किला शासक की सुरक्षा के लिए बनता था, जबकि महल उसके रहने और दरबार के ठाठ के लिए — इसी फ़र्क़ से महल स्थापत्य अपना अलग विषय बन गया। इस भाग में महलों का विकास और राजतिलक के स्थान देखने के बाद जयपुर का सिटी पैलेस, हवा महल, आमेर, जयगढ़-नाहरगढ़, मेहरानगढ़, जोधपुर शहर, बीकानेर और जैसलमेर के महल क्रम से लिए गए हैं।
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1. महल स्थापत्य — परिचय
किले शासक की रक्षा के लिए बने, पर उनके भीतर या पास बने राजप्रासाद (महल) उसके रहने, दरबार और ठाठ की जगह थे। इसलिए महल स्थापत्य को दुर्ग स्थापत्य का एक अलग, विशेष रूप माना जाता है।
2. महलों का विकास
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 7वीं सदी के बाद | पहले साक्ष्य | राजस्थान में राजप्रासाद बनने के प्रमाण इसी समय से मिलने लगते हैं |
| 800–1200 ई. | पूर्व मध्यकाल | मेनाल, नागदा, आमेर में राजभवनों के अवशेष — छोटे कमरे, छोटे दरवाज़े, खिड़कियाँ नहीं, दोनों ओर के कमरों को बरामदा जोड़ता था |
| मध्यकाल | समृद्धि | धन बढ़ा तो महल विशाल, भव्य और सजे-धजे बनने लगे; कुम्भा के समय के महल सादे थे, बाद में बनावट और शिल्प बदला |
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मुग़ल असर की पहचान
मुग़ल प्रभाव से महलों में नए हिस्से जुड़े —
ट्रिक: क्रम याद करें — अवशेष (मेनाल-नागदा-आमेर) → सादे कुम्भा-महल → मुग़ल संपर्क (15वीं) → खुला मुग़ल रंग (17वीं, कोटा-बूँदी-जयपुर)।
3. राजतिलक के स्थान
| रियासत | राजतिलक का स्थान | कहाँ है |
|---|---|---|
| बूँदी | रतनदौलत दरीखाना | बूँदी गढ़ (तारागढ़) के महल |
| आमेर | कदमी महल (इसकी छतरी में) | आमेर का सबसे पुराना महल |
| भरतपुर | जवाहर बुर्ज | लोहागढ़ किला |
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ध्यान दें: सिर्फ़ भरतपुर में राजतिलक बुर्ज पर होता था — जवाहर बुर्ज, जो 1765 में जवाहर सिंह ने दिल्ली जीत की याद में बनवाया।
ट्रिक: जोड़ी बनाइए — बूँदी-दरीखाना, आमेर-कदमी, भरतपुर-बुर्ज, जोधपुर-चौकी, बीकानेर-अनूप।
4. जयपुर-आमेर (ढूंढाड़)
- सिटी पैलेस ➜ 1729–1732
- हवा महल ➜ 1799
- मुबारक महल ➜ 1900
5. सिटी पैलेस, जयपुर
- किसके समय ➜ सवाई जयसिंह द्वितीय
- वास्तुकार ➜ विद्याधर भट्टाचार्य
- शुरुआत ➜ 1729 ई.
- यह जयपुर राजपरिवार का निवास रहा।
- भीतर जाने के 3 मुख्य द्वार — वीरेन्द्र पोल, उदय पोल, त्रिपोलिया गेट।
- परिसर की ख़ास इमारतें ➜ मुबारक महल, सिलहखाना (शस्त्रागार), दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास और सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय।
चन्द्र महल
- सात मंज़िला; सबसे नीचे (भूतल) वाली मंज़िल का नाम ही चन्द्र महल है।
- ऊपर की मंज़िलें क्रम से — सुख निवास, रंग मंदिर, शोभा निवास, छवि निवास, श्री निवास, मुकुट मंदिर (सातवीं)।
- भीतर की सजावट का काम ए.एच. मूलर (जर्मनी के चित्रकार) को मानसिंह द्वितीय ने सौंपा था।
चाँदी के दो विशाल जल-पात्र
पर्यटक सबसे ज़्यादा जिन्हें देखने आते हैं, वे हैं चाँदी के दो विशाल पात्र — चाँदी से बने ऐसे पात्रों में दुनिया में सबसे बड़े; ये गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हैं। 1902 में एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक में जाते समय सवाई माधोसिंह द्वितीय इन्हीं में पवित्र गंगाजल भरकर ले गए थे।
मुबारक महल (वैलकम पैलेस)
- सिटी पैलेस परिसर की सबसे नई इमारत।
- 1900 में सवाई माधोसिंह द्वितीय ने अंग्रेज़ मेहमानों के स्वागत और ठहरने के लिए बनवाया — देखरेख सर सैमुअल स्विंटन जैकब की।
- इसमें मुग़ल, यूरोपीय और राजपूत — तीनों शैलियों का मेल है।
6. हवा महल, जयपुर
- स्थान ➜ बड़ी चौपड़ के पास, जयपुर
- निर्माता ➜ सवाई प्रतापसिंह
- वर्ष ➜ 1799 ई.
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- आकार पिरामिड जैसा; महल राधा-कृष्ण को समर्पित और मुकुट के आकार का है — इसीलिए कर्नल जेम्स टॉड ने इसे “कृष्ण का मुकुट” कहा।
- इसकी कोई नींव नहीं है — बिना नींव के बने महलों में इसे दुनिया का सबसे बड़ा माना जाता है।
- सुंदरता पर एडविन अर्नोल्ड की टिप्पणी — अलादीन का जिन्न भी इससे ज़्यादा मनमोहक निवास नहीं रच सकता था।
7. आमेर के महल
आमेर का दुर्ग मानसिंह प्रथम ने 1592 में बनवाना शुरू किया और मिर्ज़ा राजा जयसिंह के समय पूरा हुआ; इसकी शैली हिन्दू-मुस्लिम मिली-जुली है। इसके भीतर महलों का पूरा परिसर है —
| महल / भवन | ख़ास बात |
|---|---|
| कदमी महल | राजदेव का बनवाया (1237) — आमेर का सबसे पुराना महल; कछवाहा राजाओं का राजतिलक इसी की छतरी में होता था |
| दीवान-ए-आम | मिर्ज़ा राजा जयसिंह का बनवाया |
| दीवान-ए-खास | आमेर किले की सबसे दर्शनीय जगह |
| सुख निवास | सामने आराम बाग |
- गणेश पोल ➜ आम दरबार वाले हिस्से से खास दरबार की ओर ले जाने वाला द्वार; सवाई जयसिंह का बनवाया, सुंदर चित्रकारी; फर्ग्यूसन ने इसे दुनिया का सबसे श्रेष्ठ प्रवेश द्वार कहा।
- आराम बाग ➜ शीश महल के सामने, मुग़ल चारबाग शैली का छोटा बगीचा।
- मावठा जलाशय ➜ महल के नीचे; बीच में केसर क्यारी; 1664 में मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने बनवाया। उसी साल उसकी उत्तरी पाल पर दिल-आराम बाग भी बना।
याद रखें: बिशप हैबर आमेर के महलों पर — क्रेमलिन में जो देखा और अलहम्बरा के बारे में जो सुना, यह महल उन सबसे बढ़कर है।
8. जयगढ़, नाहरगढ़ व दौसा
जयगढ़ (चील का टीला)
| भवन | काम / दूसरा नाम |
|---|---|
| सुभट निवास | दीवान-ए-आम |
| खिलबत निवास | दीवान-ए-खास |
| ललित मंदिर | गर्मियों का निवास (ग्रीष्मकालीन आवास) |
नाहरगढ़ — माधवेन्द्र भवन
- माधवेन्द्र भवन ➜ 9 एक-जैसे महलों का समूह, हर रानी के नाम पर एक; बनवाने वाले सवाई माधोसिंह द्वितीय, जिन्हें “बब्बर शेर” भी कहा जाता था।
- माधवेन्द्र भवन में अब स्कल्पचर पार्क है — पत्थर की कलाकृतियाँ देखने लायक।
- इतने महलों के कारण नाहरगढ़ का एक उपनाम है — महलों का दुर्ग।
दौसा किला (देवगिरी पहाड़ी)
भीतर राजाजी का कुआँ, 14 राजाओं की साल और भौमिया के महल (सूरजमल भौमिया) बने हैं।
9. जल महल, रानी का बाग, सामोद
जल महल, जयपुर
- मानसागर तालाब के बीचों-बीच खड़ा महल; बनवाने वाले — सवाई जयसिंह।
- मानसागर तालाब द्रव्यवती नदी पर बाँध बनाकर जयपुर को पानी देने के लिए बनाया गया।
सिसोदिया रानी का बाग महल
- जयपुर से गलता जी जाने वाले रास्ते पर।
- 1728 ➜ सवाई जयसिंह द्वितीय का बनवाया; रानी चन्द्रकंवर (सिसोदिया) के लिए, जो मेवाड़ के महाराणा अमरसिंह द्वितीय की बेटी थीं।
- डॉ. चन्द्रमणि सिंह का मत अलग है — बाग बनवाने वाले माधोसिंह, और जिनके लिए बना वे रानी कुनन कंवर।
सामोद महल
चौमूं (जयपुर ग्रामीण) क्षेत्र में; बनवाया राजा बिहारीदास ने। इसका प्रसिद्ध शीश महल शिवसिंह ने बनवाया।
10. मेहरानगढ़ के महल
| महल | निर्माता | ख़ास बात |
|---|---|---|
| फतेह महल | अजीतसिंह | — |
| चोखेलाव महल | — | भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध |
| ख्वाबगाह (ख्वाब महल) | — | ए.एच. मूलर का बनाया बालक अजीतसिंह का बहुमूल्य तैलचित्र यहाँ लगा है |
- सिणगार (शृंगार) चौकी ➜ तख्तसिंह ने दौलतखाने वाले चौक में बनवाई; जोधपुर के नए राजा का राज्याभिषेक इसी पर होता था।
- कर्नल टॉड का भाव — जोधा के वंशज महल के झरोखे में बैठे-बैठे पूरे राज्य को सँभाल लेते थे; किले से दिखने वाली हद ही उनके राज की हद थी।
11. जोधपुर शहर के महल
उम्मेद पैलेस (छीतर पैलेस)
- निर्माता ➜ महाराजा उम्मेद सिंह (1918–1947)
- नींव ➜ 1929 ई.
- पूरा ➜ 1943 ई.
1929 में अकाल पड़ा तो लोगों को रोज़गार देकर राहत पहुँचाने के लिए उम्मेद सिंह ने छीतर की पहाड़ी पर यह विशाल राजभवन शुरू कराया — इसलिए इसे छीतर पैलेस भी कहते हैं।
| भवन | जगह | ब्योरा |
|---|---|---|
| अजीत भवन | जोधपुर | 1927 में उम्मेद सिंह के छोटे भाई महाराज अजीत सिंह के लिए बना; देश का पहला हैरिटेज होटल |
| जसवंत थड़ा | जोधपुर — मेहरानगढ़ के पास | 1899 में महाराजा सरदार सिंह ने जसवंत सिंह द्वितीय की याद में बनवाया; “राजस्थान का ताजमहल” |
| एक थम्भा महल | मंडोर (जोधपुर) | महाराजा अजीतसिंह के समय बना |
12. बीकानेर — जूनागढ़ व लालगढ़
जूनागढ़ का किला रायसिंह ने (1589–1594) दुलमेरा के लाल पत्थरों से बनवाया। इसके महल देखने पर फतेहपुर सीकरी के महल और लाल किला याद आते हैं।
| महल | निर्माता | ख़ास बात |
|---|---|---|
| कर्ण महल | महाराजा गजसिंह | — |
| अनूप महल | — | सोने के चित्रांकन का काम महाराजा सूरतसिंह ने कराया; बीकानेर के राजाओं का राजतिलक इसी महल में होता था |
| गज मंदिर | महाराजा गजसिंह | — |
लालगढ़ महल
नाम पिता लालसिंह से — उनकी स्मृति में महाराजा गंगासिंह ने बनवाया; बनावट यूरोपीय शैली की।
13. जैसलमेर के महल
| महल | निर्माता |
|---|---|
| रंगमहल | महारावल मूलराज द्वितीय |
| मोतीमहल | महारावल मूलराज द्वितीय |
| गजविलास | महारावल गजसिंह |
बादल विलास
- 1884 में मुस्लिम कारीगरों ने बनाया और उस समय के महारावल बैरिशाल सिंह को भेंट किया।
- पाँच मंज़िला ➜ नीचे की चार वर्गाकार, सबसे ऊपर की पाँचवीं गुम्बद जैसी।
- इसमें पाँच मंज़िला ताज़िया टावर बना है।
रिवीजन पॉइंटर्स
- सिटी पैलेस की शुरुआत सवाई जयसिंह द्वितीय के समय 1729 में हुई; वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य थे।
- हवा महल सवाई प्रतापसिंह ने 1799 में बनवाया; टॉड ने इसे «कृष्ण का मुकुट» कहा।
- मुबारक महल (वैलकम पैलेस) 1900 में बना और सिटी पैलेस परिसर की सबसे नई इमारत है।
- आमेर का सबसे पुराना महल कदमी महल (1237) है; कछवाहा राजाओं का राजतिलक इसी की छतरी में होता था।
- सिर्फ़ भरतपुर में राजतिलक बुर्ज पर होता था — जवाहर बुर्ज, जो 1765 में बना।
- उम्मेद पैलेस (छीतर पैलेस) की नींव 1929 में पड़ी और 1943 में यह पूरा हुआ।
- जसवंत थड़ा «राजस्थान का ताजमहल» कहलाता है, और अजीत भवन देश का पहला हैरिटेज होटल है।
- बीकानेर का जूनागढ़ रायसिंह ने 1589–1594 में बनवाया; लालगढ़ महल गंगासिंह की देन है।
अगले भाग में नागौर, जालौर और अजमेर के महल, मेवाड़-हाड़ौती व पूर्वी राजस्थान के महल, और जल महल, उपनाम तथा एक ही नाम वाले कई महलों की सूची।
पिछला भाग: राजस्थान के दुर्ग: जोधपुर संभाग (मारवाड़) के दुर्ग (भाग 2) एवं थार के मरु-दुर्ग
अगला भाग: राजस्थान के महल: हाड़ौती के महल एवं पूर्वी व उत्तरी राजस्थान
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