संस्थाओं वाला अध्याय तीन सवालों में बँट जाता है — संस्था कहाँ है, कब बनी और किसने बनाई। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और बीकानेर वे शहर हैं जिनके इर्द-गिर्द ज़्यादातर नाम घूमते हैं। इस भाग में पहले शहर के अनुसार संस्थाओं की सूची और स्थापना की समय-रेखा है, फिर कला संस्थान, अकादमियाँ, शोध संस्थान, ग्रन्थ भण्डार और अन्त में पुरस्कार व पत्रिकाएँ क्रम से दी गई हैं।
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1. शहर से संस्था
| शहर | संस्थाएँ |
|---|---|
| जयपुर | राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्स, रवीन्द्र मंच, संगीत संस्थान, कत्थक केन्द्र, गुरुनानक संस्थान, रामप्रकाश थिएटर, ललित कला अकादमी, जवाहर कला केन्द्र, श्रीराम चरण प्राच्य विद्यापीठ; हिन्दी ग्रन्थ, संस्कृत, उर्दू, ब्रज भाषा, सिंधी अकादमियाँ; राजस्थानी प्रचारिणी सभा; पं. झाबरमल शर्मा शोध संस्थान; अम्बेडकर पीठ (मूण्डला) |
| उदयपुर | भारतीय लोक कला मण्डल, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, राजस्थान साहित्य अकादमी |
| जोधपुर | संगीत नाटक अकादमी, रूपायन संस्थान (बोरुन्दा), प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, राजस्थानी शोध संस्थान (चौपासनी), जगदीश सिंह गहलोत शोध संस्थान |
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2. स्थापना की समय-रेखा
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1857 | राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्स | जयपुर — रामसिंह द्वितीय; पहले “मदरसा-ए-हुनरी” |
| 1878 | रामप्रकाश थिएटर | जयपुर — हिन्दी भाषा का पहला नाटक भवन |
| 1950 | राजस्थान संगीत संस्थान | जयपुर |
| 22 फ़रवरी 1952 | भारतीय लोक कला मण्डल | उदयपुर — देवीलाल सामर |
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ट्रिक: 1950 के दशक में तीन अकादमियाँ — संगीत नाटक (1957), ललित कला (1957) और साहित्य (1958)। 1979 में दो अकादमियाँ एक साथ — उर्दू और सिंधी।
3. उदयपुर की दो संस्थाएँ
भारतीय लोक कला मण्डल
- स्थापना ➜ 22 फ़रवरी 1952
- संस्थापक ➜ देवीलाल सामर
- खास काम ➜ लोक कलाओं और कठपुतली का प्रचार-संरक्षण
मक़सद — लुप्त होती कलाओं को ज़िन्दा रखना, उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचाना और कलाकारों को सहारा देकर कला से जोड़े रखना।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र
- लोक कलाओं और कलाकारों को सहारा देने के लिए केन्द्र सरकार के (तत्कालीन मानव संसाधन मंत्रालय के) संस्कृति विभाग ने देश भर में 7 क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र खड़े किए; उदयपुर वाला उनमें शामिल है।
- बागोर की हवेली में चलने वाले इस केन्द्र की स्थापना 1986 में हुई।
- कार्यक्षेत्र ➜ राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा।
4. सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र
- केन्द्र के संस्कृति मंत्रालय की निगरानी में चलने वाली स्वायत्त संस्था।
- स्थापना मई 1979 में; मुख्यालय नई दिल्ली।
- तीन क्षेत्रीय केन्द्र ➜ पश्चिम में उदयपुर, दक्षिण में हैदराबाद, पूर्वोत्तर में गुवाहाटी।
ध्यान दें: पश्चिम का क्षेत्रीय केन्द्र उदयपुर में है — यानी राजस्थान में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र और CCRT का क्षेत्रीय केन्द्र, दोनों उदयपुर में।
5. जयपुर के कला संस्थान
| संस्था | स्थापना | काम / ख़ास बात |
|---|---|---|
| राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्स | 1857 | शुरू में रामसिंह द्वितीय ने इसे “मदरसा-ए-हुनरी” नाम दिया; आगे चलकर लोग इसे महाराजा स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्स कहने लगे |
| रवीन्द्र मंच | 1963 | रामनिवास बाग में; रवीन्द्र मंच सोसायटी नृत्य-नाटक-संगीत के कार्यक्रमों के लिए परिसर के भवन बुक करती और चलाती है |
| राजस्थान संगीत संस्थान | 1950 | नृत्य, वाद्य और गायन का प्रशिक्षण |
| जयपुर कत्थक केन्द्र | 1978 (कार्य 19 मई 1979 से) | कथक नृत्य का प्रशिक्षण और शिक्षा |
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जवाहर कला केन्द्र
- स्थापना ➜ 1989, राजस्थान सरकार द्वारा
- उद्घाटन ➜ 8 अप्रैल 1993 — राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा
- वास्तुकार ➜ चार्ल्स कोरिया — डिज़ाइन 1986, भवन 1993
इसकी नौ कलादीर्घाओं में कोरिया की मौलिकता और अलंकारिक सोच साफ़ दिखती है।
ट्रिक: जवाहर कला केन्द्र के तीन वर्ष — डिज़ाइन 1986, स्थापना 1989, उद्घाटन/इमारत 1993। नौ दीर्घाएँ = नौ वर्ग।
ध्यान दें: रामप्रकाश थिएटर (1878) और स्कूल ऑफ आर्ट (1857) दोनों रामसिंह द्वितीय के; रवीन्द्र मंच (1963) रामनिवास बाग में।
6. जोधपुर व बीकानेर की संस्थाएँ
| संस्था | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| राजस्थान संगीत नाटक अकादमी | जोधपुर | 1957 में बनी; संगीत, नृत्य और नाट्य के प्रचार-संरक्षण का काम; पत्रिका “रंगयोग” |
| रूपायन संस्थान | बोरुन्दा (जोधपुर) | 1960 में कोमल कोठारी ने बनाया; पत्रिका “लोक संस्कृति”; पश्चिमी राजस्थान की लोक कला, संस्कृति और लोक कलाकारों के उत्थान का काम |
| रवीन्द्र रंगमंच | बीकानेर | रंगमंच (नाम ही दर्ज) |
7. जयपुर-उदयपुर की अकादमियाँ
| अकादमी | स्थान | स्थापना | पत्रिका / पुरस्कार |
|---|---|---|---|
| राजस्थान साहित्य अकादमी | उदयपुर | 28 जनवरी 1958 | सर्वोच्च पुरस्कार मीरां पुरस्कार; मासिक पत्रिका मधुमति |
| राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी | जयपुर | 15 जुलाई 1969 | विभिन्न विषयों की विश्वविद्यालय-स्तरीय किताबें और संदर्भ ग्रन्थ छापती है |
| राजस्थान संस्कृत अकादमी | जयपुर | 1980 | सर्वोच्च पुरस्कार माघ पुरस्कार; पत्रिकाएँ स्वर मंगला और स्वर माला |
8. बीकानेर की राजस्थानी अकादमी
- अकादमी ➜ राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर
- स्थापना ➜ 25 जनवरी 1983
- सर्वोच्च पुरस्कार ➜ सूर्यमल्ल मिश्रण शिखर पुरस्कार
प्रचलित कथन — “दीपै वांरा देस ज्यांरा साहित जगमगै” यानी जिन देशों का साहित्य जगमगाता है, वे देश दमकते हैं।
| संस्था | स्थान | पत्रिका |
|---|---|---|
| राजस्थानी ज्ञानपीठ संस्थान | बीकानेर | राजस्थानी गंगा |
| राजस्थानी प्रचारिणी सभा | जयपुर | मरूवाणी |
| राजस्थानी भाषा बाल साहित्य प्रकाशन | लक्ष्मणगढ़ (सीकर) | पणिहारी |
9. अन्य भाषाओं की संस्थाएँ
| संस्था | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| राजस्थानी पंजाबी अकादमी | श्रीगंगानगर | 7 मार्च 2006 को स्थापित |
| मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी-फ़ारसी शोध संस्थान | टोंक | निदेशालय अरबी-फ़ारसी शोध संस्थान नाम से राज्य सरकार ने इसे 4 दिसम्बर 1978 को शुरू किया; 1988 में नया नाम मिला |
| जैन विश्व भारती | लाडनूँ (डीडवाना-कुचामन) | जैन आचार्य तुलसी ने बनाई; डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा; पत्रिका तुलसी प्रज्ञा |
10. जोधपुर के शोध संस्थान
| संस्था | स्थापना | ब्योरा |
|---|---|---|
| राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान | 1954 (जयपुर) → 1958 (जोधपुर) | निर्देशन मुनि जिन विजय का; काम — हस्तलिखित ग्रन्थों को जुटाना, सहेजना, सम्पादित करना और छापना |
| राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी | 1955 | पत्रिका “परम्परा” |
| जगदीश सिंह गहलोत शोध संस्थान | 1975 | जोधपुर |
11. जयपुर के शोध संस्थान व पीठ
| संस्था | ब्योरा |
|---|---|
| पं. झाबरमल शर्मा शोध संस्थान, जयपुर | स्थापना 2000 |
| अम्बेडकर पीठ, मूण्डला | मूण्डला गाँव (जमवारामगढ़ तहसील) में 14 अप्रैल 2007 को बनी; डॉ. भीमराव अम्बेडकर की सामाजिक और बौद्धिक सोच को आगे बढ़ाती है; शासी परिषद के पदेन अध्यक्ष राजस्थान के मुख्यमंत्री |
12. चूरू का शोध संस्थान
लोक संस्कृति नगर श्री शोध संस्थान चूरू में स्थित है। (इसका संग्रहालय “संग्रहालय” अध्याय में पढ़ें।)
13. पुस्तकालय व ग्रन्थ भण्डार
| पुस्तकालय / भण्डार | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| जिनभद्रसूरि ज्ञान भण्डार | जैसलमेर — सोनारगढ़ दुर्ग | प्राचीन ग्रन्थों का भण्डार |
| भादरिया लाइब्रेरी | पोकरण (जैसलमेर) — भादरियाराय माता मन्दिर परिसर | एशिया के निजी (गैर-सरकारी) पुस्तकालयों में सबसे बड़ा; संत हरिवंश सिंह निर्मल की देन; 9 लाख किताबें; 4 हज़ार पाठकों के बैठने का इन्तज़ाम |
| कुतुबखाना | अलवर | अलवर के महाराजा विनयसिंह ने बनवाया |
14. पुरस्कार व पत्रिकाएँ
| पत्रिका | संस्था |
|---|---|
| मधुमति (मासिक) | राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर |
| स्वर मंगला · स्वर माला | राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर |
| नखलिस्तान (त्रैमासिक) | राजस्थान उर्दू अकादमी, जयपुर |
| ब्रज शतदल (त्रैमासिक) | राजस्थान ब्रज भाषा अकादमी, जयपुर |
| सर्वोच्च पुरस्कार | अकादमी |
|---|---|
| मीरां पुरस्कार | राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर |
| माघ पुरस्कार | राजस्थान संस्कृत अकादमी, जयपुर |
| सूर्यमल्ल मिश्रण शिखर पुरस्कार | राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर |
15. रैपिड फायर तथ्य
- भारतीय लोक कला मण्डल ➜ उदयपुर, 22 फ़रवरी 1952; संस्थापक देवीलाल सामर
- राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट्स ➜ जयपुर, 1857; पहला नाम «मदरसा-ए-हुनरी»
- रामप्रकाश थिएटर ➜ 1878, जयपुर; हिन्दी भाषा का पहला नाटक भवन
- राजस्थान साहित्य अकादमी ➜ उदयपुर, 28 जनवरी 1958; सर्वोच्च पुरस्कार मीरां पुरस्कार; पत्रिका मधुमति
- राजस्थान संस्कृत अकादमी ➜ जयपुर, 1980; माघ पुरस्कार; पत्रिकाएँ स्वर मंगला व स्वर माला
- राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ➜ बीकानेर, 25 जनवरी 1983; सूर्यमल्ल मिश्रण शिखर पुरस्कार
- जवाहर कला केन्द्र ➜ डिज़ाइन 1986, स्थापना 1989, उद्घाटन 1993; वास्तुकार चार्ल्स कोरिया
- रूपायन संस्थान ➜ बोरुन्दा (जोधपुर), 1960, कोमल कोठारी; पत्रिका «लोक संस्कृति»
- भादरिया लाइब्रेरी ➜ पोकरण (जैसलमेर); एशिया की सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी, संत हरिवंश सिंह निर्मल की देन
अगले भाग में राजस्थानी चित्रकला का परिचय — उसकी शुरुआत, नामकरण, लोक-चित्रकला के रूप, भित्ति चित्रण की विधियाँ और मेवाड़ स्कूल की शुरुआत।
पिछला भाग: राजस्थानी शब्दावली: खेत व खेती
अगला भाग: राजस्थान की चित्रकला शैलियाँ: चित्रकला का परिचय एवं मेवाड़ स्कूल (भाग 1)
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