राजस्थान के त्योहार व मेले: होली के रंग एवं अन्य धर्मों व समुदायों के पर्व – Rajasthan Art and Culture Chapter 59

राजस्थान में होली के रूप, अन्य समुदायों के पर्व और उदयपुर से जयपुर तक के संभागों के मेले, PYQ सहित।

9 min read Updated Notes in Hindi
In this chapter (15 sections)
  1. होली के रंग
  2. होली — पर्व व परम्पराएँ
  3. होली के 17 रूप
  4. अन्य धर्मों व समुदायों के पर्व
  5. जैन समाज के पर्व
  6. सिख समाज के पर्व
  7. ईसाई व पारसी पर्व
  8. सिंधी त्योहार
  9. मुस्लिम धर्म के त्योहार
  10. धार्मिक मेले — संभाग-वार
  11. उदयपुर संभाग के मेले
  12. कोटा संभाग के मेले
  13. भरतपुर संभाग के मेले
  14. जयपुर संभाग के मेले
  15. रैपिड फायर तथ्य

राजस्थान में होली रंगों से आगे बढ़कर लाठी, कोड़े, पत्थर और अंगारों तक पहुँच जाती है, और हर रूप किसी एक जगह से बँधा है। मेलों पर भी यही नियम चलता है — स्थान, महीना और तिथि साथ याद हों तो प्रश्न आसान हो जाता है। इस भाग में होली के रंग, अन्य धर्मों व समुदायों के पर्व और उदयपुर, कोटा, भरतपुर व जयपुर संभाग के धार्मिक मेले हैं। परीक्षा में पूछे गए तथ्यों के साथ परीक्षा का नाम दिया गया है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के त्योहार व मेले, 9 चॉक-बोर्ड चित्र, 28 नक्शे, 31 फ्लैशकार्ड और 15 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
माइंड मैप खोलें ➜

1. होली के रंग

राजस्थान में होली सिर्फ़ रंगों तक सीमित नहीं — कहीं लाठी, कहीं कोड़े, कहीं पत्थर, कहीं अंगारे! पहले होली का मूल स्वरूप, फिर क्षेत्र-वार रूप।

2. होली — पर्व व परम्पराएँ

  • तिथि ➜ फाल्गुन पूर्णिमा
  • क्या है ➜ ऋतु बदलने व रबी की कटाई के उल्लास में नाच-गाने और गुलाल का पर्व
  • स्मृति ➜ भक्त प्रह्लाद की याद में

सांगोद का न्हाण (कोटा)

  • कोटा के सांगोद (और आँवा) कस्बे का न्हाण प्रसिद्ध है।
  • न्हाण की शुरुआत वीर सांगा गुर्जर की याद में सांगोद से मानी जाती है; उत्सव 5 दिन चलता है।
  • न्हाण में 1871 ई. से बादशाह की सवारी भी शामिल है, जिसमें कलाकार तरह-तरह के स्वांग भरते हैं।

बाड़मेर की इलोजी की बारात

बाड़मेर में होली के अवसर पर इलोजी (होलिका के होने वाले पति) की बारात सजती है, पर अंत में यह रोना-बिलखना बन जाती है।

ध्यान दें: कैलेंडर की उलझन — होली = फाल्गुन पूर्णिमा (अंतिम महीने की पूर्णिमा), धुलण्डी = चैत्र कृष्ण एकम (अगले दिन)।

3. होली के 17 रूप

होली का प्रकारस्थानकैसे खेली जाती है
घोटा गैरभीनमाल (जालौर)नाचने वाले हाथ में पेड़ की मोटी टहनी (घोटा) लेकर बिना रुके गैर-नृत्य करते हैं
भाटा गैरआहोर (जालौर)करीब 20 साल पहले एक नौजवान की जान जाने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने इसे प्रतिबंधित कर दिया
फूलों की होलीगोविन्द देवजी मंदिर (जयपुर)फूलों से खेली जाती है
कपड़ा फाड़ होलीपुष्कर (अजमेर)वराह घाट चौक में; विदेशी पर्यटक भी शामिल

… शेष 13 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ऊपर की सारणी में कुल 17 रूप हैं (घोटा गैर से कंकड़ मार तक)। इन्हें स्वभाव के हिसाब से इस तरह समझें —

ट्रिक: पत्थर वाली तीन — भीलूड़ा (डूँगरपुर), बाड़मेर, जैसलमेर (कंकड़); कोड़े वाली दो — भिनाय और ब्यावर; लट्ठ वाली एक — श्री महावीर जी।

रोचक तथ्य: अंगारों की होली फाल्गुन में नहीं, दीपावली के अगले दिन (गोवर्धन पूजा) केकड़ी में खेली जाती है। केकड़ी पहले अलग ज़िला बना था, अब फिर अजमेर में है।

ध्यान दें: आहोर की भाटा गैर पर अब हाईकोर्ट की रोक है — परीक्षा में “रोक वाली होली” का उत्तर यही।

4. अन्य धर्मों व समुदायों के पर्व

समुदायमुख्य पर्व
जैनऋषभ जयन्ती · महावीर जयन्ती · पर्युषण · दशलक्षण · सुगन्ध दशमी · पड़वा ढोक
सिखलोहड़ी · वैशाखी · गुरुनानक जयन्ती · गोविन्द सिंह जयन्ती
ईसाई / पारसीक्रिसमस · गुड फ्राइडे · ईस्टर · असेन्सन डे · नवरोज

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

5. जैन समाज के पर्व

पर्वतिथिविवरण
ऋषभ जयन्तीचैत्र कृष्ण नवमीपहले तीर्थंकर ऋषभदेव का जन्मदिन
महावीर जयन्तीचैत्र शुक्ल त्रयोदशी24वें तीर्थंकर महावीर का जन्मदिन; महावीर जी (करौली) में मेला
पर्युषण पर्वबारस (कृ. 12) से ऋषि पंचमी (शु. 5) तक — भाद्रपद मेंमहापर्व; नाम का अर्थ है — निकट बसना
रोट तीजभाद्रपद शुक्ल तृतीयाघर पर मिस्सी रोटी और खीर

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

  • श्वेताम्बर ➜ भाद्रपद कृष्ण बारस (द्वादशी) से भाद्रपद शुक्ल पंचमी तक।
  • दिगम्बर ➜ भाद्रपद शुक्ल पंचमी से भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तक।
  • यह क्षमावाणी पर्व भी है — जैन समाज अपनी गलतियों के लिए क्षमा माँगता है; उत्सव का अंतिम दिन “संवत्सरी” कहलाता है।

6. सिख समाज के पर्व

पर्वतिथिविवरण
लोहड़ी13 जनवरीमकर संक्रान्ति से पहली शाम — नई फ़सल पकने की ख़ुशी; रात में सबके साथ अलाव जलाकर उसमें तिल व मिठाइयाँ चढ़ाते हैं
वैशाखी13 अप्रैलगुरु गोविन्द सिंह ने 13 अप्रैल 1699 को खालसा पंथ की नींव रखी — आनंदपुर साहिब (रोपड़ ज़िला, पंजाब)
गुरुनानक जयन्तीकार्तिक पूर्णिमापहले गुरु गुरुनानक का जन्मदिन; गुरुद्वारों में गुरुवाणी का पाठ

राजस्थान में सिखों का सबसे बड़ा मेला साहवा (चूरू) में गुरुनानक जयन्ती पर भरता है; गंगानगर में गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ मेला हरियाली अमावस्या पर लगता है।

7. ईसाई व पारसी पर्व

पर्वतिथिविवरण
क्रिसमस25 दिसम्बरईसा मसीह का जन्म
नववर्ष1 जनवरी—
गुड फ्राइडे—ईसा मसीह का शहीद दिवस — इस दिन उन्हें सूली पर लटकाया गया; ब्लैक फ्राइडे / होली फ्राइडे भी कहते हैं

ईसाई पर्वों का क्रम

  1. गुड फ्राइडे (शुक्रवार)
  2. ईस्टर (रविवार, +2 दिन)
  3. असेन्सन डे (ईस्टर के +40 दिन)

8. सिंधी त्योहार

पर्वतिथिविवरण
चेटीचंड / झूलेलाल जयन्तीचैत्र शुक्ल प्रतिपदाझूलेलाल (वरुण के अवतार) का जन्मदिवस; जन्म सिंध के थट्टा नगर में
थदड़ी / बड़ी सातमभाद्रपद कृष्ण सप्तमीइसे सिंधियों का बास्योड़ा कहते हैं; दिन-भर ठण्डा खाना; पीपल के पेड़ पर रखी चाँदी की प्रतिमा की पूजा
चालीहा महोत्सव16 जुलाई – 24 अगस्तसिंध के शासक मिर्ख़शाह के अत्याचार से त्रस्त समुदाय ने चालीस दिन व्रत रखा; चालीसवें दिन झूलेलाल प्रकट हुए

9. मुस्लिम धर्म के त्योहार

पर्वहिजरी तिथिविवरण
मुहर्रम / आशूरामुहर्रम की 10वींपैगम्बर के नवासे हज़रत हुसैन इमाम की 680 ई. में कर्बला की जंग में शहादत का शोक-पर्व (मातम); 10 दिन उपवास की परम्परा; ताज़िये निकलते हैं और ताशा बजता है
चेहल्लुमसफ़र की 20वीं—
ईद-उल-मिलादुन्नबी (बारावफ़ात)रबी-उल-अव्वल की 12वींपैगम्बर मोहम्मद साहब का जन्मदिन (570–571 ई., मक्का)
शब-ए-बारातशाबान की 14वीं (रात)रात-भर इबादत कर अल्लाह से भूल-चूक की माफ़ी माँगी जाती है; “शब” = रात, “बारात” = बरी होना; क़ुरान-पाठ (तिलावत), दान (सखावत), बिछड़े परिजनों की मग़फ़िरत की दुआ और गुनाहों से तौबा

राजस्थान में मुस्लिम उर्स-मेलों में अजमेर (ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, रज्जब 1–6), नरहड़ (झुंझुनूं) (जन्माष्टमी पर) और गलियाकोट (डूँगरपुर) (दाउदी बोहरा, मुहर्रम 27) प्रसिद्ध हैं।

10. धार्मिक मेले — संभाग-वार

हर संभाग की सारणी में चार कॉलम हैं — मेला · स्थान · माह / तिथि · विशेष। मेलों को याद करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है पहले संभाग का नक्शा, फिर उसके ज़िले, फिर तिथि।

11. उदयपुर संभाग के मेले

मेलास्थानमाह / तिथिविशेष
एकलिंग जी मेलाकैलाशपुरी (उदयपुर)फाल्गुन कृष्ण 13—
ऋषभदेव (केसरियाजी) मेलाऋषभदेव — धुलेव (उदयपुर)चैत्र कृष्ण अष्टमी व नवमी—
विक्रमादित्य मेलाउदयपुरचैत्र अमावस्या—
मातृकुण्डिया मेलाराश्मी (चित्तौड़गढ़)वैशाख पूर्णिमा—

12. कोटा संभाग के मेले

मेलास्थानमाह / तिथिविशेष
कजली तीज मेलाबूँदीभाद्रपद कृष्ण तृतीयासवारी भी प्रसिद्ध [परीक्षा: महिला पर्यवेक्षक 2024; CET 2024 — बूँदी की कजली तीज किस माह में पड़ती है? ➜ भाद्रपद]
सीताबाड़ी मेलासीताबाड़ी — केलवाड़ा (बारां)ज्येष्ठ अमावस्याहाड़ौती का सबसे बड़ा मेला; सहरिया जनजाति का कुम्भ
डोल मेलाबारांभाद्रपद शुक्ल एकादशीडोल तालाब पर; जलझूलनी एकादशी को देव-विमानों की शोभायात्रा निकलती है

13. भरतपुर संभाग के मेले

मेलास्थानमाह / तिथिविशेष
श्री महावीर जी मेलाचांदन गाँव (करौली)चैत्र शुक्ल त्रयोदशी से वैशाख कृष्ण एकमजैन समुदाय का राजस्थान में सबसे बड़ा मेला; सर्वधर्म सद्भाव का उदाहरण [परीक्षा: पशु परिचर, 2024 — लट्ठमार होली राजस्थान के किस स्थान की प्रसिद्ध है? ➜ श्री महावीर जी]
गणेश जी मेलारणथम्भौर (सवाई माधोपुर)भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी—
चौथ माता मेलाचौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर)माघ कृष्ण चतुर्थी—
शिवरात्रि मेलाशिवाड़ (सवाई माधोपुर)फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी—

14. जयपुर संभाग के मेले

मेलास्थानमाह / तिथिविशेष
बाणगंगा मेलाबैराठ (कोटपूतली-बहरोड़)वैशाख पूर्णिमा—
शीतला माता मेलाशील की डूँगरी (चाकसू, जयपुर)चैत्र कृष्ण अष्टमी—
मेहन्दीपुर बालाजी मेलामेहन्दीपुर (दौसा)चैत्र पूर्णिमा—
चूहड़ सिद्ध का मेलाअलवरमहाशिवरात्रि पर—

15. रैपिड फायर तथ्य

  • होली की तिथि ➜ फाल्गुन पूर्णिमा; धुलण्डी अगले दिन, चैत्र कृष्ण एकम
  • सांगोद का न्हाण ➜ कोटा; वीर सांगा गुर्जर की याद, उत्सव 5 दिन का
  • भाटा गैर (आहोर, जालौर) ➜ अब हाईकोर्ट की रोक
  • अंगारों की होली ➜ केकड़ी में, दीपावली के अगले दिन
  • लट्ठमार होली ➜ श्री महावीर जी (करौली)
  • वैशाखी ➜ 13 अप्रैल 1699 को गुरु गोविन्द सिंह ने खालसा पंथ की नींव रखी
  • सिखों का सबसे बड़ा मेला ➜ साहवा (चूरू), गुरुनानक जयन्ती पर
  • श्री महावीर जी मेला ➜ जैन समुदाय का राजस्थान में सबसे बड़ा
  • सीताबाड़ी मेला ➜ बारां; हाड़ौती का सबसे बड़ा मेला

अगले भाग में अजमेर, जोधपुर और बीकानेर संभाग के मेले, पर्यटन महोत्सव और मेलों का माह-वार क्रम।

पिछला भाग: राजस्थान के त्योहार व मेले: हिन्दू मास-वार त्योहार (भाग 2)

अगला भाग: राजस्थान के त्योहार व मेले: धार्मिक मेले — संभाग-वार (भाग 2) एवं पर्यटन मेले व महोत्सव

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इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न राजस्थान के त्योहार व मेले के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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