राजस्थान के दुर्ग: जोधपुर संभाग (मारवाड़) के दुर्ग (भाग 2) एवं थार के मरु-दुर्ग – Rajasthan Art and Culture Chapter 25

जालौर, सिरोही, जैसलमेर, बीकानेर, हनुमानगढ़ और चूरू के प्रमुख दुर्ग, उनके निर्माता और साके, PYQ सहित।

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In this chapter (9 sections)
  1. सोजत
  2. जालौर — सुवर्णगिरि
  3. सिरोही — अचलगढ़ व अन्य
  4. जैसलमेर — सोनार किला
  5. पोकरण, मोहनगढ़, खाभा
  6. जूनागढ़ — बीकानेर
  7. भटनेर — हनुमानगढ़
  8. चूरू के दुर्ग
  9. रैपिड फायर तथ्य

पश्चिमी राजस्थान के किले सिर्फ़ पत्थर की दीवारें नहीं, युद्ध, साकों और कहावतों की पूरी कहानी हैं — इसीलिए निर्माता, वर्ष और उपनाम इनसे खूब पूछे जाते हैं। इस भाग में सोजत, जालौर का सुवर्णगिरि, सिरोही का अचलगढ़, जैसलमेर का सोनार किला, पोकरण-मोहनगढ़-खाभा, बीकानेर का जूनागढ़, भटनेर और चूरू के दुर्ग क्रमवार दिए गए हैं। जहाँ-जहाँ पिछली परीक्षाओं में प्रश्न आया है, वहाँ परीक्षा का नाम तथ्य के साथ लिखा गया है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के दुर्ग, 8 चॉक-बोर्ड चित्र, 23 नक्शे, 24 फ्लैशकार्ड और 15 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. सोजत

  • मारवाड़-मेवाड़ के बीच नानी सिरड़ी पहाड़ी पर गिरि दुर्ग; पास से सुकड़ी नदी बहती है।
  • राव जोधा के बेटे निम्बा ने 1460 में बनवाया; जोधपुर री ख्यात (आईदान खिड़िया) — फिर से मालदेव ने बनवाया, मौजूदा रूप उन्हीं की देन।
  • अकबर ने इसे चन्द्रसेन से छीनकर उनके भाई राम को दिया; राम ने पास में रामेलाव तालाब बनवाया।

2. जालौर — सुवर्णगिरि

  • दशरथ शर्मा ➜ प्रतिहार नागभट्ट प्रथम ने बनवाया; प्रतिहारों के बाद परमार आए। ओझा परमारों को निर्माता मानते हैं; साक्ष्य बताते हैं कि 10वीं सदी में धारावर्ष परमार ने पहले से खड़े दुर्ग की मरम्मत कराई।
  • पुराना नाम जाबालिपुर / जालहूर — जाल के पेड़ ज़्यादा होने से।
  • सुवर्णगिरि (कनकाचल) पहाड़ी पर, सुकड़ी नदी के किनारे। पहाड़ी जालंधरनाथ की तपोभूमि — इसलिए “जालंधर दुर्ग” भी।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

भीतर

  • जल ➜ झालर बावड़ी, सोहन बावड़ी, जाबालि कुंड।
  • राजा मानसिंह के महल-झरोखे, दहियों की पोल, दो-मंज़िला रानी महल, चामुंडा और जोगमाया मंदिर, स्वर्णगिरि जैन मंदिर।
  • संत मलिकशाह की दरगाह ➜ मलिकशाह (बगदाद का सुल्तान) को आदर देने के लिए अलाउद्दीन के काल में बनी।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

चौहान और 1311 का साका

  • नाडौल के चौहान युवराज कीर्तिपाल ने परमारों को हटाया और जालौर में चौहानों की शाखा शुरू की; सूँधा पर्वत लेख (वि.सं. 1319) में उसे “राजेश्वर” कहा। उसके वंशज सुवर्णगिरि (सोनगिरि) से “सोनगरा चौहान” कहलाए। समरसिंह ने कनकाचल को चारों ओर ऊँची प्राचीर से घेरा (सूँधा लेख)।

साके तक की कहानी

  1. 1298 — सोमनाथ जाती अलाउद्दीन की सेना (उलूग ख़ाँ, नुसरत ख़ाँ) को रास्ता नहीं दिया; लौटते समय जेता-देवड़ा ने लूटी मूर्तियाँ छीन लीं
  2. 1305 — ऐन-उल-मुल्क मुल्तानी की सेना आई; समझौता हुआ, कान्हड़दे ने बेटे वीरमदेव को अलाउद्दीन के दरबार में भेजा
  3. शहज़ादी फ़िरोज़ा वीरमदेव से ब्याह चाहती थी; दबाव देख वीरमदेव चुपचाप जालौर लौट आया

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • कान्हड़दे का शासन 1305–1311; युद्ध का वर्णन पद्मनाभ की कान्हड़दे प्रबंध और वीरमदेव सोनगरा री बातां में।
  • उद्योतन सूरि ने कुवलयमाला प्रतिहार वत्सराज के समय इसी दुर्ग में लिखी।
  • जोधपुर की गद्दी के लिए मानसिंह-भीमसिंह संघर्ष में मानसिंह ने यहीं शरण ली। मारवाड़ के मालदेव ने भी इसे जीता।

याद रखें: कहावत “राईयों का भाव राते ही बीता” इसी किले से चली।

जालौर के अन्य दुर्गबात
भाद्राजूण16वीं सदी; घोड़े के खुर जैसी घाटी में, केवल पूर्व से रास्ता — कुदरती सुरक्षा
कोटकास्तानाथ साधुओं की तपोभूमि — “नाथों का दुर्ग“

3. सिरोही — अचलगढ़ व अन्य

  • अचलगढ़ (आबू दुर्ग) ➜ मूल किला परमारों ने लगभग 900 ई. में बनवाया; उसके खंडहरों पर कुम्भा ने 1452 में नया बनाया — मक़सद मेवाड़ को गुजरात के हमलों से बचाना।
  • आबू पर्वत के पुराने नाम अर्बुदांचल / अर्बुदगिरि; यहीं अर्बुदा माता का मंदिर। टॉड ने आबू को “हिन्दू ओलम्पस” (देव-पर्वत) कहा।
  • आबू के अधिष्ठाता देव अचलेश्वर महादेव — मंदिर में शिवलिंग नहीं, एक गड्ढा है जिसे ब्रह्मखड्ड कहते हैं।
  • पास में लगभग 900 फ़ीट लंबा, 240 फ़ीट चौड़ा मंदाकिनी कुंड; किनारे पर महाराव मानसिंह (सिरोही) की छतरी (कल्ला परमार से लड़ते मारे गए); पूर्व में परमार वंश के आदिपुरुष आदि परमार की मूर्ति — भैंसे-रूपी राक्षसों को तीर से मारते हुए।
दुर्गस्थानबात
मचान दुर्गसिरोहीकुम्भा का बनवाया
बसंतगढ़ (बसंती दुर्ग)पिंडवाड़ा (सिरोही)परमारों का, 7वीं सदी; कुम्भा ने 1451 में फिर बनवाया — गुजरात के हमलावरों पर नज़र रखने को

4. जैसलमेर — सोनार किला

  • नींव ➜ 12 जुलाई 1155, रावल जैसल
  • पूरा किया ➜ शालिवाहन द्वितीय
  • पहाड़ी ➜ त्रिकूट
  • जैसल थोड़ा ही बनवा पाए (एक बड़ा द्वार और कुछ भवन — दशरथ शर्मा) कि मृत्यु हो गई; बेटे शालिवाहन द्वितीय ने अधिकांश बनवाया। भाटियों की राजधानी लोद्रवा से यहाँ आई।
  • “सोनार/स्वर्णगिरि” ➜ सूर्योदय-सूर्यास्त में पीले पत्थर सोने-से चमकते हैं।
  • “त्रिकूटगढ़” ➜ तिकोनी (त्रिकूट) पहाड़ी पर।
  • रेत के रंग के गहरे पीले स्थानीय पत्थर बिना चूने-सीमेंट के जोड़े गए — बनने में लगभग 7 वर्ष।
  • दोहरा परकोटा ➜ कमरकोट; चारों ओर 99 बुर्जें।

महल

महलनिर्माता
रंगमहलमहारावल मूलराज द्वितीय
मोतीमहलमहारावल मूलराज द्वितीय
गजविलासमहारावल गजसिंह, 1884

मंदिर व ग्रंथ भंडार

  • लक्ष्मीनाथ मंदिर ➜ महारावल वैरिसिंह के समय; यहाँ के शासक लक्ष्मीनारायण को ही असली राजा मानकर खुद को उनका दीवान कहते थे।
  • रत्नेश्वर महादेव और सूर्य मंदिर ➜ वैरिसिंह; खुशाल राज राजेश्वरी — खुशालसिंह; टीकमराय — जगतसिंह।
  • स्वांगिया देवी ➜ भाटियों की कुलदेवी।

अढ़ाई साके

साकाहमलावरशासक / नेतृत्वजौहर
पहला — 1311अलाउद्दीन ख़िलजीघेरे में रावल जैतसिंह की मृत्यु, फिर मूलराज प्रथम; केसरिया मूलराज व भाई रतनसीहुआ
दूसरा (वर्ष पर मतभेद)फ़िरोज़शाह तुग़लक (दिल्ली सल्तनत)रावल दूदा व भाई त्रिलोकसीहुआ (सोढ़ी रानी)
अर्द्ध साका — 1550कंधार का अमीर अलीरावल लूणकरण — वीरगति, पर भाटी जीतेनहीं हुआ

आधे साके की कहानी — गद्दी से हटा कंधार का अमीर अली लूणकरण की शरण में आया, फिर धोखे से अपने सैनिक औरतों के भेष में किले में घुसाने लगा। भेद खुला, घमासान हुआ; लूणकरण मारे गए पर जीत भाटियों की हुई — इसलिए केसरिया तो हुआ, जौहर नहीं।

  • अबुल फ़ज़ल ➜ ऐसा दुर्ग जहाँ पहुँचने को पत्थर की टाँगें चाहिए।
  • दूर से — बालू के सागर में ठहरे (लंगर डाले) जहाज़ जैसा।

याद रखें: “घोड़ा कीजे काठ का, पग कीजे पाषाण। बख़्तर कीजे लोहे का, तब पहुँचे जैसाण॥“

5. पोकरण, मोहनगढ़, खाभा

दुर्गबात
पोकरण (बालागढ़)जोधपुर के राव मालदेव ने 1550 में पुराने किले के खंडहरों पर बनवाया; राव चन्द्रसेन ने इसे उस समय के जैसलमेर के भाटियों के पास उस ज़माने के 1 लाख सिक्कों में गिरवी रखा
मोहनगढ़राज्य का सबसे नया (नवीनतम) किला; महारावल जवाहरसिंह का
खाभा फ़ोर्टजैसलमेर

6. जूनागढ़ — बीकानेर

  • निर्माता ➜ महाराजा रायसिंह
  • निर्माण ➜ 30 जनवरी 1589 – 17 जनवरी 1594
  • देखरेख ➜ मंत्री कर्मचंद बच्छावत
  • राव बीका ने 1485 (वि.सं. 1542) में करणी माता के आशीर्वाद से पुराने गढ़ की नींव रखी — “बीकाजी की टेकरी“; उसी जगह रायसिंह ने नया गढ़ बनवाया। दयालदास की ख्यात — नई नींव पुराने गढ़ की जगह भरी गई, इसलिए नाम जूनागढ़। [परीक्षा: राज. पुलिस 2020 — जूनागढ़ (बीकानेर) किस शासक ने बनवाया? ➜ रायसिंह]
  • “रातीघाटी का किला” — राती घाटी नाम की चट्टान पर।
  • मुगल + राजपूत शैली; चारों ओर गहरी खाई। चौकोर किला; महल फ़तेहपुर सीकरी और लाल किले की याद दिलाते हैं — हिन्दू-मुस्लिम कला का समन्वय।
  • द्वार ➜ करणपोल (पहला), चाँदपोल, फिर भीतरी दौलतपोल, फतेहपोल, रतनपोल, सूरजपोल, ध्रुवपोल, त्रिपोलिया।
महलबात
अनूप महलसोने की कलम से चित्रांकन (सूरतसिंह); यहाँ बीकानेर के राजाओं का राजतिलक
कर्ण महलगजसिंह (कर्णसिंह का दरबार हॉल भी दर्शनीय)
गज मंदिर, फूल महलगजसिंह; फूल महल में काँच की बेहतरीन कारीगरी
छत्र महलडूँगरसिंह; लकड़ी की छत पर कृष्णलीला के चित्र

याद रखें: परीक्षा प्रश्न — जूनागढ़ किसने बनवाया? — रायसिंह (कई बार पूछा गया)।

बीकानेर ज़िले का दूसरा गढ़ — बीकमपुर गढ़ (बीकमपुर)।

7. भटनेर — हनुमानगढ़

  • निर्माता ➜ भाटी राजा भूपत
  • वर्ष ➜ 295 ई. (तीसरी सदी)
  • शिल्पी ➜ कैकेया
  • राज्य का सबसे प्राचीन किला (दूसरा चित्तौड़गढ़)।
  • परकोटा ईंटों का — मिट्टी से बना दुर्ग।
  • मध्य एशिया से हमले इसी रास्ते आते थे — इसलिए सबसे ज़्यादा विदेशी आक्रमण झेले; “उत्तरी सीमा का प्रहरी“, उत्तरी प्रवेश द्वार का रक्षक; भाटियों के शौर्य का साक्षी।
काल / क्रमघटनाविवरण
1001महमूद ग़ज़नवीअधिकार
बलबन का कालशेर ख़ाँबलबन का भतीजा, दुर्गाध्यक्ष; मंगोलों को यहीं से रोका; 1269 में यहीं मृत्यु, क़ब्र किले में
1398तैमूरशासक दूलचंद भाटी; हिन्दू औरतों के साथ मुस्लिम औरतों ने भी जौहर; भारत का सबसे बड़ा क़त्लेआम
1527राव जैतसीपहली बार राठौड़ अधिकार
  • तैमूर (तुज़ुक-ए-तैमूरी) — इतना मज़बूत और सुरक्षित किला पूरे हिंदुस्तान में कहीं नहीं देखा।
  • भाटियों और जोहियों के बीच इसके लिए लंबी खींचतान चली।
  • बीकानेर के दलपतसिंह की मृत्यु की ख़बर आने पर उनकी 6 रानियाँ यहाँ सती हुईं — एक द्वार पर दलपत के साथ छह स्त्रियों की आकृतियाँ।

8. चूरू के दुर्ग

  • ठाकुर कुशालसिंह ने 1739 में बनवाया।
  • भीतर गोपीनाथ मंदिर (शिवसिंह का) और मेहता मेघराज की देवली।
  • अगस्त 1814 ➜ बीकानेर के सूरतसिंह (सेनापति अमरचंद सुराणा) ने ठाकुर शिवसिंह पर हमला किया; गोला-बारूद ख़त्म होने पर चाँदी गलाकर गोले बनाए और दागे — “चाँदी के गोले बरसाने वाला किला“।

9. रैपिड फायर तथ्य

  • जैसलमेर किले की नींव ➜ 12 जुलाई 1155, रावल जैसल ने रखी
  • जैसलमेर की पहाड़ी ➜ त्रिकूट; किले के चारों ओर 99 बुर्जें
  • जैसलमेर के साके ➜ अढ़ाई साके, 1550 वाला अर्द्ध साका (जौहर नहीं हुआ)
  • अचलगढ़ का नया रूप ➜ कुम्भा ने 1452 में खंडहरों पर बनवाया
  • जूनागढ़ (बीकानेर) के निर्माता ➜ महाराजा रायसिंह, 1589 से 1594 के बीच
  • राज्य का सबसे प्राचीन किला ➜ भटनेर (हनुमानगढ़), 295 ई.
  • राज्य का सबसे नया किला ➜ मोहनगढ़ (जैसलमेर)
  • चाँदी के गोले बरसाने वाला किला ➜ चूरू, ठाकुर कुशालसिंह ने 1739 में बनवाया

अगले भाग में महल स्थापत्य का परिचय, महलों का विकास, राजतिलक के स्थान और जयपुर-आमेर (ढूंढाड़) के कछवाहा शासकों के महल।

पिछला भाग: राजस्थान के दुर्ग: अजमेर संभाग के दुर्ग एवं जोधपुर संभाग (मारवाड़) के दुर्ग (भाग 1)

अगला भाग: राजस्थान के महल: जयपुर-आमेर (ढूंढाड़) एवं मारवाड़ व पश्चिमी राजस्थान

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पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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