राजस्थान के मंदिर: जोधपुर व बीकानेर संभाग (भाग 2) एवं पैनोरमा व स्मारक – Rajasthan Art and Culture Chapter 34

पाली, जालौर, सिरोही-आबू और बीकानेर संभाग के मंदिर तथा संभाग-वार पैनोरमा व स्मारक।

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In this chapter (12 sections)
  1. पाली के मंदिर
  2. जालौर व सांचौर
  3. सिरोही व आबू के मंदिर
  4. बीकानेर संभाग के मंदिर
  5. पैनोरमा व स्मारक
  6. उदयपुर संभाग के पैनोरमा
  7. कोटा व भरतपुर संभाग
  8. जयपुर संभाग के पैनोरमा
  9. अजमेर संभाग के पैनोरमा
  10. जोधपुर संभाग के पैनोरमा
  11. बीकानेर संभाग के पैनोरमा
  12. रिवीजन पॉइंटर्स

जैन स्थापत्य के प्रश्न ज़्यादातर रणकपुर और दिलवाड़ा के आसपास घूमते हैं, इसलिए इन दोनों की तुलना साफ़ रहनी चाहिए — किसने बनवाया, कब बना और किस खूबी से पहचाना जाता है। इस भाग में पाली, जालौर-सांचौर, सिरोही-आबू और बीकानेर संभाग के मंदिर आते हैं। अंत में उदयपुर से बीकानेर तक हर संभाग के पैनोरमा और स्मारकों की सूची दी गई है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के मंदिर, 7 चॉक-बोर्ड चित्र, 20 नक्शे, 25 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. पाली के मंदिर

रणकपुर के मंदिर

पाली की देसूरी तहसील में मघाई नदी के किनारे रणकपुर में तीन जैन मंदिर, एक सूर्य मंदिर और लगभग 1 किमी दूर चक्रेश्वरी माता का मंदिर हैं।

  • निर्माण ➜ 1439 ई., महाराणा कुम्भा के समय
  • बनवाने वाले ➜ सेठ धरणकशाह पोरवाल — भूमि कुम्भा से खरीदी
  • शिल्पी ➜ देपाक (देपा), सोमपुरा ब्राह्मण

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

मंदिरविशेष
आदिनाथ चौमुखा1444 खंभों पर टिका, इसलिए “स्तंभों का वन” और “खंभों का अजायबघर”
नेमीनाथ जैन मंदिरचौमुखा के पास; यहाँ नग्न व संभोगरत युगलों की मूर्तियाँ हैं, इसलिए “पातरियां रो देवरो” भी कहते हैं
पार्श्वनाथ जैन मंदिरनेमीनाथ के पास; श्यामल वर्ण की पार्श्वनाथ प्रतिमा
  • आदिनाथ चौमुखा के और नाम ➜ त्रैलोक्य दीपक, त्रिभुवन प्रासाद, चतुर्मुख जिन प्रासाद तथा (आचार्य विमलसूरि के शब्दों में) नलिनी गुल्म विमान।
  • फर्ग्यूसन ➜ उत्तर भारत का कोई और मंदिर ऐसी सुन्दरता, सजावट और स्थापत्य-आदर्श का नहीं है।

पाली के अन्य मंदिर

मंदिरस्थानविशेष
मुंछाला महावीरघाणेराव के पास (कुंभलगढ़ अभयारण्य)कुम्भा-काल में सफेद संगमरमर से बना, महावीर स्वामी को अर्पित; महावीर की मूँछों की एक लोककथा से स्थान का नाम पड़ा
सेवाड़ी जैन मंदिरसेवाड़ीराजस्थान का सबसे प्राचीन भूमिज शैली का मंदिर, 1010–20 ई.
वरकाणा जैन मंदिरवरकाणापार्श्वनाथ का प्राचीन मंदिर; पाली के पंचतीर्थों में
नारलाई जैन मंदिरनारलाईगिरनार तीर्थ प्रसिद्ध — नेमीनाथ की काली प्रतिमा; पास में सहस्रावन तीर्थ

… शेष 8 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

जैन धर्म के पंचतीर्थ

  1. वरकाणा
  2. नारलाई
  3. नाडोल

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

ट्रिक: रणकपुर की गिनती — 24 · 84 · 1444; साल 1439; सेठ धरणकशाह; शिल्पी देपाक; प्रेरक सोमसुन्दर सूरि।

2. जालौर व सांचौर

मंदिरस्थानविशेष
आपेश्वर महादेवरामसीनगुर्जर-प्रतिहारकालीन; शिव की 5 फुट ऊँची प्रतिमा
वराह मंदिरभीनमालमूर्ति जैसलमेर के पीले पत्थर की
जगतस्वामी सूर्य मंदिरभीनमालप्रतिहारों का बनवाया सूर्य मंदिर
सिरे मंदिरजालौरजालन्धरनाथ की तपोभूमि; पुराना शिव मंदिर राजा रतनसिंह का था, जिसे जोधपुर के मानसिंह ने गुरु आयसदेव नाथ से प्रेरित होकर नए सिरे से बनवाया

ट्रिक: भीनमाल के तीन नाम याद रखें — वराह मंदिर, जगतस्वामी सूर्य मंदिर, 72 जिनालय।

3. सिरोही व आबू के मंदिर

दिलवाड़ा जैन मंदिर — आबू पर्वत

  • बस-स्टैण्ड (माउंट आबू) से डेढ़ मील के फ़ासले पर; 11वीं से 15वीं सदी के बीच बने; सोलंकी स्थापत्य के उदाहरण।
  • छतों और स्तम्भों की नक्काशी बेजोड़ है; इन्हें राजस्थान का सर्वश्रेष्ठ जैन मंदिर माना जाता है।
  • दिलवाड़ा के जैन मंदिरों पर 5 रुपये का डाक टिकट 14 अक्टूबर 2009 को निकला।
मंदिरकिसने / कबविशेष
विमलवसाहीमंत्री विमलशाह (गुजरात के सोलंकी राजा भीमदेव के), 1031 ई.; निर्देशन में शिल्पी कीर्तिधरपहले तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) के नाम; समूह का सबसे भव्य और सबसे प्राचीन; लगभग 3 हजार शिल्पियों ने 14 वर्ष में बनाया; 57 देवरियाँ; बाहर से सादा, भीतर बारीक तक्षण-कला
लूणवसाहीभीमदेव द्वितीय (चालुक्य) के अमात्य वास्तुपाल-तेजपाल, 1230 ई.; शिल्पी शोभनदेव22वें तीर्थंकर नेमीनाथ को समर्पित; देवरानी-जेठानी के गोखड़े — इसलिए “देवरानी-जेठानी का मंदिर”
पीतलहर आदिश्वर (भीमाशाह का मंदिर)भीमाशाहपीतल की 108 मण की आदिनाथ-प्रतिमा

रोचक तथ्य: कर्नल टॉड — ताजमहल के बाद भारत की इमारतों में जिसका नाम लिया जाए, वह विमलशाह का मंदिर है।

आबू और सिरोही के अन्य मंदिर

मंदिरस्थानविशेष
कुंथुनाथ दिगंबर जैन मंदिरआबूलूणवसाही के बाहर अलग से; उन पाँच में गिना नहीं जाता; 1449 ई. में कुम्भा ने बनवाया; यहीं जिनदत्त सूरी की छतरी
अचलेश्वर महादेवआबूशिवलिंग नहीं, ब्रह्मखड्ड — शिव के अंगूठे की पूजा; आबू के परमार शासकों के आराध्य; महमूद बेगड़ा के हमले में खंडित शिव-पार्वती-नंदी की मूर्तियाँ आज भी हैं; मधुमक्खियों ने बेगड़ा की सेना पर हमला किया — वह स्थान “भंवराथल”
रसिया बालम / कुंवारी कन्या मंदिरआबू (दिलवाड़ा के पीछे)दो प्रतिमाएँ — हाथ में विष का प्याला लिए युवक और एक युवती
मूर अर्द्ध गुफामाउण्ट आबूजनवरी 1882 में अंग्रेज़ी सेना (ब्रिटिश-भारतीय सेना) के मेजर जनरल आर्थर थॉमस मूर का अंग्रेज़ी शिलालेख यहाँ लगा

4. बीकानेर संभाग के मंदिर

बीकानेर

मंदिरस्थानविशेष
कपिल मुनि का मंदिरकोलायतकपिल सरोवर किनारे कपिल मुनि सहित 5 मंदिर; जनश्रुति — यहीं कपिल मुनि का आश्रम था और उन्होंने सांख्य दर्शन दिया; कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ जांगल अंचल का सबसे बड़ा मेला जुटता है, झील में दीपदान; झील पर 52 घाट; गुरु नानकदेव की यात्रा की स्मृति में गुरुद्वारा
शेर पर सवार गणपतिजूनागढ़जूनागढ़ के तैंतीस-करोड़-देवता वाले संग्रह की एक प्रतिमा में गणपति मूषक की जगह शेर पर सवार हैं; यह असल में मूर्तियों का संग्रह है — अनूपसिंह औरंगजेब के दक्षिण-अभियान में रहते हुए अनेक मूर्तियाँ बीकानेर भिजवाते थे
भांडाशाह जैन मंदिरबीकानेर5वें तीर्थंकर सुमतिनाथ का; “त्रिलोक दीपक प्रासाद”; बनवाने वाले भीनासर के घी-व्यापारी भांडाशाह ओसवाल; काल राव लूणकरण का, वर्ष 1514 ई.; “भंडेश्वर / संदेश्वर” नाम भी; नींव में सैकड़ों मण घी डाला गया; अनूपसिंह के काल में चित्रकार मुराद बख्श उस्ता ने स्वर्णयुक्त मीनाकारी के भित्ति-चित्र बनाए
लक्ष्मीनारायण जी (लक्ष्मीनाथ जी)बीकानेरराव लूणकरण ने बनवाया

चूरू

मंदिरस्थानविशेष
सालासर बालाजीसालासरमूर्ति आसोटा गाँव में निकली; शुरुआती गढ़ाई नूरा और दाऊ नामक दो मुस्लिम कारीगरों ने की; “दाढ़ी-मूँछ वाले हनुमान जी”; संस्थापक महात्मा मोहनदास
तिरुपति बालाजी (वेंकटेश्वर)सुजानगढ़द्रविड़ ढंग का; सोहनलाल जानोदिया की देन, लागत लगभग 2 करोड़ रुपये; 1994 में भैरोसिंह शेखावत के हाथों उद्घाटन
साहवा का गुरुद्वारासाहवाराजस्थान के सिखों का सबसे बड़ा मेला; गुरु गोविन्द सिंह यहाँ पधारे थे; पास में प्राचीन तालाब

हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर

मंदिर / स्थलस्थानविशेष
गोगाजी का मंदिरगोगामेड़ी (हनुमानगढ़)विस्तार “लोकदेवता” में
भद्रकाली मंदिरअमरपुरा थेहड़ी (हनुमानगढ़)—
ब्राह्मणी माता मंदिरपल्लू (हनुमानगढ़)—

5. पैनोरमा व स्मारक

इस सूची में हर संभाग के पैनोरमा गिनाए गए हैं — महापुरुष, वीर, संत, लोकदेवता और स्वतंत्रता-संग्राम से जुड़े स्थल। जो सूची में निर्माणाधीन दर्ज थे, वे उसी रूप में लिखे गए हैं।

  • उदयपुर संभाग ➜ महाराणा प्रताप, बप्पा रावल, पन्नाधाय, भामाशाह…
  • कोटा संभाग ➜ बूंदा मीणा, हाड़ौती, संत पीपाजी
  • भरतपुर संभाग ➜ सूरजमल, गोकुला जाट, राणा सांगा, हम्मीर…
  • जयपुर संभाग ➜ गुरु गोविन्द सिंह, राव शेखा, राजा हेमू…

6. उदयपुर संभाग के पैनोरमा

पैनोरमा / स्मारकस्थान
महाराणा प्रताप पैनोरमा (निर्माणाधीन)चावण्ड (सलूम्बर)
वीरवती हाड़ी रानी पैनोरमासलूम्बर
बप्पा रावल पैनोरमामठाठा (उदयपुर) — 10 अगस्त 2018
राणा पुंजा पैनोरमाउदयपुर

ध्यान दें: पन्नाधाय के दो पैनोरमा — पाण्डोली (चित्तौड़गढ़) और कमेरी (राजसमंद)।

7. कोटा व भरतपुर संभाग

कोटा संभाग

पैनोरमास्थान
बूंदा मीणा पैनोरमा (निर्माणाधीन)बूँदी
हाड़ौती पैनोरमाबारां
संत पीपाजी पैनोरमाझालावाड़

भरतपुर संभाग

पैनोरमास्थान
अजय योद्धा महाराजा सूरजमल पैनोरमाभरतपुर
श्री गोकुला जाट व राजा खेमकरण पैनोरमाभरतपुर
गोविन्द स्वामी पैनोरमाअटारी (भरतपुर)
राणा सांगा पैनोरमाखानवा (भरतपुर)

8. जयपुर संभाग के पैनोरमा

पैनोरमा / स्मारकस्थान
गुरु गोविन्द सिंह जी का पैनोरमानरायणा (जयपुर)
स्वतंत्रता सेनानियों का पैनोरमा (निर्माणाधीन)जयपुर
स्वामी आत्माराम जी लक्ष्य पैनोरमाजयपुर
पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्मारकधानक्या गाँव (जयपुर) — पं. दीनदयाल का जन्म-स्थान

9. अजमेर संभाग के पैनोरमा

पैनोरमा / स्मारकस्थान
पृथ्वीराज पैनोरमाअजमेर
श्री विद्यासागर जी महाराज पैनोरमाअजमेर
नागरी दास का स्मारककिशनगढ़ (अजमेर)
निम्बार्काचार्य पैनोरमासलेमाबाद (अजमेर)

10. जोधपुर संभाग के पैनोरमा

पैनोरमास्थान
वीर दुर्गादास पैनोरमाजोधपुर
महर्षि नवल पैनोरमाजोधपुर
श्री राव चन्द्रसेन पैनोरमाजोधपुर
देवराज जी का पैनोरमा (निर्माणाधीन)सेतरावा (फलोदी)

11. बीकानेर संभाग के पैनोरमा

पैनोरमास्थान
करणी माता का पैनोरमादेशनोक (बीकानेर)
राव बीकाजी पैनोरमाबीकानेर
जसनाथ जी पैनोरमा (निर्माणाधीन)कतरियासर (बीकानेर)

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. रणकपुर का आदिनाथ चौमुखा मंदिर 1439 ई. में कुम्भा के समय सेठ धरणकशाह पोरवाल ने बनवाया; शिल्पी देपाक थे।
  2. आदिनाथ चौमुखा 1444 खंभों पर टिका है, इसीलिए उसे «स्तंभों का वन» कहते हैं।
  3. सेवाड़ी जैन मंदिर राजस्थान का सबसे प्राचीन भूमिज शैली का मंदिर है (1010–20 ई.)।
  4. दिलवाड़ा में विमलवसाही सबसे प्राचीन और भव्य है (1031 ई., विमलशाह); लूणवसाही 1230 ई. में वास्तुपाल-तेजपाल ने बनवाई, नेमीनाथ को समर्पित।
  5. अचलेश्वर महादेव (आबू) में शिवलिंग नहीं, ब्रह्मखड्ड है — यहाँ शिव के अंगूठे की पूजा होती है।
  6. कोलायत में कार्तिक पूर्णिमा पर जांगल अंचल का सबसे बड़ा मेला जुटता है; झील पर 52 घाट हैं।
  7. सालासर बालाजी «दाढ़ी-मूँछ वाले हनुमान जी» कहलाते हैं; संस्थापक महात्मा मोहनदास थे।
  8. पन्नाधाय के दो पैनोरमा हैं — पाण्डोली (चित्तौड़गढ़) और कमेरी (राजसमंद)।

अगले भाग में चिश्ती परम्परा के शब्द और केन्द्र, अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज़ का जीवन, दरगाह का इतिहास, उसकी इमारतें और रजब माह का उर्स।

पिछला भाग: राजस्थान के मंदिर: अजमेर संभाग एवं जोधपुर व बीकानेर संभाग (भाग 1)

अगला भाग: मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती

इन्हें भी पढ़ें: मुस्लिम पीर, मस्जिदें, दरगाह, मीनार, मकबरे · प्रतिहार वंश (गुर्जर–प्रतिहार)

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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