1857 के बाद सुधार और राजनीतिक चेतना: दयानंद व आर्य समाज एवं राजनीतिक चेतना – Rajasthan History Chapter 40

दयानंद व आर्य समाज, कांग्रेस और स्वदेशी, क्रांतिकारी घटनाएँ, अंग्रेज़ी शिक्षा और प्रसिद्ध उपनाम।

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In this chapter (11 sections)
  1. दयानंद व आर्य समाज
  2. दयानंद की राजस्थान यात्राएँ
  3. परोपकारिणी सभा व वैदिक प्रेस
  4. श्यामजी कृष्ण वर्मा
  5. राजनीतिक चेतना
  6. कांग्रेस की स्थापना
  7. राजस्थान में स्वदेशी आन्दोलन
  8. क्रांतिकारी घटनाएँ
  9. अंग्रेज़ी शिक्षा व संस्थाएँ
  10. प्रमुख व्यक्तियों के उपनाम
  11. रिवीजन पॉइंटर्स

राजस्थान में राजनीतिक चेतना किसी एक आंदोलन से नहीं जागी — धर्म-सुधार, राष्ट्रीय संस्था, क्रांतिकारी और शिक्षा, चारों की अलग-अलग भूमिका रही। इन्हें तारीख़ों की एक लड़ी में पिरोकर पढ़ें तो याद रखना आसान हो जाता है। इस भाग में दयानंद की यात्राएँ, परोपकारिणी सभा, श्यामजी कृष्ण वर्मा, कांग्रेस और स्वदेशी, क्रांतिकारी घटनाएँ, अंग्रेज़ी शिक्षा और प्रमुख व्यक्तियों के उपनाम हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — 1857 के बाद सुधार और राजनीतिक चेतना, 5 चॉक-बोर्ड चित्र, 1 नक्शे, 4 चार्ट, 26 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. दयानंद व आर्य समाज

जब राजस्थान के अधिकांश नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्त्तव्यों का बोध ही नहीं था, तब आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने यहाँ राजनीतिक चेतना को जगाया।

  • आर्य समाज की स्थापना ➜ 10 अप्रैल 1875, बम्बई
  • राजस्थान में शाखाएँ ➜ 1880–1890 के बीच
  • पहली यात्रा ➜ 1865 — करौली

2. दयानंद की राजस्थान यात्राएँ

काल / क्रमघटनाविवरण
जून 1865पहली यात्रापहले करौली महाराजा के मेहमान बने, आगे जयपुर, दूदू, किशनगढ़, पुष्कर (अजमेर) गए।
1881दूसरी यात्राभरतपुर पहुँचे; फिर जयपुर–अजमेर–ब्यावर–मसूदा–बनेड़ा की राह चलकर 26 अक्टूबर को चित्तौड़ आए।
मई–जून 1882अजमेरआर्य समाज की स्थापना; प्रेरक — हरविलास शारदा व चान्दकरण शारदा।
अगस्त 1882उदयपुरमहाराणा सज्जनसिंह के बुलावे पर आए; नौलखा महल (सज्जन निवास बाग) में उनका ठहराव हुआ।

… शेष 4 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

  • उदयपुर में रहते हुए ही उन्होंने अपने ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश का दूसरा संशोधित संस्करण पूरा किया; वह स्थान आज सत्यार्थ प्रकाश भवन है।
  • जोधपुर महाराजा उनसे इतने प्रभावित हुए कि मृत्युभोज और मद्यपान रोकने के सरकारी आदेश निकाले।
  • जोधपुर में खुली सभा में स्वामीजी ने गणिकागमन के दोष बताए और महाराजा जसवन्तसिंह द्वितीय को नन्ही जान से लगाव के लिए डाँटा; बदले में नन्ही जान ने रसोइए गौड़ मिश्र से मिलकर उन्हें विष दिलवाया। उन्हें आबू और फिर अजमेर ले जाया गया।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

3. परोपकारिणी सभा व वैदिक प्रेस

  • स्थापना ➜ फरवरी 1883, उदयपुर
  • अध्यक्ष ➜ महाराणा सज्जनसिंह
  • सदस्य ➜ 23
  • मेवाड़ में आर्य समाज की स्थापना का श्रेय विष्णुलाल पाण्ड्या को जाता है।
  • वैदिक यंत्रालय प्रेस ➜ अजमेर का वह छापाख़ाना जहाँ आर्य समाज और वैदिक संस्कृति की पुस्तकें छपती थीं।

ट्रिक: तीन तारीख़ें — आर्य समाज 10 अप्रैल 1875, परोपकारिणी सभा फरवरी 1883, देहांत 30 अक्टूबर 1883।

4. श्यामजी कृष्ण वर्मा

  • दयानंद सरस्वती के अनुयायी, उनके स्वदेशी के नारे से बेहद प्रभावित।
  • 1885 में बैरिस्टरी की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे; रतलाम राज्य के दीवान रहे; फिर अजमेर में वकालत करने लगे।
  • ब्यावर में दामोदर दास राठी के साथ मिलकर कृष्णा कपड़ा मिल शुरू करवाई।

रोचक तथ्य: आगे चलकर लंदन में इण्डिया हाउस और इण्डियन होम रूल सोसाइटी (1905) इन्होंने ही बनाई।

5. राजनीतिक चेतना

काल / क्रमघटनाविवरण
28 दिसम्बर 1885कांग्रेस की स्थापनाबम्बई में।
1887अजमेर कांग्रेस कमेटीगवर्नमेन्ट कॉलेज के छात्रों द्वारा।
1888इलाहाबाद अधिवेशनअजमेर का प्रतिनिधित्व पहली बार।
1905बंगाल विभाजनराजस्थान के युवा क्रांतिकारी संगठित होने लगे।

… शेष 4 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

6. कांग्रेस की स्थापना

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 28 दिसम्बर 1885 को बम्बई में बनी — आम भारतीयों की सच्ची प्रतिनिधि पहली संस्था।
  • अजमेर के गवर्नमेन्ट कॉलेज के विद्यार्थियों ने 1887 में कांग्रेस कमेटी गठित की; क्रमशः राजस्थान में प्रभाव फैला और कार्यकर्ता अधिवेशनों में पहुँचने लगे।
  • इलाहाबाद अधिवेशन (1888) में अजमेर की ओर से पहली बार गोपीनाथ माथुर व कृष्णलाल शामिल हुए।

ट्रिक: तीन तारीख़ें — 1885 (बम्बई), 1887 (अजमेर कमेटी), 1888 (इलाहाबाद में पहला प्रतिनिधित्व)।

7. राजस्थान में स्वदेशी आन्दोलन

  • स्वदेशी आन्दोलन के जन्मदाता के रूप में स्वामी दयानंद सरस्वती को माना जाता है।
  • राजस्थान में इसका आरंभ बाँसवाड़ा, सिरोही, मेवाड़ और डूँगरपुर में हुआ, जहाँ नेतृत्व गोविन्द गिरी ने किया।
  • स्वामी गोविन्द गिरी ने विदेशी कपड़ों के बहिष्कार, शराब छोड़ने और अपने राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष का आह्वान किया।

स्वदेशी की कड़ी

  1. दयानंद का स्वदेशी का नारा
  2. वागड़-मेवाड़ में गोविन्द गिरी
  3. विदेशी वस्त्र बहिष्कार + मद्यनिषेध

8. क्रांतिकारी घटनाएँ

1905 के बंगाल विभाजन की आँच राजस्थान तक पहुँची; युवा संगठन बनाकर क्रांतिकारी गतिविधियों में जुटने लगे। प्रमुख नाम — केसरीसिंह बारहठ, जवाहरसिंह बारहठ, ठाकुर गोपालसिंह खरवा, अर्जुनलाल सेठी, प्रतापसिंह बारहठ, सेठ दामोदर दास राठी, विजयसिंह पथिक।

घटनातारीख़क्या हुआ
महन्त प्यारेलाल हत्याकाण्ड25 जून 1912क्रांति के लिए धन जुटाने के प्रयास में जोधपुर के धनी साधु प्यारेलाल को कोटा लाया गया; दूध में ज़हर देने का असर न होने पर हीरालाल लाहिरी ने हत्या की। केसरीसिंह बारहठ, हीरालाल लाहिरी, रामकरण को 20-20 वर्ष की सज़ा।
लार्ड हार्डिंग बमकाण्ड23 दिसम्बर 1912दिल्ली के चाँदनी चौक में गवर्नर जनरल के जुलूस पर बम; योजना रास बिहारी बोस की, अर्जुनलाल सेठी भी शामिल। राजस्थान में माना जाता है कि जोरावर सिंह बारहठ ने बुर्क़ा ओढ़कर मारवाड़ी लाइब्रेरी से बम फेंका। मुक़दमे में बालमुकुंद, अमीर चन्द, अवध बिहारी, बसन्त कुमार विश्वास को मृत्युदंड।
निमेज हत्याकाण्ड20 मार्च 1913धन की कमी के कारण बिहार के निमेज (आरा) में एक धनी महन्त और उसके सेवक की हत्या; सेठी ने शिक्षक विष्णुदत्त और छात्र मानकचंद, मोतीचंद, जोरावर सिंह, जयचंद को लगाया। मोतीचंद को फाँसी, विष्णुदत्त को आजीवन कारावास; जोरावर सिंह बारहठ कभी पकड़े नहीं गए।
अजमेर में सशस्त्र क्रांति की योजना21 फरवरी 1915रास बिहारी बोस व सचिन्द्रनाथ सान्याल के निर्देश पर अजमेर-ब्यावर में; राजस्थान में ज़िम्मा गोपालसिंह खरवा व विजयसिंह पथिक को; संदेशवाहक के विश्वासघात से सूचना पुलिस तक पहुँची; दोनों टॉडगढ़ दुर्ग में नज़रबंद।

रोचक तथ्य: अजमेर के जिस सरकारी महाविद्यालय के छात्रों ने 1887 में कांग्रेस कमेटी बनाई थी, वही आज सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय है।

9. अंग्रेज़ी शिक्षा व संस्थाएँ

रियासतवर्षसंस्था / घटना
अजमेर क्षेत्र1819अंग्रेज़ी शिक्षा की शुरुआत — रेज़िडेंट ऑक्टरलोनी की मदद से अजमेर व पुष्कर में स्कूल; फिर भिनाय और केकड़ी में
अजमेर1836 / 1843 / 1848पहला सरकारी स्कूल / आर्थिक कारणों से बंद / फिर खुला
अजमेर1869उसी स्कूल को डिग्री कॉलेज बनाया — राजस्थान का पहला; आज सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय
अलवर1842महाराजा विनयसिंह ने पं. रूपनारायण की मदद से स्कूल खोला — मैकाले-पद्धति की शिक्षा का रियासतों में पहला प्रयास

19वीं सदी के अंत तक जैसलमेर को छोड़कर राजस्थान की हर रियासत में अंग्रेज़ी शिक्षा शुरू हो चुकी थी।

10. प्रमुख व्यक्तियों के उपनाम

उपनामव्यक्ति
राज (राजस्थान) का दधीचिअर्जुनलाल सेठी
राजस्थान का चन्द्रशेखरजोरावर सिंह बारहठ
आधुनिक राजस्थान के निर्मातामोहनलाल सुखाड़िया
राजस्थान का सी.आर. दासमुकुट बिहारी लाल भार्गव

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. आर्य समाज की स्थापना 10 अप्रैल 1875 को बम्बई में हुई; राजस्थान में उसकी शाखाएँ 1880–1890 के बीच बनीं।
  2. दयानंद की पहली राजस्थान यात्रा जून 1865 में करौली से शुरू हुई; अजमेर में आर्य समाज की स्थापना मई–जून 1882 में हुई।
  3. परोपकारिणी सभा फरवरी 1883 में उदयपुर में बनी, अध्यक्ष महाराणा सज्जनसिंह थे; दयानंद का देहांत 30 अक्टूबर 1883 को हुआ।
  4. श्यामजी कृष्ण वर्मा ने आगे चलकर लंदन में इण्डिया हाउस और इण्डियन होम रूल सोसाइटी (1905) बनाई।
  5. कांग्रेस की स्थापना 28 दिसम्बर 1885 (बम्बई); अजमेर कमेटी 1887 में बनी और 1888 के इलाहाबाद अधिवेशन में अजमेर का पहला प्रतिनिधित्व हुआ।
  6. स्वदेशी आन्दोलन के जन्मदाता दयानंद माने जाते हैं; राजस्थान में उसका नेतृत्व गोविन्द गिरी ने किया।
  7. महन्त प्यारेलाल हत्याकाण्ड (25 जून 1912) और लार्ड हार्डिंग बमकाण्ड (23 दिसम्बर 1912) — दोनों क्रांतिकारी घटनाएँ याद रखें।
  8. जोरावर सिंह बारहठ कभी पकड़े नहीं गए; उन्हें राजस्थान का चन्द्रशेखर कहा जाता है।
  9. अजमेर में 1869 में राजस्थान का पहला डिग्री कॉलेज बना; अलवर में 1842 में महाराजा विनयसिंह ने स्कूल खोला।

अगले भाग में सामाजिक संस्थाएँ, राजनीतिक संगठन और अख़बार, फिर विवाह-सुधार, शिक्षा व सेवा करने वाली संस्थाएँ तथा वीर भारत सभा से नरेन्द्र मण्डल तक।

पिछला भाग: 1857 के बाद सुधार और राजनीतिक चेतना: राज्यवार सुधार एवं प्रमुख दरबार व यात्राएँ

अगला भाग: सामाजिक संस्थाएँ एवं राजनीतिक संस्थाएँ (भाग 1)

इन्हें भी पढ़ें: सामाजिक एवं राजनीतिक संगठन · प्रजामण्डल व स्वतंत्रता आन्दोलन

पूरी श्रृंखला: राजस्थान का इतिहास — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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