पौराणिक स्वरूप व जनपद युग: आर्य व पौराणिक युग एवं जनपद युग – Rajasthan History Chapter 7

वैदिक बसावट से जनपद युग तक — आर्यों का प्रवेश, मरु-जांगल देश और मत्स्य, मालव, शिवि, यौधेय की राजधानियाँ।

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In this chapter (13 sections)
  1. एक नज़र में
  2. आर्य व पौराणिक युग
  3. आर्यों का प्रवेश
  4. मरु व जांगल देश
  5. रामायण–महाभारत के स्थल
  6. जनपद युग
  7. 16 महाजनपद व नए कबीले
  8. मत्स्य जनपद
  9. मालव जनपद
  10. शिवि जनपद
  11. यौधेय जनपद
  12. शूरसेन · कुरु · शाल्व व अन्य
  13. रैपिड फायर तथ्य

राजस्थान का आरम्भिक इतिहास पढ़ते समय हर पड़ाव को उसकी निशानी से जोड़ना सबसे सहायक है — कोई सिक्का, कोई लेख या कोई खंडहर। इस भाग में वैदिक बसावट, आर्यों का प्रवेश, मरु व जांगल देश और रामायण–महाभारत के स्थल पहले आते हैं। फिर जनपद युग शुरू होता है, जिसमें मत्स्य, मालव, शिवि, यौधेय और शूरसेन-कुरु जैसे जनपदों के क्षेत्र और राजधानियाँ एक-एक कर समझाई गई हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — पौराणिक स्वरूप व जनपद युग, 5 चॉक-बोर्ड चित्र, 4 चार्ट, 24 फ्लैशकार्ड और 13 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. एक नज़र में

राजस्थान का आरम्भिक इतिहास आठ पड़ावों में चलता है: वैदिक बसावट, जनपद, मौर्य, यूनानी, शक–कुषाण, गुप्त, हूण और वर्धन। हर पड़ाव ने कुछ सिक्के, शिलालेख या खंडहर छोड़े — इन्हीं से उस काल की जानकारी मिलती है।

काल / क्रमघटनाविवरण
आर्य कालसरस्वती–दृषद्वती के तटआर्य उत्तरी राजस्थान में बसे; यही भाग ब्रह्मावर्त में आता था।
600–325 ई.पू.16 महाजनपदइनमें मत्स्य राजस्थान में था; कुरु, शूरसेन और अवन्ति के अंश भी यहाँ पड़ते थे।
327 ई.पू.सिकन्दर का आक्रमणमालव, शिवि, यौधेय, अर्जुनायन राजस्थान आए।
322 ई.पू.चन्द्रगुप्त मौर्यसारा राजस्थान मौर्य साम्राज्य का अंग बना।

… शेष 7 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: क्रम एक वाक्य में: मौर्य ने जमाया, यूनानी आए, कुषाणों ने फैलाया, गुप्तों ने सँवारा, हूणों ने उजाड़ा, हर्ष ने जोड़ा।

2. आर्य व पौराणिक युग

पौराणिक काल की रूपरेखा

  1. आर्य सरस्वती-घाटी में आए
  2. मरु प्रदेश पहला जनतंत्र
  3. कुरु · मद्र · जांगल जनपद

याद रखें: पौराणिक काल के राजस्थान में तीन नाम बार-बार आते हैं — मरु प्रदेश, जांगल देश और मत्स्य प्रदेश।

3. आर्यों का प्रवेश

  • आर्य सिन्धु, रावी, सतलज और गंगा–यमुना के दोआब वाले इलाक़ों से निकले और सुरक्षित, उपजाऊ ज़मीन की तलाश में सरस्वती नदी की घाटियों तक पहुँचे।
  • सरस्वती के किनारे ही ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना हुई।
  • ऋग्वेद में सरस्वती और दृषद्वती का वर्णन है — माना जाता है कि ये दोनों राजस्थान से होकर बहती थीं।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

आर्यों का मार्ग

  1. सिन्धु · रावी · सतलज · गंगा–यमुना दोआब
  2. सरस्वती की घाटियाँ
  3. उत्तरी राजस्थान (सरस्वती–दृषद्वती तट)

ट्रिक: दो वैदिक नदियाँ, दो नाम — सरस्वती और दृषद्वती; इन दोनों के बीच का प्रदेश ब्रह्मावर्त।

4. मरु व जांगल देश

  • मरु और धन्व का अर्थ एक ही है — रेगिस्तान। दोनों शब्द जोधपुर संभाग के मरुस्थल के लिए चले।
  • नाम बदलने का क्रम: मरु → मरुवार → मारवाड़ (जोधपुर क्षेत्र)।
  • मरु प्रदेश आर्यों का आरम्भिक जनतंत्र था। बाद में इसी के विस्तार में कुरु, मद्र और जांगल जनपद बने।
प्रदेशआज का क्षेत्रविशेष
मरु प्रदेशबीकानेर, नागौर, डीडवाना–कुचामन, चूरू, गंगानगर, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, फलौदी के कुछ भागआर्यों का प्रारम्भिक जनतंत्र
जांगल देशबीकानेर, नागौर, जोधपुर और आसपासमहाभारत काल का नाम; राजधानी अहिछत्रपुर (आज के नागौर से मिलाई जाती है)
कुरु जांगला · मादेय जांगलाजांगल देश के ही अन्य नामदोनों रूप साहित्य में मिलते हैं

रोचक तथ्य: बीकानेर के राजा इसी देश के स्वामी होने से स्वयं को “जांगलधर बादशाह” कहते थे।

  • दोनों महाकाव्यों के युग में राजस्थान के भूभाग पर मरुप्रदेश, जांगल देश और मत्स्य प्रदेश मौजूद थे।
  • महाभारत की कथा में बीकानेर वाला जांगल देश कौरव–पांडवों के शासन में दिखता है; मत्स्य उनका साथी या अधीन राज्य था।

5. रामायण–महाभारत के स्थल

स्थानआज का क्षेत्रजुड़ी कथा
वाल्मीकि आश्रमकेलवाड़ा (बारां)राम के परित्याग के बाद सीता ने निर्वासन का कुछ समय यहाँ बिताया; सीताकुण्ड इसका साक्ष्य माना जाता है
वशिष्ठ आश्रमआबू पर्वत (सिरोही)श्रीराम के गुरु वशिष्ठ का आश्रम
मंडोरजोधपुरमंडोर की राजकुमारी मंदोदरी का रावण से विवाह — रावण–मंदोदरी कथा इसी स्थान से जुड़ी है

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

6. जनपद युग

आर्य संस्कृति के बाद राजस्थान में भी दूसरे प्रदेशों की तरह जनपदों का उदय हुआ। उस समय की जानकारी सिक्कों, गहनों, अभिलेखों और खंडहरों से मिलती है। नीचे के चित्र में कौन-सा जनपद राजस्थान के किस भाग में था, यह दिखाया गया है।

जनपदआज का क्षेत्रराजधानी / केन्द्र
मत्स्यदक्षिणी–पश्चिमी अलवर, जयपुर, कोटपुतली–बहरोड़ तथा भरतपुर, डीग व धौलपुर के कुछ हिस्सेबैराठ (विराटनगर); प्राचीन राजधानी उपाप्लव्य
मालवटोंक से फैलकर अजमेर, मेवाड़, प्रतापगढ़, झालावाड़ तकनगर / कर्कोट नगर (टोंक)
शिविउदयपुर–चित्तौड़ (मेवाड़) क्षेत्रमध्यमिका (नगरी)
यौधेयश्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ (उत्तर)गण का एक केन्द्र रोहतक (हरियाणा)

7. 16 महाजनपद व नए कबीले

600 से 325 ई.पू. के बीच भारत में 16 महाजनपद थे, जिनमें मगध सबसे शक्तिशाली था। इनमें से केवल मत्स्य राजस्थान के भीतर था।

  • राजस्थान के कई भाग कुरु, शूरसेन और अवन्ति महाजनपदों में आते थे।
  • 327 ई.पू. में सिकन्दर के आक्रमणों से घबराकर पश्चिमोत्तर सीमा के कबीले — मालव, शिवि, यौधेय, अर्जुनायन — अपनी सुरक्षा के लिए राजस्थान चले आए; ये साहस और शौर्य के लिए जाने जाते थे।
  • इस तरह राजस्थान का पूर्वी हिस्सा जनपद-शासन का पहला क्षेत्र बना।

8. मत्स्य जनपद

  • मत्स्य नाम की आर्य जनजाति का सबसे पुराना ज़िक्र ऋग्वेद में है; आगे चलकर शतपथ ब्राह्मण तथा कौषीतकी उपनिषद भी इसे याद करते हैं।
  • महाभारत में मत्स्य की गिनती भारत के प्रमुख जनपदों में है। माना जाता है कि दक्षिण में चम्बल के बीहड़ों तक और पश्चिम की ओर पंजाब वाली सरस्वती के वनों तक इसका फैलाव था।
  • राजधानी बैराठ (विराटनगर) — आज का बैराठ कोटपुतली–बहरोड़ ज़िले में है; पुरानी राजधानी उपाप्लव्य।

बैराठ और पांडव

  • राजा विराट का राज्य यहीं था; पांडवों ने अज्ञातवास का 13वाँ वर्ष वेश बदलकर विराट के दरबार में बिताया।
  • अर्जुन ने छद्म वेश में विराट की पुत्री उत्तरा को नृत्य सिखाया।
  • स्थल-चिह्न: केशवराय मंदिर, पंचखण्ड पर्वत, भीम तालाब।

मत्स्य का उत्थान–पतन

  1. ऋग्वेद में पहला उल्लेख
  2. महाभारत में प्रमुख जनपद
  3. चेदि आक्रमण में पराजय
  • निकट के शाल्वों से सीमा को लेकर मत्स्यों का अक्सर संघर्ष होता था।
  • चेदि जनपद ने मत्स्यों को बुरी तरह हराया; बाद में उभरते मगध ने इसे अपने साम्राज्य में मिला लिया, फिर मौर्यों का अधिकार रहा।
  • मत्स्य क्षेत्र में बौद्ध धर्म की पकड़ सबसे गहरी रही।

9. मालव जनपद

  • महाभारत में भी मालवों का उल्लेख है। मूल स्थान रावी–चिनाब के संगम का इलाक़ा था; सिकन्दर और फिर चन्द्रगुप्त के प्रहारों से उखड़कर वे राजस्थान आए।
  • ताक़त का मुख्य अड्डा नगर (कर्कोट नगर), टोंक; मालव सिक्के और ताम्रपत्र यहीं से निकले।
  • समय के साथ झालावाड़ से अजमेर तक ➜ टोंक, मेवाड़, प्रतापगढ़ समेत — इनका प्रभाव फैल गया।

मालव — घटनाक्रम

काल / क्रमघटनाविवरण
327 ई.पू. के आसपासराजस्थान में आगमनरावी–चिनाब छोड़कर जयपुर–टोंक की ओर।
दूसरी सदी ई. (लगभग)नहपान व ऋषभदत्तमालवों ने पुष्कर के भद्रों पर हमला किया; शक क्षत्रप नहपान ने दामाद ऋषभदत्त को भेजा, जिसने मालवों को हराया। इसके बाद मालव शकों और कुषाणों के अधीन हुए।
225 ई.नांदसा यूप स्तम्भ लेख (भीलवाड़ा)राजा श्रीसोम ने क्षत्रपों को हराकर षष्ठीरात्र यज्ञ (61 दिन) कराया।
  • रैढ़ (टोंक) ➜ लेड सील — ब्राह्मी में मालव जनपद का नाम
  • नांदसा ➜ भीलवाड़ा — यूप स्तम्भ लेख, 225 ई.
  • नगर ➜ टोंक — 6000 सिक्के

10. शिवि जनपद

  • मूल राजधानी शिवपुर थी, जिसकी पहचान आज के पाकिस्तान के झंग क्षेत्र के शोरकोट से की जाती है।
  • सिकन्दर के हमले के डर से पंजाब के दक्षिणी हिस्से की शिवि जनजाति राजस्थान आई और उदयपुर (मेवाड़) में रम गई।
  • तब उदयपुर–चित्तौड़ के इर्द-गिर्द की पट्टी शिवि जनपद के नाम से पहचानी जाती थी।
  • यवनों (यूनानियों) ने मध्यमिका पर घेरा डाला — इसका उल्लेख पतंजलि के महाभाष्य में आता है।
  • मध्यमिका का सबसे पुराना उल्लेख महाभारत में मिलता है।

शिवि जनपद की यात्रा

  1. शिवपुर (शोरकोट, झंग)
  2. सिकन्दर का भय
  3. मेवाड़ — उदयपुर/चित्तौड़

11. यौधेय जनपद

  • सबसे उत्तर का बलशाली गणतंत्री कबीला — श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ इसके इलाक़े थे।
  • राज्य सहारनपुर (उ.प्र.) तक फैला था — वहाँ से इनकी मुद्राएँ मिली हैं।
  • पाणिनि की अष्टाध्यायी में यौधेय को कुलीनतंत्री गण और आयुधजीवी संघ (हथियार से जीविका वाले) कहा गया है।
पक्षविवरण
शासन-पद्धतिअर्द्ध-राजसत्तात्मक; प्रमुख नेता महाराज सेनापति
प्रसिद्ध नेताकुमार — एक शक्तिशाली नेता
उपास्यकार्तिकेय और चामुण्डा — युद्धप्रिय होने के कारण

जूनागढ़ अभिलेख बताता है कि रुद्रदामन ने उत्तरी राजस्थान के इस मज़बूत गणराज्य की ताक़त तोड़ी।

12. शूरसेन · कुरु · शाल्व व अन्य

जनपदविवरण
शूरसेनप्राचीन राज्य, महाभारत में उल्लेख; मुख्यतः उत्तर प्रदेश में। राजधानी मथुरा — भगवान कृष्ण का सम्बन्ध। पूर्वी अलवर, भरतपुर, डीग, करौली और धौलपुर इसमें थे।
कुरुउत्तरी अलवर, यानी खैरथल–तिजारा की पट्टी। राजधानी इन्द्रप्रस्थ (दिल्ली क्षेत्र); महाभारत काल में हस्तिनापुर।
राजन्यभरतपुर और डीग।
  • अर्जुनायन-युग में बौद्ध मत फैला हुआ था; यौधेय और मालवों के आने पर यहाँ फिर ब्राह्मण धर्म जमा।
  • विदेशी क्षत्रपों को हराने में अर्जुनायन मालवों के सहयोगी रहे।

13. रैपिड फायर तथ्य

  • आर्यों की बसावट ➜ सरस्वती–दृषद्वती के तट, उत्तरी राजस्थान; इन दोनों नदियों के बीच का भाग ब्रह्मावर्त
  • 16 महाजनपदों में राजस्थान के भीतर ➜ केवल मत्स्य
  • मत्स्य की राजधानी ➜ बैराठ (विराटनगर); प्राचीन राजधानी उपाप्लव्य
  • मालवों का केन्द्र ➜ नगर (कर्कोट नगर), टोंक
  • शिवि जनपद की राजधानी ➜ मध्यमिका (नगरी)
  • यौधेय ➜ श्रीगंगानगर–हनुमानगढ़ का क्षेत्र; जूनागढ़ अभिलेख के अनुसार रुद्रदामन ने इनकी ताक़त तोड़ी
  • जांगल देश की राजधानी ➜ अहिछत्रपुर; बीकानेर के राजा स्वयं को «जांगलधर बादशाह» कहते थे
  • सिकन्दर का आक्रमण (327 ई.पू.) ➜ मालव, शिवि, यौधेय, अर्जुनायन राजस्थान आए
  • शूरसेन व कुरु की राजधानी ➜ क्रमशः मथुरा और इन्द्रप्रस्थ

अगले भाग में मौर्य शासन और यूनानी, शक व कुषाण आक्रमण, फिर गुप्त व हूण, वर्धन काल और राजपूत काल की रियासतों की स्थापना।

पिछला भाग: प्राचीन सभ्यताएँ व पुरास्थल: लौह युग एवं बैराठ (विराटनगर)

अगला भाग: पौराणिक स्वरूप व जनपद युग: मौर्य व विदेशी आक्रमण एवं गुप्त व हूण

इन्हें भी पढ़ें: प्राचीन सभ्यताएँ व पुरास्थल · राजपूतों की उत्पत्ति

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