Rajasthan History notes

From early civilisations to modern times: dynasties, movements, personalities and key events.

57 chapters · 1 topics

General57 chapters

  1. 1राजस्थान के इतिहास के स्रोत: शिलालेख व प्रशस्तियाँ (भाग 1)राजस्थान के इतिहास में पत्थर पर खुदे प्राचीन लेख — बड़ली से चौहान काल तक, वर्ष और स्थान सहित।
  2. 2राजस्थान के इतिहास के स्रोत: शिलालेख व प्रशस्तियाँ (भाग 2)परमार, चौहान और मेवाड़ के गुहिल शासकों के लेख, फ़ारसी अभिलेख और शुरुआती ताम्र-पत्र।
  3. 3राजस्थान के इतिहास के स्रोत: सिक्के (मुद्राएँ) एवं पुरालेख सामग्रीमेवाड़ के ताम्र-पत्र, आहत से रियासती सिक्के, खुदाई के प्रमुख स्थल तथा परवाने व बहियों जैसे पुरालेख।
  4. 4प्राचीन सभ्यताएँ व पुरास्थल: पाषाण युगराजस्थान का प्राक् इतिहास — तीन बड़े काल, खोज का क्रम और पाषाण युग के प्रमुख पुरास्थल।
  5. 5प्राचीन सभ्यताएँ व पुरास्थल: ताम्रयुगीन सभ्यताएँ एवं कांस्य युग — कालीबंगाताम्रयुगीन गणेश्वर और आहड़-बनास संस्कृति से लेकर काँस्य युग के कालीबंगा तक — नदी, खोजकर्ता और पहचान।
  6. 6प्राचीन सभ्यताएँ व पुरास्थल: लौह युग एवं बैराठ (विराटनगर)लौह युग के स्थल रैढ़, जोधपुरा, नोह, नगरी और बैराठ (विराटनगर), साथ में बौद्ध व गुप्तकालीन पुरास्थल।
  7. 7पौराणिक स्वरूप व जनपद युग: आर्य व पौराणिक युग एवं जनपद युगवैदिक बसावट से जनपद युग तक — आर्यों का प्रवेश, मरु-जांगल देश और मत्स्य, मालव, शिवि, यौधेय की राजधानियाँ।
  8. 8पौराणिक स्वरूप व जनपद युग: मौर्य व विदेशी आक्रमण एवं गुप्त व हूणमौर्य, यूनानी, शक-कुषाण, गुप्त, हूण और वर्धन काल में राजस्थान तथा रियासतों की स्थापना।
  9. 9राजपूतों की उत्पत्ति: एक नज़र मेंराजपूत काल की शुरुआत, «राजपूत» शब्द का अर्थ और अग्निकुण्ड, ब्राह्मण, विदेशी, भारतीय क्षत्रिय व मिश्रित मूल के सभी मत।
  10. 10प्रतिहार वंश (गुर्जर–प्रतिहार): मण्डोर व भड़ौच शाखा एवं भीनमाल व कन्नौज शाखागुर्जर–प्रतिहारों का नाम, उत्पत्ति के मत, मण्डोर-भड़ौच-भीनमाल शाखाएँ, मिहिरभोज तक के शासक और पतन।
  11. 11चौहान राजवंश: शाकम्भरी व अजमेर के चौहान एवं पृथ्वीराज तृतीय (भाग 1)चौहानों की शाखाएँ, उत्पत्ति के मत, सपादलक्ष से अजमेर तक का सफ़र और पृथ्वीराज तृतीय के शुरुआती संघर्ष।
  12. 12चौहान राजवंश: पृथ्वीराज तृतीय (भाग 2) एवं नाडौल व रणथम्भौरतराईन के दोनों युद्ध, पृथ्वीराज तृतीय का अन्त, नाडौल की शाखा और रणथम्भौर के हम्मीर का अलाउद्दीन से संघर्ष।
  13. 13चौहान राजवंश: जालौर, सिवाणा व सिरोही एवं हाड़ौती — बूँदी व कोटाजालौर, सिवाणा और सिरोही की चौहान शाखाएँ, दो साके तथा हाड़ौती में बूँदी-कोटा के शासकों का क्रम।
  14. 14मेवाड़ का गुहिल राजवंश: परिचय व उत्पत्ति एवं बप्पा से रावल रतनसिंह (भाग 1)मेवाड़ का क्षेत्र, प्रतीक व परम्पराएँ, गुहिलों की उत्पत्ति के मत और बप्पा रावल से समरसिंह तक के शासक।
  15. 15मेवाड़ का गुहिल राजवंश: बप्पा से रावल रतनसिंह (भाग 2) एवं हम्मीर से मोकलरतनसिंह और चित्तौड़ का पहला साका, हम्मीर से मोकल तक के शासक तथा कुम्भा की गद्दी, युद्ध, किले व उपाधियाँ।
  16. 16मेवाड़ का गुहिल राजवंश: महाराणा कुम्भा (1433–68) (भाग 2) एवं राणा सांगा व खानवाकुम्भा का दरबार, उदा-रायमल का दौर, राणा सांगा के युद्ध, खानवा में बाबर से हार और सांगा के बाद के शासक।
  17. 17मेवाड़ का गुहिल राजवंश: उदयसिंह व प्रताप (भाग 1)उदयसिंह का शासन, चित्तौड़ का तीसरा साका, प्रताप का राज्याभिषेक और हल्दीघाटी की तैयारी।
  18. 18मेवाड़ का गुहिल राजवंश: उदयसिंह व प्रताप (भाग 2) एवं अमरसिंह से भूपालसिंह (भाग 1)हल्दीघाटी का युद्ध-क्रम, भामाशाह, दिवेर, चावण्ड और अमरसिंह प्रथम की 1615 की संधि तक का इतिहास।
  19. 19मेवाड़ का गुहिल राजवंश: अमरसिंह से भूपालसिंह (भाग 2)राजसिंह प्रथम से भूपालसिंह तक — औरंगज़ेब से टकराव, मराठों का दौर और अंग्रेज़ों से संधि।
  20. 20मारवाड़ का राठौड़ राजवंश: सीहा से चूण्डा एवं रणमल्ल से गांगा (भाग 1)मारवाड़ का क्षेत्र, राठौड़ नाम की उत्पत्ति, राव सीहा से चूण्डा और रणमल्ल, जोधा व सातलदेव तक।
  21. 21मारवाड़ का राठौड़ राजवंश: रणमल्ल से गांगा (भाग 2) एवं राव मालदेव — शौर्य युगराव सूजा, गांगा और मालदेव का शौर्य युग, गिरी-सुमेल की हार तथा चन्द्रसेन व मोटा राजा उदयसिंह।
  22. 22मारवाड़ का राठौड़ राजवंश: मुग़ल युग (1562–1724) (भाग 2)सूरसिंह, गजसिंह, अमरसिंह राठौड़, जसवंत सिंह प्रथम, दुर्गादास-गोरा धाय और अजीतसिंह का काल।
  23. 23मारवाड़ का राठौड़ राजवंश: अभयसिंह से हनुवंत सिंह एवं उपाधियाँ, उपनाम, ग्रन्थअभयसिंह से हनुवंत सिंह तक के जोधपुर शासक, साथ में उपाधियाँ, उपनाम, ग्रन्थ और मुग़ल-विवाह।
  24. 24बीकानेर का राठौड़ राजवंश: राव बीका और लूणकरण एवं जैतसी और कल्याणमलबीकानेर के राठौड़ों का आरम्भ — बीका, लूणकरण, जैतसी, कल्याणमल और रायसिंह तक के मुख्य युद्ध व तथ्य।
  25. 25बीकानेर का राठौड़ राजवंश: दलपतसिंह से अनूपसिंह एवं स्वरूपसिंह से डूँगरसिंहबीकानेर के शासकों का पूरा क्रम — दलपतसिंह से डूँगरसिंह तक, फिर गंगासिंह और सार्दुल सिंह का दौर।
  26. 26आमेर का कछवाहा राजवंश: आरम्भिक शासक एवं भारमल व भगवन्तदासआमेर के कछवाहों की उत्पत्ति, आरम्भिक शासक, भारमल और भगवन्तदास तथा कुँवर मानसिंह के आरम्भिक वर्ष।
  27. 27आमेर का कछवाहा राजवंश: मानसिंह प्रथम एवं मिर्ज़ा राजा जयसिंह प्रथममानसिंह प्रथम की सेवाएँ, मिर्ज़ा राजा जयसिंह प्रथम, रामसिंह व बिशनसिंह और सवाई जयसिंह द्वितीय का आरम्भ।
  28. 28आमेर का कछवाहा राजवंश: जयपुर के बाद के शासकजयपुर की स्थापना, वेधशालाएँ और अश्वमेध, फिर ईश्वरीसिंह से मानसिंह द्वितीय तक जयपुर के शासक।
  29. 29जाट राजवंश (भरतपुर, धौलपुर): बदनसिंह और सूरजमल एवं जवाहरसिंह से रणजीतसिंहभरतपुर और धौलपुर के जाट राज्य का उदय — गोकुल से चूड़ामन, सूरजमल, रणजीतसिंह और धौलपुर के शासक।
  30. 30राजस्थान के अन्य महत्त्वपूर्ण राजवंश: परमार राजवंश एवं जैसलमेर के भाटीसभी रियासतों की झलक, प्राचीन अभिलेख, परमार वंश की चारों शाखाएँ और जैसलमेर के भाटियों की शुरुआत।
  31. 31राजस्थान के अन्य महत्त्वपूर्ण राजवंश: पाँच अन्य रियासतें (भाग 1)जैसलमेर के भाटियों का शेष क्रम, करौली, चावड़ा, वरीक-औलीकर वंश और टोंक, झालावाड़, अलवर की रियासतें।
  32. 32राजस्थान के अन्य महत्त्वपूर्ण राजवंश: मेवाड़ की गुहिल शाखाएँशेखावाटी, किशनगढ़ और मेवाड़ की गुहिल शाखाओं की रियासतें, साथ में साकों की तालिका और उनका क्रम।
  33. 33मध्यकालीन प्रशासन व सामंती व्यवस्था: केन्द्रीय प्रशासन एवं भूमि व भू-राजस्वमध्यकालीन राजपूत रियासतों का केन्द्रीय व स्थानीय प्रशासन, भूमि के प्रकार और लगान वसूलने की विधियाँ।
  34. 34मध्यकालीन प्रशासन व सामंती व्यवस्था: कर व लागें एवं सामंती व्यवस्थाकर व लागों के राज्यवार नाम, रेख और उत्तराधिकार शुल्क तथा मारवाड़, मेवाड़ आदि के सामंतों की श्रेणियाँ।
  35. 35अंग्रेजी प्रभुत्व और उसके प्रभाव: 1818 से पहले की संधियाँ एवं 1817-18 की संधियाँ1803-04 और 1817-18 की संधियाँ, उनके कारण-परिणाम और रियासतों के भीतरी मामलों में अंग्रेजी दख़ल।
  36. 36राजस्थान में 1857 की क्रांति: कारण व पृष्ठभूमि एवं प्रमुख केंद्र (भाग 1)राजस्थान में 1857 की क्रांति के कारण, राजपूताना रेज़ीडेन्सी, छह छावनियाँ तथा नसीराबाद, नीमच व देवली का विद्रोह।
  37. 37राजस्थान में 1857 की क्रांति: प्रमुख केंद्र (भाग 2) एवं शासक, सामंत व पुरस्कारआउवा, कोटा, भरतपुर, धौलपुर व टोंक के विद्रोह तथा शासकों की भूमिका, अंग्रेज़ों के पुरस्कार और सामंतों का सहयोग।
  38. 38राजस्थान में 1857 की क्रांति: तात्या टोपे एवं असफलता व अन्य तथ्यतात्या टोपे के आगमन, राजस्थान में क्रांति की असफलता के कारण और प्रमुख क्रांतिकारियों का परिचय।
  39. 391857 के बाद सुधार और राजनीतिक चेतना: राज्यवार सुधार एवं प्रमुख दरबार व यात्राएँ1857 के बाद मेवाड़, बीकानेर, जोधपुर, जयपुर व कोटा के सुधार तथा बैंटिक, मेयो और लिटन के दरबार।
  40. 401857 के बाद सुधार और राजनीतिक चेतना: दयानंद व आर्य समाज एवं राजनीतिक चेतनादयानंद व आर्य समाज, कांग्रेस और स्वदेशी, क्रांतिकारी घटनाएँ, अंग्रेज़ी शिक्षा और प्रसिद्ध उपनाम।
  41. 41सामाजिक संस्थाएँ एवं राजनीतिक संस्थाएँ (भाग 1)राजस्थान की सामाजिक संस्थाएँ 1877 से 1918 तक और राजनीतिक संस्थाओं की शुरुआत, संस्थापक व वर्ष सहित।
  42. 42सामाजिक एवं राजनीतिक संगठन: राजनीतिक संस्थाएँ (भाग 2) एवं राजस्थान के समाचार-पत्रराजस्थान सेवा संघ, देशी राज्य लोक परिषद, नरेन्द्र मण्डल और 1849 से शुरू हुए समाचार-पत्रों का क्रम।
  43. 43जनजाति — शुरुआती विद्रोहजनजाति और किसान आन्दोलनों की पृष्ठभूमि, कालक्रम तथा 1818 से 1882 तक के मेर, भील और मीणा विद्रोह।
  44. 44जनजाति एवं किसान आन्दोलन: गोविन्द गिरी व तेजावत एवं बिजौलिया, बेगूँ व बूँदी (भाग 1)गोविन्द गिरी की सम्प सभा, तेजावत का एकी आन्दोलन, मीणा आन्दोलन और बिजौलिया के पहले दो चरण।
  45. 45जनजाति एवं किसान आन्दोलन: बिजौलिया, बेगूँ व बूँदी (भाग 2) एवं अलवर, भरतपुर व मेवातबिजौलिया का अन्त, बेगूँ, बूँदी, अलवर-भरतपुर-मेवात और मारवाड़ के तौल व पशु-निर्यात आन्दोलन।
  46. 46जनजाति एवं किसान आन्दोलन: मारवाड़, शेखावाटी व बीकानेरमारवाड़, सीकर, शेखावाटी और बीकानेर के किसान आन्दोलन — प्रमुख घटनाएँ, तारीख़ें और नेता।
  47. 47प्रजामण्डल व स्वतंत्रता आन्दोलन: जयपुर व किशनगढ़ एवं मारवाड़, बीकानेर, जैसलमेर, सिरोहीप्रजामण्डल आन्दोलन की पृष्ठभूमि और सार, फिर जयपुर, किशनगढ़, मारवाड़, बीकानेर, जैसलमेर व सिरोही का क्रम।
  48. 48प्रजामण्डल व स्वतंत्रता आन्दोलन: मेवाड़ व दक्षिणी रियासतें एवं पूर्वी रियासतेंमेवाड़, दक्षिणी रियासतों, हाड़ौती और पूर्वी रियासतों के प्रजामण्डल, अजमेर व शासकों के रुख़ सहित।
  49. 49राजस्थान का एकीकरण: सात चरण एक नज़र में एवं एकीकरण से पहलेएकीकरण के सातों चरणों का सार, तारीखें व पदाधिकारी, और 1947 से पहले राजपूताना की रियासतें, ठिकाने व विलय-पत्र।
  50. 50राजस्थान का एकीकरण: पहले तीन चरण एवं वृहद् राजस्थानमत्स्य संघ, पूर्व राजस्थान और संयुक्त राजस्थान के बाद वृहद् व संयुक्त वृहद् राजस्थान तक के चरण।
  51. 51राजस्थान का एकीकरण: सिरोही और अन्तिम रूप एवं रियासतों के रिकॉर्ड व प्रिवीपर्ससिरोही व अन्तिम पुनर्गठन, आज के 41 ज़िले, रियासतों के रिकॉर्ड, प्रिवीपर्स और संविधान सभा से शहीदों तक की सूचियाँ।
  52. 52राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: क्रान्तिकारी (भाग 1)स्वतंत्रता संग्राम की पाँच धाराएँ, उपनाम व प्रथम, और सेठी व बारहठ परिवार जैसे क्रान्तिकारियों का परिचय।
  53. 53राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: किसान व आदिवासी नेता (भाग 1)खरवा, पथिक, माणिक्यलाल वर्मा, शेखावाटी के नेता और गोविन्द गिरी — शेष क्रान्तिकारी व किसान-आदिवासी जागरण।
  54. 54राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: प्रजामण्डल के सेनानी (भाग 1)मोतीलाल तेजावत व नीमड़ा काण्ड, भील अंचल के उद्धारक और मारवाड़, मेवाड़, जयपुर व हाड़ौती के प्रजामण्डल सेनानी।
  55. 55राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: प्रजामण्डल के सेनानी (भाग 2)भरतपुर, वागड़, सिरोही, जैसलमेर व अजमेर के सेनानी, तीन भामाशाह जैसे दानवीर और कलम-शिक्षा के साधक।
  56. 56राजस्थान के ऐतिहासिक व्यक्तित्त्व एवं स्वतंत्रता सेनानी: शिखर पुरुष व रणबाँकुरेइतिहासकार, समाज-सुधारक, विज्ञान-संरक्षण के नाम, शुरुआती मुख्यमंत्री, शेखावत, गहलोत और सेना के वीर।
  57. 57इतिहास प्रसिद्ध महिलाएँ: स्वतंत्रता व किसान आन्दोलन एवं शिक्षा, समाज-सेवा व पत्रकारिताराजस्थान की इतिहास-प्रसिद्ध महिलाओं की पहली उपलब्धियाँ — आन्दोलन, शिक्षा, राजनीति, सम्मान, खेल और सेना।