हवेली और छतरी ऐसे विषय हैं जिनमें सवाल अक्सर उपनाम और गिनती से बनते हैं — किस शहर की कौन-सी पहचान, और किस छतरी में कितने खम्भे। इस भाग में हवेली स्थापत्य, छतरी की परिभाषा और खम्भों से पहचान के बाद उदयपुर से चूरू तक की हवेलियाँ दी गई हैं। फिर उदयपुर, बूँदी, जयपुर, अलवर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर और राजस्थान के बाहर की छतरियाँ आती हैं।
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1. हवेली स्थापत्य
हवेली बनाने की परम्परा राजस्थान में बहुत पुरानी है, पर हवेलियों का सबसे ज़्यादा निर्माण 17वीं और 18वीं शताब्दी में हुआ। इनकी शैली को विशुद्ध हिन्दू शैली माना जाता है।
- सबसे ज़्यादा हवेलियाँ ➜ शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनूं, चूरू)
- बनवाने वाले ➜ सेठ-साहूकार, व्यापार से जुड़े परिवार और सामंत
- निर्माण का चरम ➜ 17वीं–18वीं शताब्दी
तीन उपनाम — परीक्षा में बार-बार
| उपनाम | स्थान |
|---|---|
| हवेलियों की नगरी | जैसलमेर |
| हज़ार हवेलियों की नगरी | बीकानेर |
| भित्ति चित्रों वाली हवेलियाँ | शेखावाटी |
ट्रिक: जैसलमेर = सिर्फ़ “हवेलियों की नगरी”; बीकानेर के आगे “हज़ार” जुड़ता है। याद रखें — “बीकानेर बड़ा, इसलिए हज़ार”।
2. छतरी क्या है
छतरी एक स्मारक है जो किसी शासक, रानी, वीर, संत या प्रिय व्यक्ति की याद में प्रायः उसके दाह-संस्कार वाले स्थान पर बनाया जाता है। इसमें खम्भों पर टिका गुम्बद होता है — इसलिए छतरियों की पहचान अक्सर उनके खम्भों की गिनती से की जाती है।
- राजवंशों के अपने स्मारक-स्थल थे — जैसे मेवाड़ का आहड़, कछवाहों का गैटोर, जोधपुर का मंडोर, बीकानेर का देवीकुण्ड सागर।
- छतरियाँ केवल शासकों की नहीं ➜ धाय, सेनापति, संत, वीर, यहाँ तक कि घोड़े (चेतक) और कुत्ते की भी बनीं।
- कई छतरियाँ अपने भित्ति चित्रों (नेहड़ा, अलवर) या स्थापत्य (84 खम्भे, बूँदी) के लिए प्रसिद्ध हैं।
3. खम्भों से पहचान
| खम्भे | छतरी | स्थान |
|---|---|---|
| 84 | चौरासी खम्भों की छतरी (धाय-पुत्र देवा की स्मृति) | देवपुरा, बूँदी |
| 80 | मूसी महारानी की छतरी | अलवर |
| 32 | जगन्नाथ कछवाहा की छतरी | मांडलगढ़, भीलवाड़ा |
| 16 | अमरसिंह राठौड़ की छतरी | नागौर |
… शेष 8 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: मांडलगढ़ में दो छतरियाँ — 32 खम्भे जगन्नाथ कछवाहा के, 8 खम्भे सांगा के। “32 का जगन्नाथ, 8 का सांगा“।
ध्यान दें: चित्तौड़ दुर्ग में जयमल की छतरी 6 खम्भों की, पर कल्लाजी व पत्ता की 4-4 खम्भों की।
4. राजवंशों के स्मारक-स्थल
| राजवंश / रियासत | छतरियों का स्थल | विशेष |
|---|---|---|
| मेवाड़ — सिसोदिया | आहड़ (महासतियाँ), उदयपुर | अमरसिंह प्रथम की छतरी सबसे प्रसिद्ध |
| बूँदी — हाड़ा | केसरबाग, बूँदी | 66 छतरियाँ; सबसे पुरानी राव दूदा की |
| कोटा — हाड़ा | क्षार बाग, कोटा | हाड़ा शासकों की छतरियाँ |
| जयपुर — कछवाहा | गैटोर, नाहरगढ़ की तलहटी | सबसे चर्चित — सवाई जयसिंह की |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ध्यान दें: जोधपुर में शासकों की छतरियाँ मंडोर में और रानियों की पंचकुण्ड में — दोनों मंडोर क्षेत्र में ही हैं।
5. उदयपुर की हवेलियाँ
बागोर की हवेली
- स्थान ➜ गणगौर घाट के समीप, पिछोला के तट पर
- बनवाने वाले ➜ अमरचन्द बड़वा — मेवाड़ के प्रधानमंत्री रहे
- संग्रहालय ➜ पगड़ियों का संग्रहालय — यहाँ दुनिया की सबसे बड़ी पगड़ी रखी है; साथ में कठपुतलियों का संग्रहालय भी
6. चित्तौड़ दुर्ग की हवेलियाँ
चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर मेवाड़ के प्रसिद्ध वीरों, मंत्रियों और ठिकानों की हवेलियाँ बनी हैं —
- भामाशाह की हवेली
- जयमल व पत्ता की हवेलियाँ
- राव रणमल की हवेली
- आल्हा काबरा की हवेली
… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
7. हाड़ौती की हवेलियाँ
| हवेली | स्थान |
|---|---|
| बड़े देवता की हवेली | कोटा |
| झाला ज़ालिम सिंह की हवेली | कोटा |
| सूमल्ल सिघण की हवेली | बूँदी |
8. अजमेर संभाग की हवेलियाँ
| हवेली | स्थान |
|---|---|
| नवाबों की हवेली | अजमेर |
| केसरी सिंह बारहठ की हवेली | शाहपुरा (भीलवाड़ा) |
9. जयपुर की हवेलियाँ
- धाईभाई की हवेली
- नाटाणी की हवेली
- पुरोहित प्रतापनारायण जी की हवेली
10. सीकर की हवेलियाँ
सीकर ज़िले में और
| हवेली | स्थान |
|---|---|
| मोतीलाल बियाणी की हवेली | सीकर |
| पंसारी हवेली | श्रीमाधोपुर (सीकर) |
11. झुंझुनूं की हवेलियाँ
| हवेली | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| टीबड़ेवालों की हवेली | झुंझुनूं | |
| ईसरदास मोदी की हवेली | झुंझुनूं | 100 से अधिक खिड़कियाँ |
| सोने-चाँदी की हवेली | महनसर |
नवलगढ़ — पाँच हवेलियाँ
12. जैसलमेर की हवेलियाँ
पटवों की हवेली
- सेठ गुमानचंद बाफना ने इसे अपने पाँच बेटों के रहने के लिए बनवाया।
- पाँच मंज़िलें; आकार और पत्थर की नक्काशी — दोनों में जैसलमेर की हवेलियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
सालिम सिंह की हवेली
- बनवाने वाले ➜ जैसलमेर रियासत के प्रधानमंत्री सालिम सिंह मेहता
- वर्ष ➜ 1815 ई.
- उपनाम ➜ नौ खण्डी हवेली — 9 मंज़िलें थीं
नथमल की हवेली
- बनवाने वाले ➜ जैसलमेर के दीवान नथमल मेहता
- काल ➜ 1884–85 ई., महारावल बैरीसाल के समय
- कारीगर ➜ दो भाई — लालू और हाथी
जैसलमेर की अन्य हवेलियाँ
13. जोधपुर व फलोदी
जोधपुर
फलोदी
| हवेली | परिवार |
|---|---|
| लालचंद ढढ्ढा की हवेली | ढढ्ढा |
| अमरचंद कोचर की हवेली | कोचर |
| फूलचंद गोलछा की हवेली | गोलछा |
14. बीकानेर की हवेलियाँ
- सबसे पुरानी ➜ बच्छावतों की हवेली
- बनवाने वाले ➜ कर्णसिंह बच्छावत
- वर्ष ➜ 1593 ई.
बीकानेर की अन्य हवेलियाँ
15. चूरू की हवेलियाँ
| हवेली | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| सुराणाओं की हवेली | चूरू | उपनाम — सुराणाओं का हवामहल |
| मालजी का कमरा | चूरू | बनवाया मालचंद कोठारी ने |
| मंत्रियों की मोटी हवेली | चूरू |
16. उदयपुर व सलूम्बर
आहड़ की छतरियाँ (महासतियाँ)
उदयपुर के आहड़ में मेवाड़ के सिसोदिया महाराणाओं की छतरियाँ हैं। इन्हें महासतियाँ भी कहते हैं। सबसे प्रसिद्ध — महाराणा अमरसिंह प्रथम की छतरी।
महाराणा प्रताप की छतरी
- स्थान ➜ बांडोली गाँव, केजड़ बाँध के पास (चावंड क्षेत्र)
- खम्भे ➜ 8
- बनवाने वाले ➜ पुत्र अमरसिंह प्रथम
अन्य छतरियाँ
| छतरी | स्थान |
|---|---|
| महाराणा उदयसिंह | गोगुन्दा (उदयपुर) |
| कपूर बाबा | जगमंदिर (उदयपुर) |
| बप्पा रावल | नागदा (उदयपुर) |
17. चित्तौड़ दुर्ग की छतरियाँ
| छतरी | दुर्ग में कहाँ | खम्भे |
|---|---|---|
| जयमल राठौड़ | हनुमानपोल और भैरवपोल के बीच | 6 |
| वीर कल्लाजी राठौड़ | हनुमानपोल और भैरवपोल के बीच (लाल पत्थर) | 4 |
| पत्ता सिसोदिया | रामपोल के पास | 4 |
18. राजसमंद
| छतरी | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| उड़ना पृथ्वीराज | कुम्भलगढ़ दुर्ग | कुंवर पृथ्वीराज (रायमल के बेटे); 12 खम्भे; वास्तुकार घणपाना |
| चेतक (प्रताप का घोड़ा) | बलीचा गाँव | हल्दीघाटी क्षेत्र |
| शालिवाहन | खमनोर | हल्दीघाटी क्षेत्र |
19. बूँदी की छतरियाँ
चौरासी खम्भों की छतरी — देवपुरा
- स्थान ➜ देवपुरा गाँव, बूँदी
- बनवाने वाले ➜ राव राजा अनिरुद्ध सिंह
- किसकी याद में ➜ अपने धाय-पुत्र (धाभाई) देवा की स्मृति में
केसरबाग की छतरियाँ
- बूँदी से लगभग 4–5 किमी दूर, बूँदी के शासकों और राजपरिवार की 66 छतरियाँ।
- सबसे पुरानी — राव दूदा की; सबसे नई — महाराव राजा विष्णुसिंह की।
20. कोटा, झालावाड़, बारां
| छतरी | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| क्षार बाग की छतरियाँ | कोटा | कोटा के हाड़ा शासकों की |
| राव सुरजन हाड़ा | रामगढ़ (कोटा) | |
| संत पीपा | गागरोन (झालावाड़) | गागरोन के शासक, बाद में संत |
21. जयपुर-आमेर
गैटोर की छतरियाँ
नाहरगढ़ की तलहटी में गैटोर पर जयपुर के कछवाहा शासकों की छतरियाँ हैं; इन सबमें सवाई जयसिंह की छतरी की ख्याति सबसे अधिक है।
| छतरी | स्थान |
|---|---|
| राजा मानसिंह प्रथम | हाड़ीपुरा गाँव, आमेर |
| सवाई ईश्वरीसिंह | जयनिवास उद्यान, जयपुर |
| पन्ना मीना | आमेर |
22. अलवर व दौसा
मूसी महारानी की छतरी
- स्थान ➜ अलवर
- बनवाने वाले ➜ महाराजा विनय सिंह
- किसकी याद में ➜ पिता बख्तावर सिंह और उनकी पासवान मूसी रानी
| छतरी | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| नेहड़ा की छतरी | सरिस्का क्षेत्र (अलवर) | भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध |
| फतेह गुम्बद | अलवर | |
| बंजारों की छतरी | लालसोट (दौसा) | 6 खम्भे |
23. भरतपुर संभाग
| छतरी | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| खाण्डेराव होल्कर | गागरसोली (डीग) | कुम्हेर के घेरे (1754) में मारे गए मराठा सरदार; छतरी सूरजमल ने बनवाई |
| अकबर की छतरी | भरतपुर | |
| बोहरा भगत | करौली — कैलादेवी मंदिर के पास |
24. अजमेर संभाग
| छतरी / स्मारक | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| पृथ्वीराज चौहान का स्मारक | अजमेर | |
| अमरसिंह राठौड़ | नागौर | 16 खम्भे |
| लाछा गूजरी | नागौर | |
| अप्पाजी सिंधिया | ताऊसर (नागौर) |
25. जोधपुर व पाली
जसवंत थड़ा
- उपनाम ➜ मारवाड़ का ताजमहल
- बनवाने वाले ➜ महाराजा सरदार सिंह
- किसकी याद में ➜ पिता जसवंत सिंह द्वितीय
मेहरानगढ़ में
| छतरी | विशेष |
|---|---|
| मामा-भांजा की छतरी | धन्ना और भींवा की; 10 खम्भे |
| कीरतसिंह सोढ़ा की छतरी |
मंडोर
- मंडोर की छतरियाँ ➜ जोधपुर के शासकों की।
- पंचकुण्ड की छतरियाँ ➜ जोधपुर की रानियों की।
पाली — राव चन्द्रसेन
राव चन्द्रसेन की 5 खम्भों की छतरी सोजत के पास सारण की पहाड़ी पर है।
26. जैसलमेर
बड़ा बाग की छतरियाँ
- जैसलमेर के भाटी राजाओं के स्मारक इसी बाग में हैं।
- रावल जैतसिंह द्वितीय ने 1528 ई. में जैतसर सरोवर और बड़ा बाग बनवाया; उनकी अपनी छतरी भी यहीं है।
| स्मारक | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| पालीवालों की छतरी | जैसलमेर | |
| मूमल की मेड़ी | लोद्रवा, काक नदी के किनारे | मूमल-महेन्द्र की प्रेम-कथा से जुड़ी |
| बाबा रामदेव की छतरी | रामदेवरा (जैसलमेर) | लोकदेवता |
27. बीकानेर व हनुमानगढ़
देवीकुण्ड सागर की छतरियाँ
- बीकानेर के पास देवीकुण्ड सागर — बीकानेर राजपरिवार का निजी श्मशान।
- राव जैतसी के काल से राजपरिवार के हर सदस्य — शासक, रानी, पासवान और उनके बच्चे — की छतरी यहीं बनती रही।
- सबसे पुरानी — राव कल्याणमल की।
| छतरी | स्थान |
|---|---|
| गंगासिंह और सार्दुलसिंह (महाराजा) की छतरियाँ | बीकानेर |
| राव कल्याणमल की छतरी | बीकानेर (देवीकुण्ड) |
| टेस्सीटोरी की छतरी | बीकानेर |
28. राजस्थान के बाहर
| छतरी | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| वीर दुर्गादास राठौड़ | उज्जैन (मध्यप्रदेश), क्षिप्रा नदी के किनारे | अंतिम दिन उज्जैन में बिताए; वहीं दाह-संस्कार (1718) |
| पृथ्वीराज चौहान (तृतीय) | ग़ज़नी (अफ़ग़ानिस्तान) | लोक मान्यता |
रिवीजन पॉइंटर्स
- हवेलियों का सबसे ज़्यादा निर्माण 17वीं–18वीं शताब्दी में हुआ; सबसे ज़्यादा हवेलियाँ शेखावाटी (सीकर, झुंझुनूं, चूरू) में हैं।
- उपनाम — जैसलमेर «हवेलियों की नगरी», बीकानेर «हज़ार हवेलियों की नगरी»।
- जैसलमेर की पटवों की हवेली पाँच मंज़िला है; सालिम सिंह की हवेली (1815) «नौ खण्डी हवेली» कहलाती है।
- बीकानेर की सबसे पुरानी हवेली बच्छावतों की है, जो कर्णसिंह बच्छावत ने 1593 में बनवाई।
- खम्भों की गिनती — 84 बूँदी की चौरासी खम्भों की छतरी, 80 अलवर की मूसी महारानी, 32 मांडलगढ़ में जगन्नाथ कछवाहा, 16 नागौर में अमरसिंह राठौड़।
- चित्तौड़ दुर्ग में जयमल की छतरी 6 खम्भों की है, जबकि कल्लाजी और पत्ता की 4-4 खम्भों की।
- बूँदी के केसरबाग में 66 छतरियाँ हैं; इनमें सबसे पुरानी राव दूदा की है।
- जोधपुर में शासकों की छतरियाँ मंडोर में और रानियों की पंचकुण्ड में हैं; जसवंत थड़ा «मारवाड़ का ताजमहल» कहलाता है।
अगले भाग में मंदिर बनाने की तीन प्रमुख शैलियाँ, राजस्थान की स्थानीय शैलियाँ और मौर्य से सोलंकी तक के कालों की पहचान।
पिछला भाग: राजस्थान के महल: हाड़ौती के महल एवं पूर्वी व उत्तरी राजस्थान
अगला भाग: राजस्थान के मंदिर: स्थापत्य: शैलियाँ व काल
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