महलों के नाम अक्सर आपस में उलझ जाते हैं — बादल महल, रंगमहल और मोती महल जैसे नाम कई जगह मिलते हैं, इसलिए हर नाम को उसकी जगह के साथ जोड़कर याद करना ज़रूरी है। इस भाग में नागौर, जालौर, अजमेर, मेवाड़, बूँदी, कोटा-बारां, झालावाड़, डीग, भरतपुर, अलवर, रणथम्भौर, शेखावाटी और टोंक के महल आए हैं। उसके बाद जल महल, गर्मी-बरसात के महल, उपनाम और «एक नाम, कई महल» की सूची है।
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1. नागौर, जालौर व अजमेर
नागौर का किला
- भीतर बादल महल, शीश महल, बख्तसिंह महल, रानी महल और 36 कलात्मक खम्भों की बारादरी।
- बादल महल और शीश महल में सुंदर भित्ति चित्र।
- किले के बाहर से दागे गए तोप के गोले भीतर के महलों को बिना नुकसान पहुँचाए ऊपर से निकल जाते थे।
जालौर (सुवर्णगिरी)
भीतर राजा मानसिंह के महल और दो मंज़िला रानी महल। जोधपुर की गद्दी के झगड़े में मानसिंह ने इसी किले में शरण ली थी।
अजमेर व किशनगढ़
- तारागढ़ ➜ मेवाड़ के राजकुमार पृथ्वीराज (महाराणा रायमल के पुत्र) ने 1505 में यहाँ महल बनवाया और पत्नी ताराबाई के नाम पर किले का नाम तारागढ़ रखा।
- रूठी रानी का महल (तारागढ़) ➜ राव मालदेव राठौड़ की पत्नी उमादे भटियाणी (रूठी रानी) ने अपना ज़्यादातर समय यहीं बिताया।
- मैग्ज़ीन दुर्ग ➜ अकबर ने 1570–1573 में गुजरात विजय की याद में बनवाया; इसे अकबर का दौलतखाना भी कहते हैं। इसके जहाँगीर दरवाज़े के ऊपर झरोखे में बैठकर जहाँगीर न्याय करता था।
2. मेवाड़ के महल
ध्यान दें: कुम्भलगढ़ आज राजसमंद ज़िले में और अचलगढ़ सिरोही (माउंट आबू) में है।
3. चित्तौड़गढ़ के महल
| महल | निर्माता / जगह | ख़ास बात |
|---|---|---|
| कुम्भा के महल | महाराणा कुम्भा | उदयसिंह (सांगा के बेटे) इन्हीं महलों के कंवरपदा हिस्से में जन्मे; पन्नाधाय ने यहीं उदयसिंह को बचाया और उसके बेटे चन्दन का बलिदान हुआ |
| कंवरपदा के महल | महाराणा सांगा | मीरां के लिए बनवाए |
| रानी पद्मिनी महल | पद्मिनी तालाब का उत्तरी किनारा | — |
| रतनसिंह पैलेस | महाराणा रतनसिंह द्वितीय | — |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
कुम्भा ने चित्तौड़ का जीर्णोद्धार करते समय सातों प्रवेश द्वार, विजय स्तम्भ, कुम्भश्याम मंदिर और शृंगार चंवरी के साथ अपने महल भी बनवाए।
ट्रिक: पद्मिनी महल से दिशा पकड़ें — पद्मिनी तालाब के उत्तर में पद्मिनी महल, और उससे दक्षिण-पूर्व दिशा में गोरा-बादल महल (गोरा-बादल रतनसिंह के सेनापति, चाचा-भतीजा थे)।
4. कुम्भलगढ़ व अचलगढ़
कुम्भलगढ़
- कटारगढ़ (“मेवाड़ की आँख”) — कुम्भलगढ़ के भीतर एक पहाड़ी पर बना अन्तःदुर्ग; बादल महल इसी का हिस्सा है।
- बादल महल ➜ महाराणा फतेहसिंह ने बनवाया।
- कुम्भा के महल ➜ इस किले के सबसे पुराने महल।
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
अचलगढ़ (माउंट आबू)
यहाँ ओखी रानी का महल है — ओखी रानी महाराणा कुम्भा की पत्नी थीं।
5. सज्जनगढ़ — मानसून पैलेस
- स्थान ➜ उदयपुर, फतहसागर झील के पास
- पहाड़ी ➜ बाँसदरा / बंसधारा
- शुरुआत ➜ महाराणा सज्जनसिंह
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
नाम निर्माता महाराणा सज्जनसिंह से आया — सज्जनगढ़; पर पर्यटक इसे ज़्यादातर मानसून पैलेस नाम से जानते हैं। शुरू सज्जनसिंह ने कराया, काम फतेहसिंह के राज में पूरा हुआ।
6. बूँदी — गढ़ पैलेस
बूँदी गढ़ में एक अकेला महल नहीं, बल्कि हर पीढ़ी के राजाओं के जोड़े हुए महलों का परिसर है — इसे गढ़ पैलेस कहते हैं।
- रंगमहल ➜ राव शत्रुशाल का बनवाया।
- रंगविलास चित्रशाला ➜ श्रीरंगनाथ जी के भक्त महाराजा उम्मेदसिंह ने तारागढ़ में श्रीरंगनाथ मंदिर के साथ इसमें रंगीन चित्र बनवाए।
- दूदा महल ➜ यहाँ का सबसे पुराना महल।
- दो झीलें ➜ गढ़ पैलेस से सटी नवलसागर, और किले वाली पहाड़ी की तलहटी में जैतसागर।
- कर्नल टॉड ➜ रजवाड़ों के सारे राजप्रासादों में बूँदी के राजमहल सबसे सुंदर।
- रुडयार्ड किपलिंग बूँदी आए तो जैतसागर किनारे के सुखमहल में ठहरे; उनका कहना था कि बूँदी का किला प्रेतों ने बनाया। इसीलिए यह तिलस्मी किला भी कहलाता है।
ट्रिक: बूँदी में दो सबसे-पहले — सबसे पुराना महल दूदा महल, राजतिलक रतनदौलत दरीखाने में।
7. कोटा व बारां के महल
| भवन | जगह | निर्माता / ख़ास बात |
|---|---|---|
| कोटा का हवामहल | कोटा | महाराव रामसिंह द्वितीय |
| अबली मीणी का महल | कोटा — मुकुंदरा की पहाड़ियों में | महाराव मुकुंद सिंह |
| झाला हवेली | कोटा दुर्ग के भीतर | भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध |
| अमीर खाँ के महल | शेरगढ़ दुर्ग (बारां) | अंग्रेज़ों से बचने के लिए अमीर खाँ पिण्डारी ने अपनी तीन बेगमों और माँ के साथ यहाँ शरण ली |
रोचक तथ्य: ज़ालिम सिंह झाला और अमीर खाँ पिण्डारी पगड़ी-बदल भाई थे — इसीलिए दोनों के भवन एक ही शेरगढ़ किले में मिलते हैं।
8. झालावाड़ गढ़ पैलेस
झालावाड़ शहर के गढ़ को लोग “गढ़ पैलेस” कहते हैं। इसे महाराजा मदन सिंह और उनके उत्तराधिकारियों ने 1838 से 1854 के बीच बनवाया।
9. डीग के जल महल
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1725 ई. | शुरुआत | राजा बदनसिंह ने डीग में पहला महल बनवाया |
| 1730 ई. | डीग का किला | बदनसिंह ने ही खाई से घिरा किला बनवाया; उसके बीच में महाराजा सूरजमल का महल है |
| 1755–1763 ई. | जल महलों का बड़ा हिस्सा | भरतपुर के शासक सूरजमल ने सबसे ज़्यादा निर्माण कराया |
- गोपाल महल ➜ डीग के महलों में सबसे बड़ा और भव्य; इसमें शाहजहाँ का काले पत्थर का झूलेनुमा सिंहासन रखा है।
- दूसरे देखने लायक भवन ➜ किशन महल, सूरज भवन, नंद भवन, श्रावण-भादो, हरदेव भवन, गोपाल भवन।
- इतने जल महलों के कारण डीग का उपनाम पड़ा — “जल महलों की नगरी”; यह परिसर डीग किले से सटा है।
10. भरतपुर — लोहागढ़ के महल
- किशोरी महल ➜ महाराजा सूरजमल ने बनवाया; महाराजा बृजेन्द्र सिंह ने इसे “किशोरी महल” नाम दिया।
- कचहरी कलां ➜ महाराजा बलवंत सिंह का बनवाया।
- वज़ीर की कोठी, कोठी खास और दादी माँ का महल भी किले के भीतर हैं।
11. अलवर के महल
| भवन | निर्माता / ख़ास बात |
|---|---|
| सलीम महल (बाला दुर्ग) | अकबर ने बेटे सलीम को तीन वर्ष यहाँ नज़रबंद रखा; उसी भवन का यह नाम |
| सिलीसेढ़ महल | महाराजा विनय सिंह |
| होप सर्कस | महाराजा तेज सिंह |
12. रणथम्भौर के महल
| महल | ख़ास बात |
|---|---|
| हम्मीर महल | पत्थर करौली से — लाल बलुआ पत्थर |
| सुपारी महल | एक ही परिसर में मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर — धर्मों के मेल-जोल (साम्प्रदायिक सद्भाव) की मिसाल |
| जोगी महल | किले के मुख्य दरवाज़े से बाहर की तरफ़ |
13. शेखावाटी के महल
खेतड़ी महल (झुंझुनूं)
- भोपाल सिंह (1735–1771) ने गर्मियों में आराम के लिए बनवाया; खेतड़ी का भोपालगढ़ किला भी ठाकुर भोपालसिंह ने 1770 में बनवाया था।
- ढेर सारी खिड़कियाँ और झरोखे — हवा के लिए ही बना महल।
- भीतर लखनऊ जैसी भूल-भुलैया और जयपुर के हवामहल की झलक — इसलिए नाम “शेखावाटी का हवामहल”।
फतेहपुर (सीकर)
कायमखानी फतेह खाँ के बनवाए फतेहपुर दुर्ग में तेलिन का महल प्रसिद्ध है।
14. टोंक के महल
- सुनहरी कोठी ➜ निर्माण 1824 में नवाब के समय शुरू हुआ और नवाब इब्राहीम अली के समय पूरा हुआ।
- मुबारक महल (टोंक) ➜ सुनहरी कोठी वाले परिसर में; बकरा ईद के दिन यहाँ ऊँट की कुर्बानी का रिवाज़ था।
15. जल महल व झील किनारे के महल
| महल | पानी | ज़िला |
|---|---|---|
| जल महल | मानसागर के बीच (द्रव्यवती पर बाँध) | जयपुर |
| डीग के जल महल (गोपाल महल आदि) | फव्वारों-तालाबों वाला परिसर | डीग |
| रानी पद्मिनी महल | पद्मिनी तालाब का उत्तरी किनारा | चित्तौड़गढ़ |
| सुखमहल (बूँदी) | जैतसागर का किनारा | बूँदी |
16. गर्मी व बरसात के महल
- सज्जनगढ़ (उदयपुर) ➜ मानसून पैलेस; बाँसदरा पहाड़ी पर।
- खेतड़ी महल (झुंझुनूं) ➜ भोपाल सिंह का ग्रीष्मकालीन विश्राम स्थल; खिड़की-झरोखों से भरा।
- ललित मंदिर (जयगढ़) ➜ शासकों का ग्रीष्मकालीन आवास।
17. अतिथि-महल, होटल व संग्रहालय
| भवन | क्यों ख़ास |
|---|---|
| मुबारक महल (जयपुर) | अंग्रेज़ मेहमानों के स्वागत-ठहरने को (1900) — वैलकम पैलेस |
| सरिस्का पैलेस (अलवर) | एक अंग्रेज़ ड्यूक के स्वागत के लिए |
| अजीत भवन (जोधपुर) | देश का पहला हैरिटेज होटल |
18. उपनाम और प्रसिद्ध कथन
| उपनाम | महल |
|---|---|
| कृष्ण का मुकुट (कर्नल टॉड) | हवा महल, जयपुर |
| वैलकम पैलेस | मुबारक महल, जयपुर |
| राजस्थान का ताजमहल | जसवंत थड़ा, जोधपुर |
| शेखावाटी का हवामहल | खेतड़ी महल, झुंझुनूं |
किसने क्या कहा
| व्यक्ति | किस पर | कथन का सार |
|---|---|---|
| एडविन अर्नोल्ड | हवा महल | अलादीन का जिन्न भी इससे सुंदर निवास नहीं बना सकता था |
| बिशप हैबर | आमेर के महल | क्रेमलिन और अलहम्बरा से भी बढ़कर |
| फर्ग्यूसन | आमेर का गणेश पोल | दुनिया का सबसे श्रेष्ठ प्रवेश द्वार |
19. एक नाम, कई महल
| नाम | कहाँ-कहाँ |
|---|---|
| बादल महल | कुम्भलगढ़ (फतेहसिंह), बूँदी, शाहबाद (इंद्रमन), रणथम्भौर, नागौर, जूनागढ़ |
| फूल महल | मेहरानगढ़ (अभयसिंह, 1724), जूनागढ़ (गजसिंह) |
| रंगमहल | बूँदी (शत्रुशाल), जैसलमेर (मूलराज द्वितीय), जूनागढ़ |
| मोती महल | मेहरानगढ़ (सूरसिंह), जैसलमेर (मूलराज द्वितीय) |
20. रैपिड फायर तथ्य
- सज्जनगढ़ (उदयपुर) ➜ मानसून पैलेस, बाँसदरा पहाड़ी पर
- तारागढ़ (अजमेर) का महल ➜ पृथ्वीराज ने 1505 में बनवाया, ताराबाई के नाम पर नाम पड़ा
- मैग्ज़ीन दुर्ग ➜ अकबर ने 1570–1573 में बनवाया; अकबर का दौलतखाना
- बूँदी का सबसे पुराना महल ➜ दूदा महल; रंगमहल राव शत्रुशाल का
- झालावाड़ गढ़ पैलेस ➜ 1838 से 1854 के बीच बना
- जल महलों की नगरी ➜ डीग; सबसे भव्य गोपाल महल
- सुपारी महल ➜ रणथम्भौर में मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर एक परिसर में
- शेखावाटी का हवामहल ➜ खेतड़ी महल (झुंझुनूं)
- सुनहरी कोठी (टोंक) ➜ 1824 में शुरू, नवाब इब्राहीम अली के समय पूरी
अगले भाग में हवेली स्थापत्य, छतरी की पहचान और उदयपुर, चित्तौड़गढ़, हाड़ौती व अजमेर संभाग की प्रमुख हवेलियाँ।
पिछला भाग: राजस्थान के महल: जयपुर-आमेर (ढूंढाड़) एवं मारवाड़ व पश्चिमी राजस्थान
अगला भाग: राजस्थान की हवेलियाँ और छतरियाँ: एक नज़र में
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