 sections)
  1. आधुनिक काल — कवि
  2. सूर्यमल्ल मिश्रण
  3. जागरण काल के अन्य कवि
  4. जागरण काल के विद्वान-कवि
  5. आज़ादी के बाद के कवि
  6. रिवीजन पॉइंटर्स

1857 की क्रांति के बाद राजस्थानी कविता का स्वर बदल गया — उसमें नई चेतना आई और अंग्रेज़ी राज के प्रति आक्रोश खुलकर दिखने लगा। इस भाग में आधुनिक काल की रूपरेखा, सूर्यमल्ल मिश्रण, जागरण काल के अन्य कवि और विद्वान-कवि तथा आज़ादी के बाद के कवि दिए गए हैं। जो तथ्य पिछली परीक्षाओं में पूछे गए हैं, उनके साथ परीक्षा का नाम जोड़ा गया है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थानी साहित्यकार व कृतियाँ, 9 चॉक-बोर्ड चित्र, 24 नक्शे, 1 चार्ट, 25 फ्लैशकार्ड और 15 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. आधुनिक काल — कवि

भारतीय समाज में 1857 की क्रांति के बाद एक नई चेतना जगी और उसके बाद की सारी रचनाएँ आधुनिक काल की मानी जाती हैं। इस जागृति का पहला शंखनाद मारवाड़ के कविराजा बांकीदास और बूँदी के सूर्यमल्ल मीसण ने किया।

चरणसमयख़ास पहचान
जागरण काल1850 से 1947 ई.सूर्यमल्ल मिश्रण और शंकरदान सामौर — 1857 की क्रांति के समय के “युग कवि”
आज़ादी के बाद1947 से 1965 ई.स्वतंत्र भारत की कविता — प्रकृति, लोकजीवन, राष्ट्रीयता
नवलेखन काल1965 से अब तकनए प्रयोग, गीत, मुक्त छंद

अंग्रेज़ी राज पर अपना गुस्सा ओजस्वी स्वर में व्यक्त करने वाले कवि — बांकीदास, सूर्यमल्ल मिश्रण, शंकरदान सामौर, बुद्धजी आसिया और शिवदान कविया।

याद रखें: जागरण काल के दो ऐसे कवि — सूर्यमल्ल मिश्रण (बूँदी) और शंकरदान सामौर (चूरू) — जिन्हें 1857 के संदर्भ में “युग कवि” कहा गया।

2. सूर्यमल्ल मिश्रण

  • उपनाम ➜ राजस्थान भूषण
  • जन्म ➜ 19 अक्टूबर 1815 (वि.सं. 1872), हरणा गाँव, बूँदी
  • पिता ➜ चण्डीदान — बूँदी दरबार में महाराव रामसिंह के राजकवि

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • प्रमुख ग्रंथ ➜ वंश भास्कर, वीर सतसई, बलवद् विलास, राम रंजाट (पहली रचना), छंदोमयूख; अन्य — धातु रूपावली, सती-रासो।
  • आधुनिक राजस्थानी काव्य के नवजागरण के पुरोधा / प्रथम कवि और डिंगल शैली के पहले महान व अंतिम (छेला) कवि माने जाते हैं।
  • उनकी भाषा में हाड़ौती बोली का पुट है।

लिखने की कहानी

  1. महाराव रामसिंह के कहने पर 1840 ई. में आरम्भ
  2. महाराव से अनबन — 1856 में लेखन बंद
  3. दत्तक पुत्र मुरारीदान ने पूरा किया
  • डिंगल में लिखा 8 खण्डों का महाकाव्य, लगभग 2500 पृष्ठ।
  • 5-6 भाषाओं का प्रयोग होने से भाषा जटिल हो गई।
  • बूँदी रियासत (हाड़ा चौहान) का पद्यात्मक इतिहास; अन्य रियासतों, राजस्थान में मराठों की गतिविधियों और कृष्णा कुमारी द्वारा विष पीने की घटना भी दर्ज है।

वीर सतसई

  • कुल 288 दोहे — वीर रस के; डिंगल की अनुपम उपलब्धि।
  • प्रेरणा ➜ 1857 का ग़दर; इसमें वतन पर मिटने वाले रणबाँकुरों को ललकारते दोहे भी हैं।
  • इसी से आम राजस्थानी के मन में राष्ट्रीय चेतना की पहली चिंगारी जगी।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

बलवद् विलास के नायक भिनाय (अजमेर) के शासक बलवंत सिंह हैं।

मुरारिदान

सूर्यमल्ल के दत्तक पुत्र; उन्होंने वंश भास्कर को पूरा किया। उनकी रचनाएँ — डिंगल कोष और वंश समुच्चय।

ट्रिक: पहली रचना राम रंजाट; सबसे बड़ी वंश भास्कर (8 खण्ड); सबसे ओजस्वी वीर सतसई (288 दोहे); बलवंत सिंह का चरित = बलवद् विलास।

ध्यान दें: वंश भास्कर शुरू करने वाला कवि और उसे पूरा करने वाला (मुरारीदान) अलग हैं — याद रखें “दत्तक पुत्र ने पूरा किया”।

3. जागरण काल के अन्य कवि

शंकरदान सामौर

  • आधुनिक कवियों में अंग्रेज़ी हुकूमत की सबसे कड़ी आलोचना इन्हीं की मानी जाती है।
  • जन्म ➜ बोबासर (सुजानगढ़, चूरू)।
  • रचनाएँ ➜ सगती सुजस, भागीरथी महिमा, बखत रो बायरो, देस दर्पण, साकेत सतर्क, गीत अंग्रेजां री नीत रो।
कविपहचानरचनाएँ
रामनाथ कविया—पाबूजी रा सोरठा · द्रोपदी विनय (करूण बहतरी) · करणी री स्तुति · करूणा बावनी
स्वरूपदास—पांडव यशेन्दु चन्द्रिका · रस-रत्नाकर · पाखंड खंडन · वर्णार्थ मंजरी · दृष्टान्त दीपिका · वृतिबोध
राव बखतावरउदयपुर के महाराणा स्वरूपसिंह के दरबारी कविकेहर प्रकाश (श्रेष्ठ रचना) · रसोत्पत्ति · स्वरूप यश प्रकाश · शंभु यश प्रकाश

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: सामौर = अंग्रेज़ों के खिलाफ़ तीखा (मुलक रा मीठा ठग); उमरदान लालस = सामाजिक बुराइयों (शराब, अफ़ीम, तम्बाखू) पर कविताएँ।

4. जागरण काल के विद्वान-कवि

केसरी सिंह बारहठ (1872–1941)

  • जन्म ➜ 21 नवम्बर 1872, देवपुरा गाँव (शाहपुरा रियासत)
  • जाति / भाषा ➜ चारण; डिंगल के कवि
  • कर्मभूमि ➜ कोटा
  • 1903 ई. में लॉर्ड कर्ज़न ने एडवर्ड सप्तम के स्वागत में दिल्ली दरबार रखा; महाराणा फतेहसिंह वहाँ जाने को निकले तो केसरी सिंह ने इस क़दम की निंदा करते हुए डिंगल के 13 सोरठे — “चेतावनी रा चुंगट्या” — उन्हें भेज दिए। [परीक्षा: अनुसंधान अधिकारी 2024, CET 2023, REET 2023 — केसरी सिंह बारहठ ने “चेतावनी रा चुंगट्या” किस शासक को लिखा? ➜ महाराणा फतेहसिंह]
  • सोरठे पढ़ने के बाद महाराणा दिल्ली पहुँचकर भी दरबार के भीतर नहीं गए।
  • उन्होंने अश्वघोष के बुद्धचरित का हिन्दी अनुवाद किया और कवि श्यामलदास की जीवनी लिखी।

सीताराम लालस (माड़साब)

  • जन्म ➜ 29 दिसम्बर 1908, चारण परिवार; नैरवा गाँव (जोधपुर)
  • उपाधि ➜ “राजस्थानी भाषा का पाणिनी”
  • शब्दकोश ➜ राजस्थानी भाषा का शब्दकोश — 4 खण्ड, 9 जिल्दें, 2 लाख से अधिक शब्द

अन्य विद्वान-कवि

नामपहचानरचनाएँ
रामकरण आसोपाजन्म 7 अगस्त 1857, बड़लू (आज का भोपालगढ़, जोधपुर)मारवाड़ी व्याकरण (1896); पहली-दूसरी-तीसरी पोथी (विद्यालय में पढ़ाने की पद्य-पोथियाँ); टेस्सीटोरी के साथ दौरा कर वृहत डिंगल शब्दकोष; गीता पर मारवाड़ी टीका; मारवाड़ का भूगोल; इतिहास निंबाज; मारवाड़ का मूल इतिहास; मारवाड़ का संक्षिप्त इतिहास; पोकरण का इतिहास; राजरूपक
महाराज चतुरसिंहकरजाली के महाराज बाघसिंह के वंशज18 ग्रंथ — भगवत गीता की गंगाजळी टीका, परमार्थ विचार, योगसूत्र की टीका, अलख पचीसी, चतुर चिंतामणि, अनुभव प्रकाश, चतुर प्रकाश, समान बतीसी, सांख्यकारिका टीका
मोड़सिंह महियारिया—453 दोहे जोड़कर उन्होंने सूर्यमल्ल की वीर सतसई पूरी की
हिंगलाजदान कविया—मृगया मगेन्द्र · प्रत्यय पयोधर · साल गिरह शतक · मेहाई महिमा · दुर्गा बहतरी · आखेट अपजस · बाणियो रासो

5. आज़ादी के बाद के कवि

कन्हैयालाल सेठिया

  • जन्म ➜ 11 सितम्बर 1919, सुजानगढ़ (चूरू)
  • पहला संग्रह ➜ वनफूल (1941)
  • सबसे प्रसिद्ध कविता ➜ धरती धोरां री / जलमभोम
  • अग्निवीणा (1942) की देशप्रेम-भरी कविताओं के कारण उन पर राजद्रोह का इल्ज़ाम लगा।
  • पातल और पीथल ➜ कवि-सम्मेलनों में बहुत पसंद की जाने वाली कविता; मायड़ रो हेलो — राजस्थानी को मान्यता दिलाने के लिए पीड़ा-भरा संबोधन; कुण जमीन रो धणी (1945) — सामंतवाद का विरोध।
  • लीलटांस ➜ 1976 में केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार; निग्रंथ — 1988 में मूर्तिदेवी पुरस्कार।
कविपहचानरचनाएँ
मेघराज मुकुल (राजगढ़, चूरू)—पद्य कथाएँ: कोड़मदे, हिरोल, आण री बात, दुरगावती, चंवरी। अन्य: सैनाणी (प्रसिद्ध कविता), उमंग, डाफर, जाग उठ्या अंगारा, राणी पद्मावती, सूरज रै माथै सिंदूर, सैनाणी री जागी जोत, किरत्या, चणक। क्रांतिकारी: धरती रो सिणगार, भूदान
डॉ. मनोहर शर्मा (बिसाऊ, झुंझुनूं)कविता के साथ गद्य भीअरावली की आत्मा · गीत कथा · कूंजा · गोपीगीत · धोरों रो संगीत · फुल पांखड़ी · अंतरजामी · अमरजामी · अमरफल · पंछी · मरवण; निबंध-संग्रह रोहिड़े रा फूल; प्रकृति-चित्रण: रस धारा · गजमोती
गणेशीलाल व्यास उस्ताद (जोधपुर, 1904)क्रांतिकारी; आज़ादी से पहले कई बार जेल; कविताएँ “जनकवि उस्ताद” नाम से छपीं; जागृति, विद्रोह, व्यंग्य की तीखी मारगीत-पुस्तिकाएँ — गरीबों की आवाज़, बेकसों की आवाज़, इन्कलाबी तराने (प्रशासन ने ज़ब्त कीं)

गणेशीलाल व्यास की कविताएँ

  • संबोधन-कविताएँ ➜ जाग रणबंका सिपाही · माथा देणा पड़सी मुलक नै मोट्यारां · परण्या डरे मती।
  • व्यंग्य-कविताएँ ➜ म्है आया अकल बताबा नै · आजादी रो उतारो · नेताबां री निसरमाई · भूल करी जननायक भारी · आ कैडी आजादी।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. आधुनिक काल के तीन चरण — जागरण काल (1850–1947), आज़ादी के बाद (1947–1965) और नवलेखन काल (1965 से अब तक)।
  2. जागृति का पहला शंखनाद बांकीदास और सूर्यमल्ल मीसण ने किया; सूर्यमल्ल मिश्रण और शंकरदान सामौर 1857 के «युग कवि» कहलाए।
  3. सूर्यमल्ल मिश्रण का उपनाम राजस्थान भूषण है; पहली रचना राम रंजाट, सबसे बड़ी वंश भास्कर (8 खण्ड) और सबसे ओजस्वी वीर सतसई (288 दोहे)।
  4. वंश भास्कर शुरू करने वाले सूर्यमल्ल थे, पर उसे दत्तक पुत्र मुरारीदान ने पूरा किया।
  5. अंग्रेज़ी हुकूमत की सबसे कड़ी आलोचना शंकरदान सामौर की मानी जाती है।
  6. केसरी सिंह बारहठ ने 1903 के दिल्ली दरबार के समय महाराणा फतेहसिंह को «चेतावनी रा चुंगट्या» के 13 सोरठे भेजे।
  7. सीताराम लालस «राजस्थानी भाषा का पाणिनी» कहलाए; उनका शब्दकोश 4 खण्ड और 9 जिल्दों का है।
  8. मोड़सिंह महियारिया ने 453 दोहे जोड़कर सूर्यमल्ल की वीर सतसई पूरी की।
  9. कन्हैयालाल सेठिया का पहला संग्रह वनफूल (1941) है; लीलटांस पर उन्हें 1976 में केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।

अगले भाग में गीतकार और नवलेखन के कवि, संबोधन व प्रबंध काव्य, आधुनिक गद्य के अग्रणी और विजयदान देथा।

पिछला भाग: राजस्थानी साहित्यकार व कृतियाँ: मध्यकाल (भाग 2)

अगला भाग: राजस्थानी साहित्यकार व कृतियाँ: आधुनिक काल — कवि (भाग 2) एवं आधुनिक गद्य साहित्य (भाग 1)

इन्हें भी पढ़ें: अन्य साहित्यकार व कृतियाँ · राजस्थानी भाषा व बोलियाँ

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