सैकड़ों नाम, उपनाम और तारीख़ें याद करनी हों तो पहले यह तय कर लें कि कौन-सा व्यक्ति किस धारा का है; उसके बाद नाम अपने आप ठिकाने पर बैठने लगते हैं। इस भाग में पाँच धाराओं की रूपरेखा, उपनाम व उपाधियाँ, प्रथम व अनूठे नाम, संस्थाएँ व संस्थापक, डाक टिकट और सम्मान दिए गए हैं। इसके बाद क्रान्तिकारियों में अर्जुनलाल सेठी, केसरी सिंह, जोरावर सिंह और प्रतापसिंह बारहठ का जीवन आता है।
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1. एक नज़र में
राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम को पाँच धाराओं में समझें — हथियारों वाली क्रान्ति, किसान-आदिवासी जागरण, रियासतों में उत्तरदायी शासन की लड़ाई (प्रजामण्डल), दानवीर-उद्योगपतियों की मदद और कलम-शिक्षा का काम। आज़ादी के बाद इन्हीं में से कई लोग मुख्यमंत्री और संवैधानिक पदों तक पहुँचे।
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1883 | सम्प सभा | गोविन्द गिरी ने भीलों को जगाने के लिए संगठन बनाया। |
| 1903 | चेतावनी रा चुंगट्या | केसरी सिंह बारहठ के 13 सोरठों ने महाराणा फतेहसिंह को दरबार से रोका। |
| 1912 | क्रान्ति का वर्ष | 25 जून — महन्त प्यारेलाल हत्याकाण्ड; 23 दिसम्बर — दिल्ली में हॉर्डिंग्ज पर बम; ब्यावर में नागरी प्रचारिणी सभा। |
| 1913 | मानगढ़ | 17 नवम्बर को अंग्रेज़ी सेना की गोलियों से लगभग 1500 भील शहीद। |
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2. जीवनकाल के चार्ट
याद रखें: 1918 में दो युवा चले गए — दामोदर दास राठी (जनवरी) और प्रतापसिंह बारहठ (मई); 1941 में सेठी और केसरी सिंह एक ही वर्ष गए; 1939 में खरवा और जोरावर सिंह।
3. उपनाम व उपाधियाँ
| उपनाम / उपाधि | व्यक्ति |
|---|---|
| राजस्थान का दधीचि · जयपुर में जनजागृति का जन्मदाता | अर्जुनलाल सेठी |
| राजस्थान का चन्द्रशेखर | जोरावर सिंह बारहठ |
| राजस्थान में सशस्त्र क्रान्ति का जनक | गोपाल सिंह खरवा |
| स्वतंत्रता संग्राम का भामाशाह | दामोदर दास राठी |
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ट्रिक: चार “गाँधी” अलग-अलग इलाक़ों के हैं — मारवाड़ (व्यास), मेवाड़ (माणिक्यलाल), वागड़ (भोगीलाल पांड्या), चिड़ावा (प्यारेलाल गुप्ता); सिरोही के गोकुल भाई भट्ट पूरे “राजस्थान के गाँधी” हैं और भरतपुर में जुगलकिशोर चतुर्वेदी।
4. प्रथम व अनूठे
| प्रथम / अनूठा | व्यक्ति · विवरण |
|---|---|
| राज्य के पहले मुख्यमंत्री (वृहत् राजस्थान) | हीरालाल शास्त्री — 1949–51 |
| पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री (3 मार्च–31 अक्टूबर 1952) | टीकाराम पालीवाल |
| मनोनीत भी और निर्वाचित भी मुख्यमंत्री रहने वाले एकमात्र | जयनारायण व्यास |
| सबसे युवा मुख्यमंत्री (38 वर्ष) और सबसे लम्बा कार्यकाल (16 वर्ष 194 दिन) | मोहनलाल सुखाड़िया |
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5. संस्थाएँ व संस्थापक
| संस्था / प्रकल्प | संस्थापक | वर्ष · स्थान |
|---|---|---|
| सम्प सभा | गोविन्द गिरी | 1883 · सिरोही (आन्दोलन-केन्द्र मानगढ़) |
| जैन शिक्षा प्रचारक समिति | अर्जुनलाल सेठी | 1905 · जयपुर |
| वर्धमान विद्यालय, छात्रावास, पुस्तकालय | अर्जुनलाल सेठी | 1907 · जयपुर |
| नागरी प्रचारिणी सभा | दामोदर दास राठी | 1912 · ब्यावर |
6. डाक टिकट वाले व्यक्तित्त्व
| क्र. | व्यक्ति | जारी होने की तिथि | मूल्य |
|---|---|---|---|
| 1 | मीराबाई | 1 अक्टूबर 1952 | 2 आना |
| 2 | महाराणा प्रताप | 11 जून 1967 | 15 पैसे |
| 3 | जमनालाल बजाज | 4 नवम्बर 1970 | 20 पैसे |
| 4 | जयनारायण व्यास | 3 जुलाई 1974 | 25 पैसे |
ध्यान दें: महाराणा प्रताप पर दो टिकट हैं (1967 और 1998); राजस्थान के सेनानियों में पहला टिकट बजाज (1970) और पहली महिला मीराबाई (1952) पर था।
7. सम्मान की समयरेखा
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1957 | पद्मविभूषण | घनश्यामदास बिड़ला — राजस्थान के पहले। |
| 1961 | अशोक चक्र | हवलदार शम्भूसिंह। |
| 1963 | परमवीर चक्र (मरणोपरान्त) | मेजर शैतानसिंह भाटी — रेज़ांग ला। |
| 1964 | “मनीषी” उपाधि | हरिभाउ उपाध्याय — राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर। |
8. क्रान्तिकारी
1905 से 1915 के बीच राजपूताना में क्रान्ति की तीन कड़ियाँ बनीं — शिक्षा-संस्था (सेठी का वर्धमान विद्यालय), परिवार का समर्पण (केसरी सिंह बारहठ) और सैन्य योजना (खरवा-पथिक)। ब्रिटिश गुप्त रिपोर्टों ने राजपूताना में विप्लव फैलाने का मुख्य ज़िम्मेदार केसरी सिंह बारहठ और अर्जुनलाल सेठी को माना।
याद रखें: सशस्त्र क्रान्ति के दो मुख्य राष्ट्रीय नेता थे रासबिहारी बोस और सचिन्द्रनाथ सान्याल; राजस्थान में उनकी योजना की ज़िम्मेदारी गोपाल सिंह खरवा पर थी।
9. अर्जुनलाल सेठी
- जन्म ➜ 9 सितम्बर 1880 · जयपुर (जैन परिवार)
- निधन ➜ 23 दिसम्बर 1941 · अजमेर
- उपनाम ➜ राजस्थान का दधीचि · जयपुर में जनजागृति का जन्मदाता
- पहली नौकरी चौमू में — ठाकुर देवीसिंह को पढ़ाते थे और उनके निजी सचिव भी रहे।
- महाराजा माधोसिंह द्वितीय ने जयपुर का प्रधानमंत्री बनाना चाहा, तो सेठी ने मना कर दिया — उनका तर्क था कि वे ख़ुद पद सँभालेंगे तो अंग्रेज़ों को देश से बाहर कौन करेगा।
- जैन शिक्षा प्रचारक समिति (जयपुर, 1905) उनकी पहली संस्था थी; उसी की छत्रछाया में 1907 में वर्धमान नाम से विद्यालय, छात्रावास और पुस्तकालय बने। पढ़ाई की आड़ में असली काम क्रान्तिकारी तैयार करना था — प्रतापसिंह बारहठ यहीं तराशे गए।
दो मुक़दमे
- हॉर्डिंग्ज बम कांड ➜ कई क्रान्तिकारी पकड़े गए; बालमुकुन्द और अमीचन्द को मृत्युदण्ड मिला। सेठी के विरुद्ध सबूत नहीं मिला, फिर भी बिना मुक़दमा चलाए जेल में रखा गया; जयपुर में प्रवेश पर रोक लगी और उन्हें वैलूर जेल (मद्रास) भेजा गया।
- निमेज हत्याकाण्ड (आरा षड्यन्त्र केस) ➜ सबूत के अभाव में गिरफ़्तारी नहीं हो सकी।
- क़रीब 7 वर्ष क़ैद काटकर 1920 में वैलूर से बाहर आए।
10. केसरी सिंह बारहठ
- जन्म ➜ 21 नवम्बर 1872 · देवपुरा (शाहपुरा रियासत)
- निधन ➜ 14 अगस्त 1941 · कोटा
- जाति / पिता ➜ चारण · ठाकुर कृष्णसिंह बारहठ
- डिंगल भाषा के कवि; इटली के राष्ट्रपिता मैजिनी को राजनीतिक गुरु मानते थे।
- 1903 में वायसराय लार्ड कर्ज़न ने एडवर्ड सप्तम के सम्मान में दिल्ली दरबार रखा। महाराणा फतेहसिंह वहाँ जा रहे थे; केसरी सिंह ने निन्दा में 13 सोरठे — “चेतावनी रा चुंगट्या” भेजे। राव गोपालसिंह ने ये सोरठे सरेरी रेलवे स्टेशन पर महाराणा को सौंपे; इन्हें पढ़ने के बाद महाराणा दिल्ली तो पहुँचे, पर दरबार में हाज़िर नहीं हुए।
- रचनाएँ ➜ प्रतापचरित, दुर्गादास चरित, रूठीरानी, जसवन्त चरित्र, राजसिंह चरित्र, कुसुमांजलि; अश्वघोष के बुद्धचरित का हिन्दी अनुवाद; कवि श्यामलदास की जीवनी।
परिवार का समर्पण
- 1912 में भाई जोरावर सिंह, पुत्र प्रतापसिंह और जामाता ईश्वरदान आसिया को रासबिहारी बोस के सहायक मास्टर अमीरचन्द के पास प्रशिक्षण के लिए भेजा।
- रासबिहारी बोस ने टिप्पणी की थी कि पूरे भारत में ठाकुर केसरीसिंह अकेले ऐसे क्रान्तिकारी हैं जिन्होंने माता की ग़ुलामी की ज़ंजीरें तोड़ने के लिए घर के हर सदस्य को लड़ाई में उतार दिया।
महन्त प्यारेलाल हत्याकाण्ड (1912)
- क्रान्तिकारी राष्ट्रीय हित में डकैती से धन जुटाते थे; इसी क्रम में जोधपुर के धनी रामस्नेही साधु प्यारेलाल को कोटा लाया गया। दूध में ज़हर मिलाया गया पर बेअसर रहा; फिर 25 जून 1912 को हीरालाल लाहिरी ने साधु की हत्या कर दी।
- सज़ाएँ ➜ केसरी सिंह: 20 वर्ष कठोर काला पानी; सोमदत्त लाहड़ी (त्रिवेणीदास), हीरालाल लाहिरी और रामकरण: आजीवन कठोर कारावास; हीरालाल जालौरी: 3 वर्ष।
- बिहार की हज़ारीबाग़ जेल में रखे गए; प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1919 की आम माफ़ी में अधीक्षक कर्नल मीक की मेहरबानी से सज़ा पूरी होने से पहले छूट गए। शेष जीवन कोटा में बीता।
11. जोरावर सिंह बारहठ
- जन्म ➜ 1883 · उदयपुर
- निधन ➜ 1939
- रिश्ता ➜ केसरी सिंह के छोटे भाई
- 23 दिसम्बर 1912 ➜ दिल्ली के चाँदनी चौक में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड हॉर्डिंग्ज पर बम फेंका; हॉर्डिंग्ज बच गया।
- काफ़ी कोशिशों के बाद भी गिरफ़्तार नहीं हो सके; आरा हत्याकाण्ड में भी इनके नाम वारंट निकले।
- लगभग 27 वर्ष तक “अमरदास वैरागी” बनकर करंडिया एकलगढ़ (मध्यप्रदेश) में छिपे रहे।
12. प्रतापसिंह बारहठ
- जन्म ➜ 24 मई 1893 · शाहपुरा
- निधन ➜ 27 मई 1918 · बरेली जेल
- पिता / चाचा ➜ केसरी सिंह / जोरावर सिंह
- प्रशिक्षण ➜ क्रान्तिकारी मास्टर अमीरचन्द से और अर्जुनलाल सेठी की वर्धमान पाठशाला में।
- हॉर्डिंग्ज पर हमले के समय जोरावर सिंह के साथ थे; पकड़े गए, पर सबूत न मिलने से छोड़ दिए गए।
- सेठी, केसरी सिंह और राव गोपालसिंह खरवा के पकड़े जाने के बाद उन्होंने सशस्त्र क्रान्ति की नई योजना बनाई। अंग्रेज़ अधिकारी क्रेडोक की हत्या का काम इन्हें मिला, पर वह समय पर पहुँचा ही नहीं। साथी पिंगले हथियारों समेत मेरठ में पकड़ा गया — योजना बिखर गई।
बरेली जेल
- गुप्तचर निदेशक सर चार्ल्स क्लीवलैण्ड ने साथियों के नाम के बदले पिता व चाचा की रिहाई समेत कई लालच दिए और घोर यातना दी।
- माँ के रोने का हवाला दिया गया तो उनका उत्तर था कि माँ की आँखें भीगती हैं तो भीगने दो — इससे सैकड़ों माताएँ रोने से बच जाएँगी; राज़ खोल देना ही उनकी असली मौत होगी।
- क्लीवलैण्ड ने संस्मरणों में लिखा कि उसने प्रतापसिंह जैसा कठोर हृदय का स्वामिभक्त लड़का नहीं देखा।
रिवीजन पॉइंटर्स
- स्वतंत्रता संग्राम की पाँच धाराएँ: हथियारबन्द क्रान्ति, किसान-आदिवासी जागरण, प्रजामण्डल, दानवीर-उद्योगपति और कलम-शिक्षा।
- अर्जुनलाल सेठी «राजस्थान के दधीचि» कहलाए; उन्होंने 1905 में जैन शिक्षा प्रचारक समिति और 1907 में वर्धमान विद्यालय बनाया और वैलूर जेल गए।
- केसरी सिंह बारहठ के 13 सोरठे «चेतावनी रा चुंगट्या» (1903) पढ़कर महाराणा फतेहसिंह दिल्ली दरबार में हाज़िर नहीं हुए; केसरी सिंह हज़ारीबाग़ जेल में रहे।
- जोरावर सिंह बारहठ — «राजस्थान का चन्द्रशेखर» — ने 23 दिसम्बर 1912 को दिल्ली में हॉर्डिंग्ज पर बम फेंका और लगभग 27 वर्ष «अमरदास वैरागी» बनकर छिपे रहे।
- प्रतापसिंह बारहठ का जन्म 24 मई 1893 को हुआ और 27 मई 1918 को बरेली जेल में वे शहीद हुए; सेठी की वर्धमान पाठशाला में उनका प्रशिक्षण हुआ था।
- दामोदर दास राठी «स्वतंत्रता संग्राम के भामाशाह» हैं और गोपाल सिंह खरवा «राजस्थान में सशस्त्र क्रान्ति के जनक»।
- पहले मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री (1949–51), पहले निर्वाचित टीकाराम पालीवाल; सबसे युवा (38 वर्ष) और सबसे लम्बे कार्यकाल (16 वर्ष 194 दिन) वाले मोहनलाल सुखाड़िया।
- डाक टिकट पर पहली महिला मीराबाई (1 अक्टूबर 1952) और राजस्थान के सेनानियों में पहला टिकट जमनालाल बजाज (1970) पर जारी हुआ।
अगले भाग में गोपाल सिंह खरवा और हेमू कालानी जैसे शेष क्रान्तिकारी, फिर किसान-आदिवासी जागरण के नेता — पथिक, माणिक्यलाल वर्मा, शेखावाटी के नेता और गोविन्द गिरी।
पिछला भाग: राजस्थान का एकीकरण: सिरोही और अन्तिम रूप एवं रियासतों के रिकॉर्ड व प्रिवीपर्स
अगला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: किसान व आदिवासी नेता (भाग 1)
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