पौराणिक स्वरूप व जनपद युग: मौर्य व विदेशी आक्रमण एवं गुप्त व हूण – Rajasthan History Chapter 8

मौर्य, यूनानी, शक-कुषाण, गुप्त, हूण और वर्धन काल में राजस्थान तथा रियासतों की स्थापना।

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In this chapter (15 sections)
  1. मौर्य व विदेशी आक्रमण
  2. मौर्य काल
  3. यूनानी आक्रमण
  4. सीथियन: शक · कुषाण
  5. गुप्त व हूण
  6. राजस्थान में गुप्त सत्ता
  7. गुप्त सिक्के व साक्ष्य
  8. हूण
  9. वर्धन काल
  10. पुष्यभूति वंश व प्रभाकरवर्धन
  11. हर्षवर्धन
  12. राज्यों की स्थापना
  13. संस्थापक और वर्ष
  14. चार्ट में रियासतें
  15. रिवीजन पॉइंटर्स

विदेशी आक्रमणों और साम्राज्यों का क्रम एक कड़ी की तरह याद होना चाहिए: मौर्य, यूनानी, सीथियन, गुप्त, हूण और फिर वर्धन। इस भाग में इन्हीं पड़ावों को क्रमवार पढ़ेंगे — मौर्य काल, यूनानी व शक-कुषाण आक्रमण, राजस्थान में गुप्त सत्ता और सिक्के, हूण, फिर वर्धन काल और हर्षवर्धन। अंत में राजपूत काल की रियासतों के संस्थापक और वर्ष की तालिका है। हर शासक के साथ उसका लेख या सिक्का जोड़ लें।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — पौराणिक स्वरूप व जनपद युग, 5 चॉक-बोर्ड चित्र, 4 चार्ट, 24 फ्लैशकार्ड और 13 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. मौर्य व विदेशी आक्रमण

काल / क्रमघटनाविवरण
322 ई.पू.चन्द्रगुप्त मौर्यपाटलिपुत्र से शासन; सारा राजस्थान मौर्य अधिकार में।
150 ई.पू.मिनेण्डरमध्यमिका (नगरी) पर यूनानी अधिकार।
पहली सदी ई.पू.सीथियन आक्रमणपश्चिमी राजस्थान में आक्रमण शुरू।

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

याद रखें: क्रम: मौर्य → यूनानी → सीथियन (कुषाण, पहलव, शक) — भारत में विदेशी शासन मिनेण्डर के बाद से माना जाता है।

2. मौर्य काल

  • चन्द्रगुप्त मौर्य (322 ई.पू.) ने मौर्य वंश की स्थापना की; राजधानी पाटलिपुत्र; अन्तिम शासक वृहद्रथ।
  • चन्द्रगुप्त के समय से ही राजस्थान पर मौर्य सत्ता थी; माना जाता है कि सारे जनपद उसके राज्य में मिल गए और पूरा राजस्थान मौर्य साम्राज्य का अंग बना।
  • मौर्य काल में राजस्थान, गुजरात, सिन्ध और कोंकण को अपर (पश्चिम) जनपद कहते थे।
साक्ष्यस्थान / वर्षक्या बताता है
मानमोरी शिलालेखपूठोली गाँव, चित्तौड़गढ़ के पास · 713 ई. (टॉड को मिला)मौर्यवंशी राजा मान ने मानसरोवर झील बनवाई
कणसवा अभिलेखकोटा · 738 ई.मौर्य वंशज राजा धवल का राज्य
कुमारपाल प्रबन्धग्रन्थचित्रांग मौर्य ने चित्तौड़गढ़ किला बनवाया और चित्रांग तालाब खुदवाया

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

  • मान मौर्य को बप्पा रावल ने हराया (734 ई.) और चित्तौड़ मौर्यों के हाथ से निकल गया।

ट्रिक: मौर्य की तीन निशानियाँ राजस्थान में — दुर्ग (चित्तौड़, जहाजपुर), झील (मानसरोवर, चित्रांग), लेख (मानमोरी, कणसवा, अशोक)।

3. यूनानी आक्रमण

  • मिनेण्डर (यूनानी शासक) ने ईसा-पूर्व 150 में मध्यमिका (नगरी) पर क़ब्ज़ा कर अपना राज्य जमाया।
  • यहीं से भारत में विदेशी जातियों के शासन की शुरुआत मानी जाती है।
  • यूनानी लेखन में भी मध्यमिका दर्ज है।
स्थानक्या मिला
नालियासर (साँभर के पास)यूनानी सिक्के
बैराठ (कोटपुतली–बहरोड़)मिनेण्डर की मुद्राएँ
नगरी (चित्तौड़गढ़)यूनानी सिक्के

लगभग 90 ई.पू. तक राजस्थान से यूनानी शासन ख़त्म हो चुका था; आगे सीथियनों का दबदबा रहा।

4. सीथियन: शक · कुषाण

  • ईसा पूर्व की पहली सदी में पश्चिमी राजस्थान पर सीथियनों के हमले शुरू हुए।
  • कुषाण, पहलव और शक को मिलाकर सीथियन कहा जाता है।
  • कनिष्क ने 78 ई. में शक संवत् चलाया।
शासक / अभिलेखतथ्य
नहपान (शक क्षत्रप)दामाद ऋषभदत्त को भद्रों की मदद के लिए भेजा; उसने मालवों को हराया
रुद्रदामन — जूनागढ़ (सुदर्शन झील) अभिलेख, 150 ई.क्षत्रप शासन साबरमती से मरुप्रदेश तक फैला; यौधेयों को हराया
श्रीसोम — नांदसा लेख, 225 ई.मालव राजा ने क्षत्रपों को परास्त किया

याद रखें: दो अलग मुकाबले — मालव बनाम क्षत्रप (नांदसा, 225 ई.) और यौधेय बनाम रुद्रदामन (जूनागढ़, 150 ई.)।

5. गुप्त व हूण

काल / क्रमघटनाविवरण
लगभग 319/320 ई.गुप्त संवत् का आरम्भचन्द्रगुप्त प्रथम के राज्यारोहण से।
लगभग 335–375 ई.समुद्रगुप्तप्रयाग प्रशस्ति में मालव, यौधेय आदि की अधीनता।
लगभग 380–412 ई.चन्द्रगुप्त द्वितीयरुद्रसिंह का वध; पूरा राजस्थान गुप्त प्रभाव में।

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

याद रखें: राजस्थान के इतिहास में गुप्तकाल “सभ्यता और संस्कृति का काल” है; पूरे भारत के लिए यह स्वर्ण युग कहलाता है।

6. राजस्थान में गुप्त सत्ता

  • गुप्त साम्राज्य लगभग 319/320 ई. से 550 ई. तक चला।
  • समुद्रगुप्त (लगभग 335–375 ई.) की प्रयाग प्रशस्ति में मालव, अर्जुनायन, यौधेय, मद्रक जैसे गणों का उसकी अधीनता स्वीकारना दर्ज है।
  • चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के काल में पूरा राजस्थान गुप्तों के नियन्त्रण में आया; उसने शकों के अन्तिम महाक्षत्रप रुद्रसिंह का वध किया।

गुप्तों तक की सत्ता-कड़ी

  1. क्षत्रप / शक
  2. समुद्रगुप्त: गणों की अधीनता
  3. चन्द्रगुप्त II: रुद्रसिंह वध

7. गुप्त सिक्के व साक्ष्य

स्थानआज का क्षेत्रक्या मिला
नगला छैल (बयाना)भरतपुरलगभग 1800 गुप्त स्वर्ण मुद्राएँ — राजस्थान में गुप्तों की सर्वाधिक; इनमें सबसे ज़्यादा चन्द्रगुप्त द्वितीय के
अहेड़ाअजमेरगुप्तकालीन सिक्के
मौराली · साँभरजयपुरगुप्तकालीन सिक्के
  • सबसे बड़ा भंडार ➜ नगला छैल, बयाना
  • संख्या ➜ लगभग 1800 स्वर्ण मुद्राएँ
  • सर्वाधिक सिक्के ➜ चन्द्रगुप्त द्वितीय के

8. हूण

  • हूण राजा तोरमाण ने गुप्तों की सत्ता को पश्चिमी भारत से हटाकर राजस्थान पर पकड़ बनाई (लगभग 500 ई.)।
  • तोरमाण के पुत्र मिहिरकुल को अत्याचारी और हिंसाप्रिय माना जाता है — उसे “भारत का अटिल्ला” कहा गया; वह शिव-भक्त था। उसने नरसिंहगुप्त से टकराव लिया।
  • मिहिरकुल ने विराटनगर (बैराठ) के बौद्ध विहारों और बौद्ध स्थलों को नष्ट किया।
पक्षतथ्य
सिक्केचाँदी के, पर संख्या में बहुत कम; ईरान के ससानी शासकों की शैली पर
प्रतिरोधमालवा के यशोधर्मन ने 532 ई. (मन्दसौर लेख) में हूणों को हराया; मालवा और राजस्थान के हूण परास्त हुए
वैवाहिक सम्बन्धगुहिल वंश के अल्लट का विवाह हूण राजा की पुत्री हरियादेवी से हुआ

यशोधर्मन की जीत से राजस्थान को कुछ समय के लिए चैन और समृद्धि मिली।

9. वर्धन काल

काल / क्रमघटनाविवरण
550 ई.गुप्त साम्राज्य का पतनइसी समय वर्धन वंश उभरा।
लगभग 606 ई.हर्षवर्धनप्रभाकरवर्धन का पुत्र।
647 ई.हर्ष की मृत्युइसके बाद राजपूत शक्ति के उदय का काल।

10. पुष्यभूति वंश व प्रभाकरवर्धन

  • गुप्त साम्राज्य के पतन (550 ई.) के बाद उत्तर भारत में थानेश्वर का पुष्यभूति वंश शक्तिशाली बना; इसी से वर्धन वंश का उदय हुआ।
  • वर्धन वंश की स्थापना का श्रेय प्रभाकरवर्धन को दिया जाता है।
  • हूणों के बाद सातवीं सदी तक भीनमाल (जालौर) की ओर गुर्जरों की ताक़त बढ़ चुकी थी।

11. हर्षवर्धन

  • प्रभाकरवर्धन के पुत्र हर्षवर्धन ने राजस्थान के बड़े हिस्से को अपने साम्राज्य में जोड़ा।
  • चीनी लेखकों ने उसे शीलादित्य कहकर पुकारा है।
  • 647 ई. में हर्ष के निधन के बाद का काल राजस्थान में राजपूत शक्तियों के उभार का युग गिना जाता है।
स्रोतरचयिताक्या मिलता है
हर्षचरितबाणभट्टहर्ष और उसके वंश का वृत्तान्त
सी-यू-कीह्वेनसांग (चीनी यात्री)हर्ष के राज्य का विवरण

12. राज्यों की स्थापना

हर्ष के बाद उभरे राजवंशों ने अलग-अलग रियासतें बसाईं। नीचे सारी 23 रियासतों के संस्थापक और वर्ष एक साथ हैं; उनके आँकड़े दूसरे पन्ने पर चार्ट में हैं।

13. संस्थापक और वर्ष

क्र.राज्यवंशसंस्थापकवर्ष
1शाकम्भरीचौहानवासुदेव551 ई.
2रणथम्भौरचौहानगोविन्दराज1194 ई.
3जालौरचौहानकीर्तिपाल1181 ई.
4नाडोलचौहानलक्ष्मण960 ई.

14. चार्ट में रियासतें

काल / क्रमघटनाविवरण
551 ई.शाकम्भरीवासुदेव (चौहान)
566 ई.मेवाड़गुहिल
960 ई.नाडोललक्ष्मण (चौहान)
1040 ई.करौलीविजयपाल (यादव)

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. चन्द्रगुप्त मौर्य (322 ई.पू.) के समय सारा राजस्थान मौर्य साम्राज्य में आया; अन्तिम मौर्य शासक वृहद्रथ था।
  2. मौर्य निशानियाँ — मानमोरी लेख (713) में राजा मान द्वारा मानसरोवर झील बनवाने का ज़िक्र; बप्पा रावल ने मान मौर्य को 734 ई. में हराया और चित्तौड़ मौर्यों के हाथ से निकल गया।
  3. मिनेण्डर ने 150 ई.पू. में मध्यमिका (नगरी) पर क़ब्ज़ा किया; भारत में विदेशी शासन की शुरुआत यहीं से मानी जाती है।
  4. कुषाण, पहलव और शक मिलकर सीथियन कहलाते हैं; कनिष्क ने 78 ई. में शक संवत् चलाया।
  5. दो अलग मुकाबले — मालव बनाम क्षत्रप (नांदसा, 225 ई.) और यौधेय बनाम रुद्रदामन (जूनागढ़, 150 ई.)।
  6. गुप्त संवत् का आरम्भ लगभग 319/320 ई. से माना जाता है; चन्द्रगुप्त द्वितीय ने रुद्रसिंह का वध किया और पूरा राजस्थान गुप्त प्रभाव में आ गया।
  7. नगला छैल (बयाना, भरतपुर) में लगभग 1800 गुप्त स्वर्ण मुद्राएँ मिलीं, जिनमें सबसे ज़्यादा चन्द्रगुप्त द्वितीय की हैं।
  8. हूण राजा तोरमाण (लगभग 500 ई.) के पुत्र मिहिरकुल ने बैराठ के बौद्ध विहार नष्ट किए; यशोधर्मन ने 532 ई. (मन्दसौर लेख) में हूणों को हराया।
  9. 550 ई. में गुप्त साम्राज्य का पतन हुआ; हर्षवर्धन (लगभग 606 ई.) प्रभाकरवर्धन के पुत्र थे और 647 ई. में उनके निधन के बाद राजपूत शक्ति का उदय हुआ।

अगले भाग में राजपूत काल क्या है और «राजपूत» शब्द कब से चला, फिर उत्पत्ति के अलग-अलग मत और राजस्थान के प्रमुख राजवंश।

पिछला भाग: पौराणिक स्वरूप व जनपद युग: आर्य व पौराणिक युग एवं जनपद युग

अगला भाग: राजपूतों की उत्पत्ति: एक नज़र में

इन्हें भी पढ़ें: प्राचीन सभ्यताएँ व पुरास्थल · राजपूतों की उत्पत्ति

पूरी श्रृंखला: राजस्थान का इतिहास — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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