सर्दियों की हल्की-सी वर्षा गेहूँ और चने के लिए इतनी क़ीमती है कि उसे «सुनहरी बूँदें» कहा जाता है। मावठ से लेकर जलवायु प्रदेशों तक यह भाग उन सवालों का है जिनमें नाम और आधार आपस में गड्डमड्ड हो जाते हैं। इसमें मानसून का लौटना, मावठ, सर्दियों के तथ्य, पाँच जलवायु प्रदेश, तथा कोपेन, थॉर्नथ्वेट और ट्रिवार्था के वर्गीकरण क्रमवार दिए गए हैं।
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1. शीत ऋतु व मावठ
शीत ऋतु दो भागों में — मानसून प्रत्यावर्तन काल (अक्टूबर से मध्य दिसम्बर) और शुष्क शीत ऋतु (मध्य दिसम्बर से फरवरी)।
- अधिकतम तापमान ➜ 20°–28°C
- न्यूनतम तापमान ➜ 6°–8°C
- सबसे ठंडा महीना ➜ जनवरी
2. मानसून का प्रत्यावर्तन
मानसून कैसे लौटता है
- 23 सितम्बर: सूर्य विषुवत रेखा पर
- दक्षिणायन होकर मकर रेखा की ओर
- उत्तरी गोलार्द्ध ठंडा, हिंद महासागर पर निम्न दाब
- वर्षा ऋतु अचानक नहीं, धीरे-धीरे ख़त्म होती है।
- अक्टूबर से मध्य दिसम्बर तक यह स्थिति रहती है — यह उपमहाद्वीप में लौटते हुए मानसून का समय है।
- लौटते मानसून से भारत में तमिलनाडु (कोरोमंडल तट) में वर्षा होती है।
3. मावठ — सर्दियों की वर्षा
- 22 दिसम्बर को सूर्य मकर रेखा पर सीधा चमकता है; उत्तरी गोलार्द्ध बहुत ठंडा हो जाता है और कुछ रेगिस्तानी इलाकों में रात का तापमान शून्य या उससे नीचे चला जाता है — पाला पड़ने से फ़सलें नष्ट होती हैं।
- इस समय उत्तर और मध्य एशिया पर उच्च वायुदाब और हिंद महासागर पर निम्न वायुदाब बनता है; हवाएँ उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व बहती हैं और मध्य एशिया-भूमध्यसागर से थोड़ी नमी भी लाती हैं।
- इन पश्चिमी विक्षोभों / भूमध्यसागरीय हवाओं से होने वाली हल्की वर्षा — मावठ।
… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
- दूसरा नाम ➜ गोल्डन ड्रॉप्स (सुनहरी बूँदें)
- सबसे लाभ ➜ गेहूँ और चना (भारत में सेब भी)
- राजस्थान में सर्दियों की वर्षा ➜ उत्तर-पश्चिमी हवाओं से
याद रखें: परीक्षा (REET L-3, 2025): मावठ है — शीत ऋतु की वर्षा।
4. सर्दियों के तथ्य
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| राजस्थान का बर्खोयान्स्क | माउंट आबू (सिरोही) — बर्खोयान्स्क रूस में, एशिया का सबसे ठंडा स्थान |
| राजस्थान का शिमला | माउंट आबू |
| सर्दियों में जमने वाली इकलौती झील | नक्की झील (सिरोही) |
… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
| स्थानीय शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सीली | शीत लहर |
| गुलाबी सर्दी | दीपावली के आसपास की हल्की ठंड |
| पाला पड़ना | तापमान 0°C से नीचे जाना |
सर्दियों में ठंड ज़्यादा क्यों
- राजस्थान, पंजाब, हरियाणा पर महाद्वीपीय जलवायु का असर।
- हिमालय में हिमपात से शीत लहर।
- कैस्पियन सागर और तुर्कमेनिस्तान से आने वाली शीत लहर — उत्तर-पश्चिम में कोहरा और पाला।
सूर्य से पृथ्वी की दूरी
| घटना | तिथि | दूरी |
|---|---|---|
| उपसौर (सबसे कम दूरी) | 3 जनवरी | 1470 लाख किमी |
| अपसौर (सबसे ज़्यादा दूरी) | 4 जुलाई | 1510 लाख किमी |
अल नीनो और ला नीना
| धारा | क्या | भारतीय मानसून पर असर |
|---|---|---|
| अल नीनो | दक्षिण अमेरिका के पश्चिम में प्रशांत महासागर की गर्म जलधारा | मानसून कमज़ोर — कम वर्षा, सूखा |
| ला नीना | ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में ठंडी जलधारा | मानसून मज़बूत — अतिवृष्टि |
भारतीय मौसम विभाग की वेधशाला — जयपुर (जंतर मंतर)।
5. जलवायु प्रदेश
भारतीय मौसम विभाग ने वर्षा, तापमान और आर्द्रता के आधार पर राजस्थान को 5 जलवायु प्रदेशों में बाँटा है। नीचे हर ज़िला अपने मुख्य प्रदेश के रंग में है; कई ज़िले दो प्रदेशों में आते हैं।
| प्रदेश | औसत वर्षा | गर्मी / सर्दी का तापमान | प्रतिनिधि नगर |
|---|---|---|---|
| शुष्क | 0–20 सेमी | 40–45°C / 0–10°C | जैसलमेर |
| अर्द्धशुष्क | 20–40 सेमी | 36–42°C / 10–17°C | जोधपुर |
| उपआर्द्र | 40–60 सेमी | 28–36°C / 12–18°C | जयपुर |
… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
याद रखें: परीक्षा: राजस्थान का अधिकांश भाग शीतोष्ण जलवायु क्षेत्र में आता है (पशु परिचर 2024); जयपुर में स्टेपी जलवायु परिस्थितियाँ नहीं मिलतीं (वरिष्ठ अध्यापक 2024)।
6. शुष्क जलवायु प्रदेश
- ज़िले ➜ जैसलमेर, बीकानेर, फलौदी; साथ में उत्तरी बाड़मेर, उत्तर-पश्चिमी जोधपुर, पश्चिमी नागौर, पश्चिमी चूरू और दक्षिणी गंगानगर।
- कठोर और शुष्क जलवायु, न्यूनतम वर्षा, धूल भरी आँधियाँ; वनस्पति नाममात्र — मरुद्भिद।
- मिट्टी ➜ एंटीसोल्स; दैनिक और वार्षिक तापांतर सबसे ज़्यादा।
7. अर्द्धशुष्क जलवायु प्रदेश
- ज़िले ➜ गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूँ, सीकर, डीडवाना-कुचामन, नागौर, पाली, जालौर, बालोतरा, जोधपुर; उत्तरी ब्यावर, उत्तरी सिरोही, दक्षिण-पूर्वी बाड़मेर।
- वनस्पति ➜ खेजड़ी, बबूल, रोहिड़ा; सबसे ज़्यादा खारे पानी की झीलें इसी प्रदेश में।
8. उपआर्द्र जलवायु प्रदेश
- ज़िले ➜ खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, अलवर, जयपुर, अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, सिरोही (59 सेमी वर्षा), दौसा, टोंक; पाली का दक्षिण-पूर्वी भाग।
- वनस्पति ➜ पतझड़ वन और विरल वनस्पति; मिट्टी — जलोढ़ (अल्फ़ीसोल)।
9. आर्द्र जलवायु प्रदेश
- ज़िले ➜ भरतपुर, डीग, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, उदयपुर, कोटा, बूँदी, बाराँ; उत्तरी सलूम्बर और उत्तरी प्रतापगढ़।
- वनस्पति ➜ मुख्यतः पतझड़ वन और सघन वनस्पति।
10. अति आर्द्र जलवायु प्रदेश
- ज़िले ➜ डूँगरपुर, बाँसवाड़ा, झालावाड़, प्रतापगढ़; माउंट आबू क्षेत्र, दक्षिणी उदयपुर, दक्षिणी सलूम्बर और दक्षिणी बाराँ।
- सदाबहार वनस्पति; घनी मानसूनी सवाना जैसी वनस्पति।
11. कोपेन का वर्गीकरण
- डॉ. व्लादिमीर कोपेन ➜ जन्म रूस में, निधन ऑस्ट्रिया में; रूस और जर्मनी की नागरिकता।
- वर्गीकरण 1900 में तैयार, 1918 में प्रस्तुत; 1931 और 1936 में संशोधित। आधार कैंडोले (1874) का वर्गीकरण।
- मुख्य आधार ➜ वनस्पति (साथ में तापमान और वर्षा के मासिक मान); सांकेतिक भाषा — बड़े अक्षर A, B, C, D, E; S = अर्द्ध-मरुस्थल, W = मरुस्थल।
| कोपेन के मुख्य प्रकार | पहचान |
|---|---|
| A — उष्ण कटिबंधीय | साल भर औसत मासिक तापमान 18°C से ज़्यादा |
| B — शुष्क | तापमान की तुलना में वर्षा बहुत कम |
| C — गर्म (मध्य अक्षांशीय) | सबसे ठंडे महीने का औसत 18°C और −3°C के बीच |
| प्रदेश | ज़िले | वर्षा | प्रतिनिधि |
|---|---|---|---|
| BWhw — शुष्क उष्ण मरुस्थलीय | जैसलमेर, फलौदी, बीकानेर, हनुमानगढ़, गंगानगर | 10–20 सेमी | बीकानेर |
| BShw — अर्द्धशुष्क (स्टेपी) | सीकर, झुंझुनूँ, चूरू, डीडवाना-कुचामन, नागौर, जोधपुर, उत्तर-पश्चिमी ब्यावर, पाली, जालौर, सिरोही, बाड़मेर, बालोतरा | 20–40 सेमी | नागौर |
| Cwg — उपआर्द्र | खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, अलवर, डीग, भरतपुर, धौलपुर, जयपुर, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, दक्षिण-पूर्वी ब्यावर, भीलवाड़ा, कोटा, बूँदी, बाराँ, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, उत्तरी उदयपुर | 60–80 सेमी | टोंक |
| कूट | अर्थ |
|---|---|
| BWhw | B — शुष्क, W — मरुस्थल, h — गर्म व शुष्क, w — सर्दी सूखी, गर्मी बरसाती |
| BShw | B — शुष्क, S — स्टेपी, h — गर्म व शुष्क, w — सर्दी सूखी, गर्मी बरसाती |
| Cwg | C — मध्य अक्षांशीय (8–18°), w — सर्दी सूखी, गर्मी बरसाती, g — गंगा का मैदान |
BShw में राज्य का सबसे बड़ा भाग; यहाँ कम वर्षा, शुष्क जलवायु, काँटेदार झाड़ियाँ और स्टेपी जैसी वनस्पति। Aw में वाष्पीकरण कम, वर्षा ज़्यादा, गर्मी-सर्दी दोनों में अति; सवाना वनस्पति और मानसूनी पतझड़ वाले पेड़।
12. थॉर्नथ्वेट का वर्गीकरण
थॉर्नथ्वेट (1931) ने कोपेन की तरह कूट-अक्षरों का प्रयोग किया; आधार — वाष्पीकरण, वर्षा और तापमान (1948 में संशोधित)।
| प्रदेश | ज़िले | वर्षा | प्रतिनिधि |
|---|---|---|---|
| EA’d — उष्ण मरुस्थलीय | जैसलमेर, उत्तरी बाड़मेर, पश्चिमी बीकानेर, उत्तर-पश्चिमी फलौदी | 10–15 सेमी | जैसलमेर |
| DB’w — अर्द्ध मरुस्थलीय | हनुमानगढ़, गंगानगर, चूरू, उत्तर-पूर्वी बीकानेर, उत्तरी झुंझुनूँ | 15–20 सेमी | बीकानेर |
| DA’w — उष्ण आर्द्र (सबसे बड़ा) | सीकर से जोधपुर-बाड़मेर तक, पूर्वी मैदान और मेवाड़ के ज़्यादातर ज़िले; दक्षिणी बीकानेर, दक्षिणी चूरू, उत्तरी कोटा भी | 50–80 सेमी | अजमेर |
- DA’w में वनस्पति अर्द्ध-मरुस्थलीय; DB’w में काँटेदार झाड़ियाँ; CA’w में सवाना और मानसूनी वनस्पति।
13. ट्रिवार्था का वर्गीकरण
प्रो. ट्रिवार्था ने कोपेन के वर्गीकरण में संशोधन करके आसान वर्गीकरण बनाया; आधार — वर्षा (साथ में तापमान)। इसके अनुसार भी राज्य के 4 प्रकार हैं।
| कोपेन | ट्रिवार्था |
|---|---|
| Aw | Aw |
| BWhw | BWh |
| BShw | BSh |
| प्रदेश | ज़िले | प्रतिनिधि |
|---|---|---|
| BWh — शुष्क मरुस्थलीय | जैसलमेर, उत्तर-पश्चिमी बाड़मेर, उत्तर-पश्चिमी फलौदी, पश्चिमी बीकानेर | जैसलमेर |
| BSh — उष्ण-अर्द्ध उष्ण स्टेपी | सीकर, चूरू, झुंझुनूँ, कोटपूतली, गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, फलौदी, नागौर, अजमेर, ब्यावर, पाली, जोधपुर, जालौर, अधिकांश बाड़मेर, बालोतरा, सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, जयपुर, डीडवाना-कुचामन, उत्तर-पश्चिमी टोंक | नागौर |
| Caw — अर्द्ध उष्ण आर्द्र | पूर्वी जयपुर, दौसा, अलवर, खैरथल-तिजारा, डीग, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, उत्तरी कोटा, बूँदी, उत्तरी बाराँ, दक्षिण-पूर्वी भीलवाड़ा, टोंक | सवाई माधोपुर |
- BSh में वर्षा पूर्व से पश्चिम और दक्षिण से उत्तर घटती है; पश्चिम की ओर जाने पर जलवायु अर्द्धशुष्क से शुष्क होती जाती है।
- Caw में बीहड़ और विंध्यन पठार का भाग शामिल।
- Aw का औसत तापमान 20°C, औसत वर्षा 100 सेमी।
ट्रिक: चारों वर्गीकरणों का आधार: मौसम विभाग — वर्षा, तापमान, आर्द्रता; कोपेन — वनस्पति; थॉर्नथ्वेट — वाष्पीकरण, वर्षा, तापमान; ट्रिवार्था — वर्षा।
राजस्थान को 10 कृषि जलवायु क्षेत्रों में भी बाँटा गया है (विस्तार “कृषि” अध्याय में)।
रिवीजन पॉइंटर्स
- शीत ऋतु के दो भाग हैं — मानसून प्रत्यावर्तन काल (अक्टूबर से मध्य दिसम्बर) और शुष्क शीत ऋतु (मध्य दिसम्बर से फरवरी); सबसे ठंडा महीना जनवरी है।
- मावठ शीत ऋतु की वर्षा है जो पश्चिमी विक्षोभों से होती है; इसका दूसरा नाम गोल्डन ड्रॉप्स है और सबसे ज़्यादा लाभ गेहूँ व चने को मिलता है।
- माउंट आबू को «राजस्थान का शिमला» और «राजस्थान का बर्खोयान्स्क» कहते हैं; सर्दियों में जमने वाली इकलौती झील नक्की (सिरोही) है।
- उपसौर 3 जनवरी को (1470 लाख किमी) और अपसौर 4 जुलाई को (1510 लाख किमी) होता है।
- अल नीनो से मानसून कमज़ोर पड़ता है — कम वर्षा, सूखा; ला नीना से मानसून मज़बूत होता है — अतिवृष्टि।
- मौसम विभाग ने राज्य को 5 जलवायु प्रदेशों में बाँटा है — शुष्क, अर्द्धशुष्क, उपआर्द्र, आर्द्र और अति आर्द्र; शुष्क प्रदेश में जैसलमेर, बीकानेर और फलौदी आते हैं।
- कोपेन के वर्गीकरण का मुख्य आधार वनस्पति है; BShw (स्टेपी) राज्य का सबसे बड़ा भाग घेरता है।
- चारों वर्गीकरणों के आधार — मौसम विभाग: वर्षा, तापमान, आर्द्रता; कोपेन: वनस्पति; थॉर्नथ्वेट: वाष्पीकरण, वर्षा, तापमान; ट्रिवार्था: वर्षा।
अगले भाग में झील की परिभाषा, उसके प्रकार, राज्य में खारी झीलें इतनी क्यों हैं, नमक देने वाली झीलें और मेवाड़-वागड़ की मीठी झीलें।
पिछला भाग: राजस्थान की जलवायु: वर्षा ऋतु व मानसून एवं वर्षा का वितरण
अगला भाग: राजस्थान की झीलें: झीलें — मूल बातें एवं खारे पानी की झीलें
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