जनजाति — शुरुआती विद्रोह – Rajasthan History Chapter 43

जनजाति और किसान आन्दोलनों की पृष्ठभूमि, कालक्रम तथा 1818 से 1882 तक के मेर, भील और मीणा विद्रोह।

10 min read Updated Notes in Hindi
In this chapter (12 sections)
  1. एक नज़र में
  2. कालक्रम
  3. जनजाति आन्दोलन — तालिका
  4. किसान आन्दोलन — तालिका
  5. आँकड़ों में
  6. जनजाति — शुरुआती विद्रोह
  7. मेर आन्दोलन
  8. पहला भील विद्रोह
  9. दमन के लिए बने सैन्य दल
  10. जहाजपुर का मीणा विद्रोह
  11. भोमट, बाँसवाड़ा व बारापाल
  12. रैपिड फायर तथ्य

आन्दोलनों की जड़ समझनी हो तो देखिए कि बोझ किस-किस तरफ़ से बढ़ा — शासक, जागीरदार, महाजन और ऊपर से अंग्रेज़ी दख़ल। इसी दबाव से जनजाति और किसान, दोनों धाराएँ फूटीं। इस भाग में पृष्ठभूमि, कालक्रम और दोनों तालिकाओं के बाद मेर आन्दोलन, पहला भील विद्रोह, दमन के लिए बने सैन्य दल, जहाजपुर का मीणा विद्रोह तथा भोमट, बाँसवाड़ा व बारापाल के विद्रोह क्रम से दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — जनजाति एवं किसान आन्दोलन, 9 चॉक-बोर्ड चित्र, 1 नक्शे, 9 चार्ट, 26 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
माइंड मैप खोलें ➜

1. एक नज़र में

अंग्रेज़ों के आने से पहले भी जनता पर बोझ था, पर अब शासक, जागीरदार और साहूकार तीनों मिलकर निचोड़ने लगे और ऊपर से अंग्रेज़ी दख़ल जुड़ गया। इसी से राजस्थान में दो धाराएँ फूटीं — जनजाति आन्दोलन (मेर, भील, मीणा) और किसान आन्दोलन।

जनजाति आन्दोलन — क्यों

  • भील, मीणा, सहरिया और गरासिया मुख्यतः राज्य के दक्षिण व दक्षिण-पूर्व में बसे हैं — मेवाड़, बागड़, हाड़ौती और ढूँढाड़ में।
  • शासकों, जागीरदारों और महाजनों ने इनका शोषण किया; अंग्रेज़ों ने उनके परम्परागत अधिकार और जीवन-शैली में हाथ डाला।
  • फलस्वरूप 1818 से देश की आज़ादी तक मेर, भील और मीणा बार-बार उठे।

किसान पर बोझ कैसे चढ़ता गया

  1. अंग्रेज़ों की छत्रछाया में शासक बाहरी हमलों से निश्चिन्त
  2. शासक पर तय रकम (खिराज) अंग्रेज़ों को देने का भार
  3. जागीरदारों से तय कर “छटूँद”

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • जागीरी इलाक़ों में शासक शायद ही दखल देता था; जागीरदार जब चाहे लगान बढ़ा देता था — इसलिए जागीरी क्षेत्र के किसान सबसे ज़्यादा लुटे।
  • बेगार, लाग-बाग (अनेक अनौपचारिक कर), ऊँची लगान-दर और महाजन का कर्ज़ — चारों साथ चलते थे।

याद रखें: सारांश: राजस्थान के अधिकतर किसान आन्दोलनों की कमान बाहर से आए नेताओं ने सँभाली। बिजौलिया, बेगूँ और बूँदी में अजमेर के राजस्थान सेवा संघ की बड़ी भूमिका रही; शेखावाटी-सीकर में रामनारायण चौधरी, ठाकुर देशराज और अखिल भारतीय जाट महासभा के नेताओं का हाथ रहा।

2. कालक्रम

काल / क्रमघटनाविवरण
1818मेर आन्दोलन आरम्भ · पहला भील विद्रोहझाक समझौता (विल्डर); मेवाड़ की सहायक संधि 13 जनवरी
1822मेरवाड़ा रेजीमेंटमुख्यालय ब्यावर
1841मेवाड़ भील कोरखैरवाड़ा
1851–60जहाजपुर का मीणा विद्रोहजनवरी 1855 आत्मसमर्पण · 1860 में अन्तिम दमन

… शेष 12 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

3. जनजाति आन्दोलन — तालिका

आन्दोलनवर्षक्षेत्रनेताकारणपरिणाम
मेर1818–21मेरवाड़ामेर मुखियाअंग्रेज़ों का पूर्ण नियन्त्रण थोपने का प्रयासजनवरी 1821 में संयुक्त सेना ने दबाया; 1822 में मेरवाड़ा रेजीमेंट
पहला भील विद्रोह1818–28भोमट (उदयपुर)दौलतसिंह, गोविन्दासहायक संधि, कर, रखवाली-बोलाई छिनना1823 में दमन; 1826 में बोलाई का अधिकार; 1828 में दौलतसिंह का आत्मसमर्पण
लिम्बाराबारू1825डूँगरपुरभील मुखियाभोमट की देखा-देखी12 मई 1825 की संधि — कई कर लगे
भोमट1839–42भोमटभील सरदारमहाराणा सरदारसिंह की लगान-वसूलीमेवाड़ भील कोर से दमन

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

4. किसान आन्दोलन — तालिका

आन्दोलनवर्षस्थाननेताकारणपरिणाम
बिजौलिया1897–1941भीलवाड़ा (मेवाड़)सीताराम दास → पथिक → माणिक्यलाल वर्मा84 लागें, चँवरी, तलवार बँधाई, युद्ध-चन्दा1922 का समझौता; 1941 में हल
बेगूँ1921–25चित्तौड़गढ़रामनारायण चौधरी, पथिक53 लागें व बेगार53 में से 34 लागें ख़त्म; बेगार बन्द
बूँदी (बरड़)1922–23बूँदीनयनूराम शर्मा, हरिभाई किंकरऊँची लगान, 25 तरह की लाग-बागडाबी गोलीकाण्ड; कुछ रियायतें
बूँदी गुर्जर1936–43बूँदीगुर्जर-मीणा किसाननुक्ता-पाबन्दी, नए कर1943 में चराई कर में छूट

5. आँकड़ों में

ट्रिक: तीन “जलियाँवाला” — मानगढ़ 1913 (भारत का प्रथम), नीमड़ा 1922 (दूसरा; गुजरात का) और नीमूचाणा 1925 (“राजस्थान का जलियाँवाला”; गाँधी: “दोहरी डायरशाही”)।

6. जनजाति — शुरुआती विद्रोह

काल / क्रमघटनाविवरण
1818–21मेर आन्दोलनमेरवाड़ा
1818–28पहला भील विद्रोहउदयपुर राज्य — भोमट
1839–42भोमट का आन्दोलनसरदारसिंह की लगान-वसूली

ट्रिक: सैन्य दलों का क्रम — मेरवाड़ा (1822) → जोधपुर लीजन (1835) → मेवाड़ भील कोर (1841) → देवली रेजीमेंट।

7. मेर आन्दोलन

  • मेरवाड़ा मेवाड़, मारवाड़ और अजमेर — तीनों के बीच बँटा था; किसी एक का सीधा राजनीतिक-प्रशासनिक नियन्त्रण नहीं था। मेर पास के इलाक़ों में लूटपाट से गुज़ारा करते थे।
  • कारण ➜ अंग्रेज़ों ने मेरों को पूरी तरह अपने क़ाबू में लेना चाहा; यही कोशिश विद्रोह की चिनगारी बनी।
काल / क्रमघटनाविवरण
1818झाक गाँव का समझौताअंग्रेज़ सुपरिन्टेन्डेंट एफ. विल्डर और मेरों में; मेरों ने लूटपाट न करने की सहमति दी
मार्च 1819विल्डर का आक्रमणमेरों पर वादाख़िलाफ़ी का इल्ज़ाम लगा विल्डर की फ़ौज मेरवाड़ा में घुसी — मेर क्रोधित हुए
1820झाक में हमलामेरों ने झाक की पुलिस चौकियों पर हमला कर सिपाहियों की जान ले ली

मेरवाड़ा रेजीमेंट (मेरवाड़ा बटालियन) में मेर सैनिक ही भर्ती किए गए — पहले जिनसे ख़तरा था, उन्हीं को वर्दी देकर इलाक़ा सँभलवाया गया। गठन डेविड ऑक्टरलोनी के आदेश पर माना जाता है।

8. पहला भील विद्रोह

  • मेवाड़ में मराठा दखल ने महाराणा की सैनिक कमज़ोरी उजागर कर दी थी; भोमट के भील सरदारों ने इसका फ़ायदा उठाकर लूटमार शुरू की।
  • 13 जनवरी 1818 को महाराणा भीमसिंह ने अंग्रेज़ों से सहायक संधि की — आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार अंग्रेज़ों को मिल गया; उनकी पाबन्दियों से भील विद्रोह पर उतर आए।
  • यह राजस्थान का पहला भील विद्रोह था और उदयपुर राज्य में ही शुरू हुआ।
क्रम1818 में भील विद्रोह के कारण
1अंग्रेज़ों ने भीलों पर कर थोपने की कोशिश की
2अंग्रेज़ों की भील-दमन नीति
3उदयपुर के भीतरी शासन की बागडोर कर्नल टॉड ने सँभाल ली और भोमट के भीलों पर अंकुश लगाने की चेष्टा की
काल / क्रमघटनाविवरण
जनवरी–दिसम्बर 1823दमनकर्नल लूम्बे की अगुवाई में अंग्रेज़ों व उदयपुर की संयुक्त सेना
12 मई 1825लिम्बाराबारू संधिभोमट से प्रेरित डूँगरपुर के लिम्बाराबारू के भीलों का विद्रोह; संधि में अंग्रेज़ों ने कई कर थोप दिए
जनवरी 1826दौलतसिंह व गोविन्दागरासिया-भील मुखियाओं ने थानों पर हमला कर सैकड़ों सिपाही मारे; कैप्टन ब्लैक ने स्थिति सँभाली

याद रखें: रखवाली = चौकीदारी कर, बोलाई = रास्ते से गुज़रते माल/यात्री पर सुरक्षा कर — दोनों भीलों के अपने हक़ थे, जिन्हें टॉड ने छीना।

9. दमन के लिए बने सैन्य दल

दलस्थापनामुख्यालयकाम / विशेष
मेरवाड़ा रेजीमेंट1822ब्यावरकैप्टन हॉल के नेतृत्व में; मेर व मीणा उपद्रव शान्त करने को; भर्ती मेर सैनिकों की
जोधपुर लीजन1835एरिनपुरा (तत्कालीन सिरोही राज्य)भीलों के लगातार विद्रोह पर क़ाबू के लिए बनी सैनिक टुकड़ी
मेवाड़ भील कोरजनवरी 1841 (स्वीकृति अप्रैल 1841)खैरवाड़ाभोमट के भील, भोमिया व गरासिया सरदारों पर नियन्त्रण; गवर्नर जनरल ने अपनी परिषद की सलाह से मंज़ूरी दी; पहले कमाण्डर विलियम हण्टर

10. जहाजपुर का मीणा विद्रोह

काल / क्रमघटनाविवरण
1851विद्रोह की शुरुआतमहाराणा ने जहाजपुर परगने में हाकिम रघुनाथसिंह मेहता भेजा, जो धन कमाने में लगा रहा; प्रशासनिक सुधारों के नाम पर धन-वसूली के विरोध में मीणा उठे
1851 के बादलुहारी पर चढ़ाईउदयपुर की सेना ने मुखियाओं के गाँव छोटी लुहारी व बड़ी लुहारी उजाड़े; मीणा सपरिवार पहाड़ियों में छिपे; आसपास की रियासतों से लगभग 5,000 मीणा जहाजपुर आ जुटे
दिसम्बर 1854अंग्रेज़ सेना पहुँचीए.जी.जी. के साथ मेवाड़-हाड़ौती के राजनीतिक एजेन्टों के अधीन

11. भोमट, बाँसवाड़ा व बारापाल

भोमट का भील आन्दोलन (1839–42)

  • महाराणा सरदारसिंह ने 1839 में भोमट से लगान उगाहने को सेना भेजी, तो भील भड़क उठे।
  • सहायता के लिए महाराणा उदयपुर के अंग्रेज़ एजेन्ट के पास गए, पर उसने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह मेवाड़ का अपना मामला है।
  • जनवरी 1841 में भीलों, भोमियों और गरासिया सरदारों पर नज़र रखने को मेवाड़ भील कोर बनी; इसी कोर की सहायता से आन्दोलन दबाया गया।

बाँसवाड़ा में भील विद्रोह (1872–75)

  • 1868 के बाँसवाड़ा-अंग्रेज़ समझौते ने अंग्रेज़ों को भीलों को कुचलने की खुली छूट दे दी थी।
  • भील राज्य की सत्ता मानने की निशानी के तौर पर बराड़ नाम का कर भरते थे; अंग्रेज़ों ने इसकी रक़म चढ़ा दी।
  • बराड़ को लेकर 1872–73 में सोढलपुर के भील मुखिया दल्ला महारावल से भिड़ गए; अंग्रेज़ पॉलिटिकल ऑफ़िसर के सुझाव पर महारावल ने उनसे सुलह कर ली।

बारापाल का विद्रोह (1881–82)

  • उदयपुर राज्य व ब्रिटिश सरकार ने भीलों के महुए की शराब मावड़ी निकालने पर रोक लगाई; भीलों के आराध्य रिखबदेव (ऋषभदेव) का मन्दिर राज्य ने सीधे अपने हाथ में ले लिया।
  • रिखबदेव के पुजारी खेमराज मण्डारी ने भीलों को उकसाया; महाराणा सज्जनसिंह ने अमानसिंह (मामा) और एक अंग्रेज़ प्रतिनिधि की अगुवाई में सेना बारापाल गाँव भेजी।
  • मार्च 1881 में घमासान लड़ाई हुई; उन्नीसवीं सदी में भीलों का इतना ख़ूनी विद्रोह दूसरा नहीं हुआ (सबसे भयानक)। नेता: बीलखपाल का गामेती नीमा, पीपली का खेमा, सगातरी का जोयता।
विद्रोहकर / मुद्दानेताअन्त
भोमट 1839–42लगान-वसूलीभील सरदारमेवाड़ भील कोर
बाँसवाड़ा 1872–75बराड़ करदल्ला (सोढलपुर)महारावल से समझौता
बारापाल 1881–82मावड़ी, रिखबदेव मन्दिरनीमा, खेमा, जोयता; खेमराज मण्डारी25 अप्रैल 1881 — आधा बराड़ माफ़

12. रैपिड फायर तथ्य

  • मेर आन्दोलन ➜ 1818–21, मेरवाड़ा; 1818 में झाक समझौता (विल्डर)
  • मेरवाड़ा रेजीमेंट ➜ 1822, मुख्यालय ब्यावर; भर्ती मेर सैनिकों की
  • पहला भील विद्रोह ➜ 1818–28, भोमट (उदयपुर); नेता दौलतसिंह व गोविन्दा
  • मेवाड़ की सहायक संधि ➜ 13 जनवरी 1818, महाराणा भीमसिंह
  • लिम्बाराबारू संधि ➜ 12 मई 1825, डूँगरपुर
  • जोधपुर लीजन ➜ 1835, एरिनपुरा
  • मेवाड़ भील कोर ➜ जनवरी 1841, खैरवाड़ा; पहले कमाण्डर विलियम हण्टर
  • जहाजपुर का मीणा विद्रोह ➜ 1851 से शुरू; जनवरी 1855 में आत्मसमर्पण
  • बारापाल का विद्रोह ➜ 1881–82; उन्नीसवीं सदी में भीलों का सबसे भयानक संघर्ष

अगले भाग में भीलों में जागृति लाने वाले गोविन्द गिरी और मोतीलाल तेजावत, आपराधिक जाति घोषित मीणाओं की लड़ाई और बिजौलिया आन्दोलन का शुरुआती दौर।

पिछला भाग: सामाजिक एवं राजनीतिक संगठन: राजनीतिक संस्थाएँ (भाग 2) एवं राजस्थान के समाचार-पत्र

अगला भाग: जनजाति एवं किसान आन्दोलन: गोविन्द गिरी व तेजावत एवं बिजौलिया, बेगूँ व बूँदी (भाग 1)

इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान में 1857 की क्रांति · राजस्थान की जनजातियाँ

पूरी श्रृंखला: राजस्थान का इतिहास — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न जनजाति एवं किसान आन्दोलन के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
इस विषय का माइंड मैप ➜Complete Rajasthan GK पास देखें

Useful for these exams