राजस्थान में बाँध और नहरें सिर्फ़ निर्माण की बात नहीं, जीने-मरने का सवाल हैं — देश के क्षेत्रफल का 10.40% हिस्सा रखने वाले इस राज्य के पास देश के जल संसाधन का केवल 1.16% है। इस भाग में पानी की स्थिति, सिंचाई के साधन व ज़िले, परियोजनाओं के प्रकार, भाखड़ा-नांगल, व्यास, रावी-व्यास जल विवाद, यमुना जल, चम्बल और माही बजाज सागर परियोजनाएँ दी गई हैं।
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1. राज्य में पानी की स्थिति
पानी ही जीवन और विकास का आधार है। राजस्थान के लिए इसकी क़ीमत और भी ज़्यादा है, क्योंकि आधे से ज़्यादा राज्य शुष्क और अर्द्धशुष्क है — सूखा और अकाल यहाँ आम बात है, और कुछ इलाक़ों में आज भी बहुत कम पानी है।
- सिंचाई विभाग की स्थापना ➜ 14 दिसम्बर 1949 (लोक निर्माण विभाग से अलग होकर); अब नाम “जल संसाधन विभाग”
- देश के क्षेत्रफल में हिस्सा ➜ 10.40% — सबसे बड़ा राज्य
- बंजर भूमि ➜ 101 लाख हेक्टेयर
- देश के कुल जल संसाधन में हिस्सा ➜ 1.16%
… शेष 4 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
याद रखें: देश के 98% लवणता-प्रभावित और 89% नाइट्रेट-प्रभावित गाँव-ढाणियाँ राजस्थान में हैं (सुजस, मई 2022)।
सिंचित क्षेत्र
- कुल सिंचित क्षेत्र 95,47,292 हेक्टेयर (आर्थिक समीक्षा 2024–25); सिंचाई नहरों, नलकूपों, खुले कुओं, तालाबों, झीलों और दूसरे साधनों से।
- आज़ादी से पहले सतही जल परियोजनाओं से सिर्फ़ 4 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी; दिसम्बर 2024 तक बड़ी, मध्यम और लघु परियोजनाओं से 39.51 लाख हेक्टेयर में सुविधा बनी; 2024–25 में दिसम्बर 2024 तक 14,517.41 हेक्टेयर और जुड़ा (जल संसाधन विभाग, प्रशासनिक प्रतिवेदन 2024–25)।
- 2021–22 में शुद्ध बोया गया क्षेत्र 181.29 लाख हेक्टेयर, शुद्ध सिंचित 89.23 लाख हेक्टेयर — यानी लगभग 49.20% पर सिंचाई।
निर्माणाधीन परियोजनाएँ (2024–25)
| श्रेणी | परियोजनाएँ |
|---|---|
| 7 वृहद् | नर्मदा नहर, परवन सिंचाई, धौलपुर लिफ्ट, नवनेरा बाँध (ERCP), माही की ऊपरी उच्च स्तरीय नहर, पीपलखूँट ऊपरी उच्च स्तरीय नहर, कालातीर लिफ्ट |
| 6 मध्यम | गरड़दा, तकली, गागरिन, ल्हासी, अंधेरी, हथियादेह |
| 40 लघु | — |
2. सिंचाई के साधन व ज़िले
कुएँ और नलकूप मिलाकर 69.39% सिंचाई — यानी राज्य की सिंचाई मुख्य रूप से भूजल पर टिकी है।
| साधन / पैमाना | सबसे ज़्यादा | सबसे कम |
|---|---|---|
| कुल सिंचित क्षेत्रफल | गंगानगर | राजसमंद |
| कृषि क्षेत्र के अनुपात में सिंचित % | गंगानगर | चूरू |
| कुएँ + नलकूप (साथ मिलाकर) | जोधपुर | गंगानगर |
| कुएँ | झालावाड़ | गंगानगर व बीकानेर |
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राज्य का सबसे ज़्यादा सिंचाई वाला हिस्सा — पूर्वी भाग।
3. परियोजनाओं के प्रकार
| प्रकार | पहचान |
|---|---|
| बहुद्देशीय | पानी कई कामों में — सिंचाई, पेयजल, बिजली, उद्योग; नेहरू ने इन्हें “आधुनिक भारत के नवीन मंदिर” कहा |
| वृहद् | कृषि-योग्य कमांड क्षेत्र 10,000 हेक्टेयर से ज़्यादा |
| मध्यम | 2,000 से 10,000 हेक्टेयर |
ध्यान दें: पिकअप बाँध — जिसके फाटक तल में लगे हों, और सारे फाटक खोलने पर एक बूँद पानी भी न रुके (जैसे जवाहर सागर, टोरडी सागर)।
4. भाखड़ा-नांगल परियोजना
- पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की संयुक्त परियोजना; भारत की सबसे बड़ी बहुद्देशीय नदी घाटी परियोजना।
- पहला विचार 1908 में पंजाब के तत्कालीन लेफ़्टिनेंट गवर्नर सर लुईस डेन ने दिया; काम मार्च 1948 में शुरू; कुल लागत ₹236 करोड़।
- सतलुज पर दो अलग-अलग बाँध ➜ भाखड़ा और नांगल — पर एक ही परियोजना के हिस्से।
| भाखड़ा बाँध | नांगल बाँध | |
|---|---|---|
| कहाँ | बिलासपुर (हिमाचल) | रोपड़ (पंजाब) — भाखड़ा से 13 किमी नीचे |
| ऊँचाई | 222.55 मी — भारत का दूसरा सबसे ऊँचा | 29 मी |
| अन्य माप | लम्बाई 518.16 मी, चौड़ाई 9.14 मी; कंक्रीट का | — |
… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
- नींव पं. नेहरू ने 17 नवम्बर 1955 को रखी; नेहरू ने इसे “चमत्कारी विराट वस्तु” कहा और 22 अक्टूबर 1963 को राष्ट्र को समर्पित किया।
- भाखड़ा के पीछे गोविंद सागर — भारत की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील; भराव क्षमता 9 अरब 34 करोड़ क्यूसेक लीटर।
- नांगल से दो नहरें ➜ बिस्त दोआब नहर (रोपड़ हैडवर्क्स से; पंजाब में सिंचाई) और भाखड़ा नहर (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान; 1954 में पूरी — तभी से राजस्थान को पानी)।
ट्रिक: भारत का सबसे ऊँचा बाँध — टिहरी (भागीरथी, 260 मी, उत्तराखंड); सबसे ज़्यादा जल भंडारण वाला — इंदिरा सागर (नर्मदा, मध्य प्रदेश; 12 अरब 22 करोड़ क्यूसेक लीटर)।
राजस्थान को क्या मिला
- 1959 के भाखड़ा-नांगल समझौते में बिजली और पानी दोनों का 15.22% हिस्सा — इससे 2.3 लाख हेक्टेयर में सिंचाई।
- परियोजना की कुल क्षमता 1532.73 MW; राजस्थान का हिस्सा 15.2% (233 MW)।
- सबसे ज़्यादा लाभ ➜ हनुमानगढ़ (सिंचाई); बिजली उत्तर-पश्चिमी राजस्थान (हनुमानगढ़, गंगानगर, शेखावाटी, बीकानेर) को।
5. व्यास परियोजना
राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त परियोजना — दो चरणों में पूरी हुई।
| पहला चरण — पंडोह बाँध | दूसरा चरण — पौंग बाँध | |
|---|---|---|
| कहाँ | पंडोह (मंडी, हिमाचल), व्यास पर | पौंग (काँगड़ा, हिमाचल), व्यास पर; 133 मी ऊँचा |
| उद्देश्य | व्यास का अतिरिक्त पानी व्यास-सतलुज लिंक (BSL) से भाखड़ा तक लाकर भाखड़ा-नांगल का जलस्तर बनाए रखना | सर्दियों में इंदिरा गांधी नहर को लगातार पानी |
| बिजलीघर | देहर (हिमाचल) — 6 × 165 = 990 MW | 6 × 66 = 396 MW |
6. रावी-व्यास जल विवाद
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1960 | सिंधु जल संधि | 19 सितम्बर, कराची — विश्व बैंक की मध्यस्थता; भारत को रावी, व्यास, सतलुज का पूरा पानी |
| 1955, 1981 | दो समझौते | पंजाब-हरियाणा-राजस्थान में पानी बँटवारा |
| 1985 | राजीव-लोंगोवाल समझौता | 24 जुलाई — विवाद फिर उठा |
7. यमुना जल — भविष्य की योजनाएँ
- मई 1994 का यमुना जल समझौता — अपर यमुना रिवर बोर्ड ने ताजेवाला हैड (हथिनीकुंड बैराज) पर मानसून (जुलाई–अक्टूबर) में 1917 क्यूसेक (सालाना 577 MCM) पानी राजस्थान को दिया।
- 17 फ़रवरी 2024 ➜ राजस्थान-हरियाणा MoU: ताजेवाला (हथिनीकुंड) से भूमिगत पाइपलाइन द्वारा सीकर, चूरू, झुंझुनूँ और दूसरे इलाक़ों तक पानी।
- यमुना बेसिन में रेणुका और लखवार बाँध बन रहे हैं; किशाऊ बाँध जल्द शुरू होने की संभावना।
8. तीन चरण व नहरें
चम्बल पर राजस्थान और मध्य प्रदेश की संयुक्त परियोजना — हिस्सा 50 : 50; तीन चरणों में पूरी हुई; शुरुआत 1953–54।
| चरण | बाँध | ब्योरा |
|---|---|---|
| पहला | गाँधी सागर | रामपुरा-भानपुरा पठारों के बीच, मंदसौर (MP) — राजस्थान सीमा से 8 किमी; 513 मी लम्बा, 62 मी ऊँचा; 1960 में नेहरू ने उद्घाटन किया; 115 MW |
| पहला | कोटा बैराज (कोटा सिंचाई बाँध) | जवाहर सागर से 16 किमी आगे; 1960; 438 मी लम्बा, 42 मी ऊँचा; राज्य का सबसे ज़्यादा जलग्रहण (कैचमेंट) क्षेत्र वाला बाँध; 20 नवम्बर 1960 को नेहरू ने उद्घाटन; पास में कोटा थर्मल पावर स्टेशन; चम्बल का इकलौता बाँध जिस पर बिजली नहीं बनती — केवल सिंचाई |
| दूसरा | राणा प्रताप सागर | रावतभाटा (चित्तौड़गढ़); 36 मी ऊँचा, 1100 मी लम्बा; फ़रवरी 1970 में पूरा; ₹131 करोड़ — “विश्व का सबसे सस्ता बाँध” माना जाता है; राज्य का सबसे ज़्यादा भराव क्षमता वाला बाँध (113 वर्ग किमी); 4 × 43 = 172 MW — “भोपाल विद्युतगृह” |
- राणा प्रताप सागर में पहली बार पानी भरते समय कुछ गाय-बैल टापुओं पर रह गए थे — वे आज भी दूसरे जंगली जानवरों के साथ वहीं हैं।
- जल जीवन मिशन में PHED ने भैंसरोड़गढ़ क्षेत्र में राणा प्रताप सागर पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तैरता हुआ पम्प लगाया।
- रावतभाटा परमाणु बिजलीघर ➜ राणा प्रताप सागर के पास, कनाडा के सहयोग से; राजस्थान का पहला और भारत का दूसरा; पहले नाम राजस्थान एटॉमिक पावर प्रोजेक्ट, अब राजस्थान एटॉमिक पावर स्टेशन।
- राज्य में सिंचाई ➜ लगभग 4.5 लाख हेक्टेयर
- राज्य को बिजली ➜ 193 MW (50%)
- लिफ्ट नहरें ➜ 10 — किसी भी परियोजना में सबसे ज़्यादा
कोटा बैराज की नहरें
| नहर | सिंचाई |
|---|---|
| बायीं नहर | कोटा (लाडपुरा तहसील), बूँदी (केशवरायपाटन, इंद्रगढ़) |
| दायीं नहर | कोटा, बाराँ और मध्य प्रदेश |
दायीं नहर पर 8 लिफ्ट योजनाएँ — जालीपुरा और दीगोद (कोटा); अंता लिफ्ट, अंता लिफ्ट माइनर (चक्षानाबाद), पंचेल, गणेशगंज, सोरखंड, कचारी (बाराँ)।
कनाडा की अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी के सहयोग से चम्बल कमांड क्षेत्र में राजस्थान कृषि ड्रेनेज अनुसंधान परियोजना चल रही है।
9. चम्बल की अन्य लिफ्ट परियोजनाएँ
| परियोजना | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| पीपलदा लिफ्ट | सवाई माधोपुर | खंडार तहसील को पेयजल और सिंचाई |
| इंदिरा गांधी लिफ्ट | कसेड़ गाँव (करौली) | राज्य की सबसे ऊँची लिफ्ट — 125 मी ऊँचाई तक पानी; करौली और सवाई माधोपुर (बामनवास) में सिंचाई |
| धौलपुर लिफ्ट | सागरवाड़ा (धौलपुर) | शिलान्यास 22 दिसम्बर को वसुंधरा राजे ने किया; अक्टूबर से मार्च तक हर महीने चम्बल का पानी उठाकर 256 गाँवों के 39,980 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र में सहभागिता से सूक्ष्म सिंचाई; पूरी तरह लिफ्ट सिंचाई और पेयजल परियोजना; 30 MW सौर संयंत्र भी; अब तक ₹654.04 करोड़ ख़र्च; 2025–26 में पूरी होने की संभावना |
- चम्बल नहर परियोजना ➜ नाबार्ड की मदद से जीर्णोद्धार; दिसम्बर 2021 तक 203.03 किमी नहरें बनीं।
- राजाड परियोजना ➜ चम्बल क्षेत्र में सेम (जलभराव) की समस्या के लिए कनाडा के सहयोग से; लगभग 15 हज़ार हेक्टेयर भूमि सुधरी।
10. माही बजाज सागर परियोजना
- माही पर राजस्थान-गुजरात की संयुक्त परियोजना — राजस्थान 45%, गुजरात 55%; पर इससे बनी 100% बिजली राजस्थान को।
- 1966 में दोनों राज्यों में समझौता; निर्माण 1972 में शुरू।
- नाम स्वतंत्रता सेनानी जमनालाल बजाज पर; आदिवासी क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजना।
| चरण | बाँध | ब्योरा |
|---|---|---|
| पहला | माही बजाज सागर | बोरखेड़ा के पास (बाँसवाड़ा); राज्य का सबसे लम्बा बाँध — 3109 मी; 1983 में इंदिरा गांधी ने राष्ट्र को समर्पित किया |
| दूसरा | कडाना बाँध | रामपुरा (महीसागर, गुजरात); पूरी लागत और पूरा लाभ गुजरात का; नर्मदा नहर पूरी होने के बाद इसका पानी राजस्थान को मिलेगा |
| — | कागदी पिकअप | बाँसवाड़ा, माही बजाज सागर के नीचे; दो नहरें निकलती हैं |
| कागदी की नहर | लम्बाई | सिंचाई |
|---|---|---|
| बायीं — आनंदपुरी-भूकिया नहर | 26 किमी | बाँसवाड़ा |
| दायीं — भीखाभाई सागवाड़ा नहर | 125 किमी | डूँगरपुर |
- कुल बिजली 140 MW — बाँसवाड़ा के घाटोल और गानोड़ा में बिजलीघर।
- सबसे ज़्यादा लाभ ➜ बाँसवाड़ा, फिर डूँगरपुर।
- केज कल्चर ➜ बाँध में आधुनिक तरीक़े से मछली पालन; 56 तैरते पिंजरे लगे।
रिवीजन पॉइंटर्स
- सिंचाई विभाग की स्थापना 14 दिसम्बर 1949 को हुई थी; अब इसका नाम जल संसाधन विभाग है।
- राजस्थान देश के क्षेत्रफल का 10.40% है, पर देश के कुल जल संसाधन में उसका हिस्सा केवल 1.16% है।
- कुएँ और नलकूप मिलकर 69.39% सिंचाई करते हैं; कुल सिंचित क्षेत्रफल सबसे ज़्यादा गंगानगर में और सबसे कम राजसमंद में है।
- वृहद् परियोजना का कमांड क्षेत्र 10,000 हेक्टेयर से ज़्यादा होता है और मध्यम का 2,000 से 10,000 हेक्टेयर।
- भाखड़ा-नांगल सतलुज पर बनी भारत की सबसे बड़ी बहुद्देशीय नदी घाटी परियोजना है; भाखड़ा बाँध 222.55 मी ऊँचा है और उसके पीछे गोविंद सागर है।
- 1959 के समझौते में राजस्थान को बिजली और पानी दोनों का 15.22% हिस्सा मिला; सबसे ज़्यादा लाभ हनुमानगढ़ को हुआ।
- व्यास परियोजना दो चरणों में पूरी हुई — पंडोह बाँध और पौंग बाँध; पौंग का उद्देश्य सर्दियों में इंदिरा गांधी नहर को लगातार पानी देना है।
- चम्बल परियोजना राजस्थान और मध्य प्रदेश की साझा परियोजना है (50 : 50); पहले चरण में गाँधी सागर व कोटा बैराज और दूसरे में राणा प्रताप सागर बने।
- माही बजाज सागर परियोजना में राजस्थान का हिस्सा 45% और गुजरात का 55% है, पर बिजली पूरी राजस्थान को मिलती है; यह राज्य का सबसे लम्बा बाँध (3109 मी) है।
अगले भाग में दक्षिणी राजस्थान की उच्च स्तरीय नहरें, जाखम और देवास सुरंगें, फिर हाड़ौती की परियोजनाएँ, राम जल सेतु लिंक परियोजना और बाँधों के «सबसे» वाले तथ्य।
पिछला भाग: राजस्थान की झीलें: जोधपुर व बीकानेर संभाग एवं बावड़ियाँ व जल स्थापत्य
अगला भाग: प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ: भरतपुर, जयपुर, अजमेर, जोधपुर संभाग
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