गद्य की हर विधा में «पहला» कौन है, इस पर सवाल सबसे ज़्यादा बनते हैं; इसलिए विधा के साथ उसकी पहली रचना और रचनाकार को जोड़कर पढ़ें। इस भाग में रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत, उपन्यास, कहानी व कथाकार, नाटक व एकांकी, निबंध-समालोचना-संस्मरण, साहित्य की विशिष्ट शैलियाँ और अंत में पत्र-पत्रिकाएँ क्रम से हैं।
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1. रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत
- जन्म ➜ 24 जून 1916, देवगढ़ (राजसमंद)
- विधानसभा ➜ 1962 से 1971 — भीम (राजसमंद) से राजस्थान विधानसभा सदस्य
- राज्यसभा ➜ 1972 से 1978
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- रचनाएँ ➜ टाबरां री बातां · हूंकारो दो सा · अमोलक बातां · कै रे चकवा बात · डूँगरजी जवार जी री बात · पाबूजी री बात · सोरठ-बीजा री बात · माँझळ रात · मूमळ · बाघो भारमली · गिर ऊँचा ऊँचा गढ़ां · Love story of Rajasthan · बगड़ावत देवनारायण महागाथा · हिन्दुकुश के उस पार।
- अन्य ➜ मेवाड़ी फागण (निबंध) · मेवाड़ी दीवाली (निबंध) · सामधरमा माजी (एकांकी) · म्हारी जापान यात्रा (यात्रा संस्मरण)।
- 1978 में संयुक्त राष्ट्र संघ के न्यूयॉर्क निःशस्त्रीकरण सम्मेलन में देश का प्रतिनिधित्व किया।
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ट्रिक: तीन तारीख़ें — विधानसभा 1962–71, राज्यसभा 1972–78, पद्मश्री 1984; निधन 2014।
ध्यान दें: मूमळ और बाघो भारमली दोनों लोक-प्रेमकथाएँ हैं; जैसलमेर का सबसे चर्चित प्रेमाख्यान मूमल है।
2. उपन्यास
- पहला राजस्थानी उपन्यास — कनक सुन्दर (शिवचंद भरतिया)।
- दूसरा ➜ चाचा (नारायण अग्रवाल)।
- पहला ऐतिहासिक उपन्यास — कंवल पूजा (सत्येन जोशी)।
| रचनाकार | उपन्यास |
|---|---|
| छत्रपति सिंह | तिरसंकू (1974) |
| सत्येन जोशी | कंवल पूजा (1974) |
| रामनिवास शर्मा | काल भैरवी (1976) · मांझल |
| पारस अरोड़ा | खुलती गांठा (1977) |
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अकादमी पुरस्कार पाने वाले उपन्यास
| वर्ष | उपन्यास | रचनाकार |
|---|---|---|
| 1978 | मेवे रा रूंख | अन्नाराम सुदामा |
| 1998 | उड़जा रै सूवा | शांति भारद्वाज राकेश |
| 2001 | घराणो | अब्दुल वहीद कमल |
ट्रिक: छह पुरस्कृत उपन्यास — 1978, 1998, 2001, 2004, 2011, 2015; पहला (1978) सुदामा का और आख़िरी (2015) मधु आचार्य का।
रोचक तथ्य: एक ही वर्ष (1974) में दो उपन्यास — तिरसंकू (छत्रपति सिंह) और कंवल पूजा (सत्येन जोशी)।
3. कहानी व कथाकार
राजस्थानी की पहली कहानी — विश्रांत प्रवास (शिवचंद भरतिया, 1904)। गूलाबचन्द नागौरी की कहानियाँ — बड़ी तीज, बड़ी बेटी की बिकरी।
| कथाकार | कृतियाँ |
|---|---|
| बैजनाथ पंवार | ताडेसर · नैणा खूट्गी नीर · ओळखाण · भाभी · गाणी भूवा · खुली चरी-बंध्यी मरी (कहानी संग्रह) · अकल बिना ऊँट ऊभाणों |
| मनोहर शर्मा | कन्यादान · फतिये रो ब्याव · खांजी |
| मूलचन्द प्राणेश | उकलता आंतरासीला सास · चस्मदीठ गवाह |
| बद्रीदान गाडण | आंबे री डाल · सरवर री पाल |
राजस्थान के हिन्दी कथाकार
| रचनाकार | रचना |
|---|---|
| चन्द्रधर शर्मा गुलेरी (जयपुर) | उसने कहा था (हिन्दी कहानी) — हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में गिनी जाती है |
| रांगेय राघव | घरौंदा · मुर्दों का टीला · कब-तक पुकारूँ · आखिरी आवाज · सीधा सादा रास्ता |
अकादमी पुरस्कार पाने वाले कहानी-संग्रह
| वर्ष | संग्रह | रचनाकार |
|---|---|---|
| 1982 | चश्मदीद गवाह | मूलचन्द प्राणेश |
| 1985 | एक दुनिया म्हारी | सांवर दइया |
| 1989 | जमारो | यादवेन्द्र शर्मा चन्द्र |
| 1993 | अधूरा सपना | नृसिंह राजपुरोहित |
4. नाटक व एकांकी
नाटक
राजस्थानी का पहला नाटक — केसर विलास (शिवचंद भरतिया, 1900)।
| नाटककार | नाटक |
|---|---|
| भगवतीप्रसाद दारूका | बाल विवाह · मारवाड़ी मोसर · सगाई जंजाल |
| बालकृष्ण लाहौरी | कन्या बिक्री |
| नारायणदास अग्रवाल | बाल ब्याव को फार्स |
| मदन मोहन सिद्ध | जयपुर की ज्योनार |
अर्जुनदेव चारण
- आज के नाटककारों में प्रमुख नाम; नाटककार के साथ नाट्य निर्देशक भी।
- धरमजुद्ध (नाटक संग्रह) को 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार।
- नाटक ➜ धरमजुद्ध · जातरा · आज रा दोय नाटक · बोल म्हारी मछली इतो पाणी · संकरियो · गवाड़ी · मुगती गाथा · जेठवा ऊजळी; कविता — रिन्दरोही।
पुरस्कृत नाटक
| वर्ष | नाटक | रचनाकार |
|---|---|---|
| 1992 | धरमजुद्ध | अर्जुनदेव चारण |
| 2000 | कंकू कबंध | जयप्रकाश पंड्या ज्योतिपुंज |
| 2006 | पूर्णमिदम् | लक्ष्मीनारायण रंगा |
एकांकी
राजस्थानी का पहला एकांकी माना जाने वाला — वृद्ध विवाह विदूषण (1930, शोभाचंद)।
| रचनाकार | एकांकी |
|---|---|
| श्रीनाथ मोदी | गोमा जाट (गाँव सुधार) |
| गोविन्दलाल माथुर | सतरंगणी (7 एकांकियों का संग्रह) |
| श्रीमंत कुमार व्यास | मुंशीजी री डायरी (हास्य एकांकी) · गादड़ी री पूंछ · पोपाबाई रो सालो · मासी सूं मसखरी |
| आज्ञाचन्द्र भंडारी | देश र वास्तै · देशभगत भामासा |
5. निबंध, समालोचना व संस्मरण
निबंध
| निबंधकार | कृतियाँ |
|---|---|
| ब्रजलाल बियाणी | मोगरा कली · बड़ी फजर को दीवो |
| रावत सारस्वत | थोथी बातां |
| सुमेरसिंह शेखावत | माणक मोती |
| सौभाग्य सिंह शेखावत | चिणौ · वचन · चाट्ट · जीभां री लपालोल |
समालोचना
| रचना | रचनाकार |
|---|---|
| दौर अर दायरो | नंद भारद्वाज |
| हेमाणी | तेजसिंह जोधा |
| सिरजण री परख | पुरूषोतम आसोपा |
| समकालीन राजस्थानी कविता: संवेदन अर सिल्प | कुंदन माली |
रेखाचित्र और संस्मरण
| रचना | रचनाकार |
|---|---|
| फरामल | श्रीलाल नथमल जोशी |
| बां दना की बातां | श्रीमती कमला कमलेश |
| उणियारा ओल्यूं तणा | अस्तअली मलकाण |
1996 का साहित्य अकादमी पुरस्कार नेमनारायण जोशी की ओल्यूं री अखियातां को दिया गया।
6. साहित्य की विशिष्ट शैलियाँ
राजस्थानी साहित्य में कुछ शैलियाँ ऐसी हैं जिनका नाम ही उस रचना का रूप बता देता है — रासो, ख्यात, वचनिका, विगत, वेलि, दवावैत, बात; और कुछ छन्द/रूप — झमाल, झूलणा, परची, प्रकाश, मरस्या, रूपक, साखी, सिलोका, दूहा।
7. इतिहास से जुड़ी शैलियाँ
| शैली | क्या है | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| रासो | राजा के यश, जीत, लड़ाइयों और शूरता का गुणगान करने वाली काव्य-रचना | पृथ्वीराज रासो (चन्दबरदाई) · बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह) · सगत रासो (गिरधर आसिया) · खुमाण रासो (दलपत विजय) · रतन रासो (कुंभकर्ण) · हम्मीर रासो (जोधराज) |
| ख्यात | राजा अपनी शान, उपलब्धियों और ख़ास कामों का लेखा लिखवाकर अपना इतिहास सहेजते थे — उसी को ख्यात कहा गया; इनकी लिखावट अकबर (1556–1605) के राज से शुरू मानी जाती है | मुहणौत नैणसी री ख्यात · दयालदास री ख्यात |
| वचनिका | संस्कृत के “वचन” शब्द से; गद्य-पद्य के मेल की तुकांत रचना जिसे चम्पू भी कहते हैं; पंक्तियों के अंत में अनुप्रास (कुछ अपवाद); भेद — पद्यबद्ध और गद्यबद्ध | अचलदास खींची री वचनिका (शिवदास गाडण) · राठौड़ महेसदासोत री वचनिका (खिड़िया जगा) |
| विगत | किसी विषय पर ब्योरेवार ऐतिहासिक जानकारी — राजा, उसका परिवार और उसकी राजनीतिक-सामाजिक छवि | नैणसी की मारवाड़ रा परगना री विगत — हर परगने की आबादी, रेख, भूमि की किस्में, फ़सलें, सिंचाई के साधन |
8. छन्द व काव्य-रूप
| रूप | क्या है | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| झमाल | राजस्थानी काव्य का मात्रिक छन्द — पहले पूरा दोहा, फिर पाँचवें चरण में दोहे का अंतिम चरण दोहराया जाता है | राव इन्द्रसिंह री झमाल |
| झूलणा | झमाल जैसा ही मात्रिक छन्द; 24 अक्षर वाले वर्णिक ढाँचे के आख़िर में यगण आता है | अमरसिंह राठौड़ रा झूलणा · राव सुरताण देवेड़ा रा झूलणा · राजा गजसिंह रा झूलणा |
| परची | संतों द्वारा रचित पद्यबद्ध रचना; संत-महात्माओं का जीवन-परिचय | संत रैदास की परची · संत पीपा की परची · संत दादू री परची · मीराबाई री परची |
| प्रकाश | किसी व्यक्ति, राजवंश या प्रसंग की उपलब्धियों को उजागर करने वाली कृति | सूरज प्रकाश (करणीदान) · राजप्रकाश (किशोरदास) · महायश प्रकाश (आशिया मानसिंह) |
9. पत्र-पत्रिकाएँ
| पत्रिका (स्थान) | प्रकाशक या सम्पादक |
|---|---|
| मरुभारती (पिलानी) | बिड़ला एज्यूकेशन ट्रस्ट, पिलानी (झुंझुनूं) |
| लहर (अजमेर) | प्रकाश जैन द्वारा |
| परम्परा (चौपासनी) | राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी (जोधपुर) |
| माणक (जोधपुर) | माणक प्रकाशन, जोधपुर (पदम मेहता) |
इनके अलावा सूची में ये पत्रिकाएँ भी हैं — जाणकारी (जोधपुर), जलमभोम (बीकानेर), मरवण (बीकानेर), ओलखाण (जोधपुर), बतलावण (पिलानी), कचनार (अंता, बारां), गोरबंद (लक्ष्मणगढ़), पिणहारी (जयपुर), ईसरलाट (जयपुर)।
रिवीजन पॉइंटर्स
- पहला राजस्थानी उपन्यास कनक सुन्दर (शिवचंद भरतिया) है; दूसरा चाचा (नारायण अग्रवाल) और पहला ऐतिहासिक उपन्यास कंवल पूजा (सत्येन जोशी) है।
- अकादमी पुरस्कार पाने वाले उपन्यास छह हैं — पहला 1978 में मेवे रा रूंख (अन्नाराम सुदामा) और आख़िरी 2015 में।
- पहली कहानी विश्रांत प्रवास (1904), पहला नाटक केसर विलास (1900) और पहला एकांकी वृद्ध विवाह विदूषण (1930, शोभाचंद) है।
- अर्जुनदेव चारण के नाटक संग्रह धरमजुद्ध को 1992 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
- 1996 का साहित्य अकादमी पुरस्कार नेमनारायण जोशी की ओल्यूं री अखियातां को दिया गया।
- रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत 1962 से 1971 तक विधानसभा सदस्य और 1972 से 1978 तक राज्यसभा सदस्य रहीं।
- रासो राजा के यश और शूरता का गान है; ख्यात-लेखन अकबर (1556–1605) के राज से शुरू माना जाता है।
- वचनिका गद्य-पद्य के मेल की रचना है, जिसे चम्पू भी कहते हैं; उदाहरण अचलदास खींची री वचनिका (शिवदास गाडण)।
- झमाल में पूरे दोहे के बाद पाँचवें चरण में दोहे का अंतिम चरण दोहराया जाता है; झूलणा 24 अक्षर वाले वर्णिक ढाँचे का छन्द है।
अगले भाग में राजस्थान पर लिखने वाले अन्य रचनाकार — प्राचीन विद्वान, कुम्भा के दरबार के विद्वान और इतिहासकार।
पिछला भाग: राजस्थानी साहित्यकार व कृतियाँ: आधुनिक काल — कवि (भाग 2) एवं आधुनिक गद्य साहित्य (भाग 1)
अगला भाग: अन्य साहित्यकार व कृतियाँ: प्राचीन विद्वान एवं कुम्भा व उनके विद्वान
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