जैन स्थापत्य के प्रश्न ज़्यादातर रणकपुर और दिलवाड़ा के आसपास घूमते हैं, इसलिए इन दोनों की तुलना साफ़ रहनी चाहिए — किसने बनवाया, कब बना और किस खूबी से पहचाना जाता है। इस भाग में पाली, जालौर-सांचौर, सिरोही-आबू और बीकानेर संभाग के मंदिर आते हैं। अंत में उदयपुर से बीकानेर तक हर संभाग के पैनोरमा और स्मारकों की सूची दी गई है।
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1. पाली के मंदिर
रणकपुर के मंदिर
पाली की देसूरी तहसील में मघाई नदी के किनारे रणकपुर में तीन जैन मंदिर, एक सूर्य मंदिर और लगभग 1 किमी दूर चक्रेश्वरी माता का मंदिर हैं।
- निर्माण ➜ 1439 ई., महाराणा कुम्भा के समय
- बनवाने वाले ➜ सेठ धरणकशाह पोरवाल — भूमि कुम्भा से खरीदी
- शिल्पी ➜ देपाक (देपा), सोमपुरा ब्राह्मण
… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
| मंदिर | विशेष |
|---|---|
| आदिनाथ चौमुखा | 1444 खंभों पर टिका, इसलिए “स्तंभों का वन” और “खंभों का अजायबघर” |
| नेमीनाथ जैन मंदिर | चौमुखा के पास; यहाँ नग्न व संभोगरत युगलों की मूर्तियाँ हैं, इसलिए “पातरियां रो देवरो” भी कहते हैं |
| पार्श्वनाथ जैन मंदिर | नेमीनाथ के पास; श्यामल वर्ण की पार्श्वनाथ प्रतिमा |
- आदिनाथ चौमुखा के और नाम ➜ त्रैलोक्य दीपक, त्रिभुवन प्रासाद, चतुर्मुख जिन प्रासाद तथा (आचार्य विमलसूरि के शब्दों में) नलिनी गुल्म विमान।
- फर्ग्यूसन ➜ उत्तर भारत का कोई और मंदिर ऐसी सुन्दरता, सजावट और स्थापत्य-आदर्श का नहीं है।
पाली के अन्य मंदिर
| मंदिर | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| मुंछाला महावीर | घाणेराव के पास (कुंभलगढ़ अभयारण्य) | कुम्भा-काल में सफेद संगमरमर से बना, महावीर स्वामी को अर्पित; महावीर की मूँछों की एक लोककथा से स्थान का नाम पड़ा |
| सेवाड़ी जैन मंदिर | सेवाड़ी | राजस्थान का सबसे प्राचीन भूमिज शैली का मंदिर, 1010–20 ई. |
| वरकाणा जैन मंदिर | वरकाणा | पार्श्वनाथ का प्राचीन मंदिर; पाली के पंचतीर्थों में |
| नारलाई जैन मंदिर | नारलाई | गिरनार तीर्थ प्रसिद्ध — नेमीनाथ की काली प्रतिमा; पास में सहस्रावन तीर्थ |
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जैन धर्म के पंचतीर्थ
- वरकाणा
- नारलाई
- नाडोल
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
ट्रिक: रणकपुर की गिनती — 24 · 84 · 1444; साल 1439; सेठ धरणकशाह; शिल्पी देपाक; प्रेरक सोमसुन्दर सूरि।
2. जालौर व सांचौर
| मंदिर | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| आपेश्वर महादेव | रामसीन | गुर्जर-प्रतिहारकालीन; शिव की 5 फुट ऊँची प्रतिमा |
| वराह मंदिर | भीनमाल | मूर्ति जैसलमेर के पीले पत्थर की |
| जगतस्वामी सूर्य मंदिर | भीनमाल | प्रतिहारों का बनवाया सूर्य मंदिर |
| सिरे मंदिर | जालौर | जालन्धरनाथ की तपोभूमि; पुराना शिव मंदिर राजा रतनसिंह का था, जिसे जोधपुर के मानसिंह ने गुरु आयसदेव नाथ से प्रेरित होकर नए सिरे से बनवाया |
ट्रिक: भीनमाल के तीन नाम याद रखें — वराह मंदिर, जगतस्वामी सूर्य मंदिर, 72 जिनालय।
3. सिरोही व आबू के मंदिर
दिलवाड़ा जैन मंदिर — आबू पर्वत
- बस-स्टैण्ड (माउंट आबू) से डेढ़ मील के फ़ासले पर; 11वीं से 15वीं सदी के बीच बने; सोलंकी स्थापत्य के उदाहरण।
- छतों और स्तम्भों की नक्काशी बेजोड़ है; इन्हें राजस्थान का सर्वश्रेष्ठ जैन मंदिर माना जाता है।
- दिलवाड़ा के जैन मंदिरों पर 5 रुपये का डाक टिकट 14 अक्टूबर 2009 को निकला।
| मंदिर | किसने / कब | विशेष |
|---|---|---|
| विमलवसाही | मंत्री विमलशाह (गुजरात के सोलंकी राजा भीमदेव के), 1031 ई.; निर्देशन में शिल्पी कीर्तिधर | पहले तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) के नाम; समूह का सबसे भव्य और सबसे प्राचीन; लगभग 3 हजार शिल्पियों ने 14 वर्ष में बनाया; 57 देवरियाँ; बाहर से सादा, भीतर बारीक तक्षण-कला |
| लूणवसाही | भीमदेव द्वितीय (चालुक्य) के अमात्य वास्तुपाल-तेजपाल, 1230 ई.; शिल्पी शोभनदेव | 22वें तीर्थंकर नेमीनाथ को समर्पित; देवरानी-जेठानी के गोखड़े — इसलिए “देवरानी-जेठानी का मंदिर” |
| पीतलहर आदिश्वर (भीमाशाह का मंदिर) | भीमाशाह | पीतल की 108 मण की आदिनाथ-प्रतिमा |
रोचक तथ्य: कर्नल टॉड — ताजमहल के बाद भारत की इमारतों में जिसका नाम लिया जाए, वह विमलशाह का मंदिर है।
आबू और सिरोही के अन्य मंदिर
| मंदिर | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| कुंथुनाथ दिगंबर जैन मंदिर | आबू | लूणवसाही के बाहर अलग से; उन पाँच में गिना नहीं जाता; 1449 ई. में कुम्भा ने बनवाया; यहीं जिनदत्त सूरी की छतरी |
| अचलेश्वर महादेव | आबू | शिवलिंग नहीं, ब्रह्मखड्ड — शिव के अंगूठे की पूजा; आबू के परमार शासकों के आराध्य; महमूद बेगड़ा के हमले में खंडित शिव-पार्वती-नंदी की मूर्तियाँ आज भी हैं; मधुमक्खियों ने बेगड़ा की सेना पर हमला किया — वह स्थान “भंवराथल” |
| रसिया बालम / कुंवारी कन्या मंदिर | आबू (दिलवाड़ा के पीछे) | दो प्रतिमाएँ — हाथ में विष का प्याला लिए युवक और एक युवती |
| मूर अर्द्ध गुफा | माउण्ट आबू | जनवरी 1882 में अंग्रेज़ी सेना (ब्रिटिश-भारतीय सेना) के मेजर जनरल आर्थर थॉमस मूर का अंग्रेज़ी शिलालेख यहाँ लगा |
4. बीकानेर संभाग के मंदिर
बीकानेर
| मंदिर | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| कपिल मुनि का मंदिर | कोलायत | कपिल सरोवर किनारे कपिल मुनि सहित 5 मंदिर; जनश्रुति — यहीं कपिल मुनि का आश्रम था और उन्होंने सांख्य दर्शन दिया; कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ जांगल अंचल का सबसे बड़ा मेला जुटता है, झील में दीपदान; झील पर 52 घाट; गुरु नानकदेव की यात्रा की स्मृति में गुरुद्वारा |
| शेर पर सवार गणपति | जूनागढ़ | जूनागढ़ के तैंतीस-करोड़-देवता वाले संग्रह की एक प्रतिमा में गणपति मूषक की जगह शेर पर सवार हैं; यह असल में मूर्तियों का संग्रह है — अनूपसिंह औरंगजेब के दक्षिण-अभियान में रहते हुए अनेक मूर्तियाँ बीकानेर भिजवाते थे |
| भांडाशाह जैन मंदिर | बीकानेर | 5वें तीर्थंकर सुमतिनाथ का; “त्रिलोक दीपक प्रासाद”; बनवाने वाले भीनासर के घी-व्यापारी भांडाशाह ओसवाल; काल राव लूणकरण का, वर्ष 1514 ई.; “भंडेश्वर / संदेश्वर” नाम भी; नींव में सैकड़ों मण घी डाला गया; अनूपसिंह के काल में चित्रकार मुराद बख्श उस्ता ने स्वर्णयुक्त मीनाकारी के भित्ति-चित्र बनाए |
| लक्ष्मीनारायण जी (लक्ष्मीनाथ जी) | बीकानेर | राव लूणकरण ने बनवाया |
चूरू
| मंदिर | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| सालासर बालाजी | सालासर | मूर्ति आसोटा गाँव में निकली; शुरुआती गढ़ाई नूरा और दाऊ नामक दो मुस्लिम कारीगरों ने की; “दाढ़ी-मूँछ वाले हनुमान जी”; संस्थापक महात्मा मोहनदास |
| तिरुपति बालाजी (वेंकटेश्वर) | सुजानगढ़ | द्रविड़ ढंग का; सोहनलाल जानोदिया की देन, लागत लगभग 2 करोड़ रुपये; 1994 में भैरोसिंह शेखावत के हाथों उद्घाटन |
| साहवा का गुरुद्वारा | साहवा | राजस्थान के सिखों का सबसे बड़ा मेला; गुरु गोविन्द सिंह यहाँ पधारे थे; पास में प्राचीन तालाब |
हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर
| मंदिर / स्थल | स्थान | विशेष |
|---|---|---|
| गोगाजी का मंदिर | गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) | विस्तार “लोकदेवता” में |
| भद्रकाली मंदिर | अमरपुरा थेहड़ी (हनुमानगढ़) | — |
| ब्राह्मणी माता मंदिर | पल्लू (हनुमानगढ़) | — |
5. पैनोरमा व स्मारक
इस सूची में हर संभाग के पैनोरमा गिनाए गए हैं — महापुरुष, वीर, संत, लोकदेवता और स्वतंत्रता-संग्राम से जुड़े स्थल। जो सूची में निर्माणाधीन दर्ज थे, वे उसी रूप में लिखे गए हैं।
- उदयपुर संभाग ➜ महाराणा प्रताप, बप्पा रावल, पन्नाधाय, भामाशाह…
- कोटा संभाग ➜ बूंदा मीणा, हाड़ौती, संत पीपाजी
- भरतपुर संभाग ➜ सूरजमल, गोकुला जाट, राणा सांगा, हम्मीर…
- जयपुर संभाग ➜ गुरु गोविन्द सिंह, राव शेखा, राजा हेमू…
6. उदयपुर संभाग के पैनोरमा
| पैनोरमा / स्मारक | स्थान |
|---|---|
| महाराणा प्रताप पैनोरमा (निर्माणाधीन) | चावण्ड (सलूम्बर) |
| वीरवती हाड़ी रानी पैनोरमा | सलूम्बर |
| बप्पा रावल पैनोरमा | मठाठा (उदयपुर) — 10 अगस्त 2018 |
| राणा पुंजा पैनोरमा | उदयपुर |
ध्यान दें: पन्नाधाय के दो पैनोरमा — पाण्डोली (चित्तौड़गढ़) और कमेरी (राजसमंद)।
7. कोटा व भरतपुर संभाग
कोटा संभाग
| पैनोरमा | स्थान |
|---|---|
| बूंदा मीणा पैनोरमा (निर्माणाधीन) | बूँदी |
| हाड़ौती पैनोरमा | बारां |
| संत पीपाजी पैनोरमा | झालावाड़ |
भरतपुर संभाग
| पैनोरमा | स्थान |
|---|---|
| अजय योद्धा महाराजा सूरजमल पैनोरमा | भरतपुर |
| श्री गोकुला जाट व राजा खेमकरण पैनोरमा | भरतपुर |
| गोविन्द स्वामी पैनोरमा | अटारी (भरतपुर) |
| राणा सांगा पैनोरमा | खानवा (भरतपुर) |
8. जयपुर संभाग के पैनोरमा
| पैनोरमा / स्मारक | स्थान |
|---|---|
| गुरु गोविन्द सिंह जी का पैनोरमा | नरायणा (जयपुर) |
| स्वतंत्रता सेनानियों का पैनोरमा (निर्माणाधीन) | जयपुर |
| स्वामी आत्माराम जी लक्ष्य पैनोरमा | जयपुर |
| पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्मारक | धानक्या गाँव (जयपुर) — पं. दीनदयाल का जन्म-स्थान |
9. अजमेर संभाग के पैनोरमा
| पैनोरमा / स्मारक | स्थान |
|---|---|
| पृथ्वीराज पैनोरमा | अजमेर |
| श्री विद्यासागर जी महाराज पैनोरमा | अजमेर |
| नागरी दास का स्मारक | किशनगढ़ (अजमेर) |
| निम्बार्काचार्य पैनोरमा | सलेमाबाद (अजमेर) |
10. जोधपुर संभाग के पैनोरमा
| पैनोरमा | स्थान |
|---|---|
| वीर दुर्गादास पैनोरमा | जोधपुर |
| महर्षि नवल पैनोरमा | जोधपुर |
| श्री राव चन्द्रसेन पैनोरमा | जोधपुर |
| देवराज जी का पैनोरमा (निर्माणाधीन) | सेतरावा (फलोदी) |
11. बीकानेर संभाग के पैनोरमा
| पैनोरमा | स्थान |
|---|---|
| करणी माता का पैनोरमा | देशनोक (बीकानेर) |
| राव बीकाजी पैनोरमा | बीकानेर |
| जसनाथ जी पैनोरमा (निर्माणाधीन) | कतरियासर (बीकानेर) |
रिवीजन पॉइंटर्स
- रणकपुर का आदिनाथ चौमुखा मंदिर 1439 ई. में कुम्भा के समय सेठ धरणकशाह पोरवाल ने बनवाया; शिल्पी देपाक थे।
- आदिनाथ चौमुखा 1444 खंभों पर टिका है, इसीलिए उसे «स्तंभों का वन» कहते हैं।
- सेवाड़ी जैन मंदिर राजस्थान का सबसे प्राचीन भूमिज शैली का मंदिर है (1010–20 ई.)।
- दिलवाड़ा में विमलवसाही सबसे प्राचीन और भव्य है (1031 ई., विमलशाह); लूणवसाही 1230 ई. में वास्तुपाल-तेजपाल ने बनवाई, नेमीनाथ को समर्पित।
- अचलेश्वर महादेव (आबू) में शिवलिंग नहीं, ब्रह्मखड्ड है — यहाँ शिव के अंगूठे की पूजा होती है।
- कोलायत में कार्तिक पूर्णिमा पर जांगल अंचल का सबसे बड़ा मेला जुटता है; झील पर 52 घाट हैं।
- सालासर बालाजी «दाढ़ी-मूँछ वाले हनुमान जी» कहलाते हैं; संस्थापक महात्मा मोहनदास थे।
- पन्नाधाय के दो पैनोरमा हैं — पाण्डोली (चित्तौड़गढ़) और कमेरी (राजसमंद)।
अगले भाग में चिश्ती परम्परा के शब्द और केन्द्र, अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज़ का जीवन, दरगाह का इतिहास, उसकी इमारतें और रजब माह का उर्स।
पिछला भाग: राजस्थान के मंदिर: अजमेर संभाग एवं जोधपुर व बीकानेर संभाग (भाग 1)
अगला भाग: मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती
इन्हें भी पढ़ें: मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे · प्रतिहार वंश (गुर्जर–प्रतिहार)
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