राजस्थान के मंदिर: अजमेर संभाग एवं जोधपुर व बीकानेर संभाग (भाग 1) – Rajasthan Art and Culture Chapter 33

अजमेर, जोधपुर और बीकानेर संभाग के प्रमुख मंदिर — पुष्कर, मेड़ता, ओसियां, जैसलमेर और बाड़मेर तक।

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In this chapter (10 sections)
  1. पुष्कर के मंदिर
  2. अजमेर के जैन व अन्य
  3. नागौर व डीडवाना-कुचामन
  4. भीलवाड़ा के मंदिर
  5. टोंक के मंदिर
  6. जोधपुर के मंदिर
  7. ओसियां व घंटियाला
  8. जैसलमेर के मंदिर
  9. बाड़मेर व बालोतरा
  10. रैपिड फायर तथ्य

मंदिरों के सवाल अक्सर एक ही ढंग से पूछे जाते हैं: मंदिर कहाँ है, किसने बनवाया और किस उपनाम से जाना जाता है। इसलिए हर मंदिर को स्थान, निर्माता और उपनाम की तिकड़ी में याद करना सबसे सुरक्षित रहता है। इस भाग में पुष्कर के मंदिरों से शुरू करके अजमेर, नागौर, भीलवाड़ा, टोंक, जोधपुर, ओसियां, जैसलमेर और बाड़मेर-बालोतरा के मंदिर क्रमवार दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के मंदिर, 7 चॉक-बोर्ड चित्र, 20 नक्शे, 25 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. पुष्कर के मंदिर

ब्रह्मा मंदिर

  • स्थान ➜ पुष्कर झील के पास (अजमेर)
  • काल ➜ 14वीं सदी का मंदिर; आदि शंकराचार्य के पुनरुद्धार की परम्परा जुड़ी है
  • वर्तमान रूप ➜ 1809 ई. में बना — बनवाने वाले गोकुल चंद पारीक

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

राजस्थान के अन्य ब्रह्मा मंदिर — छींछ (बाँसवाड़ा) और आसोतरा (बालोतरा)। आसोतरा में ब्रह्मा जी के साथ सावित्री की प्रतिमा भी है; निर्माण 1984 ई. में खेताराम जी महाराज के हाथों हुआ।

मंदिरकिसने / कबविशेष
सावित्री मंदिरनिर्माण भी गोकुलचन्द पारीक कापुष्कर के दक्षिण की रत्नागिरी पहाड़ी पर; सावित्री — ब्रह्मा की पहली पत्नी — का मंदिर; यहाँ उनकी पुत्री सरस्वती की मूर्ति भी; भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को मेला; 3 मई 2016 को 700 मीटर लंबा रोपवे बना — राजस्थान का तीसरा रोपवे
गायत्री मंदिर—किंवदंती: यज्ञ पूरा करने हेतु ब्रह्मा ने गायत्री को दूसरी पत्नी बनाया; पुष्कर के उत्तर में पहाड़ी पर
रंगनाथ जी मंदिरसेठ पूरनमल, 1844 ई.रामानुज शाखा का वैष्णव मंदिर; दक्षिण भारतीय (द्रविड़) शैली, राजस्थान का सबसे बड़ा; गोपुरम के लिए प्रसिद्ध

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: सावित्री = ब्रह्मा की पहली पत्नी (पहाड़ी पर, दक्षिण); गायत्री = दूसरी (पहाड़ी पर, उत्तर)।

ध्यान दें: पुष्कर में सबसे बड़े — द्रविड़ शैली में रंगनाथ जी (राजस्थान का सबसे बड़ा) और वैष्णव शैली में बैकुण्ठनाथ (पुष्कर का सबसे विशाल)।

2. अजमेर के जैन व अन्य

मंदिरस्थानविशेष
सोनी जी की नसियांअजमेरजैन मंदिर, प्रतिमा ऋषभदेव / आदिनाथ की; मूलचन्द सोनी ने 1864–65 में शुरू करवाया, पुत्र टीकमचन्द सोनी के समय पूरा; पास के हॉल में “स्वर्ण नगरी” — यह सिंहकूट चैत्यालय है; लाल पत्थर के बाहरी भाग के कारण “लालमंदिर”
नारेली दिगम्बर जैन मंदिरअजमेरमदार के पास
राधा-कृष्ण मंदिरकिशनगढ़राधा (गौरवर्ण) और कृष्ण (घनश्याम वर्ण) की प्रतिमाएँ; पूजा निम्बार्क पद्धति से

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: सोनी जी की नसियां के तीन नाम — लालमंदिर, सिंहकूट चैत्यालय (स्वर्ण नगरी हॉल) और नसियां।

3. नागौर व डीडवाना-कुचामन

नागौर

मंदिरस्थानविशेष
चारभुजानाथ / मीरां मंदिरमेड़ता सिटीनिर्माता राव दूदा, जो मीराबाई के दादा थे; मूलतः चारभुजानाथ का मंदिर, मीरां की स्मृतियों और उनकी प्रतिमा के कारण “मीरां मंदिर”; तुलसीदास और रैदास की प्रतिमाएँ भी
नीलकण्ठेश्वर मंदिरजसनगर (मेड़ता)गुर्जर-प्रतिहार शैली
गुसाईं मंदिरजुंजालावामन अवतार का मंदिर
दधिमाता मंदिरगोठ मांगलोदप्रतिहार शैली का नागर मंदिर

डीडवाना-कुचामन

मंदिरस्थानविशेष
खुण्डियास धामपरबतसर के पास (अजमेर-डीडवाना सीमा)बाबा रामदेव का मंदिर — “द्वितीय रामदेवरा / मिनी रामदेवरा”
तेजाजी का मंदिरपरबतसर—
कैवाय माताकिणसरिया (परबतसर)—

ध्यान दें: मीरां मंदिर = मूल में चारभुजानाथ का, बनवाने वाले राव दूदा (मीरां के दादा)।

4. भीलवाड़ा के मंदिर

मंदिरस्थानविशेष
उंडेश्वर मंदिरबिजौलियाभूमिज शैली का शिव मंदिर, 12वीं सदी; पास में महाकालेश्वर और हजारेश्वर मंदिर भी
तिलस्वां महादेवभीलवाड़ाचर्म रोग और कुष्ठ पीड़ितों का इलाज होता है
बाईसा महारानी मंदिरगंगापुरमहारानी गंगाबाई (ग्वालियर के महादजी सिंधिया की रानी) का मंदिर, जिसे महादजी ने ही बनवाया; यहीं उनकी छतरी भी है
सिंगोली श्याम मंदिरभीलवाड़ा—

5. टोंक के मंदिर

कल्याण जी मंदिर — डिग्गी

  • विष्णु की चतुर्भुज प्रतिमा; मुस्लिम इन्हें “कलह पीर” कहकर पुकारते हैं।
  • निर्माण राजा डिग्व ने करवाया; मान्यता — भगवान विष्णु ने उसका रोग दूर कर कल्याण किया, इसीलिए नाम कल्याण जी पड़ा।
  • मेले ➜ श्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या) और भाद्रपद शुक्ल एकादशी।

अन्य

स्थलस्थानविशेष
हाथी भाटाककोड़ गाँव, उनियारा रोडटोंक से 22 किमी; एक विशाल चट्टान तराशकर बना सजीव पत्थर का हाथी, जिसकी देह पर नल-दमयंती की कहानी खुदी है; पास में प्राकृतिक बावड़ी, जिसमें सदा पानी रहता है
देवनारायण मंदिरदेवधाम जोधपुरिया—

6. जोधपुर के मंदिर

मंदिरकिसने / कबविशेष
महामन्दिरमहाराजा मानसिंह, 1805 ई.राजस्थान में नाथ-पंथ का मुख्य केन्द्र; विशाल मंदिर 84 खंभों पर टिका
रावण मंदिरमंडोरप्रतिमा के कलाकार चुन्नीलाल
ज्वालामुखी मंदिरजोधपुर दुर्ग की पंचेटिया पहाड़ीचट्टान को काटकर बनी महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा
अधरशिला रामदेव मंदिरजोधपुरखड़ी चट्टान पर बना; यहाँ बाबा रामदेव के पगल्यों (चरण-चिह्न) की पूजा होती है

मंडोर गार्डन

स्मारककिसने बनवायाक्या है
वीरों की दालान (Hall of Heroes)महाराजा अजीतसिंहदेवी चामुण्डा, महिषासुर मर्दिनी, गोसाईं जी तथा पाँच लोकदेवता — पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मेहाजी, गोगाजी — की मूर्तियाँ
देवताओं की साल (Fame of God)महाराजा अभयसिंहआरंभ में गणेश-वंदना; फिर जलंधरनाथ, शिव-पार्वती, राम, सूर्य और पंचमुखी ब्रह्मा की मूर्तियाँ खुदी हैं
काला-गोरा भैरव मंदिरमंडोर—

7. ओसियां व घंटियाला

ओसियां के मंदिर महामारू शैली में बने, प्रतिहारकालीन हैं और 8वीं से 12वीं सदी के बीच के हैं। इसी कारण इसे “राजस्थान का भुवनेश्वर” कहा जाता है।

वर्गप्रमुख मंदिर
जैनमहावीर मंदिर
वैष्णवहरिहर मंदिर, सूर्य मंदिर
शाक्तसच्चियाय माता मंदिर, पीपला माता मंदिर
मंदिरविशेष
महावीर मंदिरगुर्जर-प्रतिहार राजा वत्सराज ने 8वीं सदी में बनवाया; राजस्थान में अब तक का प्राचीनतम जैन मंदिर
सूर्य मंदिर“राजस्थान का कोणार्क” और “राजस्थान का ब्लैक पैगोडा”
हरिहर मंदिरविष्णु और शिव के मिले रूप हरिहर के 8वीं सदी के प्रतिहारकालीन 3 मंदिर; राजस्थान में पंचायतन शैली का सबसे पहला उदाहरण

8. जैसलमेर के मंदिर

शहर और आसपास

मंदिरस्थानविशेष
गज मंदिरगजरूप सागर के पासशासक गजसिंह के निधन पर महारानी रूपकंवर ने उनकी याद में गजरूपेश्वर नाम का शिवालय बनवाया
अमरसागर जैन मंदिरअमरसागर तालाब1871 ई. में हिम्मतराम बाफना ने बनवाया
लोद्रवा का पार्श्वनाथ मंदिरलोद्रवामहमूद गजनवी के हमले में क्षतिग्रस्त; 1618 ई. में पुनर्निर्माण धीरूशाह भंसाली (जैन श्रावक) ने करवाया; गर्भगृह में काले पत्थर की पार्श्वनाथ प्रतिमा; पंचायतन शैली — चारों कोनों पर चार शिखरबंद मंदिर

जैसलमेर दुर्ग के मंदिर

मंदिरविशेष
लक्ष्मीनाथ मंदिरलक्ष्मी-विष्णु की युग्म प्रतिमा; जैसलमेर के शासक लक्ष्मीनारायण को ही राज्य का शासक मानते थे और स्वयं को उनका दीवान
टीकमराय मंदिरमहारावल जगतसिंह ने अपनी माता की स्मृति में बनवाया; आदिनारायण का यह मंदिर यहाँ “टीकमराय” नाम से जाना जाता है
पार्श्वनाथ व ऋषभदेव मंदिरशिल्प, सौन्दर्य और विशालता में आबू के दिलवाड़ा मंदिरों के बराबर; 1416 ई. में महारावल लक्ष्मणसिंह के समय बने; शिल्पकार “धन्ना”
संभवनाथ मंदिरजैसलमेर के जैन परिवारों ने बनवाया; भूगर्भ-कक्ष में जिनदत्त सूरी ज्ञान भंडार

9. बाड़मेर व बालोतरा

किराडू के मंदिर — “राजस्थान का खजुराहो”

  • बाड़मेर में हाथमा गाँव के पास पहाड़ी पर 11वीं–12वीं सदी के शिव व विष्णु मंदिर; प्राचीन काल में यह परमारों की राजधानी थी।
  • शैली भारतीय नागर। 1161 ई. के शिलालेख में यह स्थान “किरात कूप” कहा गया है।
  • रामायण, महाभारत और सागर-मंथन के दृश्यों की मूर्तियों से “मूर्तियों का खजाना”; मिथुन मूर्तियों से “राजस्थान का खजुराहो”। एक स्त्री को हाथ में किताब लिए दिखाती मूर्ति भी है।
  • सोमेश्वर मंदिर ➜ किराडू के खंडहरों में सबसे बड़ा और सुंदर
  • शैली ➜ गुर्जर-प्रतिहार (महामारू) का अंतिम और सबसे भव्य
  • खास ➜ बरामदे में 3 शिलालेख; सामने पहाड़ी पर त्रिपाद महिषासुर मर्दिनी
मंदिरस्थानविशेष
कपालेश्वर महादेवचौहटनअज्ञातवास के आख़िरी दिन पांडवों ने यहीं काटे; निकट बिशन पगलिया में विष्णु के चरण-चिह्न पूजे जाते हैं
सुईया मेलाचौहटनहर चार वर्ष में पौष अमावस्या को; “अर्द्धकुम्भ” नाम से प्रसिद्ध
आलम जी का मंदिर (आलम जी का धोरा)धोरीमन्ना क्षेत्र“घोड़ों का तीर्थ” — घोड़े पालने वाले बेहतर नस्ल के बछेड़ों के लिए अपनी घोड़ियाँ यहाँ लाते हैं; साथ ही आलम पशु मेला लगता है

बालोतरा

मंदिरस्थानविशेष
रणछोड़राय जीखेड़लूनी किनारे; लगभग 850 ई. का, गुर्जर-प्रतिहार शैली; मज़बूत परकोटा; रेबारी समाज के आराध्य भूरिया बाबा और खेड़िया बाबा हैं
श्री नाकोड़ा भैरवनाकोड़ाभाकरिया पहाड़ी पर जैन तीर्थ; 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की प्रतिमा; भक्त उन्हें “हाथ की हजूर”, “जागती जोत” कहते हैं; 12वीं सदी में हमलावरों ने तोड़ा, 1429 ई. में पुनर्निर्माण; वि.सं. 1511 में आचार्य कीर्तिरत्न सूरि ने भैरव स्थापित किए; जिनदत्त नामक श्रावक को प्रतिमा सिणधरी के तालाब से मिली, प्रतिष्ठा आचार्य उदयसागर ने की; पौष कृष्ण दशमी को मेला और चाँदी के रथ में शोभायात्रा; प्राचीन नाम मेवानगर
हल्देश्वर महादेवपीपलूद गाँवछप्पन की पहाड़ियों में; “राजस्थान का लघु माउण्ट आबू”

10. रैपिड फायर तथ्य

  • पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर ➜ वर्तमान रूप 1809 ई. में, बनवाने वाले गोकुल चंद पारीक
  • रंगनाथ जी मंदिर (पुष्कर) ➜ द्रविड़ शैली, राजस्थान का सबसे बड़ा; सेठ पूरनमल, 1844 ई.
  • मीरां मंदिर, मेड़ता ➜ मूल में चारभुजानाथ का; बनवाने वाले राव दूदा, मीरां के दादा
  • कल्याण जी मंदिर ➜ डिग्गी (टोंक), विष्णु की चतुर्भुज प्रतिमा; निर्माण राजा डिग्व ने करवाया
  • महामन्दिर (जोधपुर) ➜ महाराजा मानसिंह, 1805 ई.; नाथ-पंथ का मुख्य केन्द्र, 84 खंभों पर टिका
  • ओसियां ➜ «राजस्थान का भुवनेश्वर»; महावीर मंदिर अब तक का प्राचीनतम जैन मंदिर, वत्सराज ने 8वीं सदी में बनवाया
  • किराडू (बाड़मेर) ➜ «राजस्थान का खजुराहो»; सबसे बड़ा और सुंदर सोमेश्वर मंदिर
  • नाकोड़ा ➜ भाकरिया पहाड़ी पर पार्श्वनाथ का जैन तीर्थ; 1429 ई. में पुनर्निर्माण

अगले भाग में पाली के रणकपुर और सिरोही-आबू के दिलवाड़ा से लेकर बीकानेर संभाग के मंदिर और सभी संभागों के पैनोरमा व स्मारक।

पिछला भाग: राजस्थान के मंदिर: जयपुर संभाग

अगला भाग: राजस्थान के मंदिर: जोधपुर व बीकानेर संभाग (भाग 2) एवं पैनोरमा व स्मारक

इन्हें भी पढ़ें: मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे · प्रतिहार वंश (गुर्जर–प्रतिहार)

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न राजस्थान के मंदिर के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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