स्वतंत्रता की लड़ाई केवल जेल जाने से नहीं लड़ी गई; उसके पीछे इलाक़े-इलाक़े के नेता थे और उन्हें खड़ा रखने वाली धन की ताक़त भी। इस भाग में प्रजामण्डल की शेष धारा के नेता दिए गए हैं, फिर दानवीर-उद्योगपति: बजाज, राठी, बिड़ला और जाजोदिया व नृसिंह दास। अन्त में कलम, शिक्षा व सुधार की शाखा आती है, जिसमें शिक्षा के साधक और पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादक शामिल हैं।
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1. भरतपुर-अलवर-मथुरा पट्टी
| व्यक्ति | जन्म · स्थान | योगदान |
|---|---|---|
| पं. जुगलकिशोर चतुर्वेदी | 9 नवम्बर 1904 · सौंख (मथुरा, उ.प्र.) | भरतपुर का गाँधी · राजस्थान का जवाहरलाल नेहरू; कर्मस्थली पूर्वी राजस्थान; भरतपुर में 1930 के दशक की राजनीतिक चेतना उन्हीं के नाम दर्ज |
| गोकुलजी वर्मा | — | शेर-ए-भरतपुर; भरतपुर प्रजामण्डल के प्रमुख नेता; शुरू में सरकारी ठेकेदारी करते थे, फिर राजनीति में आए |
| मास्टर आदित्येन्द्र | 24 जून 1907 · थून (डीग); 1907–1999 | अध्यापन के साथ छात्रों में राष्ट्रभावना जगाई; 1942 के भारत छोड़ो में गिरफ़्तार; निधन 1999 |
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2. वागड़-सिरोही-जैसलमेर
गोकुल भाई भट्ट (1898–1986)
- जन्म 19 फरवरी 1898, हाथल गाँव (सिरोही); पूरा नाम गोकुलभाई दौलतराम भट्ट; उपनाम “राजस्थान का गाँधी”।
- पिता की बम्बई की नौकरी के कारण शिक्षा की शुरुआत वहीं हुई; गाँधीजी से मिलकर परदेस जाने का इरादा छोड़ा, देश-सेवा अपनाई और असहयोग में कूदे।
- 1939 में सिरोही प्रजामण्डल; 1947 में सिरोही की लोकप्रिय सरकार में प्रधानमंत्री; विनोबा के साथ भूदान में अहम भूमिका।
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भोगीलाल पांड्या (1904–1981)
- जन्म सीमलवाड़ा (डूँगरपुर), 15 मार्च 1904; उपनाम “वागड़ का गाँधी”; पत्नी मणी पांड्या (“वागड़ बा”)।
- वागड़ सेवा मंदिर बनाया; उसे अवैध घोषित करने पर 1938 में सेवा संघ (डूँगरपुर); 1935 में हरिजन सेवा समिति; 1944 में डूँगरपुर प्रजामण्डल; भीलों में जागृति के लिए वनवासी सेवा संघ।
- आज़ादी के बाद सागवाड़ा से विधायक; सुखाड़िया के समय दो बार मंत्री (उद्योग और चिकित्सा); 1976 में पद्मभूषण।
सागरमल गोपा (1900–1946)
- जन्म 3 नवम्बर 1900, जैसलमेर। महारावल जवाहरसिंह के अत्याचारों का खुला विरोध किया।
- 1915 में सर्वहितकारी वाचनालय बनाया; पुस्तकें — जैसलमेर का गुण्डाराज, आज़ादी के दीवाने, रघुनाथ सिंह का मुक़दमा — जिनमें राजशाही की काली करतूतों की लम्बी सूची थी।
- जैसलमेर से बाहर कर दिए गए; पिता के निधन पर लौटे तो लोगों को उकसाने के इल्ज़ाम में पकड़ लिए गए — 6 वर्ष की क़ैद।
| व्यक्ति | इलाक़ा | योगदान |
|---|---|---|
| जीतमल पुरोहित | जैसलमेर | स्वतंत्रता संग्राम में जैसलमेर में तिरंगा फहराने वाले पहले व्यक्ति |
| भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदी | बाँसवाड़ा | बम्बई से साप्ताहिक संग्राम; 1942 में भूमिगत रहकर काम; 1943 में धूलजीभाई व चिमनलाल मलोत के साथ बाँसवाड़ा प्रजामण्डल |
3. अजमेर-ब्यावर के सेनानी
हरिभाउ उपाध्याय (1893–1972)
- जन्म 9 मार्च 1893, भौंरासा (मध्यप्रदेश); असली नाम बद्रीनाथ; पहचान के नाम — सर्वोदयी नेता, गाँधीवादी नेता, दा-साहब।
- अजमेर में स्थापनाएँ ➜ सस्ता साहित्य मंडल (1 अप्रैल 1925), गाँधी आश्रम (1 अगस्त 1927; बाबा नृसिंहदास अग्रवाल की मदद), महिला शिक्षा सदन (3 अक्टूबर 1945, हटूड़ी)।
- 20 अप्रैल 1930 को अजमेर में नमक क़ानून तोड़ा — 2 वर्ष की सज़ा। सुखाड़िया सरकार में वित्त और शिक्षा मंत्री।
| व्यक्ति | जन्म · स्थान | योगदान |
|---|---|---|
| मुकुट बिहारीलाल भार्गव | 30 जून 1903 · शाहपुरा (मेवाड़) | अजमेर-मेरवाड़ा के प्रमुख राजनेता, सेनानी व प्रतिभाशाली वकील; 1930 में कांग्रेस में; व्यक्तिगत सत्याग्रह और भारत छोड़ो में जेल; 1946 में केन्द्रीय असेम्बली व संविधान सभा के सदस्य; आज़ादी के बाद अजमेर से लगातार 3 बार लोकसभा सदस्य |
| चन्द्रशेखर पाराशर | — | 1930 में अजमेर में सविनय अवज्ञा में गिरफ़्तारी दी; भारत छोड़ो में क्रान्तिकारी गतिविधियाँ; 1947 तक 7 बार जेल; स्वाधीनता के बाद प्रजामण्डल छोड़कर राजस्थान समाजवादी पार्टी खड़ी की |
| ब्रजमोहन लाल शर्मा | ब्यावर | मज़दूरों और दलितों के मसीहा; ब्यावर में राष्ट्रीय मिल मज़दूर संघ की स्थापना |
ट्रिक: हरिभाउ की तीन अजमेर-संस्थाएँ क्रम से — 1925 (साहित्य), 1927 (आश्रम), 1945 (महिला शिक्षा); पत्र-पत्रिकाएँ “कलम और प्रेस” में हैं।
4. दानवीर व उद्योगपति
राजस्थान की धरती से निकले व्यापारियों ने आन्दोलन की आर्थिक रीढ़ बनाई। इनमें तीन को स्वतंत्रता संग्राम के “तीन भामाशाह” कहा जाता है: राठी (सेठ दामोदर दास), जाजोदिया (सेठ घीसूलाल) और नृसिंह दास अग्रवाल (बाबा)।
| नाम | धन्धा / स्थान | आज़ादी की लड़ाई में मदद |
|---|---|---|
| जमनालाल बजाज | सीकर के काशी का बास | गाँधीजी के पाँचवें पुत्र; कांग्रेस व पत्रों को धन |
| दामोदर दास राठी | ब्यावर (कृष्णा मिल) | क्रान्तिकारियों को धन-हथियार |
| घीसूलाल जाजोदिया | लक्ष्मणगढ़ (सीकर) → ब्यावर | क्रान्तिकारियों को धन; 1921 की मज़दूर हड़ताल; 1930 नमक सत्याग्रह |
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5. सेठ जमनालाल बजाज
- जन्म ➜ 1889 · काशी का बास (सीकर)
- निधन ➜ 1942
- गाँधी से सम्पर्क ➜ 1915
- गाँधीजी से भेंट 1915 में हुई और फिर आजीवन उनके विचारों पर चले; नागपुर अधिवेशन (1920) में उन्हें “गाँधीजी के पाँचवें पुत्र” कहा गया।
- असहयोग के दौरान 1921 में अंग्रेज़ों की दी “रायबहादुर” उपाधि लौटाई; 1 लाख रुपये तिलक स्वराज कोष में दिए।
- 1921 में वर्धा में सत्याग्रह आश्रम बनाया।
- राजस्थान में सबसे पहले उत्तरदायी शासन की माँग करने वाले व्यक्ति।
6. दामोदर दास राठी
- जन्म ➜ 8 फरवरी 1884 · पोकरण (जैसलमेर)
- निधन ➜ 2 जनवरी 1918
- कर्मस्थली ➜ ब्यावर
- ब्यावर में 1889 में राजस्थान की पहली सूती वस्त्र मिल — “द कृष्णा मिल” पिता खींवराज राठी ने स्थापित की।
- उद्योगपति; क्रान्तिकारियों को आर्थिक सहायता देते थे, इसलिए “स्वतंत्रता संग्राम का भामाशाह”। खरवा के राव गोपालसिंह योजनाएँ चलाते थे, राठी उन्हें धन देते थे।
- शिक्षा के मोर्चे पर नवभारत विद्यालय तथा सनातन धर्म के स्कूल व कॉलेज ब्यावर में बनवाए।
7. घनश्यामदास बिड़ला
- जन्म ➜ अप्रैल 1894 · पिलानी (झुंझुनूं)
- निधन ➜ 11 जून 1983
- पद्मविभूषण ➜ 1957 — राजस्थान के पहले
- बिड़ला समूह के संस्थापक; पिलानी में बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (BITS) की स्थापना; हिन्दुस्तान टाइम्स और हिन्दुस्तान मोटर्स की नींव।
- कलकत्ता में पहली जूट मिल (1918–19)।
- वैज्ञानिक सी.वी. रमन के शोध को आर्थिक सहायता दी — बाद में रमन को नोबेल मिला।
8. जाजोदिया व नृसिंह दास
| व्यक्ति | जन्म · स्थान | योगदान |
|---|---|---|
| सेठ घीसूलाल जाजोदिया | 1884 · लक्ष्मणगढ़ (सीकर) | ब्यावर को कर्मस्थली बनाकर क्रान्तिकारियों की आर्थिक मदद; 1921 में ब्यावर की मज़दूर हड़ताल का संचालन; 1930 में ब्यावर का नमक सत्याग्रह |
| बाबा नृसिंह दास (नागौर) | नागौर | तीन भामाशाहों की त्रयी में शामिल; 1921 में असहयोग आन्दोलन के दौरान सारा धन गाँधीजी को अर्पित; हरिभाउ उपाध्याय के गाँधी आश्रम में सहयोगी |
| ब्रजमोहन लाल शर्मा | ब्यावर | मज़दूरों-दलितों के मसीहा; राष्ट्रीय मिल मज़दूर संघ (ब्यावर) |
9. कलम, शिक्षा व सुधार
स्वतंत्रता की लड़ाई केवल जेल की लड़ाई नहीं थी — स्कूल, पुस्तकालय, अख़बार और क़ानून भी उसके हथियार थे। इस शाखा के लोग उसी रचनात्मक पक्ष के प्रतीक हैं।
10. शिक्षा के साधक
स्वामी केशवानन्द — राजस्थान के शिक्षासंत
- जन्म 1883, मंगलूणा गाँव (लक्ष्मणगढ़, सीकर) — जाट परिवार, पिता चौधरी ठाकरसी; मूल नाम बीरमा।
- पंजाब के फाज़िल्का के एक उदासी साधु के शिष्य बनकर उदासी पंथ में दीक्षा ली।
- गाँधीजी से प्रभावित होकर 1921 से 1931 तक स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लिया और जेल गए।
मोहन सिंह मेहता
- जन्म 20 अप्रैल 1895, भीलवाड़ा; देश के जाने-माने शिक्षाविद् और राजस्थान विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति।
- स्वतंत्रता से पूर्व उन्होंने बाँसवाड़ा रियासत के दीवान और मेवाड़ के राजस्व मंत्री का दायित्व निभाया; वे संविधान सभा के भी सदस्य थे।
- 1931 में उदयपुर में विद्या भवन की स्थापना।
11. पत्र-पत्रिकाएँ व सम्पादक
| पत्र / पत्रिका | सम्पादक · संस्थापक | स्थान · वर्ष |
|---|---|---|
| तरुण राजस्थान | जयनारायण व्यास (मुख्य), विजयसिंह पथिक; बाद में अचलेश्वर प्रसाद, रामनारायण चौधरी | ब्यावर · 1927 (पथिक के नवीन राजस्थान का नया नाम भी) |
| नवीन राजस्थान | विजयसिंह पथिक; रामनारायण चौधरी | अजमेर |
| राजस्थान केसरी | विजयसिंह पथिक | वर्धा |
| ऊपरमाल का डंका | विजयसिंह पथिक | बिजौलिया |
कर्पूरचन्द्र कुलिश
- जन्म 20 मार्च 1926, सोडा गाँव (टोंक)।
- 1975 के आपातकाल में राजस्थान के गाँवों की यात्राएँ कीं और ग्रामीण जीवन पर श्रृंखला “मैं देखता चला गया” छापी।
- ढूँढाड़ी भाषा में नियमित स्तम्भ “पोलमपोल” लिखा।
पं. झाबरमल्ल शर्मा
- जन्म 1888, जसरापुर (झुंझुनूं); साहित्यकार, पत्रकार और इतिहासकार; उपनाम “पत्रकारिता का भीष्म पितामह”।
- प्रमुख पुस्तकें ➜ खेतड़ी का इतिहास, सीकर का इतिहास, शेखावाटी का इतिहास, श्री अरविन्द चरित, राजस्थान और नेहरू परिवार।
ध्यान दें: तरुण राजस्थान से तीन नाम जुड़े हैं — व्यास (1927, ब्यावर), पथिक और अचलेश्वर प्रसाद; इसी तरह नवीन राजस्थान → तरुण राजस्थान का नाम-परिवर्तन।
12. रैपिड फायर तथ्य
- भरतपुर का गाँधी ➜ पं. जुगलकिशोर चतुर्वेदी; गोकुलजी वर्मा «शेर-ए-भरतपुर» कहलाए
- राजस्थान का गाँधी ➜ गोकुल भाई भट्ट (जन्म 19 फरवरी 1898); 1939 में सिरोही प्रजामण्डल
- वागड़ का गाँधी ➜ भोगीलाल पांड्या; 1976 में पद्मभूषण
- जैसलमेर के नाम ➜ सागरमल गोपा ने महारावल जवाहरसिंह के अत्याचारों का विरोध किया (6 वर्ष की क़ैद); जीतमल पुरोहित ने वहाँ पहली बार तिरंगा फहराया
- हरिभाउ उपाध्याय की संस्थाएँ ➜ 1925 (सस्ता साहित्य मंडल), 1927 (गाँधी आश्रम), 1945 (महिला शिक्षा सदन)
- तीन भामाशाह ➜ दामोदर दास राठी, घीसूलाल जाजोदिया और बाबा नृसिंह दास
- जमनालाल बजाज ➜ «गाँधीजी के पाँचवें पुत्र»; 1921 में रायबहादुर उपाधि लौटाई; राजस्थान में सबसे पहले उत्तरदायी शासन की माँग की
- दामोदर दास राठी ➜ ब्यावर की «द कृष्णा मिल» (1889) राजस्थान की पहली सूती वस्त्र मिल; स्थापना पिता खींवराज राठी ने की
- घनश्यामदास बिड़ला ➜ 1957 में पद्मविभूषण पाने वाले राजस्थान के पहले व्यक्ति; पिलानी में BITS की स्थापना
अगले भाग में इतिहासकार व भाषाविद्, हरविलास शारदा और विवेकानन्द-खेतड़ी का नाता, विज्ञान-संरक्षण के नाम, फिर राजस्थान के मुख्यमंत्री और सेना के वीर।
पिछला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: प्रजामण्डल के सेनानी (भाग 1)
अगला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: शिखर पुरुष व रणबाँकुरे
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पूरी श्रृंखला: राजस्थान का इतिहास — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय
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