एकीकरण का बीच वाला हिस्सा सबसे ज़्यादा उलझाता है, क्योंकि हर चरण में तारीख़, राजधानी और मुखिया बदल जाते हैं। इसलिए हर चरण को एक छोटी पहचान-पर्ची की तरह पढ़ें: कौन जुड़ा, किसके हाथ में कमान रही और शासन कहाँ से चला। इस भाग में पहले तीन चरण, वृहद् राजस्थान, राजधानी समिति व विभाग-बँटवारा और संयुक्त वृहद् राजस्थान क्रम से दिए गए हैं।
माइंड मैप खोलें ➜
1. पहले तीन चरण
तीनों चरण 18 मार्च से 18 अप्रैल 1948 — एक महीने — के भीतर हुए। पहले पूरब का मत्स्य संघ बना, फिर दक्षिण-पूर्व के हाड़ौती-वागड़ वाले राज्यों का पूर्व राजस्थान, और अन्त में मेवाड़ के जुड़ने से संयुक्त राजस्थान।
| चरण | आकार | जनसंख्या | वार्षिक आय |
|---|---|---|---|
| मत्स्य संघ | 4 रियासत + 1 ठिकाना | 18,37,994 | 1.84 करोड़ रु. |
| पूर्व राजस्थान | 9 रियासत + 2 ठिकाने | 23.5 लाख | 2 करोड़ रु. से अधिक |
| संयुक्त राजस्थान | 10 रियासत + 2 ठिकाने | 42,60,918 | 3.16 करोड़ रु. |
2. चरण 1 — मत्स्य संघ
पृष्ठभूमि — अलवर पर कार्रवाई
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 7 फ़रवरी 1948 | अलवर पर कार्रवाई | साम्प्रदायिक तनाव फैलाने के इल्ज़ाम में महाराजा तेजसिंह और दीवान एन.बी. खरे दिल्ली में नज़रबन्द; अलवर की बागडोर केन्द्र के हाथ |
| 10 फ़रवरी 1948 | भरतपुर | रियासती विभाग ने महाराजा बृजेन्द्रसिंह को दिल्ली बुलाकर शिकायतें बताईं; उन्होंने अनिच्छा से प्रशासन भारत सरकार को सौंप दिया |
| 15 फ़रवरी 1948 | प्रशासक | एस.एन. सप्रू ने भरतपुर के प्रशासक का पद सँभाला |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
संघ का नाम के.एम. मुन्शी के सुझाव पर “मत्स्य” रखा गया — यह भाग प्राचीन मत्स्य जनपद का क्षेत्र है।
पदाधिकारी
| पद | व्यक्ति |
|---|---|
| राजधानी | अलवर |
| राजप्रमुख | उदयभानसिंह (धौलपुर शासक) |
| उपराजप्रमुख | गणेशपाल देव (करौली शासक) |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
- शामिल इकाइयाँ ➜ अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर और नीमराणा ठिकाना।
- मंत्रिमण्डल ➜ मास्टर भोलानाथ (अलवर), जुगल किशोर चतुर्वेदी (भरतपुर), गोपीलाल यादव, डॉ. मंगलसिंह (धौलपुर), चिरंजीलाल शर्मा (करौली)।
- आँकड़े ➜ 12,000 वर्ग किमी का रकबा, 18,37,994 की आबादी और 1.84 करोड़ रु. सालाना कमाई।
ध्यान दें: संघ की राजधानी अलवर, पर उद्घाटन भरतपुर में हुआ — दोनों शहर अलग याद रखें।
3. चरण 2 — पूर्व राजस्थान
मेवाड़ प्रजामण्डल के नेताओं का दबाव बढ़ा तो 23 मार्च 1948 को महाराणा ने भी इस प्रस्तावित संघ में आने की इच्छा जताई। मगर उद्घाटन की तारीख़ तय हो चुकी थी, इसलिए मेवाड़ को बाद में जोड़ने का निश्चय हुआ और संघ 25 मार्च 1948 को कोटा में बना।
- शामिल इकाइयाँ ➜ बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, किशनगढ़, शाहपुरा, कोटा, झालावाड़, डूँगरपुर, बूँदी, टोंक (9 रियासतें) और लावा व कुशलगढ़ (2 ठिकाने)।
- आँकड़े ➜ रकबा 16,807 वर्ग किमी, आबादी 23.5 लाख, सालाना कमाई 2 करोड़ रु. से ऊपर।
| पद | व्यक्ति |
|---|---|
| राजधानी | कोटा |
| राजप्रमुख | भीमसिंह द्वितीय (कोटा शासक) |
| वरिष्ठ उपराजप्रमुख | बहादुरसिंह (बूँदी शासक) |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
विलय-पत्र पर हस्ताक्षर के समय बाँसवाड़ा के शासक चन्द्रवीरसिंह ने कहा था — “मैं अपने डेथ वारण्ट पर हस्ताक्षर कर रहा हूँ”।
ट्रिक: इस संघ के नौ राज्य याद करने को — हाड़ौती (कोटा-बूँदी-झालावाड़) + वागड़ (डूँगरपुर-बाँसवाड़ा-प्रतापगढ़) + टोंक + किशनगढ़-शाहपुरा: 3 + 3 + 1 + 2 = 9।
4. चरण 3 — संयुक्त राजस्थान
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 28 मार्च 1948 | स्वीकृति | महाराणा भूपालसिंह ने मेवाड़ को राजस्थान संघ में मिलाने की औपचारिक सहमति दी |
| 11 अप्रैल 1948 | विलय-पत्र | महाराणा के हस्ताक्षर |
| 18 अप्रैल 1948 | उद्घाटन | प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उदयपुर में संयुक्त राजस्थान का उद्घाटन किया |
- नया नाम “यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ राजस्थान”, राजधानी उदयपुर; विधानसभा का एक अधिवेशन हर साल कोटा में भी होगा।
- रियासती विभाग ने महाराणा को आजीवन राजप्रमुख स्वीकारा। नीति थी कि किसी को 10 लाख रु. वार्षिक से अधिक प्रिवीपर्स नहीं मिलेगा — इसलिए कुल 20 लाख रु. यों बाँटे गए (नीचे चार्ट)।
- प्रधानमंत्री ➜ माणिक्यलाल वर्मा (मेवाड़), पं. नेहरू की सिफ़ारिश पर।
मंत्रिमण्डल — गोकुललाल असावा (शाहपुरा), प्रेमनारायण माथुर, भूरेलाल बयां, मोहनलाल सुखाड़िया (उदयपुर), भोगीलाल पाण्ड्या (डूँगरपुर), अभिन्न हरि (कोटा) और बृजसुन्दर शर्मा (बूँदी)।
ट्रिक: 20 = 10 + 5 + 5 — प्रिवीपर्स 10 लाख, राजप्रमुख भत्ता 5 लाख, धर्मार्थ 5 लाख।
5. वृहद् राजस्थान
तीन चरणों के बाद केवल जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर (और सिरोही) बाकी थे। 1949 में पहले इन चारों के जुड़ने से वृहद् राजस्थान बना, फिर डेढ़ महीने बाद मत्स्य संघ के जुड़ने से संयुक्त वृहद् राजस्थान।
| चरण 4 | चरण 5 | |
|---|---|---|
| नाम | वृहद् राजस्थान | संयुक्त वृहद् राजस्थान |
| तारीख | 30 मार्च 1949 | 15 मई 1949 |
| इकाइयाँ | 14 रियासत + 2 ठिकाने | 18 रियासत + 3 ठिकाने |
6. चरण 4 — वृहद् राजस्थान
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| — | आन्दोलन समिति | राममनोहर लोहिया की अगुवाई में समाजवादी दल ने राजस्थान आन्दोलन समिति खड़ी की; माँग थी कि जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर और मत्स्य संघ भी संयुक्त राजस्थान में आकर एक मज़बूत राज्य बनाएँ |
| 14 जनवरी 1949 | पटेल की घोषणा | मकर संक्रान्ति पर उदयपुर की सभा में पटेल ने बताया कि जोधपुर, जयपुर, बीकानेर के महाराजा राजस्थान में मिलने को राज़ी हैं |
| 27 मार्च 1949 | समिति की रिपोर्ट | राजधानी तय करने वाली समिति ने रिपोर्ट सौंपी |
जयपुर के महाराजा मानसिंह द्वितीय ने दो शर्तों पर वृहद् राजस्थान में आना माना — (1) उन्हें इसका वंशानुगत राजप्रमुख बनाया जाए, (2) जयपुर राजधानी हो। शपथ-ग्रहण में राजप्रमुख ने भीमसिंह (कोटा) को उपराजप्रमुख और हीरालाल शास्त्री को मुख्यमंत्री बनाकर शपथ दिलाई। मेवाड़ के भूपालसिंह को आजीवन महाराज प्रमुख बनाया गया।
| पद | व्यक्ति |
|---|---|
| राजधानी | जयपुर |
| राजप्रमुख | सवाई मानसिंह द्वितीय (जयपुर) |
| महाराज प्रमुख | भूपालसिंह (मेवाड़) |
मंत्रिमण्डल — सिद्धराज ढड्ढा (जयपुर), प्रेमनारायण माथुर, भूरेलाल बयां (उदयपुर), फूलचन्द बाफना, नरसिंह कच्छवा, राव राजा हनुवन्तसिंह (जोधपुर), रघुवरदयाल गोयल (बीकानेर) और वेदपाल त्यागी (कोटा)।
राजस्थान दिवस
- मत्स्य संघ और सिरोही को छोड़कर बाकी सारी रियासतें-ठिकाने 30 मार्च 1949 तक वृहद् राजस्थान बना चुके थे; इसी कारण राजस्थान दिवस 30 मार्च को मनता रहा।
- 2025 से राज्य सरकार ने इसे चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिन्दू नववर्ष) पर मनाने की घोषणा की; 2026 में यह 19 मार्च को पड़ा।
7. राजधानी समिति और विभाग-बँटवारा
जोधपुर, जयपुर, बीकानेर और उदयपुर जैसे बड़े नगरों के जुड़ने पर राजधानी का प्रश्न उठा। इसे सुलझाने को बी.आर. पटेल (पटियाला व पूर्वी पंजाब के सचिव) की अध्यक्षता में समिति बनी। उसने 27 मार्च 1949 को रिपोर्ट दी और सिफ़ारिश पर जयपुर राजधानी बना।
| शहर | विभाग |
|---|---|
| जयपुर | राजधानी |
| जोधपुर | न्याय विभाग |
| बीकानेर | शिक्षा विभाग |
बड़े शहरों का महत्त्व बनाए रखना ही इस बँटवारे का उद्देश्य था। इसे सरकार ने मान लिया।
8. चरण 5 — संयुक्त वृहद् राजस्थान
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 13 फ़रवरी 1949 | दिल्ली बैठक | रियासती विभाग ने चारों शासकों और मत्स्य संघ के मंत्रियों को दिल्ली तलब किया; अलवर और करौली के राजा राजस्थान में मिलने को तैयार हुए |
| — | भरतपुर और धौलपुर | दोनों शासक चाहते थे कि भाषा की समानता को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश से जोड़ा जाए |
| — | शंकरराव देव समिति | जनता की राय जानने को बनी; अध्यक्ष समेत तीन सदस्य — शंकरराव देव, प्रभुदयाल हिम्मतसिंहका, आर.के. सिद्धवा |
- शोभाराम (मत्स्य संघ के प्रमुख मंत्री) को शास्त्री-मंत्रिमण्डल में जगह मिली।
- इकाइयाँ ➜ वृहद् राजस्थान + मत्स्य संघ = 18 रियासतें + 3 ठिकाने।
- राजधानी जयपुर; प्रधानमंत्री हीरालाल शास्त्री; राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वितीय; महाराज प्रमुख भूपालसिंह।
मत्स्य संघ का रास्ता
- अलवर पर कार्रवाई 1948
- चार रियासतों का संघ
- भरतपुर-धौलपुर की यूपी की चाह
याद रखें: चरण 5 में कोई उद्घाटन समारोह नहीं हुआ — यह एक संघ का दूसरे में प्रशासनिक हस्तान्तरण था।
रिवीजन पॉइंटर्स
- पहले तीन चरण 18 मार्च से 18 अप्रैल 1948 के भीतर, यानी एक महीने में बने।
- मत्स्य संघ की राजधानी अलवर थी, पर उद्घाटन भरतपुर में हुआ; नाम के.एम. मुन्शी के सुझाव पर रखा गया।
- पूर्व राजस्थान 25 मार्च 1948 को कोटा में बना — 9 रियासतें और 2 ठिकाने; नौ का सूत्र 3 + 3 + 1 + 2।
- संयुक्त राजस्थान में माणिक्यलाल वर्मा प्रधानमंत्री बने, राजधानी उदयपुर रही और महाराणा भूपालसिंह आजीवन राजप्रमुख बने।
- प्रिवीपर्स का सूत्र 20 = 10 + 5 + 5 — यानी प्रिवीपर्स 10 लाख, राजप्रमुख भत्ता 5 लाख और धर्मार्थ 5 लाख रु.।
- वृहद् राजस्थान 30 मार्च 1949 को जयपुर में बना, राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वितीय और मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री रहे; इसी से राजस्थान दिवस 30 मार्च को मनता रहा।
- राजधानी तय करने वाली समिति के अध्यक्ष बी.आर. पटेल थे; रिपोर्ट 27 मार्च 1949 को आई और जोधपुर को न्याय विभाग व बीकानेर को शिक्षा विभाग मिला।
- संयुक्त वृहद् राजस्थान 15 मई 1949 को बना (18 रियासतें + 3 ठिकाने); इस चरण में कोई उद्घाटन समारोह नहीं हुआ।
अगले भाग में सिरोही का बँटवारा, 1 नवम्बर 1956 का पुनर्गठन, आज के 41 ज़िले और रियासतों के रिकॉर्ड व प्रिवीपर्स का पूरा ब्योरा।
पिछला भाग: राजस्थान का एकीकरण: सात चरण एक नज़र में एवं एकीकरण से पहले
अगला भाग: राजस्थान का एकीकरण: सिरोही और अन्तिम रूप एवं रियासतों के रिकॉर्ड व प्रिवीपर्स
इन्हें भी पढ़ें: प्रजामण्डल व स्वतंत्रता आन्दोलन · राज्यपाल
पूरी श्रृंखला: राजस्थान का इतिहास — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय
इस विषय का माइंड मैप ➜Complete Rajasthan GK पास देखें



