राजस्थान के अन्य महत्त्वपूर्ण राजवंश: पाँच अन्य रियासतें (भाग 1) – Rajasthan History Chapter 31

जैसलमेर के भाटियों का शेष क्रम, करौली, चावड़ा, वरीक-औलीकर वंश और टोंक, झालावाड़, अलवर की रियासतें।

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In this chapter (11 sections)
  1. घड़सी से अमरसिंह तक
  2. अखैसिंह से गिरधरसिंह तक
  3. करौली · चावड़ा · प्राचीन वंश
  4. करौली के यदुवंशी
  5. चावड़ा राजवंश
  6. वरीक व औलीकर वंश
  7. पाँच अन्य रियासतें
  8. टोंक का मुस्लिम राज्य
  9. झालावाड़ का झाला वंश
  10. अलवर का कछवाहा वंश
  11. रैपिड फायर तथ्य

जैसलमेर की कथा में राजधानी और शासकों के साथ यह भी पूछा जा सकता है कि कौन-सी रियासत किस बात में अकेली थी। इस भाग में घड़सी से गिरधरसिंह तक के भाटी शासक पूरे होते हैं, फिर करौली, चावड़ा, वरीक व औलीकर वंश आते हैं। अन्त में टोंक, झालावाड़ और अलवर की रियासतें हैं। «पहली», «एकमात्र» और «आख़िरी» जैसे शब्दों वाले तथ्य अलग से पक्के कर लें।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के अन्य महत्त्वपूर्ण राजवंश, 10 चॉक-बोर्ड चित्र, 11 चार्ट, 42 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. घड़सी से अमरसिंह तक

शासककालमुख्य बातें
घड़सी1343–1361घड़सीसर सरोवर (गड़ीसर तालाब)
लक्ष्मण (केहर के पुत्र)1396–1436दुर्ग में लक्ष्मीनाथ मन्दिर; शासक स्वयं को लक्ष्मीनाथ का प्रतिनिधि मानकर राज चलाते थे
बैरीसिंह1436–1447लक्ष्मण का पुत्र
जैतसिंह द्वितीय1506–1528—

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

उपाधियाँ

  1. राव
  2. रावल (852, देवराज)
  3. महारावल (1613–27, कल्याण)

अकबर से सम्बन्ध

  1. हरराय 1561
  2. नागौर दरबार 1570
  3. पुत्री का विवाह अकबर से

ट्रिक: 1550 अर्द्ध साका (लूणकरण) → 1570 नागौर दरबार (हरराय) → 1688 अमर सागर (अमरसिंह)।

  • अर्द्ध साका ➜ 1550 · अमीर अली (कंधार)
  • पिंगल शिरोमणि ➜ रावल हरराय
  • डोडिया ➜ ताँबे की मुद्रा 1659

2. अखैसिंह से गिरधरसिंह तक

शासककालमुख्य बातें
अखैसिंह1722–17611756 में टकसाल (मुहम्मदशाही व अखैशाही सिक्के); अखैपोल (मुख्य प्रवेश-द्वार) व अखैविलास महल
मूलराज द्वितीय1761–1819किशनगढ़ की राजकुमारी रूपकंवर से 1772 में शादी; कम्पनी-संधि 12 दिसम्बर 1818 की; साहित्य-प्रेमी — लक्ष्मी कीर्ति संवाद
गजसिंह1820–18461828 में पालीवालों का जैसलमेर-त्याग; बासनपीर का युद्ध (1828) — बीकानेर की सेना हारी
रणजीतसिंह1846–18641857 में खुलकर अंग्रेज़ों का साथ; गोकुल नाथ भट्ट — रणजीत रत्नमाला; भट्टि वंश प्रशस्ति

… शेष 4 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

काल / क्रमघटनाविवरण
1756टकसाल की स्थापनाअखैसिंह
12 दिसम्बर 1818ईस्ट इंडिया कम्पनी से संधिमूलराज द्वितीय
1828पालीवालों का जैसलमेर-त्याग; बासनपीर का युद्धगजसिंह
19 अक्टूबर 1865बैरीशाल गद्दी परकर्नल ईडन के समझाने पर

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

याद रखें: बासनपीर (1828): जैसलमेर जीता, बीकानेर हारा — इसी वर्ष पालीवालों ने जैसलमेर छोड़ा।

3. करौली · चावड़ा · प्राचीन वंश

जैसलमेर के अतिरिक्त यादवों का दूसरा राज्य करौली में था। कहा जाता है कि इस वंश की जड़ चन्द्रवंशी ययाति के बेटे यदु में है; इस राजघराने का दावा है कि वह मथुरा की शूरसेनी शाखा से निकला और इसी राह श्रीकृष्ण से जुड़ता है।

4. करौली के यदुवंशी

  • जनपद-काल में इस भू-भाग का एक हिस्सा मत्स्य में और बाक़ी शूरसेन जनपद में गिना जाता था।
  • विजयपाल यादव ने 1040 ई. में करौली में यदुवंश की स्थापना की; बयाना (भरतपुर) को राजधानी बनाकर बयाना दुर्ग बनवाया।
  • तिमनगढ़ दुर्ग (करौली) विजयपाल के पुत्र तिमनपाल (त्रिभुवनपाल) की देन है। मुहम्मद गौरी ने शासक कुँवरपाल को हराकर तिमनगढ़ पर क़ब्ज़ा किया।
शासकक्या ख़ास
हरबक्षपाल9 नवम्बर 1817 को ब्रिटिश सरकार से संधि; 1817–18 की संधियों में राजस्थान की पहली रियासत जिसने अंग्रेज़ों से संधि की
नरसिंहपाल (मृत्यु 1852)लॉर्ड डलहौज़ी ने करौली को कम्पनी राज्य में मिलाना चाहा; बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अनुमति नहीं दी
मदनपाल (1854–1869)1857 की क्रान्ति में अंग्रेज़ों की सहायता; GCSI (ग्रांड कमांडर ऑफ द स्टार ऑफ इण्डिया); 1862 में गोद लेने की अनुमति; इन्हीं के आग्रह पर स्वामी दयानन्द की राजस्थान की पहली यात्रा जून 1865

करौली की राजधानियाँ

  1. बयाना (विजयपाल, 1040)
  2. तिमनगढ़ (तिमनपाल)
  3. कल्याणपुरी = करौली (अर्जुनपाल, 1348)

5. चावड़ा राजवंश

  • भीनमाल चावड़ा राजपूतों का सबसे पुराना राज्य था; वढवाण (काठियावाड़) और अन्हिलवाड़ा (पाटन) में भी इनके राज्य थे।
  • चावड़ों की अपनी मान्यता थी कि वे शिव के चाप (धनुष) से प्रकटे; इतिहासकारों में कोई इन्हें परमारों की, कुछ गुर्जरों की शाखा कहते हैं; कर्नल टॉड ने इन्हें सीथियन माना।
  • संस्कृत लेखों में नाम चाप, चापोटक या चाबोटक मिलता है; राजधानी भीनमाल।
  • प्रसिद्ध शासक वर्मल्लात — वसन्तगढ़ के 625 ई. के लेख से ज्ञात। कहा जाता है कि भीनमाल का राज्य चावड़ों को गुर्जरों से मिला।
काल / क्रमघटनाविवरण
625वसन्तगढ़ का लेखवर्मल्लात
628ब्रह्मस्फुट सिद्धान्तव्याघ्रमुख का उल्लेख
641ह्वेनसांग का भीनमाल आगमनचावड़ा शासन

ट्रिक: माघ (शिशुपाल वध) और ब्रह्मगुप्त (ब्रह्मस्फुट सिद्धान्त) — दोनों भीनमाल के; शासक वर्मल्लात → सुप्रभदेव → व्याघ्रमुख की ओर इशारा।

6. वरीक व औलीकर वंश

  • वरीक वंश ➜ बयाना (भरतपुर)
  • लेख ➜ विजयगढ़ यूप स्तम्भ लेख · 371 ई.
  • राजा ➜ विष्णुवर्धन (पिता यशोवर्धन)
  • वरीक वंश बयाना अंचल का शासक था; 371 ई. के विजयगढ़ यूप स्तम्भ लेख में विष्णुवर्धन का नाम आता है, पिता यशोवर्धन। सम्भवतः ये समुद्रगुप्त के सामन्त थे।
  • राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में औलीकर वंश का शासन था; 423 ई. के गंगधार (झालावाड़) लेख से राजा विश्ववर्मा का पता चलता है।
काल / क्रमघटनाविवरण
371विजयगढ़ लेखवरीक — बयाना
423गंगधार लेखऔलीकर — झालावाड़

7. पाँच अन्य रियासतें

रियासतबनीसंस्थापकअन्तिम शासकविलय
टोंक1817 की संधिअमीर ख़ाँ पिण्डारीफ़ारूख़ अली ख़ाँ25 मार्च 1948
झालावाड़1838मदनसिंह झालाहरिश्चन्द्र25 मार्च 1948
अलवर1775प्रतापसिंह नरूकातेजसिंह18 मार्च 1948
  • टोंक ➜ राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत
  • झालावाड़ ➜ अंग्रेज़ों की बनाई आख़िरी रियासत
  • अलवर ➜ प्राचीन मत्स्य प्रदेश का भाग

8. टोंक का मुस्लिम राज्य

  • संस्थापक मोहम्मद अमीर ख़ाँ पिण्डारी — मूलतः अफ़गान वंश का; पहले इन्दौर के होल्कर की सेना में भर्ती होकर उसका मुख्य सेनानायक बना। जन्म 1768; नवाब 1817–1834।
  • ईस्ट इंडिया कम्पनी के साथ 15 नवम्बर 1817 की संधि — इसके बदले टोंक का पहला नवाब बनने का सम्मान और राज्य।
  • टोंक राज्य में राजपूताना एजेंसी के तीन ज़िले — टोंक, अलीगढ़ (रामपुरा), निम्बाहेड़ा — और सेन्ट्रल एजेंसी के तीन — छबड़ा, पिरावा, सिरोंज शामिल थे।
  • वज़ीर ख़ाँ (1834–1864) के समय 1857 का विद्रोह; नवाब वज़ीरुद्दौला ने भी राजपूताने के अन्य शासकों की तरह अंग्रेज़ों की मदद की।

9. झालावाड़ का झाला वंश

  • 1838 में अंग्रेज़ों ने कोटा से 19 परगने अलग करके नया झालावाड़ राज्य बनाया (एक मत 17 परगने राजपूताना एजेंसी को देने का भी है); जालिमसिंह का पौत्र मदनसिंह पहला शासक। अप्रैल 1838 की संधि से रियासत को मान्यता मिली।
  • राजराणा मदनसिंह (1838–1845) ➜ 8 अप्रैल 1838 को संधि: 80,000 रुपये वार्षिक ख़िराज; 1 अगस्त 1838 का राज्याभिषेक पाटन में; पाटन का नाम झालरापाटन, राज्य का नाम झालावाड़; शासक की उपाधि राजराणा।
  • पृथ्वीसिंह (1845–1875) ➜ 1857 में अंग्रेज़ों की सहायता; रेलायता के युद्ध में तात्या टोपे ने उन्हें हराकर झालावाड़ पर अधिकार कर लिया; 1862 में गोद लेने का अधिकार।
  • जालिमसिंह द्वितीय (1875–1896) ➜ 1881 में नमक संधि; पॉलिटिकल एजेन्ट से मतभेद के कारण 1896 में गद्दी से हटाए गए; 1 जनवरी 1899 को कुछ परगने कोटा को लौटाए गए।
काल / क्रमघटनाविवरण
1838कोटा से 19 परगने अलग
8 अप्रैल 1838मदनसिंह की संधि80,000 रु. ख़िराज
1 अगस्त 1838राज्याभिषेकपाटन → झालरापाटन
1881नमक संधिजालिमसिंह द्वितीय

10. अलवर का कछवाहा वंश

  • अलवर प्राचीन मत्स्य प्रदेश का भाग रहा; तब राजधानी विराटनगर (बैराठ)। कनिंघम के अनुसार नाम साल्व जाति से — साल्वपुर → सल्वर → हलवर → अलवर।
  • माचेड़ी (अलवर) का धूसर बनिया हेमचन्द्र (हेमू) पृथ्वीराज चौहान के बाद दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाला एकमात्र हिन्दू शासक; उसने विक्रमादित्य हेमचन्द्र नाम रखा और अपने नाम के सिक्के चलवाए; शुरुआती दिनों में वह रेवाड़ी की गलियों में नमक बेचकर गुज़ारा करता था।
  • मौजमाबाद की जागीर आमेर के उदयकरण के बेटे वीरसिंह को दी गई; पुत्र नरू के वंशज नरूका कछवाहा। मिर्ज़ा राजा जयसिंह ने मौजमाबाद के कल्याणसिंह नरूका को माचेड़ी की जागीर दी।
शासककालमुख्य बातें
प्रतापसिंह (मोहब्बतसिंह नरूका का पुत्र)1775–17901775 में अलवर राज्य; आरम्भ में माधोसिंह प्रथम (जयपुर) का सेवक; 1767 मावण्डा–मंढोली में जवाहरसिंह के विरुद्ध जयपुर की मदद, उसके बाद जाटों से अलवर-दुर्ग और आसपास का इलाक़ा छीना; नजफ़ ख़ाँ को आगरा-विजय में सहायता; 1774 में राव राजा बहादुर और 5000 का मनसब; माचेड़ी जयपुर से स्वतन्त्र — दिसम्बर 1775 से स्वतन्त्र शासक
बख्तावरसिंह1790–1815लसवाड़ी का युद्ध (1803) में मराठों के विरुद्ध अंग्रेज़ों की सहायता; जनरल लेक से मिले 13 परगने, जिनमें नीमराणा भी; 14 नवम्बर 1803 की संधि से तिजारा, टपूकड़ा, कठूमर
विनयसिंह1815–1857बख्तावरसिंह का भतीजा; उसके साथ नाबालिग बलवंतसिंह (पासवान-पुत्र) भी गद्दी पर — दबाव में बलवंतसिंह को नीमराणा-तिजारा की जागीर देकर हटाया, इस तरह नीमराणा अलग ठिकाना बना; 1857 में अंग्रेज़ों की सहायता; उसी वर्ष निधन
शिवदानसिंह1857–1874अल्पवयस्क; शासन मुंशी अम्मू ने सँभाला; राजपूत सरदारों के विद्रोह की अव्यवस्था पॉलिटिकल एजेन्ट निक्सन ने

11. रैपिड फायर तथ्य

  • अर्द्ध साका ➜ 1550, लूणकरण के समय; अमीर अली (कंधार)
  • पिंगल शिरोमणि ➜ रावल हरराय की रचना
  • जैसलमेर की टकसाल ➜ 1756, अखैसिंह ने स्थापित की
  • बासनपीर का युद्ध ➜ 1828, गजसिंह; बीकानेर की सेना हारी, उसी वर्ष पालीवालों ने जैसलमेर छोड़ा
  • करौली में यदुवंश की स्थापना ➜ 1040, विजयपाल; राजधानी बयाना
  • अंग्रेज़ों से संधि करने वाली राजस्थान की पहली रियासत ➜ करौली, 9 नवम्बर 1817 (हरबक्षपाल)
  • चावड़ा शासक वर्मल्लात ➜ 625 ई. के वसन्तगढ़ लेख से ज्ञात; राजधानी भीनमाल
  • टोंक ➜ राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत; संस्थापक अमीर ख़ाँ पिण्डारी
  • झालावाड़ ➜ 1838, अंग्रेज़ों की बनाई आख़िरी रियासत; पहले शासक मदनसिंह झाला

अगले भाग में शेखावाटी के कछवाहे और किशनगढ़ का राठौड़ वंश, फिर मेवाड़ की गुहिल शाखाएँ — डूँगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, शाहपुरा — और साकों की तालिका।

पिछला भाग: राजस्थान के अन्य महत्त्वपूर्ण राजवंश: परमार राजवंश एवं जैसलमेर के भाटी

अगला भाग: राजस्थान के अन्य महत्त्वपूर्ण राजवंश: मेवाड़ की गुहिल शाखाएँ

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