कृषि-आधारित उद्योगों में हर उद्योग का एक «पहला कारख़ाना» और एक «सबसे ज़्यादा वाला ज़िला» होता है, और ज़्यादातर सवाल इन्हीं दो बातों पर बनते हैं। इस भाग में चीनी, ऊन-रेशम-काग़ज़-नमक और घी-तेल-डेयरी जैसे उद्योग निपटाकर सीमेंट उद्योग तक पहुँचा गया है। सीमेंट वाले हिस्से में कारख़ानों की सूची और सफ़ेद सीमेंट के कारख़ाने भी दिए गए हैं।
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1. चीनी उद्योग
- भारत का दूसरा सबसे बड़ा कृषि-आधारित (मौसमी) उद्योग; कच्चा माल — गन्ना और चुकंदर; ईंधन, चूना पत्थर और गंधक भी लगते हैं।
- विश्व की चीनी का कटोरा ➜ क्यूबा; चीनी और गन्ना सबसे ज़्यादा — ब्राज़ील, दूसरा भारत; भारत में सबसे ज़्यादा — उत्तर प्रदेश, फिर महाराष्ट्र; सबसे ज़्यादा मिलें — उत्तर प्रदेश।
- राज्य में सबसे ज़्यादा गन्ना और चीनी — गंगानगर; देश के गन्ने में राज्य का हिस्सा 1.11% — ज़्यादातर गंगानगर, बूँदी, हनुमानगढ़ में।
| मिल | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| द मेवाड़ शुगर मिल्स | भूपाल सागर (चित्तौड़गढ़) | पहली चीनी मिल; 5 अप्रैल 1932 को निजी क्षेत्र में “मेवाड़ इंडस्ट्रीज़” नाम से; 1940 से नए मालिक के हाथ उत्पादन |
| राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स (RSGSM) | गंगानगर | 1945 में निजी “बीकानेर इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन”; चीनी 1946 से; 1 जुलाई 1956 को राज्य ने ख़रीदी (सार्वजनिक); 14 मई 1993 को नया नाम RSGSM |
| केशवरायपाटन सहकारी शुगर मिल | बूँदी, 1965 | सहकारी; अब बंद |
गंगानगर शुगर मिल — और क्या करती है
- चुकंदर से चीनी 1968 में शुरू हुई — अब बंद।
- “रॉयल हैरिटेज लिकर” 2015 में फिर शुरू; 2016 में गंगानगर शहर से कमीनपुरा गाँव में; नवम्बर 2016 से नई 30 KLPD डिस्टिलरी; 4.95 MW बिजली संयंत्र।
- देसी शराब, हैरिटेज लिकर और सैनिटाइज़र बनाती है; शराब अजमेर, अटरू (बाराँ), प्रतापगढ़, जोधपुर, उदयपुर में भी।
2. ऊन, रेशम, काग़ज़ व नमक
ऊन उद्योग
- ऊन उत्पादन में राजस्थान देश में पहले स्थान पर; राज्य में सबसे ज़्यादा ऊन — जोधपुर।
- स्टेट वूलन मिल्स ➜ बीकानेर; जोधपुर ऊन फ़ैक्ट्री — जोधपुर; वर्स्टेड स्पिनिंग मिल्स — चूरू और लाडनूँ (डीडवाना-कुचामन), RAJSICO की ग्रामीण उद्योग परियोजना में।
- एशिया की सबसे बड़ी ऊन मंडी — बीकानेर; ऊन प्रसंस्करण गृह — भीलवाड़ा; ऊन विदेशी आयात-निर्यात संस्थान — कोटा।
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
रेशम उद्योग
- आविष्कार और सबसे ज़्यादा उत्पादन ➜ चीन; भारत दूसरा; भारत में सबसे ज़्यादा — कर्नाटक।
- राज्य में रेशम के लिए टसर कृषि कार्यक्रम; रेशम के कीड़े पालना = सेरीकल्चर; सबसे ज़्यादा — उदयपुर, बाँसवाड़ा, फिर कोटा; राज्य में सबसे ज़्यादा टसर।
- रेशम के प्रकार ➜ शहतूती, एरी (अरंडी), टसर (साल, अर्जुन), मूगा (सोम व सालू), ओक टसर।
काग़ज़ उद्योग
- पहला काग़ज़ कारख़ाना ➜ सांगानेर (जयपुर), मानसिंह प्रथम के समय; कुमारप्पा हस्तनिर्मित काग़ज़ संस्थान — सांगानेर; हाथ से काग़ज़ बनाने का प्राचीन केंद्र — घोसुंडा (चित्तौड़गढ़)।
- कृष्णा पेपर मिल्स ➜ कोटपूतली; जमोटिया और अनीरा पेपर मिल — भीलवाड़ा।
- उदयपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ में बाँस बहुत — काग़ज़ उद्योग की अच्छी संभावना।
नमक उद्योग
- विश्व में पहला चीन, दूसरा अमेरिका, तीसरा भारत; भारत में सबसे ज़्यादा गुजरात, फिर तमिलनाडु, फिर राजस्थान; झीलों से नमक में राजस्थान पहला; आयोडीन युक्त नमक में राजस्थान दूसरा।
- भारत सरकार के नमक विभाग का मुख्यालय जयपुर (क्षेत्रीय कार्यालय चेन्नई, अहमदाबाद, मुम्बई); उत्पादन 70% सार्वजनिक, 30% निजी; देश का सबसे बड़ा आंतरिक नमक स्रोत — सांभर।
- खुले में नमक बनाने वाले क्षेत्र ➜ जोधपुर, नागौर, अजमेर, जैसलमेर, चूरू, सीकर, बाड़मेर; क्यारियों में बना नमक क्यार, हवा से सुखाया रेस्ता।
| राज्य (लाख टन) | 2019–20 | 2020–21 | 2021–22 |
|---|---|---|---|
| गुजरात | 239.6 | 216.39 | 227.67 |
| तमिलनाडु | 22.24 | 23.93 | 21.15 |
| राजस्थान | 13.29 | 21.56 | 16.90 |
| इकाई | ख़ास बात |
|---|---|
| पचपदरा साल्ट लिमिटेड (बालोतरा) | 1960 में केंद्र के नमक विभाग से राज्य को; 1964 में राजकीय उपक्रम विभाग में; सबसे अच्छी गुणवत्ता; खारवाल जाति के लोग बनाते हैं; अगस्त 1992 में पट्टे पर; हीरागढ़ व साम्भरा कारख़ाने |
| राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स (डीडवाना) | 1960 में केंद्र से, 1964 में हस्तांतरित; 10 अक्टूबर 2008 को निजीकरण; सोडियम सल्फ़ेट, सोडियम सल्फ़ाइड, आयोडीकरण; सोडियम सल्फ़ेट ज़्यादा होने से यहाँ का नमक खाने योग्य नहीं; देवल संस्था परम्परा से नमक बनाती है |
| सांभर साल्ट्स (SSL) | 30 सितम्बर 1964; हिंदुस्तान साल्ट्स (1958) की सहायक; 60 : 40; नावां में रिफ़ाइनरी — “SS” ब्रांड; सांभर में नमक संग्रहालय |
साबू सोडियम परियोजना — नावां (डीडवाना-कुचामन); मॉडल साल्ट फ़ार्म — नावां, 12 जनवरी 2002; नमक परीक्षण प्रयोगशालाएँ — नावां और फलौदी।
3. घी, तेल, डेयरी व अन्य
वनस्पति घी
लगभग 9 कारख़ाने; पहला — भीलवाड़ा, 1964; सबसे ज़्यादा उत्पादन — जयपुर।
| ब्रांड | कहाँ |
|---|---|
| आमेर वनस्पति | झोटवाड़ा (जयपुर) |
| केसरी वनस्पति | निवाई (टोंक) |
| रोहिताश्व वनस्पति | दुर्गापुरा (जयपुर) |
… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
खाद्य तेल
सरसों तेल — वीर बालक, नेताजी, चम्बल (जयपुर), इंजन छाप (भरतपुर)। जैतून — रिफ़ाइनरी लूणकरणसर (बीकानेर); ऑलिव टी प्लांट — एक्सीलेंस सेंटर, बस्सी (जयपुर)।
बायोडीज़ल
कच्चा माल — रतनजोत (जेट्रोफ़ा) और करंज। रतनजोत से पहला बायोडीज़ल संयंत्र — झामरकोटड़ा (उदयपुर), RSMML, 2006; पहली बायोडीज़ल रिफ़ाइनरी — कालरवास (उदयपुर)।
डेयरी
- डेयरी का सबसे ज़्यादा विकास ➜ जयपुर; पहली डेयरी — पदमा, अजमेर (1938)।
- राजस्थान सहकारी डेयरी फ़ेडरेशन (RCDF) ➜ 1977, विश्व बैंक की मदद से, जयपुर।
- प्रमुख डेयरियाँ ➜ वरमूल (जोधपुर), उरमूल (बीकानेर), गंगमूल (हनुमानगढ़), मेट्रो डेयरी (बस्सी, जयपुर); ऊँटनी के दूध का विपणन केंद्र — जयपुर।
अन्य खाद्य उद्योग
बीकानेरी भुजिया-पापड़ — बीकानेर; आम पापड़ — बाँसवाड़ा; ग्वार गम — जोधपुर; डॉ. ओटकर चटनी (जर्मन कम्पनी) — कहरानी (खैरथल-तिजारा); पारले बिस्किट — नीमराणा।
4. सीमेंट उद्योग
- कारख़ाने ➜ 23
- वार्षिक क्षमता ➜ 70.05 मिलियन टन
- प्रकार ➜ पोर्टलैंड और पोज़ोलाना
- सीमेंट एक आधारभूत (संरचनात्मक) उद्योग है; उत्पादन में राजस्थान देश में पहला। विश्व में सबसे ज़्यादा — चीन, दूसरा भारत।
- चूना पत्थर की बहुतायत के कारण चित्तौड़गढ़ सबसे उपयुक्त ज़िला और सबसे ज़्यादा उत्पादन भी यहीं; निम्बाहेड़ा को भारत का सीमेंट शहर कहते हैं।
- सबसे अच्छा चूना पत्थर ➜ जोधपुर और सिरोही; भविष्य में सबसे ज़्यादा संभावना — जैसलमेर (चूना पत्थर के अकूत भंडार)।
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| कारख़ाना | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| ACC (एसोसिएटेड सीमेंट कम्पनी) | लाखेरी (बूँदी) | पहला सीमेंट कारख़ाना — 1915 में साहू जैन समूह ने क्लिक निक्सन कम्पनी के साथ; उत्पादन 1917 से; 15 लाख टन; अब अडानी समूह |
| जयपुर उद्योग | सवाई माधोपुर, 1953 | आज़ादी के बाद पहला और राज्य का दूसरा; “त्रिशूल” छाप; तब एशिया का सबसे बड़ा; अब बंद |
| वंडर सीमेंट | निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) | RK समूह; 120 लाख टन — सबसे ज़्यादा क्षमता |
ट्रिक: पहला — लाखेरी (1915); आज़ादी के बाद पहला — सवाई माधोपुर (1953); सबसे ज़्यादा क्षमता — वंडर (निम्बाहेड़ा); सबसे कम — श्रीराम (कोटा)।
5. सीमेंट कारख़ानों की सूची
श्री सीमेंट
राज्य में सबसे ज़्यादा उत्पादन और सबसे ज़्यादा संयंत्र इसी कम्पनी के; उत्तर भारत की सबसे बड़ी सीमेंट कम्पनी; 3 ब्रांड — श्री, बांगड़, रॉक स्ट्रॉन्ग। ब्यावर संयंत्र (1985, 36 लाख टन) — तब भारत का सबसे बड़ा ड्राई प्रोसेस कारख़ाना; ऊर्जा संरक्षण के लिए गोल्डन पीकॉक पुरस्कार 2005, 2008 और 2013; OPC, PPC, PSC सीमेंट।
| श्री सीमेंट के अन्य संयंत्र | क्षमता |
|---|---|
| रास (ब्यावर) | 30 लाख टन + नई इकाई 40 लाख टन |
| खुशखेड़ा (खैरथल-तिजारा) | 35 लाख टन |
| सूरतगढ़ (गंगानगर) | 36 लाख टन |
| कारख़ाना | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| अम्बुजा | रबड़ियावास (ब्यावर) | 36 लाख टन; अडानी |
| मारवाड़ सीमेंट वर्क्स | मूंडवा (नागौर) | अम्बुजा का ग्रीन प्लांट, अगस्त 2021; अडानी |
| अल्ट्राटेक | पिंडवाड़ा (सिरोही) | 48.50 लाख टन |
| अल्ट्राटेक | शम्भुपुरा (चित्तौड़गढ़) | 80 लाख टन |
सफ़ेद सीमेंट
| कारख़ाना | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| JK व्हाइट सीमेंट वर्क्स | गोटन (नागौर) | राज्य (और भारत) का पहला सफ़ेद सीमेंट कारख़ाना — 1984 |
| बिड़ला व्हाइट (ग्रासिम / अल्ट्राटेक) | खारिया खंगार, भोपालगढ़ तहसील (जोधपुर) | राज्य का दूसरा; भारत का सबसे बड़ा सफ़ेद सीमेंट कारख़ाना — 1988 |
| JK व्हाइट सीमेंट | मांगरोल (चित्तौड़गढ़) | तीसरा |
रिवीजन पॉइंटर्स
- राज्य में सबसे ज़्यादा गन्ना और चीनी गंगानगर में होती है; पहली चीनी मिल द मेवाड़ शुगर मिल्स, भूपाल सागर (चित्तौड़गढ़), 5 अप्रैल 1932।
- ऊन उत्पादन में राजस्थान देश में पहला है और राज्य में सबसे ज़्यादा ऊन जोधपुर में; एशिया की सबसे बड़ी ऊन मंडी बीकानेर में है।
- पहला काग़ज़ कारख़ाना सांगानेर (जयपुर) में मानसिंह प्रथम के समय बना; हाथ से काग़ज़ बनाने का प्राचीन केंद्र घोसुंडा (चित्तौड़गढ़) है।
- झीलों से नमक बनाने में राजस्थान पहला है; देश में आंतरिक नमक का सबसे बड़ा क्षेत्र सांभर है।
- वनस्पति घी का पहला कारख़ाना भीलवाड़ा में लगा (1964); सबसे ज़्यादा उत्पादन जयपुर में होता है।
- पहली डेयरी पदमा (अजमेर) में 1938 में बनी; RCDF की स्थापना 1977 में जयपुर में हुई।
- रतनजोत से पहला बायोडीज़ल संयंत्र झामरकोटड़ा (उदयपुर) में 2006 में लगा।
- सीमेंट उत्पादन में राजस्थान देश में पहला है; राज्य में 23 कारख़ाने और वार्षिक क्षमता 70.05 मिलियन टन।
- पहला सीमेंट कारख़ाना लाखेरी (1915) और सबसे ज़्यादा क्षमता वंडर (निम्बाहेड़ा, 120 लाख टन) की है; पहला सफ़ेद सीमेंट कारख़ाना गोटन (नागौर) में 1984 में लगा।
अगले भाग में खनिज-आधारित उद्योगों की बाक़ी कड़ियाँ — काँच-सिरेमिक, ग्रेनाइट-मार्बल और पचपदरा रिफ़ाइनरी — तथा खाद, रसायन, हथकरघा-हस्तशिल्प, GI और सहायक संस्थाएँ।
पिछला भाग: राजस्थान में उद्योग: औद्योगिक परिदृश्य एवं कृषि-आधारित उद्योग (भाग 1)
अगला भाग: राजस्थान में उद्योग: खनिज-आधारित उद्योग (भाग 2) एवं हथकरघा, हस्तशिल्प व GI
इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान के खनिज संसाधन · राजस्थान में परिवहन के साधन
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