रियासतों की जनता को नागरिक अधिकार मिलना अँग्रेज़ी प्रान्तों से कहीं कठिन था, और 1938 का हरिपुरा अधिवेशन इस मामले में मोड़ साबित हुआ। यहीं से प्रजामण्डलों का रास्ता खुला। इस भाग में पृष्ठभूमि, सारांश तालिका और अनोखी बातों के बाद जयपुर का पूरा सफ़र — जागृति, प्रतिबन्ध, जेन्टलमैंस एग्रीमेंट, आज़ाद मोर्चा, लोकप्रिय मंत्रिमण्डल — और फिर किशनगढ़, मारवाड़, बीकानेर, जैसलमेर व सिरोही दिए गए हैं।
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1. पृष्ठभूमि व सार
अँग्रेज़ी प्रान्तों में कांग्रेस के आन्दोलन चल रहे थे, पर रियासतों की जनता नरेशों व जागीरदारों के शासन में नागरिक अधिकारों से वंचित थी। 1938 का हरिपुरा अधिवेशन (अध्यक्ष सुभाषचन्द्र बोस) इस बारे में मोड़ बना।
- कांग्रेस ने रियासती जनता के संघर्ष के प्रति समर्थन का रुख़ अपनाया और रियासतों में उत्तरदायी शासन के लिए प्रजामण्डल बनाने का रास्ता खुला।
- कांग्रेस संगठन सीधे रियासतों में सत्याग्रह नहीं करता था; कार्यकर्ता निजी हैसियत से जुड़ सकते थे।
- इसके बाद राजस्थान की अधिकांश रियासतों में प्रजामण्डल या प्रजा परिषदें बनीं।
2. सारांश तालिका
| क्र. | प्रजामण्डल | वर्ष | संस्थापक / गठनकर्ता | अध्यक्ष | प्रमुख नेता |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | जयपुर | 1931 | कर्पूरचंद पाटनी, जमनालाल बजाज | कर्पूरचंद पाटनी | हीरालाल शास्त्री |
| 1 | जयपुर (पुनर्गठन) | 1936 | जमनालाल बजाज | चिरंजीलाल मिश्र | हीरालाल शास्त्री, बाबा हरिश्चन्द्र, लादूराम जोशी, टीकाराम पालीवाल, पूर्णानंद जोशी, हंस डी. राय, रामकरण जोशी |
| 2 | बूँदी | 1931 | कांतिलाल जैन | कांतिलाल जैन | नित्यानंद नागर, ऋषिदत्त मेहता, गोपाललाल कोटिया, मोतीलाल अग्रवाल, पूनमचन्द |
| 3 | हाड़ौती | 1934 | पं. नयनूराम शर्मा | हाजी फैज मोहम्मद | पं. अभिन्न हरि, प्रभुलाल शर्मा |
… शेष 19 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1931 | जयपुर व बूँदी | सबसे पहले बने दो प्रजामण्डल |
| 1934 | हाड़ौती · मारवाड़ · सिरोही (बम्बई) | तीन एक साथ |
| 1936 | बीकानेर · धौलपुर | — |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: पहली स्थापना का क्रम — जयपुर, बूँदी (1931) → हाड़ौती, मारवाड़, सिरोही (1934) → बीकानेर, धौलपुर (1936) → पाँच (1938) …; सबसे बाद में झालावाड़ (1946)।
3. अनोखी बातें
| अपवाद | कौन |
|---|---|
| रियासत के बाहर बने प्रजामण्डल | बीकानेर (कलकत्ता, 1937) · सिरोही (बम्बई, 1934) · भरतपुर (रेवाड़ी, 1938) · जैसलमेर (जोधपुर, 1945) |
| प्रजामण्डल बना ही नहीं | टोंक — एकमात्र रियासत |
| अन्तिम प्रजामण्डल | झालावाड़ — 25 नवम्बर 1946 |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: जोड़े याद रखें — बीकानेर–कलकत्ता, सिरोही–बम्बई, भरतपुर–रेवाड़ी, जैसलमेर–जोधपुर।
4. जयपुर व किशनगढ़
- पहली स्थापना ➜ 1931
- पुनर्गठन ➜ 1936–37
- पहला अधिवेशन ➜ 8–9 मई 1938
5. जागृति और स्थापना
- जयपुर राज्य में जागृति जगाने का पहला प्रयास अर्जुनलाल सेठी ने किया — 1905 में जैन शिक्षा प्रचारक समिति और 1907 में वर्धमान विद्यालय।
- आर्य समाज तथा जयपुर हितकारिणी सभा के प्रभाव से भी नौजवानों में देशप्रेम पनपा।
- 1931 में कर्पूरचंद पाटनी और जमनालाल बजाज ने प्रजामण्डल बनाया, पर पाँच वर्ष तक यह निर्जीव रहा।
6. प्रतिबन्ध व सत्याग्रह
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 8–9 मई 1938 | पहला अधिवेशन | जमनालाल बजाज की अध्यक्षता में |
| 30 मई 1938 | बिना पंजीकरण सभाएँ अवैध | रियासत ने बिना पंजीकरण की किसी संस्था को बैठकें करने और सदस्य जोड़ने से रोक दिया |
| 1938 | शेखावाटी किसान सभा का विलय | जयपुर प्रजामण्डल में |
| 16 दिसम्बर 1938 | बजाज पर रोक | जयपुर राज्य में प्रवेश प्रतिबन्धित; प्रजामण्डल का कार्यालय आगरा ले जाया गया |
याद रखें: मतभेद के बाद चिरंजीलाल ने कार्यकारिणी से अलग होकर “प्रजामण्डल प्रगतिशील दल” (1940) बनाया।
7. जेन्टलमैंस एग्रीमेंट व आज़ाद मोर्चा
भारत छोड़ो आन्दोलन (1942) के समय प्रजामण्डल ने महाराजा के सामने उत्तरदायी शासन की माँग रखी। उसके अध्यक्ष हीरालाल शास्त्री और जयपुर के प्रधानमंत्री सर मिर्ज़ा इस्माईल के बीच “जेन्टलमैंस एग्रीमेंट” हुआ।
| पक्ष | शर्त |
|---|---|
| जयपुर राज्य | युद्ध में अँग्रेज़ों की सहायता नहीं करेगा |
| जयपुर राज्य | अँग्रेज़ी प्रान्तों के आन्दोलनकारियों को जयपुर आने से नहीं रोकेगा |
| जयपुर राज्य | उत्तरदायी शासन की दिशा में कार्यवाही करेगा |
- समझौते के बाद प्रजामण्डल ने भारत छोड़ो आन्दोलन स्थगित रखा।
- मिर्ज़ा इस्माईल की कूटनीति से प्रजामण्डल बँट गया और आन्दोलन कमज़ोर हुआ।
- कुछ कार्यकर्ता चाहते थे कि प्रजामण्डल राष्ट्रीय संघर्ष से जुड़ा रहे; उन्होंने अलग आज़ाद मोर्चा खड़ा किया — स्थापना बाबा हरिश्चन्द्र ने 14–15 सितम्बर 1942 को, सहयोगी रामकरण जोशी, दौलतमल भंडारी, गुलाबचन्द कासलीवाल, हंस डी. राय।
8. लोकप्रिय मंत्रिमण्डल
- 1945 में द्विसदनीय व्यवस्थापिका बनी, पर दोनों सदनों में महाराजा के मनोनीत सदस्यों का दबदबा रहा; चुनाव में प्रजामण्डल को अधिक सफलता नहीं मिली।
- 1946 में राज्य ने उत्तरदायी शासन की घोषणा की (तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.टी. कृष्णामाचारी, 1946–49)।
- 15 मई 1946 को प्रजामण्डल अध्यक्ष देवीशंकर तिवाड़ी मंत्रिमण्डल में शामिल हुए; बाद में दौलतमल भंडारी भी।
जयपुर की राजनीतिक यात्रा
- 1931 स्थापना
- 1936–37 पुनर्गठन
- 1939 सत्याग्रह
- 1942 जेन्टलमैंस एग्रीमेंट
9. किशनगढ़ प्रजामण्डल
- स्थापना ➜ 1939
- संस्थापक ➜ कांतिलाल चौथानी
- पहले अध्यक्ष ➜ जमालशाह
10. मारवाड़, बीकानेर, जैसलमेर, सिरोही
| रियासत | प्रजामण्डल | संस्थापक | पहले अध्यक्ष |
|---|---|---|---|
| मारवाड़ | 1934 | जयनारायण व्यास | भंवरलाल सर्राफ |
| बीकानेर | 4 अक्टूबर 1936 | मघाराम वैद्य, रघुवरदयाल गोयल, लक्ष्मीदेवी आचार्य | मघाराम वैद्य |
| सिरोही | 1934 (बम्बई) · 22 जनवरी 1939 (सिरोही) | वृद्धिशंकर त्रिवेदी · गोकुलभाई भट्ट | भीमशंकर शर्मा · गोकुलभाई भट्ट |
11. मारवाड़ — 1920 से 1936
- 1920 ➜ मारवाड़ सेवा संघ ने खादी-प्रचार और विदेशी वस्त्र-बहिष्कार से राजनीतिक चेतना की शुरुआत की।
- हितकारिणी सभा (1923) के स्वयंसेवक व्यास की अगुआई में रेल-पटरियों पर लेट गए, ताकि पशुओं की रेल से निकासी रुके।
- 1929 ➜ जोधपुर में बुलाए जाने वाले देशी राज्य लोक परिषद के अधिवेशन पर रोक; सितम्बर 1929 में व्यास, आनंदराज सुराणा और भंवरलाल सर्राफ गिरफ्तार।
- जनवरी 1930 ➜ सज़ा: व्यास को 5 वर्ष, बाक़ी दो को 4-4 वर्ष; 9 मार्च 1931 को रिहाई।
- 1934 — मारवाड़ प्रजामण्डल ➜ जयनारायण व्यास ने भानमल जैन, अभयमल मेहता, भंवरलाल सर्राफ, छगनराज चौपासनी के साथ बनाया; पहले अध्यक्ष भंवरलाल सर्राफ। सभाओं-भाषणों पर रोक और व्यास का राज्य से निष्कासन।
- कृष्णा दिवस ➜ 1935 में युवा विधवा कृष्णा कुमारी का राजघराने के एक प्रभावशाली व्यक्ति की साझेदारी से अपहरण हुआ; कहीं सुनवाई न होने पर प्रजामण्डल ने पैरवी की और 1936 में बम्बई में «कृष्णा दिवस» आयोजित हुआ।
- अगस्त 1936 ➜ नेहरूजी का ख़ास स्वागत करने की सज़ा के रूप में प्रजामण्डल गैरकानूनी घोषित।
याद रखें: जेल की गिनती — व्यास 5 वर्ष (1930), सुराणा व सर्राफ 4-4 वर्ष; रिहाई 9 मार्च 1931, और एक ही हफ़्ते बाद 10 मई को यूथ लीग।
12. मारवाड़ लोक परिषद 1938–1948
प्रजामण्डल पर रोक लगी थी, इसलिए मई 1938 में मारवाड़ लोक परिषद बनी; जयनारायण व्यास मुख्य उद्घोषक रहे।
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| जनवरी 1938 | सुभाषचन्द्र बोस जोधपुर में | नौजवानों से स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने का आह्वान |
| 28 मार्च 1940 | लोक परिषद पर रोक | सभाओं पर प्रतिबन्ध; 8 जून 1940 को समझौता |
| जून 1941 | नगरपालिका चुनाव | बहुमत; व्यास जोधपुर नगरपालिका अध्यक्ष |
| 8 फरवरी 1942 | तीसरा (खुला) अधिवेशन | लाडनूँ में, अध्यक्ष रणछोड़दास गट्टानी |
- व्यास ने “उत्तरदायी शासन” और “जोधपुर की स्थिति पर प्रकाश” पुस्तिकाएँ लिखकर राज्य व जागीरदारों का दमन उजागर किया।
- महिला सत्याग्रहियों का जत्था 1942 में महिमादेवी किंकर की अगुआई में निकला; 18 अगस्त 1942 की प्रभात फेरी में रमादेवी, कृष्णा कुमारी व दयावती थीं।
- 25 सितम्बर 1942 के जुलूस के नेता ➜ हरिभाई किंकर, श्रीमती सूरजदेवी माथुर, सावित्री देवी; सभी राजनीतिक कैदी मई 1944 के बाद ही छूट सके।
- नेहरूजी की सलाह पर महाराजा उमेदसिंह ने सर डोनाल्ड फ़ील्ड की जगह सी.एस. वेंकटाचारी को मुख्यमंत्री बनाया।
13. बीकानेर
- बीकानेर में जनजागृति का श्रेय स्वामी गोपालदास को; 1913 में महाराजा गंगासिंह ने प्रतिनिधि सभा बनाई।
- 26 जनवरी 1930 ➜ चुरू में तिरंगा फहराया गया; स्थान धर्मस्तूप (लाल घंटाघर), फहराने वाले स्वामी गोपालदास, चन्दनमल बहड़, वैद्य शांत शर्मा व भालचंद शर्मा।
- 1931 में गंगासिंह गोलमेज़ सम्मेलन में लन्दन गए; कार्यकर्ताओं ने 18 पृष्ठ की पुस्तिका “बीकानेर एक दिग्दर्शन” वहाँ बँटवाई, जिसमें उनकी आलोचना थी।
बीकानेर प्रजामण्डल
| घटना | विवरण |
|---|---|
| 4 अक्टूबर 1936 | बीकानेर में स्थापना — मघाराम वैद्य, रघुवरदयाल गोयल, लक्ष्मीदेवी आचार्य; पहले अध्यक्ष मघाराम वैद्य, मंत्री लक्ष्मणदास स्वामी, कोषाध्यक्ष भिक्षालाल बोहरा |
| दमन | मघाराम वैद्य व मुक्ताप्रसाद राज्य से निर्वासित |
| 1937 | वैद्य ने कलकत्ता में पुनर्गठन: अध्यक्ष लक्ष्मीदेवी आचार्य, उपाध्यक्ष श्रीराम आचार्य, मंत्री मघाराम, कोषाध्यक्ष रणछोड़दास डागा |
| 22 जुलाई 1942 | बीकानेर राज्य प्रजा परिषद — रघुवरदयाल गोयल, गंगादास कौशिक, दाऊलाल आचार्य; गोयल निर्वासित, सभाओं पर रोक |
14. जैसलमेर
- जागृति के सूत्रधार सागरमल गोपा हैं — महारावल के निरंकुश शासन के ख़िलाफ़ सबसे पहले बोलने वाले।
- 14 नवम्बर 1930 को नेहरूजी के स्वास्थ्य की कामना में जवाहर दिवस मनाया गया; गोपा, रघुनाथसिंह मेहता व आईदान जेल गए (कुछ विवरणों में तिथि 16 नवम्बर)।
- 1932 में रघुनाथसिंह ने माहेश्वरी नवयुवक मण्डल बनाया; गोपा ने गुंडाराज, आजादी के दीवाने, रघुनाथसिंह का मुकदमा पुस्तकों से महारावल जवाहरसिंह के अत्याचार उजागर किए।
- 1939 में शिवशंकर गोपा ने जैसलमेर राज्य प्रजा परिषद बनाई और निर्वासित हुए।
- पिता के निधन पर लौटे गोपा को जनता भड़काने के आरोप में 6 वर्ष की कैद मिली।
15. सिरोही
- सिरोही क्षेत्र में जनता को अधिकारों के लिए पहले गोविन्द गुरु ने और बाद में मोतीलाल तेजावत ने संगठित किया।
- 1934 में बम्बई में उत्साही युवाओं ने सिरोही प्रजामण्डल बनाया — वृद्धिशंकर त्रिवेदी; पहले अध्यक्ष भीमशंकर शर्मा; कोई ख़ास नतीजा नहीं निकला।
- 22 जनवरी 1939 ➜ गोकुलभाई भट्ट ने सिरोही में प्रजामण्डल बनाकर उत्तरदायी शासन माँगा; पहले अध्यक्ष गोकुलभाई भट्ट। सरकार ने कार्यकर्ता पकड़े और संस्था अवैध घोषित की।
16. रैपिड फायर तथ्य
- हरिपुरा अधिवेशन ➜ 1938, अध्यक्ष सुभाषचन्द्र बोस; रियासतों में प्रजामण्डल बनने का रास्ता खुला
- सबसे पहले बने ➜ जयपुर व बूँदी (1931); 1934 में हाड़ौती, मारवाड़, सिरोही; 1936 में बीकानेर, धौलपुर
- रियासत के बाहर बने प्रजामण्डल ➜ बीकानेर (कलकत्ता), सिरोही (बम्बई), भरतपुर (रेवाड़ी), जैसलमेर (जोधपुर)
- प्रजामण्डल न बनने वाली रियासत ➜ टोंक, एकमात्र
- अन्तिम प्रजामण्डल ➜ झालावाड़, 25 नवम्बर 1946
- जयपुर का पहला अधिवेशन ➜ 8–9 मई 1938, अध्यक्षता जमनालाल बजाज की
- जेन्टलमैंस एग्रीमेंट ➜ 1942; हीरालाल शास्त्री और सर मिर्ज़ा इस्माईल के बीच
- आज़ाद मोर्चा ➜ 14–15 सितम्बर 1942, स्थापना बाबा हरिश्चन्द्र ने
- मारवाड़ प्रजामण्डल ➜ 1934; जयनारायण व्यास; पहले अध्यक्ष भंवरलाल सर्राफ
अगले भाग में मेवाड़ का प्रजामण्डल और शाहपुरा, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, कुशलगढ़ के प्रजामण्डल, फिर हाड़ौती, मत्स्य संघ की रियासतें और अजमेर की गतिविधियाँ।
पिछला भाग: जनजाति एवं किसान आन्दोलन: मारवाड़, शेखावाटी व बीकानेर
अगला भाग: प्रजामण्डल व स्वतंत्रता आन्दोलन: मेवाड़ व दक्षिणी रियासतें एवं पूर्वी रियासतें
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