अन्य साहित्यकार व कृतियाँ: ग्रन्थ-वर्ग — राजस्थान पर लिखे – Rajasthan Art and Culture Chapter 8

राजस्थान पर लिखे संस्कृत, फ़ारसी-उर्दू, ख्यात व रासो ग्रन्थ, शासकों की रचनाएँ, पत्रिकाएँ और नए पुरस्कार।

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In this chapter (18 sections)
  1. ग्रन्थ-वर्ग — राजस्थान पर लिखे
  2. संस्कृत साहित्य — I
  3. संस्कृत साहित्य — II
  4. फ़ारसी-उर्दू ग्रन्थ — I
  5. फ़ारसी-उर्दू ग्रन्थ — II
  6. ख्यात साहित्य
  7. रासो साहित्य
  8. अन्य महत्त्वपूर्ण रचनाएँ
  9. लोक व हिन्दी के रचनाकार
  10. आधुनिक किताबें व शासक-रचनाएँ
  11. राजस्थान पर आधुनिक किताबें
  12. शासकों की रचनाएँ
  13. स्वतंत्रता आन्दोलन की रचनाएँ
  14. अंग्रेज़ी व अन्य भाषा की किताबें
  15. पत्रिकाएँ व नवीनतम पुरस्कार
  16. पत्रिकाएँ — प्रकाशक
  17. नवीनतम पुरस्कार
  18. रिवीजन पॉइंटर्स

ग्रन्थ, उसका रचनाकार और वह घटना जिसका ब्योरा उसमें दर्ज है — इन तीनों की जोड़ी बना लें तो इस भाग के ज़्यादातर तथ्य सध जाते हैं। यहाँ संस्कृत ग्रन्थ, फ़ारसी-उर्दू ग्रन्थ, ख्यात और रासो साहित्य, शासकों की अपनी रचनाएँ, स्वतंत्रता आन्दोलन की रचनाएँ, पत्रिकाएँ और अंत में नवीनतम पुरस्कार क्रम से दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — अन्य साहित्यकार व कृतियाँ, 6 चॉक-बोर्ड चित्र, 21 नक्शे, 24 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. ग्रन्थ-वर्ग — राजस्थान पर लिखे

ये ग्रन्थ राजस्थान के किसी वंश, युद्ध या दौर की जानकारी देते हैं। पहचान का सूत्र — ग्रन्थ → रचनाकार → किस घटना का आँखों-देखा/सरकारी ब्योरा।

2. संस्कृत साहित्य — I

ग्रन्थरचनाकारक्या मिलता है
पृथ्वीराज विजयजयानकसपादलक्ष के चौहानों व पृथ्वीराज की वंश-परम्परा और उपलब्धियाँ; अजमेर की तुलना इन्द्रपुरी से; जयानक पृथ्वीराज तृतीय के समकालीन
अजीतोदयजगजीवन भट्टमारवाड़ की कथा — जसवंत सिंह प्रथम और अजीतसिंह के काल की लड़ाइयाँ, सन्धियाँ, राज्य-विस्तार, रीति-रिवाज, राजनीतिक उपलब्धियाँ
हम्मीर महाकाव्य (1403 ई.)नयनचन्द्र सूरिचौहानों की वंशावली, अजमेर, मूलनिवास शाकम्भरी-सपादलक्ष; अलाउद्दीन के रणथम्भौर अभियान का विस्तार; चौहानों को सूर्यवंशी बताया
एकलिंग महात्म्यकान्हा व्यासमेवाड़ के राजाओं की वंश-परम्परा, आश्रम व वर्ण-व्यवस्था; इसका पहला भाग “राजवर्णन” स्वयं कुम्भा की रचना

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: राजप्रशस्ति = राजसमंद झील की पाल पर 25 शिलालेख; रचनाकार रणछोड़ भट्ट (अमरकाव्य वंशावली भी उन्हीं की)।

3. संस्कृत साहित्य — II

ग्रन्थरचनाकारविवरण
अमरसारजीवाधरमहाराणा प्रताप व अमरसिंह प्रथम की जानकारी
कर्मचन्द्र वंशोत्कीर्तनक काव्यम्जयसोमकवि मंत्री कर्मचन्द के आश्रय में थे; ग्रन्थ में बीकानेर के राठौड़ों का इतिहास, जूनागढ़ की रचना और शासकों का वैभव व विद्या-प्रेम
ईश्वर विलास महाकाव्यश्री कृष्ण भट्टजयपुर और उसके राजपुरुषों की कथा; असली पांडुलिपि जयपुर के सिटी पैलेस (चन्द्र महल) के पोथीखाने में रखी है
जगत विलास, शिकार भाव (पिंगल)नेकराम / नंदरामजगतसिंह द्वितीय (मेवाड़) के राजकवि

… शेष 11 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ध्यान दें: राजप्रकाश में प्रताप की हल्दीघाटी में विजय लिखी गई है — दरबारी ग्रन्थ-शैली की पहचान।

4. फ़ारसी-उर्दू ग्रन्थ — I

ग्रन्थरचनाकारराजस्थान से जुड़ी जानकारी
तारीख उल हिन्द (किताब-उल-हिन्द)अलबरूनीरचना 1030 ई.; लगभग 1000 ई. के राजस्थान की सामाजिक-आर्थिक दशा
ताज उल मासिरहसन निज़ामीमुहम्मद गौरी के साथ भारत आया; 1192–1218; अजमेर की समृद्धि, पृथ्वीराज के अंतिम दिन, मुस्लिम विजयें; जालौर के किले पर उसका कथन प्रसिद्ध
तबक़ात ए नासिरी (13वीं सदी)मिनहाज-ए-सिराजमुहम्मद गौरी, इल्तुतमिश, बलबन; अजमेर, जालौर, नागौर में मुस्लिम प्रभाव

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: अलाउद्दीन के रणथम्भौर (1301) और चित्तौड़ (1303) अभियानों की जानकारी ख़ुसरो के ग्रन्थों — तारीख ए अलाई / खजाइनुल फुतूह, देवलरानी खिज्र ख़ाँ — से मिलती है।

ध्यान दें: रणथम्भौर के बारे में दो अलग ग्रन्थ — ख़ुसरो (अलाउद्दीन) और बरनी (सामान्य आक्रमण); जलालुद्दीन वाला अभियान मिफ्ता उल फुतूह में।

5. फ़ारसी-उर्दू ग्रन्थ — II

ग्रन्थरचनाकारराजस्थान से जुड़ी जानकारी
आइने अकबरी / अकबरनामाअबुल फ़ज़ल“अकबरनामा” का मतलब ही अकबर की कहानी है — अकबर-काल का सबसे प्रामाणिक ग्रन्थ (2000 से ज़्यादा पन्ने); इसका तीसरा खण्ड आइने अकबरी कहलाता है; मेवाड़, अलवर, भरतपुर, जयपुर के आस-पास का भूगोल; प्रताप-अकबर संघर्ष का एकपक्षीय विवरण; अजमेर की जलवायु, पहनावा, त्योहार, मुद्रा
तारीख ए फ़रिश्तामुहम्मद क़ासिम फ़रिश्ताअकबर द्वारा अजमेर में कराए निर्माण; कुम्भा, मारवाड़ के रायमल की गतिविधियाँ; मेवाड़-ईडर संबंध
तारीख ए शेरशाहीअब्बास ख़ाँ सरवानीगिरी-सुमेल (1544) की लड़ाई का प्रत्यक्षदर्शी ब्योरा, जिससे शेरशाह-मालदेव के रिश्ते समझ आते हैं; रचना अकबर के निर्देश पर
मुन्तख़ब उत तवारीखअब्दुल क़ादिर बदायूनीबदायूनी हल्दीघाटी युद्ध का चश्मदीद था; उसका वर्णन

6. ख्यात साहित्य

ख्यातरचनाकारविषय / ख़ास बात
नैणसी री ख्यात (डिंगल)मुहणौत नैणसीराजस्थान की सबसे पुरानी और भरोसेमंद ख्यात; इसमें मारवाड़ के राठौड़ राजाओं की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक गतिविधियाँ; 1643–1666 में रची गई
मुंदियाड़ री ख्यातचैनदान बारहठ (मुंदियाड़, नागौर)मारवाड़ के राव सीहा से महाराजा विजयसिंह तक; 1862 ई. में लिखी; “राठौड़ों की ख्यात” भी कहते हैं; राजाओं के जन्म, राज्याभिषेक, मृत्यु की तिथियाँ; मारवाड़-मुग़ल वैवाहिक संबंध
दयालदास री ख्यात (डिंगल)दयालदास सिंढायचरतनसिंह (बीकानेर) के राजकवि दयालदास; इसमें बीका से सरदार सिंह के राज्यारोहण (1851) तक की कथा है, इसलिए नाम “बीकानेर के राठौड़ों री ख्यात”; बीकानेर का सिलसिलेवार इतिहास पहली बार यहीं मिलता है

7. रासो साहित्य

रासोरचनाकारविषय / ख़ास बात
पृथ्वीराज रासो (पिंगल)चन्दबरदाईवीर रस का महाकाव्य; 69 प्रस्ताव; अग्निकुण्ड से राजपूतों की उत्पत्ति; जल्हण ने पूरा किया
बीसलदेव रासोनरपति नाल्हवियोग शृंगार
हम्मीर रासोशारंगधर (1357)प्राकृत पैंगलम में 8 पद; हम्मीरदेव चौहान
हम्मीर रासोजोधराजहम्मीर बनाम अलाउद्दीन का युद्ध (1301 ई.); रचना 18वीं सदी की

8. अन्य महत्त्वपूर्ण रचनाएँ

ग्रन्थरचनाकारख़ास बात
प्रबन्ध कोषराजशेखर सूरि—
ढोला मारू री बातख़ुशालचन्द्र—
ढोला मारू रा दूहा (डिंगल)कवि कल्लोलढोला-मारवणी की प्रेम-कहानी; लोक-काव्य शैली; राजस्थान का श्रेष्ठ प्रणय काव्य; रचनाकाल 1443 ई. माना जाता है
बिहारी सतसई (ब्रज)बिहारीअसली नाम बिहारीलाल चौबे; जन्म गोविन्दपुर (ग्वालियर); जयपुर के मिर्ज़ा राजा जयसिंह के दरबारी; 713 दोहे; शृंगार रस की उत्कृष्ट रचना; कुछ दोहे नीति व भक्ति के

9. लोक व हिन्दी के रचनाकार

रचनारचनाकार
गोरा बादल (हिन्दी कविता)पं. नरेन्द्र मिश्रा
गोरा बादल री बातजटमल
रामू चनणा (नाटक)भरत व्यास
निहाल दे-सुल्तानकन्हैयालाल सहल

10. आधुनिक किताबें व शासक-रचनाएँ

यहाँ तीन तरह की रचनाएँ हैं — आम पाठक के लिए लिखी किताबें, शासकों की अपनी कलम से निकले ग्रन्थ, और आज़ादी की लड़ाई के गीत व दस्तावेज़।

11. राजस्थान पर आधुनिक किताबें

किताबरचनाकारटिप्पणी
राजपूत जीवन संध्यारमेशचन्द्र दत्तहल्दीघाटी युद्ध का रोमांचकारी वर्णन
मानसगुलाब कोठारी—
सात सैंकड़ा, शब्द वेदकर्पूरचन्द्र कुलिश—
बेगारी विलापकुंवर मदन सिंह—

12. शासकों की रचनाएँ

शासकरियासतरचनाएँ
मानसिंहजोधपुरनाथ चरित्र प्रबन्ध · जलन्धर चरित्र · अनुभव मंजरी · कृष्ण विलास · तेज मंजरी · सेवा सागर · मान विचार
अजीत सिंहजोधपुरगुणसागर · गजउद्धार · भाव निर्मोही · अजीतसिंह जी कहया दुहा · दुहा श्री ठाकरां रा · महाराजा अजीतसिंह जी री कविता · महाराजा अजीत सिंह जी रा गीत
जसवंत सिंह प्रथमजोधपुरभाषा भूषण (ब्रज) · अपरोक्ष सिद्धान्त · सिद्धान्तसार · सिद्धान्तबोध · अनुभव प्रकाश · आनन्द विलास · गीता महात्म्य
सवाई प्रताप सिंहजयपुरशृंगार मंजरी · वैराग्य मंजरी · ब्रजनिधि ग्रन्थावली · संगीत सार

जसवंत सिंह प्रथम

  • शासन ➜ 1638–1678 ई. — गजसिंह के दूसरे बेटे; बड़े भाई अमरसिंह का हक़ छीनकर गद्दी पर बैठे
  • सम्मान ➜ शाहजहाँ ने 4000 का मनसब और महाराजा की उपाधि दी
  • जन्म ➜ 1626, बुरहानपुर

उनकी मृत्यु पर औरंगज़ेब ने कहा था — “आज कुफ़्र का दरवाज़ा टूट गया।”

पं. भावभट्ट

  • बीकानेर के महाराजा अनूपसिंह के दरबारी कवि।
  • संगीत-ग्रन्थ ➜ अनूप संगीत विलास, अनूप संगीत रत्नाकर, अनूपांकुश, अनूप संगीत वर्तमान, अनूप रागमाला, गमन मंजरी टीका, मुरली प्रकाश।
  • ज़्यादातर किताबों के शीर्षक में स्वामी अनूपसिंह का नाम जोड़ दिया।

13. स्वतंत्रता आन्दोलन की रचनाएँ

रचनारचनाकार
प्रत्यक्ष जीवन शास्त्र · प्रलय प्रतीक्षा नमो नमः (गीत) · जीवन कुटीर के गीत · सपनौ आयो (राजस्थानी गीत)हीरालाल शास्त्री
मेवाड़ का वर्तमान शासन · पंछीड़ा गीतमाणिक्यलाल वर्मा
अर्जी गीतनयनूराम शर्मा
What are the Indian State · पीड़ितों का पंछीड़ा (गीत)विजय सिंह पथिक

तेज कवि जैसलमेरी ने 1943 में स्वतंत्र बावनी रची और महात्मा गाँधी के सामने रखी।

  • पंछीड़ा गीत की दो रचनाएँ — माणिक्यलाल वर्मा (पंछीड़ा) और विजय सिंह पथिक (पीड़ितों का पंछीड़ा)।
  • सागरमल गोपा की तीनों रचनाएँ जैसलमेर और रियासती अत्याचार से जुड़ी हैं — आज़ादी के दीवाने · जैसलमेर में गुण्डाराज · रघुनाथ सिंह का मुक़दमा।

14. अंग्रेज़ी व अन्य भाषा की किताबें

किताबरचनाकार
ए प्रिन्सेज़ रिमेम्बर्सगायत्री देवी
हिज़ हाइनेस दि महाराजा ऑफ़ बीकानेर (बायोग्राफ़ी)के. एम. पन्नीकर
मिलिट्री मेमोयर्स ऑफ़ जॉर्ज थॉमसविलियम फ्रेन्कलिन
म्यूटीनीज़ इन राजपूतानाआई.टी. प्रिचर्ड

15. पत्रिकाएँ व नवीनतम पुरस्कार

पिछले अध्याय में राजस्थानी पत्रिकाएँ थीं; यहाँ अकादमियों और विभागों की पत्रिकाओं की सूची और 2022–2024 के पुरस्कार हैं।

16. पत्रिकाएँ — प्रकाशक

पत्रिका (स्थान)प्रकाशक / सम्पादक
मधुमती (उदयपुर)राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर
अरावली उद्घोष (उदयपुर)सम्पादक — डी.पी. शर्मा “पथिक”
बिन्दु (उदयपुर)—
सम्बोधन (काँकरोली, राजसमंद)सम्पादक — कमर मेवाड़ी

17. नवीनतम पुरस्कार

पुरस्कारविजेताकृति / ख़ास बात
डॉ. कोमल कोठारी स्मृति लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2024रूप सिंह शेखावत (जयपुर, भवाई कलाकार) और गणपत सखाराम मसगे (महाराष्ट्र, कठपुतली व चित्रकथा)21 दिसम्बर 2024, शिल्पग्राम उत्सव में, आयोजक पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र (उदयपुर)
जे.एल.एफ़. का 9वाँ कन्हैयालाल सेठिया पुरस्कार 2024कवयित्री अरूंधति सुब्रह्मण्यमकविता संग्रह व्हेन गॉड इज़ अ ट्रैवलर
साहित्य अकादमी 2024 — राजस्थानी भाषा पुरस्कारमुकुट मणिराजगांव और अम्मा (कविता)
राजस्थानी भाषा का बाल साहित्य पुरस्कारप्रहलाद सिंह झोरड़म्हारी ढाणी

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. पृथ्वीराज विजय के रचनाकार जयानक हैं, जो पृथ्वीराज तृतीय के समकालीन थे; हम्मीर महाकाव्य (1403 ई.) नयनचन्द्र सूरि का है।
  2. राजप्रशस्ति राजसमंद झील की पाल पर 25 शिलालेखों में है; रचनाकार रणछोड़ भट्ट।
  3. अलबरूनी की तारीख उल हिन्द (1030 ई.) से लगभग 1000 ई. के राजस्थान की सामाजिक-आर्थिक दशा का पता चलता है।
  4. अकबर-काल का सबसे प्रामाणिक ग्रन्थ अबुल फ़ज़ल का अकबरनामा है; उसका तीसरा खण्ड आइने अकबरी कहलाता है।
  5. गिरी-सुमेल (1544) का प्रत्यक्षदर्शी ब्योरा तारीख ए शेरशाही में है, और हल्दीघाटी का चश्मदीद बदायूनी था।
  6. नैणसी री ख्यात सबसे पुरानी है; मुंदियाड़ री ख्यात चैनदान बारहठ ने 1862 ई. में लिखी; दयालदास की ख्यात बीका से सरदार सिंह के राज्यारोहण (1851) तक है।
  7. हम्मीर रासो दो हैं — शारंगधर का (1357) और जोधराज का, जो 1301 ई. के हम्मीर-अलाउद्दीन युद्ध पर है।
  8. ढोला मारू रा दूहा कवि कल्लोल की रचना है (रचनाकाल 1443 ई.); बिहारी सतसई में 713 दोहे हैं और बिहारी जयपुर के मिर्ज़ा राजा जयसिंह के दरबारी थे।
  9. तेज कवि जैसलमेरी ने 1943 में स्वतंत्र बावनी रची; सागरमल गोपा की तीनों रचनाएँ जैसलमेर और रियासती अत्याचार से जुड़ी हैं।

अगले भाग में संत साहित्य और लौकिक साहित्य — नाथ, विश्नोई, जसनाथी, दादू जैसे सम्प्रदायों के संत कवि, प्रेम-कथाएँ और लोक साहित्य के पाँच रूप।

पिछला भाग: अन्य साहित्यकार व कृतियाँ: प्राचीन विद्वान एवं कुम्भा व उनके विद्वान

अगला भाग: राजस्थान में संत साहित्य व लौकिक साहित्य: सम्प्रदाय-वार संत काव्य

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पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न अन्य साहित्यकार व कृतियाँ के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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