राजस्थान के लोकदेवता: साधक, रोग-निवारक, रक्षक एवं विद्रोही व स्थानीय देवता – Rajasthan Art and Culture Chapter 43

मल्लीनाथ से भौमिया जी तक साधक-रक्षक देवता, शेखावाटी के विद्रोही, स्थानीय देवता और पूरे अध्याय का सारांश।

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In this chapter (19 sections)
  1. साधक, रोग-निवारक, रक्षक
  2. मल्लीनाथ जी
  3. तल्लीनाथ जी
  4. हरिरामजी
  5. केसरिया कुँवर जी
  6. झरड़ाजी (रूपनाथ)
  7. भौमिया जी
  8. विद्रोही व स्थानीय देवता
  9. डूँगरजी-जवाहरजी
  10. बलजी-भूरजी
  11. मामादेव
  12. इलोजी
  13. आलमजी
  14. खेतलाजी / क्षेत्रपाल
  15. अन्य स्थानीय देवता
  16. लोकदेवता: एक सारांश
  17. वाहन व पहचान-वस्तुएँ
  18. कालक्रम व स्थान-मानचित्र
  19. रैपिड फायर तथ्य

लोकदेवता केवल योद्धा नहीं होते — कोई साँप का ज़हर उतारता है, कोई ओरण के पेड़ बचाता है, कोई खेत की रखवाली करता है, तो कोई अंग्रेज़ों से टकराता है। इस भाग में साधक, रोग-निवारक व रक्षक देवताओं के बाद शेखावाटी के विद्रोही और क्षेत्र-विशेष के देवता आते हैं। अंत में सभी लोकदेवताओं का सारांश, वाहन व पहचान-वस्तुओं की सूची और कालक्रम एक साथ रखा गया है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के लोकदेवता, 9 चॉक-बोर्ड चित्र, 24 नक्शे, 25 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. साधक, रोग-निवारक, रक्षक

लोकदेवताकामस्थान
मल्लीनाथकुण्डा पंथ, योद्धा-संततिलवाड़ा (बालोतरा)
तल्लीनाथओरण के देवता, प्रकृति-प्रेमीपाँचोटा (जालौर)
हरिरामजीसर्पदंश का मंत्र-उपचारझोरड़ा (नागौर)

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

2. मल्लीनाथ जी

  • जन्म ➜ महेवा (बाड़मेर क्षेत्र) — 1358 ई.
  • पिता ➜ राव सलखा (1357–1374 ई. तक महेवा के शासक)
  • दादा ➜ राव तीड़ा (शासनकाल 1344–1357)

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • पिता की मृत्यु के बाद चाचा कान्हड़दे के यहाँ महेवा का प्रबंध देखते थे; कान्हड़दे की मृत्यु पर 1374 ई. में महेवा के स्वामी बने।
  • 1378 ई. में मालवा सुल्तान निज़ामुद्दीन और फ़िरोज़शाह तुग़लक की संयुक्त सेना को हराया — मुसलमानों के 13 दलों की विशाल सेना परास्त करने पर कहावत चली: “तेरह तुंगा भांगिया माले सलखाणी”।
  • ख्यातों में इनका नाम “माला” लिखा गया है।
  • रानी रूपादे के कहने पर उन्होंने उगमसी भाटी को गुरु बनाया।

… शेष 4 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

तिलवाड़ा का मंदिर और मेला

  • तिलवाड़ा (बालोतरा) में लूणी तट पर मुख्य मंदिर है, जहाँ मल्लीनाथ की चरण-पादुकाएँ पूजित हैं।
  • चैत्र कृष्ण एकादशी से शुक्ल एकादशी तक यहाँ मेला चलता है, और साथ ही मल्लीनाथ पशु मेला — राजस्थान का सबसे पुराना पशु मेला।
  • रानी रूपादे का मंदिर मालाजाल गाँव (तिलवाड़ा) में है।

कुण्डा पंथ

यह वाममार्गी पंथ है, साधना की अनोखी रीत वाला। इसमें कुण्डा पंथी साधु का कर्तव्य है कि वह किसी गृहस्थ को दीक्षा दे; ऐसा होने पर ही मरणोपरांत उस गृहस्थ की आत्मा को चैन मिलता है, वरना वह भटकती रहती है।

3. तल्लीनाथ जी

  • उपनाम ➜ जालौर के लोकदेवता · प्रकृति-प्रेमी लोकदेवता
  • काल ➜ 1544 से 1635 ई.
  • जन्म ➜ शेरगढ़ (जोधपुर) — शेरगढ़ ठिकाने के शासक रहे
  • पंचमुखी पहाड़ के आसपास के लोग इन्हें ओरण मानते हैं; यहाँ कोई पेड़-पौधे नहीं काटता।
  • पाँचोटा में आज भी किसी इनसान या पशु की बीमारी अथवा ज़हरीले कीट के डंक पर तल्लीनाथ के नाम का डोरा बाँधा जाता है।
  • ओरण-देवता के रूप में विख्यात तल्लीनाथ स्वभाव से प्रकृति-प्रेमी और युद्ध-कौशल में माहिर थे।

4. हरिरामजी

  • जन्म ➜ 1602 ई. (वि.सं. 1659)
  • पिता-माता ➜ रामनारायण और चन्दणी देवी
  • गुरु ➜ भूरा
  • वे 84 तरह के नियमों का पालन करते थे।
  • मंदिर में मूर्ति नहीं होती — साँप की बाम्बी और बाबा के चरण-चिह्न प्रतीक रूप में पूजे जाते हैं।
  • साँप के डसे व्यक्ति का उपचार थान पर मंत्रों से होता है।

ध्यान दें: मूर्ति के बिना पूजा — हरिरामजी (बाम्बी, चरण-चिह्न)। हड़बूजी (छकड़ा गाड़ी), मामादेव (काष्ठ-तोरण), देवनारायण (ईंट) भी मूर्ति के अलावा वस्तु से पूजे जाते हैं।

5. केसरिया कुँवर जी

  • ये लोकदेवता गोगाजी के पुत्र थे और जीवनकाल में सर्पदंश का इलाज करते थे।
  • थान खेजड़ी के तले होता है और उस पर श्वेत ध्वजा फहराती है।
  • प्रतीक चिह्न ➜ सर्प।

6. झरड़ाजी (रूपनाथ)

  • जन्म-स्थान ➜ कोलूमण्ड (फलौदी)
  • जन्म का नाम ➜ झरड़ो जी
  • पिता ➜ पाबूजी के बड़े भाई बुढो जी राठौड़
  • बारह साल की उम्र में उन्होंने जींदराव खींची का वध कर पिता बुढो जी और चाचा पाबूजी की मौत का हिसाब चुकाया।
  • हिमाचल प्रदेश में इनकी पूजा बालकनाथ के नाम से होती है।

7. भौमिया जी

  • इन्हें भूमि का रखवाला देव समझा जाता है।
  • किसान प्रायः अपने खेत-खलिहान में ही इनकी पूजा करते हैं।
मंदिरस्थान
नाहरसिंह भौमियाजयपुर
सूरजमल जी भौमियादौसा दुर्ग के समीप

8. विद्रोही व स्थानीय देवता

लोकदेवतापहचान
डूँगरजी-जवाहरजीकाका-भतीजा; शेखावाटी के “धावड़िये”; अंग्रेज़ छावनियाँ लूटीं
बलजी-भूरजी“शेखावाटी के रॉबिनहुड” — सगे भाई
मामादेवबरसात के देवता; काष्ठ का तोरण

9. डूँगरजी-जवाहरजी

  • उपनाम ➜ सीकर अंचल के जाने-माने लोकदेवता · लोक में डाकू रूप में भी प्रचलित · धावड़िये
  • वंश-निवास ➜ कछवाह राजपूत, बठोठ-पाटोदा (सीकर)
  • रिश्ता ➜ आपस में चाचा-भतीजा — डूँगरजी चाचा, जवाहरजी भतीजे
  • शेखावाटी ब्रिगेड में डूँगरजी रिसालेदार थे। उनकी अगुवाई में कुछ सैनिक बग़ावत कर बैठे; फिर नौकरी छोड़कर वे आज़ादी के नाम पर लोगों से धन माँगने लगे और इनकार करने वालों के यहाँ डाका डालने लगे।
  • साथियों के साथ रामगढ़ (सीकर) के सेठों के काफ़िले लूटकर काफ़ी धन गरीबों में बाँट दिया; कई बार अंग्रेज़ छावनियाँ भी लूटीं।
काल / क्रमघटनाविवरण
1846 ई.डूँगरजी गिरफ़्तारसाले भैरूसिंह ने भोज पर बुलाकर ख़ूब शराब पिलाई और धोखे से पकड़वा दिया; अंग्रेज़ों ने आगरा दुर्ग में कैद किया।
31 दिसम्बर 1846जवाहरजी ने छुड़वायालोटिया जाट (लोठराम) और करणा मीणा की सहायता से।
18 जून 1847नसीराबाद छावनी पर हमला52 हज़ार रुपये और घोड़े हाथ लगे। पीछा होने पर घड़सीसर (बीकानेर) में अंग्रेज़ सेना ने जोधपुर और बीकानेर के दस्तों समेत दोनों को चारों ओर से घेर लिया।

10. बलजी-भूरजी

  • जन्म ➜ पाटोदा (सीकर)
  • भाई ➜ बड़े बलसिंह शेखावत; छोटे भूरसिंह शेखावत — अचूक निशानेबाज़, अंग्रेज़ी सेना में सूबेदार
  • उपनाम ➜ शेखावाटी के रॉबिनहुड
  • अंग्रेज़ों के भारतीय सिपाहियों से दुर्व्यवहार से खिन्न होकर भूरजी एक अंग्रेज़ अफ़सर की हत्या कर फ़रार हो गए।
  • विद्रोही बनने के बाद वे शेखावाटी के धनी सेठों को लूटकर माल ग़रीबों में बाँट देते — इसी से बलजी-भूरजी की जोड़ी मशहूर हुई।
  • जोधपुर रियासत में भी ख़ूब डाके डाले। भूरजी ने नसीराबाद छावनी से वेश बदलकर अंग्रेज़ी झंडा उतार लिया और उसे ऊँट की पूँछ से बाँधकर रखते थे।

11. मामादेव

  • उपनाम ➜ बरसात के देवता।
  • किसी वीर के चमत्कार जब उसके इलाके में फैल जाते हैं तो लोग उसे “मामाजी” कहने लगते हैं।
  • मूर्ति की जगह यहाँ लकड़ी का तोरण खड़ा किया जाता है — गाँव के बाहर, मुख्य सड़क पर।

ट्रिक: तोरण (मामादेव) · ईंट (देवनारायण) · बैलगाड़ी (हड़बूजी) · बाम्बी (हरिरामजी) — चार “वस्तु से पूजा” वाले लोकदेवता।

12. इलोजी

  • मारवाड़ में छेड़छाड़ के लोकदेवता; सर्वाधिक मान्यता मारवाड़ क्षेत्र में।
  • राजा हिरण्यकश्यप के बहनोई और होलिका के होने वाले पति माने जाते हैं। स्वयं कुँवारे रहे, पर विवाह का वरदान देते हैं।
  • कुँवारों को जीवनसाथी, नवविवाहितों को सुखी गृहस्थी और निःसंतान स्त्रियों को संतान देने वाले माने जाते हैं।

धुलंडी की कथा

  1. बारात लिए इलोजी हिरण्यकश्यप के द्वार पहुँचे
  2. होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी थी
  3. प्रह्लाद बचा, होलिका जल गई

13. आलमजी

  • ये बाड़मेर क्षेत्र के लोकदेवता और जैतमलोत राठौड़ों के कुलदेवता हैं।
  • बाड़मेर के गुढ़ामालानी अंचल में राड़धरा क्षेत्र के ढाँगी नामक रेतीले टीले पर, लूणी के तट के पास, इनका मंदिर है — घोड़ों का तीर्थ।
  • यहीं आलम पशु मेला भी जुटता है।

14. खेतलाजी / क्षेत्रपाल

  • मारवाड़ की कहावत ➜ “आधे में देवी-देवता और आधे में खेतला” — यानी लोकदेवताओं में खेतला का स्थान सबसे ऊपर है।
  • इन्हें क्षेत्रपाल, ग्राम-रक्षक और ग्राम-देवता माना जाता है; सबसे ज़्यादा क्षेत्रपाल-मंदिर डूँगरपुर में हैं।
  • क्षेत्रपाल = स्थान-विशेष के देवता; इनके थान स्वतंत्र रूप से भी मिलते हैं।

15. अन्य स्थानीय देवता

लोकदेवतास्थानख़ास बातें
ओम बन्ना — “बुलेट वाले बाबा”चोटिला गाँव (पाली)असली नाम ओमसिंह राठौड़ (पिता जोग सिंह राठौड़); जन्म वैशाख शुक्ल अष्टमी (चाँदनी अष्टमी); सड़क दुर्घटना से बचाव के लिए पूजा
सगस जी सुल्तान सिंहउदयपुर — सर्वऋतु विलास महलमहाराणा राजसिंह के पुत्र; मुग़लों से लड़ते हुए वीरगति; मेवाड़ में आज भी लोकदेव के रूप में आस्था-केन्द्र
वीर बावसीकाला टोकरा (पाली)आदिवासियों के लोकदेवता; रेबारी समाज की आस्था; प्रतापसिंह मंडेला के पुत्र; गौ-रक्षा में प्राण दिए

16. लोकदेवता: एक सारांश

लोकदेवतापितामातापत्नीमेले की तिथि
रामदेवजीअजमल जीमैणादेनेतलदेभाद्रपद शुक्ल द्वितीया से भाद्रपद शुक्ल एकादशी
गोगाजीजीवराज चौहानबाछलकेलमदेभाद्रपद कृष्ण नवमी
तेजाजीताहड़ जीरामकुँवरीपेमलदेभाद्रपद शुक्ल दशमी
पाबूजीधांधलदेवकमलादेफूलमदेचैत्र अमावस्या

ध्यान दें: तिथियाँ ऐसे जोड़ें: शुक्ल द्वितीया–एकादशी = रामदेव, शुक्ल सप्तमी = देवनारायण, शुक्ल दशमी = तेजाजी; कृष्ण नवमी = गोगाजी, कृष्ण अष्टमी = मेहाजी।

17. वाहन व पहचान-वस्तुएँ

लोकदेवतावाहन
रामदेवजीनीला घोड़ा
गोगाजीनीला घोड़ा (जावड़िया)
देवनारायण जीलीलागर घोड़ा
मांगलिया मेहाकिरड़ काबरा घोड़ा

मूर्ति के अलावा जिनकी वस्तु पूजी जाती है

लोकदेवतापूजित वस्तु
हड़बूजीछकड़ा गाड़ी
हरिरामजीबाम्बी
मामादेवकाठ का तोरण

ध्यान दें: तेजाजी की लीलण, पाबूजी की केसर कालमी, मेहाजी का किरड़ काबरा, देवनारायण का लीलागर — चार नाम अलग-अलग घोड़े/घोड़ी के हैं, इन्हें मत मिलाइए।

18. कालक्रम व स्थान-मानचित्र

काल / क्रमघटनाविवरण
946–1024 ई.गोगाजीददरेवा में जन्म; महमूद ग़ज़नवी से युद्ध (1024)
1073–1103 ई.तेजाजीखरनाल में जन्म; सुरसरा में निर्वाण (1103)
1239–1276 ई.पाबूजीकोलू में जन्म; देचू में बलिदान (1276)
1243–1290 ई.देवनारायण जीआसींद में जन्म; देवमाली में देह-त्याग (1290)

19. रैपिड फायर तथ्य

  • सबसे पुराना पशु मेला ➜ मल्लीनाथ पशु मेला, तिलवाड़ा (बालोतरा)
  • मल्लीनाथ की जीत ➜ 1378 ई. में 13 दलों की सेना हराई; कहावत «तेरह तुंगा भांगिया माले सलखाणी»
  • ओरण के देवता ➜ तल्लीनाथ, पाँचोटा (जालौर)
  • सर्पदंश का मंत्र-उपचार ➜ हरिरामजी, झोरड़ा (नागौर); मूर्ति नहीं, बाम्बी और चरण-चिह्न पूजे जाते हैं
  • गोगाजी के पुत्र ➜ केसरिया कुँवर जी; थान खेजड़ी के नीचे, प्रतीक सर्प
  • झरड़ाजी (रूपनाथ) ➜ पाबूजी के भतीजे; जींदराव खींची का वध किया; हिमाचल प्रदेश में बालकनाथ नाम से पूजित
  • डूँगरजी-जवाहरजी ➜ चाचा-भतीजे, शेखावाटी के «धावड़िये»; 18 जून 1847 को नसीराबाद छावनी पर हमला
  • शेखावाटी के रॉबिनहुड ➜ बलजी-भूरजी, सगे भाई
  • वस्तु से पूजा ➜ हड़बूजी (छकड़ा गाड़ी), हरिरामजी (बाम्बी), मामादेव (काठ का तोरण), देवनारायण (ईंट)

अगले भाग में राजस्थान की लोकदेवियाँ — देवी-पूजा की शुरुआत, कुलदेवी और इष्टदेवी का अंतर, रियासतों-जातियों की कुलदेवियाँ तथा उदयपुर, कोटा व भरतपुर संभाग की देवियाँ।

पिछला भाग: राजस्थान के लोकदेवता: तेजाजी · देवनारायण · देवबाबा (भाग 2) एवं वीर योद्धा व बलिदानी

अगला भाग: राजस्थान की लोकदेवियाँ: उदयपुर संभाग एवं जयपुर, अलवर व शेखावाटी (भाग 1)

इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान की लोकदेवियाँ · राजस्थान के सम्प्रदाय व संत

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न राजस्थान के लोकदेवता के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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