ग्रन्थ, उसका रचनाकार और वह घटना जिसका ब्योरा उसमें दर्ज है — इन तीनों की जोड़ी बना लें तो इस भाग के ज़्यादातर तथ्य सध जाते हैं। यहाँ संस्कृत ग्रन्थ, फ़ारसी-उर्दू ग्रन्थ, ख्यात और रासो साहित्य, शासकों की अपनी रचनाएँ, स्वतंत्रता आन्दोलन की रचनाएँ, पत्रिकाएँ और अंत में नवीनतम पुरस्कार क्रम से दिए गए हैं।
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1. ग्रन्थ-वर्ग — राजस्थान पर लिखे
ये ग्रन्थ राजस्थान के किसी वंश, युद्ध या दौर की जानकारी देते हैं। पहचान का सूत्र — ग्रन्थ → रचनाकार → किस घटना का आँखों-देखा/सरकारी ब्योरा।
2. संस्कृत साहित्य — I
| ग्रन्थ | रचनाकार | क्या मिलता है |
|---|---|---|
| पृथ्वीराज विजय | जयानक | सपादलक्ष के चौहानों व पृथ्वीराज की वंश-परम्परा और उपलब्धियाँ; अजमेर की तुलना इन्द्रपुरी से; जयानक पृथ्वीराज तृतीय के समकालीन |
| अजीतोदय | जगजीवन भट्ट | मारवाड़ की कथा — जसवंत सिंह प्रथम और अजीतसिंह के काल की लड़ाइयाँ, सन्धियाँ, राज्य-विस्तार, रीति-रिवाज, राजनीतिक उपलब्धियाँ |
| हम्मीर महाकाव्य (1403 ई.) | नयनचन्द्र सूरि | चौहानों की वंशावली, अजमेर, मूलनिवास शाकम्भरी-सपादलक्ष; अलाउद्दीन के रणथम्भौर अभियान का विस्तार; चौहानों को सूर्यवंशी बताया |
| एकलिंग महात्म्य | कान्हा व्यास | मेवाड़ के राजाओं की वंश-परम्परा, आश्रम व वर्ण-व्यवस्था; इसका पहला भाग “राजवर्णन” स्वयं कुम्भा की रचना |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: राजप्रशस्ति = राजसमंद झील की पाल पर 25 शिलालेख; रचनाकार रणछोड़ भट्ट (अमरकाव्य वंशावली भी उन्हीं की)।
3. संस्कृत साहित्य — II
| ग्रन्थ | रचनाकार | विवरण |
|---|---|---|
| अमरसार | जीवाधर | महाराणा प्रताप व अमरसिंह प्रथम की जानकारी |
| कर्मचन्द्र वंशोत्कीर्तनक काव्यम् | जयसोम | कवि मंत्री कर्मचन्द के आश्रय में थे; ग्रन्थ में बीकानेर के राठौड़ों का इतिहास, जूनागढ़ की रचना और शासकों का वैभव व विद्या-प्रेम |
| ईश्वर विलास महाकाव्य | श्री कृष्ण भट्ट | जयपुर और उसके राजपुरुषों की कथा; असली पांडुलिपि जयपुर के सिटी पैलेस (चन्द्र महल) के पोथीखाने में रखी है |
| जगत विलास, शिकार भाव (पिंगल) | नेकराम / नंदराम | जगतसिंह द्वितीय (मेवाड़) के राजकवि |
… शेष 11 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ध्यान दें: राजप्रकाश में प्रताप की हल्दीघाटी में विजय लिखी गई है — दरबारी ग्रन्थ-शैली की पहचान।
4. फ़ारसी-उर्दू ग्रन्थ — I
| ग्रन्थ | रचनाकार | राजस्थान से जुड़ी जानकारी |
|---|---|---|
| तारीख उल हिन्द (किताब-उल-हिन्द) | अलबरूनी | रचना 1030 ई.; लगभग 1000 ई. के राजस्थान की सामाजिक-आर्थिक दशा |
| ताज उल मासिर | हसन निज़ामी | मुहम्मद गौरी के साथ भारत आया; 1192–1218; अजमेर की समृद्धि, पृथ्वीराज के अंतिम दिन, मुस्लिम विजयें; जालौर के किले पर उसका कथन प्रसिद्ध |
| तबक़ात ए नासिरी (13वीं सदी) | मिनहाज-ए-सिराज | मुहम्मद गौरी, इल्तुतमिश, बलबन; अजमेर, जालौर, नागौर में मुस्लिम प्रभाव |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: अलाउद्दीन के रणथम्भौर (1301) और चित्तौड़ (1303) अभियानों की जानकारी ख़ुसरो के ग्रन्थों — तारीख ए अलाई / खजाइनुल फुतूह, देवलरानी खिज्र ख़ाँ — से मिलती है।
ध्यान दें: रणथम्भौर के बारे में दो अलग ग्रन्थ — ख़ुसरो (अलाउद्दीन) और बरनी (सामान्य आक्रमण); जलालुद्दीन वाला अभियान मिफ्ता उल फुतूह में।
5. फ़ारसी-उर्दू ग्रन्थ — II
| ग्रन्थ | रचनाकार | राजस्थान से जुड़ी जानकारी |
|---|---|---|
| आइने अकबरी / अकबरनामा | अबुल फ़ज़ल | “अकबरनामा” का मतलब ही अकबर की कहानी है — अकबर-काल का सबसे प्रामाणिक ग्रन्थ (2000 से ज़्यादा पन्ने); इसका तीसरा खण्ड आइने अकबरी कहलाता है; मेवाड़, अलवर, भरतपुर, जयपुर के आस-पास का भूगोल; प्रताप-अकबर संघर्ष का एकपक्षीय विवरण; अजमेर की जलवायु, पहनावा, त्योहार, मुद्रा |
| तारीख ए फ़रिश्ता | मुहम्मद क़ासिम फ़रिश्ता | अकबर द्वारा अजमेर में कराए निर्माण; कुम्भा, मारवाड़ के रायमल की गतिविधियाँ; मेवाड़-ईडर संबंध |
| तारीख ए शेरशाही | अब्बास ख़ाँ सरवानी | गिरी-सुमेल (1544) की लड़ाई का प्रत्यक्षदर्शी ब्योरा, जिससे शेरशाह-मालदेव के रिश्ते समझ आते हैं; रचना अकबर के निर्देश पर |
| मुन्तख़ब उत तवारीख | अब्दुल क़ादिर बदायूनी | बदायूनी हल्दीघाटी युद्ध का चश्मदीद था; उसका वर्णन |
6. ख्यात साहित्य
| ख्यात | रचनाकार | विषय / ख़ास बात |
|---|---|---|
| नैणसी री ख्यात (डिंगल) | मुहणौत नैणसी | राजस्थान की सबसे पुरानी और भरोसेमंद ख्यात; इसमें मारवाड़ के राठौड़ राजाओं की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक गतिविधियाँ; 1643–1666 में रची गई |
| मुंदियाड़ री ख्यात | चैनदान बारहठ (मुंदियाड़, नागौर) | मारवाड़ के राव सीहा से महाराजा विजयसिंह तक; 1862 ई. में लिखी; “राठौड़ों की ख्यात” भी कहते हैं; राजाओं के जन्म, राज्याभिषेक, मृत्यु की तिथियाँ; मारवाड़-मुग़ल वैवाहिक संबंध |
| दयालदास री ख्यात (डिंगल) | दयालदास सिंढायच | रतनसिंह (बीकानेर) के राजकवि दयालदास; इसमें बीका से सरदार सिंह के राज्यारोहण (1851) तक की कथा है, इसलिए नाम “बीकानेर के राठौड़ों री ख्यात”; बीकानेर का सिलसिलेवार इतिहास पहली बार यहीं मिलता है |
7. रासो साहित्य
| रासो | रचनाकार | विषय / ख़ास बात |
|---|---|---|
| पृथ्वीराज रासो (पिंगल) | चन्दबरदाई | वीर रस का महाकाव्य; 69 प्रस्ताव; अग्निकुण्ड से राजपूतों की उत्पत्ति; जल्हण ने पूरा किया |
| बीसलदेव रासो | नरपति नाल्ह | वियोग शृंगार |
| हम्मीर रासो | शारंगधर (1357) | प्राकृत पैंगलम में 8 पद; हम्मीरदेव चौहान |
| हम्मीर रासो | जोधराज | हम्मीर बनाम अलाउद्दीन का युद्ध (1301 ई.); रचना 18वीं सदी की |
8. अन्य महत्त्वपूर्ण रचनाएँ
| ग्रन्थ | रचनाकार | ख़ास बात |
|---|---|---|
| प्रबन्ध कोष | राजशेखर सूरि | — |
| ढोला मारू री बात | ख़ुशालचन्द्र | — |
| ढोला मारू रा दूहा (डिंगल) | कवि कल्लोल | ढोला-मारवणी की प्रेम-कहानी; लोक-काव्य शैली; राजस्थान का श्रेष्ठ प्रणय काव्य; रचनाकाल 1443 ई. माना जाता है |
| बिहारी सतसई (ब्रज) | बिहारी | असली नाम बिहारीलाल चौबे; जन्म गोविन्दपुर (ग्वालियर); जयपुर के मिर्ज़ा राजा जयसिंह के दरबारी; 713 दोहे; शृंगार रस की उत्कृष्ट रचना; कुछ दोहे नीति व भक्ति के |
9. लोक व हिन्दी के रचनाकार
| रचना | रचनाकार |
|---|---|
| गोरा बादल (हिन्दी कविता) | पं. नरेन्द्र मिश्रा |
| गोरा बादल री बात | जटमल |
| रामू चनणा (नाटक) | भरत व्यास |
| निहाल दे-सुल्तान | कन्हैयालाल सहल |
10. आधुनिक किताबें व शासक-रचनाएँ
यहाँ तीन तरह की रचनाएँ हैं — आम पाठक के लिए लिखी किताबें, शासकों की अपनी कलम से निकले ग्रन्थ, और आज़ादी की लड़ाई के गीत व दस्तावेज़।
11. राजस्थान पर आधुनिक किताबें
| किताब | रचनाकार | टिप्पणी |
|---|---|---|
| राजपूत जीवन संध्या | रमेशचन्द्र दत्त | हल्दीघाटी युद्ध का रोमांचकारी वर्णन |
| मानस | गुलाब कोठारी | — |
| सात सैंकड़ा, शब्द वेद | कर्पूरचन्द्र कुलिश | — |
| बेगारी विलाप | कुंवर मदन सिंह | — |
12. शासकों की रचनाएँ
| शासक | रियासत | रचनाएँ |
|---|---|---|
| मानसिंह | जोधपुर | नाथ चरित्र प्रबन्ध · जलन्धर चरित्र · अनुभव मंजरी · कृष्ण विलास · तेज मंजरी · सेवा सागर · मान विचार |
| अजीत सिंह | जोधपुर | गुणसागर · गजउद्धार · भाव निर्मोही · अजीतसिंह जी कहया दुहा · दुहा श्री ठाकरां रा · महाराजा अजीतसिंह जी री कविता · महाराजा अजीत सिंह जी रा गीत |
| जसवंत सिंह प्रथम | जोधपुर | भाषा भूषण (ब्रज) · अपरोक्ष सिद्धान्त · सिद्धान्तसार · सिद्धान्तबोध · अनुभव प्रकाश · आनन्द विलास · गीता महात्म्य |
| सवाई प्रताप सिंह | जयपुर | शृंगार मंजरी · वैराग्य मंजरी · ब्रजनिधि ग्रन्थावली · संगीत सार |
जसवंत सिंह प्रथम
- शासन ➜ 1638–1678 ई. — गजसिंह के दूसरे बेटे; बड़े भाई अमरसिंह का हक़ छीनकर गद्दी पर बैठे
- सम्मान ➜ शाहजहाँ ने 4000 का मनसब और महाराजा की उपाधि दी
- जन्म ➜ 1626, बुरहानपुर
उनकी मृत्यु पर औरंगज़ेब ने कहा था — “आज कुफ़्र का दरवाज़ा टूट गया।”
पं. भावभट्ट
- बीकानेर के महाराजा अनूपसिंह के दरबारी कवि।
- संगीत-ग्रन्थ ➜ अनूप संगीत विलास, अनूप संगीत रत्नाकर, अनूपांकुश, अनूप संगीत वर्तमान, अनूप रागमाला, गमन मंजरी टीका, मुरली प्रकाश।
- ज़्यादातर किताबों के शीर्षक में स्वामी अनूपसिंह का नाम जोड़ दिया।
13. स्वतंत्रता आन्दोलन की रचनाएँ
| रचना | रचनाकार |
|---|---|
| प्रत्यक्ष जीवन शास्त्र · प्रलय प्रतीक्षा नमो नमः (गीत) · जीवन कुटीर के गीत · सपनौ आयो (राजस्थानी गीत) | हीरालाल शास्त्री |
| मेवाड़ का वर्तमान शासन · पंछीड़ा गीत | माणिक्यलाल वर्मा |
| अर्जी गीत | नयनूराम शर्मा |
| What are the Indian State · पीड़ितों का पंछीड़ा (गीत) | विजय सिंह पथिक |
तेज कवि जैसलमेरी ने 1943 में स्वतंत्र बावनी रची और महात्मा गाँधी के सामने रखी।
- पंछीड़ा गीत की दो रचनाएँ — माणिक्यलाल वर्मा (पंछीड़ा) और विजय सिंह पथिक (पीड़ितों का पंछीड़ा)।
- सागरमल गोपा की तीनों रचनाएँ जैसलमेर और रियासती अत्याचार से जुड़ी हैं — आज़ादी के दीवाने · जैसलमेर में गुण्डाराज · रघुनाथ सिंह का मुक़दमा।
14. अंग्रेज़ी व अन्य भाषा की किताबें
| किताब | रचनाकार |
|---|---|
| ए प्रिन्सेज़ रिमेम्बर्स | गायत्री देवी |
| हिज़ हाइनेस दि महाराजा ऑफ़ बीकानेर (बायोग्राफ़ी) | के. एम. पन्नीकर |
| मिलिट्री मेमोयर्स ऑफ़ जॉर्ज थॉमस | विलियम फ्रेन्कलिन |
| म्यूटीनीज़ इन राजपूताना | आई.टी. प्रिचर्ड |
15. पत्रिकाएँ व नवीनतम पुरस्कार
पिछले अध्याय में राजस्थानी पत्रिकाएँ थीं; यहाँ अकादमियों और विभागों की पत्रिकाओं की सूची और 2022–2024 के पुरस्कार हैं।
16. पत्रिकाएँ — प्रकाशक
| पत्रिका (स्थान) | प्रकाशक / सम्पादक |
|---|---|
| मधुमती (उदयपुर) | राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर |
| अरावली उद्घोष (उदयपुर) | सम्पादक — डी.पी. शर्मा “पथिक” |
| बिन्दु (उदयपुर) | — |
| सम्बोधन (काँकरोली, राजसमंद) | सम्पादक — कमर मेवाड़ी |
17. नवीनतम पुरस्कार
| पुरस्कार | विजेता | कृति / ख़ास बात |
|---|---|---|
| डॉ. कोमल कोठारी स्मृति लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2024 | रूप सिंह शेखावत (जयपुर, भवाई कलाकार) और गणपत सखाराम मसगे (महाराष्ट्र, कठपुतली व चित्रकथा) | 21 दिसम्बर 2024, शिल्पग्राम उत्सव में, आयोजक पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (उदयपुर) |
| जे.एल.एफ़. का 9वाँ कन्हैयालाल सेठिया पुरस्कार 2024 | कवयित्री अरूंधति सुब्रह्मण्यम | कविता संग्रह व्हेन गॉड इज़ अ ट्रैवलर |
| साहित्य अकादमी 2024 — राजस्थानी भाषा पुरस्कार | मुकुट मणिराज | गांव और अम्मा (कविता) |
| राजस्थानी भाषा का बाल साहित्य पुरस्कार | प्रहलाद सिंह झोरड़ | म्हारी ढाणी |
रिवीजन पॉइंटर्स
- पृथ्वीराज विजय के रचनाकार जयानक हैं, जो पृथ्वीराज तृतीय के समकालीन थे; हम्मीर महाकाव्य (1403 ई.) नयनचन्द्र सूरि का है।
- राजप्रशस्ति राजसमंद झील की पाल पर 25 शिलालेखों में है; रचनाकार रणछोड़ भट्ट।
- अलबरूनी की तारीख उल हिन्द (1030 ई.) से लगभग 1000 ई. के राजस्थान की सामाजिक-आर्थिक दशा का पता चलता है।
- अकबर-काल का सबसे प्रामाणिक ग्रन्थ अबुल फ़ज़ल का अकबरनामा है; उसका तीसरा खण्ड आइने अकबरी कहलाता है।
- गिरी-सुमेल (1544) का प्रत्यक्षदर्शी ब्योरा तारीख ए शेरशाही में है, और हल्दीघाटी का चश्मदीद बदायूनी था।
- नैणसी री ख्यात सबसे पुरानी है; मुंदियाड़ री ख्यात चैनदान बारहठ ने 1862 ई. में लिखी; दयालदास की ख्यात बीका से सरदार सिंह के राज्यारोहण (1851) तक है।
- हम्मीर रासो दो हैं — शारंगधर का (1357) और जोधराज का, जो 1301 ई. के हम्मीर-अलाउद्दीन युद्ध पर है।
- ढोला मारू रा दूहा कवि कल्लोल की रचना है (रचनाकाल 1443 ई.); बिहारी सतसई में 713 दोहे हैं और बिहारी जयपुर के मिर्ज़ा राजा जयसिंह के दरबारी थे।
- तेज कवि जैसलमेरी ने 1943 में स्वतंत्र बावनी रची; सागरमल गोपा की तीनों रचनाएँ जैसलमेर और रियासती अत्याचार से जुड़ी हैं।
अगले भाग में संत साहित्य और लौकिक साहित्य — नाथ, विश्नोई, जसनाथी, दादू जैसे सम्प्रदायों के संत कवि, प्रेम-कथाएँ और लोक साहित्य के पाँच रूप।
पिछला भाग: अन्य साहित्यकार व कृतियाँ: प्राचीन विद्वान एवं कुम्भा व उनके विद्वान
अगला भाग: राजस्थान में संत साहित्य व लौकिक साहित्य: सम्प्रदाय-वार संत काव्य
इन्हें भी पढ़ें: राजस्थानी साहित्यकार व कृतियाँ · राजस्थान में संत साहित्य व लौकिक साहित्य
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