राजस्थान के दुर्ग: मेवाड़ व हाड़ौती के दुर्ग (भाग 2) – Rajasthan Art and Culture Chapter 22

कुम्भलगढ़, गागरोन, बूँदी का तारागढ़, बाराँ-कोटा-झालावाड़ के दुर्ग और मेवाड़ के अन्य किले।

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In this chapter (7 sections)
  1. कुम्भलगढ़
  2. मेवाड़ के अन्य दुर्ग
  3. गागरोन
  4. बूँदी — तारागढ़
  5. बाराँ के दुर्ग
  6. कोटा व झालावाड़ के अन्य दुर्ग
  7. रिवीजन पॉइंटर्स

हर दुर्ग के साथ तीन बातें जोड़कर याद रखें — ज़िला, निर्माता और वह विशेषता जो उसे राज्य में अनोखा बनाती है। कुम्भलगढ़ कुम्भा का है, गागरोन खींची चौहानों का और बूँदी का तारागढ़ हाड़ाओं का। इस भाग में कुम्भलगढ़, मेवाड़ के अन्य दुर्ग, गागरोन, बूँदी, बाराँ तथा कोटा-झालावाड़ के किले एक-एक करके लिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के दुर्ग, 8 चॉक-बोर्ड चित्र, 23 नक्शे, 24 फ्लैशकार्ड और 15 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. कुम्भलगढ़

  • ज़िला ➜ राजसमंद
  • निर्माता ➜ महाराणा कुम्भा
  • काल ➜ 1448–1458 ई.

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • कुम्भा ने नागौर विजय की खुशी में बनवाया; उसी जगह पहले मौर्य शासक सम्प्रति के दुर्ग के खंडहर थे। एक मान्यता यह भी कि नाम कुम्भा की रानी कुम्भल देवी पर पड़ा।
  • सादड़ी गाँव के निकट, मेवाड़ और मारवाड़ की सरहद पर, हाथीगुड़ा की नाल के ठीक पास; गोड़वाड़ की रक्षा के लिए बना।
  • अरावली की 13 पहाड़ियों से घिरी गंधमादन चोटी पर; आस-पास की चोटियाँ — हेमकूट, नील, हिमवंत, निषाद, श्वेत (कुम्भलगढ़ प्रशस्ति)।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

द्वार

केलवाड़ा से पश्चिम की ओर नाल चढ़ते ही पहला द्वार आरेठपोल, लगभग एक मील बाद हल्लापोल, फिर हनुमानपोल (यहाँ की हनुमान प्रतिमा कुम्भा नागौर से जीतकर लाए) और रामपोल (मुख्य)। आगे विजयपोल, भैरवपोल, निम्बोपोल, पागड़ापोल, गणेशपोल; साथ में दाणीबट्टा और पश्चिम में मारवाड़ की ओर खुलती टीडा बारी।

भीतर क्या-क्या

स्थानबात
कटारगढ़पहाड़ी पर बना भीतरी दुर्ग — “मेवाड़ की आँख“; बादल महल इसी का हिस्सा
जूनी कचहरीकटारगढ़ के पास — यहीं 9 मई 1540 को प्रताप जन्मे
कुम्भा महलकिले के सबसे पुराने महल
बादल महलमहाराणा फतेहसिंह का

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

इतिहास की घटनाएँ

काल / क्रमघटनाविवरण
1537उदयसिंह का राज्याभिषेकयहीं हुआ; यहीं से जाकर उन्होंने बनवीर को हराकर चित्तौड़ लिया
1540प्रताप का जन्म9 मई, जूनी कचहरी
1572 के बादप्रताप का शासनगोगुंदा में राजतिलक के बाद प्रताप ने यहीं से राज चलाया; हल्दीघाटी की तैयारी यहीं से
किसनेक्या कहा
अबुल फ़ज़ल (आइने अकबरी)इतनी ऊँचाई पर कि नीचे से ऊपर देखो तो सिर से पगड़ी गिर जाए
कर्नल टॉडमज़बूत प्राचीर, बुर्ज और कंगूरों के कारण एट्रस्कन से तुलना
हरविलास शारदाकुम्भा की सैनिक मेधा का प्रतीक

ध्यान दें: संकट की राजधानी दो — कुम्भलगढ़ मेवाड़ राजपरिवार की; पर महाराणा प्रताप की संकटकालीन राजधानी चावंड थी।

2. मेवाड़ के अन्य दुर्ग

ऊँटाला का किला — वल्लभनगर (उदयपुर)

  • मेवाड़ राजवंश का बनवाया किला।
  • प्रताप के बाद जहाँगीर ने इस पर कब्ज़ा कर लिया; मुगल सिपहसालार कायम ख़ाँ यहाँ तैनात था।
  • 1600 में अमरसिंह प्रथम के समय इसे लेने के लिए ऊँटाला का युद्ध हुआ।
दुर्गज़िलामुख्य बातें
सज्जनगढ़उदयपुरफ़तेहसागर के पास बाँसदरा (बंसधारा) पहाड़ी; महाराणा सज्जनसिंह; “मेवाड़ का मुकुटमणि“, “मानसून पैलेस“
भैंसरोड़गढ़चित्तौड़गढ़ (रावतभाटा के पास)चम्बल-बामनी संगम की पहाड़ी, तीन ओर पानी — जल दुर्ग; व्यापारी भैंसाशाह और बंजारे रोड़ा ने लुटेरों से बचाव को बनाया — व्यापारियों का बनाया एकमात्र दुर्ग; “राजस्थान का वेल्लोर“
सराड़ासलूम्बर“मेवाड़ का काला पानी“
गोगुंदा गढ़उदयपुर—

रोचक तथ्य: कर्नल टॉड भैंसरोड़गढ़ पर इतने मोहित हुए कि बोले — राजपूताने में कोई जागीर मिले तो मैं भैंसरोड़गढ़ ही लूँगा।

3. गागरोन

  • ज़िला ➜ झालावाड़
  • निर्माता ➜ डोड परमार (बीजलदेव), 11वीं सदी
  • संगम ➜ आहू + कालीसिंध (“सामेल”)
  • खींची वंश के संस्थापक देवनसिंह (धारू) ने डोड बीजलदेव से छीनकर नाम गागरोन रखा (चौहान कुल कल्पद्रुम); आगे यह खींची चौहानों का रहा।
  • पौराणिक कथा इसे कृष्ण के पुरोहित गर्गाचार्य का निवास बताती है।
  • राज्य का एकमात्र दुर्ग जो बिना नींव सीधी कठोर चट्टान पर खड़ा है — चट्टान अरावली की नहीं, विंध्याचल की है।
  • द्वार ➜ सूरजपोल, गणेशपोल, भैरवपोल; बुलंद दरवाज़ा औरंगज़ेब का बनवाया।
  • भीतर ➜ जौहर कुंड, मधुसूदन मंदिर, कोटा राज्य की टकसाल, कोटा के झाला ज़ालिमसिंह का ज़ालिम कोट।

दो साके

साकाहमलावरशासकबात
पहला — 1423मांडू का होशंगशाहअचलदास खींचीकुम्भा की बहन लाला (लीला) मेवाड़ी ने जौहर की अगुवाई की; वंश बचाने को बड़ा बेटा पाल्हणसी पहले ही बाहर भेजा गया
दूसरा — 1444मांडू का महमूद ख़िलजी प्रथमपाल्हणसीकुम्भा का भेजा सेनापति धीरा (धाहिरा) भी मारा गया; जीत के बाद नया कोट बनाकर नाम मुस्तफ़ाबाद; वर्णन मआसिरे महमूदशाही में

गागरोन के स्वामी

  1. होशंगशाह
  2. महमूद ख़िलजी प्रथम
  3. बहादुरशाह

4. बूँदी — तारागढ़

  • ज़िला ➜ बूँदी
  • निर्माता ➜ राव बरसिंह हाड़ा
  • वर्ष ➜ 1354 ई.
  • प्राचीन काल में यह इलाक़ा बूंदा मीणा के अधीन था — उसी से नाम “बूँदी”। जैता मीणा को हराकर राव देवा हाड़ा ने इलाक़ा लिया; तब यह “बंदू का नाल” कहलाता था।
  • 1354 में राव बरसिंह (देवा के वंशज) ने बूँदी नगर के उत्तर वाली पहाड़ी पर दुर्ग बनवाया — मेवाड़, मालवा, गुजरात के संभावित हमलों से बचाव को।
  • नाम तारागढ़ — इतनी ऊँचाई पर कि धरती से आसमान के तारे जैसा दिखता है। बाहरी परकोटा 18वीं सदी में दलेलसिंह ने बनवाया।

महलों का परिसर — गढ़ पैलेस

यहाँ एक महल नहीं, कई पीढ़ियों के राजाओं के जोड़े हुए महल हैं — इसलिए इसे महलों का परिसर या गढ़ पैलेस कहते हैं। गढ़ पैलेस से सटी नवलसागर झील है और किले की पहाड़ी के नीचे जैतसागर।

महल / भवनबात
रंगमहलराव शत्रुशाल (छत्रसाल) का
रंगविलास चित्रशालाश्रीरंगनाथ के भक्त उम्मेदसिंह ने रंगनाथ मंदिर के साथ बनवाई — बूँदी चित्रशैली का बेहतरीन नमूना
रतनदौलत दरीखानाबूँदी के शासकों का राजतिलक
  • कर्नल टॉड ➜ रजवाड़ों के सब राजप्रासादों में बूँदी के महल सबसे सुंदर।
  • रुडयार्ड किपलिंग 19वीं सदी में आए, जैतसागर किनारे सुखमहल में ठहरे और बोले — यह किला इंसानों ने नहीं, प्रेतों ने बनाया लगता है। इसी से “तिलस्मी किला“।
  • राणा लाखा ➜ पिता क्षेत्रसिंह बूँदी जीतने में मारे गए; लाखा ने तारागढ़ जीतने की क़सम खाई, जीत न सके तो मिट्टी का नकली किला बनवाकर उसे गिराया और प्रण पूरा माना।

5. बाराँ के दुर्ग

शेरगढ़ (कोशवर्धन)

  • परवन नदी के किनारे, कोशवर्धन पहाड़ी पर — पुराना नाम कोशवर्धन दुर्ग; जल दुर्ग।
  • निर्माताओं पर पक्की जानकारी नहीं; माना जाता है 8वीं सदी में नागवंशी शासकों ने बनवाया।
  • 1542 में मालवा अभियान पर शेरशाह सूरी ने जीता, मरम्मत कराई और नाम शेरगढ़ रखा।

शाहबाद का किला

  • भामती पहाड़ी पर; चौहान राजा मुकुटमणि देव, 1521 ई.।
  • शेरशाह कालिंजर अभियान में इसे जीतकर रुका और बेटे सलीम के नाम पर सलीमाबाद कहा; मुगलों के हाथ आने पर शाहबाद। औरंगज़ेब का भी अधिकार रहा।
  • भीतर ➜ चौकोर महल बाला किला, चौहान राजा इंद्रमन का बादल महल, नवलबाण तोप, कुंडाखोह झरना।
दुर्गबात
नाहरगढ़ (बाराँ)लाल पत्थर, मुगल शैली — “हाड़ौती का लाल किला“
गुगोर दुर्गबाराँ
भँवरगढ़ दुर्गबाराँ

6. कोटा व झालावाड़ के अन्य दुर्ग

कोटा दुर्ग

  • चम्बल किनारे, कोटा बैराज के पास।
  • जैत्रसिंह (बूँदी के राव देवीसिंह हाड़ा का बेटा) ने कोटिया भील को हराकर बनवाया।
  • झाला हवेली ➜ भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध।
दुर्गज़िलाबात
मनोहरथानाझालावाड़परवन और कालीखाड़ के संगम पर — जल दुर्ग; निर्माता भीमसिंह; भीलों की आराध्य विश्वंती देवी का मंदिर
झालावाड़ गढ़झालावाड़“गढ़ पैलेस“; 1838–1854 के बीच महाराजा मदनसिंह व उत्तराधिकारियों ने बनवाया
नवलखा किलाझालरापाटन (झालावाड़)झाला पृथ्वीसिंह का बनवाया

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. कुम्भलगढ़ राजसमंद में है; महाराणा कुम्भा ने इसे 1448–1458 ई. में गंधमादन चोटी पर बनवाया।
  2. कुम्भलगढ़ के भीतरी दुर्ग कटारगढ़ को «मेवाड़ की आँख» कहते हैं; जूनी कचहरी में 9 मई 1540 को प्रताप जन्मे।
  3. महाराणा प्रताप की संकटकालीन राजधानी चावंड थी, कुम्भलगढ़ नहीं।
  4. भैंसरोड़गढ़ चम्बल-बामनी संगम का जल दुर्ग है और व्यापारियों का बनवाया एकमात्र दुर्ग माना जाता है।
  5. गागरोन आहू और कालीसिंध के संगम पर है; राज्य का एकमात्र दुर्ग जो बिना नींव सीधी कठोर चट्टान पर खड़ा है।
  6. गागरोन के दो साके हुए — 1423 (अचलदास खींची, होशंगशाह के सामने) और 1444 (पाल्हणसी, महमूद ख़िलजी प्रथम के सामने)।
  7. बूँदी का तारागढ़ राव बरसिंह हाड़ा ने 1354 ई. में बनवाया।
  8. बाराँ का शेरगढ़ (कोशवर्धन) परवन किनारे का जल दुर्ग है; 1542 में शेरशाह सूरी ने इसका नाम शेरगढ़ रखा।
  9. बाराँ का नाहरगढ़ लाल पत्थर व मुगल शैली का है और «हाड़ौती का लाल किला» कहलाता है।

अगले भाग में सवाई माधोपुर, करौली, भरतपुर, डीग और धौलपुर के किले, फिर जयपुर, दौसा, अलवर, सीकर और झुंझुनूं के दुर्ग।

पिछला भाग: राजस्थान के दुर्ग: दुर्ग — परिचय व प्रकार एवं मेवाड़ व हाड़ौती के दुर्ग (भाग 1)

अगला भाग: राजस्थान के दुर्ग: भरतपुर संभाग के दुर्ग एवं जयपुर संभाग के दुर्ग

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