राजस्थान के लोकगीत: विरह व शृंगार के गीत – Rajasthan Art and Culture Chapter 51

लोकगीतों के वर्ग, विवाह के गीत, जन्म-मृत्यु के गीत और क्षेत्रवार गीत व राग, PYQ सहित।

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In this chapter (30 sections)
  1. लोकगीत और उनके वर्ग
  2. लोकगीत पर विद्वानों के कथन
  3. रिकॉर्ड, पहचान और रस
  4. विवाह के गीत
  5. विवाह-गीतों की सूची
  6. विवाह से पहले
  7. बारात, तोरण और भोज
  8. विदाई के गीत
  9. जन्म और मृत्यु के गीत
  10. जन्म और बाल-गीत
  11. मृत्यु के गीत
  12. धार्मिक लोकगीत
  13. देवी-देवताओं के गीत
  14. रातिजगा और कुकड़ी
  15. पवाड़े और जांगड़ा
  16. विरह व शृंगार के गीत
  17. विरह के गीत
  18. शृंगार के गीत
  19. प्रेमाख्यान वाले गीत
  20. ऋतु, श्रम और जन-जीवन
  21. ऋतु और त्योहार के गीत
  22. श्रम और कामकाज के गीत
  23. महफ़िल और पेशेवर गीत
  24. मशहूर बोल वाले गीत
  25. मरुस्थलीय गीत
  26. पर्वतीय गीत
  27. मैदानी क्षेत्र के गीत
  28. क्षेत्र-विशेष के गीत
  29. लोकगीतों के राग
  30. रैपिड फायर तथ्य

लोकगीत हर मौक़े, हर ऋतु और हर इलाक़े की अपनी आवाज़ हैं, इसीलिए परीक्षा में गीत का नाम उसके अवसर से जोड़कर पूछा जाता है। इस भाग में लोकगीतों के वर्ग और विद्वानों के कथन, विवाह के गीत, जन्म और मृत्यु के गीत, धार्मिक गीत, विरह-शृंगार के गीत, ऋतु और श्रम के गीत, फिर मरुस्थलीय, पर्वतीय और मैदानी क्षेत्र के गीत तथा राग क्रम से दिए गए हैं। जहाँ पिछली परीक्षाओं में प्रश्न आया है, वहाँ परीक्षा का नाम साथ में लिखा गया है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के लोकगीत, 7 चॉक-बोर्ड चित्र, 8 नक्शे, 25 फ्लैशकार्ड और 15 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
माइंड मैप खोलें ➜

1. लोकगीत और उनके वर्ग

लोक संगीत की नींव लोकगीत हैं। राजस्थान में ये अलग-अलग मौक़ों पर लोग मिल-जुलकर गाते आए हैं, और यहाँ गायन की कई शैलियाँ चलन में रही हैं — इनमें मांड, लंगा और मांगणियार सबसे प्रमुख हैं।

याद रखें: जीवन का ऐसा कोई प्रसंग या इलाका नहीं जिसका अपना लोकगीत न हो — इसीलिए हमारी संस्कृति में इनका इतना महत्त्व माना गया है।

2. लोकगीत पर विद्वानों के कथन

कथन का भावकिसने कहा
संस्कृति की जीती-जागती तस्वीर — लोकगीत उसके मुँह बोलते चित्र हैंदेवेन्द्र सत्यार्थी
लोकगीत जनता की भाषा हैं और हमारी संस्कृति के पहरेदार हैंमहात्मा गांधी [परीक्षा: पशु परिचर 2024 — “लोकगीत लोगों की भाषा हैं, संस्कृति के संरक्षक हैं” — कथन किसका? ➜ महात्मा गांधी]
लोकगीतों में पर्वत, नदियाँ, धरती और फ़सलें गाती हैंमहात्मा गांधी

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: प्रश्न बनता है: “लोकगीत जनता की ज़ुबान और संस्कृति के रखवाले हैं” — यह किसका कथन माना गया? उत्तर: महात्मा गांधी।

3. रिकॉर्ड, पहचान और रस

  • लोकदेवियों में सबसे लम्बा गीत ➜ जीण माता का गीत
  • लोकदेवताओं में सबसे लम्बा गीत ➜ रामदेव जी का गीत
  • लोकगीतों के संग्रह का नाम ➜ चौबाली

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

संगीत को पेशा बनाने वाली जातियाँ

ध्यान दें: “चौबाली” = लोकगीतों का संग्रह/संस्मरण। लोकगीतों में शृंगार रस के गीत सबसे ज़्यादा हैं और उनमें भी बिछोह (वियोग) वाले अधिक।

4. विवाह के गीत

ब्याह के लगभग हर पड़ाव का अपना गीत है। नीचे की शाखाओं में उन्हें रस्मों के क्रम में बाँटा गया है।

5. विवाह-गीतों की सूची

  • ब्याह के समय गाए जाने वाले सभी गीतों को सामान्य रूप से परणेत गीत कहते हैं।
  • घुड़चढ़ी, तोरण, जीमणवार, हथलेवा जैसी हर रस्म के लिए अलग गीत मिलते हैं।

6. विवाह से पहले

गीतकब / कौन गाता है
मोरियारसभरा गीत — सगाई हो चुकी है पर ब्याह टलता जा रहा है, तब कन्या अपनी बेचैनी गाती है
बरसोविवाह से पहले दूल्हे को आशीर्वाद देने के आयोजन में दूल्हे के परिवार की महिलाएँ
पीठीवर-वधू को नहलाने से पहले उबटन (पीठी) लगाते समय
बिंदोला / बंदोलावर को रिश्तेदार भोजन पर बुलाते हैं; वहाँ से लौटते समय

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: बार-बार पूछा गया: ब्याह से पहले वर को रिश्तेदार भोजन पर बुलाते हैं और घर लौटते हुए जो गीत गाते हैं — बिंदोला।

7. बारात, तोरण और भोज

गीतअवसर
चाक गीतकुम्हार के यहाँ चाक-पूजन के लिए गई स्त्रियों का गीत
घोड़ी / घोड़ोलियोघुड़चढ़ी की रस्म और वर निकासी के समय
जला / जलो जलालवधू-पक्ष की स्त्रियाँ बारातियों का ठिकाना देखने निकलती हैं
कुकड़लूदूल्हे के तोरण तक पहुँचने पर लड़की वालों की स्त्रियाँ

8. विदाई के गीत

  • कोयल / कोयलड़ी ➜ परिवार की महिलाएँ दुल्हन की विदाई पर गाती हैं।
  • अरणी ➜ ब्याह के बाद बेटी ससुराल जाती है, तब यह विदाई गीत गाया जाता है; अरणी एक फूल का नाम है।
  • आंबो ➜ पुत्री की विदाई का गीत।

9. जन्म और मृत्यु के गीत

ज़िन्दगी के दो छोर — जन्म पर बधाई और दुलार के गीत, मृत्यु पर शोक और स्मृति के गीत।

10. जन्म और बाल-गीत

गीतविशेषता
बधवा / बधवणाकाम सफल होने की “बधाई” का गीत; लंगा-मांगणियार जन्म से पहले अपने यजमान के द्वार पर भी गाते हैं
जच्चापुत्र जन्म के उत्सव में; इसमें गर्भवती की प्रशंसा, वंश-वृद्धि का गुणगान और नवजात के लिए मंगलकामना
होलरजन्म पर नवजात को सम्बोधित कर गाया जाता है
हालरियालड़के के जन्म पर लंगा या मांगणियार कलाकार गाते हैं

11. मृत्यु के गीत

गीतकिसकी मृत्यु पर
हर के हिंडोले (हर रौ हिंडोळौ)वृद्ध व्यक्ति
छेड़े (छेड़ा)शिशु — “टाबर की मौत पर” [परीक्षा: REET 2023 — टाबर (शिशु) की मृत्यु पर गाया जाने वाला लोकगीत? ➜ छेड़ा]
मरसियाकिसी प्रसिद्ध व्यक्ति — मारवाड़ में

12. धार्मिक लोकगीत

देवी-देवताओं की भक्ति के गीत राजस्थान के जन-जीवन से जुड़े हैं। इनमें सबसे अधिक गीत गणगौर के अवसर पर गाए जाते हैं।

13. देवी-देवताओं के गीत

गीतकिसकी आराधना / कहाँ
तेजा गीतमारवाड़ के जाट-किसान हल जोतते समय लोकदेवता तेजाजी की याद में प्रेरक गीत गाते हैं
तीलणमारवाड़ में स्त्रियाँ तेजाजी की आराधना में गाती हैं
गणगौर गीतराज्य में सबसे ज़्यादा गीत गणगौर के अवसर पर गाए जाते हैं
लांगुरियाकरौली में कैलादेवी के भक्त अलगोजे के साथ भक्ति गीत गाते हैं; कैलादेवी का मेला इसका आकर्षण [परीक्षा: 2022 — किस मेले की पहचान है लांगुरिया गीत? ➜ कैलादेवी का मेला]

14. रातिजगा और कुकड़ी

  • रातिजगा ➜ शुभ अवसरों पर आराध्य देवी-देवता के गीत गाते हुए रात भर जागना।
  • कुकड़ी का गीत ➜ रातिजगा का आख़िरी गीत; भोर होते समय गाया जाता है।

रात्रि जागरण का क्रम

  1. विनायक जी (पहले)
  2. देवी-देवताओं के गीत
  3. कुकड़ी का गीत (भोर में)

15. पवाड़े और जांगड़ा

  • पवाड़े ➜ किसी महापुरुष की वीरता का बखान करने वाले गाथा-गीत; राजपूतों में ज़्यादा चलन। लोकदेवता पाबूजी के पवाड़े खूब प्रचलित हैं।
  • जांगड़ा ➜ “जंग” यानी युद्ध; वीरता के गीतों को कहा जाता है। परम्परा से ये राजा-महाराजाओं के सामने समूह में पूरे जोश और ऊँचे स्वर से गाए जाते थे।
  • अम्बावाड़ी और अमर सिंह गाथा भी जांगड़ा गीत हैं।

16. विरह व शृंगार के गीत

राजस्थान में शृंगार रस के गीत सबसे अधिक हैं और उनमें भी वियोग शृंगार का वर्णन ज़्यादा मिलता है — पति परदेस, पत्नी पीहर या ससुराल की प्रतीक्षा में।

17. विरह के गीत

गीतक्या कहता है
कुरजांविरहिणी पति तक संदेश पहुँचाने के लिए कुरजां पक्षी को “विरहिणियों का पक्षी” मानकर पुकारती है; बोल — “कुरजां ए म्हारो भंवर मिला दयो ए”
झोरावापति के परदेस चले जाने की जुदाई में जैसलमेर अंचल की स्त्रियाँ इसे गाती हैं
सुवटियाभील स्त्री का विरह गीत — तोते (सुवटिया) के सहारे पति को संदेश
पीपलीवर्षा ऋतु का गीत; मुख्यतः शेखावाटी, पर मारवाड़ व बीकानेर में भी; प्रेयसी परदेसी पति को बुलाती है

18. शृंगार के गीत

गीतविषय / अवसर
कांगसियोबालों के शृंगार का वर्णन; मारवाड़ी में कंघे को “कांगसियो” कहते हैं
काजलियाकाजल सोलह शृंगारों में से एक; होली पर चंग के साथ गाया जाता है
हींडो / हिन्डोल्याश्रावण में झूला झूलते समय स्त्रियाँ गाती हैं; नवविवाहिताओं और कुँवारी कन्याओं में अधिक चलन

केसरिया बालम — राज्य गीत

  • इसमें परदेस गए पति को घर लौटने का संदेश दिया जाता है; पति की राह देखती नारी की विरह-व्यथा है। यह रजवाड़ी गीत है।
  • मांड राग में गाया जाता है; “केसरिया बालम पधारो म्हारे देस” को मांड राग से ख्याति मिली।
  • अल्ला जिलाई बाई (बीकानेर) इसके गायन के लिए प्रसिद्ध थीं — उन्हें “मांड गायिका” के रूप में अमरत्व इसी गीत से मिला। [परीक्षा: LDC 2024 — “केसरिया बालम आओ नि पधारो महारे देश” को अमर करने वाली मांड गायिका? ➜ अल्ला जिलाई बाई]

19. प्रेमाख्यान वाले गीत

  • मूमल ➜ जैसलमेर का प्रसिद्ध शृंगारिक गीत। मूमल लोद्रवा की राजकुमारी थी और महेन्द्र अमरकोट का राजकुमार; गीत इन्हीं दोनों के ऐतिहासिक प्रेम की कथा कहता है। गीत की एक पंक्ति — “म्हारी बरसाले री मूमल, हालो नी ऐ आलीजे रे देश”।
  • जैसलमेर के लोद्रवा में काक नदी (अब सूखी) के तट पर वह जगह है जहाँ मूमल और महेन्द्र मिलते थे — “मूमल की मेड़ी“।
  • ढोला-मारू ➜ सिरोही का लोकगीत, मुख्यतः ढाढ़ी गाते हैं। कथा के नायक ढोला नरवर के राजा नल के बेटे थे, नायिका मारू पूगल के राजा पिंगल की बेटी।
  • ब्याह के समय ढोला (साल्हकुँवर) की उम्र 3 वर्ष और मारू (मारवणी) की लगभग डेढ़ वर्ष थी।
गीतपात्र / भावक्षेत्र
गिन्दोलीजगमाल (राव मल्लीनाथ के बेटे) और गुजरात के बेग की बेटी गिन्दोली का प्रेम-प्रसंगमारवाड़
रतनराणासोढ़ा राणा (अमरकोट, अब पाकिस्तान में) की गाथापश्चिमी राजस्थान
राणा काछबालम्बा गीत — अमरकोट का राजकुमार राणा काछबा और पाटण की राजकुमारी पृथ्वी कंवर का प्रेम व विवाह—
काछबाप्रेमगीतपश्चिमी राजस्थान

20. ऋतु, श्रम और जन-जीवन

वर्षा, सर्दी, फाल्गुन के रंग और रोज़ की मेहनत — रेगिस्तानी जीवन के लगभग हर पहलू पर गीत हैं।

21. ऋतु और त्योहार के गीत

गीतऋतु / अवसर
बादली / बदलीवर्षा में बादल को पुकारते हुए; शेखावाटी, मेवाड़, हाड़ौती
तीजतीज पर श्रावण के प्राकृतिक सौन्दर्य के चित्रण
सियाळोसर्दी (सियाळा) ऋतु में
चौमासावर्षा के चार महीनों का गीत

22. श्रम और कामकाज के गीत

गीतकब / किसके बारे में
इण्डोणीकुएँ-पनघट जाती स्त्रियों का गीत; मारवाड़ में सबसे ज़्यादा चलता है — पंक्ति: “म्हारी सवा लाख री लूम…”
जीरोपत्नी किसान पति से जीरे की खेती न करने की गुज़ारिश करती है; पश्चिमी राजस्थान में सर्वाधिक
बिणजारासवाल-जवाब वाला गीत; पत्नी पति को व्यापार के लिए विदेश जाने की प्रेरणा देती है; ऊँटों पर लम्बी यात्रा में कतारिये भी गाते हैं

23. महफ़िल और पेशेवर गीत

गीतविशेषता
कलाली (कलाळी)कलाली की चंचलता व शृंगारिकता; सवाल-जवाब में एक छैल कलाळी को साथ चलने के लिए मनाता है (कलाळ = शराब निकालने-बेचने वाली जाति)
दारूड़ीठाकुरों-सामंतों की महफ़िल में शराब पीते समय पेशेवर गायक
गढ़ गीतसामंतों-दरबारों की महफ़िल में; रजवाड़ी या पेशेवर गीत; ढोली, दमामी, मुसलमान व तवायफ़ें गाती हैं

सहरिया जनजाति के गीत

  • हींडा ➜ सहरिया जनजाति दीपावली पर गाती है।
  • लहंगी और आल्हा — सहरिया जनजाति वर्षा ऋतु में गाती है।

उत्तरी मेवाड़ और मेवाड़ के गीत

  • हमसीढो ➜ उत्तरी मेवाड़ में भील स्त्री-पुरुष मिलकर जिसे गाते हैं, वह नामी गीत।
  • हरणी / लोवड़ी ➜ दीपावली से क़रीब 15 दिन पहले मेवाड़ में बच्चों की टोलियाँ घर-घर घूमकर गाती हैं; लड़कों वाले गीत लोवड़ी / हरणी और लड़कियों वाले घड़ल्यों कहलाते हैं।

24. मशहूर बोल वाले गीत

गीतशुरुआती बोल
अंजन की सिटीअंजन की सिटी में म्हारो मन डोले
पोदीनालूळ जाई रे हरिया पोदिना
तालरिया-मगरियातालरिया मगरिया रे मोरू बाई लारे
बाजूबंद री लूमटूटे बाजूबंद री लूम, लड़ उलझी

25. मरुस्थलीय गीत

  • जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, फलोदी और जोधपुर (पश्चिमी राजस्थान) के लोकगीत मधुर और आकर्षक होते हैं।
  • खुले वातावरण के कारण इनमें ऊँचे स्वर, लम्बी धुन और स्वर अधिक होते हैं।
  • इस श्रेणी के गीत ➜ केवड़ा, घूघरी, मूमल, रतनराणों, पीपली, कुरजां आदि।

26. पर्वतीय गीत

  • ये गीत दक्षिण के पहाड़ी इलाकों में अधिक हैं: बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़, सलूम्बर, सिरोही और आबू।
  • इन पहाड़ों में गरासिया, भील और मीणा जैसी जनजातियाँ रहती हैं; उनके गीतों की चाल सीधी-सादी होती है और स्वर थोड़े।
  • मेवाड़ के पहाड़ी गीत ➜ थारी ऊँटा री असवारी, नाव री असवारी, पटेल्या, बिछियो, लालर, माछर, नोखीला आदि।

27. मैदानी क्षेत्र के गीत

  • समतल मैदान में आने वाले ज़िले ➜ धौलपुर, करौली, भरतपुर, डीग, खैरथल-तिजारा, अलवर, कोटपूतली-बहरोड़, कोटा और जयपुर।
  • भाषा और स्वर-रचना में विविधता; भक्ति और शृंगार रस के गीत अधिक।
  • कच्छीघोड़ी नृत्य के समय गाए जाने वाले गीत — बीन्द, रसाला, रमगारिया आदि।

28. क्षेत्र-विशेष के गीत

क्षेत्रगीत
मेवात (अलवर-भरतपुर)हिचकी, रतवाई
डीग-भरतपुर-धौलपुररसिया (होली, बम वाद्य)
करौलीलांगुरिया
जैसलमेरमूमल, झोरावा

29. लोकगीतों के राग

  • अधिकतर दोहों की धुन देस और सोरठ राग पर बनी है।
  • पेशेवर जातियों के युद्ध के समय के वीर-रस गीत सिन्धू व मारू राग पर आधारित थे।
  • राग खमयती किसी भी समय गाया जा सकता है (उसके साथ एक और राग का नाम भी यही बात कहता है)।
रागसमय
भैरव, आशासुबह 6 से 8 बजे
तोड़ी, गूढ़ मल्हारसुबह 10 से दोपहर 12 बजे
सारंगदोपहर 12 से 2 बजे
सुहबदोपहर 2 से 4 बजे

दो राग जिन्हें अलग से याद रखें

  • राग यमन ➜ भारतीय संगीत का शुरुआती पर बहुत अहम राग; इसे कल्याण और ईमन भी कहते हैं।
  • राग भैरव ➜ सुबह (प्रभात बेला) का नामी राग; यह भैरव थाट से निकला है, इसीलिए उस थाट का आश्रय राग कहलाता है।

30. रैपिड फायर तथ्य

  • लोकदेवियों में सबसे लम्बा गीत ➜ जीण माता का
  • लोकदेवताओं में सबसे लम्बा गीत ➜ रामदेव जी का
  • लोकगीतों का संग्रह ➜ चौबाली
  • लोकगीत जनता की भाषा, संस्कृति के रक्षक ➜ महात्मा गांधी का कथन
  • ब्याह से पहले वर को भोजन पर बुलाने पर लौटते समय ➜ बिंदोला
  • शिशु (टाबर) की मृत्यु पर ➜ छेड़ा
  • लांगुरिया गीत ➜ करौली में कैलादेवी के मेले की पहचान
  • सबसे अधिक गीत किस अवसर के ➜ गणगौर
  • केसरिया बालम को अमर करने वाली मांड गायिका ➜ अल्ला जिलाई बाई (बीकानेर)

अगले भाग में लोक वाद्यों के तीन वर्ग और घन वाद्य तथा अवनद्ध (ताल) वाद्य — धातु की तश्तरियों, घंटियों, घुँघरुओं और खाल से मढ़े ढोल-नगाड़ों की पहचान।

पिछला भाग: लोक गायन शैलियाँ एवं प्रमुख संगीतज्ञ व कलाकार

अगला भाग: राजस्थान के लोक वाद्यंत्र: घन वाद्य एवं अवनद्ध (ताल) वाद्य

इन्हें भी पढ़ें: लोक गायन शैलियाँ, संगीत घराने व संगीतज्ञ · राजस्थान की प्रथाएँ व रीति रिवाज

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न राजस्थान के लोकगीत के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
इस विषय का माइंड मैप ➜Complete Rajasthan GK पास देखें

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