जोधपुर के बाद के शासकों को याद रखने का आसान तरीक़ा है उन्हें एक-एक पहचान से जोड़ देना — अभयसिंह के साथ खेजड़ली, विजयसिंह के साथ विजयशाही सिक्के, मानसिंह के साथ नाथ सम्प्रदाय और हनुवंत सिंह के साथ विलय। इस भाग में अभयसिंह से हनुवंत सिंह तक का पूरा क्रम है, और अन्त में शासकों की उपाधियों, उनके ग्रन्थ, प्रमुख महिलाओं तथा मुग़ल-विवाह की सारणियाँ जोड़ी गई हैं।
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1. अभयसिंह से हनुवंत सिंह
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1724 | अभयसिंह | खेजड़ली आन्दोलन इन्हीं के समय |
| 1750 | बख्तसिंह | रामसिंह को हराकर जोधपुर |
| 1755 | जयअप्पा की हत्या | विजयसिंह द्वारा |
| 1781 | विजयशाही सिक्के | मारवाड़ में टकसाल |
… शेष 7 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
2. अभयसिंह, रामसिंह, बख्तसिंह
| शासक | काल | मुख्य बातें |
|---|---|---|
| अभयसिंह | 1724–49 | खेजड़ली आन्दोलन इन्हीं के समय हुआ; अहमदाबाद के युद्ध में बुलन्द खाँ को हराया; ग्रन्थ — करणीदान सूरज प्रकाश, चारण कवि पृथ्वीराज अभयविलास, जगजीवन भट्ट अभयोदय (संस्कृत), वीरभाण रतनू राजरूपक |
| रामसिंह | 1749–50 | उच्छृंखल स्वभाव से सरदार नाराज़ होकर चाचा बख्तसिंह (नागौर) के पास चले गए; जालौर परगने पर संघर्ष; रामसिंह के साथ जयअप्पा सिंधिया, बख्तसिंह के साथ होल्कर (मराठे); 17 नवम्बर 1750 को रामसिंह हारा |
| बख्तसिंह | 1750–52 | नागौर के जागीरदार से जोधपुर के शासक; 1752 में अजमेर पर भी अधिकार, जिससे मराठे नाराज़ हुए; रामसिंह जयपुर के माधोसिंह के पास गया और मराठों की मदद की, पर बख्तसिंह के जीते जी सफलता नहीं मिली |
ट्रिक: बख्तसिंह = नागौर की जागीर + दूसरा पितृहन्ता; अभयसिंह = खेजड़ली + सूरज प्रकाश।
3. विजयसिंह और भीमसिंह
विजयसिंह और मराठे
- जून 1753: रामसिंह + सिंधिया का हमला
- 15 सितम्बर 1753: मेड़ता के पास हार
- नागौर दुर्ग में शरण
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
- विजयसिंह पिता बख्तसिंह जैसा योग्य नहीं था। जून 1753 में रामसिंह ने जयअप्पा सिंधिया के नेतृत्व में मराठों की मदद से जोधपुर पर चढ़ाई की; 15 सितम्बर 1753 को मेड़ता के पास भीषण युद्ध में विजयसिंह हारा और नागौर दुर्ग में शरण ली।
- जयअप्पा के रवैये से तंग आकर विजयसिंह ने छल से उसे मरवा दिया (25 जुलाई 1755); फिर भी उसके भाई दत्ताजी सिंधिया ने नागौर का घेरा नहीं उठाया।
- फरवरी 1756 की संधि — अजमेर परगना मराठों को; जालौर नगर और आधा मारवाड़ रामसिंह को।
… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
गुलाबराय का प्रभाव
- विजयसिंह पर अपनी पासवान गुलाबराय का बहुत प्रभाव था; श्यामलदास ने वीर विनोद में उसे “जहाँगीर का नमूना” और गुलाबराय को “जोधपुर की नूरजहाँ” कहा।
- गुलाबराय ने पौत्र मानसिंह को वारिस ठहरवाया था, पर सरदारों के विरोध से दूसरे पौत्र भीमसिंह को चुनना पड़ा।
- कवि विशनसिंह बारहठ ने विजय विलास की रचना की।
भीमसिंह (1793–1803)
- मेवाड़ के राणा भीमसिंह की बेटी कृष्णा कुमारी का रिश्ता 1799 में जोधपुर के भीमसिंह से तय हुआ, पर शादी से पहले 1803 में दूल्हे का देहान्त हो गया।
- इनके समय कवि रामकर्ण ने अलंकार सम्मुचय लिखा।
ट्रिक: विजयसिंह = विजयशाही सिक्के (1781), जहाँगीर का नमूना; गुलाबराय = जोधपुर की नूरजहाँ।
4. मानसिंह (1803–43)
- गद्दी की लड़ाई जीतकर मानसिंह 1803 में जोधपुर के शासक बने। नाथ सम्प्रदाय के अनुयायी होने के कारण वे “सन्यासी राजा” कहलाए।
- जब मानसिंह जालौर किले में मारवाड़ी फ़ौज से घिरे थे, तब नाथ-सन्त आयसदेव नाथ ने उनके राजा बनने की भविष्यवाणी की, जो सच हुई। राजा बनकर मानसिंह ने उन्हें राजगुरु माना और उनकी प्रेरणा से जोधपुर का महामन्दिर बनवाया — नाथ सम्प्रदाय की मुख्य पीठ।
| घटना | तारीख़ | विवरण |
|---|---|---|
| गिंगोली का युद्ध | 13 मार्च 1807 | कृष्णा कुमारी विवाद से नाराज़ जयपुर के जगतसिंह द्वितीय ने अमीर खाँ पिण्डारी के साथ जोधपुर पर आक्रमण किया; परबतसर (अब डीडवाना-कुचामन) के गिंगोली में मानसिंह की हार |
| कृष्णा कुमारी | 21 जुलाई 1810 | मानसिंह के विरोध जारी रखने पर अमीर खाँ ने महाराणा भीमसिंह पर दबाव बनाया; कृष्णा ने आत्महत्या की |
| पुत्र को शासन | 1817 | छत्रसिंह को शासन सौंपा; वह शीघ्र चल बसा |
| ईस्ट इण्डिया कम्पनी से संधि | 6 जनवरी 1818 | अमीर खाँ से परेशान होकर अंग्रेज़ों से संधि |
- पदच्युत नागपुर-शासक आप्पा साहब भौंसले (मुधोजी) को मानसिंह ने आश्रय दिया और महामन्दिर में ठहराया; 15 जुलाई 1840 को वहीं उनका निधन हुआ। वे अंग्रेज़ों के कट्टर बैरी थे।
- आश्रित कवि: मनोहरदास, सेवक दौलतराम, वागीराज गाङूराम आदि।
5. तख्तसिंह से जसवंत सिंह द्वितीय
तख्तसिंह (1843–73)
- राज्याभिषेक में पॉलिटिकल एजेन्ट लुडलो शामिल हुआ। सबसे पहले नाथों का विद्रोह शान्त किया।
- 1857 की क्रान्ति में अंग्रेज़ों की सहायता की।
- लॉर्ड मेयो के 1870 के अजमेर दरबार में बैठक-क्रम में उदयपुर महाराणा से नीचे रखे जाने पर वे नहीं गए; इसकी सज़ा में सलामी की तोपें घटीं और शासन युवराज जसवंत सिंह को सौंपना पड़ा।
जसवंत सिंह द्वितीय (1873–95)
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| दिसम्बर 1875 | कलकत्ता दरबार | भाग लिया |
| 1877 | दिल्ली दरबार | भाग लिया |
| 1879 | नमक समझौता | अंग्रेज़ों से |
| 1881 | पहली जनगणना | जोधपुर में |
- दरबारी कवि मुरारीदान बारहठ ने यशवंत यशोभूषण लिखा; जसवंत सिंह ने उन्हें “कविराजा” का ख़िताब और लाख पसाव दिया।
- सर प्रताप सिंह जसवंत सिंह द्वितीय के अनुज और जोधपुर के प्रधानमंत्री थे; 1887 में विक्टोरिया के स्वर्ण जुबली समारोह में मारवाड़ का प्रतिनिधित्व करने इंग्लैण्ड गए।
6. सरदार सिंह से हनुवंत सिंह
| शासक | काल | मुख्य बातें |
|---|---|---|
| सरदार सिंह | 1895–1911 | पोलो-प्रेमी — जोधपुर “पोलो का घर”; चीन के बॉक्सर युद्ध में अंग्रेज़ों की सहायता को सेना भेजी, इसलिए मारवाड़ के झण्डे पर “चाइना 1900” लिखने का सम्मान; नवम्बर 1895 में वायसराय एल्गिन से जसवंत ज़नाना अस्पताल व एल्गिन राजपूत स्कूल का उद्घाटन |
| सुमेर सिंह | 1911–18 | क़रीब 13 वर्ष की आयु में गद्दी; शासन चलाने के लिए चाचा सर प्रताप के नेतृत्व में रीजेन्सी कौन्सिल; जॉर्ज पंचम के राज्यारोहण (लन्दन) और 1911 के दिल्ली दरबार दोनों में उपस्थित; प्रथम विश्वयुद्ध में जोधपुर लांसर्स और सर प्रताप के साथ फ़्रांस के मोर्चे पर; ब्रिटेन ने GCB व लेफ्टिनेंट, फ़्रांस ने लीजियन दी ऑनर ग्रैण्ड ऑफ़िसर, मिस्र के सुल्तान ने ग्रैण्ड कॉर्डन ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ द नाइल दिया |
| उम्मेद सिंह | 1918–47 | वास्तविक शक्ति अंग्रेज़ों के हाथ; चीफ़ मिनिस्टर डोनाल्ड फ़ील्ड; छीतर पहाड़ी पर उम्मेद भवन; नरेन्द्र मण्डल में सक्रिय; गोलमेज़ सम्मेलन में प्रतिनिधि जे. डब्ल्यू. यंग; द्वितीय विश्वयुद्ध में सेना भेजी और स्वयं भी गए; जयनारायण व्यास को संविधान सभा में मारवाड़ का प्रतिनिधि बनाया; उपाधि “आधुनिक मारवाड़ का निर्माता” |
उम्मेद सिंह और विधानसभा
- 24 जुलाई 1945 को जोधपुर राज्य की विधानसभा के गठन की घोषणा की; 28 मार्च 1947 को जोधपुर लेजिस्लेटिव असेम्बली रूल्स का अनुमोदन किया।
हनुवंत सिंह और विलय
- विलय पत्र पर हस्ताक्षर के समय रियासती विभाग के सचिव वी.पी. मेनन पर पिस्तौल तानने का प्रसंग प्रसिद्ध है।
- अगस्त 1947 में सरदार पटेल और माउण्टबैटन के समझाने पर उन्होंने भारतीय संघ में विलय के पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए।
- जनवरी 1949 में पटेल ने घोषणा की कि जोधपुर, जयपुर, बीकानेर और जैसलमेर मिलकर वृहद् राजस्थान बनेंगे; यह 30 मार्च 1949 को अस्तित्व में आया।
7. शासकों की उपाधियाँ व उपनाम
| क्र. | उपाधि / उपनाम | शासक |
|---|---|---|
| 1 | हशमत वाला शासक | राव मालदेव (मारवाड़) |
| 2 | महान पुरुषार्थी राजकुमार | राव मालदेव (मारवाड़) |
| 3 | मारवाड़ का प्रताप | राव चन्द्रसेन (मारवाड़) |
| 4 | महाराणा प्रताप का अग्रगामी | राव चन्द्रसेन (मारवाड़) |
| उपनाम | किसके |
|---|---|
| पितृहन्ता — पहला / दूसरा | मालदेव / बख्तसिंह |
| बादशाह निर्माता | अजीतसिंह |
| कान का कच्चा (ओझा) | अजीतसिंह |
| जोधपुर की नूरजहाँ | गुलाबराय (विजयसिंह की पासवान) |
8. शासक और उनके ग्रन्थ
| शासक | ग्रन्थ — रचनाकार |
|---|---|
| मालदेव | ईसरदास के सोरठे · आसिया के दोहे · आसा बारहठ के गीत · रतनसिंह री वेलि · जिन चित्रकथा |
| सूरसिंह | सूरसिंह वंश प्रशस्ति — माधवभट्ट श्रीमाली |
| गजसिंह | गुण भाष्य — हेम कवि; गुणरूपक, राव अमरसिंह जी रा दुहा — केशवदास गाडण |
| जसवंत सिंह प्रथम | अवतार चरित्र, रामचरित्र कथा, नरसिंह अवतार कथा — नरहरि दास; जसवंत उद्योग — दलपत मिश्र |
9. प्रमुख महिलाएँ
| नाम | कौन | क्या ख़ास |
|---|---|---|
| पार्वती सोलंकी | सीहा की पत्नी | आस्थान की माता; 1273 में सीहा के साथ सती |
| चाँद कँवर | चूण्डा की सोनगरा रानी | जोधपुर की चाँद बावड़ी |
| हंसाबाई | रणमल्ल की बहन, महाराणा लाखा की रानी | आँवल-बाँवल की मध्यस्थ; मोकल की माता |
| भारमली | रणमल्ल की प्रेमिका | उसकी हत्या की साज़िश में सहायक |
10. विशेष तथ्य और मुग़ल-विवाह
- राजस्थान में केवल मारवाड़ ऐसी रियासत थी जिस पर मुग़लों ने दो बार खालसा लगाया — एक बार चन्द्रसेन के निधन (1581) पर और फिर जसवंत सिंह प्रथम के निधन (1678) पर।
- कर्नल टॉड ने लिखा — मुग़ल बादशाह अपनी आधी विजयों के लिए राठौड़ों की एक लाख तलवारों के आभारी थे।
| वर्ष | राठौड़ | मुग़ल पक्ष |
|---|---|---|
| 1587 | मोटा राजा उदयसिंह की पुत्री जोधाबाई / जगत गुसाई | शहज़ादा सलीम (जहाँगीर) — पहला वैवाहिक सम्बन्ध |
| 1715 | अजीतसिंह की पुत्री इन्द्र कुँवरी | बादशाह फर्रूखसियर — मुग़ल-राजपूत का अन्तिम वैवाहिक सम्बन्ध |
| शाखा | वर्ष | संस्थापक |
|---|---|---|
| बीकानेर | 1465 | राव बीका (जोधा के दूसरे पुत्र) |
| किशनगढ़ | 1609 | किशन सिंह (मोटा राजा उदयसिंह के पुत्र) |
| मेड़ता | सूजा के समय | राव वीरम (सामन्त का स्वतंत्र राज्य) |
| वर्ष | संधि / समझौता | पक्ष |
|---|---|---|
| 1453 | आँवल-बाँवल | राणा कुम्भा – राव जोधा (हंसाबाई की मध्यस्थता) |
| 1708 | देबारी समझौता | अजीतसिंह – सवाई जयसिंह – अमरसिंह द्वितीय |
| 1715 | फर्रूखसियर से संधि | अजीतसिंह – हुसैन अली खाँ की मध्यस्थता |
11. रैपिड फायर तथ्य
- खेजड़ली आन्दोलन ➜ अभयसिंह के समय
- विजयशाही सिक्के ➜ 1781, विजयसिंह के समय; गुलाबराय को श्यामलदास ने «जोधपुर की नूरजहाँ» कहा
- जयअप्पा सिंधिया की हत्या ➜ 25 जुलाई 1755, विजयसिंह द्वारा
- गिंगोली का युद्ध ➜ 13 मार्च 1807; जगतसिंह द्वितीय (जयपुर) व अमीर खाँ के सामने मानसिंह की हार
- अंग्रेज़ों से संधि ➜ 6 जनवरी 1818, मानसिंह के समय; नाथ अनुयायी होने से «सन्यासी राजा» कहलाए
- उम्मेद सिंह ➜ «आधुनिक मारवाड़ का निर्माता»; छीतर पहाड़ी पर उम्मेद भवन बनवाया
- वृहद् राजस्थान ➜ 30 मार्च 1949 को अस्तित्व में आया; हनुवंत सिंह ने अगस्त 1947 में विलय-पत्र पर हस्ताक्षर किए
- मुग़ल-विवाह ➜ पहला 1587 (जोधाबाई–सलीम), अन्तिम 1715 (इन्द्र कुँवरी–फर्रूखसियर)
- दो बार खालसा ➜ 1581 (चन्द्रसेन के निधन पर) और 1678 (जसवंत सिंह प्रथम के निधन पर)
अगले भाग में बीकानेर के राठौड़ — जांगल प्रदेश, बीका द्वारा बीकानेर की स्थापना, लूणकरण, कामरान को भगाने वाले जैतसी, कल्याणमल से मुग़ल-नाते की शुरुआत और अकबर के दूसरे सबसे भरोसेमन्द राजपूत।
पिछला भाग: मारवाड़ का राठौड़ राजवंश: मुग़ल युग (1562–1724) (भाग 2)
अगला भाग: बीकानेर का राठौड़ राजवंश: राव बीका और लूणकरण एवं जैतसी और कल्याणमल
इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान के दुर्ग · बीकानेर का राठौड़ राजवंश
पूरी श्रृंखला: राजस्थान का इतिहास — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय
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