राजस्थान के दुर्ग: दुर्ग — परिचय व प्रकार एवं मेवाड़ व हाड़ौती के दुर्ग (भाग 1) – Rajasthan Art and Culture Chapter 21

दुर्गों के प्रकार, श्रेणियाँ और उदाहरण, विश्व धरोहर के 6 पहाड़ी किले और चित्तौड़गढ़ दुर्ग।

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In this chapter (7 sections)
  1. ग्रंथों में दुर्ग के भेद
  2. दुर्गों की श्रेणियाँ
  3. आकार से नाम, रोचक तथ्य
  4. स्थापत्य की पृष्ठभूमि
  5. विश्व धरोहर — 6 पहाड़ी किले
  6. चित्तौड़गढ़
  7. रैपिड फायर तथ्य

दुर्ग वाले प्रश्न तीन बातों से सुलझते हैं — किला किस श्रेणी का है, किसने बनवाया और उससे जुड़ा साका या उपनाम क्या है। इस भाग में कौटिल्य, मनुस्मृति और शुक्रनीति के भेद, दुर्गों की श्रेणियाँ, आकार से पड़े नाम, स्थापत्य की पृष्ठभूमि और विश्व धरोहर के 6 पहाड़ी किले हैं। अंत में चित्तौड़गढ़ का पूरा ब्योरा दिया गया है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के दुर्ग, 8 चॉक-बोर्ड चित्र, 23 नक्शे, 24 फ्लैशकार्ड और 15 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. ग्रंथों में दुर्ग के भेद

ग्रंथकितने प्रकारनाम
कौटिल्य (अर्थशास्त्र)4औदक, पार्वत, धान्वन, वन
मनुस्मृति6धनु, मही, जल, वृक्ष, नृ, गिरि
शुक्रनीति (शुक्रनीतिसार)9वन, धन्व, जल, गिरि, सहाय, एरण, पारिख, पारिध, सैन्य
  • कौटिल्य की सलाह ➜ शत्रु से बचाव के लिए राजा राज्य की सीमाओं पर दुर्ग बनवाए।
  • शुक्रनीति राज्य के 7 अंग मानती है; दुर्ग उनमें से एक है। राज्य को शरीर मानें तो दुर्ग उसके हाथ हैं।
  • शुक्रनीति के नौ में सैन्य दुर्ग सबसे ऊँचा दर्जा पाता है।

ट्रिक: संख्याएँ बढ़ती क्रम में — कौटिल्य 4 → मनु 6 → शुक्र 9। शुक्र के नौ याद करने को: “वन-धन्व-जल-गिरि” (प्रकृति वाले चार) + “सहाय-सैन्य” (लोग) + “एरण-पारिख-पारिध” (रास्ता, खाई, दीवार)।

2. दुर्गों की श्रेणियाँ

श्रेणीपहचानराजस्थान के उदाहरण
पारिखचारों तरफ़ गहरी खाईलोहागढ़ (भरतपुर), जूनागढ़ (बीकानेर), डीग
जल / औदकचारों ओर पानीगागरोन (झालावाड़), शेरगढ़ (बाराँ), भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़), मनोहरथाना (झालावाड़)
गिरिऊँची पहाड़ी पर, पहाड़ियों से घिराचित्तौड़गढ़, रणथम्भौर, जालौर, मेहरानगढ़, अचलगढ़, कुम्भलगढ़, जयगढ़, नाहरगढ़, तारागढ़
धान्वनचारों ओर मरुस्थलजूनागढ़ (बीकानेर), भटनेर, जैसलमेर, नागौर

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ध्यान दें: रणथम्भौर, कुम्भलगढ़ और सिवाणा — तीनों गिरि भी हैं और वन दुर्ग भी। जूनागढ़ धान्वन + पारिख दोनों।

3. आकार से नाम, रोचक तथ्य

  • कागमुखी ➜ जिस पहाड़ी का अगला सिरा एकदम पतला और पिछला हिस्सा फैला हुआ हो; जैसे मेहरानगढ़ (जोधपुर)।
  • छाजमुखी ➜ उलटी बनावट: आगे चौड़ी, पीछे संकरी; जैसे दौसा का किला।
  • दुर्गों की गिनती में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

लिविंग फ़ोर्ट — जहाँ आज भी लोग बसते हैं

  1. चित्तौड़गढ़ ➜ सबसे बड़ा
  2. जैसलमेर ➜ दूसरा बड़ा
  3. भरतपुर (लोहागढ़)

4. स्थापत्य की पृष्ठभूमि

डॉ. सम्पूर्णानंद ने संस्कृति को सरल शब्दों में समझाया — हर विचार संस्कृति नहीं; जो काम पूरे समाज पर कभी न मिटने वाली छाप छोड़ दे, वही टिकाऊ असर संस्कृति है। स्थापत्य इसी संस्कृति का हिस्सा है।

नगर स्थापत्य

  • कालीबंगा (सिंधु-सरस्वती सभ्यता) — चौड़ी सड़कें, ढकी नालियाँ, दुर्ग का परकोटा, गोल कुएँ; यानी नगर-योजना उसी युग में विकसित हो चुकी थी।
  • शुरुआती नगर महाभारत, अर्थशास्त्र, शुक्रनीतिसार के सिद्धांतों पर बसे — परकोटा, चारों ओर खाई, और पेशों के अनुसार मोहल्ले।
  • राजपूत काल में जहाँ भी राजधानी बनी, जगह रक्षा व सुविधा देखकर चुनी गई।

मंडन और कुम्भा

  • कुम्भा से पहले भवन-निर्माण में ख़ास व्यवस्था नहीं थी; उनके शिल्पशास्त्री मंडन (15वीं सदी) के बाद यह नियमबद्ध हुआ।
  • मंडन की राय ➜ राजभवन या तो नगर के बीच हो या किसी कोने की ऊँचाई पर; उसके चारों ओर दुर्ग की तरह परकोटा और खाई हो; अंतःपुर और गुप्त कक्ष संकरे ढके रास्तों से जुड़ें।
  • कुम्भा (1433–68) के काल में कुम्भलगढ़, चित्तौड़गढ़ और अचलगढ़ में “कुम्भस्वामी” नाम से विष्णु मंदिर बने — मूर्तिकला का मानो नया जन्म।
मंडन का ग्रंथविषय
प्रासाद मंडनदेवालय (मंदिर) निर्माण
रूपावतार मंडनमूर्तियाँ गढ़ना
रूप मंडनमूर्ति-निर्माण

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

मुगल प्रभाव व राजमहल

  • मुगलों से सबसे पहले रिश्ता आमेर का बना, इसलिए उसी के स्थापत्य पर मुगल छाप सबसे पहले आई।
  • हिन्दू कारीगरों की मुस्लिम असर वाली इमारतों को फर्ग्युसन ने “इंडो-सारसेनिक शैली” कहा।
  • मध्यकाल में लगातार हमलों के कारण स्थापत्य में शौर्य व सजावट के साथ सुरक्षा जुड़ी — राजा अपने महल भी दुर्ग के भीतर बनवाने लगे और पानी के लिए जलाशय भी।

5. विश्व धरोहर — 6 पहाड़ी किले

21 जून 2013 को नोम पेन्ह (कम्बोडिया) में विश्व धरोहर समिति की बैठक हुई; उसी में राजस्थान के 6 पहाड़ी किले एक समूह के रूप में विश्व धरोहर बने।

किलाज़िला
चित्तौड़गढ़चित्तौड़गढ़
कुम्भलगढ़राजसमंद
रणथम्भौरसवाई माधोपुर

ट्रिक: “चि-कु-र-गा-आ-जै” — चित्तौड़, कुम्भलगढ़, रणथम्भौर, गागरोन, आमेर, जैसलमेर। जैसलमेर अकेला मरुस्थल वाला, गागरोन अकेला जल दुर्ग।

6. चित्तौड़गढ़

  • ज़िला ➜ चित्तौड़गढ़
  • निर्माता ➜ चित्रांग (चित्रांगद) मौर्य, 7वीं सदी
  • आधुनिक निर्माता ➜ महाराणा कुम्भा (15वीं सदी)

उपनाम व पहचान

याद रखें: “गढ़ तो चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़ैया” — यह कहावत इसी किले के लिए है।

  • बनाने वाले ➜ मौर्य राजा चित्रांग (चित्रांगद); कुमारपाल प्रबंध और मुहणोत नैणसी भी यही नाम देते हैं। वीर विनोद के अनुसार उन्होंने अपने नाम पर इसे चित्रकोट कहा, जो बिगड़कर चित्तौड़ बना।
  • बना 7वीं सदी में; 15वीं सदी में महाराणा कुम्भा ने इसे फिर से गढ़ा — इसलिए कुम्भा को इसका आधुनिक निर्माता मानते हैं।
  • स्थिति ➜ गंभीरी-बेड़च संगम के निकट, अरावली के मेसा पठार पर; समुद्र तल से लगभग 1850 फ़ीट ऊँचा।
  • लंबाई लगभग 8 किमी, चौड़ाई लगभग 2 किमी; कुल क्षेत्रफल 305 हेक्टेयर — क्षेत्रफल में राज्य का सबसे बड़ा किला।

प्रसिद्ध कथन

  • ह्यूग केसन ➜ सुनसान पड़े इस किले में घूमते हुए ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी भीमकाय जहाज़ के डेक पर टहल रहा हूँ।
  • यदुनाथ सरकार ➜ मेवाड़ में जिसने हल्दीघाटी और चित्तौड़गढ़ देख लिए उसने सब देख लिया; ये न देखे तो बाकी सब देखना भी बेकार।

इतिहास — किसके हाथ कब

काल / क्रमघटनाविवरण
734 ई.बप्पा रावल (कालभोज)अंतिम मौर्य शासक मानमोरी को हराकर अधिकार — मानमोरी का बनवाया तालाब आज भी भीतर है
8वीं सदीपहला हमलारावल खुमाण के समय अफ़ग़ानिस्तान के मामु का आक्रमण
9वीं सदीप्रतिहारप्रतिहारों के अधीन
10वीं–11वीं सदीपरमारमालवा के मुंज ने गुहिलों से छीना; परमारों का दबदबा
  • दशरथ शर्मा के मत में इस दुर्ग को सबसे पहले जीतने वाले रावल जैत्रसिंह थे।
  • अधिकांश समय गुहिलों का रहा, पर बीच-बीच में मौर्य, प्रतिहार, परमार, सोलंकी, खिलजी, सोनगरा चौहान और मुगल भी इसके स्वामी बने।
  • कुम्भा (1433–68) के राज में चित्तौड़ अपनी समृद्धि और यश के शिखर पर था।

द्वार, महल, मंदिर, जलाशय

  • पहले किले तक रथ जाने लायक रास्ता नहीं था; कुम्भा ने रथ-मार्ग बनवाया और 1433–68 के बीच 7 द्वार खड़े किए (जी.एच. ओझा)।
  • क्रम ➜ पाडनपोल (पाटनपोल, यानी बड़ा द्वार) → भैरवपोल → हनुमानपोल → गणेशपोल → जोड़नपोल (जोड़लापोल) → लक्ष्मणपोल → रामपोल (मुख्य)।
  • पाडनपोल के पास रावत बाघसिंह (प्रतापगढ़) का स्मारक — दूसरे साके में बहादुरशाह से लड़ते हुए गिरे।

महल और भवन

भवनबात
कुम्भा महलकुम्भा का बनवाया; इसके कंवरपदा में उदयसिंह (सांगा के बेटे) जन्मे; यहीं पन्नाधाय ने उदयसिंह को बचाया और पुत्र चंदन का बलिदान दिया
कंवरपदा के महलसांगा ने मीरां के लिए बनवाए
पद्मिनी महलपद्मिनी तालाब के उत्तरी किनारे पर — किले का सबसे बड़ा आकर्षण
गोरा-बादल महलदो गुम्बद वाले भवन, पद्मिनी महल से दक्षिण-पूर्व दिशा में

मंदिर

मंदिरबात
कालिका मातामूलतः सूर्य मंदिर; 7वीं सदी के अंत में राजा मानभंग ने बनवाया
तुलजा भवानीबनवीर का बनवाया
समिद्धेश्वर (त्रिभुवननारायण)परमार राजा भोज — 1011–1055 ई. के बीच; महासती स्थल पर
कुम्भश्यामविष्णु के वराह रूप का; कुम्भा ने 1449 में जीर्णोद्धार कराया

पानी के साधन

विजय स्तम्भ व जैन कीर्ति स्तम्भ

  • मौका — सारंगपुर (1437) में मालवा के महमूद ख़िलजी प्रथम पर जीत।
  • काम शुरू 1440, पूरा 1448 ई. (प्रतिष्ठा वि.सं. 1505)।
  • सामग्री ➜ लाल बलुआ पत्थर और सफ़ेद संगमरमर; ऊँचाई 122 फ़ीट, 9 मंज़िल, 157 सीढ़ियाँ; नौ मंज़िलें नौ निधियों की प्रतीक।
  • पहली मंज़िल के पार्श्व में अनंत, ब्रह्मा, रुद्र; तीसरी मंज़िल पर अरबी में 9 बार “अल्लाह”; आठवीं पर कोई मूर्ति नहीं; नौवीं बिजली से गिरी तो महाराणा स्वरूपसिंह ने फिर बनवाई।
किसनेक्या कहा
आम नामहिन्दू देवी-देवताओं का अजायबघर / म्यूज़ियम
गोपीनाथ शर्मालोकजीवन का रंगमंच
डॉ. गोट्ज़भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोश (शब्दकोश)
डॉ. उपेन्द्र नाथविष्णु को समर्पित होने से विष्णुध्वज

जैन कीर्ति स्तम्भ

  • प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) को समर्पित, 7 मंज़िला; किले की पूर्वी प्राचीर के पास।
  • बनवाया बघेरवाल जैन व्यापारी जीजा और उसके पुत्र पुण्यसिंह ने — पुरातत्त्व विभाग के अनुसार 1301 ई. में।
  • नीचे से 32 फ़ीट और ऊपर 15 फ़ीट चौड़ा।

चित्तौड़ के तीन साके

साकाहमलावरशासककेसरियाजौहर
पहला — 1303अलाउद्दीन ख़िलजीरावल रतनसिंहगोरा-बादल (चाचा-भतीजा)रानी पद्मिनी — 26 अगस्त 1303
दूसरा — 1535गुजरात का बहादुरशाह (सेनापति रूमी ख़ाँ)बालक विक्रमादित्यरावत बाघसिंह (प्रतापगढ़) व सज्जासिंहरानी कर्मावती व जवाहरबाई
तीसरा — 1568अकबरउदयसिंहजयमल राठौड़ व पत्ता (फत्ता) सिसोदियाफूलकँवर (पत्ता की पत्नी)
  • पहले साके के बाद अलाउद्दीन ने किला बेटे ख़िज़्र ख़ाँ को दिया और नाम ख़िज़्राबाद रखा; इसका वर्णन तारीख़-ए-अलाई में।
  • दूसरे साके का वर्णन श्यामलदास के वीर विनोद में।

7. रैपिड फायर तथ्य

  • कौटिल्य / मनुस्मृति / शुक्रनीति ➜ क्रमशः 4, 6 और 9 प्रकार के दुर्ग
  • पारिख दुर्ग ➜ चारों तरफ़ खाई; लोहागढ़, जूनागढ़ (बीकानेर), डीग
  • जल / औदक दुर्ग ➜ गागरोन, शेरगढ़ (बाराँ), भैंसरोड़गढ़, मनोहरथाना
  • कागमुखी ➜ मेहरानगढ़; छाजमुखी ➜ दौसा का किला
  • विश्व धरोहर ➜ 21 जून 2013 को 6 पहाड़ी किले, एक समूह के रूप में
  • लिविंग फ़ोर्ट ➜ चित्तौड़गढ़ सबसे बड़ा, जैसलमेर दूसरा
  • चित्तौड़गढ़ के निर्माता ➜ मौर्य शासक ने 7वीं सदी में बनवाया; आधुनिक निर्माता कुम्भा
  • विजय स्तम्भ ➜ 122 फ़ीट ऊँचा, 9 मंज़िल, 157 सीढ़ियाँ
  • चित्तौड़ के तीन साके ➜ 1303, 1535 और 1568

अगले भाग में कुम्भलगढ़ और मेवाड़ के अन्य किले, फिर गागरोन, बूँदी का तारागढ़ तथा बाराँ, कोटा और झालावाड़ के दुर्ग।

पिछला भाग: राजस्थान की वेशभूषा व पहनावा: सिर के वस्त्र एवं स्त्रियों के वस्त्र

अगला भाग: राजस्थान के दुर्ग: मेवाड़ व हाड़ौती के दुर्ग (भाग 2)

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पूरी श्रृंखला: राजस्थान की कला एवं संस्कृति — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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