गहनों के नाम रटने से ज़्यादा काम आता है पहचान का नियम — नाम में «हार», «माला», «कंठ» या «गल» हो तो गहना गले का ही होगा। इस भाग में आभूषणों का इतिहास और जयपुर की पहचान दी गई है, फिर सिर, कान, नाक, दाँत और गले के गहनों के साथ भुजा, कलाई, कमर, पैर, पुरुषों और बच्चों के गहने क्रमवार हैं। जहाँ-जहाँ पिछले वर्षों की परीक्षाओं में प्रश्न आया है, वहाँ परीक्षा का नाम साथ में लिखा गया है।
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1. आभूषणों का इतिहास
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| प्राचीन काल | कालीबंगा व आहड़ सभ्यता | स्त्रियाँ मिट्टी और चमकदार पत्थरों के गहने पहनती थीं |
| शुंग काल | मिट्टी के खिलौने व फलक | हाथों में चूड़ियाँ-कड़े, पैरों में खड़वे, गले में लटकने वाले हार; सोने, चाँदी, मोती व रत्नों के |
| निर्धन स्त्रियाँ | सस्ती धातुएँ | काँसा, पीतल, ताँबा, कौड़ी, सीप और मूँगे के गहने |
मध्यकाल तक गहनों की बनावट में काफ़ी बदलाव आया, पर वे ही प्रकार आज तक चले आ रहे हैं।
2. शरीर-नक्शा और विश्व-प्रसिद्ध शहर
- गहनों-रत्नों का विश्व-प्रसिद्ध शहर ➜ जयपुर
- सुहाग के प्रतीक ➜ रखड़ी, बिछिया, मंगलसूत्र
- पैर में सोना ➜ केवल राजपूत स्त्रियाँ
ट्रिक: पहचान का नियम — नाम में “हार” हो तो गला; “माला” हो तो गला; “कंठ” या “गल” हो तो भी गला।
3. सिर, कान, नाक और दाँत
सबसे ज़्यादा विविधता चेहरे और सिर के गहनों में है — माथे का बोर-रखड़ी, कान के झुमके-कर्णफूल, नाक की नथ और दाँत की कील तक।
4. सिर के आभूषण
| गहना | पहचान |
|---|---|
| शीशफूल (सिरफूल / सेरज) | सोने की बारीक साँकल से ललाट पर लटकाया जाता है |
| गोफण | बालों की वेणी (छोटी लटों) में गूँथा जाता है |
| बोर / बोरला | मोटे बेर जैसा गोल सोने-चाँदी का गहना; आगे छोटे दाने उभरे, पीछे छोटा हुक जिसमें धागा बाँधकर बालों के बीच ललाट पर लटकाते हैं |
| रखड़ी | सुहाग की निशानी; आकार बोर जैसा गोल पर उस पर क़ीमती पत्थरों के नग जड़े रहते हैं; पीछे का सोने का हुक सरी / बगड़ी कहलाता है |
… शेष 14 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: रखड़ी = सुहाग का प्रतीक; बोर = बेर के आकार का; पतरी = रखड़ी के नीचे का चौड़ा पत्तर। तीनों माथे पर, क्रम से।
5. कान के आभूषण
| गहना | बनावट / पहचान |
|---|---|
| कर्णफूल | कान के निचले भाग का फूल-आकार का गहना, बीच में नगीने; मेवाड़ में गुट्टी |
| पीपल पत्र | सोने या चाँदी का अँगूठीनुमा छल्ला, जो कान के ऊपर के भाग में छेद कराकर पहना जाता है; दूसरे नाम पीपलपान / पीपल पन्ना |
| झुमका / झुमर | कर्णफूल जैसा, बीच में गोल बूँदें |
| फूल झुमका | झुमके का ही एक प्रकार |
… शेष 15 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ध्यान दें: परीक्षा-जाल: “लूंग” कान और नाक दोनों में आता है। दोनों विकल्प मिलें तो कान चुनें — वहाँ पुरुष भी लूंग पहनते हैं।
6. नाक और दाँत के आभूषण
| गहना | पहचान |
|---|---|
| नथ | सोने के तार का मोटा गोल छल्ला; इसमें मोर आदि की नक़्क़ाशी |
| बेसर / बेसरि | सोने के तार का; नाचता हुआ मोर चिह्नित |
| काँटा | सोने-चाँदी के तार का, छोटी घुंडी लगी |
| भंवरा / फीणी | मोटा लूंग; बिश्नोई महिलाएँ पहनती हैं |
… शेष 4 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
दाँत के आभूषण
- चूंप ➜ दाँतों के बीच छेद करवाकर सोने की कील जड़वाना। [परीक्षा: VDO 2021 — दाँतों के बीच सोने की कील लगाने को क्या कहते हैं? ➜ चूंप]
- रखन ➜ सोने या चाँदी की पतली खोल बनवाकर दाँत पर चढ़ाई जाती है।
- अन्य ➜ धांस, मेख, मासा।
7. गले के आभूषण
गले के गहनों की सूची सबसे लम्बी है। नाम से ही पहचान हो जाती है — हार, माला, कंठ/गल शब्द वाले सब गले के हैं।
8. गले के प्रमुख गहने
| गहना | बनावट / पहचान |
|---|---|
| तिमणिया | सोने की पतली पट्टी में मोती टाँककर बनाया जाता है |
| थमण्यो | तीन लड़ों वाला सोने का गहना; गूँथी हुई चीलों की सघन लड़ियों के बीच चार अंगुल की मोगरेदार सुनहरी पट्टी जोड़ी जाती है |
| आड | जोधा अकबर फ़िल्म से मशहूर हुआ गहना; ननिहाल पक्ष की ओर से दुल्हन को पहनाया जाता है |
| झालरा | सोने/चाँदी की लड़ियों का हार, घुँघरियाँ लगी |
9. हार और मालाएँ
याद रखें: जिस गहने के नाम में हार जुड़ा हो वह गले का है — चन्द्रहार, कण्ठाहार, रानीहार, हंसहार।
| गहना | पहचान |
|---|---|
| चन्द्रहार | 5–6 लड़ियाँ; शहरी महिलाओं में अधिक लोकप्रिय |
| कंठमाला | माला-जैसा गले का गहना |
| मुक्तमाला | प्राचीन काल में अमीर महिलाओं का; मोतियों की माला |
| माणिक्य माला | माणिक्य रत्न जड़े हों तो |
10. कंठ-गल वाले और विशेष गहने
| गहना | पहचान |
|---|---|
| वैन / जंजीर | सोने की साँकल; पुरुष भी पहनते हैं |
| मंगलसूत्र | आजकल सुहाग का प्रतीक; काले मोतियों की लड़ी का हारनुमा रूप |
| हमेल | सोने का हार-जैसा गहना; शेखावाटी में बहुत लोकप्रिय; स्थानीय भाषा में म्हेल |
| मादलिया / मांदल्या | ताबीज या ढोलक के आकार का छोटा गहना; डोरी में पिरोकर गले में |
11. भुजा के आभूषण
| गहना | पहचान |
|---|---|
| बाजूबंध / उतरणो | हाथ की बाजू में बाँधा जाने वाला सोने की बेल्ट जैसा गहना — “बाजूबन्द” |
| भुजबंध | बाजूबंद का छोटा रूप; उससे पतला, हल्का पट्टीनुमा |
| टड्डा / अणत | ताँबे की छड़ को चूड़े की तरह मोड़कर उस पर सोने या चाँदी की परत चढ़ाई जाती है; स्त्रियाँ इसे बाँह पर पहनती हैं; भीनमाल क्षेत्र में नाम अडकाणियों |
12. कलाई के आभूषण
चूड़ियों के प्रकार — किस चीज़ की
| गहना | किससे बना |
|---|---|
| चूड़ी / चूड़ियाँ | काँच, सोना या चाँदी की गोल छोटी |
| चूड़ | चार अंगुल चौड़ा चाँदी का |
| चुड़ा | लाख की मोटी चूड़ियों का समूह |
| मोकड़ी | लाख से बनी चूड़ियाँ |
अन्य कलाई के गहने
| गहना | पहचान |
|---|---|
| कड़ा | टड्डा जैसा, चूड़ी से मोटा व चौड़ा |
| पाटला | चूड़ी से चौड़ा कलाई का गहना; विधवा महिलाओं का चाँदी का पाटला-जैसा गहना बाहिवो |
| कंकण / कांन | सोने-चाँदी का कलाई का आभूषण |
| काकणी | चाँदी का कलाई का गहना |
13. हाथ की उँगलियों के आभूषण
| गहना | पहचान |
|---|---|
| बीटी / अँगूठी / मूँदड़ी | उँगली में पहना जाने वाला सबसे प्रचलित गहना |
| मुद्रिका | नगीना जड़ी बिंटी (अँगूठी) |
| दामणा / दामणी | दो उँगलियों में एक साथ डाली जाने वाली बिंटीनुमा अँगूठी |
14. कमर के आभूषण
| गहना | पहचान |
|---|---|
| कणकती / कंदोरा / करधनी | कमर में पहनी जाने वाली सोने-चाँदी की झूलती शृंखलाओं की पट्टी |
| सटका | सोने-चाँदी के छल्लों का; लहँगे के नेफे में अटकाकर लटकता है; महिलाएँ चाबियाँ बाँधती हैं |
| तकड़ी / तागड़ी | चाँदी की कमर-पेटी, घूँघरू लगे |
15. पैर के आभूषण
| गहना | बनावट / पहचान |
|---|---|
| कड़ा / कड़ी | चाँदी का ठोस गोल गहना; गाँव की बुज़ुर्ग महिलाएँ पहनती हैं; पतला हो तो कड़ी |
| तोड़ा / लंगर | कड़े के नीचे; चाँदी के मोटे तारों से, ऊपर संकरा नीचे चौड़ा |
| पायल / पायजेब / शकुंतला | चाँदी की छोटी जंजीर-सी, नीचे घुघरू; रमझोळ भी यही |
| रिमझोल / रोळ | पायजेब का प्रकार; मारवाड़ में सबसे प्रचलित |
16. पैर की उँगलियों के गहने
| गहना | पहचान |
|---|---|
| बिछिया | अँगूठे के पास वाली उँगली में; सुहाग का प्रतीक; बिछुड़ी / नखालियाँ / मच्छी भी |
| गोळया | चाँदी की चौड़ी, सादी अँगूठियाँ |
| पगपान | हथफूल जैसा; पैर के अँगूठे व उँगलियों के छल्ले चैन से जुड़कर पायल से हुक द्वारा जुड़े; विवाह पर पहना जाता है |
17. पुरुषों के आभूषण
| गहना | कहाँ / कैसा |
|---|---|
| मुरकी / मुरकिया | सोने या चाँदी की गोलाकार ठोस कुड़क; कान में |
| लोंग / लूंग, झाले, छैलकड़ी, बीरबली, मादीकड़कम | कान के गहने (बीरबली ठोस सोने की) |
| मोती चौकड़ा | मोतियों का स्वर्णाभूषण; कान में |
| बाजूबंद, नरमुख | हाथ के गहने |
18. बच्चों के आभूषण
| गहना | पहचान |
|---|---|
| हंसली | मोटे धातु-तार को जोड़कर बना गोल गहना, जो नन्हे बच्चे की हँसली (कॉलर-बोन) को सरकने से रोकने के लिए पहनाते हैं |
| कड़ूल्या | हाथ और पैर में पहनने के कड़े |
| झांझरिया / पैंजणी | पाँव की पतली साँकल जिस पर घुघरियाँ टँकी होती हैं |
- एक और गहना चौकोर/तिकोनी पत्तियों से बनता है और छोटे बच्चों के गले में पहनाया जाता है।
- बच्चों के कानों में मोती या लूंग भी पहनाई जाती है।
19. रैपिड फायर तथ्य
- गहनों-रत्नों का विश्व-प्रसिद्ध शहर ➜ जयपुर
- सुहाग के प्रतीक ➜ रखड़ी, बिछिया, मंगलसूत्र
- पैर में सोना ➜ केवल राजपूत स्त्रियाँ पहनती थीं
- दाँतों के बीच सोने की कील ➜ चूंप (VDO 2021)
- बोर ➜ बेर जैसा गोल; रखड़ी ➜ वैसा ही गोल, पर क़ीमती नग जड़े
- लूंग ➜ कान और नाक दोनों में आता है; दोनों विकल्प हों तो कान चुनें
- भंवरा / फीणी ➜ मोटा लूंग, बिश्नोई महिलाएँ पहनती हैं
- हमेल ➜ शेखावाटी में बहुत लोकप्रिय गले का गहना
- रिमझोल / रोळ ➜ पायजेब का प्रकार, मारवाड़ में सबसे प्रचलित
अगले भाग में पगड़ी का स्थान, पाग-पगड़ी-साफे का अन्तर, रियासतों की शाही पगड़ियाँ और पुरुषों के वस्त्र, फिर स्त्रियों की ओढ़नी, साड़ियाँ और आदिवासी पहनावा।
पिछला भाग: राजस्थान की हस्तकलाएँ: वस्त्र-कलाएँ एवं अन्य हस्तकलाएँ
अगला भाग: राजस्थान की वेशभूषा व पहनावा: सिर के वस्त्र एवं स्त्रियों के वस्त्र
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