राजस्थान का एकीकरण: सिरोही और अन्तिम रूप एवं रियासतों के रिकॉर्ड व प्रिवीपर्स – Rajasthan History Chapter 51

सिरोही व अन्तिम पुनर्गठन, आज के 41 ज़िले, रियासतों के रिकॉर्ड, प्रिवीपर्स और संविधान सभा से शहीदों तक की सूचियाँ।

9 min read Updated Notes in Hindi
In this chapter (13 sections)
  1. सिरोही और अन्तिम रूप
  2. चरण 6 — सिरोही
  3. चरण 7 — पुनर्गठित राजस्थान
  4. राज्य पुनर्गठन आयोग व राज्यों की श्रेणियाँ
  5. आज का राजस्थान
  6. रियासतों के रिकॉर्ड व प्रिवीपर्स
  7. रिकॉर्ड
  8. प्रिवीपर्स
  9. संविधान सभा व आन्दोलन के नाम
  10. संविधान सभा के सदस्य
  11. क्रान्तिकारी और उनकी जेलें
  12. शहीदों की तारीख़ें
  13. रैपिड फायर तथ्य

एकीकरण की कहानी सिरोही और अजमेर पर आकर ही पूरी होती है, क्योंकि दोनों ने आख़िरी चरणों में अपनी जगह बदली और उसी से 1 नवम्बर 1956 का आज वाला स्वरूप निकला। इस भाग में चरण 6 और 7, राज्य पुनर्गठन आयोग व राज्यों की श्रेणियाँ, आज का राजस्थान तथा रियासतों के रिकॉर्ड व प्रिवीपर्स रखे गए हैं। अन्त में संविधान सभा के सदस्यों, क्रान्तिकारियों की जेलों और शहीदों की तारीख़ों की सूचियाँ भी जोड़ी गई हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान का एकीकरण, 7 चॉक-बोर्ड चित्र, 1 नक्शे, 11 चार्ट, 22 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. सिरोही और अन्तिम रूप

वृहद् राजस्थान के बाद सिर्फ़ सिरोही अलग रहा था। गुजरात की तरफ़ झुके केन्द्र और राजस्थान की माँग के बीच खींचतान के बाद 1950 में उसका बँटवारा हुआ; और फिर 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिश पर आज का स्वरूप मिला।

  • चरण 6 ➜ 26 जनवरी 1950
  • चरण 7 ➜ 1 नवम्बर 1956
  • पहले राज्यपाल ➜ गुरुमुख निहालसिंह

2. चरण 6 — सिरोही

काल / क्रमघटनाविवरण
1 फ़रवरी 1948एजेंसी बदलीजनता के विरोध के बावजूद सिरोही राजपूताना एजेंसी से हटाकर गुजरात एजेंसी के अधीन कर दिया गया
18 अप्रैल 1948नेहरू से भेंटसंयुक्त राजस्थान के उद्घाटन पर राजस्थान के काँग्रेस कार्यकर्ताओं ने नेहरू से सिरोही को राजस्थान में मिलाने की प्रार्थना की
8 नवम्बर 1948केन्द्र का प्रबन्धसिरोही का शासन भारत सरकार को सुपुर्द

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

  • पटेल तथा गुजराती नेता सिरोही और आबू को गुजरात के साथ रखने के पक्ष में थे; राजस्थान के नेता इसके ख़िलाफ़ थे।
  • जनता के आक्रोश को शान्त करने को यह बँटवारा हुआ, पर इस फ़ैसले के विरोध में सिरोही ही नहीं, पूरे राजस्थान में बड़ा आन्दोलन उठा — मुखिया गोकुलभाई भट्ट, सहयोगी बलवन्तसिंह मेहता।
  • इकाइयाँ ➜ संयुक्त वृहद् राजस्थान + सिरोही; राजधानी जयपुर; मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री; राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वितीय; महाराज प्रमुख भूपालसिंह।

याद रखें: आबू–देलवाड़ा सिरोही का वही भाग है जो 1 नवम्बर 1956 को वापस राजस्थान को मिला — यानी सिरोही का दो चरणों में जुड़ना (1950 और 1956)।

3. चरण 7 — पुनर्गठित राजस्थान

आज़ादी के बाद भी अजमेर पहले की तरह केन्द्र के प्रशासन में रहा। राजस्थान की सब रियासतें मिलने पर उसके विलय का सवाल उठा। आम चुनाव (1952) के बाद अजमेर की तीस सीटों वाली धारा सभा बनी, जिसके मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय थे; उनकी सरकार अजमेर को अलग इकाई रखना पसंद करती थी। अन्त में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिश पर विलय हुआ।

क्या हुआकिस क्षेत्र के साथ
राजस्थान में मिलेअजमेर-मेरवाड़ा प्रदेश
राजस्थान में मिलेआबू और देलवाड़ा तहसील (सिरोही का बम्बई गया भाग)
राजस्थान में मिलासुनेल टप्पा (मंदसौर ज़िले की मानपुरा तहसील से) — आज झालावाड़ ज़िले में
  • राजप्रमुख का पद समाप्त, उसकी जगह राज्यपाल। राजस्थान के पहले राज्यपाल गुरुमुख निहालसिंह।
  • 1 नवम्बर 1956 को मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया थे; राजधानी जयपुर।
  • महाराज प्रमुख का पद 1955 में भूपालसिंह की मृत्यु के साथ ही ख़त्म हो चुका था।

राजधानी पर दुबारा विचार

अजमेर के विलय के बाद वहाँ के प्रशासनिक हलकों में यह धारणा थी कि जयपुर को राजधानी बनाना अस्थायी फ़ैसला था। इसे परखने को 1957 में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने पी. सत्यनारायण राव की अध्यक्षता वाली राजस्थान कैपिटल इन्क्वायरी कमेटी गठित की (सदस्य: वी. विश्वनाथन, बी.के. गुप्ता) — पर पुराना निर्णय यथावत रहा। इसी रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट की जयपुर खण्डपीठ 1958 में बन्द कर दी गई।

याद रखें: 1 नवम्बर 1956 को ही राज्य का अन्तिम पुनर्गठन हुआ और राजप्रमुख की जगह राज्यपाल आए — इसीलिए इसे सातवाँ और आख़िरी चरण कहा जाता है।

4. राज्य पुनर्गठन आयोग व राज्यों की श्रेणियाँ

काल / क्रमघटनाविवरण
22 दिसम्बर 1953आयोग का गठनअध्यक्ष न्यायमूर्ति फ़ज़ल अली; सदस्य पं. हृदयनाथ कुंजरू और सरदार के.एम. पन्निकर
सितम्बर 1955रिपोर्टआयोग ने रिपोर्ट सौंपी
1956अधिनियमराज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित; 1 नवम्बर 1956 से लागू

स्वतंत्रता के समय राज्यों की चार श्रेणियाँ

श्रेणीसंख्यास्वरूपप्रमुखउदाहरण
क9पहले सीधे ब्रिटिश नियन्त्रण वाले प्रान्तराज्यपालबिहार, मद्रास, बम्बई
ख8रियासतों के एकीकरण से बने राज्यराजप्रमुखराजस्थान, मध्य भारत
ग10चीफ़ कमिश्नर के प्रान्तचीफ़ कमिश्नरअजमेर, दिल्ली

ट्रिक: राजस्थान “ख” श्रेणी का राज्य था (मुखिया राजप्रमुख), अजमेर “ग” श्रेणी का (मुखिया चीफ़ कमिश्नर)। श्रेणियाँ 1956 में समाप्त।

5. आज का राजस्थान

एकीकरण के बाद राज्य में 25 ज़िले थे (1949); अजमेर जुड़ने पर 26 हुए। आगे नए ज़िले बनते गए, अगस्त 2023 में गिनती 50 तक पहुँची और दिसम्बर 2024 में 9 ज़िले निरस्त होने पर आज के 41 ज़िले और 7 संभाग रहे।

6. रियासतों के रिकॉर्ड व प्रिवीपर्स

परीक्षा में इन रिकॉर्डों के सवाल सीधे आते हैं — कौन सबसे बड़ी, सबसे छोटी, कौन पाकिस्तान की ओर झुका, किसे कितना प्रिवीपर्स मिला। नीचे दो भाग हैं: रिकॉर्ड और प्रिवीपर्स की तालिका।

रोचक तथ्य: सबसे छोटी रियासत शाहपुरा — क्षेत्रफल में भी (405 वर्ग मील) और जनसंख्या में भी (61,176); प्रिवीपर्स में भी सबसे कम (90,000 रु.)। तीनों रिकॉर्ड एक नाम।

7. रिकॉर्ड

प्रश्नउत्तर
सबसे प्राचीन रियासतमेवाड़ (उदयपुर)
सबसे नवीन रियासतझालावाड़ — अंग्रेज़ों द्वारा बसाई एकमात्र रियासत
क्षेत्रफल में सबसे बड़ीजोधपुर (मारवाड़) — लगभग 35,000 वर्ग मील
क्षेत्रफल में दूसरीबीकानेर — 23,317 वर्ग मील

… शेष 7 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

8. प्रिवीपर्स

विलय के बदले शासकों को हर साल एक निश्चित राशि मिलती थी, जिसे प्रिवीपर्स कहते हैं। तीन बड़ी रियासतों के लिए यह राशि बी.आर. पटेल समिति के समय तय हुई। आगे चलकर संविधान के 26वें संशोधन (1971) से यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई।

  • सर्वाधिक ➜ जयपुर — 18 लाख रु.
  • न्यूनतम (रियासत) ➜ शाहपुरा — 90,000 रु.
  • सर्वाधिक (ठिकाना) ➜ कुशलगढ़ — 34,475 रु.
रियासततत्कालीन नरेशप्रिवीपर्स (रु. वार्षिक)
जयपुरमहाराजा मानसिंह द्वितीय18,00000
जोधपुरमहाराजा हनुवन्तसिंह17,50000
बीकानेरमहाराजा शार्दूलसिंह17,00000
उदयपुरमहाराणा भूपालसिंह10,00000

… शेष 18 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

9. संविधान सभा व आन्दोलन के नाम

एकीकरण से सीधे जुड़ी तालिकाओं के साथ तीन और सूचियाँ परीक्षा में बार-बार आती हैं: संविधान सभा के राजस्थानी चेहरे, क्रान्तिकारी और उनकी जेलें, तथा शहीदों की तारीख़ें।

10. संविधान सभा के सदस्य

1946 में मनोनीत राजस्थानी सदस्य

क्र.नामरियासत / क्षेत्रक्र.नामरियासत / क्षेत्र
1हीरालाल शास्त्रीजयपुर7मुकुट बिहारी भार्गवअजमेर-मेरवाड़ा
2बलवन्तसिंह मेहताउदयपुर8जसवन्तसिंहबीकानेर
3माणिक्यलाल वर्माउदयपुर9गोकुल लाल असावाशाहपुरा

रियासतों के प्रशासक जो संविधान सभा के सदस्य थे

नामरियासतख़ास बात
सर वी.टी. कृष्णामाचारीजयपुर के दीवानमूल रूप से तमिलनाडु के; 1961 में राज्यसभा पहुँचे
सी.एस. वेंकटाचारीजोधपुरकर्नाटक के, ICS अधिकारी; बाद में राजप्रमुख मानसिंह द्वितीय के प्रशासनिक सलाहकार; 6 जनवरी से 25 अप्रैल 1951 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री
सरदार के.एम. पन्निकरबीकानेरकेरल के; बीकानेर के प्रधानमंत्री; 28 अप्रैल 1947 को बीकानेर के प्रतिनिधि बनकर सभा में; बाद में चीन, मिस्र और फ़्रांस में राजदूत

राजस्थान मूल के तीन और लोग दूसरे प्रान्तों से चुने गए — प्रभुदयाल हिम्मतसिंहका (पश्चिम बंगाल), पद्मपत सिंघानिया (उत्तर प्रदेश) और बनारसीदास झुंझुनूँवाला (बिहार)।

11. क्रान्तिकारी और उनकी जेलें

क्रान्तिकारीजेल / दुर्ग
अर्जुनलाल सेठीवेल्लूर जेल
केसरीसिंह बारहठहज़ारीबाग़ जेल
प्रतापसिंह बारहठबरेली जेल
विजयसिंह पथिकटॉडगढ़ जेल

12. शहीदों की तारीख़ें

काल / क्रमघटनाविवरण
27 मई 1918प्रतापसिंह बारहठशाहपुरा के क्रान्तिकारी; बरेली जेल में शहीद
2 अप्रैल 1923नानक भील · देवीलाल गुर्जरबूँदी
13 जुलाई 1923रूपा जी · कृपा जी धाकड़बेगूँ
19 जून 1942बालमुकुन्द बिस्साजोधपुर

13. रैपिड फायर तथ्य

  • चरण 6 और चरण 7 ➜ 26 जनवरी 1950 (सिरोही) और 1 नवम्बर 1956 (पुनर्गठन)
  • पहले राज्यपाल ➜ गुरुमुख निहालसिंह
  • 1956 में जुड़े क्षेत्र ➜ अजमेर-मेरवाड़ा, आबू-देलवाड़ा तहसील और सुनेल टप्पा
  • पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष ➜ न्यायमूर्ति फ़ज़ल अली (गठन 22 दिसम्बर 1953)
  • राज्यों की श्रेणी ➜ राजस्थान «ख» श्रेणी में (प्रमुख राजप्रमुख), अजमेर «ग» श्रेणी में (प्रमुख चीफ़ कमिश्नर)
  • आज के ज़िले ➜ 41 ज़िले और 7 संभाग (दिसम्बर 2024 में 9 ज़िले निरस्त होने के बाद)
  • तीनों रिकॉर्ड एक नाम ➜ शाहपुरा — क्षेत्रफल (405 वर्ग मील), जनसंख्या (61,176) और प्रिवीपर्स (90,000 रु.) तीनों में सबसे छोटी
  • सबसे प्राचीन व सबसे नवीन रियासत ➜ मेवाड़ और झालावाड़
  • सर्वाधिक प्रिवीपर्स ➜ जयपुर — 18 लाख रु.; यह व्यवस्था संविधान के 26वें संशोधन (1971) से ख़त्म हुई

अगले भाग में स्वतंत्रता सेनानियों का पहला हिस्सा — उपनाम, प्रथम व अनूठे नाम, डाक टिकट वाले व्यक्तित्त्व और सेठी व बारहठ परिवार जैसे क्रान्तिकारी।

पिछला भाग: राजस्थान का एकीकरण: पहले तीन चरण एवं वृहद् राजस्थान

अगला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: क्रान्तिकारी (भाग 1)

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पूरी श्रृंखला: राजस्थान का इतिहास — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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