1857 की क्रांति राजस्थान में एक साथ नहीं, छावनी-दर-छावनी और अलग-अलग तारीख़ों पर भड़की — इसलिए यहाँ तारीख़ें और नाम ही असली पूँजी हैं। इस भाग में पहले क्रांति के सामान्य, तात्कालिक और राजस्थान-विशेष कारण, रेज़ीडेन्सी का ढाँचा और छह छावनियाँ हैं; फिर नसीराबाद, नीमच और देवली के विद्रोह का क्रमवार ब्योरा आता है।
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1. एक नज़र में
मेरठ की चिंगारी राजस्थान पहुँचने में 18 दिन लगे। यहाँ विद्रोह किसी एक योजना से नहीं, छावनी-दर-छावनी और रियासत-दर-रियासत अलग-अलग मौक़ों पर भड़का — यही इसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी भी साबित हुई।
- मेरठ में शुरुआत ➜ 10 मई 1857
- राजस्थान में पहला विद्रोह ➜ नसीराबाद — 28 मई
- छावनियाँ ➜ 6 (लगभग 5000 सैनिक)
… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 10 मई 1857 | मेरठ | देशव्यापी क्रांति का आरंभ |
| 28 मई | नसीराबाद | राजस्थान में पहला विद्रोह — बख्तावर सिंह |
| 31 मई | भरतपुर | गुर्जर व मेव जनता का विद्रोह |
| 3 जून | नीमच | मोहम्मद अली बेग व हीरासिंह |
… शेष 8 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: तारीख़ों का क्रम — ना-भ-नी-दे-टों-अ-अ-ए-आ-धौ-को : नसीराबाद, भरतपुर, नीमच, देवली, टोंक, अलवर, अजमेर-जेल, एरिनपुरा, आउवा, धौलपुर, कोटा।
2. कारण व पृष्ठभूमि
कारणों की कड़ी
- सहायक संधि से रियासतों की स्वतंत्रता घटी
- हड़प नीति से राज्य छिने
- आर्थिक ढाँचा टूटा, बेरोज़गारी
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
याद रखें: राजस्थान में सहायक संधि पहले हो चुकी थी (1818 तक); असली चोट रोज़-रोज़ की दख़लंदाज़ी, कर-नीति और धर्म-प्रचार की आशंका से लगी।
3. सामान्य व तात्कालिक कारण
| कारण | क्या हुआ |
|---|---|
| सहायक संधि (लॉर्ड वैलेज़ली) | रियासत को अंग्रेज़ी सेना अपने यहाँ रखनी और उसका ख़र्च भी उठाना पड़ता था; विदेश-संबंध अंग्रेज़ अफ़सरों के हाथ चले गए। |
| हड़प नीति (लॉर्ड डलहौज़ी, 1848) | Doctrine of Lapse — (i) बिना जीवित उत्तराधिकारी के शासक मरे तो राज्य ब्रिटिश साम्राज्य में; (ii) गोद लेने की इजाज़त नहीं; (iii) कुप्रबंध का आरोप लगाकर भी राज्य हड़पा जा सकता था। |
| पेंशन व अपमान | डलहौज़ी ने नाना साहब (धोंधूपंत) की पेंशन रोकी; मुग़ल बादशाह और अवध की बेगमों का अपमान किया। |
| भेदभाव और सैनिक नियम | ऊँचे पदों से भारतीयों को दूर रखा गया; लॉर्ड कैनिंग ने सैनिकों के लिए समुद्र-पार सेवा अनिवार्य की। |
याद रखें: क्रांति के समय — ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया, प्रधानमंत्री पामर्स्टन, भारत का गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग।
4. राजस्थान के विशेष कारण
- संधियों के बाद अंग्रेज़ रियासतों के प्रशासन और घरेलू मामलों में सीधे दख़ल देने लगे।
- शासकों और सामंतों के विशेषाधिकार छाँटे गए, जिससे आम जनता में भी अंग्रेज़-विरोधी भावना उभरी।
- हस्तक्षेप से रियासतों की आय घटी, इसलिए शासकों को अपने ख़र्चों में कटौती करनी पड़ी।
ट्रिक: तीन चोटें — दख़ल (राजनीति), एकाधिकार (अर्थ), मिशनरी (धर्म)।
5. राजपूताना रेज़ीडेन्सी व AGG
- स्थापना ➜ 1832 — लॉर्ड विलियम बैंटिंक
- मुख्य अधिकारी ➜ AGG (एजेंट टू गवर्नर जनरल)
- मुख्यालय ➜ अजमेर; 1845 में आबू
- क्रांति से कुछ पहले AGG हेनरी लॉरेन्स को अवध भेज दिया गया; उसकी जगह उसका भाई जॉर्ज सेंट पैट्रिक लॉरेन्स AGG बना।
- 1857 में राजपूताना का प्रशासनिक नियंत्रण उत्तर-पश्चिम प्रान्त के लेफ़्टिनेंट गवर्नर कॉल्विन (मुख्यालय आगरा) के पास था; शांति-व्यवस्था की ज़िम्मेदारी AGG की थी।
- AGG का कार्यालय अजमेर में रहता, पर गर्मी में वह माउंट आबू चला जाता।
1857 के समय रियासतें, शासक और पॉलिटिकल एजेन्ट
| रियासत | शासक | पॉलिटिकल एजेन्ट |
|---|---|---|
| मेवाड़ (उदयपुर) | महाराणा स्वरूपसिंह | कैप्टन सी.एल. शावर्स |
| मारवाड़ (जोधपुर) | महाराजा तख्तसिंह | कैप्टन मॉक मैसन |
| कोटा | महाराव रामसिंह द्वितीय | मेजर बर्टन |
| जयपुर | सवाई रामसिंह द्वितीय | विलियम ईडन |
6. छह छावनियाँ
| छावनी | आज का ज़िला | सैनिक टुकड़ी | 1857 में |
|---|---|---|---|
| नसीराबाद | अजमेर | बंगाल नेटिव इन्फ़ैंट्री (15वीं व 30वीं) | विद्रोह — राजस्थान में पहला |
| नीमच | मध्य प्रदेश (नियंत्रण मेवाड़ के पॉलिटिकल एजेन्ट का) | फ़र्स्ट बंगाल कैवलरी | विद्रोह |
| देवली | टोंक | कोटा कन्टिंजेंट | विद्रोह |
7. प्रमुख केंद्र
| स्थान | तारीख | प्रमुख क्रांतिकारी |
|---|---|---|
| नसीराबाद | 28 मई 1857 | बख्तावर सिंह |
| भरतपुर | 31 मई 1857 | गुर्जर व मेव |
| नीमच | 3 जून 1857 | मोहम्मद अली बेग, हीरासिंह |
| देवली | 5 जून 1857 | नीमच के क्रांतिकारी |
8. शुरुआत व अंग्रेज़ों की तैयारी
- 10 मई 1857 ➜ मेरठ छावनी में विद्रोह; राजस्थान की जनता ने भी विद्रोहियों के प्रति उत्साह दिखाया।
- 19 मई ➜ ख़बर AGG लॉरेन्स को माउंट आबू में मिली, जहाँ वह गर्मी की छुट्टी बिता रहा था।
- अजमेर की रखवाली में उस वक़्त 15वीं बंगाल नेटिव इन्फ़ैंट्री की दो टुकड़ियाँ थीं, ये टुकड़ियाँ हाल ही में मेरठ से बदली होकर आई थीं।
अजमेर पर इतना ज़ोर इसलिए था कि वह राजस्थान के बीचों-बीच था, अंग्रेज़ी प्रशासन का मुख्यालय था और वहीं गोला-बारूद, शस्त्रागार और सरकारी ख़ज़ाना रखा था।
9. नसीराबाद — 28 मई 1857
- तारीख़ ➜ 28 मई 1857, शाम 4 बजे
- तैनात ➜ 15वीं व 30वीं बंगाल नेटिव इन्फ़ैंट्री, तोपख़ाना, फ़र्स्ट बम्बई लांसर्स
- पहला कदम ➜ बख्तावर सिंह का सवाल
विद्रोह क्यों भड़का
- 15वीं बंगाल इन्फ़ैंट्री अजमेर से नसीराबाद भेजी गई और पहुँचते ही उसके हथियार जब्त कर लिए गए — सैनिकों का अंग्रेज़ों से भरोसा उठ गया।
- भारतीय सैनिकों पर क़ाबू के लिए डीसा से यूरोपीय सेना और तोपें मँगाई गईं; बात गुप्त रखनी थी, पर खुल गई और छावनी में उत्तेजना फैली।
- सैनिक बख्तावर सिंह ने अफ़सर मेजर प्रिचार्ड से पूछा कि क्या उन पर भरोसा नहीं है — संतोषजनक जवाब न मिला, और शाम को विद्रोह हो गया; 30वीं इन्फ़ैंट्री भी साथ आ गई।
घटनाक्रम
- अंग्रेज़ अफ़सर मेजर स्पार्टिसवुड और कर्नल न्यूबरी मारे गए; लेफ़्टिनेंट लोक और कर्नल हार्डी घायल हुए।
- फ़र्स्ट बम्बई लांसर्स विद्रोहियों के साथ नहीं गई, उलटे अंग्रेज़ों के हुक्म पर उन पर गोलियाँ चलाईं; पर लाइट व ग्रेनेडियर कंपनी ने फ़ायर करने से इनकार कर दिया।
- क्रांतिकारियों ने तोपख़ाने पर क़ब्ज़ा किया, शस्त्रागार, छावनी और बाज़ार लूटा और अधिकारियों को मारकर दिल्ली की राह ली — 18 जून को वहाँ पहुँचे।
10. नीमच व देवली
नीमच छावनी मध्य प्रदेश में थी, पर उसकी निगरानी मेवाड़ के पॉलिटिकल एजेन्ट शावर्स करता था। नसीराबाद की ख़बर पहुँचते ही यहाँ भी बेचैनी बढ़ गई।
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 2 जून | क़सम की परेड | कर्नल एबोट ने सैनिकों को गंगा और क़ुरान की क़सम दिलाई कि वे अंग्रेज़ों के वफ़ादार रहेंगे; ख़ुद बाइबिल हाथ में लेकर शपथ ली। उसी दिन मोहम्मद अली बेग ने अवध की हड़प पर सवाल किए। |
| 3 जून, रात 11 बजे | विद्रोह | मोहम्मद अली बेग व हीरासिंह की अगुवाई में विद्रोह भड़का। |
| 5 जून | दिल्ली कूच | विद्रोही आगरा होते हुए दिल्ली की ओर बढ़े; छावनी के सुपरिंटेंडेंट कप्तान लायर्ड थे। |
- नीमच से भागे लगभग 40 अंग्रेज़ों को डूँगला (चित्तौड़गढ़) में रुगाराम जाट ने शरण दी; शावर्स ने महाराणा स्वरूपसिंह से सेना लेकर उन्हें छुड़ाया और उदयपुर पहुँचाया, जहाँ पिछोला झील के जगमन्दिर में रखे गए।
- शाहपुरा के शासक लक्ष्मणसिंह ने क्रांतिकारियों के भोजन-ठहरने का इंतज़ाम कर ख़ूब आवभगत की; पीछा करते शावर्स के लिए उसने क़िले का दरवाज़ा नहीं खोला।
- निम्बाहेड़ा की जनता ने विद्रोहियों का स्वागत किया।
देवली — 5 जून 1857
- नीमच के विद्रोहियों के आते ही देवली में भी बग़ावत भड़की और छावनी जलाई गई।
- अंग्रेज़ अफ़सरों को इससे पहले ही देवली से निकालकर जहाज़पुर पहुँचा दिया गया था।
- विद्रोहियों ने कोटा रेजीमेंट के 60 सैनिक साथ चलने को मजबूर किए, पर वे भाग निकलने में सफल रहे।
रिवीजन पॉइंटर्स
- मेरठ में क्रांति 10 मई 1857 को शुरू हुई; राजस्थान में पहला विद्रोह नसीराबाद में 28 मई को हुआ।
- राजस्थान में 6 छावनियाँ थीं (लगभग 5000 सैनिक); इनमें सबसे शक्तिशाली नसीराबाद थी।
- तारीख़ों का क्रम — नसीराबाद 28 मई, भरतपुर 31 मई, नीमच 3 जून, देवली 5 जून।
- राजपूताना रेज़ीडेन्सी 1832 में लॉर्ड विलियम बैंटिंक के समय बनी; मुख्य अधिकारी AGG और मुख्यालय अजमेर था।
- क्रांति के समय AGG जॉर्ज सेंट पैट्रिक लॉरेन्स था; हेनरी लॉरेन्स को कुछ पहले अवध भेज दिया गया था।
- क्रांति के समय ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया, प्रधानमंत्री पामर्स्टन और भारत का गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग था।
- डलहौज़ी की हड़प नीति (1848) के तीन आधार थे — उत्तराधिकारी का न होना, गोद की मनाही और कुप्रबंध का आरोप।
- नीमच में विद्रोह 3 जून को मोहम्मद अली बेग व हीरासिंह की अगुवाई में हुआ; देवली में बग़ावत 5 जून को भड़की।
- अजमेर इसलिए अहम था कि वहाँ अंग्रेज़ी प्रशासन का मुख्यालय, शस्त्रागार और सरकारी ख़ज़ाना था।
अगले भाग में एरिनपुरा-आउवा, कोटा और अन्य रियासतों के विद्रोह, फिर शासकों का रुख़, अंग्रेज़ों के पुरस्कार और सलूम्बर-कोठारिया के सामंतों का गुप्त सहयोग।
पिछला भाग: अंग्रेजी प्रभुत्व और उसके प्रभाव: 1818 से पहले की संधियाँ एवं 1817-18 की संधियाँ
अगला भाग: राजस्थान में 1857 की क्रांति: प्रमुख केंद्र (भाग 2) एवं शासक, सामंत व पुरस्कार
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