बागवानी और कृषि संस्थाओं वाला हिस्सा तथ्यों की लम्बी सूची जैसा लगता है, पर उसमें «पहला» और «सबसे बड़ा» की भरमार है — पहली बायोफ़्यूल नीति, पहली जैतून रिफ़ाइनरी, पहली निजी मंडी। इस भाग में जैतून-खजूर-गुलाब, ज़िलेवार बागवानी, उत्कृष्टता केंद्र, बायोफ़्यूल प्राधिकरण, राज्य व देश स्तर की संस्थाएँ, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि «पहले», हरित क्रांति और केंद्र की कृषि योजनाएँ आती हैं।
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1. जैतून, खजूर व गुलाब
जैतून
- देश में सबसे पहले राजस्थान ने जैतून को प्लांटेशन क्रॉप अधिसूचित किया; 800 हे. में लगाया, 2017–18 तक 1500 हे. का लक्ष्य; अभी 7 फ़ार्मों में इज़रायल के सहयोग से खेती।
- 18 नवम्बर 2006 ➜ इज़रायली कम्पनी इंडोलिव, राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड और प्लास्ट्रो प्लासन इंडस्ट्रीज़ का त्रिपक्षीय समझौता — “राजस्थान ऑलिव कल्टीवेशन कम्पनी” बनी।
- देश की पहली जैतून तेल रिफ़ाइनरी — लूणकरणसर (बीकानेर), 3 अक्टूबर 2014; तेल “राज ऑलिव” ब्रांड से बिकता है; जैतून तेल बनाने वाला देश का पहला राज्य।
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खजूर
- पश्चिमी राजस्थान की जलवायु अनुकूल ➜ UAE से टिश्यू कल्चर पौधे मँगाकर सरकारी ज़मीन पर मॉडल फ़ार्म।
- सबसे ज़्यादा संभावना ➜ बीकानेर संभाग; खजूर अनुसंधान केंद्र — बीकानेर (1978)।
- किस्में — हलावी, मेडजूल (छुआरे बनते हैं), खुनेजी, ज़ाहिदी, ख़दरावी; रोग — ग्रेफ़ियोला।
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गुलाब व फूल
- खमनोर (राजसमंद) और नाथद्वारा का चैती गुलाब — सबसे अच्छी किस्म, चैत्र महीने में ज़्यादा खिलता है।
- सबसे ज़्यादा गुलाब ➜ अजमेर; राज्य की पहली पुष्प मंडी और “गुलाब नगरी” — पुष्कर।
- पुष्प पार्क ➜ खुशखेड़ा (खैरथल-तिजारा), RIICO; राज्य और देश की सबसे बड़ी फूल मंडी — मुहाना मंडी (जयपुर)।
2. ज़िलेवार बागवानी उत्पादन
| फसल | सबसे ज़्यादा (2022–23) | (2021–22) |
|---|---|---|
| लाल मिर्च | सवाई माधोपुर | सवाई माधोपुर |
| धनिया | झालावाड़ | झालावाड़ |
| मेथी | बीकानेर | बीकानेर |
| हल्दी | बीकानेर | बीकानेर |
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“राजस्थान का नागपुर” — झालावाड़ (संतरा)। जालौर का सिंदूरी अनार अलग पहचान रखता है।
नई किस्में
| संस्थान | किस्में |
|---|---|
| केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर | थार शोभा (खेजड़ी), थार सेविका, गोमा कीर्ति व थार भूभराज (बेर), थार माणक (मतीरा), AHK-119 व AHK-120 (काचरी), थार भादवी (ग्वार), गोमा ऐश्वर्य (आँवला), गोमा प्रियंका (जामुन), गोमा खट्टा (अनार) |
| कृषि अनुसंधान केंद्र दुर्गापुरा | ख़रबूज़ा — दुर्गापुरा मधु, RM 43; तरबूज़ — दुर्गापुरा मीठा, दुर्गापुरा केसर |
3. उत्कृष्टता केंद्र (CoE)
| केंद्र | कहाँ |
|---|---|
| फलों का उत्कृष्टता केंद्र | नांता (कोटा) — कृषि एवं उद्यानिकी फ़ार्म, 20 अप्रैल 2016 |
| अमरूद | देवड़ावास (टोंक) |
| आम | खेमरी (धौलपुर) |
| खजूर | सगरा-भोजका फ़ार्म (जैसलमेर) |
- अमरूद, आम और संतरे के उत्कृष्टता केंद्र इज़रायल की मदद से बने।
- 26 जून 2023 ➜ मुख्यमंत्री ने उदयपुर ज़िले में सीताफल, आम और वनोपज-औषधीय पौधों के 3 उत्कृष्टता केंद्र घोषित किए।
- RKVY के तहत झालावाड़, धौलपुर, टोंक, बूँदी, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, बस्सी (जयपुर) और नांता (कोटा) के उत्कृष्टता केंद्र मज़बूत किए जा रहे हैं।
याद रखें: RAS प्रारम्भिक 2025 — बस्सी: अनार; सगरा-भोजका: खजूर; देवड़ावास: अमरूद; खेमरी: आम।
4. बायोफ़्यूल प्राधिकरण
- 2007 में बंजर ज़मीन पर तेल वाले पौधों की खेती बढ़ाने के लिए बना — उद्देश्य रतनजोत, करंज, महुआ, नीम आदि की खेती, प्रसंस्करण और विपणन।
- रतनजोत के लिए उपयुक्त 12 ज़िले — कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़।
- करंज के लिए उपयुक्त 8 पूर्वी ज़िले — अलवर, भरतपुर, दौसा, धौलपुर, जयपुर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक।
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 14 सितम्बर 2005 | राज्य बायोफ़्यूल मिशन | मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में |
| 17 जनवरी 2007 | पहली बायोफ़्यूल नीति | ऐसी नीति लाने वाला देश का पहला राज्य |
| 2008 | संशोधित नीति |
देश का पहला बायोफ़्यूल मोबाइल रिटेल आउटलेट — जोधपुर। विश्व जैव ईंधन दिवस — 10 अगस्त।
5. राज्य की कृषि संस्थाएँ
| संस्था | कब / कहाँ | काम |
|---|---|---|
| राजस्थान कृषि अनुसंधान केंद्र | दुर्गापुरा (जयपुर), 1943 | अब श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय का घटक |
| राजस्थान राज्य भंडारण निगम (RSWC) | 30 दिसम्बर 1957 | गोदाम बनाना, उपज का वैज्ञानिक भंडारण; 41 ज़िलों में 96 गोदाम, क्षमता 18.12 लाख टन (दिसम्बर 2024) |
| कृषि अनुसंधान निदेशालय | 1964, उदयपुर | 1981–82 में जयपुर, 1992–93 में बीकानेर |
| राजस्थान कृषि उद्योग निगम | 1965 | कृषि के औद्योगिक साज़ो-सामान किसानों तक |
6. देश स्तर की संस्थाएँ
काज़री (CAZRI) — केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान, जोधपुर
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1952 | मरु वनीकरण शोध केंद्र | जोधपुर |
| 1957 | विस्तार | मरु वनीकरण एवं मृदा संरक्षण केंद्र |
| 1959 | काज़री | ICAR के अधीन पूर्ण संस्थान — ऑस्ट्रेलिया व यूनेस्को के सहयोग से |
शुष्क-अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में वनों का विकास, शोध और अध्ययन; मरुस्थल के पेड़-पौधे, चारागाह, पशु, पानी और मिट्टी का संरक्षण करके मरुस्थल की पारिस्थितिकी बचाना। उपकेंद्र — बीकानेर, जैसलमेर, पाली, भुज आदि।
याद रखें: केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान और शुष्क वन अनुसंधान संस्थान — दोनों जोधपुर में (REET L-2, 2025)।
| संस्था | कब / कहाँ | काम |
|---|---|---|
| कृषि लागत व मूल्य आयोग | 1965 | किसानों को उपज का लाभकारी मूल्य |
| नाबार्ड (NABARD) | 12 जुलाई 1982, मुम्बई | शिवरमन समिति की सिफ़ारिश पर; देश में कृषि क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक |
| चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान | 8 अगस्त 1988, जयपुर | कृषि विपणन में प्रशिक्षण और शोध |
| राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र | तबीजी (अजमेर), 2000 | ICAR |
7. कृषि विश्वविद्यालय
| विश्वविद्यालय | कहाँ | स्थापना |
|---|---|---|
| स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय | बीकानेर | पहला कृषि विश्वविद्यालय 1962 में उदयपुर में; 1964 में बहुसंकाय “मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय”; अगस्त 1987 में कृषि संकाय अलग होकर राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर; 9 जून 2009 को नया नाम |
| महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) | उदयपुर | 1 नवम्बर 1999 |
| कृषि विश्वविद्यालय | बोरखेड़ा (कोटा) | सितम्बर 2013 |
- बीकानेर के कृषि विश्वविद्यालय के अधीन 1996 में पादप जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला बनी।
- ICAR ने MPUAT उदयपुर को देश में “श्रेष्ठ तकनीक और जैविक अनुसंधान” के लिए सम्मानित किया।
- राष्ट्रीय आउटस्टैंडिंग कृषि विज्ञान केंद्र अवॉर्ड — आबूसर (झुंझुनूँ) KVK को।
8. राज्य के कृषि “पहले”
| पहला / सबसे बड़ा | कहाँ |
|---|---|
| निजी क्षेत्र की पहली कृषि मंडी | कैथून (कोटा) — “हनुमान कृषि मंडी”, ऑस्ट्रेलिया की AWB के सहयोग से, 29 नवम्बर 2005 |
| पहली किसान कम्पनी | बकानी (झालावाड़) — किसान ख़ुद चलाएँगे, अच्छा दाम दिलाएगी |
| सबसे बड़ी फल-सब्ज़ी मंडी | मुहाना टर्मिनल मार्केट (जयपुर) |
| पहला कृषि कियोस्क | नांता (कोटा) |
कियोस्क — वह जगह जहाँ किसी एक क्षेत्र की सारी वस्तुएँ-सेवाएँ एक साथ मिलें।
- कृषि विज्ञान केंद्र ➜ 47 (ICAR)
- कृषि अनुसंधान केंद्र ➜ 11
- कृषि मंडियाँ ➜ 173
9. हरित क्रांति
- “हरित क्रांति” शब्द पहली बार 1960 के दशक में अमेरिकी वैज्ञानिक विलियम गैड ने इस्तेमाल किया।
- शुरुआती प्रयोग 1943 में मैक्सिको में — रॉकफ़ेलर फ़ाउंडेशन के वैज्ञानिकों ने गेहूँ की ज़्यादा उपज वाली, रोग-रोधी बौनी किस्में बनाईं।
- जनक ➜ नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग (अमेरिका) — नोबेल पुरस्कार (1970) पाने वाले इकलौते कृषि वैज्ञानिक।
ध्यान दें: नुकसान — खाद्यान्न पर ज़ोर से दलहन और मोटे अनाज का उत्पादन-क्षेत्र घटा; ज़्यादा सिंचाई से भूजल गिरा; सभी राज्यों को लाभ न मिलने से क्षेत्रीय असमानता बढ़ी।
कृषि से जुड़ी क्रांतियाँ
| क्रांति | किससे जुड़ी |
|---|---|
| गुलाबी | झींगा मछली |
| रजत | अंडा |
| श्वेत | दूध |
| हरित | खाद्यान्न |
10. कृषि मिशन व योजनाएँ
| योजना | शुरुआत | ख़ास बात |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय दलहन विकास परियोजना | 1988–89 | केंद्र-राज्य 75 : 25; चना 12 ज़िले, मूँग 10, उड़द 3 |
| ISOPOM | 2004–05 | मक्का, तिलहन, दलहन उत्पादन से खाद्य आत्मनिर्भरता; अब नाम NMOOP (राष्ट्रीय तिलहन एवं ऑयल पाम मिशन); 2015–16 से 60 : 40; प्रमाणित बीज, प्रदर्शन, जैव उर्वरक, प्रशिक्षण, फव्वारा सेट, मिनी किट |
| ATMA (कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण) | 2005–06 | सभी ज़िलों में; ज़िला स्तर पर कृषि तकनीक के प्रसार की पंजीकृत संस्था — सभी विभाग, शोध संस्थाएँ, NGO इससे जुड़ते हैं |
| अमूल्य नीर योजना | 2005–06 | जल संरक्षण; डिग्गी-फव्वारा, फव्वारा विस्तार, बूँद-बूँद सिंचाई |
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का ब्योरा “बाँध व सिंचाई परियोजनाएँ” अध्याय में है।
11. खाद्य सुरक्षा मिशन व फसल बीमा
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM) — 2007–08
- शुरू में गेहूँ और दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए; अब मोटे अनाज, कपास, पटसन और गन्ना भी; 2015–16 से 60 : 40।
- 2018–19 से मोटे अनाजों के लिए 12 ज़िले — मक्का के 5 (बाँसवाड़ा, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूँगरपुर, उदयपुर) और जौ के 7 (अजमेर, भीलवाड़ा, हनुमानगढ़, जयपुर, नागौर, गंगानगर, सीकर)।
- NFSM गेहूँ — 14 ज़िले; 2010–11 से सभी ज़िले NFSM दलहन में।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) — 13 जनवरी 2016
- खाद्यान्न (अनाज, बाजरा, दालें), तिलहन और बागवानी फसलें शामिल।
- किसान का प्रीमियम ➜ रबी 1.5%, ख़रीफ़ 2%, वाणिज्यिक व बागवानी 5%।
- ख़रीफ़ 2020 से केंद्र असिंचित क्षेत्र में 30% और सिंचित में 25% तक प्रीमियम अनुदान देगा, बाक़ी राज्य।
- संचालन ➜ भारतीय कृषि बीमा कम्पनी (AICIL); थीम — “एक राष्ट्र एक योजना”।
12. किसान सम्मान निधि व अन्य
| योजना | शुरुआत | ख़ास बात |
|---|---|---|
| PM किसान सम्मान निधि | 1 दिसम्बर 2018 | 100% केंद्र; सभी भूमिधारी किसान परिवारों को हर साल ₹6000 — 3 बराबर किस्तों में, सीधे बैंक खाते में |
| मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि | बजट 2024–25 | PM-किसान के लाभार्थियों को राज्य से ₹2000 सालाना अतिरिक्त; अगले साल कुल ₹9000 करने का प्रस्ताव (बजट 2025–26) |
| कृषि इंफ़्रास्ट्रक्चर फ़ंड (AIF) | 15 मई 2020 | केंद्रीय वित्त मंत्री ने ₹1 लाख करोड़ की “कृषि अवसंरचना निधि” घोषित की; राज्य में नोडल — सहकारिता विभाग (रजिस्ट्रार, सहकारी समितियाँ); ₹2 करोड़ तक के ऋण पर 3% सालाना ब्याज छूट |
- PM किसान पोर्टल ➜ राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का किसान सेवा पोर्टल फ़रवरी 2019 से फ़रवरी 2021 तक पंजीकरण-सत्यापन में; फिर केंद्र का PM-किसान पोर्टल; योजना का लाभ देने में राजस्थान अग्रणी।
- जुलाई 2022 ➜ एग्रीकल्चर इंफ़्रास्ट्रक्चर फ़ंड में “राइज़िंग स्टेट” के रूप में राजस्थान को दूसरा स्थान।
- नेशनल फ़िशरीज़ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म (NFDP) ➜ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का घटक; मछली पालकों को ऋण और समूह दुर्घटना बीमा; विभाग मछली पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड भी दे रहा है।
रिवीजन पॉइंटर्स
- जैतून को प्लांटेशन क्रॉप अधिसूचित करने वाला और जैतून तेल बनाने वाला पहला राज्य राजस्थान है; पहली रिफ़ाइनरी लूणकरणसर (बीकानेर) में 3 अक्टूबर 2014 को चली।
- पहली बायोफ़्यूल नीति 17 जनवरी 2007 को आई — ऐसी नीति लाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है।
- उत्कृष्टता केंद्र — नांता (कोटा) में फल, देवड़ावास (टोंक) में अमरूद, खेमरी (धौलपुर) में आम और सगरा-भोजका (जैसलमेर) में खजूर।
- काज़री (जोधपुर) 1959 में ICAR के अधीन पूर्ण संस्थान बना; खजूर अनुसंधान केंद्र बीकानेर में 1978 में खुला।
- नाबार्ड की स्थापना 12 जुलाई 1982 को मुम्बई में शिवरमन समिति की सिफ़ारिश पर हुई।
- MPUAT उदयपुर 1 नवम्बर 1999 को बना, जबकि कोटा (बोरखेड़ा) का कृषि विश्वविद्यालय सितम्बर 2013 में।
- निजी क्षेत्र की पहली कृषि मंडी कैथून (कोटा) में 29 नवम्बर 2005 को खुली; सबसे बड़ी फल-सब्ज़ी मंडी मुहाना (जयपुर) है।
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 13 जनवरी 2016 से लागू है — किसान का प्रीमियम रबी में 1.5%, ख़रीफ़ में 2% और वाणिज्यिक-बागवानी फसलों में 5%।
- PM किसान सम्मान निधि 1 दिसम्बर 2018 से चल रही है — हर भूमिधारी किसान परिवार को साल में 6000 रुपये, 3 बराबर किस्तों में।
अगले भाग में राजस्थान सरकार की कृषि नीतियाँ, किसान कल्याण, जल संरक्षण, बीज-खाद अनुदान, जैविक खेती और कृषि बजट।
पिछला भाग: राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें: खाद्यान्न फसलें एवं तिलहन फसलें
अगला भाग: राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें: राज्य की योजनाएँ
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