राजस्थान की झीलें: झीलें — मूल बातें एवं खारे पानी की झीलें – Rajasthan Geography Chapter 32

झीलों की मूल बातें, खारी झीलों का कारण, सांभर-डीडवाना-पचपदरा और उदयपुर संभाग की शुरुआती झीलें।

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In this chapter (12 sections)
  1. झीलें — मूल बातें
  2. बनावट के आधार पर प्रकार
  3. इतनी खारी झीलें क्यों?
  4. सांभर झील
  5. सांभर — इतिहास व संस्कृति
  6. डीडवाना झील
  7. पचपदरा झील
  8. अन्य खारी झीलें व नमक के नाम
  9. उदयपुर संभाग की झीलें
  10. जयसमंद (ढेबर)
  11. पिछोला झील
  12. रैपिड फायर तथ्य

रेगिस्तानी राज्य में झीलों की गिनती अटपटी लगती है, पर यहाँ बरसात का पानी रोकने की परम्परा बहुत पुरानी है — मीठी झीलें राजाओं ने बनवाईं और खारी झीलें पश्चिम की धरती की पहचान बनीं। इस भाग में झीलों की मूल बातें और प्रकार, खारी झीलें इतनी क्यों हैं, सांभर, डीडवाना, पचपदरा समेत नमक की झीलें, और उदयपुर संभाग में जयसमंद व पिछोला दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान की झीलें, 5 चॉक-बोर्ड चित्र, 17 नक्शे, 27 फ्लैशकार्ड और 22 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. झीलें — मूल बातें

चारों ओर ज़मीन से घिरा, ठहरा हुआ जलाशय झील कहलाता है। झीलें प्राकृतिक भी होती हैं और कृत्रिम भी। झीलों के अध्ययन को “लिम्नोलॉजी” कहते हैं।

राजस्थान में बरसात का पानी रोककर रखने की परम्परा बहुत पुरानी है। राजाओं ने और सेठ-साहूकारों ने पीने और सिंचाई के लिए अनगिनत झीलें, तालाब और बावड़ियाँ बनवाईं।

  • राज्य में सबसे ज़्यादा झीलें ➜ उदयपुर (“झीलों की नगरी”)
  • भारत में सबसे ज़्यादा झीलें ➜ श्रीनगर
  • विश्व में सबसे ज़्यादा झीलें ➜ फ़िनलैंड (“झीलों का देश”)

2. बनावट के आधार पर प्रकार

प्रकारकैसे बनती हैउदाहरण
बॉलसनचारों ओर ऊँची भूमि से घिरा समतल बेसिन; पानी बाहर से केंद्र की ओर बहकर जमा होता है (अभिकेंद्रीय अपवाह)सांभर
प्लायामरुस्थल की छोटी, उथली, समतल खारी झीलें; अंतःप्रवाह वाली, पानी बहुत जल्दी भाप बनकर उड़ जाता हैडीडवाना और पश्चिम के मरु की अधिकतर खारी झीलें
विवर्तनिकभू-गर्भिक हलचल या भ्रंश से धँसी भूमि में पानी भरनानक्की (माउंट आबू); भारत में वुलर, विश्व में कैस्पियन

ध्यान दें: मरुस्थल की खारी झील = प्लाया; समुद्र-तट की खारी झील = कयाल / लैगून (जैसे चिल्का)।

बाराँ की रामगढ़ झील एक और तरह से बनी — आकाश से गिरे उल्कापिंड के गड्ढे में।

3. इतनी खारी झीलें क्यों?

  1. पश्चिमी राजस्थान कभी टेथिस सागर का हिस्सा था — उसकी खारी तलछट आज भी नीचे दबी है।
  2. दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ कच्छ की खाड़ी से सोडियम क्लोराइड के कण उड़ाकर लाती हैं।
  3. नीचे की लवणीय चट्टानों का नमक केशिका क्रिया से ऊपर सतह तक आ जाता है।

इसलिए खारी झीलें ज़्यादातर उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल में हैं; सबसे ज़्यादा खारी झीलें डीडवाना-कुचामन ज़िले में हैं।

शब्दअर्थ
अमीलनमक का काम देखने वाला अधिकारी
देवलनमक बनाने वाली निजी संस्थाएँ

4. सांभर झील

  • स्थान ➜ फुलेरा तहसील (जयपुर), जयपुर से लगभग 70 किमी
  • फैलाव ➜ जयपुर, डीडवाना-कुचामन और अजमेर
  • लम्बाई ➜ 32 किमी
  • चौड़ाई ➜ 3 से 15 किमी

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • भारत की सबसे पुरानी खारी झील और अंतःप्रवाह वाली सबसे बड़ी झील; क्षेत्रफल में राजस्थान की सबसे बड़ी झील।
  • भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारी झील — पहली चिल्का (ओडिशा), जो समुद्र-तटीय लैगून है।
  • देश के कुल नमक का लगभग 8.70% यहीं बनता है।
इसमें गिरने वाली नदीकिस ओर से
मेंथा / मेंढाउत्तर — सबसे ज़्यादा नमक यही लाती है
रूपनगढ़दक्षिण
खारीडीडवाना-कुचामन की ओर से

नमक उत्पादन

  • सांभर साल्ट्स लिमिटेड ➜ केंद्र सरकार के हिन्दुस्तान साल्ट्स लिमिटेड की सहायक कम्पनी; केंद्र 60%, राज्य 40%; स्थापना 30 सितम्बर 1964।
  • क्यारियों में पानी सुखाकर बनाया गया नमक “क्यार” कहलाता है।
  • अंग्रेज़ों ने 1869 में यह झील जयपुर और जोधपुर रियासतों से पट्टे पर ली; 1870 में यहाँ नमक संग्रहालय बनाया — राज्य का इकलौता नमक संग्रहालय।

पक्षी और संरक्षण

  • सर्दियों में गुजरात का राज्य पक्षी राजहंस (फ्लेमिंगो) और कुरजां (विरह की प्रतीक, खीचन से जुड़ी) यहाँ आते हैं।
  • नवम्बर 2019 ➜ एवियन बोटुलिज़्म से हज़ारों पक्षी मरे; राज्य की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी।
  • 23 मार्च 1990 को रामसर स्थल घोषित — राज्य का दूसरा रामसर स्थल।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

5. सांभर — इतिहास व संस्कृति

  • बिजौलिया शिलालेख (1170) के अनुसार झील चौहान शासक वासुदेव ने बनवाई; भूगोल की दृष्टि से यह प्राकृतिक झील है।
  • यह शिलालेख बिजौलिया के श्याम पार्श्वनाथ मंदिर में है — रचयिता गुणभद्र, लगवाने वाले जैन श्रावक लोलक; इसमें चौहानों की वंशावली है और उन्हें “वत्स गोत्रीय ब्राह्मण” बताया गया है।
  • सांभर चौहानों का मूल स्थान — वासुदेव चौहान ने 551 ई. के आसपास यहाँ सपादलक्ष राज्य की नींव रखी; राजधानी अहिच्छत्रपुर।
  • पौराणिक कथा ➜ शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी का विवाह ययाति से यहीं हुआ; सांभर ययाति के साम्राज्य का हिस्सा माना जाता है। यहाँ की देवयानी झील (“तीर्थों की नानी”) कुष्ठ रोग दूर करने वाली मानी जाती है।

… शेष 4 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

काल / क्रमघटनाविवरण
551 ई.सपादलक्ष की नींववासुदेव चौहान
1170बिजौलिया शिलालेखझील का निर्माण वासुदेव से जोड़ा
1562अकबर का विवाहभारमल की पुत्री से

6. डीडवाना झील

  • डीडवाना-कुचामन ज़िले में; प्लाया झील का उदाहरण।
  • यहाँ का नमक खाने योग्य नहीं ➜ इसे “खाल्डा” कहते हैं।
  • नमक राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स बनाता था; 10 अक्टूबर 2008 को इसका निजीकरण हुआ।
इकाईकिस काम आती है
सोडियम सल्फ़ेट संयंत्रकाग़ज़ उद्योग
सोडियम सल्फ़ाइड कारख़ानाचमड़ा और रंग उद्योग
आयोडीन संयंत्रशुद्ध (आयोडीन युक्त) नमक

7. पचपदरा झील

  • बालोतरा ज़िले में; राज्य की दूसरी सबसे बड़ी खारी झील।
  • यहाँ का नमक सबसे ऊँची गुणवत्ता का — 98% सोडियम क्लोराइड।
  • लगभग 400 साल पहले पंचा नाम के भील ने यहाँ का दलदल सुखाकर इसे बनाया — इसी से नाम।
  • खारवाल जाति के लोग मोरली झाड़ी की टहनियों से, हवा के बहाव से नमक के क्रिस्टल बनाते हैं — इसे “रेस्ता” कहते हैं।

8. अन्य खारी झीलें व नमक के नाम

झीलज़िलाख़ास बात
लूणकरणसरबीकानेरउत्तरी राजस्थान की इकलौती खारी झील; उत्पादन बहुत कम
तालछापरचूरूपास का क्षेत्र काले हिरणों के लिए प्रसिद्ध
कावोदजैसलमेरयहाँ का नमक आयोडीन के लिए सबसे अच्छा
फलौदीफलौदी—

नमक के नाम

नमकनाम
हवा के बहाव से सुखाया गयारेस्ता / रेश्ता
क्यारियों में बनाक्यार
सांभर कासांभरी

ट्रिक: पचपदरा — सबसे शुद्ध (98%); कावोद — आयोडीन के लिए सबसे अच्छा; डीडवाना — खाने योग्य नहीं।

9. उदयपुर संभाग की झीलें

उदयपुर की सात बहन झीलें — पिछोला, दूध तलाई, गोवर्धन सागर, कुमारी तालाब, रंगसागर तालाब, स्वरूपसागर और फतेहसागर।

10. जयसमंद (ढेबर)

  • ज़िला ➜ सलूम्बर
  • निर्माता ➜ महाराणा जयसिंह
  • निर्माण काल ➜ 1685–1691
  • भारत की तीसरी और राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम मीठे पानी की झील।
  • गोमती नदी ढेबर दर्रे से होकर आती है — इसलिए नाम “ढेबर”।
  • 7 टापू ➜ इन पर मीणा और भील रहते हैं; सबसे बड़ा “बाबा का भांगड़ा”, सबसे छोटा “प्यारी”; एक टापू पर आइलैंड रिसोर्ट होटल।
  • सिंचाई नहरें ➜ श्यामपुरा और भाट; सलूम्बर में सिंचाई। मुख्य नहरें 324 किमी, वितरक नहरें 125 किमी; प्रबंध राज्य का सिंचाई विभाग करता है।

ट्रिक: भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम मीठी झील — इंदिरा सागर (मध्य प्रदेश, नर्मदा); दूसरी — गोविंद सागर (हिमाचल), सतलुज पर भाखड़ा बाँध के पीछे; तीसरी — जयसमंद।

11. पिछोला झील

  • राणा लाखा (1382–1421) के समय छीतरमल चिड़ीमार नाम के बंजारे ने अपने बैल की याद में बनवाई; यहाँ पिछोली गाँव था।
  • राजमहल के पीछे बनी होने से भी इसे “पिछोला” कहते हैं।
  • उदयपुर की सबसे पुरानी और सबसे सुंदर झील; जलपूर्ति — सीसारमा और बुझड़ा नदियाँ।
  • जीर्णोद्धार ➜ पहले महाराणा सांगा (1525); 1559 में उदयसिंह ने राजमहल की सुरक्षा के लिए पाल पक्की करवाई; 1795 में पाल टूटने पर महाराणा भीमसिंह ने नया बाँध बनवाया।
  • किनारे सिटी पैलेस — उदयसिंह ने राजपरिवार के लिए बनवाया। इतिहासकार फर्ग्यूसन ने इन महलों की तुलना लंदन के विंडसर महल से की।
महलनिर्माणख़ास बात
जगमंदिर1620 में महाराणा कर्णसिंह ने शुरू किया, 1651 में जगतसिंह प्रथम ने पूरा कियाशहज़ादे ख़ुर्रम (शाहजहाँ) को यहाँ शरण मिली — कहा जाता है यहीं से ताजमहल की प्रेरणा मिली; 1857 में स्वरूप सिंह के समय क्रांति के सैनिकों को शरण
जगनिवास1746 में जगतसिंह द्वितीय ने पूरा करवायाआज होटल ताज लेक पैलेस

12. रैपिड फायर तथ्य

  • राज्य में सबसे ज़्यादा झीलें ➜ उदयपुर («झीलों की नगरी»)
  • बॉलसन / प्लाया / विवर्तनिक झील ➜ सांभर / डीडवाना / नक्की
  • सांभर झील ➜ क्षेत्रफल में राज्य की सबसे बड़ी झील; रामसर स्थल घोषित 23 मार्च 1990 को
  • सांभर साल्ट्स लिमिटेड की स्थापना ➜ 30 सितम्बर 1964 (केंद्र 60%, राज्य 40%)
  • सांभर में सबसे ज़्यादा नमक लाने वाली नदी ➜ मेंथा / मेंढा
  • डीडवाना का नमक ➜ खाने योग्य नहीं, इसे «खाल्डा» कहते हैं
  • पचपदरा (बालोतरा) ➜ सबसे शुद्ध नमक, 98% सोडियम क्लोराइड
  • कावोद (जैसलमेर) ➜ आयोडीन के लिए सबसे अच्छा नमक
  • जयसमंद (ढेबर) ➜ राज्य की सबसे बड़ी कृत्रिम मीठे पानी की झील; महाराणा जयसिंह, 1685–1691; 7 टापू

अगले भाग में फतेहसागर और राजसमंद जैसी मेवाड़-वागड़ की बाक़ी झीलें, फिर पुष्कर व अजमेर की झीलें और हाड़ौती, भरतपुर तथा जयपुर संभाग की झीलें।

पिछला भाग: राजस्थान की जलवायु: शीत ऋतु व मावठ एवं जलवायु प्रदेश

अगला भाग: राजस्थान की झीलें: उदयपुर संभाग की झीलें (भाग 2) एवं अजमेर संभाग — पुष्कर व आनासागर

इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान का अपवाह तंत्र परिचय एवं वर्गीकरण · प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ

पूरी श्रृंखला: राजस्थान का भूगोल — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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