मारवाड़ का राठौड़ राजवंश: अभयसिंह से हनुवंत सिंह एवं उपाधियाँ, उपनाम, ग्रन्थ – Rajasthan History Chapter 23

अभयसिंह से हनुवंत सिंह तक के जोधपुर शासक, साथ में उपाधियाँ, उपनाम, ग्रन्थ और मुग़ल-विवाह।

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In this chapter (11 sections)
  1. अभयसिंह से हनुवंत सिंह
  2. अभयसिंह, रामसिंह, बख्तसिंह
  3. विजयसिंह और भीमसिंह
  4. मानसिंह (1803–43)
  5. तख्तसिंह से जसवंत सिंह द्वितीय
  6. सरदार सिंह से हनुवंत सिंह
  7. शासकों की उपाधियाँ व उपनाम
  8. शासक और उनके ग्रन्थ
  9. प्रमुख महिलाएँ
  10. विशेष तथ्य और मुग़ल-विवाह
  11. रैपिड फायर तथ्य

जोधपुर के बाद के शासकों को याद रखने का आसान तरीक़ा है उन्हें एक-एक पहचान से जोड़ देना — अभयसिंह के साथ खेजड़ली, विजयसिंह के साथ विजयशाही सिक्के, मानसिंह के साथ नाथ सम्प्रदाय और हनुवंत सिंह के साथ विलय। इस भाग में अभयसिंह से हनुवंत सिंह तक का पूरा क्रम है, और अन्त में शासकों की उपाधियों, उनके ग्रन्थ, प्रमुख महिलाओं तथा मुग़ल-विवाह की सारणियाँ जोड़ी गई हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — मारवाड़ का राठौड़ राजवंश, 7 चॉक-बोर्ड चित्र, 4 चार्ट, 31 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. अभयसिंह से हनुवंत सिंह

काल / क्रमघटनाविवरण
1724अभयसिंहखेजड़ली आन्दोलन इन्हीं के समय
1750बख्तसिंहरामसिंह को हराकर जोधपुर
1755जयअप्पा की हत्याविजयसिंह द्वारा
1781विजयशाही सिक्केमारवाड़ में टकसाल

… शेष 7 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

2. अभयसिंह, रामसिंह, बख्तसिंह

शासककालमुख्य बातें
अभयसिंह1724–49खेजड़ली आन्दोलन इन्हीं के समय हुआ; अहमदाबाद के युद्ध में बुलन्द खाँ को हराया; ग्रन्थ — करणीदान सूरज प्रकाश, चारण कवि पृथ्वीराज अभयविलास, जगजीवन भट्ट अभयोदय (संस्कृत), वीरभाण रतनू राजरूपक
रामसिंह1749–50उच्छृंखल स्वभाव से सरदार नाराज़ होकर चाचा बख्तसिंह (नागौर) के पास चले गए; जालौर परगने पर संघर्ष; रामसिंह के साथ जयअप्पा सिंधिया, बख्तसिंह के साथ होल्कर (मराठे); 17 नवम्बर 1750 को रामसिंह हारा
बख्तसिंह1750–52नागौर के जागीरदार से जोधपुर के शासक; 1752 में अजमेर पर भी अधिकार, जिससे मराठे नाराज़ हुए; रामसिंह जयपुर के माधोसिंह के पास गया और मराठों की मदद की, पर बख्तसिंह के जीते जी सफलता नहीं मिली

ट्रिक: बख्तसिंह = नागौर की जागीर + दूसरा पितृहन्ता; अभयसिंह = खेजड़ली + सूरज प्रकाश।

3. विजयसिंह और भीमसिंह

विजयसिंह और मराठे

  1. जून 1753: रामसिंह + सिंधिया का हमला
  2. 15 सितम्बर 1753: मेड़ता के पास हार
  3. नागौर दुर्ग में शरण

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • विजयसिंह पिता बख्तसिंह जैसा योग्य नहीं था। जून 1753 में रामसिंह ने जयअप्पा सिंधिया के नेतृत्व में मराठों की मदद से जोधपुर पर चढ़ाई की; 15 सितम्बर 1753 को मेड़ता के पास भीषण युद्ध में विजयसिंह हारा और नागौर दुर्ग में शरण ली।
  • जयअप्पा के रवैये से तंग आकर विजयसिंह ने छल से उसे मरवा दिया (25 जुलाई 1755); फिर भी उसके भाई दत्ताजी सिंधिया ने नागौर का घेरा नहीं उठाया।
  • फरवरी 1756 की संधि — अजमेर परगना मराठों को; जालौर नगर और आधा मारवाड़ रामसिंह को।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

गुलाबराय का प्रभाव

  • विजयसिंह पर अपनी पासवान गुलाबराय का बहुत प्रभाव था; श्यामलदास ने वीर विनोद में उसे “जहाँगीर का नमूना” और गुलाबराय को “जोधपुर की नूरजहाँ” कहा।
  • गुलाबराय ने पौत्र मानसिंह को वारिस ठहरवाया था, पर सरदारों के विरोध से दूसरे पौत्र भीमसिंह को चुनना पड़ा।
  • कवि विशनसिंह बारहठ ने विजय विलास की रचना की।

भीमसिंह (1793–1803)

  • मेवाड़ के राणा भीमसिंह की बेटी कृष्णा कुमारी का रिश्ता 1799 में जोधपुर के भीमसिंह से तय हुआ, पर शादी से पहले 1803 में दूल्हे का देहान्त हो गया।
  • इनके समय कवि रामकर्ण ने अलंकार सम्मुचय लिखा।

ट्रिक: विजयसिंह = विजयशाही सिक्के (1781), जहाँगीर का नमूना; गुलाबराय = जोधपुर की नूरजहाँ।

4. मानसिंह (1803–43)

  • गद्दी की लड़ाई जीतकर मानसिंह 1803 में जोधपुर के शासक बने। नाथ सम्प्रदाय के अनुयायी होने के कारण वे “सन्यासी राजा” कहलाए।
  • जब मानसिंह जालौर किले में मारवाड़ी फ़ौज से घिरे थे, तब नाथ-सन्त आयसदेव नाथ ने उनके राजा बनने की भविष्यवाणी की, जो सच हुई। राजा बनकर मानसिंह ने उन्हें राजगुरु माना और उनकी प्रेरणा से जोधपुर का महामन्दिर बनवाया — नाथ सम्प्रदाय की मुख्य पीठ।
घटनातारीख़विवरण
गिंगोली का युद्ध13 मार्च 1807कृष्णा कुमारी विवाद से नाराज़ जयपुर के जगतसिंह द्वितीय ने अमीर खाँ पिण्डारी के साथ जोधपुर पर आक्रमण किया; परबतसर (अब डीडवाना-कुचामन) के गिंगोली में मानसिंह की हार
कृष्णा कुमारी21 जुलाई 1810मानसिंह के विरोध जारी रखने पर अमीर खाँ ने महाराणा भीमसिंह पर दबाव बनाया; कृष्णा ने आत्महत्या की
पुत्र को शासन1817छत्रसिंह को शासन सौंपा; वह शीघ्र चल बसा
ईस्ट इण्डिया कम्पनी से संधि6 जनवरी 1818अमीर खाँ से परेशान होकर अंग्रेज़ों से संधि
  • पदच्युत नागपुर-शासक आप्पा साहब भौंसले (मुधोजी) को मानसिंह ने आश्रय दिया और महामन्दिर में ठहराया; 15 जुलाई 1840 को वहीं उनका निधन हुआ। वे अंग्रेज़ों के कट्टर बैरी थे।
  • आश्रित कवि: मनोहरदास, सेवक दौलतराम, वागीराज गाङूराम आदि।

5. तख्तसिंह से जसवंत सिंह द्वितीय

तख्तसिंह (1843–73)

  • राज्याभिषेक में पॉलिटिकल एजेन्ट लुडलो शामिल हुआ। सबसे पहले नाथों का विद्रोह शान्त किया।
  • 1857 की क्रान्ति में अंग्रेज़ों की सहायता की।
  • लॉर्ड मेयो के 1870 के अजमेर दरबार में बैठक-क्रम में उदयपुर महाराणा से नीचे रखे जाने पर वे नहीं गए; इसकी सज़ा में सलामी की तोपें घटीं और शासन युवराज जसवंत सिंह को सौंपना पड़ा।

जसवंत सिंह द्वितीय (1873–95)

काल / क्रमघटनाविवरण
दिसम्बर 1875कलकत्ता दरबारभाग लिया
1877दिल्ली दरबारभाग लिया
1879नमक समझौताअंग्रेज़ों से
1881पहली जनगणनाजोधपुर में
  • दरबारी कवि मुरारीदान बारहठ ने यशवंत यशोभूषण लिखा; जसवंत सिंह ने उन्हें “कविराजा” का ख़िताब और लाख पसाव दिया।
  • सर प्रताप सिंह जसवंत सिंह द्वितीय के अनुज और जोधपुर के प्रधानमंत्री थे; 1887 में विक्टोरिया के स्वर्ण जुबली समारोह में मारवाड़ का प्रतिनिधित्व करने इंग्लैण्ड गए।

6. सरदार सिंह से हनुवंत सिंह

शासककालमुख्य बातें
सरदार सिंह1895–1911पोलो-प्रेमी — जोधपुर “पोलो का घर”; चीन के बॉक्सर युद्ध में अंग्रेज़ों की सहायता को सेना भेजी, इसलिए मारवाड़ के झण्डे पर “चाइना 1900” लिखने का सम्मान; नवम्बर 1895 में वायसराय एल्गिन से जसवंत ज़नाना अस्पताल व एल्गिन राजपूत स्कूल का उद्घाटन
सुमेर सिंह1911–18क़रीब 13 वर्ष की आयु में गद्दी; शासन चलाने के लिए चाचा सर प्रताप के नेतृत्व में रीजेन्सी कौन्सिल; जॉर्ज पंचम के राज्यारोहण (लन्दन) और 1911 के दिल्ली दरबार दोनों में उपस्थित; प्रथम विश्वयुद्ध में जोधपुर लांसर्स और सर प्रताप के साथ फ़्रांस के मोर्चे पर; ब्रिटेन ने GCB व लेफ्टिनेंट, फ़्रांस ने लीजियन दी ऑनर ग्रैण्ड ऑफ़िसर, मिस्र के सुल्तान ने ग्रैण्ड कॉर्डन ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ द नाइल दिया
उम्मेद सिंह1918–47वास्तविक शक्ति अंग्रेज़ों के हाथ; चीफ़ मिनिस्टर डोनाल्ड फ़ील्ड; छीतर पहाड़ी पर उम्मेद भवन; नरेन्द्र मण्डल में सक्रिय; गोलमेज़ सम्मेलन में प्रतिनिधि जे. डब्ल्यू. यंग; द्वितीय विश्वयुद्ध में सेना भेजी और स्वयं भी गए; जयनारायण व्यास को संविधान सभा में मारवाड़ का प्रतिनिधि बनाया; उपाधि “आधुनिक मारवाड़ का निर्माता”

उम्मेद सिंह और विधानसभा

  • 24 जुलाई 1945 को जोधपुर राज्य की विधानसभा के गठन की घोषणा की; 28 मार्च 1947 को जोधपुर लेजिस्लेटिव असेम्बली रूल्स का अनुमोदन किया।

हनुवंत सिंह और विलय

  • विलय पत्र पर हस्ताक्षर के समय रियासती विभाग के सचिव वी.पी. मेनन पर पिस्तौल तानने का प्रसंग प्रसिद्ध है।
  • अगस्त 1947 में सरदार पटेल और माउण्टबैटन के समझाने पर उन्होंने भारतीय संघ में विलय के पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए।
  • जनवरी 1949 में पटेल ने घोषणा की कि जोधपुर, जयपुर, बीकानेर और जैसलमेर मिलकर वृहद् राजस्थान बनेंगे; यह 30 मार्च 1949 को अस्तित्व में आया।

7. शासकों की उपाधियाँ व उपनाम

क्र.उपाधि / उपनामशासक
1हशमत वाला शासकराव मालदेव (मारवाड़)
2महान पुरुषार्थी राजकुमारराव मालदेव (मारवाड़)
3मारवाड़ का प्रतापराव चन्द्रसेन (मारवाड़)
4महाराणा प्रताप का अग्रगामीराव चन्द्रसेन (मारवाड़)
उपनामकिसके
पितृहन्ता — पहला / दूसरामालदेव / बख्तसिंह
बादशाह निर्माताअजीतसिंह
कान का कच्चा (ओझा)अजीतसिंह
जोधपुर की नूरजहाँगुलाबराय (विजयसिंह की पासवान)

8. शासक और उनके ग्रन्थ

शासकग्रन्थ — रचनाकार
मालदेवईसरदास के सोरठे · आसिया के दोहे · आसा बारहठ के गीत · रतनसिंह री वेलि · जिन चित्रकथा
सूरसिंहसूरसिंह वंश प्रशस्ति — माधवभट्ट श्रीमाली
गजसिंहगुण भाष्य — हेम कवि; गुणरूपक, राव अमरसिंह जी रा दुहा — केशवदास गाडण
जसवंत सिंह प्रथमअवतार चरित्र, रामचरित्र कथा, नरसिंह अवतार कथा — नरहरि दास; जसवंत उद्योग — दलपत मिश्र

9. प्रमुख महिलाएँ

नामकौनक्या ख़ास
पार्वती सोलंकीसीहा की पत्नीआस्थान की माता; 1273 में सीहा के साथ सती
चाँद कँवरचूण्डा की सोनगरा रानीजोधपुर की चाँद बावड़ी
हंसाबाईरणमल्ल की बहन, महाराणा लाखा की रानीआँवल-बाँवल की मध्यस्थ; मोकल की माता
भारमलीरणमल्ल की प्रेमिकाउसकी हत्या की साज़िश में सहायक

10. विशेष तथ्य और मुग़ल-विवाह

  • राजस्थान में केवल मारवाड़ ऐसी रियासत थी जिस पर मुग़लों ने दो बार खालसा लगाया — एक बार चन्द्रसेन के निधन (1581) पर और फिर जसवंत सिंह प्रथम के निधन (1678) पर।
  • कर्नल टॉड ने लिखा — मुग़ल बादशाह अपनी आधी विजयों के लिए राठौड़ों की एक लाख तलवारों के आभारी थे।
वर्षराठौड़मुग़ल पक्ष
1587मोटा राजा उदयसिंह की पुत्री जोधाबाई / जगत गुसाईशहज़ादा सलीम (जहाँगीर) — पहला वैवाहिक सम्बन्ध
1715अजीतसिंह की पुत्री इन्द्र कुँवरीबादशाह फर्रूखसियर — मुग़ल-राजपूत का अन्तिम वैवाहिक सम्बन्ध
शाखावर्षसंस्थापक
बीकानेर1465राव बीका (जोधा के दूसरे पुत्र)
किशनगढ़1609किशन सिंह (मोटा राजा उदयसिंह के पुत्र)
मेड़तासूजा के समयराव वीरम (सामन्त का स्वतंत्र राज्य)
वर्षसंधि / समझौतापक्ष
1453आँवल-बाँवलराणा कुम्भा – राव जोधा (हंसाबाई की मध्यस्थता)
1708देबारी समझौताअजीतसिंह – सवाई जयसिंह – अमरसिंह द्वितीय
1715फर्रूखसियर से संधिअजीतसिंह – हुसैन अली खाँ की मध्यस्थता

11. रैपिड फायर तथ्य

  • खेजड़ली आन्दोलन ➜ अभयसिंह के समय
  • विजयशाही सिक्के ➜ 1781, विजयसिंह के समय; गुलाबराय को श्यामलदास ने «जोधपुर की नूरजहाँ» कहा
  • जयअप्पा सिंधिया की हत्या ➜ 25 जुलाई 1755, विजयसिंह द्वारा
  • गिंगोली का युद्ध ➜ 13 मार्च 1807; जगतसिंह द्वितीय (जयपुर) व अमीर खाँ के सामने मानसिंह की हार
  • अंग्रेज़ों से संधि ➜ 6 जनवरी 1818, मानसिंह के समय; नाथ अनुयायी होने से «सन्यासी राजा» कहलाए
  • उम्मेद सिंह ➜ «आधुनिक मारवाड़ का निर्माता»; छीतर पहाड़ी पर उम्मेद भवन बनवाया
  • वृहद् राजस्थान ➜ 30 मार्च 1949 को अस्तित्व में आया; हनुवंत सिंह ने अगस्त 1947 में विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए
  • मुग़ल-विवाह ➜ पहला 1587 (जोधाबाई–सलीम), अन्तिम 1715 (इन्द्र कुँवरी–फर्रूखसियर)
  • दो बार खालसा ➜ 1581 (चन्द्रसेन के निधन पर) और 1678 (जसवंत सिंह प्रथम के निधन पर)

अगले भाग में बीकानेर के राठौड़ — जांगल प्रदेश, बीका द्वारा बीकानेर की स्थापना, लूणकरण, कामरान को भगाने वाले जैतसी, कल्याणमल से मुग़ल-नाते की शुरुआत और अकबर के दूसरे सबसे भरोसेमन्द राजपूत।

पिछला भाग: मारवाड़ का राठौड़ राजवंश: मुग़ल युग (1562–1724) (भाग 2)

अगला भाग: बीकानेर का राठौड़ राजवंश: राव बीका और लूणकरण एवं जैतसी और कल्याणमल

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