राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: किसान व आदिवासी नेता (भाग 1) – Rajasthan History Chapter 53

खरवा, पथिक, माणिक्यलाल वर्मा, शेखावाटी के नेता और गोविन्द गिरी — शेष क्रान्तिकारी व किसान-आदिवासी जागरण।

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In this chapter (10 sections)
  1. गोपाल सिंह खरवा
  2. अन्य क्रान्तिकारी
  3. क्रान्ति की समयरेखा
  4. किसान व आदिवासी नेता
  5. विजयसिंह पथिक
  6. माणिक्यलाल वर्मा
  7. बिजौलिया-बेगूँ के साथी
  8. शेखावाटी-सीकर के नेता
  9. गोविन्द गिरी
  10. रैपिड फायर तथ्य

राजस्थान में किसान और आदिवासी आन्दोलन तीन जगह से उठे — बिजौलिया-बेगूँ, शेखावाटी-सीकर और भील अंचल — और हर जगह नेतृत्व एक हाथ से दूसरे हाथ में पहुँचता गया। इस भाग की शुरुआत गोपाल सिंह खरवा और अन्य क्रान्तिकारियों से होती है, फिर क्रान्ति की समयरेखा आती है। उसके बाद विजयसिंह पथिक, माणिक्यलाल वर्मा, बिजौलिया-बेगूँ के साथी, शेखावाटी-सीकर के नेता और गोविन्द गिरी क्रम से दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी, 7 चॉक-बोर्ड चित्र, 7 चार्ट, 22 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. गोपाल सिंह खरवा

  • जन्म ➜ 19 अक्टूबर 1873 · खरवा (ब्यावर)
  • पिता ➜ माधोसिंह
  • निधन ➜ 1939
  • खरवा के ठिकानेदार; ब्यावर के सेठ दामोदर दास राठी से घनिष्ठता — योजनाओं को ज़मीन पर खरवा उतारते थे और ख़र्च राठी उठाते थे। हथियार जुटाने में भूपसिंह (विजयसिंह पथिक) साथ थे, जिन्हें खरवा ने अपना निजी सचिव बनाया।
  • 1914 में यूरोप विश्वयुद्ध में फँसा था; इस मौक़े पर उत्तर भारत में हथियारबन्द क्रान्ति की तैयारी हुई — राष्ट्रीय स्तर पर कर्णधार रासबिहारी बोस और सचिन्द्रनाथ सान्याल; राजस्थान की ज़िम्मेदारी खरवा की — इसी से “राजस्थान में सशस्त्र क्रान्ति के जनक”।
  • तय तारीख़ 21 फरवरी 1915: खरवा और पथिक रेलवे लाइन के पास जंगल में छिपे रहे, पर सन्देशवाहक मणीलाल ने विश्वासघात करके पुलिस को ख़बर दे दी। योजना में ब्यावर और अजमेर पर क़ब्ज़े का इरादा था।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

2. अन्य क्रान्तिकारी

व्यक्तिजन्म · स्थानक्या किया
हेमू कालानी23 मार्च 1923 · सुक्कुर (अब पाकिस्तान)हथियार ले जा रही रेलगाड़ी को उलटने के इरादे से पटरी खोलते हुए पकड़े गए; 21 जनवरी 1943 को 19 वर्ष की उम्र में फाँसी (सुक्कुर जेल)
ज्वालाप्रसाद शर्माअजमेर निवासी1931 में रेल का ख़ज़ाना लूटने की योजना बनाई (सफल नहीं); बम बनाने जैसी गतिविधियाँ; 1952 के पहले आम चुनाव के बाद अजमेर के सांसद; नसीराबाद से 1957 व 1962 में विधायक
भवानी सहाय शर्माराजगढ़ (अलवर)हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के सदस्य; चन्द्रशेखर आज़ाद के विश्वासपात्र

ट्रिक: हेमू कालानी सिन्ध के थे, पर राजस्थान की परीक्षा में आते हैं; 19 वर्ष की उम्र और 21 जनवरी 1943 जोड़कर याद रखें।

3. क्रान्ति की समयरेखा

काल / क्रमघटनाविवरण
1903चेतावनी रा चुंगट्याकेसरी सिंह के 13 सोरठे — महाराणा फतेहसिंह दिल्ली दरबार में नहीं गए।
1905जैन शिक्षा प्रचारक समितिअर्जुनलाल सेठी, जयपुर।
1907वर्धमान विद्यालयक्रान्तिकारी प्रशिक्षण का केन्द्र।
1912प्रशिक्षण भेजनाकेसरी सिंह ने भाई, पुत्र और जामाता को मास्टर अमीरचन्द के पास भेजा।

… शेष 11 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

4. किसान व आदिवासी नेता

इस धारा के तीन केन्द्र थे — मेवाड़ का बिजौलिया-बेगूँ (नेता: सीताराम दास → पथिक → माणिक्यलाल वर्मा), शेखावाटी-सीकर (जाट किसान संगठन) और दक्षिणी राजस्थान का भील अंचल (गोविन्द गिरी → तेजावत)।

काल / क्रमघटनाविवरण
1883सम्प सभागोविन्द गिरी — भीलों में जागृति का संगठन।
1913मानगढ़ (17 नवम्बर)अंग्रेज़ी सेना के हमले में 1500 भील स्त्री-पुरुष शहीद।
1916पथिक बिजौलिया मेंसीताराम दास के बुलावे पर कमान सँभाली।
1919राजस्थान सेवा संघवर्धा में गठन — पथिक के प्रयासों से।

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

5. विजयसिंह पथिक

  • जन्म ➜ 1882 · गुठावली (बुलन्दशहर, उ.प्र.)
  • मूल नाम ➜ भूपसिंह गुर्जर
  • उपनाम ➜ सम्पूर्ण भारत में किसान आन्दोलन का जनक
  • गदर आन्दोलन से जुड़ाव के आरोप में 1915 के लाहौर षड्यन्त्र केस के घेरे में आए; बचने के लिए नाम बदलकर “विजयसिंह” रखा और मेवाड़ के पहाड़ी इलाक़े में शरण ली।
  • रासबिहारी बोस के निर्देश पर खरवा के साथ ब्यावर में हथियारबन्द क्रान्ति की तारीख़ 21 फरवरी 1915 तय की; पुलिस को भनक लग जाने से पकड़े गए और टॉडगढ़ दुर्ग (ब्यावर) में रखे गए, जहाँ से भाग निकले।
  • 1916 में साधु सीताराम दास ने बुलाया तो पथिक ने बिजौलिया किसान आन्दोलन की बागडोर थामी।

काम और रचनाएँ

  • बिजौलिया में वाचनालय, पाठशाला, अखाड़ा और सेवा समिति; कानपुर से छपने वाले “प्रताप” के ज़रिये आन्दोलन को पूरे भारत की चर्चा बनाया।
  • समाचार पत्र ➜ ऊपरमाल का डंका; वर्धा से राजस्थान केसरी; अजमेर से नवीन राजस्थान (बाद में तरुण राजस्थान)।
  • गीत ➜ “पीड़ितों का पंछीड़ा”। उन्हीं की पहल से वर्धा में 1919 में राजस्थान सेवा संघ बना।
  • पुस्तकें ➜ पथिक विनोद, पथिक प्रमोद, पथिक निबन्धावली, प्रहलाद विजय, कल्पना कपोत और उपन्यास अजयमेरु।

6. माणिक्यलाल वर्मा

  • जन्म ➜ 4 दिसम्बर 1897 · बिजौलिया (भीलवाड़ा)
  • उपनाम ➜ मेवाड़ का गाँधी
  • निधन ➜ 1969
  • पहले बिजौलिया ठिकाने में अध्यापक; पथिक के सम्पर्क में आकर नौकरी छोड़ी और किसानों को जगाने में लग गए।
  • बिजौलिया किसान आन्दोलन की अगुवाई 1927 से 1941 तक उनके हाथ में रही।
  • रचनात्मक कार्यकर्ता गढ़ने के लिए सेवाश्रम (1934, नारेली, अजमेर के पास) शुरू किया और आदिवासी-पिछड़ों के उत्थान को सागवाड़ा (डूँगरपुर) के पास खांडलाई आश्रम बनाया।

आज़ादी के बाद

  • 18 अप्रैल 1948 ➜ एकीकरण के तीसरे चरण में नेहरू की सिफ़ारिश पर “संयुक्त राजस्थान” के प्रधानमंत्री बने।
  • 1951 में प्रदेश कांग्रेस (राजस्थान) के अध्यक्ष रहे; आगे चलकर खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के भी अध्यक्ष।
  • लोकसभा के सांसद 1957 और 1962 में रहे।

7. बिजौलिया-बेगूँ के साथी

साधु सीताराम दास — बिजौलिया आन्दोलन के जनक

  • जन्म 1884, बिजौलिया (भीलवाड़ा)। बिजौलिया ठिकाने के पुस्तकालय में नौकरी करते हुए सामन्ती शोषण देखा, गाँव-गाँव घूमकर किसानों को जगाया; बिजौलिया के राव ने उन्हें नौकरी से हटा दिया।
  • “मित्र मण्डल” संगठन बनाया और उन्हीं के अनुरोध पर पथिक ने 1916 में नेतृत्व लिया।
नेतापहचानयोगदान
रामनारायण चौधरी (1896–1991)नीमकाथाना में जन्म; पत्नी अंजना देवी भी सेनानीबिजौलिया और शेखावाटी आन्दोलन में सक्रिय; पथिक की प्रेरणा से बेगूँ किसान आन्दोलन की कमान; 1932 में हरिजन सेवक संघ की राजपूताना शाखा; गाँधीजी की दक्षिण भारत हरिजन यात्रा में हिन्दी सचिव; सम्पादक — नया राजस्थान, तरुण राजस्थान, नवीन राजस्थान; 1936 में अजमेर से साप्ताहिक नवज्योति; पुस्तक 20वीं सदी का राजस्थान
गोकुलचन्द धाकड़शादी गाँव, बेगूँ तहसील (चित्तौड़गढ़)गीतों से बेगूँ किसान आन्दोलन में राष्ट्रीय चेतना जगाई; 1942 के भारत छोड़ो में भागीदारी
प्यारचन्द विश्नोई—1930 में पहली बार आन्दोलन में उतरे; बिजौलिया आन्दोलन के कारण जेल; 1932 के आन्दोलन और 1933 में विदेशी वस्त्र बहिष्कार में भाग

8. शेखावाटी-सीकर के नेता

ठाकुर देशराज

  • पहले नाम घासीराम; जन्म 1895, जघीना (भरतपुर) के एक साधारण जाट परिवार में।
  • 1931 से 1935 तक शेखावाटी के किसान आन्दोलन का मार्गदर्शन किया; जयपुर से निर्वासन मिला तो भरतपुर चले गए और वहाँ प्रजामण्डल, जमींदार किसान सभा, ब्रज जया प्रतिनिधि सभा तथा राज्य के मंत्रिमण्डल से जुड़े रहे।
  • 1934 में सीकर में सीकरवाटी जाट किसान पंचायत की स्थापना; ग्रन्थ — “जाट इतिहास”।
नेताजन्म · स्थानपहचान व काम
सरदार हरलाल सिंह1901 · हनुमानपुरा (झुंझुनूं)कुशल नेतृत्व के कारण साथियों ने “सरदार” उपाधि दी; अशिक्षित थे; रियासतों और जागीरदारों के ज़ुल्म का विरोध, यातनाएँ सहीं; किसान व स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय
नेतराम सिंह गौरीरगौरीर गाँव (झुंझुनूं)आर्य समाजी; शेखावाटी के गाँवों का दौरा करके 1938 में किसानों को एकजुट किया; लड़कियों की पढ़ाई के लिए भी काम
घासीराम चौधरी1903 · बासड़ी, नवलगढ़ ठिकानाजागीरदारों के अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष; भारत सुरक्षा क़ानून में गिरफ़्तार

9. गोविन्द गिरी

  • जन्म ➜ 20 दिसम्बर 1858 · बांसिया (डूँगरपुर), बंजारा परिवार
  • गुरु ➜ राजगिरी (कोटा-बूँदी अखाड़े के साधु)
  • संगठन ➜ सम्प सभा, 1883
  • निर्धनता तथा पत्नी-पुत्रों के निधन से मन अध्यात्म में रमा; पढ़ाई गाँव के पुजारी से मामूली-सी हुई; आगे वे राजगिरी के चेले बने।
  • भीलों के उत्थान के लिए “भील / भगत आन्दोलन” चलाया।
  • वागड़ के भीलों को जगाने के लिए सिरोही में 1883 में सम्प सभा खड़ी की; आन्दोलन का कार्यक्षेत्र मानगढ़ पहाड़ी (बाँसवाड़ा)।

मानगढ़ काण्ड — 17 नवम्बर 1913

  • वहाँ इकट्ठा भीलों पर अंग्रेज़ी सेना टूट पड़ी; 1500 भील पुरुष-स्त्रियाँ मारे गए।
  • गिरफ़्तार करके उन्हें अहमदाबाद जेल पहुँचाया गया; क़रीब 10 वर्ष बाद छोड़ा गया।
  • इसे भारत का पहला “जलियाँवाला बाग़ काण्ड” कहा गया।

10. रैपिड फायर तथ्य

  • सशस्त्र क्रान्ति की तय तारीख़ ➜ 21 फरवरी 1915; सन्देशवाहक मणीलाल ने पुलिस को ख़बर दे दी
  • गोपाल सिंह खरवा ➜ जन्म 19 अक्टूबर 1873, निधन 1939; ख़र्च दामोदर दास राठी उठाते थे
  • हेमू कालानी ➜ सुक्कुर (सिन्ध) के; 21 जनवरी 1943 को 19 वर्ष की उम्र में फाँसी
  • विजयसिंह पथिक ➜ मूल नाम भूपसिंह गुर्जर; 1916 में बिजौलिया की कमान सँभाली; «किसान आन्दोलन का जनक»
  • पथिक की पहल ➜ राजस्थान सेवा संघ (वर्धा, 1919) और पत्र ऊपरमाल का डंका, राजस्थान केसरी, नवीन राजस्थान
  • माणिक्यलाल वर्मा ➜ «मेवाड़ का गाँधी»; बिजौलिया आन्दोलन की अगुवाई 1927 से 1941; 18 अप्रैल 1948 को संयुक्त राजस्थान के प्रधानमंत्री
  • साधु सीताराम दास ➜ बिजौलिया आन्दोलन के जनक; उन्हीं के बुलावे पर 1916 में पथिक आए
  • ठाकुर देशराज ➜ 1934 में सीकर में सीकरवाटी जाट किसान पंचायत की स्थापना; ग्रन्थ «जाट इतिहास»
  • गोविन्द गिरी ➜ सम्प सभा (1883); मानगढ़ में 17 नवम्बर 1913 को 1500 भील शहीद, इसे पहला «जलियाँवाला बाग़ काण्ड» कहा गया

अगले भाग में मोतीलाल तेजावत और नीमड़ा काण्ड, भील अंचल के उद्धारक और फिर प्रजामण्डल के सेनानी — जयनारायण व्यास सहित मारवाड़, मेवाड़, जयपुर व हाड़ौती के नेता।

पिछला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: क्रान्तिकारी (भाग 1)

अगला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: प्रजामण्डल के सेनानी (भाग 1)

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