1857 के बाद सुधार और राजनीतिक चेतना: राज्यवार सुधार एवं प्रमुख दरबार व यात्राएँ – Rajasthan History Chapter 39

1857 के बाद मेवाड़, बीकानेर, जोधपुर, जयपुर व कोटा के सुधार तथा बैंटिक, मेयो और लिटन के दरबार।

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In this chapter (12 sections)
  1. एक नज़र में
  2. राज्यवार सुधार
  3. मेवाड़
  4. बीकानेर
  5. जोधपुर
  6. जयपुर
  7. कोटा
  8. प्रमुख दरबार व यात्राएँ
  9. बैंटिक का अजमेर दरबार (1832)
  10. मेयो का अजमेर दरबार (1870)
  11. प्रिन्स ऑफ़ वेल्स व लिटन दरबार
  12. रैपिड फायर तथ्य

1857 के बाद राजस्थान में बदलाव ऊपर से आया — अंग्रेज़ों की सलाह पर हुए सुधारों के रूप में, और उन्हीं के साथ बढ़ते हस्तक्षेप के रूप में। इसलिए हर रियासत के सुधार का साल और उसे करने वाले का नाम जोड़कर याद रखना ठीक रहता है। इस भाग में मेवाड़, बीकानेर, जोधपुर, जयपुर और कोटा के सुधार क्रमवार हैं, फिर बैंटिक, मेयो, प्रिन्स ऑफ़ वेल्स और लिटन के दरबारों का ब्योरा।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — 1857 के बाद सुधार और राजनीतिक चेतना, 5 चॉक-बोर्ड चित्र, 1 नक्शे, 4 चार्ट, 26 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. एक नज़र में

1857 के बाद राजस्थान में दो धाराएँ साथ-साथ चलीं — ऊपर से अंग्रेज़ी सुधार व बढ़ता दख़ल, और नीचे से नई सोच, संस्थाएँ और राष्ट्रीय चेतना।

काल / क्रमघटनाविवरण
2 अगस्त 1858ब्रिटिश संसद का अधिनियमकम्पनी की सत्ता का अंत; भारत का शासन ब्रिटिश ताज के हाथ और महारानी सम्राज्ञी।
1 नवम्बर 1858इलाहाबाद दरबारपहले वायसराय लार्ड कैनिंग ने महारानी विक्टोरिया की घोषणा पढ़ी।
1863–64मेवाड़ में रीजेंसी व हड़तालकर्नल ईडन का प्रशासन, आण प्रथा पर रोक, नगर सेठ चम्पालाल का प्रदर्शन।
1868–70जोधपुर, जयपुर के सुधारमंत्रालय, राज्य परिषद, नमक संधियाँ, सांभर पर अंग्रेज़ी नियंत्रण।

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

संधिकिस बारे में
नमकनमक के उत्पादन-केंद्र और चुंगी — जैसे जोधपुर के 4 केंद्र पट्टे पर, बीकानेर में चुंगी ख़त्म
रेलवेरियासतों में रेल-लाइन और रेल-सुविधा का विस्तार
मुद्रासिक्कों के चलन से जुड़े समझौते

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

याद रखें: रियासतों को आश्वासन मिला कि उनके अधिकार और रीति-रिवाज सुरक्षित रहेंगे; पर पॉलिटिकल एजेन्ट सुधारों की सलाह देते-देते भीतरी कामों में भी दख़ल देने लगे।

2. राज्यवार सुधार

महारानी की घोषणा के बाद रियासतों ने नमक, रेल, मुद्रा, डाक और निष्क्रमण की संधियाँ कीं; पॉलिटिकल एजेन्टों की सलाह पर राजाओं ने अपने-अपने राज्य में प्रशासन, समाज और अर्थव्यवस्था के सुधार लागू किए।

राज्यवर्षसुधार / घटना
मेवाड़1863कर्नल ईडन ने प्रशासन सँभाला; शम्भूरत्न पाठशाला व अस्पताल; आण प्रथा पर रोक
मेवाड़1877इजलास खास की स्थापना
बीकानेर1869 / 1889प्रत्यावर्तन संधि / नमक व रेल-डाक-मुद्रा समझौते
बीकानेर1893वाल्टर नोबल्स स्कूल

… शेष 4 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

काल / क्रमघटनाविवरण
1862कोटाराज्य ज़िलों में बँटा; हर ज़िले पर जिलेदार।
1863मेवाड़ईडन ने प्रशासन सँभाला; आण प्रथा अवैध (23 दिसम्बर)।
1867जयपुरआठ सदस्यों की राज्य परिषद।
1868जोधपुर / जयपुरमंत्रालय (29 दिसम्बर) / नगरपालिका।

3. मेवाड़

काल / क्रमघटनाविवरण
19 अगस्त 1863ईडन का आदेशमहाराणा स्वरूपसिंह के बाद उत्तराधिकारी शम्भूसिंह नाबालिग थे; पॉलिटिकल एजेन्ट कर्नल ईडन ने पूरा प्रशासन ख़ुद सँभाल लिया।
1863विरोधजनता और जागीरदारों ने विरोध किया; जागीरदारों ने 5 सदस्यों की परामर्शदात्री समिति को शासन सौंपने की माँग रखी।
1863सामाजिक सुधारशम्भूरत्न पाठशाला (राजकीय विद्यालय) और राजकीय अस्पताल; शहर में सशस्त्र सुरक्षा-बल।
23 दिसम्बर 1863आण प्रथा पर रोकईडन के नियुक्त पुलिस सुपरिंटेंडेंट निज़ामुद्दीन ने इसे ग़ैर-क़ानूनी घोषित किया।

आण — लेन-देन से पहले महाराणा की सौगंध दिलाने की मेवाड़ की पुरानी रीति। लोगों ने रोक सहित इन सब सुधारों को अपनी परंपराओं में अंग्रेज़ों का खुला दख़ल माना।

ट्रिक: पूरा क्रम — 1863 ईडन → 23 दिसम्बर आण-रोक → 1864 हड़ताल → 1877 इजलास खास (फिर हड़ताल); दोनों बार नगर सेठ चम्पालाल अगुवा।

4. बीकानेर

  • सरदारसिंह (1851–1872) के दौर में राज्य की प्रशासनिक और सामाजिक दशा बिगड़ती गई; महाराजा को दीवान पं. मनफूल तक पर भरोसा न रहा और जागीरदार शासन-व्यवस्था के ख़िलाफ़ थे।
  • कैप्टन ब्रेडफोर्ड (पॉलिटिकल एजेन्ट) की राय पर महाराजा के सलाहकार के रूप में पाँच सदस्यों की परिषद गठित हुई।
  • 1869 ➜ अंग्रेज़ों के साथ प्रत्यावर्तन संधि।
काल / क्रमघटनाविवरण
1869प्रत्यावर्तन संधि
1883रेख वसूली पर टकरावडूँगरसिंह
1889नमक, रेल, डाक, मुद्रा समझौते

5. जोधपुर

काल / क्रमघटनाविवरण
29 दिसम्बर 1868मंत्रालयAGG के सुझाव पर शासन चलाने के लिए अलग मंत्रालय की स्थापना (महाराजा तख़्तसिंह)।
1868प्रत्यावर्तन संधिब्रिटिश सरकार के साथ।
1870नमक संधिचार नमक उत्पादन केंद्र — डीडवाना, पचपदरा, फलौदी, लूणी — अंग्रेज़ों को पट्टे पर।
1870प्रशासन जसवंतसिंह कोमेयो के अजमेर दरबार में तख़्तसिंह के बर्ताव से अंग्रेज़ नाराज़ थे, इसलिए प्रशासन उनके पुत्र जसवंतसिंह को सौंपा गया।
  • जसवंतसिंह ने राजनीतिक सुधारों के साथ भू-राजस्व व्यवस्था सुधारी और आबकारी कर में बदलाव किए।
  • पूरे राज्य को 5 क्षेत्रों में बाँटकर हर क्षेत्र पर एक इन्स्पेक्टर तैनात किया।

6. जयपुर

काल / क्रमघटनाविवरण
1844महाराजा स्कूलबाद में महाराजा कॉलेज के रूप में विकसित हुई शिक्षण संस्था की नींव।
1861नोबल्स स्कूलसामंतों और राजपूत बालकों की शिक्षा के लिए।
1867राज्य परिषदआठ सदस्य; अलग-अलग प्रशासनिक विभाग उन्हें सौंपे गए।
  • रेल-लाइन (अजमेर–आगरा) बिछी और डाक-तार की सेवा शुरू हुई।

7. कोटा

  • विप्लव के बाद अंग्रेज़ पॉलिटिकल एजेन्ट की सलाह मानकर महाराव ने कई सुधार लागू किए।
  • 1862 ➜ राज्य कई ज़िलों में बँटा और हर ज़िले का प्रशासन एक जिलेदार को सौंपा गया।
  • छात्र-छात्राओं के लिए स्कूल खुले; 1872 में राज्य का पहला अस्पताल बना।
काल / क्रमघटनाविवरण
1862ज़िलेदार व्यवस्था
1872प्रथम अस्पताल
1874प्रशासन की देखरेखतीन सदस्यीय परिषद, डाक-व्यवस्था

8. प्रमुख दरबार व यात्राएँ

काल / क्रमघटनाविवरण
1832बैंटिक का अजमेर दरबारअजमेर आने वाला भारत का पहला गवर्नर जनरल।
22 अक्टूबर 1870मेयो का अजमेर दरबारमेयो कॉलेज का प्रस्ताव; तख़्तसिंह की नाराज़गी।
1875प्रिन्स ऑफ़ वेल्स की यात्रारियासतों और ब्रिटिश सरकार के संबंध सुधारने के लिए।

ट्रिक: क्रम — बैंटिक (1832) → मेयो (1870) → प्रिन्स ऑफ़ वेल्स (1875) → लिटन (1877)।

9. बैंटिक का अजमेर दरबार (1832)

अंग्रेज़ों ने 1832 में अजमेर को नॉर्थ-वेस्ट प्रोविन्स में स्थानांतरित किया; उसी वर्ष विलियम बैंटिक ने अजमेर की यात्रा की और वहाँ राजपूताना के राजाओं का दरबार लगाया।

रियासतकौन आया
किशनगढ़शासक कल्याणसिंह
टोंकनवाब अमीर ख़ाँ
कोटामहाराव रामसिंह
उदयपुरमहाराणा जवानसिंह

10. मेयो का अजमेर दरबार (1870)

  • 22 अक्टूबर 1870 ➜ तत्कालीन गवर्नर जनरल व वायसराय लार्ड मेयो (रिचर्ड बर्क) ने अजमेर में राजपूताना के राजाओं का दरबार बुलाया।
  • दरबार में अंग्रेज़ी शिक्षा के लिए अजमेर में एक स्कूल खोलने का प्रस्ताव रखा गया — यही मेयो कॉलेज बना; इसका पहला सत्र 1875–76 से चला।
  • जोधपुर महाराजा तख़्तसिंह आए, पर जयपुर और उदयपुर के राजाओं की कुर्सियाँ अपने से आगे देखकर दरबार में बिना शामिल हुए लौट गए।

याद रखें: मेयो कॉलेज के संस्थापक = लार्ड मेयो (मूल नाम रिचर्ड साउथवेल बर्क); वायसराय ने 1870 में प्रस्ताव रखा, कॉलेज 1875 में खुला।

11. प्रिन्स ऑफ़ वेल्स व लिटन दरबार

  • 1875 ➜ देशी राजाओं और ब्रिटिश सरकार के संबंध सुधारने के लिए प्रिन्स ऑफ़ वेल्स (आगे चलकर एडवर्ड सप्तम) को भारत भेजा गया।
  • 1 जनवरी 1877 ➜ दिल्ली में लार्ड लिटन के दरबार में विक्टोरिया को साम्राज्ञी की पदवी मिली; इसे “घोषणा दरबार” भी कहा जाता है।
  • इस मौक़े पर राजस्थान के सभी राजाओं ने दिल्ली पहुँचकर साम्राज्ञी के प्रति सम्मान और निष्ठा प्रकट की।

12. रैपिड फायर तथ्य

  • ब्रिटिश संसद का अधिनियम ➜ 2 अगस्त 1858 — कम्पनी की सत्ता का अंत
  • महारानी की घोषणा पढ़ी गई ➜ 1 नवम्बर 1858, इलाहाबाद दरबार, लार्ड कैनिंग द्वारा
  • आण प्रथा पर रोक ➜ मेवाड़, 23 दिसम्बर 1863; कर्नल ईडन का काल
  • मेवाड़ की हड़तालों के अगुवा ➜ नगर सेठ चम्पालाल (1864 व 1877)
  • जोधपुर में मंत्रालय ➜ 29 दिसम्बर 1868, AGG के सुझाव पर
  • कोटा के सुधार ➜ 1862 में ज़िलेदार व्यवस्था; 1872 में राज्य का पहला अस्पताल
  • अजमेर आने वाला पहला गवर्नर जनरल ➜ बैंटिक, 1832
  • मेयो का अजमेर दरबार ➜ 22 अक्टूबर 1870; मेयो कॉलेज का प्रस्ताव, पहला सत्र 1875–76
  • लिटन का दरबार ➜ दिल्ली, 1 जनवरी 1877 — विक्टोरिया को साम्राज्ञी की पदवी

अगले भाग में दयानंद सरस्वती की यात्राएँ और परोपकारिणी सभा, कांग्रेस की स्थापना, क्रांतिकारी घटनाएँ और रियासतों में फैली अंग्रेज़ी शिक्षा।

पिछला भाग: राजस्थान में 1857 की क्रांति: तात्या टोपे एवं असफलता व अन्य तथ्य

अगला भाग: 1857 के बाद सुधार और राजनीतिक चेतना: दयानंद व आर्य समाज एवं राजनीतिक चेतना

इन्हें भी पढ़ें: सामाजिक एवं राजनीतिक संगठन · प्रजामण्डल व स्वतंत्रता आन्दोलन

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