राजस्थान के त्योहार व मेले: हिन्दू मास-वार त्योहार (भाग 2) – Rajasthan Art and Culture Chapter 58

वैशाख से फाल्गुन तक हिन्दू महीनों के त्योहार, उनकी तिथियाँ और मेले, PYQ सहित।

9 min read Updated Notes in Hindi
In this chapter (7 sections)
  1. वैशाख · ज्येष्ठ · आषाढ़
  2. श्रावण मास
  3. भाद्रपद मास
  4. आश्विन मास
  5. कार्तिक मास
  6. माघ · फाल्गुन
  7. रिवीजन पॉइंटर्स

राजस्थान के पर्व कैलेंडर की तरह एक के बाद एक आते हैं, इसलिए महीने के क्रम से पढ़ने पर तिथि और मेला दोनों साथ जुड़ जाते हैं। इस भाग में वैशाख-ज्येष्ठ-आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक और माघ-फाल्गुन के पर्व क्रमवार रखे गए हैं। जिन तथ्यों पर पिछली परीक्षाओं में प्रश्न आया है, उनके साथ परीक्षा का नाम लिखा गया है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के त्योहार व मेले, 9 चॉक-बोर्ड चित्र, 28 नक्शे, 31 फ्लैशकार्ड और 15 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. वैशाख · ज्येष्ठ · आषाढ़

महीना · तिथिपर्वविवरण
वैशाख कृष्ण तृतीयाधींगा गवरउदयपुर-जोधपुर (गणगौर शाखा देखें)
वैशाख शुक्ल तृतीयाअक्षय तृतीया / आखा तीजराजस्थान में सबसे ज़्यादा बाल विवाह इसी दिन; अबूझ सावा; परशुराम जयन्ती; सतयुग-त्रेतायुग का पहला दिन
वैशाख पूर्णिमाबुद्ध पूर्णिमाबुद्ध का जन्म, ज्ञान-प्राप्ति और निर्वाण — तीनों इसी तिथि को
वैशाख पूर्णिमापीपल पूर्णिमापीपल वृक्ष की पूजा

… शेष 4 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

आखा तीज की दो रोचक बातें

  • बीकानेर का स्थापना दिवस (राव बीका द्वारा बसाया गया) भी यही तिथि है; शहर आसमान में पतंगों से भर जाता है।
  • किसान सात अनाज और हल की पूजा करके जल्दी बारिश की कामना करते हैं; उस दिन गेहूँ-बाजरे का खीचड़ा, गुड़ की गलवाणी और मंगोड़ी का साग बनता है।

बुद्ध पूर्णिमा के मेले

मेलास्थान
मातृकुण्डियाराश्मी (चित्तौड़गढ़)
गौतमेश्वरअरनोद (प्रतापगढ़)
गोमती सागरझालरापाटन (झालावाड़)

ज्येष्ठ अमावस्या (वट सावित्री) पर बारां में सीताबाड़ी मेला भरता है — यह सहरिया जनजाति का कुम्भ कहलाता है।

ट्रिक: तीन बुद्ध-पूर्णिमा मेले याद रखें — चित्तौड़ (मातृकुण्डिया) · प्रतापगढ़ (गौतमेश्वर) · झालावाड़ (गोमती सागर) — “चित्त-प्रताप-झाला”।

2. श्रावण मास

त्योहारों की शृंखला श्रावण की तीज से शुरू मानी जाती है। लोकोक्ति — “तीज त्योहारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर” (तीज के साथ पर्व लौटते हैं और गणगौर के साथ विदा हो जाते हैं)।

तिथिपर्वविवरण
श्रावण कृष्ण पंचमीनागपंचमीनाग की पूजा; मण्डोर (जोधपुर) में मेला; घर की मटकी पर कोयले से नाग बनाकर पूजन
श्रावण कृष्ण नवमीनिडरी नवमीनेवले की पूजा
श्रावण अमावस्याहरियाली अमावस्याखीर-मालपुए बनते हैं, ब्राह्मण भोज; लोग बाग-बगीचों में जाते हैं

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

नागपंचमी देश-भर में शुक्ल पंचमी को मनती है, पर राजस्थान और बंगाल में कृष्ण पक्ष की पंचमी को।

तीज — पीहर और झूला

  • शादी के बाद की पहली तीज मायके में मनाने का रिवाज़ है।
  • लोक-विश्वास है कि नव-विवाहिता और सास को पहले सावन में एक छत के नीचे नहीं रहना चाहिए, इसलिए अनहोनी के डर से ससुराल वाले बहू को मायके पहुँचा देते हैं।
  • सजी-धजी नवविवाहिताएँ पेड़ की डाल पर झूला डालकर झूलती हैं और मौसम व शृंगार के गीत गाती हैं।

हरियाली अमावस्या और श्रावण के मेले-महोत्सव

मेला / महोत्सवस्थानविशेष
कल्पवृक्ष मेलामांगलियावास (अजमेर)हरियाली अमावस्या पर
गुरुद्वारा बुड्ढा जोहड़ मेलागंगानगरहरियाली अमावस्या पर
डिग्गीपुरी का राजा (कल्याणजी) मेलाडिग्गीपुरी (टोंक)श्रावण अमावस्या

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: तीन तीजों के क्रम में पहली श्रावण शुक्ल तृतीया (छोटी/हरियाली), फिर भाद्रपद कृष्ण तृतीया (बड़ी/कजली), फिर भाद्रपद शुक्ल तृतीया (हरतालिका)।

3. भाद्रपद मास

भाद्रपद को पढ़ने का आसान तरीका — पहले कृष्ण पक्ष (तीज → छठ → जन्माष्टमी → गोगानवमी → बछबारस) और फिर शुक्ल पक्ष (तीज → चौथ → पंचमी → अष्टमी → दशमी → एकादशी → चतुर्दशी), और अंत में सांझी व श्राद्ध पक्ष (पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक)।

भाद्रपद कृष्ण पक्ष

  1. तृतीया बड़ी तीज
  2. षष्ठी हल छठ / उबछठ
  3. अष्टमी जन्माष्टमी

भाद्रपद शुक्ल पक्ष

  1. तृतीया हरतालिका
  2. चतुर्थी गणेश
  3. पंचमी ऋषि
  4. अष्टमी राधा

भाद्रपद कृष्ण पक्ष

तिथिपर्वविवरण
कृष्ण तृतीयाबड़ी तीज (कजली / सातुड़ी / बूढ़ी तीज)व्रत रखकर गायों का पूजन; नीम की पूजा; बूँदी का कजली तीज मेला व सवारी प्रसिद्ध — जुलूस नवल सागर से शुरू होकर कुंभा स्टेडियम पर समाप्त
कृष्ण षष्ठीहल छठबलराम (कृष्ण के बड़े भाई) का जन्मदिन; हल की पूजा; व्रत पुत्रवती स्त्रियाँ रखती हैं
कृष्ण षष्ठीउबछठअविवाहित बालिकाएँ शाम को सूर्य-पूजा के बाद चन्द्रोदय तक खड़ी रहती हैं, चंद्र-दर्शन करके भोजन — इसे “चन्दन षष्ठी व्रत” भी कहते हैं

जयपुर की हेड़े की परिक्रमा

जयपुर की छह कोसी परिक्रमा हर भाद्रपद में होती है; यात्रा पुराने घाट से चलती है और गोपालजी के मार्ग से गुज़रकर गोपालजी के मंदिर पर पूरी होती है।

भाद्रपद शुक्ल पक्ष · सांझी · श्राद्ध

तिथिपर्वविवरण
शुक्ल तृतीयाहरतालिका तीजगौरी और शंकर का पूजन
शुक्ल तृतीयारोट तीजघरों में मिस्सी रोटी और खीर बनती है
शुक्ल चतुर्थीगणेश चतुर्थी (“चतरा चौथ”)गणेश जन्मोत्सव; रणथम्भौर गणेश मेला (सवाई माधोपुर)
शुक्ल पंचमीऋषि पंचमीमाहेश्वरी समाज इसी दिन राखी बाँधता है; गंगा स्नान पवित्र
  • बेवाण एक काठ का मंदिर है जो सामने से खुला व तीन ओर से बंद होता है; जलझूलनी एकादशी व अनन्त चतुर्दशी पर राम, कृष्ण और विष्णु के छोटे विग्रह इसमें विराजमान कर जुलूस निकाला जाता है।

सांझी — 16 दिन

  • भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक, दशहरे से पहले श्राद्ध पक्ष में बनती है।
  • कुँवारी लड़कियाँ तरह-तरह की आकृतियों की सांझी गोबर से बनाती हैं; इसे पार्वती का ही रूप माना जाता है। [परीक्षा: वरिष्ठ अध्यापक 2023, पशु परिचर 2024 — राजस्थान में देवी “सांझी” किसका रूप मानी जाती है? ➜ पार्वती]
  • मेवाड़ और मालवा में सबसे ज़्यादा सांझी पूजन।

श्राद्ध पक्ष

16 दिन का श्राद्ध पक्ष (भाद्रपद की पूर्णिमा से आश्विन की अमावस्या) — स्वर्गीय पूर्वजों को पिण्डदान दिया जाता है और ब्राह्मण भोज होता है।

4. आश्विन मास

तिथिपर्वविवरण
शुक्ल एकम से नवमीशारदीय नवरात्रदुर्गा पूजा — पश्चिम बंगाल में विशेष; शीलादेवी (आमेर) में मेला
शुक्ल अष्टमीदुर्गाष्टमीनवरात्र का आठवाँ दिन; इसे वीर अष्टमी भी कहते हैं
शुक्ल दशमीविजयदशमी / दशहराराम ने रावण को मारा — बुराई पर अच्छाई की जीत; सूर्यास्त के समय रावण, कुम्भकर्ण, मेघनाद के पुतले जलते हैं; लीलटांस पक्षी का दर्शन शुभ; शस्त्र-पूजा और खेजड़ी की पूजा

कोटा का दशहरा मेला

  • लगभग 20 दिन चलने वाला विशाल मेला।
  • परम्परा की शुरुआत महाराव दुर्जनशाल हाड़ा के समय (1723 ई.) मानी जाती है।
  • मेले के वर्तमान रूप की शुरुआत 1895 ई. में महाराव उम्मेदसिंह ने की।

5. कार्तिक मास

काल / क्रमघटनाविवरण
कृष्ण 4करवा चौथसुहागिन स्त्रियाँ पति की लम्बी आयु के लिए व्रत रखती हैं
कृष्ण 13धनतेरसधन्वन्तरि वैद्य और यमराज का पूजन; बर्तन, गहने, वाहन ख़रीदना शुभ
कृष्ण 14रूप चतुर्दशीछोटी दीपावली / काणती दिवाळी — स्वच्छता व सौन्दर्य का त्योहार
अमावस्यादीपावलीहिन्दुओं का सबसे बड़ा त्योहार; राम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे; लक्ष्मी पूजन; घर-दुकानें सजती हैं, शाम को दीपक; आर्य समाज इसे महावीर और दयानन्द सरस्वती का निर्वाण दिवस मानता है
कार्तिक पूर्णिमा का मेलास्थान
कोलायत मेला (कपिल मुनि)बीकानेर
चन्द्रभागा मेलाझालावाड़ (झालरापाटन)
पुष्कर मेलाअजमेर

6. माघ · फाल्गुन

तिथिपर्वविवरण
14 जनवरीमकर संक्रान्तिसूर्य-पूजा और दान-पुण्य; बहुएँ रूठी सास को मनाती हैं; जयपुर में पतंगबाज़ी
माघ कृष्ण चतुर्थीतिल चौथ / संकट चौथ—
माघ अमावस्यामौनी अमावस्यामनुस्मृति के रचयिता मनु का जन्मदिन; मौन व्रत
माघ शुक्ल पंचमीबसन्त पंचमीकामदेव और रति की पूजा; विद्यालयों में सरस्वती पूजा; पीले वस्त्र; बसन्त के आगमन का पहला दिन; ब्रज में राधा-कृष्ण लीलाएँ शुरू; चरणदासी संप्रदाय का मेला; राजस्थान सरकार का “गार्गी पुरस्कार” वितरण

दड़ा महोत्सव

  • स्थान ➜ धनोप (शाहपुरा, भीलवाड़ा)
  • कब ➜ हर साल मकर संक्रान्ति पर
  • क्या ➜ दड़ा = गेंद; खेल में जूट व कपड़े की बनी लगभग 7 किलो की गेंद काम आती है

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. आखा तीज (वैशाख शुक्ल तृतीया) पर राजस्थान में सबसे ज़्यादा बाल विवाह होते हैं; यही बीकानेर का स्थापना दिवस भी है।
  2. बुद्ध पूर्णिमा के तीन मेले — मातृकुण्डिया (चित्तौड़गढ़), गौतमेश्वर (प्रतापगढ़) और गोमती सागर (झालावाड़)।
  3. बारां का सीताबाड़ी मेला ज्येष्ठ अमावस्या पर भरता है और सहरिया जनजाति का कुम्भ कहलाता है।
  4. नागपंचमी देश-भर में शुक्ल पंचमी को मनती है, पर राजस्थान और बंगाल में कृष्ण पक्ष की पंचमी को।
  5. तीन तीजों का क्रम — श्रावण शुक्ल तृतीया (छोटी/हरियाली), भाद्रपद कृष्ण तृतीया (बड़ी/कजली), फिर भाद्रपद शुक्ल तृतीया (हरतालिका)।
  6. सांझी भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक बनती है और पार्वती का रूप मानी जाती है।
  7. कोटा के दशहरा मेले की परम्परा महाराव दुर्जनशाल हाड़ा के समय (1723 ई.) मानी जाती है; आज के रूप की शुरुआत 1895 ई. में महाराव उम्मेदसिंह ने की।
  8. कार्तिक पूर्णिमा के मेले — कोलायत (बीकानेर), चन्द्रभागा (झालावाड़) और पुष्कर (अजमेर)।
  9. दड़ा महोत्सव धनोप (शाहपुरा, भीलवाड़ा) में हर साल मकर संक्रान्ति पर होता है।

अगले भाग में होली के अलग-अलग रूप, सांगोद का न्हाण, अन्य धर्मों व समुदायों के पर्व और राजस्थान के प्रमुख धार्मिक मेले।

पिछला भाग: राजस्थान के त्योहार व मेले: कालगणना व संवत् एवं हिन्दू मास-वार त्योहार (भाग 1)

अगला भाग: राजस्थान के त्योहार व मेले: होली के रंग एवं अन्य धर्मों व समुदायों के पर्व

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पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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