तेजावत और नीमड़ा से शुरू होकर यह भाग किसान-आदिवासी जागरण की कड़ी को प्रजामण्डल तक ले जाता है। यहाँ मोतीलाल तेजावत, भील अंचल के उद्धारक और फिर प्रजामण्डल के सेनानी दिए गए हैं: जयनारायण व्यास तथा मारवाड़, मेवाड़, जयपुर-ढूँढाड़ और हाड़ौती के नेता। हर इलाक़े का एक मुखिया या «गाँधी» पहचान लें, तो इस हिस्से का आधा काम पूरा हो जाता है।
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1. मोतीलाल तेजावत
- जन्म ➜ 1887 · कोल्यारी (उदयपुर)
- जाति ➜ ओसवाल बनिया
- उपनाम ➜ बावजी · आदिवासियों का मसीहा
- पहले मेवाड़ के झाड़ौल ठिकाने में नौकरी करते थे; भील-गरासियों पर ज़ुल्म देखा तो नौकरी छोड़ दी।
- 1921 में मातृकुण्डिया (चित्तौड़) से एकी आन्दोलन शुरू किया।
- “मेवाड़ की पुकार” ➜ 21 सूत्री माँगपत्र बनवाकर महाराणा के सामने रखा।
नीमड़ा काण्ड — 7 मार्च 1922
- नीमड़ा गाँव (विजयनगर राज्य) में जुटे बड़े आदिवासी सम्मेलन पर पुलिस ने गोलियाँ चलाईं; एक गोली तेजावत की टाँग में लगी।
- इसे “दूसरा जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड” कहा जाता है।
आत्मसमर्पण से रिहाई तक
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 3 जून 1929 | आत्मसमर्पण | गाँधीजी के कहने पर खेड़ब्रह्म (ईडर राज्य) में। |
| 31 जुलाई 1929 | मेवाड़ को सौंपा | मेवाड़ सरकार ने उन्हें उदयपुर केन्द्रीय कारागृह में रखा; 1936 में रिहाई तक लगभग सात वर्ष हिरासत में रहे। |
| 23 अप्रैल 1936 | रिहाई | आन्दोलन बन्द करने की बात मानने पर रिहा किए गए और गुज़ारे के लिए भत्ता मिला; शर्तें — राज्य छोड़कर जाने के लिए मेवाड़ की इजाज़त लेनी होगी और सरकार-विरोधी गतिविधि नहीं करनी होगी। |
… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: मानगढ़ (1913, गोविन्द गिरी) = पहला जलियाँवाला; नीमड़ा (1922, तेजावत) = दूसरा जलियाँवाला। तारीख़ें: 17 नवम्बर और 7 मार्च।
2. भील अंचल के उद्धारक
| व्यक्ति | पहचान | काम |
|---|---|---|
| नानाभाई खाँट | डूँगरपुर के जाने-माने भील अगुआ | रास्तापाल में उनके घर में सेवा संघ की पाठशाला लगती थी; उन्होंने प्रण लिया कि प्राण रहते स्कूल बन्द नहीं होगा। महारावल ने 18 जून 1947 को स्कूल बन्द कराने मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक भेजे; इन्कार करने पर पुलिस ने डण्डों व बन्दूक के कुन्दों से पीटा — मृत्यु |
| सुरजी भगत (सूरजमल दास) | भीलों के प्रथम समाज-सुधारक | भीलों के ईसाई बनने के सिलसिले को रोका |
| ठक्कर बापा | अमृतलाल विट्ठलदास ठक्कर; जन्म 29 नवम्बर 1869 · भावनगर (गुजरात) | 1922 में भील सेवा मण्डल; 1932 में गाँधीजी के हरिजन सेवक संघ के महासचिव; जनजातियों को “आदिवासी” नाम इन्होंने ही दिया |
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3. प्रजामण्डल के सेनानी
प्रजामण्डल की धारा रियासत-दर-रियासत चली। हर इलाक़े का एक “गाँधी” या मुखिया था — मारवाड़ में जयनारायण व्यास, मेवाड़ में माणिक्यलाल वर्मा, जयपुर में हीरालाल शास्त्री, हाड़ौती में नयनूराम शर्मा, भरतपुर में जुगलकिशोर चतुर्वेदी, वागड़ में भोगीलाल पांड्या और सिरोही में गोकुल भाई भट्ट।
| इलाक़ा / रियासत | मुखिया | मंच · साल |
|---|---|---|
| मारवाड़ (जोधपुर) | जयनारायण व्यास | मारवाड़ लोक परिषद — डिक्टेटर 11 मई 1942 |
| मेवाड़ (उदयपुर) | माणिक्यलाल वर्मा · अध्यक्ष: बलवंतसिंह मेहता | मेवाड़ प्रजामण्डल — 1938 |
| जयपुर | हीरालाल शास्त्री | जीवन कुटीर (1929); आज़ाद मोर्चा — रामकरण जोशी |
| हाड़ौती (कोटा-बूँदी) | नयनूराम शर्मा · अभिन्न हरि | हाड़ौती प्रजामण्डल (1934), कोटा प्रजामण्डल (1939) |
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4. जयनारायण व्यास
- जन्म ➜ 18 फरवरी 1899 · जोधपुर
- उपनाम ➜ मारवाड़ के गाँधी, लोकनायक, शेर-ए-राजस्थान, लक्कड़-फक्कड़, धुन के धनी
- प्रेरणा ➜ स्वामी श्रद्धानन्द
- सामन्तशाही के ख़िलाफ़ सबसे पहले आवाज़ उठाने वालों में; जागीरदारी की समाप्ति और रियासतों में उत्तरदायी शासन पर ज़ोर। प्रजामण्डल आन्दोलन में सिवाणा दुर्ग (बालोतरा) में नज़रबन्द रहे।
- 1932 में बालिकाओं के लिए जय कन्या विद्यालय खोला।
- मारवाड़ लोक परिषद के सत्याग्रह के पहले डिक्टेटर बने (11 मई 1942); 3 मार्च 1948 को मारवाड़ का प्रधानमंत्री पद मिला।
कलम — पत्र और पुस्तिकाएँ
| कृति / पत्र | वर्ष | विवरण |
|---|---|---|
| तरुण राजस्थान | 1927 · ब्यावर | मुख्य सम्पादक व्यास; सम्पादक विजयसिंह पथिक भी |
| पोपाबाई री पोल, मारवाड़ की अवस्था | 1929 | पुस्तिकाओं से मारवाड़ शासन की कटु आलोचना |
| गैर-क़ानूनी लागें | — | पुस्तक |
पहले आम चुनाव से मुख्यमंत्री तक
- 1952 में दो क्षेत्रों — सरदारपुरा (जोधपुर) और आहोर (जालौर) — से विधानसभा चुनाव लड़े और दोनों जगह हारे।
- किशनगढ़ के विधायक चाँदमल से त्यागपत्र दिलवाकर सीट ख़ाली कराई गई; उपचुनाव जीतकर टीकाराम पालीवाल की जगह मुख्यमंत्री बने — नवम्बर 1952 से नवम्बर 1954।
- राजस्थान के एकमात्र मुख्यमंत्री जो मनोनीत (अप्रैल 1951 – मार्च 1952) भी रहे और निर्वाचित भी।
5. मारवाड़ के सेनानी
बालमुकुन्द बिस्सा (1908–1942)
- जन्म 1908, पीलवा गाँव (डीडवाना) के पुष्करणा परिवार में; उपनाम “राजस्थान का जतिनदास”।
- 1934 में नागौर में चरखा संघ व खद्दर भण्डार बनाकर प्रचार किया।
- 1942 में जोधपुर के उत्तरदायी शासन आन्दोलन में भाग; 9 जून को भारत रक्षा क़ानून में गिरफ़्तार। जेल की अव्यवस्था और अन्याय के विरुद्ध भूख हड़ताल की; तबीयत बिगड़ने से 19 जून 1942 को निधन।
| व्यक्ति | जन्म · स्थान | योगदान |
|---|---|---|
| छगनराज चौपासनीवाला | 26 मई 1912 · जोधपुर | जोधपुर के अग्रणी आन्दोलनकारी (1932–39); 26 फरवरी 1932 को पहली बार तिरंगा फहराने का श्रेय — जगह जोधपुर की पुरानी धानमण्डी; 1940 में व्यास के साथ प्रजामण्डल आन्दोलन में भाग लेने पर सिवाणा किले (बालोतरा) में क़ैद; लोकराज साप्ताहिक का सम्पादन |
| भंवरलाल सर्राफ | — | मारवाड़ हितकारिणी सभा के अग्रणी सदस्य; 1921 में असहयोग के दौरान तिरंगा लेकर शहर में घूमे — झण्डे के एक ओर महात्मा गाँधी, दूसरी ओर स्वराज्य लिखा था |
| सूमनेश जोशी | 3 सितम्बर 1916 · जोधपुर | पहले जोधपुर राज्य की नौकरी; मारवाड़ लोक परिषद के आन्दोलन में 14 जुलाई 1942 को गिरफ़्तार, 4 वर्ष 7 माह की सज़ा; 1946 से रियासती पत्र; जोधपुर नरेश हनुवन्त सिंह की पाकिस्तान से जुड़ने की साज़िश उजागर की; 1957–62 में साप्ताहिक आयोजन; पुस्तक राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी |
6. मेवाड़ के सेनानी
बलवंतसिंह मेहता
- जन्म 8 फरवरी 1900, उदयपुर।
- प्रताप सभा (1915) के संस्थापक; हल्दीघाटी में क्रान्तिकारियों को विस्फोटक (बम) बनाने की विधि सिखाई।
- 1938 में मेवाड़ प्रजामण्डल के प्रथम अध्यक्ष; आन्दोलन के कारण सराड़ा के किले में बन्दी रखे गए।
पं. जनार्दन राय नागर
- जन्म जून 1911, उदयपुर।
- रात्रिशाला के रूप में “हिन्दी विद्यापीठ” शुरू की, जिसे बाद में “राजस्थान विद्यापीठ” नाम मिला।
ध्यान दें: मेवाड़ प्रजामण्डल (1938) के संस्थापक माणिक्यलाल वर्मा और पहले अध्यक्ष बलवंतसिंह मेहता — दोनों पदों को अलग-अलग याद रखें। (वर्मा का परिचय “किसान व आदिवासी नेता” शाखा में है।)
7. जयपुर-ढूँढाड़ के सेनानी
हीरालाल शास्त्री (1899–1974)
- जन्म 24 नवम्बर 1899, जोबनेर (जयपुर)। 1927 में रियासती सरकारी पद छोड़कर आन्दोलन में आए और अर्जुनलाल सेठी के साथ जुड़े।
- 1929 में वनस्थली (निवाई, टोंक) में जीवन कुटीर बनाई — यही आगे वनस्थली विद्यापीठ बनी; समाधि भी वहीं है।
- एकीकरण के चौथे चरण में वृहत् राजस्थान के पहले प्रधानमंत्री — राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री; कार्यकाल 7 अप्रैल 1949 – 5 जनवरी 1951।
| व्यक्ति | जन्म · स्थान | योगदान |
|---|---|---|
| टीकाराम पालीवाल | 24 अप्रैल 1909 · महुआ (दौसा) | “भूमि सुधार के जनक”; शिक्षक की नौकरी छोड़कर आन्दोलन में आए; 1929 में राजधानी दिल्ली में विद्यार्थी यूथ लीग खड़ी की; शास्त्री की मनोनीत सरकार में राजस्व मंत्री; पहले आम चुनाव में महुआ और मलारना चौड़ दोनों सीटें जीतीं; 3 मार्च से 31 अक्टूबर 1952 तक मुख्यमंत्री; व्यास मंत्रिमण्डल में पहले उपमुख्यमंत्री |
| दामोदर लाल व्यास | 9 नवम्बर 1909 · मालपुरा (टोंक) | वकील; मालपुरा से विधायक, राजस्व मंत्री; 1967 में जयपुर की महारानी गायत्री देवी को हराया; सुखाड़िया मंत्रिमण्डल में गृहमंत्री; “राजस्थान का लौह पुरुष” |
| रामकरण जोशी | 2 अक्टूबर 1912 · दौसा | 1939 में जयपुर प्रजामण्डल आन्दोलन — अध्यापक पद छोड़ा; 1942 में प्रजामण्डल की समझौता-नीति का विरोध करके बाबा हरिश्चन्द्र के साथ आज़ाद मोर्चा बनाया; आज़ादी के बाद व्यास व सुखाड़िया मंत्रिमण्डल में मंत्री |
8. हाड़ौती के सेनानी
| व्यक्ति | जन्म · स्थान | योगदान |
|---|---|---|
| पं. नयनूराम शर्मा | — | हाड़ौती में जन-जागृति के जनक; हाड़ौती शाखा (मुख्यालय कोटा) के अध्यक्ष — मूल संस्था राजस्थान सेवा संघ; हाड़ौती सेवा संघ, हाड़ौती शिक्षा मण्डल, हाड़ौती प्रजामण्डल, कोटा प्रजामण्डल के संस्थापक; 1941 में अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी |
| पं. अभिन्न हरि | 27 सितम्बर 1905 · सिंघानिया (मांगरोल, बारां); मूल नाम बद्रीलाल शर्मा | हाड़ौती के स्वतंत्रता आन्दोलन के सूत्रधार; पत्र — कल्पवृक्ष (1927), कर्मवीर (1930), रणमेरी, लोकसेवक (कोटा), अग्रसर (दिल्ली); 1934 में नयनूराम शर्मा के साथ हाड़ौती प्रजामण्डल; 1939 में कोटा प्रजामण्डल के प्रमुख संस्थापक |
| ऋषिदत्त मेहता | — | बूँदी के प्रसिद्ध सेनानी; बूँदी में प्रजामण्डल (1931) की नींव रखने वालों में |
ट्रिक: हाड़ौती प्रजामण्डल = 1934, कोटा प्रजामण्डल = 1939; दोनों के पीछे नयनूराम शर्मा और अभिन्न हरि की जोड़ी।
रिवीजन पॉइंटर्स
- तेजावत «बावजी» और «आदिवासियों के मसीहा» कहलाए; उन्होंने 1921 में मातृकुण्डिया से एकी आन्दोलन शुरू किया और 21 सूत्री माँगपत्र «मेवाड़ की पुकार» रखा।
- नीमड़ा काण्ड 7 मार्च 1922 को हुआ और «दूसरा जलियाँवाला» कहलाया; मानगढ़ (1913, गोविन्द गिरी) पहला जलियाँवाला है।
- तेजावत ने 3 जून 1929 को खेड़ब्रह्म में आत्मसमर्पण किया और 23 अप्रैल 1936 को रिहा हुए।
- नानाभाई खाँट ने रास्तापाल की पाठशाला बन्द करने से इन्कार किया और 18 जून 1947 को पुलिस की पिटाई से चल बसे; ठक्कर बापा ने जनजातियों को «आदिवासी» नाम दिया।
- हर इलाक़े का «गाँधी»: मारवाड़ में व्यास, मेवाड़ में माणिक्यलाल, वागड़ में भोगीलाल पांड्या, सिरोही में गोकुल भाई भट्ट, भरतपुर में जुगलकिशोर चतुर्वेदी।
- जयनारायण व्यास का जन्म 18 फरवरी 1899 को हुआ; वे मारवाड़ लोक परिषद के पहले डिक्टेटर (11 मई 1942) बने और मनोनीत व निर्वाचित, दोनों रूपों में मुख्यमंत्री रहने वाले अकेले नेता हैं।
- मेवाड़ प्रजामण्डल (1938) के संस्थापक माणिक्यलाल वर्मा थे और पहले अध्यक्ष बलवंतसिंह मेहता — दोनों पद अलग याद रखें।
- हीरालाल शास्त्री ने 1929 में जीवन कुटीर बनाई, जो आगे वनस्थली विद्यापीठ बनी; उनका कार्यकाल 7 अप्रैल 1949 से 5 जनवरी 1951 तक रहा।
- हाड़ौती प्रजामण्डल 1934 में और कोटा प्रजामण्डल 1939 में बना; दोनों के पीछे नयनूराम शर्मा व अभिन्न हरि की जोड़ी थी।
अगले भाग में प्रजामण्डल की शेष धारा — भरतपुर-अलवर, वागड़-सिरोही-जैसलमेर और अजमेर-ब्यावर के सेनानी — और राठी, बजाज, बिड़ला जैसे दानवीर उद्योगपति।
पिछला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: किसान व आदिवासी नेता (भाग 1)
अगला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: प्रजामण्डल के सेनानी (भाग 2)
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