साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएँ: संगीत, नृत्य व कला संस्थान – Rajasthan Art and Culture Chapter 11

राजस्थान की साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाएँ — शहर, स्थापना-वर्ष, अकादमियाँ, पत्रिकाएँ और पुरस्कार।

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In this chapter (15 sections)
  1. शहर से संस्था
  2. स्थापना की समय-रेखा
  3. उदयपुर की दो संस्थाएँ
  4. सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र
  5. जयपुर के कला संस्थान
  6. जोधपुर व बीकानेर की संस्थाएँ
  7. जयपुर-उदयपुर की अकादमियाँ
  8. बीकानेर की राजस्थानी अकादमी
  9. अन्य भाषाओं की संस्थाएँ
  10. जोधपुर के शोध संस्थान
  11. जयपुर के शोध संस्थान व पीठ
  12. चूरू का शोध संस्थान
  13. पुस्तकालय व ग्रन्थ भण्डार
  14. पुरस्कार व पत्रिकाएँ
  15. रैपिड फायर तथ्य

संस्थाओं वाला अध्याय तीन सवालों में बँट जाता है — संस्था कहाँ है, कब बनी और किसने बनाई। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और बीकानेर वे शहर हैं जिनके इर्द-गिर्द ज़्यादातर नाम घूमते हैं। इस भाग में पहले शहर के अनुसार संस्थाओं की सूची और स्थापना की समय-रेखा है, फिर कला संस्थान, अकादमियाँ, शोध संस्थान, ग्रन्थ भण्डार और अन्त में पुरस्कार व पत्रिकाएँ क्रम से दी गई हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएँ, 5 चॉक-बोर्ड चित्र, 5 नक्शे, 26 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. शहर से संस्था

शहरसंस्थाएँ
जयपुरराजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्स, रवीन्द्र मंच, संगीत संस्थान, कत्थक केन्द्र, गुरुनानक संस्थान, रामप्रकाश थिएटर, ललित कला अकादमी, जवाहर कला केन्द्र, श्रीराम चरण प्राच्य विद्यापीठ; हिन्दी ग्रन्थ, संस्कृत, उर्दू, ब्रज भाषा, सिंधी अकादमियाँ; राजस्थानी प्रचारिणी सभा; पं. झाबरमल शर्मा शोध संस्थान; अम्बेडकर पीठ (मूण्डला)
उदयपुरभारतीय लोक कला मण्डल, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, राजस्थान साहित्य अकादमी
जोधपुरसंगीत नाटक अकादमी, रूपायन संस्थान (बोरुन्दा), प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, राजस्थानी शोध संस्थान (चौपासनी), जगदीश सिंह गहलोत शोध संस्थान

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

2. स्थापना की समय-रेखा

काल / क्रमघटनाविवरण
1857राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्सजयपुर — रामसिंह द्वितीय; पहले “मदरसा-ए-हुनरी”
1878रामप्रकाश थिएटरजयपुर — हिन्दी भाषा का पहला नाटक भवन
1950राजस्थान संगीत संस्थानजयपुर
22 फ़रवरी 1952भारतीय लोक कला मण्डलउदयपुर — देवीलाल सामर

… शेष 18 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: 1950 के दशक में तीन अकादमियाँ — संगीत नाटक (1957), ललित कला (1957) और साहित्य (1958)। 1979 में दो अकादमियाँ एक साथ — उर्दू और सिंधी।

3. उदयपुर की दो संस्थाएँ

भारतीय लोक कला मण्डल

  • स्थापना ➜ 22 फ़रवरी 1952
  • संस्थापक ➜ देवीलाल सामर
  • खास काम ➜ लोक कलाओं और कठपुतली का प्रचार-संरक्षण

मक़सद — लुप्त होती कलाओं को ज़िन्दा रखना, उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाना और कलाकारों को सहारा देकर कला से जोड़े रखना।

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र

  • लोक कलाओं और कलाकारों को सहारा देने के लिए केन्द्र सरकार के (तत्कालीन मानव संसाधन मंत्रालय के) संस्कृति विभाग ने देश भर में 7 क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र खड़े किए; उदयपुर वाला उनमें शामिल है।
  • बागोर की हवेली में चलने वाले इस केन्द्र की स्थापना 1986 में हुई।
  • कार्यक्षेत्र ➜ राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा।

4. सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र

  • केन्द्र के संस्कृति मंत्रालय की निगरानी में चलने वाली स्वायत्त संस्था।
  • स्थापना मई 1979 में; मुख्यालय नई दिल्ली।
  • तीन क्षेत्रीय केन्द्र ➜ पश्चिम में उदयपुर, दक्षिण में हैदराबाद, पूर्वोत्तर में गुवाहाटी।

ध्यान दें: पश्चिम का क्षेत्रीय केन्द्र उदयपुर में है — यानी राजस्थान में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र और CCRT का क्षेत्रीय केन्द्र, दोनों उदयपुर में।

5. जयपुर के कला संस्थान

संस्थास्थापनाकाम / ख़ास बात
राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्स1857शुरू में रामसिंह द्वितीय ने इसे “मदरसा-ए-हुनरी” नाम दिया; आगे चलकर लोग इसे महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्स कहने लगे
रवीन्द्र मंच1963रामनिवास बाग में; रवीन्द्र मंच सोसायटी नृत्य-नाटक-संगीत के कार्यक्रमों के लिए परिसर के भवन बुक करती और चलाती है
राजस्थान संगीत संस्थान1950नृत्य, वाद्य और गायन का प्रशिक्षण
जयपुर कत्थक केन्द्र1978 (कार्य 19 मई 1979 से)कथक नृत्य का प्रशिक्षण और शिक्षा

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जवाहर कला केन्द्र

  • स्थापना ➜ 1989, राजस्थान सरकार द्वारा
  • उद्घाटन ➜ 8 अप्रैल 1993 — राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा
  • वास्तुकार ➜ चार्ल्स कोरिया — डिज़ाइन 1986, भवन 1993

इसकी नौ कलादीर्घाओं में कोरिया की मौलिकता और अलंकारिक सोच साफ़ दिखती है।

ट्रिक: जवाहर कला केन्द्र के तीन वर्ष — डिज़ाइन 1986, स्थापना 1989, उद्घाटन/इमारत 1993। नौ दीर्घाएँ = नौ वर्ग।

ध्यान दें: रामप्रकाश थिएटर (1878) और स्कूल ऑफ आर्ट (1857) दोनों रामसिंह द्वितीय के; रवीन्द्र मंच (1963) रामनिवास बाग में।

6. जोधपुर व बीकानेर की संस्थाएँ

संस्थास्थानब्योरा
राजस्थान संगीत नाटक अकादमीजोधपुर1957 में बनी; संगीत, नृत्य और नाट्य के प्रचार-संरक्षण का काम; पत्रिका “रंगयोग”
रूपायन संस्थानबोरुन्दा (जोधपुर)1960 में कोमल कोठारी ने बनाया; पत्रिका “लोक संस्कृति”; पश्चिमी राजस्थान की लोक कला, संस्कृति और लोक कलाकारों के उत्थान का काम
रवीन्द्र रंगमंचबीकानेररंगमंच (नाम ही दर्ज)

7. जयपुर-उदयपुर की अकादमियाँ

अकादमीस्थानस्थापनापत्रिका / पुरस्कार
राजस्थान साहित्य अकादमीउदयपुर28 जनवरी 1958सर्वोच्च पुरस्कार मीरां पुरस्कार; मासिक पत्रिका मधुमति
राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमीजयपुर15 जुलाई 1969विभिन्न विषयों की विश्वविद्यालय-स्तरीय किताबें और संदर्भ ग्रन्थ छापती है
राजस्थान संस्कृत अकादमीजयपुर1980सर्वोच्च पुरस्कार माघ पुरस्कार; पत्रिकाएँ स्वर मंगला और स्वर माला

8. बीकानेर की राजस्थानी अकादमी

  • अकादमी ➜ राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
  • स्थापना ➜ 25 जनवरी 1983
  • सर्वोच्च पुरस्कार ➜ सूर्यमल्ल मिश्रण शिखर पुरस्कार

प्रचलित कथन — “दीपै वांरा देस ज्यांरा साहित जगमगै” यानी जिन देशों का साहित्य जगमगाता है, वे देश दमकते हैं।

संस्थास्थानपत्रिका
राजस्थानी ज्ञानपीठ संस्थानबीकानेरराजस्थानी गंगा
राजस्थानी प्रचारिणी सभाजयपुरमरूवाणी
राजस्थानी भाषा बाल साहित्य प्रकाशनलक्ष्मणगढ़ (सीकर)पणिहारी

9. अन्य भाषाओं की संस्थाएँ

संस्थास्थानब्योरा
राजस्थानी पंजाबी अकादमीश्रीगंगानगर7 मार्च 2006 को स्थापित
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी-फ़ारसी शोध संस्थानटोंकनिदेशालय अरबी-फ़ारसी शोध संस्थान नाम से राज्य सरकार ने इसे 4 दिसम्बर 1978 को शुरू किया; 1988 में नया नाम मिला
जैन विश्व भारतीलाडनूँ (डीडवाना-कुचामन)जैन आचार्य तुलसी ने बनाई; डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा; पत्रिका तुलसी प्रज्ञा

10. जोधपुर के शोध संस्थान

संस्थास्थापनाब्योरा
राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान1954 (जयपुर) → 1958 (जोधपुर)निर्देशन मुनि जिन विजय का; काम — हस्तलिखित ग्रन्थों को जुटाना, सहेजना, सम्पादित करना और छापना
राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी1955पत्रिका “परम्परा”
जगदीश सिंह गहलोत शोध संस्थान1975जोधपुर

11. जयपुर के शोध संस्थान व पीठ

संस्थाब्योरा
पं. झाबरमल शर्मा शोध संस्थान, जयपुरस्थापना 2000
अम्बेडकर पीठ, मूण्डलामूण्डला गाँव (जमवारामगढ़ तहसील) में 14 अप्रैल 2007 को बनी; डॉ. भीमराव अम्बेडकर की सामाजिक और बौद्धिक सोच को आगे बढ़ाती है; शासी परिषद के पदेन अध्यक्ष राजस्थान के मुख्यमंत्री

12. चूरू का शोध संस्थान

लोक संस्कृति नगर श्री शोध संस्थान चूरू में स्थित है। (इसका संग्रहालय “संग्रहालय” अध्याय में पढ़ें।)

13. पुस्तकालय व ग्रन्थ भण्डार

पुस्तकालय / भण्डारस्थानब्योरा
जिनभद्रसूरि ज्ञान भण्डारजैसलमेर — सोनारगढ़ दुर्गप्राचीन ग्रन्थों का भण्डार
भादरिया लाइब्रेरीपोकरण (जैसलमेर) — भादरियाराय माता मन्दिर परिसरएशिया के निजी (गैर-सरकारी) पुस्तकालयों में सबसे बड़ा; संत हरिवंश सिंह निर्मल की देन; 9 लाख किताबें; 4 हज़ार पाठकों के बैठने का इन्तज़ाम
कुतुबखानाअलवरअलवर के महाराजा विनयसिंह ने बनवाया

14. पुरस्कार व पत्रिकाएँ

पत्रिकासंस्था
मधुमति (मासिक)राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर
स्वर मंगला · स्वर मालाराजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर
नखलिस्तान (त्रैमासिक)राजस्थान उर्दू अकादमी, जयपुर
ब्रज शतदल (त्रैमासिक)राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी, जयपुर
सर्वोच्च पुरस्कारअकादमी
मीरां पुरस्कारराजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर
माघ पुरस्कारराजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर
सूर्यमल्ल मिश्रण शिखर पुरस्कारराजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर

15. रैपिड फायर तथ्य

  • भारतीय लोक कला मण्डल ➜ उदयपुर, 22 फ़रवरी 1952; संस्थापक देवीलाल सामर
  • राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्स ➜ जयपुर, 1857; पहला नाम «मदरसा-ए-हुनरी»
  • रामप्रकाश थिएटर ➜ 1878, जयपुर; हिन्दी भाषा का पहला नाटक भवन
  • राजस्थान साहित्य अकादमी ➜ उदयपुर, 28 जनवरी 1958; सर्वोच्च पुरस्कार मीरां पुरस्कार; पत्रिका मधुमति
  • राजस्थान संस्कृत अकादमी ➜ जयपुर, 1980; माघ पुरस्कार; पत्रिकाएँ स्वर मंगला व स्वर माला
  • राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ➜ बीकानेर, 25 जनवरी 1983; सूर्यमल्ल मिश्रण शिखर पुरस्कार
  • जवाहर कला केन्द्र ➜ डिज़ाइन 1986, स्थापना 1989, उद्घाटन 1993; वास्तुकार चार्ल्स कोरिया
  • रूपायन संस्थान ➜ बोरुन्दा (जोधपुर), 1960, कोमल कोठारी; पत्रिका «लोक संस्कृति»
  • भादरिया लाइब्रेरी ➜ पोकरण (जैसलमेर); एशिया की सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी, संत हरिवंश सिंह निर्मल की देन

अगले भाग में राजस्थानी चित्रकला का परिचय — उसकी शुरुआत, नामकरण, लोक-चित्रकला के रूप, भित्ति चित्रण की विधियाँ और मेवाड़ स्कूल की शुरुआत।

पिछला भाग: राजस्थानी शब्दावली: खेत व खेती

अगला भाग: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ: चित्रकला का परिचय एवं मेवाड़ स्कूल (भाग 1)

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पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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