सामाजिक संस्थाएँ एवं राजनीतिक संस्थाएँ (भाग 1) – Rajasthan History Chapter 41

राजस्थान की सामाजिक संस्थाएँ 1877 से 1918 तक और राजनीतिक संस्थाओं की शुरुआत, संस्थापक व वर्ष सहित।

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In this chapter (10 sections)
  1. एक नज़र में
  2. सामाजिक संस्थाएँ
  3. सुधार-सभाएँ 1877–1918
  4. गाँधी-प्रेरित संस्थाएँ
  5. अन्य सामाजिक संस्थाएँ (30)
  6. संस्थापक के अनुसार
  7. राजनीतिक संस्थाएँ
  8. क्रान्तिकारी आरम्भ
  9. राजपूताना मध्य भारत सभा
  10. रैपिड फायर तथ्य

किसी भी संस्था को याद रखने के तीन सवाल हैं — किसने बनाई, कहाँ बनी और किस साल। राजस्थान की जागृति की पूरी कहानी इसी ढाँचे में बैठ जाती है। इस भाग में 1877 से 1918 की सुधार-सभाएँ, गाँधी-प्रेरित संस्थाएँ, 30 अन्य सामाजिक संस्थाओं की सूची और संस्थापक के अनुसार उनका वर्गीकरण दिया गया है। इसके बाद राजनीतिक संस्थाओं में क्रान्तिकारी आरम्भ और राजपूताना मध्य भारत सभा आती हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — सामाजिक एवं राजनीतिक संगठन, 5 चॉक-बोर्ड चित्र, 6 चार्ट, 24 फ्लैशकार्ड और 13 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. एक नज़र में

उन्नीसवीं सदी के अन्त से राजस्थान में जागृति तीन रास्तों से आई। पहले सामाजिक सुधार की सभाएँ बनीं (विवाह-खर्च, बहुविवाह, मृत्युभोज, शिक्षा), फिर राजनीतिक संगठन खड़े हुए जो रियासतों में नागरिक अधिकार और उत्तरदायी शासन माँगते थे, और इन दोनों की आवाज़ समाचार-पत्रों ने घर-घर पहुँचाई।

काल / क्रमघटनाविवरण
1877देश हितैषिणी सभाउदयपुर — महाराणा सज्जनसिंह की अध्यक्षता
1888–89वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभाअजमेर — कर्नल वाल्टर अध्यक्ष
1907सर्वहितकारिणी सभाचुरू — स्वामी गोपालदास; “चुरू की कांग्रेस”
1910वीर भारत सभाकोटा — केसरीसिंह बारहठ

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

  • सामाजिक संस्थाएँ ➜ 8 + 30 की सूची
  • राजनीतिक संस्थाएँ ➜ 13 + 20 की सूची
  • समाचार-पत्र ➜ कुल 40 सूचीबद्ध

याद रखें: हर संस्था के तीन सूत्र याद रखें — कौन (संस्थापक), कहाँ (शहर) और कब (वर्ष)। नीचे की हर तालिका इसी क्रम में है।

2. सामाजिक संस्थाएँ

इस शाखा में सबसे पहले अँग्रेज़ी अफ़सर और नरेशों के बनाए सुधार मंच आते हैं, फिर आर्य समाज व गाँधीजी से प्रेरित सेवा-संस्थाएँ।

3. सुधार-सभाएँ 1877–1918

देश हितैषिणी सभा, उदयपुर (1877)

  • 2 जुलाई 1877 को उदयपुर में गठित; मेवाड़ के महाराणा सज्जनसिंह स्वयं इसके अध्यक्ष थे।
  • लक्ष्य ➜ विवाह से जुड़ी समस्याएँ सुलझाना; राजपूतों में विवाह का ख़र्च घटाने के नियम बने।
  • बहुविवाह तथा “त्याग” (विवाह पर दी जाने वाली माँग) के बारे में राजपूत, ब्राह्मण और महाजन — तीनों वर्गों के लिए नियम तय हुए।

वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा, अजमेर (1888–89)

  • अजमेर में 9–10 मार्च 1888 को सब रियासतों के असरदार सामन्त, जागीरदार और चारण जुटे; बुलाने वाले थे राजपूताना के कार्यवाहक A.G.G. कर्नल वाल्टर और यहीं सभा की नींव पड़ी।
  • 22 फरवरी 1889 को प्रतिनिधि फिर जुटे; सभा को “वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा” नाम मिला और वाल्टर ही अध्यक्ष बने।
  • प्रयास ➜ विवाह की उम्र बढ़ाना, बहुविवाह रोकना, त्याग-प्रथा व मृत्युभोज को सीमित करना।

सर्वहितकारिणी सभा, चुरू (1907)

  • स्वामी गोपालदास ने पं. कन्हैयालाल ढूँढ व पं. श्रीराम मास्टर के साथ चुरू में स्थापना की।
  • आर्य समाज की सोच से प्रेरित; राजनीतिक सक्रियता के कारण उसे “चुरू की कांग्रेस” कहा गया।
  • 1912 में बालिकाओं के लिए सर्वहितकारिणी पुत्री पाठशाला और हरिजन-शिक्षा के लिए कबीर पाठशाला खोली गई।

हिन्दी साहित्य समिति, भरतपुर (1912)

  • संस्थापक जगन्नाथ दास अधिकारी।
  • 1927 में समिति ने भरतपुर में “विश्व हिन्दी सम्मेलन” कराया; सभापति इतिहासकार पं. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा थे।

चीरवा सेवा समिति, शेखावाटी (1918)

  • अकाल और प्राकृतिक आपदा में ज़रूरतमंदों तक सहायता पहुँचाने के लिए बनी।

ट्रिक: क्रम याद रखें — उदयपुर 1877 → अजमेर 1888 → चुरू 1907 → भरतपुर 1912 → शेखावाटी 1918।

4. गाँधी-प्रेरित संस्थाएँ

संस्थास्थानकिसने / किसके नेतृत्व मेंमुख्य बात
राजस्थान (हिन्दी) विद्यापीठउदयपुरजनार्दन राय नागर, 21 अगस्तहिन्दी की पढ़ाई के सहारे युवाओं में राष्ट्र-भावना जगाना
गौसेवा संघवर्धा (मूल केन्द्र)स्थापना गाँधीजी; राजस्थान में अध्यक्ष जमनालाल बजाजबजाज के निधन के बाद पत्नी जानकीदेवी बजाज ने कार्य सँभाला
राजस्थान हरिजन सेवा संघअजमेरअखिल भारतीय संघ (1932) के अध्यक्ष घनश्यामदास बिड़ला; राजपूताना शाखा के अध्यक्ष हरबिलास शारदाहरिजनों में शिक्षा-प्रसार व संगठन
  • विद्यापीठ की स्थापना-तिथि 21 अगस्त 1937 मानी जाती है।
  • बिड़ला ने अखिल भारतीय संघ बनने के बाद उसकी राजपूताना शाखा की ज़िम्मेदारी अजमेर के शारदा को सौंपी।

5. अन्य सामाजिक संस्थाएँ (30)

क्र.संस्थावर्षस्थानसंस्थापक
1आचार सुधारिणी सभा1910धौलपुरयमुनाप्रसाद शर्मा, ज्वालाप्रसाद जिज्ञासु
2अमर सेवा समिति1922चिड़ावामास्टर प्यारेलाल गुप्ता
3भील सेवा मण्डल1922मेवाड़ठक्कर बापा
4अस्पृश्यता निवारण संघ1923अलवरपं. हरिनारायण शर्मा

… शेष 26 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ध्यान दें: सूची की नौ संस्थाओं के साथ वर्ष दिया ही नहीं गया (वाल्मिकी संघ, गाँधी आश्रम, हरिजन आश्रम, राजपूताना हरिजन सेवा संघ आदि) — इनके लिए संस्थापक और स्थान ही याद रखें।

6. संस्थापक के अनुसार

संस्थापकसंस्थाएँ
भोगीलाल पाण्ड्याहरिजन सेवा समिति (1935) · वागड़ सेवा मन्दिर (1935) · वाल्मिकी संघ · सेवा संघ · राजस्थान सेवा मंडल (1935) · डूँगरपुर सेवा संघ (1938) · वनवासी सेवा संघ (1940)
हरिभाऊ उपाध्यायसस्ता साहित्य मण्डल (1925) · गाँधी आश्रम व गाँधी सेवा संघ · महिला शिक्षा सदन (1945)
माणिक्यलाल वर्माखाण्डलाई आश्रम (1934) · सेवा आश्रम, अजमेर (1934)
रामनारायण चौधरीराजपूताना हरिजन सेवा संघ · नारेली आश्रम

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: डूँगरपुर–वागड़ क्षेत्र की सेवा-संस्थाओं के पीछे प्रायः भोगीलाल पाण्ड्या हैं; महिला संस्थाएँ — महिला मण्डल (उदयपुर, दयाशंकर श्रोत्रिय), महिला आश्रम (भीलवाड़ा, नारायणी देवी वर्मा), महिला शिक्षा सदन (अजमेर)।

7. राजनीतिक संस्थाएँ

राजनीतिक संगठन दो स्तर पर चले — प्रदेश-स्तर (राजपूताना मध्य भारत सभा, राजस्थान सेवा संघ, राजपूताना देशी राज्य परिषद) और रियासत-स्तर (कोटा, बीकानेर, जोधपुर की सभाएँ)। राष्ट्रीय मंच पर देशी राज्य लोक परिषद इन्हें जोड़ती थी, जबकि नरेन्द्र मण्डल इसके उलट नरेशों का अपना मंच था।

संगठनों की सीढ़ी

  1. 1910 वीर भारत सभा
  2. 1918 राजपूताना मध्य भारत सभा
  3. 1919 राजस्थान सेवा संघ

8. क्रान्तिकारी आरम्भ

संस्थावर्षस्थानसंस्थापकविशेष
वीर भारत सभा1910कोटाकेसरीसिंह बारहठ (साथी: गोपालसिंह खरवा, विजयसिंह पथिक)क्रान्तिकारी संगठन अभिनव भारत की प्रान्तीय शाखा
प्रताप सभा1915उदयपुरबलवंत सिंह मेहतामहाराणा प्रताप की स्मृति में; मेहता वर्षों तक संचालक
विद्या प्रचारिणी सभा1916ओछड़ी गाँव, चित्तौड़गढ़विजयसिंह पथिकबिजौलिया आन्दोलन के लिए स्वयंसेवक तैयार किए; 1916 में वार्षिक सम्मेलन

9. राजपूताना मध्य भारत सभा

  • स्थापना 1918 में दिल्ली के चाँदनी चौक के मारवाड़ी पुस्तकालय में, जमनालाल बजाज के प्रयासों से।
  • संस्थापक कार्यकर्ता ➜ विजयसिंह पथिक, अर्जुनलाल सेठी, स्वामी नरसिंहदेव सरस्वती (जयपुर), जमनालाल बजाज, सेठ गोविन्ददास (जबलपुर), देव सरस्वती, गणेश शंकर विद्यार्थी (कानपुर), चाँदकरण शारदा (अजमेर), केसरीसिंह बारहठ, गिरधर शर्मा।
  • प्रधान कार्यालय कानपुर; राजस्थान में मुख्यालय अजमेर।
अधिवेशनसमय व स्थानअध्यक्ष / टिप्पणी
दूसरादिसम्बर 1919 · अमृतसर—
तीसरामार्च 1920 · अजमेरजमनालाल बजाज
चौथादिसम्बर 1920 · नागपुरगणेश नारायण सोमाणी (जयपुर)

10. रैपिड फायर तथ्य

  • देश हितैषिणी सभा ➜ 1877, उदयपुर; अध्यक्ष महाराणा सज्जनसिंह
  • वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा ➜ अजमेर, 1888–89; अध्यक्ष कर्नल वाल्टर
  • चुरू की कांग्रेस ➜ सर्वहितकारिणी सभा (1907), संस्थापक स्वामी गोपालदास
  • वीर भारत सभा ➜ 1910, कोटा; केसरीसिंह बारहठ; अभिनव भारत की प्रान्तीय शाखा
  • हिन्दी साहित्य समिति ➜ भरतपुर (1912), संस्थापक जगन्नाथ दास अधिकारी
  • चीरवा सेवा समिति ➜ शेखावाटी (1918); अकाल व आपदा में सहायता के लिए
  • संस्थाओं का क्रम ➜ उदयपुर 1877 → अजमेर 1888 → चुरू 1907 → भरतपुर 1912 → शेखावाटी 1918
  • राजपूताना मध्य भारत सभा ➜ 1918, दिल्ली के चाँदनी चौक में; प्रयास जमनालाल बजाज के
  • राजस्थान (हिन्दी) विद्यापीठ, उदयपुर की स्थापना-तिथि 21 अगस्त 1937 मानी जाती है।

अगले भाग में वीर भारत सभा से देशी राज्य लोक परिषद और नरेन्द्र मण्डल तक की राजनीतिक संस्थाएँ, फिर राजस्थान का पहला पत्र, पश्चिम का पहला पत्र और पथिक की पत्र-शृंखला।

पिछला भाग: 1857 के बाद सुधार और राजनीतिक चेतना: दयानंद व आर्य समाज एवं राजनीतिक चेतना

अगला भाग: सामाजिक एवं राजनीतिक संगठन: राजनीतिक संस्थाएँ (भाग 2) एवं राजस्थान के समाचार-पत्र

इन्हें भी पढ़ें: 1857 के बाद सुधार और राजनीतिक चेतना · प्रजामण्डल व स्वतंत्रता आन्दोलन

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