राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: प्रजामण्डल के सेनानी (भाग 2) – Rajasthan History Chapter 55

भरतपुर, वागड़, सिरोही, जैसलमेर व अजमेर के सेनानी, तीन भामाशाह जैसे दानवीर और कलम-शिक्षा के साधक।

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In this chapter (12 sections)
  1. भरतपुर-अलवर-मथुरा पट्टी
  2. वागड़-सिरोही-जैसलमेर
  3. अजमेर-ब्यावर के सेनानी
  4. दानवीर व उद्योगपति
  5. सेठ जमनालाल बजाज
  6. दामोदर दास राठी
  7. घनश्यामदास बिड़ला
  8. जाजोदिया व नृसिंह दास
  9. कलम, शिक्षा व सुधार
  10. शिक्षा के साधक
  11. पत्र-पत्रिकाएँ व सम्पादक
  12. रैपिड फायर तथ्य

स्वतंत्रता की लड़ाई केवल जेल जाने से नहीं लड़ी गई; उसके पीछे इलाक़े-इलाक़े के नेता थे और उन्हें खड़ा रखने वाली धन की ताक़त भी। इस भाग में प्रजामण्डल की शेष धारा के नेता दिए गए हैं, फिर दानवीर-उद्योगपति: बजाज, राठी, बिड़ला और जाजोदिया व नृसिंह दास। अन्त में कलम, शिक्षा व सुधार की शाखा आती है, जिसमें शिक्षा के साधक और पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादक शामिल हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी, 7 चॉक-बोर्ड चित्र, 7 चार्ट, 22 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. भरतपुर-अलवर-मथुरा पट्टी

व्यक्तिजन्म · स्थानयोगदान
पं. जुगलकिशोर चतुर्वेदी9 नवम्बर 1904 · सौंख (मथुरा, उ.प्र.)भरतपुर का गाँधी · राजस्थान का जवाहरलाल नेहरू; कर्मस्थली पूर्वी राजस्थान; भरतपुर में 1930 के दशक की राजनीतिक चेतना उन्हीं के नाम दर्ज
गोकुलजी वर्मा—शेर-ए-भरतपुर; भरतपुर प्रजामण्डल के प्रमुख नेता; शुरू में सरकारी ठेकेदारी करते थे, फिर राजनीति में आए
मास्टर आदित्येन्द्र24 जून 1907 · थून (डीग); 1907–1999अध्यापन के साथ छात्रों में राष्ट्रभावना जगाई; 1942 के भारत छोड़ो में गिरफ़्तार; निधन 1999

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

2. वागड़-सिरोही-जैसलमेर

गोकुल भाई भट्ट (1898–1986)

  • जन्म 19 फरवरी 1898, हाथल गाँव (सिरोही); पूरा नाम गोकुलभाई दौलतराम भट्ट; उपनाम “राजस्थान का गाँधी”।
  • पिता की बम्बई की नौकरी के कारण शिक्षा की शुरुआत वहीं हुई; गाँधीजी से मिलकर परदेस जाने का इरादा छोड़ा, देश-सेवा अपनाई और असहयोग में कूदे।
  • 1939 में सिरोही प्रजामण्डल; 1947 में सिरोही की लोकप्रिय सरकार में प्रधानमंत्री; विनोबा के साथ भूदान में अहम भूमिका।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

भोगीलाल पांड्या (1904–1981)

  • जन्म सीमलवाड़ा (डूँगरपुर), 15 मार्च 1904; उपनाम “वागड़ का गाँधी”; पत्नी मणी पांड्या (“वागड़ बा”)।
  • वागड़ सेवा मंदिर बनाया; उसे अवैध घोषित करने पर 1938 में सेवा संघ (डूँगरपुर); 1935 में हरिजन सेवा समिति; 1944 में डूँगरपुर प्रजामण्डल; भीलों में जागृति के लिए वनवासी सेवा संघ।
  • आज़ादी के बाद सागवाड़ा से विधायक; सुखाड़िया के समय दो बार मंत्री (उद्योग और चिकित्सा); 1976 में पद्मभूषण।

सागरमल गोपा (1900–1946)

  • जन्म 3 नवम्बर 1900, जैसलमेर। महारावल जवाहरसिंह के अत्याचारों का खुला विरोध किया।
  • 1915 में सर्वहितकारी वाचनालय बनाया; पुस्तकें — जैसलमेर का गुण्डाराज, आज़ादी के दीवाने, रघुनाथ सिंह का मुक़दमा — जिनमें राजशाही की काली करतूतों की लम्बी सूची थी।
  • जैसलमेर से बाहर कर दिए गए; पिता के निधन पर लौटे तो लोगों को उकसाने के इल्ज़ाम में पकड़ लिए गए — 6 वर्ष की क़ैद।
व्यक्तिइलाक़ायोगदान
जीतमल पुरोहितजैसलमेरस्वतंत्रता संग्राम में जैसलमेर में तिरंगा फहराने वाले पहले व्यक्ति
भूपेन्द्रनाथ त्रिवेदीबाँसवाड़ाबम्बई से साप्ताहिक संग्राम; 1942 में भूमिगत रहकर काम; 1943 में धूलजीभाई व चिमनलाल मलोत के साथ बाँसवाड़ा प्रजामण्डल

3. अजमेर-ब्यावर के सेनानी

हरिभाउ उपाध्याय (1893–1972)

  • जन्म 9 मार्च 1893, भौंरासा (मध्यप्रदेश); असली नाम बद्रीनाथ; पहचान के नाम — सर्वोदयी नेता, गाँधीवादी नेता, दा-साहब।
  • अजमेर में स्थापनाएँ ➜ सस्ता साहित्य मंडल (1 अप्रैल 1925), गाँधी आश्रम (1 अगस्त 1927; बाबा नृसिंहदास अग्रवाल की मदद), महिला शिक्षा सदन (3 अक्टूबर 1945, हटूड़ी)।
  • 20 अप्रैल 1930 को अजमेर में नमक क़ानून तोड़ा — 2 वर्ष की सज़ा। सुखाड़िया सरकार में वित्त और शिक्षा मंत्री।
व्यक्तिजन्म · स्थानयोगदान
मुकुट बिहारीलाल भार्गव30 जून 1903 · शाहपुरा (मेवाड़)अजमेर-मेरवाड़ा के प्रमुख राजनेता, सेनानी व प्रतिभाशाली वकील; 1930 में कांग्रेस में; व्यक्तिगत सत्याग्रह और भारत छोड़ो में जेल; 1946 में केन्द्रीय असेम्बली व संविधान सभा के सदस्य; आज़ादी के बाद अजमेर से लगातार 3 बार लोकसभा सदस्य
चन्द्रशेखर पाराशर—1930 में अजमेर में सविनय अवज्ञा में गिरफ़्तारी दी; भारत छोड़ो में क्रान्तिकारी गतिविधियाँ; 1947 तक 7 बार जेल; स्वाधीनता के बाद प्रजामण्डल छोड़कर राजस्थान समाजवादी पार्टी खड़ी की
ब्रजमोहन लाल शर्माब्यावरमज़दूरों और दलितों के मसीहा; ब्यावर में राष्ट्रीय मिल मज़दूर संघ की स्थापना

ट्रिक: हरिभाउ की तीन अजमेर-संस्थाएँ क्रम से — 1925 (साहित्य), 1927 (आश्रम), 1945 (महिला शिक्षा); पत्र-पत्रिकाएँ “कलम और प्रेस” में हैं।

4. दानवीर व उद्योगपति

राजस्थान की धरती से निकले व्यापारियों ने आन्दोलन की आर्थिक रीढ़ बनाई। इनमें तीन को स्वतंत्रता संग्राम के “तीन भामाशाह” कहा जाता है: राठी (सेठ दामोदर दास), जाजोदिया (सेठ घीसूलाल) और नृसिंह दास अग्रवाल (बाबा)।

नामधन्धा / स्थानआज़ादी की लड़ाई में मदद
जमनालाल बजाजसीकर के काशी का बासगाँधीजी के पाँचवें पुत्र; कांग्रेस व पत्रों को धन
दामोदर दास राठीब्यावर (कृष्णा मिल)क्रान्तिकारियों को धन-हथियार
घीसूलाल जाजोदियालक्ष्मणगढ़ (सीकर) → ब्यावरक्रान्तिकारियों को धन; 1921 की मज़दूर हड़ताल; 1930 नमक सत्याग्रह

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

5. सेठ जमनालाल बजाज

  • जन्म ➜ 1889 · काशी का बास (सीकर)
  • निधन ➜ 1942
  • गाँधी से सम्पर्क ➜ 1915
  • गाँधीजी से भेंट 1915 में हुई और फिर आजीवन उनके विचारों पर चले; नागपुर अधिवेशन (1920) में उन्हें “गाँधीजी के पाँचवें पुत्र” कहा गया।
  • असहयोग के दौरान 1921 में अंग्रेज़ों की दी “रायबहादुर” उपाधि लौटाई; 1 लाख रुपये तिलक स्वराज कोष में दिए।
  • 1921 में वर्धा में सत्याग्रह आश्रम बनाया।
  • राजस्थान में सबसे पहले उत्तरदायी शासन की माँग करने वाले व्यक्ति।

6. दामोदर दास राठी

  • जन्म ➜ 8 फरवरी 1884 · पोकरण (जैसलमेर)
  • निधन ➜ 2 जनवरी 1918
  • कर्मस्थली ➜ ब्यावर
  • ब्यावर में 1889 में राजस्थान की पहली सूती वस्त्र मिल — “द कृष्णा मिल” पिता खींवराज राठी ने स्थापित की।
  • उद्योगपति; क्रान्तिकारियों को आर्थिक सहायता देते थे, इसलिए “स्वतंत्रता संग्राम का भामाशाह”। खरवा के राव गोपालसिंह योजनाएँ चलाते थे, राठी उन्हें धन देते थे।
  • शिक्षा के मोर्चे पर नवभारत विद्यालय तथा सनातन धर्म के स्कूल व कॉलेज ब्यावर में बनवाए।

7. घनश्यामदास बिड़ला

  • जन्म ➜ अप्रैल 1894 · पिलानी (झुंझुनूं)
  • निधन ➜ 11 जून 1983
  • पद्मविभूषण ➜ 1957 — राजस्थान के पहले
  • बिड़ला समूह के संस्थापक; पिलानी में बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (BITS) की स्थापना; हिन्दुस्तान टाइम्स और हिन्दुस्तान मोटर्स की नींव।
  • कलकत्ता में पहली जूट मिल (1918–19)।
  • वैज्ञानिक सी.वी. रमन के शोध को आर्थिक सहायता दी — बाद में रमन को नोबेल मिला।

8. जाजोदिया व नृसिंह दास

व्यक्तिजन्म · स्थानयोगदान
सेठ घीसूलाल जाजोदिया1884 · लक्ष्मणगढ़ (सीकर)ब्यावर को कर्मस्थली बनाकर क्रान्तिकारियों की आर्थिक मदद; 1921 में ब्यावर की मज़दूर हड़ताल का संचालन; 1930 में ब्यावर का नमक सत्याग्रह
बाबा नृसिंह दास (नागौर)नागौरतीन भामाशाहों की त्रयी में शामिल; 1921 में असहयोग आन्दोलन के दौरान सारा धन गाँधीजी को अर्पित; हरिभाउ उपाध्याय के गाँधी आश्रम में सहयोगी
ब्रजमोहन लाल शर्माब्यावरमज़दूरों-दलितों के मसीहा; राष्ट्रीय मिल मज़दूर संघ (ब्यावर)

9. कलम, शिक्षा व सुधार

स्वतंत्रता की लड़ाई केवल जेल की लड़ाई नहीं थी — स्कूल, पुस्तकालय, अख़बार और क़ानून भी उसके हथियार थे। इस शाखा के लोग उसी रचनात्मक पक्ष के प्रतीक हैं।

10. शिक्षा के साधक

स्वामी केशवानन्द — राजस्थान के शिक्षासंत

  • जन्म 1883, मंगलूणा गाँव (लक्ष्मणगढ़, सीकर) — जाट परिवार, पिता चौधरी ठाकरसी; मूल नाम बीरमा।
  • पंजाब के फाज़िल्का के एक उदासी साधु के शिष्य बनकर उदासी पंथ में दीक्षा ली।
  • गाँधीजी से प्रभावित होकर 1921 से 1931 तक स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लिया और जेल गए।

मोहन सिंह मेहता

  • जन्म 20 अप्रैल 1895, भीलवाड़ा; देश के जाने-माने शिक्षाविद् और राजस्थान विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति।
  • स्वतंत्रता से पूर्व उन्होंने बाँसवाड़ा रियासत के दीवान और मेवाड़ के राजस्व मंत्री का दायित्व निभाया; वे संविधान सभा के भी सदस्य थे।
  • 1931 में उदयपुर में विद्या भवन की स्थापना।

11. पत्र-पत्रिकाएँ व सम्पादक

पत्र / पत्रिकासम्पादक · संस्थापकस्थान · वर्ष
तरुण राजस्थानजयनारायण व्यास (मुख्य), विजयसिंह पथिक; बाद में अचलेश्वर प्रसाद, रामनारायण चौधरीब्यावर · 1927 (पथिक के नवीन राजस्थान का नया नाम भी)
नवीन राजस्थानविजयसिंह पथिक; रामनारायण चौधरीअजमेर
राजस्थान केसरीविजयसिंह पथिकवर्धा
ऊपरमाल का डंकाविजयसिंह पथिकबिजौलिया

कर्पूरचन्द्र कुलिश

  • जन्म 20 मार्च 1926, सोडा गाँव (टोंक)।
  • 1975 के आपातकाल में राजस्थान के गाँवों की यात्राएँ कीं और ग्रामीण जीवन पर श्रृंखला “मैं देखता चला गया” छापी।
  • ढूँढाड़ी भाषा में नियमित स्तम्भ “पोलमपोल” लिखा।

पं. झाबरमल्ल शर्मा

  • जन्म 1888, जसरापुर (झुंझुनूं); साहित्यकार, पत्रकार और इतिहासकार; उपनाम “पत्रकारिता का भीष्म पितामह”।
  • प्रमुख पुस्तकें ➜ खेतड़ी का इतिहास, सीकर का इतिहास, शेखावाटी का इतिहास, श्री अरविन्द चरित, राजस्थान और नेहरू परिवार।

ध्यान दें: तरुण राजस्थान से तीन नाम जुड़े हैं — व्यास (1927, ब्यावर), पथिक और अचलेश्वर प्रसाद; इसी तरह नवीन राजस्थान → तरुण राजस्थान का नाम-परिवर्तन।

12. रैपिड फायर तथ्य

  • भरतपुर का गाँधी ➜ पं. जुगलकिशोर चतुर्वेदी; गोकुलजी वर्मा «शेर-ए-भरतपुर» कहलाए
  • राजस्थान का गाँधी ➜ गोकुल भाई भट्ट (जन्म 19 फरवरी 1898); 1939 में सिरोही प्रजामण्डल
  • वागड़ का गाँधी ➜ भोगीलाल पांड्या; 1976 में पद्मभूषण
  • जैसलमेर के नाम ➜ सागरमल गोपा ने महारावल जवाहरसिंह के अत्याचारों का विरोध किया (6 वर्ष की क़ैद); जीतमल पुरोहित ने वहाँ पहली बार तिरंगा फहराया
  • हरिभाउ उपाध्याय की संस्थाएँ ➜ 1925 (सस्ता साहित्य मंडल), 1927 (गाँधी आश्रम), 1945 (महिला शिक्षा सदन)
  • तीन भामाशाह ➜ दामोदर दास राठी, घीसूलाल जाजोदिया और बाबा नृसिंह दास
  • जमनालाल बजाज ➜ «गाँधीजी के पाँचवें पुत्र»; 1921 में रायबहादुर उपाधि लौटाई; राजस्थान में सबसे पहले उत्तरदायी शासन की माँग की
  • दामोदर दास राठी ➜ ब्यावर की «द कृष्णा मिल» (1889) राजस्थान की पहली सूती वस्त्र मिल; स्थापना पिता खींवराज राठी ने की
  • घनश्यामदास बिड़ला ➜ 1957 में पद्मविभूषण पाने वाले राजस्थान के पहले व्यक्ति; पिलानी में BITS की स्थापना

अगले भाग में इतिहासकार व भाषाविद्, हरविलास शारदा और विवेकानन्द-खेतड़ी का नाता, विज्ञान-संरक्षण के नाम, फिर राजस्थान के मुख्यमंत्री और सेना के वीर।

पिछला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: प्रजामण्डल के सेनानी (भाग 1)

अगला भाग: राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: शिखर पुरुष व रणबाँकुरे

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