राजस्थान का एकीकरण: सात चरण एक नज़र में एवं एकीकरण से पहले – Rajasthan History Chapter 49

एकीकरण के सातों चरणों का सार, तारीखें व पदाधिकारी, और 1947 से पहले राजपूताना की रियासतें, ठिकाने व विलय-पत्र।

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In this chapter (10 sections)
  1. सात चरण एक नज़र में
  2. चरणों की तालिका
  3. आँकड़ों के चार्ट
  4. समय-रेखा व पदों का रूपान्तर
  5. एकीकरण से पहले
  6. राजपूताना की इकाइयाँ
  7. तोपों की सलामी
  8. नीति और संघ बनाने के प्रयास
  9. अगस्त 1947 के विलय-पत्र
  10. रैपिड फायर तथ्य

राजस्थान बनने की कहानी किसी एक दिन की घटना नहीं है, यह सीढ़ी-दर-सीढ़ी चली प्रक्रिया है। जो विद्यार्थी पहले पूरी सीढ़ी पकड़ लेता है, उसे बाद की हर तारीख़ अपनी जगह बैठी मिलती है। इस भाग में सात चरणों का सार, उद्घाटनकर्ताओं और संघ-प्रमुखों की तालिका, फिर एकीकरण से पहले की स्थिति दी गई है: राजपूताना की इकाइयाँ, तोपों की सलामी, संघ बनाने के विफल प्रयास और अगस्त 1947 के विलय-पत्र।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान का एकीकरण, 7 चॉक-बोर्ड चित्र, 1 नक्शे, 11 चार्ट, 22 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. सात चरण एक नज़र में

आज़ादी के दिन राजपूताना में 19 रियासतें, 3 ठिकाने और सीधे केन्द्र के अधीन एक प्रदेश अजमेर-मेरवाड़ा मौजूद थे। इन सबको जोड़कर एक राज्य गढ़ने का काम 18 मार्च 1948 से 1 नवम्बर 1956 तक चला — एक बार में नहीं, सात पड़ावों में, जिनमें हर बार पिछली इकाई में नए हिस्से जुड़ते गए।

  • शुरुआत ➜ 18 मार्च 1948
  • पूर्णता ➜ 1 नवम्बर 1956
  • कुल समय ➜ 8 वर्ष 7 माह 14 दिन

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

ट्रिक: 3 · 2 · 1 · 1 — 1948 में तीन चरण (मत्स्य, पूर्व राजस्थान, संयुक्त राजस्थान), 1949 में दो (वृहद् और संयुक्त वृहद्), 1950 में एक (सिरोही) और 1956 में एक (पुनर्गठन)।

2. चरणों की तालिका

कब, किसने, कहाँ

चरणनामदिनांकउद्घाटन करने वालेराजधानी
1मत्स्य संघ18 मार्च 1948नरहरि विष्णु गाडगिल (भरतपुर, लोहागढ़ में)अलवर
2पूर्व राजस्थान (राजस्थान संघ)25 मार्च 1948नरहरि विष्णु गाडगिलकोटा
3संयुक्त राजस्थान18 अप्रैल 1948जवाहरलाल नेहरू (उदयपुर में)उदयपुर
4वृहद् राजस्थान30 मार्च 1949सरदार वल्लभभाई पटेल (जयपुर में)जयपुर

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

कौन जुड़ा और किसकी अगुवाई

चरणजुड़ने वाली इकाइयाँसंवैधानिक प्रमुखप्रधानमंत्री / मुख्यमंत्री
1अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली + नीमराणा ठिकानाराजप्रमुख उदयभानसिंह (धौलपुर)शोभाराम कुमावत (अलवर)
2कोटा, बूँदी, झालावाड़, डूँगरपुर, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा, किशनगढ़, शाहपुरा, टोंक + लावा व कुशलगढ़ ठिकानेराजप्रमुख भीमसिंह द्वितीय (कोटा)गोकुल लाल असावा (शाहपुरा)
3पूर्व राजस्थान + उदयपुर (मेवाड़)राजप्रमुख महाराणा भूपालसिंहमाणिक्यलाल वर्मा
4संयुक्त राजस्थान + जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेरराजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वितीय; महाराज प्रमुख भूपालसिंहहीरालाल शास्त्री (जयपुर)

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: उद्घाटनकर्ता — गाडगिल, गाडगिल, नेहरू, पटेल। पहले दो चरण एक ही मंत्री ने खोले; तीसरा प्रधानमंत्री ने, चौथा गृहमंत्री ने।

3. आँकड़ों के चार्ट

  • मत्स्य संघ का क्षेत्रफल ➜ 12,000 वर्ग किमी
  • पूर्व राजस्थान ➜ 16,807 वर्ग किमी
  • संयुक्त राजस्थान ➜ 29,777 वर्ग मील

रोचक तथ्य: पूर्व राजस्थान सिर्फ़ 24 दिन चला — 25 मार्च से 18 अप्रैल 1948 — फिर मेवाड़ के जुड़ने पर संयुक्त राजस्थान बन गया।

4. समय-रेखा व पदों का रूपान्तर

काल / क्रमघटनाविवरण
31 दिसम्बर 1945उदयपुर अधिवेशनपं. नेहरू की अध्यक्षता में अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् का सम्मेलन — रियासतों के एकीकरण और राजपूताना सभा का निर्णय
25–26 जून 1946राजाओं का सम्मेलनमहाराणा भूपालसिंह ने उदयपुर में 22 राजाओं को बुलाया; राजस्थान यूनियन की योजना अधूरी रही
5 जुलाई 1947रियासती सचिवालयपटेल अध्यक्ष, वी.पी. मेनन सचिव; पटेल का 15 अगस्त से पहले विलय का आह्वान
7 – 14 अगस्त 1947विलय-पत्रबीकानेर सबसे पहले (7 अगस्त), धौलपुर सबसे अन्त में (14 अगस्त)

संघ-प्रमुख के पदों की यात्रा

पदकिसके पासकब तक
राजप्रमुखउदयभानसिंह → भीमसिंह → भूपालसिंह → मानसिंह द्वितीयपहले चार चरणों में हर बार नया; 1 नवम्बर 1956 को पद ख़त्म
महाराज प्रमुखभूपालसिंह (मेवाड़) — आजीवन1955 में उनकी मृत्यु के साथ पद समाप्त
उपराजप्रमुखकोटा के भीमसिंह, बूँदी के बहादुरसिंह, डूँगरपुर के लक्ष्मणसिंह आदिवृहद् राजस्थान तक

संविधान के सातवें संशोधन (1956) ने क, ख, ग श्रेणियों का भेद मिटाकर सिर्फ़ राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश रखे, और राजप्रमुख की जगह राज्यपाल का पद बना।

5. एकीकरण से पहले

अंग्रेज़ों की सीधी हुकूमत से बाहर रहे राजपूताना के भाग रियासतें कहलाए। 1947 में इनकी गिनती 19 रियासत + 3 ठिकाने + अजमेर-मेरवाड़ा थी। अजमेर-मेरवाड़ा सीधे अंग्रेज़ी प्रशासन में था, इसलिए वह रियासत नहीं, केन्द्रशासित प्रदेश माना गया।

6. राजपूताना की इकाइयाँ

रियासतआज किन ज़िलों में
जयपुरजयपुर, दौसा, सीकर, झुंझुनूँ, सवाई माधोपुर आदि
जोधपुर (मारवाड़)जोधपुर, पाली, जालोर, नागौर, बाड़मेर आदि
उदयपुर (मेवाड़)उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमन्द, भीलवाड़ा आदि
बीकानेरबीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़

तीन ठिकाने

ठिकानाआज का क्षेत्रमुखिया
नीमराणाकोटपूतली-बहरोड़ ज़िलाराव राजेन्द्रसिंह
कुशलगढ़बाँसवाड़ाराव हरेन्द्रसिंह — सबसे बड़ा ठिकाना (340 वर्ग मील)
लावाटोंकबंस प्रदीप सिंह — सबसे छोटा (20 वर्ग मील)

याद रखें: एकीकरण में नीमराणा मत्स्य संघ के साथ गया, जबकि लावा और कुशलगढ़ पूर्व राजस्थान के साथ।

7. तोपों की सलामी

अंग्रेज़ी सरकार शासकों के सम्मान में तोप दागती थी — जिसे जितनी तोपें, उसका दर्जा उतना ऊँचा। इसी आधार पर रियासतें दो वर्गों में बँटीं: सेल्यूट स्टेट (शासक को सलामी मिलती थी) और नॉन-सेल्यूट स्टेट (सलामी नहीं मिलती थी)। ठिकानों को सलामी का अधिकार नहीं था।

8. नीति और संघ बनाने के प्रयास

  • 31 दिसम्बर 1945 ➜ उदयपुर में पं. जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् का अधिवेशन हुआ; यहीं रियासतों के एकीकरण और राजपूताना सभा बनाने की बात तय हुई।
  • 5 जुलाई 1947 ➜ रियासतों की उलझन सुलझाने को रियासती सचिवालय बना: अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल, सचिव वी.पी. मेनन।
  • सचिवालय की शर्त थी कि अलग अस्तित्व वही रियासत रख सकेगी जिसकी जनसंख्या 10 लाख और वार्षिक आय 1 करोड़ रु. हो।

राजस्थान में यह कसौटी कौन पार कर सका

  1. जनसंख्या ≥ 10 लाख
  2. आय ≥ 1 करोड़ रु.
  3. जयपुर · जोधपुर · बीकानेर · मेवाड़

शासकों की अपनी योजनाएँ — सब विफल

पहल करने वालायोजनानतीजा
महाराणा भूपालसिंह (मेवाड़)राजस्थान यूनियन — राजपूताना, गुजरात व मालवा के राजाओं का 25–26 जून 1946 का उदयपुर सम्मेलन (22 राजा)असफल
मेवाड़ दरबार के संविधान-सलाहकार के.एम. मुन्शीउनके कहने पर 23 मई 1947 को उदयपुर में दूसरा सम्मेलनआपसी अविश्वास से योजना ठप
जयपुर के सवाई मानसिंहरियासतों का एक संघविफल

5 जुलाई 1947 के अपने बयान में पटेल ने राजाओं से अपील की कि स्वतंत्रता-दिवस (15 अगस्त 1947) से पहले ही वे भारत से जुड़ जाएँ; उनके अनुसार इसी में रियासतों का लाभ था।

9. अगस्त 1947 के विलय-पत्र

काल / क्रमघटनाविवरण
7 अगस्त 1947पहला विलय-पत्रराजस्थान की पहली रियासत जिसने विलय-पत्र (Instrument of Accession) भरा — बीकानेर (शासक सार्दूलसिंह)
14 अगस्त 1947अन्तिम विलय-पत्रआख़िरी रियासत — धौलपुर (शासक उदयभानसिंह)
15 अगस्त 1947स्वतंत्रता14 अगस्त 1947 तक राजस्थान के हर शासक ने भारत में विलय की सहमति दे दी थी

शाहपुरा के शासक ने कहा कि वे अपने मंत्रिमण्डल से परामर्श करके ही कुछ तय करेंगे। आगे चलकर पटेल ने जनप्रतिनिधियों की भावना का आदर करते हुए किशनगढ़ और शाहपुरा को अजमेर में मिलाने का निर्णय रद्द कर दिया।

विवादित रियासतें

  • जयपुर ➜ स्वतंत्रता की घोषणा के तुरन्त बाद सबसे पहले भारत से जुड़ने का ऐलान करने वाली रियासत।
  • अलवर ➜ शासक पर गाँधीजी की हत्या के आरोपियों को पनाह देने का इल्ज़ाम लगा; इसी दौर में 1948 की शुरुआत में अलवर की कमान केन्द्र ने सँभाल ली (मत्स्य संघ वाला प्रसंग देखें)।
  • जोधपुर ➜ महाराजा हनुवन्तसिंह पाकिस्तान में मिलने की ओर झुके थे और जिन्ना से मिले; मामला खुलने पर वी.पी. मेनन उन्हें माउंटबेटन से मिलवाने वायसराय-निवास ले गए; वहीं उन्हें विलय-पत्र भरना पड़ा।

10. रैपिड फायर तथ्य

  • आज़ादी के दिन की इकाइयाँ ➜ 19 रियासतें, 3 ठिकाने और अजमेर-मेरवाड़ा
  • एकीकरण की अवधि ➜ 18 मार्च 1948 से 1 नवम्बर 1956 तक, यानी 8 वर्ष 7 माह 14 दिन
  • चरणों का सूत्र ➜ 3 · 2 · 1 · 1 (1948 में तीन, 1949 में दो, 1950 में एक, 1956 में एक)
  • उद्घाटनकर्ता क्रम से ➜ गाडगिल, गाडगिल, नेहरू, पटेल
  • पूर्व राजस्थान की उम्र ➜ सिर्फ़ 24 दिन, फिर मेवाड़ जुड़ा और संयुक्त राजस्थान बना
  • सबसे बड़ा और सबसे छोटा ठिकाना ➜ कुशलगढ़ (340 वर्ग मील) और लावा (20 वर्ग मील)
  • अलग अस्तित्व की शर्त ➜ जनसंख्या 10 लाख और आय 1 करोड़ रु.; जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, मेवाड़ ही पार कर सके
  • पहला और अन्तिम विलय-पत्र ➜ बीकानेर (7 अगस्त 1947) और धौलपुर (14 अगस्त 1947)
  • जोधपुर के हनुवन्तसिंह पाकिस्तान की ओर झुके थे, पर वी.पी. मेनन के हस्तक्षेप से उन्हें विलय-पत्र भरना पड़ा।

अगले भाग में पहले तीन चरण — मत्स्य संघ, पूर्व राजस्थान और संयुक्त राजस्थान, जो एक ही महीने में बने — और फिर वृहद् राजस्थान की कहानी।

पिछला भाग: प्रजामण्डल व स्वतंत्रता आन्दोलन: मेवाड़ व दक्षिणी रियासतें एवं पूर्वी रियासतें

अगला भाग: राजस्थान का एकीकरण: पहले तीन चरण एवं वृहद् राजस्थान

इन्हें भी पढ़ें: प्रजामण्डल व स्वतंत्रता आन्दोलन · राज्यपाल

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