पर्यटन में न चिमनी है, न धुआँ — इसी वजह से इसे निर्धूम उद्योग कहा जाता है, और राजस्थान ने इसे उद्योग का दर्जा देने में देश में पहल की थी। यह भाग इस दर्जे और लोगो-नारों की कहानी से शुरू होकर 2024 के पर्यटक आँकड़े देता है। फिर परिपथों को मरु, शेखावाटी, ढूंढाड़, मेवाड़ और वागड़ जैसे समूहों में बाँटा गया है, और आख़िर में पर्यटन विभाग, निगम, प्राधिकरण, प्रशिक्षण संस्थान और RTDC के होटल दिए हैं।
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1. पर्यटन का महत्त्व
पर्यटन में न चिमनी है, न धुआँ — इसलिए इसे निर्धूम (धुआँ-रहित) उद्योग कहते हैं। बिना बड़ी पूँजी लगाए यह करोड़ों रुपए की विदेशी मुद्रा कमा देता है।
- माना जाता है कि भारत घूमने आने वाला हर पाँचवाँ विदेशी पर्यटक राजस्थान ज़रूर आता है — राज्य देश के सबसे आकर्षक और अग्रणी पर्यटन राज्यों में है।
- राजस्थान को इतिहास, सौन्दर्य और त्याग की त्रिवेणी कहा जाता है; यहाँ के वीरों की कीर्ति ने राज्य के अनेक स्थानों को दुनिया के पर्यटन नक्शे पर ला दिया — इसी से इसे “सैलानियों का स्वर्ग” कहते हैं।
- जयपुर को “रंग श्री द्वीप” और “Island of Glory” — डॉ. सी.वी. रमन ने कहा।
पर्यटन के चार फ़ायदे
- विदेशी मुद्रा की आय
- सांस्कृतिक-कलात्मक धरोहर बची रहती है
- रोज़गार के अवसर
- विश्व पर्यटन दिवस ➜ 27 सितम्बर
- थीम 2024 ➜ पर्यटन और शांति (Tourism and Peace)
- भारतीय पर्यटन दिवस ➜ 25 जनवरी
- राज्य सरकार का पर्यटन के लिए अलग बजट — 2002–03 से।
- संयुक्त राष्ट्र (UNO) ने 2017 को “अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन वर्ष” के रूप में मनाया।
- भारत का पर्यटन नारा ➜ “अतिथि देवो भवः”; राज्य के पर्यटन विभाग का पंचवाक्य — “राजस्थानः भारत का अतुल्य राज्य”।
2. उद्योग का दर्जा व लोगो
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1989 | मोहम्मद यूनुस समिति | पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने की सिफ़ारिश |
| 4 मार्च 1989 | उद्योग का दर्जा | इसी सिफ़ारिश पर पर्यटन निर्धूम उद्योग माना गया — ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य |
| 2004–05 | जन उद्योग | पर्यटन को जन उद्योग का दर्जा |
1989 के बाद ऐसी कई घोषणाएँ हुईं, फिर भी इस क्षेत्र को सचमुच उद्योग वाली सुविधाएँ नहीं मिल पाई थीं। 2022 की पूर्ण मान्यता के बाद अब सरकारी शुल्क (टैरिफ़) और लेवी इस पर औद्योगिक दरों से ही लगेंगे।
लोगो, नारे और विज्ञापन फ़िल्में
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1993 | पहला लोगो | “पधारो म्हारे देश” |
| 2008 | नया लोगो | “कलरफुल राजस्थान” |
| 15 जनवरी 2016 | नया लोगो | “जाने क्या दिख जाये” |
… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: लोगो एक चक्कर पूरा करके लौटा — पधारो (1993) → कलरफुल (2008) → जाने क्या (2016) → फिर पधारो (2019)।
3. पर्यटकों के आँकड़े — 2024
- कुल पर्यटक (कैलेंडर वर्ष 2024) ➜ 2321.56 लाख
- देशी ➜ 2300.84 लाख
- विदेशी ➜ 20.72 लाख
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
| रैंक | ज़िला — घरेलू पर्यटक | ज़िला — अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक | देश (विदेशी पर्यटक) |
|---|---|---|---|
| 1 | सीकर | जयपुर | संयुक्त राज्य अमेरिका |
| 2 | चित्तौड़गढ़ | उदयपुर | यूनाइटेड किंगडम |
| 3 | अजमेर | जोधपुर | फ़्रांस |
… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
- लक्ष्य ➜ देश की कुल यात्राओं में राज्य का हिस्सा घरेलू पर्यटकों में 8% और विदेशी पर्यटकों में 7.5% तक पहुँचाना।
- 2020 में कोविड-19 महामारी से पर्यटन बुरी तरह गिरा था।
- वित्त वर्ष 2023 में राज्य में लगभग 17.9 करोड़ घरेलू और 17 लाख विदेशी पर्यटक आए।
ट्रिक: दोनों सूचियों में आने वाले ज़िले — अजमेर और जैसलमेर (जैसलमेर दोनों में चौथा)।
4. पर्यटन परिपथ (सर्किट)
आस-पास के पर्यटन स्थलों को एक सूत्र में जोड़कर पर्यटक को एक ही यात्रा में पूरा क्षेत्र घुमाना — यही पर्यटन परिपथ है। राज्य सरकार के गाइड मैप ऑफ़ राजस्थान (2005) में राज्य 10 परिपथों में बाँटा गया।
5. मरु, शेखावाटी, मेरवाड़ा, गोडवाड़
| परिपथ | ज़िले | प्रमुख स्थल / ख़ास बात |
|---|---|---|
| 1. मरु (डेज़र्ट) | जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर (नया जोड़ा गया) | स्वर्णिम त्रिकोण के बाद सबसे ज़्यादा पर्यटक यहीं; विकास में जापान की JBIC का सहयोग |
| 2. शेखावाटी | चूरू, झुंझुनूं, सीकर | सालासर, ताल छापर, लोहार्गल, शाकम्भरी माता मंदिर, लक्ष्मणगढ़, रैवासा, जीणमाता, खाटूश्यामजी, महणसर, नवलगढ़, नरहड़, गणेश्वर उत्खनन स्थल |
| 5. मेरवाड़ा | अजमेर, नागौर | ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर, मेड़ता, किशनगढ़, नारेली |
याद रखें: RAS प्रारम्भिक 2025 — माउंट आबू और रणकपुर किस परिपथ में? — गोडवाड़ (पाली-सिरोही-जालौर)।
6. ढूंढाड़, मेवात, रणथम्भौर, हाड़ौती
| परिपथ | ज़िले | प्रमुख स्थल |
|---|---|---|
| 3. ढूंढाड़ | जयपुर, दौसा | आभानेरी, आमेर, सामोद, रामगढ़, आलूदा, भांडारेज, मेहंदीपुर |
| 8. मेवात | अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर | सिलीसेढ़, सरिस्का, भानगढ़, तिजारा, राजगढ़, भर्तृहरि, पांडुपोल, घना पक्षी विहार |
| 7. रणथम्भौर | सवाई माधोपुर, टोंक | — |
ध्यान दें: सवाई माधोपुर दो परिपथों में आता है — रणथम्भौर और मेवात।
7. मेवाड़ और वागड़
| परिपथ | ज़िले | प्रमुख स्थल |
|---|---|---|
| 6. मेवाड़ | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद | नाथद्वारा, हल्दीघाटी, कुंभलगढ़, जयसमंद, गोगुंदा, कपासन, मेनाल, जगत, कैलाशपुरी |
| 9. वागड़ | डूंगरपुर, बाँसवाड़ा | मानगढ़ धाम, देव सोमनाथ, बेणेश्वर, गलियाकोट, अर्थूणा, त्रिपुरा सुन्दरी, कडाना-माही बजाज सागर, कागज़ी पिकअप, घोटिया अम्बा |
8. नए व विषय-आधारित सर्किट
| सर्किट | क्या जुड़ता है |
|---|---|
| स्वर्णिम त्रिकोण (Golden Triangle) | दिल्ली, आगरा, जयपुर — इस पर राजस्थान का शहर जयपुर |
| राष्ट्रीय राजधानी सर्किट | अलवर, बैराठ (कोटपूतली-बहरोड़), भरतपुर और स्वर्णिम त्रिकोण का रास्ता |
| तीर्थ सर्किट | अजमेर, पुष्कर, नाथद्वारा, कांकरोली, महावीर जी |
| मेवाड़-वागड़ धार्मिक सर्किट | उदयपुर, डूंगरपुर और बाँसवाड़ा के धार्मिक स्थल |
पुरातत्व सर्किट और यूनेस्को समझौता
- पुरातत्व सर्किट ➜ अजमेर और भरतपुर नए जुड़े; अब कुल 7 — जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर, अजमेर, भरतपुर।
- यूनेस्को समझौता — 5 सितम्बर 2019: पर्यटन विभाग ने जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए यूनेस्को से करार किया; 10 सांस्कृतिक स्थल विकसित होंगे; नाम — Promoting Intangible Cultural Heritage of Rajasthan।
9. कृष्णा सर्किट व कृष्ण गमन पथ
कृष्णा सर्किट (स्वदेश दर्शन)
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन योजना में राजस्थान, हरियाणा, ओडिशा और गुजरात के 12 कृष्ण मंदिरों को जोड़कर यह सर्किट 20 फ़रवरी 2016 को मंज़ूर किया।
श्री कृष्ण गमन पथ
- मथुरा से सांदीपनि आश्रम (उज्जैन) तक का रास्ता — राजस्थान और मध्य प्रदेश मिलकर विकसित करेंगे; कृष्ण के जीवन और पौराणिक आस्था वाले स्थान चिह्नित होंगे।
- पूरा पथ लगभग 800 किमी; इसमें से लगभग 500 किमी राजस्थान के 6 ज़िलों — डीग, भरतपुर, करौली, बूँदी, कोटा, झालावाड़ — से गुज़रेगा।
| मंदिर | जगह |
|---|---|
| श्री गोकुलचन्द्रमा मंदिर | कामां (डीग) |
| श्री मदनमोहन मंदिर | कामां (डीग) |
| श्री बांके बिहारी मंदिर | भरतपुर |
| श्री मदनमोहन मंदिर | करौली |
10. बजट 2024–25 के नए सर्किट
| सर्किट | स्थल | राशि |
|---|---|---|
| महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट | प्रताप के जीवन से जुड़े — चावण्ड, हल्दीघाटी, गोगुन्दा, कुम्भलगढ़, दिवेर, उदयपुर | ₹100 करोड़ |
| ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट | आदिवासी बहुल ज़िलों के ऐतिहासिक, धार्मिक और ईको स्थल — त्रिपुरा सुन्दरी, मानगढ़ धाम, बेणेश्वर धाम, सीतामाता अभयारण्य, ऋषभदेव, गौतमेश्वर मंदिर, मातृकुण्डिया | ₹100 करोड़ |
| धार्मिक पर्यटन सर्किट | सांगानेर (जयपुर) के मध्यकालीन मंदिर — सांगा बाबा मंदिर, त्रिपोलिया बालाजी, संघी जी जैन मंदिर | — |
आइकॉनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन (ITD)
हेरिटेज पर्यटन बढ़ाने के लिए कुल 10 स्थल ITD के रूप में सँवरेंगे — इनमें जैसलमेर किला, शेरगढ़ किला (बाराँ), खण्डार किला (सवाई माधोपुर), नाहरगढ़ और आमेर (जयपुर), आभानेरी (दौसा), किशोरी महल (भरतपुर)।
11. पर्यटन विभाग व निगम
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1950 | राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग | जयपुर; विभाग की पत्रिका — “रिसर्चर” |
| 1956 | पर्यटन विभाग | पर्यटन नीतियाँ-कार्यक्रम लागू करता है और विकास की गतिविधियाँ चलाता है |
| 7 जून 1965 | राजस्थान राज्य होटल निगम लिमिटेड | अभी 3 होटल चलाता है |
- पर्यटन विभाग के नियंत्रण में 2 सार्वजनिक उपक्रम — RTDC और राजस्थान राज्य होटल निगम; एक प्रशिक्षण संस्थान RITTMAN भी इसी के अधीन।
- राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण भी पर्यटन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है।
- RTDC का काम ➜ पर्यटकों के लिए खाने, ठहरने और आने-जाने का इंतज़ाम, साथ में मेले और प्रदर्शनियाँ लगाना (प्रगति प्रतिवेदन 2023–24)।
12. प्राधिकरण, बोर्ड व कोष
| निकाय | ब्योरा |
|---|---|
| राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण | ऐतिहासिक स्मारकों, महापुरुषों, लोकदेवी-देवताओं से जुड़े पर्यटन स्थल सँवारता है और पैनोरमा बनाता है ताकि आम लोग और पर्यटक खिंचें; वर्तमान अध्यक्ष — औंकार सिंह लखावत |
| राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण | पर्यटन विभाग के अधीन, राज्य में मेले आयोजित करता है; 19 जुलाई 2023 को राजस्थान राज्य मेला प्राधिकरण विधेयक-2023 पारित — मुख्यालय जयपुर |
| थार क्षेत्र विकास बोर्ड | जयपुर; विभाग — पर्यटन; अध्यक्ष सहित 5 सदस्य; थार क्षेत्र को देश-दुनिया में पहचान दिलाना और धार्मिक पर्यटन बढ़ाना |
13. प्रशिक्षण संस्थान
RITTMAN — राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ़ टूरिज़्म एंड ट्रैवल मैनेजमेंट (राजस्थान पर्यटन एवं आवागमन प्रबंध संस्थान); 29 अक्टूबर 1996; मुख्यालय जयपुर। गाइड, कार चालक, होटल व्यवसायी, दुकानदार और पर्यटन कर्मियों को विदेशी भाषाओं के कोर्स कराता है, गाइडों को प्रशिक्षण देता है और कॉन्फ़्रेंस-सेमिनार-कार्यशालाएँ करता है।
| संस्थान | शुरुआत | आगे का सफ़र |
|---|---|---|
| होटल प्रबंध संस्थान, जयपुर | 1976 — केंद्र सरकार का फ़ूड क्राफ़्ट संस्थान (होटल-कैटरिंग कोर्स) | 1989 में होटल प्रबंध संस्थान |
| राज्य होटल प्रबंध संस्थान, जोधपुर | 1996 — फ़ूड क्राफ़्ट संस्थान | अगस्त 2001 में क्रमोन्नत |
| राज्य होटल प्रबंध संस्थान, उदयपुर | 1989 — फ़ूड क्राफ़्ट संस्थान | जुलाई 2017 में क्रमोन्नत |
| राज्य होटल प्रबंध संस्थान — धौलपुर, सवाई माधोपुर, झालावाड़ | सितम्बर 2023 से | धौलपुर का फ़ूड क्राफ़्ट संस्थान भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय राज्य IHM में बदल रहा है |
- CETT (पर्यटन प्रशिक्षण के लिए उत्कृष्टता केंद्र) — राज्य सरकार ने सिंगापुर की ITEES के साथ उदयपुर में बनाया; RSLDC गैप फ़ंडिंग से मदद करता है।
- राजस्थान पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान ➜ जयपुर।
14. कन्वेंशन व विशेष केंद्र
| केंद्र | कहाँ / ख़ास बात |
|---|---|
| राजीव गांधी टूरिज़्म कन्वेंशन सेंटर | जोधपुर — राज्य का पहला, देश का तीसरा |
| MICE सेंटर्स (Meetings, Incentives, Conferences and Exhibitions) | जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, अजमेर — अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन-प्रदर्शनी के लिए बनेंगे |
| राजस्थान मंडपम | जयपुर — दिल्ली के भारत मंडपम की तर्ज़ पर |
15. RTDC के होटल
| ज़िला | RTDC होटल (जगह) |
|---|---|
| जयपुर | गणगौर, तीज, स्वागतम, यूथ हॉस्टल, कैफ़ेटेरिया (नाहरगढ़), झील ग्राम (रामगढ़ झील) |
| अलवर | टाइगर डेन (सरिस्का), लेक पैलेस (सिलीसेढ़), मीनल |
| भरतपुर | सारस |
| सवाई माधोपुर | विनायक (रणथम्भौर), झूमर बावड़ी |
RTDC का होटल कैसल झूमर बावड़ी (सवाई माधोपुर) — 2024 में सर्वश्रेष्ठ वाइल्डलाइफ़ होटल पुरस्कार पा चुका है।
16. रैपिड फायर तथ्य
- उद्योग का दर्जा ➜ 4 मार्च 1989 (मोहम्मद यूनुस समिति की सिफ़ारिश); ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य
- जन उद्योग का दर्जा ➜ 2004–05
- लोगो का क्रम ➜ «पधारो म्हारे देश» (1993), «कलरफुल राजस्थान» (2008), «जाने क्या दिख जाये» (15 जनवरी 2016)
- दिवस ➜ विश्व पर्यटन दिवस 27 सितम्बर, भारतीय पर्यटन दिवस 25 जनवरी
- पर्यटक 2024 ➜ कुल 2321.56 लाख — देशी 2300.84 लाख, विदेशी 20.72 लाख
- विदेशी पर्यटकों में सबसे आगे ➜ संयुक्त राज्य अमेरिका, फिर यूनाइटेड किंगडम और फ़्रांस
- परिपथों की संख्या ➜ 10, 2005 में तय हुए
- सवाई माधोपुर दो परिपथों में आता है — रणथम्भौर और मेवात।
- कृष्णा सर्किट ➜ स्वदेश दर्शन में 12 कृष्ण मंदिर जोड़कर 20 फ़रवरी 2016 को मंज़ूर
अगले भाग में पर्यटन विकास की योजनाएँ — केंद्र और राज्य की योजनाएँ, ठहरने की व्यवस्था, पर्यटकों की सुरक्षा, ग्रामीण पर्यटन और तीर्थयात्रा।
पिछला भाग: राजस्थान में जनजातियाँ: मीणा जनजाति
अगला भाग: राजस्थान में पर्यटन: पर्यटन विकास की योजनाएँ एवं नीतियाँ, बजट व पुरस्कार
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