राजस्थान के लोक नृत्य: जातीय लोकनृत्य – Rajasthan Art and Culture Chapter 48

जातियों के नृत्य, व्यावसायिक नृत्य, राज्य नृत्य घूमर, शास्त्रीय नृत्य कथक और हाल के पद्मश्री सम्मान, PYQ सहित।

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In this chapter (16 sections)
  1. जातीय लोकनृत्य
  2. भीलों के नृत्य
  3. गरासियों के नृत्य
  4. सहरिया, कथौड़ी, डामोर
  5. कंजरों के नृत्य
  6. कालबेलिया के नृत्य
  7. गुर्जर व मेव के नृत्य
  8. अन्य जातियों के नृत्य
  9. व्यावसायिक लोकनृत्य
  10. भवाई
  11. कच्छीघोड़ी
  12. घूमर और कथक
  13. घूमर
  14. कथक
  15. पद्मश्री व सम्मान
  16. रिवीजन पॉइंटर्स

जातीय नृत्य याद करने की सबसे अच्छी विधि है हर जाति के साथ उसका एक पहचान वाला नृत्य बाँध लेना — भील के साथ गवरी, गरासिया के साथ वालर, कंजर के साथ चकरी। इस भाग में भील, गरासिया, सहरिया, कथौड़ी, डामोर, कंजर, कालबेलिया, गुर्जर और मेव के नृत्य हैं, फिर भवाई और कच्छीघोड़ी जैसे पेशेवर नृत्य, घूमर, कथक और पद्मश्री सम्मान। प्रश्न जिन तथ्यों पर पहले आ चुके हैं, उनके साथ परीक्षा का नाम और वर्ष जोड़ दिया गया है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के लोक नृत्य, 10 चॉक-बोर्ड चित्र, 19 नक्शे, 24 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. जातीय लोकनृत्य

जाति / जनजातिपहचान वाले नृत्य
भीलगैर, गवरी/राई, नेजा, द्विचक्री, हाथीमना, भगोरिया, घूमरा, युद्ध, सूकर, रमणी
गरासियामोरिया, मांदल, वालर, लूर, कूद, गौर, गरवा, जवारा
सहरियाझेला, लहंगी, बिछवा, शिकार
कथौड़ीमावलिया, होली

… शेष 5 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

2. भीलों के नृत्य

गैर भीलों का भी मुख्य नृत्य है — फाल्गुन में होली पर पुरुष हाथों में लकड़ी की छड़ियाँ थामे घेरा बनाकर नाचते हैं (ढोल, बांकिया, थाली, मांदल); मेवाड़ और बाड़मेर में प्रमुख। विवरण क्षेत्रीय नृत्य शाखा में है।

नृत्यब्योरा
गवरी / राईदक्षिणी राजस्थान की भील जनजाति का नृत्य-नाट्य; इस नाट्य के बीच भील कलाकार जो नृत्य करते हैं वह गवरी/राई कहलाता है। [परीक्षा: पशु परिचर, 2024 — मेवाड़ में भील किस नृत्य-नाट्य की प्रस्तुति करते हैं? ➜ गवरी]
नेजाभीलों का खेल-नृत्य, मेवाड़ में होली पर युगल रूप में। मैदान में खम्भा गाड़कर सिरे पर नारियल बाँधा जाता है। औरतें कोरड़े (कोड़े) लिए पहरे पर डटी रहती हैं; पुरुष खम्भे पर चढ़कर नारियल पाने का प्रयास करते हैं तो उन पर कोड़े बरसाकर उन्हें खदेड़ा जाता है।
द्विचक्रीविवाह पर स्त्री-पुरुष दो घेरे बनाते हैं — बाहर पुरुष, भीतर स्त्रियाँ; लय के साथ चाल और दिशा बदलते रहते हैं।
हाथीमनाविवाह पर घुटनों के बल बैठकर; इसी नाच के दौरान भील अपने जीवनसाथी का चयन करते हैं।

… शेष 5 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: जीवन-साथी वाला नृत्य — हाथीमना; खेल-नृत्य — नेजा; रोक वाला — युद्ध नृत्य।

3. गरासियों के नृत्य

नृत्यब्योरा
मोरियाविवाह में गणपति-स्थापना के बाद रात में, केवल पुरुष।
मांदलगरासिया महिलाएँ मांदल के साथ गोल घेरे में।
वालरमुख्यतः सिरोही में; बिना वाद्य के स्त्री-पुरुष; इसका दूसरा नाम गरासिया घूमर है। दो अर्द्धवृत — बाहर पुरुष, भीतर स्त्रियाँ; धीमी गति, अंग-संचालन और ताल। आरंभ एक पुरुष करता है, जिसके हाथ में छाता या तलवार होती है।
लूरकेवल लूर गोत्र की गरासिया महिलाएँ, मेले और शादी पर; घूमर का ही एक रूप।

… शेष 4 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ध्यान दें: वालर में वाद्य नहीं — और कूद में भी वाद्य नहीं, बस ताली। लूर केवल एक गोत्र की महिलाओं का।

4. सहरिया, कथौड़ी, डामोर

जनजातिनृत्यब्योरा
सहरियाझेलाशाहबाद (बारां) में फसल तैयार होने की ख़ुशी का जोड़ी-नृत्य
सहरियालहंगीसहरिया युवतियों का नृत्य
सहरियाबिछवाकेवल सहरिया स्त्रियाँ, समूह में
सहरियाशिकारसहरिया जनजाति का नृत्य

ट्रिक: डामोर के दो नृत्य अवसर से याद करें — भरटिया = भोज/मरण (मृत्यु); परणिया = परणय (विवाह)।

5. कंजरों के नृत्य

नृत्यब्योरा
चकरीहाड़ौती में अविवाहित कंजर युवतियाँ गीत गाते हुए तेज़ गति से चक्कर काटती हैं; 80 कली का घाघरा पहनती हैं। नाच में स्त्रियाँ अपने प्रियतम से शृंगार का सामान लाने की माँग करती हैं।
धाकड़हथियार लेकर युद्ध की सब कलाओं का प्रदर्शन, शौर्य से भरा; झालापाव और बीरा की लड़ाई में झालापाव की जीत की ख़ुशी में किया जाता है।
लाठीहाड़ौती में कंजर जाति का नृत्य।

ध्यान दें: 80 कली का घाघरा = चकरी (कंजर)। कालबेलिया का भी एक चकरी नृत्य है — पर घाघरा-कली वाली बात कंजर की है।

6. कालबेलिया के नृत्य

  • पहचान ➜ स्नेक चार्मर डांस
  • सम्मान ➜ 2010 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में
  • प्रसिद्ध कलाकार ➜ गुलाबो देवी — विदेशों में प्रस्तुतियों से दुनिया भर में पहचान दिलाई
नृत्यब्योरा
शंकरियाकथा प्रेम की; स्त्री-पुरुष की जोड़ी सधे अंग-संचालन से नाचती है। कालबेलिया के सब नृत्यों में सबसे लुभावना।
पणिहारीपानी भरने जाती पणिहारिनों का, सिर पर मटके; पणिहारी गीत पर आधारित।
बागड़ियाकालबेलिया महिलाएँ भीख माँगते समय चंग के साथ।

7. गुर्जर व मेव के नृत्य

गुर्जर जाति

नृत्यब्योरा
चरीस्त्रियाँ सिर पर कलश (7 चरियाँ) रखती हैं, उसमें कपास के बीज और तेल डालकर आग जलाती हैं और नाचती हैं। मुख्यतः किशनगढ़ में प्रचलित; अब व्यावसायिक हो चुका है। गणगौर, जन्म और विवाह पर पेशेवर कलाकार करते हैं। फलकू बाई, श्रीमोहन गौड़, कुमारी सुनीता रावत (किशनगढ़) प्रसिद्ध।
झूमरगुर्जर और अहीर पुरुषों का वीर-रस प्रधान नृत्य; झूमरा वाद्य के प्रयोग से नाम झूमर।

मेव जाति

नृत्यब्योरा
रणबाजामेवात में पुरुष और स्त्रियाँ दोनों इसमें शामिल होते हैं।
रतवईअलवर क्षेत्र की मेव महिलाएँ चूड़ियाँ खनकाते हुए नाचती हैं; पुरुष अलगोजा और टामक बजाते हैं।

8. अन्य जातियों के नृत्य

जातिनृत्यब्योरा
बणजारामछलीपूर्णिमा की रात कुँवारी कन्याओं का नृत्य-नाटक — हर्ष से शुरू, दुख पर ख़त्म। बाड़मेर का प्रसिद्ध (सबसे ज़्यादा बणजारे वहीं रहते हैं)।
नटकठपुतलीनट हाथ में डोरियों का गुच्छा थामकर कठपुतलियाँ नचाता है।
बालदियाबालदियाघुमन्तु जीवन वाली बालदिया जाति का नृत्य।

नाम की वजह — कन्याएँ पूर्णिमा के चंद्रमा को होने वाला वर मान बैठती हैं और उसे मनाने नाचती हैं; वह हाथ नहीं आता तो वे थककर धरती पर गिर पड़ती हैं और जल से बाहर निकली मछली की तरह छटपटाती हैं।

9. व्यावसायिक लोकनृत्य

पेशेवर नृत्य वे हैं जो जाति या त्योहार से आगे बढ़कर रोज़ी का साधन बन गए। पाँच प्रमुख व्यावसायिक नृत्य —

नृत्यपेशेवर पहचानविस्तार कहाँ
भवाईसिर पर 7-8 मटके, तलवार-काँच पर नाचनीचे पहली शाखा
तेरहताली13 मंजीरे, रामदेवजी के मेलेधार्मिक नृत्य शाखा
कच्छीघोड़ीबाँस की घोड़ी, शादी परनीचे दूसरी शाखा

10. भवाई

पेशेवर लोकनृत्यों में सबसे लोकप्रिय। तेज़ लय पर रंगीन पगड़ियों को हवा में उछालकर कमल की आकृति रचना, 7-8 मटके सिर पर रखकर नाचना, भूमि पर पड़ा रूमाल मुँह से उठा लेना, गिलासों-थाली के किनारों, तलवारों और काँच के टुकड़ों पर नाचना — यही इसकी पहचान है। अपनी अदा, शारीरिक करतब और लयकारी के लिए प्रसिद्ध।

  • किसका ➜ भवाई जाति — उदयपुर संभाग के स्त्री-पुरुष मिलकर; एकल भी
  • प्रवर्तक ➜ बाघाजी (अजमेर)
  • उदयपुर क्षेत्र में रूप ➜ शंकरिया, सूरदास, बोरी/बोटी, ढोकरी, बीकाजी, ढोलामारू

प्रसिद्ध कलाकार

कलाकारख़ास
रूपसिंह शेखावत, श्रेष्ठा सोनी, तारा शर्मा, दयारामप्रमुख भवाई कलाकार
अस्मिताकालाभवाई नृत्यांगना; 111 घड़े सिर पर टिकाकर लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में दर्ज
कृष्णा व्यास छगानी (जोधपुर)भारत की पहली भवाई नर्तक मानी जाती हैं

11. कच्छीघोड़ी

  • क्षेत्रीय नृत्य भी और व्यावसायिक भी; शेखावाटी के साथ कुचामन, परबतसर, डीडवाना में भी होता है।
  • कलाकार पुरुष पेशेवर हैं और प्रायः विवाह में नाचते हैं।
  • वाद्य ➜ ढोल, थाली, झांझ। विषय वीर रस।

12. घूमर और कथक

  • राज्य नृत्य ➜ घूमर
  • शास्त्रीय नृत्य ➜ कथक (राजस्थान का एकमात्र)

13. घूमर

  • घूमर के तीन उपनाम ➜ नृत्यों की आत्मा, सिरमौर (लोकनृत्यों का) और रजवाड़ी नृत्य। [परीक्षा: पशु परिचर, 2024 — कौन-सा नृत्य राजस्थान का एक प्रसिद्ध लोकनृत्य है? ➜ घूमर]
  • यह राज्य नृत्य है; शुभ अवसरों और पर्वों पर महिलाएँ करती हैं, सबसे ज़्यादा गणगौर पर।
  • महिलाएँ मंथर गति से समूह में चक्कर काटती हुई गोल-गोल घूमती हैं।
रूपकौन करता है
घूमरियाबालिकाएँ
घूमरस्त्रियाँ
लूरगरासिया स्त्रियाँ

गणगौर घूमर नृत्य अकादमी

  • स्थापना ➜ 1986
  • किसने ➜ गोवर्धन कुमारी — किशनगढ़ के राजा यज्ञ नारायण सिंह की बेटी
  • उद्देश्य ➜ गणगौर और घूमर जैसे लोकनृत्यों को बढ़ावा

14. कथक

  • दर्जा ➜ राजस्थान का एकमात्र शास्त्रीय नृत्य
  • प्रवर्तक ➜ भानूजी
  • आदिम घराना ➜ जयपुर घराना

कलाकार और गुरु

  • अंतरराष्ट्रीय ख्याति ➜ बिरजू महाराज।
  • अन्य कलाकार ➜ प्रेरणा श्रीमाली, उदयशंकर, सितारा देवी, पं. दुर्गालाल, कुंदनलाल।
  • कथक के गुरु ➜ पंडित बाबुलाल कत्थक (चूरू)।

15. पद्मश्री व सम्मान

पद्मश्री 2025

नामस्थानकिसलिए
बतूल बेगमनागौर क्षेत्र (केराप; अब डीडवाना-कुचामन)मांड गायन (कला)
बैजनाथ महाराजसीकर (जन्म); आश्रम माउंट आबूआध्यात्म
रिकी केजचूरू (पारिवारिक जड़ें)संगीत (कला)

पद्मश्री 2024

नामस्थानकिसलिए
डॉ. माया टंडनजयपुरसड़क हादसों के घायलों की जान बचाने की व्यवस्था सिखाने के लिए
पं. लक्ष्मण भट्ट तैलंगजयपुरध्रुपद गायकी
जानकीलाल भांडभीलवाड़ाबहरूपिया / भांड कला [परीक्षा: पशु परिचर, 2024 — जानकीलाल भांड को 2024 में पद्मश्री किस कला के लिए मिला? ➜ बहरूपिया]

पद्मश्री 2023

नामस्थानकिसलिए
लक्ष्मण सिंहलापोड़िया (जयपुर)समाजसेवा
मूलचंद लोढ़ाडूंगरपुरआदिवासी उत्थान
उस्ताद अहमद हुसैन व उस्ताद मोहम्मद हुसैनजयपुरग़ज़ल गायन

मारवाड़ संगीत रत्न पुरस्कार 2023

राज्यपाल कलराज मिश्र ने 7 अगस्त 2023 को बाँसुरी-वादक पं. हरिप्रसाद चौरसिया (विश्वप्रसिद्ध) को “महाराजा हनुवन्त सिंह मारवाड़ संगीत रत्न पुरस्कार” प्रदान किया।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. भील जनजाति का नृत्य-नाट्य गवरी (राई) है (पशु परिचर 2024); हाथीमना के दौरान भील जीवनसाथी चुनते हैं और नेजा खेल-नृत्य है।
  2. गरासियों का वालर बिना वाद्य के होता है, मुख्यतः सिरोही में; इसे गरासिया घूमर भी कहते हैं, जबकि लूर केवल लूर गोत्र की महिलाएँ करती हैं।
  3. कंजरों की चकरी हाड़ौती में होती है और उसमें 80 कली का घाघरा पहना जाता है; धाकड़ युद्ध-कौशल वाला नृत्य है।
  4. कालबेलिया नृत्य 2010 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में आया; गुलाबो देवी इसकी प्रसिद्ध कलाकार हैं।
  5. गुर्जरों का चरी किशनगढ़ में प्रचलित है (सिर पर 7 चरियाँ); मेव महिलाएँ अलवर क्षेत्र में रतवई करती हैं; बणजारों का मछली नृत्य बाड़मेर का प्रसिद्ध है।
  6. भवाई सबसे लोकप्रिय पेशेवर नृत्य है, प्रवर्तक बाघाजी (अजमेर); अस्मिताकाला ने 111 घड़े सिर पर टिकाकर लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया।
  7. घूमर राज्य नृत्य है, सबसे ज़्यादा गणगौर पर होता है; उपनाम — नृत्यों की आत्मा, सिरमौर और रजवाड़ी नृत्य। गणगौर घूमर नृत्य अकादमी 1986 में गोवर्धन कुमारी ने बनाई।
  8. कथक राजस्थान का एकमात्र शास्त्रीय नृत्य है; प्रवर्तक भानूजी, आदिम घराना जयपुर घराना, अंतरराष्ट्रीय ख्याति बिरजू महाराज को मिली।
  9. जानकीलाल भांड को 2024 में पद्मश्री बहरूपिया कला के लिए मिला (पशु परिचर 2024); 2025 में बतूल बेगम को मांड गायन के लिए; मारवाड़ संगीत रत्न 2023 हरिप्रसाद चौरसिया को दिया गया।

अगले भाग में लोक नाट्य क्या है, ख्याल और उसकी नौ क्षेत्रीय शैलियाँ, भील जनजाति का गवरी (राई) नाट्य, रम्मत-तमाशा-नौटंकी और लीला नाट्य के रूप।

पिछला भाग: राजस्थान के लोक नृत्य: क्षेत्रीय लोकनृत्य एवं धार्मिक लोकनृत्य

अगला भाग: राजस्थान के प्रमुख लोक नाट्य: ख्याल एवं रम्मत, तमाशा, नौटंकी, चारबैत

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पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न राजस्थान के लोक नृत्य के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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