एकीकरण की कहानी सिरोही और अजमेर पर आकर ही पूरी होती है, क्योंकि दोनों ने आख़िरी चरणों में अपनी जगह बदली और उसी से 1 नवम्बर 1956 का आज वाला स्वरूप निकला। इस भाग में चरण 6 और 7, राज्य पुनर्गठन आयोग व राज्यों की श्रेणियाँ, आज का राजस्थान तथा रियासतों के रिकॉर्ड व प्रिवीपर्स रखे गए हैं। अन्त में संविधान सभा के सदस्यों, क्रान्तिकारियों की जेलों और शहीदों की तारीख़ों की सूचियाँ भी जोड़ी गई हैं।
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1. सिरोही और अन्तिम रूप
वृहद् राजस्थान के बाद सिर्फ़ सिरोही अलग रहा था। गुजरात की तरफ़ झुके केन्द्र और राजस्थान की माँग के बीच खींचतान के बाद 1950 में उसका बँटवारा हुआ; और फिर 1956 में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिश पर आज का स्वरूप मिला।
- चरण 6 ➜ 26 जनवरी 1950
- चरण 7 ➜ 1 नवम्बर 1956
- पहले राज्यपाल ➜ गुरुमुख निहालसिंह
2. चरण 6 — सिरोही
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1 फ़रवरी 1948 | एजेंसी बदली | जनता के विरोध के बावजूद सिरोही राजपूताना एजेंसी से हटाकर गुजरात एजेंसी के अधीन कर दिया गया |
| 18 अप्रैल 1948 | नेहरू से भेंट | संयुक्त राजस्थान के उद्घाटन पर राजस्थान के काँग्रेस कार्यकर्ताओं ने नेहरू से सिरोही को राजस्थान में मिलाने की प्रार्थना की |
| 8 नवम्बर 1948 | केन्द्र का प्रबन्ध | सिरोही का शासन भारत सरकार को सुपुर्द |
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- पटेल तथा गुजराती नेता सिरोही और आबू को गुजरात के साथ रखने के पक्ष में थे; राजस्थान के नेता इसके ख़िलाफ़ थे।
- जनता के आक्रोश को शान्त करने को यह बँटवारा हुआ, पर इस फ़ैसले के विरोध में सिरोही ही नहीं, पूरे राजस्थान में बड़ा आन्दोलन उठा — मुखिया गोकुलभाई भट्ट, सहयोगी बलवन्तसिंह मेहता।
- इकाइयाँ ➜ संयुक्त वृहद् राजस्थान + सिरोही; राजधानी जयपुर; मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री; राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वितीय; महाराज प्रमुख भूपालसिंह।
याद रखें: आबू–देलवाड़ा सिरोही का वही भाग है जो 1 नवम्बर 1956 को वापस राजस्थान को मिला — यानी सिरोही का दो चरणों में जुड़ना (1950 और 1956)।
3. चरण 7 — पुनर्गठित राजस्थान
आज़ादी के बाद भी अजमेर पहले की तरह केन्द्र के प्रशासन में रहा। राजस्थान की सब रियासतें मिलने पर उसके विलय का सवाल उठा। आम चुनाव (1952) के बाद अजमेर की तीस सीटों वाली धारा सभा बनी, जिसके मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय थे; उनकी सरकार अजमेर को अलग इकाई रखना पसंद करती थी। अन्त में राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफ़ारिश पर विलय हुआ।
| क्या हुआ | किस क्षेत्र के साथ |
|---|---|
| राजस्थान में मिले | अजमेर-मेरवाड़ा प्रदेश |
| राजस्थान में मिले | आबू और देलवाड़ा तहसील (सिरोही का बम्बई गया भाग) |
| राजस्थान में मिला | सुनेल टप्पा (मंदसौर ज़िले की मानपुरा तहसील से) — आज झालावाड़ ज़िले में |
- राजप्रमुख का पद समाप्त, उसकी जगह राज्यपाल। राजस्थान के पहले राज्यपाल गुरुमुख निहालसिंह।
- 1 नवम्बर 1956 को मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया थे; राजधानी जयपुर।
- महाराज प्रमुख का पद 1955 में भूपालसिंह की मृत्यु के साथ ही ख़त्म हो चुका था।
राजधानी पर दुबारा विचार
अजमेर के विलय के बाद वहाँ के प्रशासनिक हलकों में यह धारणा थी कि जयपुर को राजधानी बनाना अस्थायी फ़ैसला था। इसे परखने को 1957 में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने पी. सत्यनारायण राव की अध्यक्षता वाली राजस्थान कैपिटल इन्क्वायरी कमेटी गठित की (सदस्य: वी. विश्वनाथन, बी.के. गुप्ता) — पर पुराना निर्णय यथावत रहा। इसी रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट की जयपुर खण्डपीठ 1958 में बन्द कर दी गई।
याद रखें: 1 नवम्बर 1956 को ही राज्य का अन्तिम पुनर्गठन हुआ और राजप्रमुख की जगह राज्यपाल आए — इसीलिए इसे सातवाँ और आख़िरी चरण कहा जाता है।
4. राज्य पुनर्गठन आयोग व राज्यों की श्रेणियाँ
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 22 दिसम्बर 1953 | आयोग का गठन | अध्यक्ष न्यायमूर्ति फ़ज़ल अली; सदस्य पं. हृदयनाथ कुंजरू और सरदार के.एम. पन्निकर |
| सितम्बर 1955 | रिपोर्ट | आयोग ने रिपोर्ट सौंपी |
| 1956 | अधिनियम | राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित; 1 नवम्बर 1956 से लागू |
स्वतंत्रता के समय राज्यों की चार श्रेणियाँ
| श्रेणी | संख्या | स्वरूप | प्रमुख | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| क | 9 | पहले सीधे ब्रिटिश नियन्त्रण वाले प्रान्त | राज्यपाल | बिहार, मद्रास, बम्बई |
| ख | 8 | रियासतों के एकीकरण से बने राज्य | राजप्रमुख | राजस्थान, मध्य भारत |
| ग | 10 | चीफ़ कमिश्नर के प्रान्त | चीफ़ कमिश्नर | अजमेर, दिल्ली |
ट्रिक: राजस्थान “ख” श्रेणी का राज्य था (मुखिया राजप्रमुख), अजमेर “ग” श्रेणी का (मुखिया चीफ़ कमिश्नर)। श्रेणियाँ 1956 में समाप्त।
5. आज का राजस्थान
एकीकरण के बाद राज्य में 25 ज़िले थे (1949); अजमेर जुड़ने पर 26 हुए। आगे नए ज़िले बनते गए, अगस्त 2023 में गिनती 50 तक पहुँची और दिसम्बर 2024 में 9 ज़िले निरस्त होने पर आज के 41 ज़िले और 7 संभाग रहे।
6. रियासतों के रिकॉर्ड व प्रिवीपर्स
परीक्षा में इन रिकॉर्डों के सवाल सीधे आते हैं — कौन सबसे बड़ी, सबसे छोटी, कौन पाकिस्तान की ओर झुका, किसे कितना प्रिवीपर्स मिला। नीचे दो भाग हैं: रिकॉर्ड और प्रिवीपर्स की तालिका।
रोचक तथ्य: सबसे छोटी रियासत शाहपुरा — क्षेत्रफल में भी (405 वर्ग मील) और जनसंख्या में भी (61,176); प्रिवीपर्स में भी सबसे कम (90,000 रु.)। तीनों रिकॉर्ड एक नाम।
7. रिकॉर्ड
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| सबसे प्राचीन रियासत | मेवाड़ (उदयपुर) |
| सबसे नवीन रियासत | झालावाड़ — अंग्रेज़ों द्वारा बसाई एकमात्र रियासत |
| क्षेत्रफल में सबसे बड़ी | जोधपुर (मारवाड़) — लगभग 35,000 वर्ग मील |
| क्षेत्रफल में दूसरी | बीकानेर — 23,317 वर्ग मील |
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8. प्रिवीपर्स
विलय के बदले शासकों को हर साल एक निश्चित राशि मिलती थी, जिसे प्रिवीपर्स कहते हैं। तीन बड़ी रियासतों के लिए यह राशि बी.आर. पटेल समिति के समय तय हुई। आगे चलकर संविधान के 26वें संशोधन (1971) से यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
- सर्वाधिक ➜ जयपुर — 18 लाख रु.
- न्यूनतम (रियासत) ➜ शाहपुरा — 90,000 रु.
- सर्वाधिक (ठिकाना) ➜ कुशलगढ़ — 34,475 रु.
| रियासत | तत्कालीन नरेश | प्रिवीपर्स (रु. वार्षिक) |
|---|---|---|
| जयपुर | महाराजा मानसिंह द्वितीय | 18,00000 |
| जोधपुर | महाराजा हनुवन्तसिंह | 17,50000 |
| बीकानेर | महाराजा शार्दूलसिंह | 17,00000 |
| उदयपुर | महाराणा भूपालसिंह | 10,00000 |
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9. संविधान सभा व आन्दोलन के नाम
एकीकरण से सीधे जुड़ी तालिकाओं के साथ तीन और सूचियाँ परीक्षा में बार-बार आती हैं: संविधान सभा के राजस्थानी चेहरे, क्रान्तिकारी और उनकी जेलें, तथा शहीदों की तारीख़ें।
10. संविधान सभा के सदस्य
1946 में मनोनीत राजस्थानी सदस्य
| क्र. | नाम | रियासत / क्षेत्र | क्र. | नाम | रियासत / क्षेत्र |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | हीरालाल शास्त्री | जयपुर | 7 | मुकुट बिहारी भार्गव | अजमेर-मेरवाड़ा |
| 2 | बलवन्तसिंह मेहता | उदयपुर | 8 | जसवन्तसिंह | बीकानेर |
| 3 | माणिक्यलाल वर्मा | उदयपुर | 9 | गोकुल लाल असावा | शाहपुरा |
रियासतों के प्रशासक जो संविधान सभा के सदस्य थे
| नाम | रियासत | ख़ास बात |
|---|---|---|
| सर वी.टी. कृष्णामाचारी | जयपुर के दीवान | मूल रूप से तमिलनाडु के; 1961 में राज्यसभा पहुँचे |
| सी.एस. वेंकटाचारी | जोधपुर | कर्नाटक के, ICS अधिकारी; बाद में राजप्रमुख मानसिंह द्वितीय के प्रशासनिक सलाहकार; 6 जनवरी से 25 अप्रैल 1951 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री |
| सरदार के.एम. पन्निकर | बीकानेर | केरल के; बीकानेर के प्रधानमंत्री; 28 अप्रैल 1947 को बीकानेर के प्रतिनिधि बनकर सभा में; बाद में चीन, मिस्र और फ़्रांस में राजदूत |
राजस्थान मूल के तीन और लोग दूसरे प्रान्तों से चुने गए — प्रभुदयाल हिम्मतसिंहका (पश्चिम बंगाल), पद्मपत सिंघानिया (उत्तर प्रदेश) और बनारसीदास झुंझुनूँवाला (बिहार)।
11. क्रान्तिकारी और उनकी जेलें
| क्रान्तिकारी | जेल / दुर्ग |
|---|---|
| अर्जुनलाल सेठी | वेल्लूर जेल |
| केसरीसिंह बारहठ | हज़ारीबाग़ जेल |
| प्रतापसिंह बारहठ | बरेली जेल |
| विजयसिंह पथिक | टॉडगढ़ जेल |
12. शहीदों की तारीख़ें
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 27 मई 1918 | प्रतापसिंह बारहठ | शाहपुरा के क्रान्तिकारी; बरेली जेल में शहीद |
| 2 अप्रैल 1923 | नानक भील · देवीलाल गुर्जर | बूँदी |
| 13 जुलाई 1923 | रूपा जी · कृपा जी धाकड़ | बेगूँ |
| 19 जून 1942 | बालमुकुन्द बिस्सा | जोधपुर |
13. रैपिड फायर तथ्य
- चरण 6 और चरण 7 ➜ 26 जनवरी 1950 (सिरोही) और 1 नवम्बर 1956 (पुनर्गठन)
- पहले राज्यपाल ➜ गुरुमुख निहालसिंह
- 1956 में जुड़े क्षेत्र ➜ अजमेर-मेरवाड़ा, आबू-देलवाड़ा तहसील और सुनेल टप्पा
- पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष ➜ न्यायमूर्ति फ़ज़ल अली (गठन 22 दिसम्बर 1953)
- राज्यों की श्रेणी ➜ राजस्थान «ख» श्रेणी में (प्रमुख राजप्रमुख), अजमेर «ग» श्रेणी में (प्रमुख चीफ़ कमिश्नर)
- आज के ज़िले ➜ 41 ज़िले और 7 संभाग (दिसम्बर 2024 में 9 ज़िले निरस्त होने के बाद)
- तीनों रिकॉर्ड एक नाम ➜ शाहपुरा — क्षेत्रफल (405 वर्ग मील), जनसंख्या (61,176) और प्रिवीपर्स (90,000 रु.) तीनों में सबसे छोटी
- सबसे प्राचीन व सबसे नवीन रियासत ➜ मेवाड़ और झालावाड़
- सर्वाधिक प्रिवीपर्स ➜ जयपुर — 18 लाख रु.; यह व्यवस्था संविधान के 26वें संशोधन (1971) से ख़त्म हुई
अगले भाग में स्वतंत्रता सेनानियों का पहला हिस्सा — उपनाम, प्रथम व अनूठे नाम, डाक टिकट वाले व्यक्तित्त्व और सेठी व बारहठ परिवार जैसे क्रान्तिकारी।
पिछला भाग: राजस्थान का एकीकरण: पहले तीन चरण एवं वृहद् राजस्थान
अगला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: क्रान्तिकारी (भाग 1)
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