अन्य साहित्यकार व कृतियाँ: प्राचीन विद्वान एवं कुम्भा व उनके विद्वान – Rajasthan Art and Culture Chapter 7

ब्रह्मगुप्त, माघ और चन्दबरदाई से कुम्भा के विद्वानों तक, और टॉड, श्यामलदास, ओझा जैसे इतिहासकार उपाधियों सहित।

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In this chapter (17 sections)
  1. एक नज़र में
  2. प्राचीन विद्वान
  3. ब्रह्मगुप्त
  4. महाकवि माघ
  5. चन्दबरदाई
  6. शारंगधर
  7. कुम्भा व उनके विद्वान
  8. महाराणा कुम्भा की रचनाएँ
  9. मण्डन व उनका वास्तु-साहित्य
  10. चक्रपाणि मिश्र
  11. इतिहासकार
  12. कर्नल जेम्स टॉड
  13. कविराजा श्यामलदास
  14. मुंशी देवी प्रसाद
  15. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा
  16. एल.पी. टेस्सीटोरी
  17. रैपिड फायर तथ्य

इस अध्याय में नाम और उपाधि की जोड़ियाँ सबसे काम की चीज़ हैं, क्योंकि एक-पंक्ति के सवाल अक्सर उन्हीं से बनते हैं। यहाँ रचनाकारों ने संस्कृत, हिन्दी, फ़ारसी-उर्दू या अंग्रेज़ी में राजस्थान को लिखा। क्रम यह है — प्राचीन विद्वान (ब्रह्मगुप्त, माघ, चन्दबरदाई, शारंगधर), कुम्भा व उनके विद्वान, और फिर इतिहासकार टॉड, श्यामलदास, देवी प्रसाद, ओझा व टेस्सीटोरी।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — अन्य साहित्यकार व कृतियाँ, 6 चॉक-बोर्ड चित्र, 21 नक्शे, 24 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. एक नज़र में

पिछले दो अध्यायों में राजस्थानी भाषा का साहित्य था। यहाँ उन दूसरे रचनाकारों और ग्रन्थों का संग्रह है जिन्होंने संस्कृत, हिन्दी, ब्रज-पिंगल, फ़ारसी-उर्दू या अंग्रेज़ी में राजस्थान को लिखा या राजस्थान में बैठकर लिखा।

ट्रिक: पहले उपाधियाँ याद करें — ये एक-पंक्ति के प्रश्नों में सबसे ज़्यादा आती हैं: घोड़े वाले बाबा (टॉड), राजस्थान का गिबन (ओझा), केसर-ए-हिन्द (श्यामलदास), कानून की माता (देवी प्रसाद)।

2. प्राचीन विद्वान

विद्वानजन्म-स्थानख़ास ग्रन्थ
ब्रह्मगुप्तभीनमाल (जालौर), 598 ई.ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त (628 ई.) · खण्डखाद्यक
महाकवि माघभीनमाल (जालौर)शिशुपालवध
चन्दबरदाईलाहौर, 1163 ई.पृथ्वीराज रासो

ट्रिक: भीनमाल से दो महान नाम — ब्रह्मगुप्त (गणित-खगोल) और माघ (काव्य): दोनों आज के जालौर ज़िले में।

3. ब्रह्मगुप्त

  • जन्म ➜ 598 ई., भीनमाल (जालौर)
  • काल ➜ गुप्तकाल के प्रमुख खगोलशास्त्री
  • मुख्य ग्रन्थ ➜ ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त — 30 वर्ष की उम्र में, 628 ई. में
  • ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त को भारतीय खगोलशास्त्र का प्रामाणिक ग्रन्थ माना जाता है।
  • दोनों ग्रन्थों का अरबी और फ़ारसी में अनुवाद हुआ।
  • उन्होंने वर्गमूल और घनमूल निकालने की सरल विधियाँ दीं और शून्य के गुणधर्म समझाए।

4. महाकवि माघ

  • जन्म भीनमाल (जालौर); समय 7वीं सदी के उत्तरार्द्ध से 8वीं सदी के पूर्वार्द्ध के बीच माना जाता है।
  • पिता का नाम दत्तक; पत्नी माल्हण देवी।
  • माघ दानवीर थे; इतना दान दिया कि आख़िरी वर्षों में स्वयं निर्धन हो गए।

5. चन्दबरदाई

  • जन्म ➜ 1163 ई., लाहौर
  • पिता ➜ राव वैण — अजमेर के चौहानों के राजपुरोहित
  • वास्तविक नाम ➜ पृथ्वीराज वलादि भाट
  • उन्होंने अस्त्र-शस्त्र की विधिवत शिक्षा ली थी और युद्ध के समय सदा सेना के साथ रहकर रणकौशल दिखाते थे।
  • पृथ्वीराज रासो ➜ हिन्दी का पहला महाकाव्य; वीर रस प्रधान, भाषा मुख्यतः पिंगल, 69 प्रस्ताव।
  • इसमें राजपूतों की उत्पत्ति पहली बार अग्निकुण्ड से बताई गई है; पृथ्वीराज तृतीय का जीवन और युद्ध वर्णित हैं।

6. शारंगधर

  • राघवदेव (हम्मीर चौहान के गुरु) के पौत्र और दामोदर के पुत्र।
  • ग्रन्थ ➜ हम्मीर रासो (1357 ई.; प्राकृत पैंगलम में इसके केवल 8 पद मिलते हैं, इनमें हम्मीरदेव का वर्णन), शारंगधर संहिता (आयुर्वेद), शारंगधर पद्धति (संस्कृत)।
  • हम्मीर काव्य भी इन्हीं की रचना है।

ध्यान दें: हम्मीर रासो नाम के तीन ग्रन्थ — शारंगधर (1357), जोधराज (18वीं सदी, 1301 ई. के युद्ध पर), महेश — रासो वाले भाग में देखें।

7. कुम्भा व उनके विद्वान

नामरिश्ता / भूमिकाख़ास रचना
कुम्भामेवाड़ के शासकसंगीत राज (5 रत्नकोश)
मण्डनकुम्भा के मुख्य वास्तुकार व ग्रन्थकारप्रासाद मंडन · राजवल्लभ · रूप मंडन …
नाथामण्डन का भाईवास्तु मंजरी

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

8. महाराणा कुम्भा की रचनाएँ

  • संगीत राज ➜ कुम्भा का सबसे विशाल और श्रेष्ठ ग्रन्थ; इसमें गीत, वाद्य और नृत्य तीनों विधाएँ आती हैं।
  • रचना वि.सं. 1509 में चित्तौड़ में हुई; यह 5 रत्नकोशों में बँटा है — पाठ्य, गीत, वाद्य, नृत्य, रस।
रचनाविषय
संगीत मीमांसासंगीत ग्रन्थ
सूड प्रबन्धगीत गोविन्द के पदों में कौन-सा राग-ताल हो, इसका निर्धारण; साथ ही दरबार के संगीतकारों-आचार्यों के नाम
रसिक प्रियाजयदेव के गीतगोविन्द की टीका

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ध्यान दें: संगीत राज = 5 रत्नकोश; पर संगीत रत्नाकर कुम्भा की रचना नहीं — कुम्भा ने उस पर टीका लिखी।

9. मण्डन व उनका वास्तु-साहित्य

  • कुल ➜ सोमपुरा शिल्पियों का घराना, मूलतः गुजरात का
  • पिता ➜ क्षेत्रार्क (खेता)
  • पद ➜ कुम्भा के मुख्य वास्तुकार और रचनाकार-विद्वान
ग्रन्थविषय
देवमूर्ति प्रकरण (रूपावतार मंडन)मूर्ति बनाने व प्रतिष्ठित करने में काम आने वाली सामग्री
प्रासाद मंडनमंदिर-महल जैसी इमारतें कैसे बनें — विधि
राजवल्लभ मंडन15वीं सदी का स्थापत्य — शहर के दरवाज़े, क़िले, महल, मंदिर, बाज़ार कैसे बनते थे
वास्तुशास्त्रमवास्तुकला की जानकारी

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

परिवार

  • नाथा ➜ मण्डन के भाई; संस्कृत में स्थापत्य पर वास्तु मंजरी।
  • गोविन्द ➜ मण्डन के पुत्र; कलानिधि (वास्तुकला), उद्धारधारिणी, द्वार दीपिका।

10. चक्रपाणि मिश्र

  • महाराणा प्रताप के दरबारी कवि।
  • चित्तौड़ के नीचे बसा पीपली गाँव इस परिवार की जागीर था।
  • चार ग्रन्थ ➜ विश्ववल्लभ, मुहूर्तमाला (ज्योतिष), व्यवहार दर्श (शीर्षक अंशतः स्पष्ट), राज्याभिषेक पद्धति।

11. इतिहासकार

इतिहासकारजन्मउपाधि / पहचानमुख्य ग्रन्थ
कर्नल जेम्स टॉड20 मार्च 1782, इस्लिंगटन (इंग्लैंड)घोड़े वाले बाबा · इतिहास-पितामहएनाल्स एंड एंटीक्विटीज़ ऑफ़ राजस्थान
कविराजा श्यामलदास5 जुलाई 1836, धोकलिया (भीलवाड़ा)केसर-ए-हिन्दवीर विनोद
मुंशी देवी प्रसाद18 फ़रवरी 1848, जयपुरकानून की माता / कानूनीस्वप्न राजस्थान · मारवाड़ का भूगोल

12. कर्नल जेम्स टॉड

  • जन्म ➜ 20 मार्च 1782, इस्लिंगटन (इंग्लैंड)
  • उपमाएँ ➜ लोग उन्हें घोड़े वाले बाबा कहते थे; जी.एच. ओझा ने उन्हें राजस्थान-इतिहास का भीष्म पितामह / जनक कहा
  • सेवा ➜ 1798 में सैनिक रंगरूट बनकर ईस्ट इंडिया कम्पनी में
  • राजस्थान में पहले-पहल मेवाड़ रियासत के मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) आए; वहाँ के जैन यति ज्ञानचन्द को गुरु बनाया — उन्हीं की प्रेरणा से राजस्थान की ऐतिहासिक सामग्री जुटाने लगे।
  • 1818 में टॉड की मध्यस्थता से महाराणा भीमसिंह (मेवाड़) और ईस्ट इंडिया कम्पनी के बीच सहायक सन्धि हुई।
  • 1822 में कम्पनी की नौकरी छोड़कर इंग्लैंड लौटे और जुटाई सामग्री को किताब रूप में छापने का निश्चय किया।

एनाल्स एंड एंटीक्विटीज़ ऑफ़ राजस्थान

  • दूसरा नाम ➜ “द सेन्ट्रल एण्ड वेस्टर्न राजपूत स्टेट्स ऑफ़ इण्डिया”।
  • किताब दो खण्डों में निकली ➜ 1829 और 1832; दोनों खण्डों की भेंट इंग्लैण्ड के सम्राट जॉर्ज चतुर्थ को चढ़ाई गई।
  • बाद के (1920 के) संस्करण को विलियम क्रुक ने सम्पादित किया; हिन्दी में इसे गौरीशंकर हीराचन्द ओझा ने उतारा।
  • टॉड ने इसी किताब में सबसे पहले “राजस्थान”, “रायथान”, “रजवाड़ा” जैसे शब्द प्रयोग किए।

दूसरी किताब

ट्रैवल्स इन वेस्टर्न इण्डिया (पश्चिमी भारत की यात्रा) टॉड के निधन के बाद 1839 में प्रकाशित हुई — प्रकाशक उनकी पत्नी जूलिया क्लटरबक थीं।

13. कविराजा श्यामलदास

  • जन्म ➜ 5 जुलाई 1836, धोकलिया गाँव (भीलवाड़ा)
  • काम सौंपने वाले ➜ मेवाड़ महाराणा शम्भूसिंह (1861–74)
  • ग्रन्थ ➜ वीर विनोद — लेखन आरम्भ 1871
  • इतिहास-लेखन के लिए वाणी विलास (सरस्वती भवन) नाम का निजी पुस्तकालय उन्हें सौंपा गया।
  • ज़्यादातर रचना महाराणा सज्जनसिंह की छत्रछाया में हुई; 1884 में सज्जनसिंह के निधन तक ग्रन्थ लगभग तैयार था, पर छपाई 1886 में, फतेहसिंह के समय पूरी हुई।
  • मूल रूप में दो भाग (2259 पृष्ठ), पर पढ़ने की सुविधा हेतु पाँच जिल्दें; इसमें मेवाड़ का इतिहास सज्जनसिंह के काल तक दर्ज है।
  • श्यामलदास के बाद फतेहसिंह ने ग्रन्थ के चलन पर पाबन्दी लगा दी; भूपालसिंह के समय (लगभग 1945) यह पाबन्दी हटी।

14. मुंशी देवी प्रसाद

  • जन्म ➜ 18 फ़रवरी 1848, जयपुर
  • सेवा ➜ 16 वर्ष की उम्र में टोंक राज्य में; 1879 में जोधपुर राज्य में; 1885 में जोधपुर के मुंसिफ़
  • निधन ➜ 1923, जोधपुर
  • बाबरनामा, हुमायूँनामा, जहाँगीरनामा, औरंगज़ेबनामा का हिन्दी अनुवाद किया।
  • मारवाड़ राज्य के लिए सबसे पहले क़ानून बनाए और क़ानून पर 13 किताबें लिखीं — इसीलिए “क़ानून की माता / क़ानूनी” कहलाए।
  • जनवरी 1888 में मारवाड़ के इतिहास-लेखन के लिए “तवारीख़ महकमा” के आजीवन सदस्य बने।

15. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा

  • जन्म ➜ 15 सितम्बर 1863, रोहीड़ा (सिरोही)
  • उपाधि ➜ आधुनिक राजस्थानी इतिहास-लेखन के जनक और राजस्थान के गिबन
  • पद ➜ 1908–1938 राजपूताना म्यूज़ियम (अजमेर) के क्यूरेटर
  • 1911 में सिरोही राज्य का इतिहास; फिर उदयपुर, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़ और बीकानेर राज्य के इतिहास लिखे।
  • जोधपुर राज्य का इतिहास शुरू किया, पर केवल 2 जिल्दें ही छप सकीं।
  • भारतीय प्राचीन लिपिमाला (संस्करण 1894 और 1918), साथ में नागरी अंक और अक्षर तथा राजपूताने का इतिहास।

16. एल.पी. टेस्सीटोरी

  • पूरा नाम ➜ लुई जिपियो टेस्सीटोरी
  • जन्म ➜ 13 दिसम्बर 1887, उदीने (इटली)
  • बुलाने वाले ➜ डॉ. जार्ज ग्रियर्सन — कलकत्ता की एशियाटिक सोसायटी के राजपूताना सर्वेक्षण के लिए
  • अप्रैल 1914 में मुम्बई आए; जयपुर-जोधपुर होते जुलाई 1914 में बीकानेर पहुँचे।
  • बीकानेर महाराजा गंगासिंह ने चारण साहित्य के सर्वेक्षण और संग्रह का काम सौंपा; वे ऊँटों पर गाँव-गाँव घूमे।
  • पाँच वर्ष (1914–1919) रामकरण आसोपा उनके सहयोगी रहे।
  • कृतियाँ ➜ राजस्थान चारण साहित्य : एक ऐतिहासिक सर्वेक्षण और पश्चिमी राजस्थानी का व्याकरण; अन्य — इण्डियन एन्टिक्वेरी, ए डिस्क्रिप्टिव केटलॉग ऑफ़ बॉर्डिंग एंड हिस्टोरिकल क्रोनिकल।

17. रैपिड फायर तथ्य

  • घोड़े वाले बाबा ➜ कर्नल जेम्स टॉड
  • राजस्थान का गिबन ➜ गौरीशंकर हीराचन्द ओझा
  • केसर-ए-हिन्द ➜ कविराजा श्यामलदास (ग्रन्थ वीर विनोद)
  • कानून की माता ➜ मुंशी देवी प्रसाद
  • ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त ➜ ब्रह्मगुप्त, भीनमाल (जालौर); रचना 628 ई. में
  • शिशुपालवध ➜ महाकवि माघ, वे भी भीनमाल के
  • पृथ्वीराज रासो ➜ चन्दबरदाई; हिन्दी का पहला महाकाव्य, 69 प्रस्ताव
  • संगीत राज ➜ कुम्भा की सबसे विशाल रचना, 5 रत्नकोश
  • टेस्सीटोरी ➜ इटली के विद्वान; बीकानेर महाराजा गंगासिंह ने उन्हें चारण साहित्य के सर्वेक्षण का काम सौंपा

अगले भाग में राजस्थान पर लिखे ग्रन्थों के वर्ग — संस्कृत, फ़ारसी-उर्दू, ख्यात और रासो साहित्य, शासकों की रचनाएँ और नवीनतम पुरस्कार।

पिछला भाग: राजस्थानी साहित्यकार व कृतियाँ: आधुनिक गद्य साहित्य (भाग 2)

अगला भाग: अन्य साहित्यकार व कृतियाँ: ग्रन्थ-वर्ग — राजस्थान पर लिखे

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