राजस्थानी साहित्यकार व कृतियाँ: आधुनिक गद्य साहित्य (भाग 2) – Rajasthan Art and Culture Chapter 6

आधुनिक गद्य की विधाएँ — उपन्यास, कहानी, नाटक, निबंध — उनके पहले रचनाकार, साहित्य की शैलियाँ और पत्रिकाएँ।

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In this chapter (10 sections)
  1. रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत
  2. उपन्यास
  3. कहानी व कथाकार
  4. नाटक व एकांकी
  5. निबंध, समालोचना व संस्मरण
  6. साहित्य की विशिष्ट शैलियाँ
  7. इतिहास से जुड़ी शैलियाँ
  8. छन्द व काव्य-रूप
  9. पत्र-पत्रिकाएँ
  10. रिवीजन पॉइंटर्स

गद्य की हर विधा में «पहला» कौन है, इस पर सवाल सबसे ज़्यादा बनते हैं; इसलिए विधा के साथ उसकी पहली रचना और रचनाकार को जोड़कर पढ़ें। इस भाग में रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत, उपन्यास, कहानी व कथाकार, नाटक व एकांकी, निबंध-समालोचना-संस्मरण, साहित्य की विशिष्ट शैलियाँ और अंत में पत्र-पत्रिकाएँ क्रम से हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थानी साहित्यकार व कृतियाँ, 9 चॉक-बोर्ड चित्र, 24 नक्शे, 1 चार्ट, 25 फ्लैशकार्ड और 15 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत

  • जन्म ➜ 24 जून 1916, देवगढ़ (राजसमंद)
  • विधानसभा ➜ 1962 से 1971 — भीम (राजसमंद) से राजस्थान विधानसभा सदस्य
  • राज्यसभा ➜ 1972 से 1978

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • रचनाएँ ➜ टाबरां री बातां · हूंकारो दो सा · अमोलक बातां · कै रे चकवा बात · डूँगरजी जवार जी री बात · पाबूजी री बात · सोरठ-बीजा री बात · माँझळ रात · मूमळ · बाघो भारमली · गिर ऊँचा ऊँचा गढ़ां · Love story of Rajasthan · बगड़ावत देवनारायण महागाथा · हिन्दुकुश के उस पार।
  • अन्य ➜ मेवाड़ी फागण (निबंध) · मेवाड़ी दीवाली (निबंध) · सामधरमा माजी (एकांकी) · म्हारी जापान यात्रा (यात्रा संस्मरण)।
  • 1978 में संयुक्त राष्ट्र संघ के न्यूयॉर्क निःशस्त्रीकरण सम्मेलन में देश का प्रतिनिधित्व किया।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

ट्रिक: तीन तारीख़ें — विधानसभा 1962–71, राज्यसभा 1972–78, पद्मश्री 1984; निधन 2014।

ध्यान दें: मूमळ और बाघो भारमली दोनों लोक-प्रेमकथाएँ हैं; जैसलमेर का सबसे चर्चित प्रेमाख्यान मूमल है।

2. उपन्यास

  • पहला राजस्थानी उपन्यास — कनक सुन्दर (शिवचंद भरतिया)।
  • दूसरा ➜ चाचा (नारायण अग्रवाल)।
  • पहला ऐतिहासिक उपन्यास — कंवल पूजा (सत्येन जोशी)।
रचनाकारउपन्यास
छत्रपति सिंहतिरसंकू (1974)
सत्येन जोशीकंवल पूजा (1974)
रामनिवास शर्माकाल भैरवी (1976) · मांझल
पारस अरोड़ाखुलती गांठा (1977)

… शेष 8 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

अकादमी पुरस्कार पाने वाले उपन्यास

वर्षउपन्यासरचनाकार
1978मेवे रा रूंखअन्नाराम सुदामा
1998उड़जा रै सूवाशांति भारद्वाज राकेश
2001घराणोअब्दुल वहीद कमल

ट्रिक: छह पुरस्कृत उपन्यास — 1978, 1998, 2001, 2004, 2011, 2015; पहला (1978) सुदामा का और आख़िरी (2015) मधु आचार्य का।

रोचक तथ्य: एक ही वर्ष (1974) में दो उपन्यास — तिरसंकू (छत्रपति सिंह) और कंवल पूजा (सत्येन जोशी)।

3. कहानी व कथाकार

राजस्थानी की पहली कहानी — विश्रांत प्रवास (शिवचंद भरतिया, 1904)। गूलाबचन्द नागौरी की कहानियाँ — बड़ी तीज, बड़ी बेटी की बिकरी।

कथाकारकृतियाँ
बैजनाथ पंवारताडेसर · नैणा खूट्गी नीर · ओळखाण · भाभी · गाणी भूवा · खुली चरी-बंध्यी मरी (कहानी संग्रह) · अकल बिना ऊँट ऊभाणों
मनोहर शर्माकन्यादान · फतिये रो ब्याव · खांजी
मूलचन्द प्राणेशउकलता आंतरासीला सास · चस्मदीठ गवाह
बद्रीदान गाडणआंबे री डाल · सरवर री पाल

राजस्थान के हिन्दी कथाकार

रचनाकाररचना
चन्द्रधर शर्मा गुलेरी (जयपुर)उसने कहा था (हिन्दी कहानी) — हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में गिनी जाती है
रांगेय राघवघरौंदा · मुर्दों का टीला · कब-तक पुकारूँ · आखिरी आवाज · सीधा सादा रास्ता

अकादमी पुरस्कार पाने वाले कहानी-संग्रह

वर्षसंग्रहरचनाकार
1982चश्मदीद गवाहमूलचन्द प्राणेश
1985एक दुनिया म्हारीसांवर दइया
1989जमारोयादवेन्द्र शर्मा चन्द्र
1993अधूरा सपनानृसिंह राजपुरोहित

4. नाटक व एकांकी

नाटक

राजस्थानी का पहला नाटक — केसर विलास (शिवचंद भरतिया, 1900)।

नाटककारनाटक
भगवतीप्रसाद दारूकाबाल विवाह · मारवाड़ी मोसर · सगाई जंजाल
बालकृष्ण लाहौरीकन्या बिक्री
नारायणदास अग्रवालबाल ब्याव को फार्स
मदन मोहन सिद्धजयपुर की ज्योनार

अर्जुनदेव चारण

  • आज के नाटककारों में प्रमुख नाम; नाटककार के साथ नाट्य निर्देशक भी।
  • धरमजुद्ध (नाटक संग्रह) को 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार।
  • नाटक ➜ धरमजुद्ध · जातरा · आज रा दोय नाटक · बोल म्हारी मछली इतो पाणी · संकरियो · गवाड़ी · मुगती गाथा · जेठवा ऊजळी; कविता — रिन्दरोही।

पुरस्कृत नाटक

वर्षनाटकरचनाकार
1992धरमजुद्धअर्जुनदेव चारण
2000कंकू कबंधजयप्रकाश पंड्या ज्योतिपुंज
2006पूर्णमिदम्लक्ष्मीनारायण रंगा

एकांकी

राजस्थानी का पहला एकांकी माना जाने वाला — वृद्ध विवाह विदूषण (1930, शोभाचंद)।

रचनाकारएकांकी
श्रीनाथ मोदीगोमा जाट (गाँव सुधार)
गोविन्दलाल माथुरसतरंगणी (7 एकांकियों का संग्रह)
श्रीमंत कुमार व्यासमुंशीजी री डायरी (हास्य एकांकी) · गादड़ी री पूंछ · पोपाबाई रो सालो · मासी सूं मसखरी
आज्ञाचन्द्र भंडारीदेश र वास्तै · देशभगत भामासा

5. निबंध, समालोचना व संस्मरण

निबंध

निबंधकारकृतियाँ
ब्रजलाल बियाणीमोगरा कली · बड़ी फजर को दीवो
रावत सारस्वतथोथी बातां
सुमेरसिंह शेखावतमाणक मोती
सौभाग्य सिंह शेखावतचिणौ · वचन · चाट्ट · जीभां री लपालोल

समालोचना

रचनारचनाकार
दौर अर दायरोनंद भारद्वाज
हेमाणीतेजसिंह जोधा
सिरजण री परखपुरूषोतम आसोपा
समकालीन राजस्थानी कविता: संवेदन अर सिल्पकुंदन माली

रेखाचित्र और संस्मरण

रचनारचनाकार
फरामलश्रीलाल नथमल जोशी
बां दना की बातांश्रीमती कमला कमलेश
उणियारा ओल्यूं तणाअस्तअली मलकाण

1996 का साहित्य अकादमी पुरस्कार नेमनारायण जोशी की ओल्यूं री अखियातां को दिया गया।

6. साहित्य की विशिष्ट शैलियाँ

राजस्थानी साहित्य में कुछ शैलियाँ ऐसी हैं जिनका नाम ही उस रचना का रूप बता देता है — रासो, ख्यात, वचनिका, विगत, वेलि, दवावैत, बात; और कुछ छन्द/रूप — झमाल, झूलणा, परची, प्रकाश, मरस्या, रूपक, साखी, सिलोका, दूहा।

7. इतिहास से जुड़ी शैलियाँ

शैलीक्या हैप्रमुख उदाहरण
रासोराजा के यश, जीत, लड़ाइयों और शूरता का गुणगान करने वाली काव्य-रचनापृथ्वीराज रासो (चन्दबरदाई) · बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह) · सगत रासो (गिरधर आसिया) · खुमाण रासो (दलपत विजय) · रतन रासो (कुंभकर्ण) · हम्मीर रासो (जोधराज)
ख्यातराजा अपनी शान, उपलब्धियों और ख़ास कामों का लेखा लिखवाकर अपना इतिहास सहेजते थे — उसी को ख्यात कहा गया; इनकी लिखावट अकबर (1556–1605) के राज से शुरू मानी जाती हैमुहणौत नैणसी री ख्यात · दयालदास री ख्यात
वचनिकासंस्कृत के “वचन” शब्द से; गद्य-पद्य के मेल की तुकांत रचना जिसे चम्पू भी कहते हैं; पंक्तियों के अंत में अनुप्रास (कुछ अपवाद); भेद — पद्यबद्ध और गद्यबद्धअचलदास खींची री वचनिका (शिवदास गाडण) · राठौड़ महेसदासोत री वचनिका (खिड़िया जगा)
विगतकिसी विषय पर ब्योरेवार ऐतिहासिक जानकारी — राजा, उसका परिवार और उसकी राजनीतिक-सामाजिक छविनैणसी की मारवाड़ रा परगना री विगत — हर परगने की आबादी, रेख, भूमि की किस्में, फ़सलें, सिंचाई के साधन

8. छन्द व काव्य-रूप

रूपक्या हैप्रमुख उदाहरण
झमालराजस्थानी काव्य का मात्रिक छन्द — पहले पूरा दोहा, फिर पाँचवें चरण में दोहे का अंतिम चरण दोहराया जाता हैराव इन्द्रसिंह री झमाल
झूलणाझमाल जैसा ही मात्रिक छन्द; 24 अक्षर वाले वर्णिक ढाँचे के आख़िर में यगण आता हैअमरसिंह राठौड़ रा झूलणा · राव सुरताण देवेड़ा रा झूलणा · राजा गजसिंह रा झूलणा
परचीसंतों द्वारा रचित पद्यबद्ध रचना; संत-महात्माओं का जीवन-परिचयसंत रैदास की परची · संत पीपा की परची · संत दादू री परची · मीराबाई री परची
प्रकाशकिसी व्यक्ति, राजवंश या प्रसंग की उपलब्धियों को उजागर करने वाली कृतिसूरज प्रकाश (करणीदान) · राजप्रकाश (किशोरदास) · महायश प्रकाश (आशिया मानसिंह)

9. पत्र-पत्रिकाएँ

पत्रिका (स्थान)प्रकाशक या सम्पादक
मरुभारती (पिलानी)बिड़ला एज्यूकेशन ट्रस्ट, पिलानी (झुंझुनूं)
लहर (अजमेर)प्रकाश जैन द्वारा
परम्परा (चौपासनी)राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी (जोधपुर)
माणक (जोधपुर)माणक प्रकाशन, जोधपुर (पदम मेहता)

इनके अलावा सूची में ये पत्रिकाएँ भी हैं — जाणकारी (जोधपुर), जलमभोम (बीकानेर), मरवण (बीकानेर), ओलखाण (जोधपुर), बतलावण (पिलानी), कचनार (अंता, बारां), गोरबंद (लक्ष्मणगढ़), पिणहारी (जयपुर), ईसरलाट (जयपुर)।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. पहला राजस्थानी उपन्यास कनक सुन्दर (शिवचंद भरतिया) है; दूसरा चाचा (नारायण अग्रवाल) और पहला ऐतिहासिक उपन्यास कंवल पूजा (सत्येन जोशी) है।
  2. अकादमी पुरस्कार पाने वाले उपन्यास छह हैं — पहला 1978 में मेवे रा रूंख (अन्नाराम सुदामा) और आख़िरी 2015 में।
  3. पहली कहानी विश्रांत प्रवास (1904), पहला नाटक केसर विलास (1900) और पहला एकांकी वृद्ध विवाह विदूषण (1930, शोभाचंद) है।
  4. अर्जुनदेव चारण के नाटक संग्रह धरमजुद्ध को 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  5. 1996 का साहित्य अकादमी पुरस्कार नेमनारायण जोशी की ओल्यूं री अखियातां को दिया गया।
  6. रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत 1962 से 1971 तक विधानसभा सदस्य और 1972 से 1978 तक राज्यसभा सदस्य रहीं।
  7. रासो राजा के यश और शूरता का गान है; ख्यात-लेखन अकबर (1556–1605) के राज से शुरू माना जाता है।
  8. वचनिका गद्य-पद्य के मेल की रचना है, जिसे चम्पू भी कहते हैं; उदाहरण अचलदास खींची री वचनिका (शिवदास गाडण)।
  9. झमाल में पूरे दोहे के बाद पाँचवें चरण में दोहे का अंतिम चरण दोहराया जाता है; झूलणा 24 अक्षर वाले वर्णिक ढाँचे का छन्द है।

अगले भाग में राजस्थान पर लिखने वाले अन्य रचनाकार — प्राचीन विद्वान, कुम्भा के दरबार के विद्वान और इतिहासकार।

पिछला भाग: राजस्थानी साहित्यकार व कृतियाँ: आधुनिक काल — कवि (भाग 2) एवं आधुनिक गद्य साहित्य (भाग 1)

अगला भाग: अन्य साहित्यकार व कृतियाँ: प्राचीन विद्वान एवं कुम्भा व उनके विद्वान

इन्हें भी पढ़ें: अन्य साहित्यकार व कृतियाँ · राजस्थानी भाषा व बोलियाँ

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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