राजस्थान में पानी की उपलब्धता, फ़सलों का ढंग और पशुपालन — सबकुछ जलवायु से तय होता है, इसलिए यह अध्याय पूरे भूगोल की नींव है। अरावली के पश्चिम का शुष्क मौसम और पूर्व का अपेक्षाकृत नरम मौसम इसी नींव से समझ आता है। इस भाग में मौसम, ऋतु और वायुदाब की मूल बातें, राज्य की जलवायु की विशेषताएँ, उसे प्रभावित करने वाले कारक, और ग्रीष्म ऋतु के साथ तापमान, आर्द्रता व हवाएँ दी गई हैं।
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1. मूल बातें
जलवायु एक ऐसा भौगोलिक तत्व है जो बाक़ी प्राकृतिक तत्वों पर भी असर डालता है और लोगों की अर्थव्यवस्था व बसावट पर भी। पानी की उपलब्धता, वनस्पति, सिंचाई, खेती का ढंग, फ़सलें, उत्पादकता और पशुपालन — सब सीधे जलवायु से तय होते हैं।
- राजस्थान की जलवायु उपोष्ण है; पूरी तरह भारत की “मानसूनी जलवायु” का हिस्सा, फिर भी ज़्यादातर भाग शुष्क।
- अरावली के पश्चिम — कम वर्षा, दिन और साल भर में तापमान का बड़ा उतार-चढ़ाव, कम नमी, तेज़ हवाएँ = शुष्क जलवायु।
- अरावली के पूर्व — अर्द्धशुष्क और उपआर्द्र; वर्षा ज़्यादा, हवा धीमी।
2. मौसम, ऋतु, जलवायु, वायुदाब
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मौसम | वायुमंडल की क्षणिक दशा — कुछ मिनट, घंटे या 4–5 दिन; जल्दी-जल्दी बदलता |
| ऋतु | कुछ महीनों का मिला-जुला रूप |
| जलवायु | 30 वर्ष से ज़्यादा समय की औसत वायुमंडलीय दशाएँ; शब्द यूनानी “क्लाइमा” से |
जलवायु तय करने वाले तत्व — तापक्रम, वायुदाब, आर्द्रता, वर्षा और वायुवेग।
वायुदाब
- धरती की सतह पर ऊपर की हवा की परतों का भार — वायुदाब। इकाई मिलीबार, मापने का यंत्र बैरोमीटर (वायुदाबमापी)।
- गर्म इलाके में हवा गर्म होकर ऊपर उठती है — निम्न वायुदाब; ठंडे इलाके में हवा भारी — उच्च वायुदाब।
- वायुदाब समुद्र तल पर सबसे ज़्यादा; ऊपर जाने पर तेज़ी से घटता है। तापमान बढ़े तो वायुदाब घटता है।
याद रखें: कोरिऑलिस बल — पृथ्वी के घूमने से पैदा आभासी बल; इससे हवाएँ उत्तरी गोलार्द्ध में दाईं और दक्षिणी में बाईं ओर मुड़ जाती हैं। इसे फेरल का नियम भी कहते हैं।
3. राजस्थान की जलवायु की विशेषताएँ
- शुष्क और अर्द्धशुष्क जलवायु की प्रधानता।
- वर्षा असमान और अपर्याप्त — अरावली के पूर्व ज़्यादा, पश्चिम में कम।
- तापमान में अति और विविधता — गर्मियों में दिन का तापमान 49°C तक, सर्दियों में कहीं-कहीं जमाव बिंदु तक।
- रेत के कारण दैनिक और वार्षिक तापांतर अधिक।
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| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| खंडवृष्टि | सूखे के बीच अचानक तेज़ वर्षा |
| अनावृष्टि | वर्षा की कमी से सूखा — राज्य में हर 5 वर्ष में 1 वर्ष अकाल या सूखा |
| अतिवृष्टि | 24 घंटे में ही 20–30 सेमी वर्षा — बाढ़ का कारण |
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1975 | सांभर | अतिवृष्टि और बाढ़ |
| 1980 | जोधपुर | बाढ़ |
| 1981 | जयपुर | बाढ़ |
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ओलावृष्टि कितनी बार
| कहाँ | कितनी बार |
|---|---|
| जयपुर (सबसे ज़्यादा) | 2 वर्ष में 3 बार |
| बीकानेर, बाड़मेर, अजमेर, नागौर, जोधपुर | 3 वर्ष में 1 बार |
| गंगानगर | 4 वर्ष में 1 बार |
4. जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
1. अक्षांशीय स्थिति
कर्क रेखा (23°30′ उ.) राज्य के दक्षिणी भाग से गुज़रती है; राज्य का विस्तार 23°3′ से 30°12′ उ. तक (अंतराल 7°9′)। ज़्यादातर भाग उपोष्ण कटिबंध में, इसलिए तापांतर बहुत। डूँगरपुर-बाँसवाड़ा का दक्षिणी भाग उष्ण कटिबंध में — यानी 2 ज़िले उष्ण, 41 ज़िले उपोष्ण।
2. समुद्र से दूरी (महाद्वीपीयता)
समुद्र से बहुत दूर होने से यहाँ समुद्र का समकारी असर नहीं पहुँचता और तापमान में महाद्वीपीय जलवायु जैसी भारी विषमता रहती है — यह राज्य की जलवायु पर असर डालने वाला सबसे अहम कारक है।
तुलना: पश्चिम बंगाल भी लगभग उसी अक्षांश (23°–30° उ.) पर है, पर बंगाल की खाड़ी के पास होने से वहाँ समकारी, उष्ण-आर्द्र जलवायु है — राजस्थान जैसी तापीय विषमता नहीं।
3. धरातल (उच्चावच)
- पश्चिम की मोटे कणों वाली रेत दिन में जल्दी गर्म और रात में जल्दी ठंडी होती है; पूर्व और दक्षिण-पूर्व की दोमट, चिकनी और काली मिट्टी के बारीक कण धीरे-धीरे गर्म और धीरे-धीरे ठंडे होते हैं।
- राज्य का ज़्यादातर धरातल 370 मी से कम ऊँचा; सिर्फ़ अरावली और हाड़ौती पठार इससे ऊँचे।
4. अरावली की स्थिति
अरावली दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व फैली है — अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाओं के समानांतर। इसलिए ये हवाएँ बिना बरसे उत्तर की ओर निकल जाती हैं। अगर अरावली इनके आड़ी होती तो अरब सागर का मानसून पूरे राज्य को भिगो देता।
5. समुद्र तल से ऊँचाई
- धरातल से 165 मी ऊपर जाने पर तापमान 1°C घटता है; ज़मीन के भीतर हर 32 मी नीचे जाने पर 1°C बढ़ता है।
- हाड़ौती और अरावली ज़्यादा ऊँचे हैं, इसलिए वहाँ आर्द्रता भी ज़्यादा और वर्षा भी ज़्यादा।
- झालावाड़ (औसत ऊँचाई 410 मी) और माउंट आबू (1200 मी) लगभग एक अक्षांश पर हैं, फिर भी आबू में आर्द्रता ज़्यादा — इसीलिए सबसे आर्द्र स्थान आबू और सबसे आर्द्र ज़िला झालावाड़।
6. प्राकृतिक वनस्पति
वनस्पति भी तापमान-आर्द्रता बदलती है — पश्चिम में कम वनस्पति से तापमान ज़्यादा और आर्द्रता कम; घनी वनस्पति वाले इलाकों (अरावली, दक्षिण-पूर्व) में आर्द्रता ज़्यादा। वनों की लगातार कटाई जलवायु परिवर्तन का कारण बन रही है।
याद रखें: परीक्षा (कनिष्ठ अनुदेशक 2025): राजस्थान में कम वर्षा का प्रमुख कारण — समुद्र से दूरी।
5. ऋतुएँ व ग्रीष्म ऋतु
21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरायण होता है — तापमान बढ़ने और वायुदाब घटने लगता है। अप्रैल-मई में सूर्य लगभग सिर के ऊपर चमकता है और हवाएँ पश्चिम से पूर्व चलती हैं।
| तिथि | क्या होता है |
|---|---|
| 21 मार्च | सूर्य विषुवत रेखा पर सीधा; दिन-रात बराबर — वसंत विषुव |
| 21 जून | सूर्य कर्क रेखा पर सीधा; सबसे लम्बा और सबसे गर्म दिन (13 घंटे 27 मिनट); अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (पहली बार 2015) |
| 23 सितम्बर | सूर्य विषुवत रेखा पर सीधा; दिन-रात बराबर — शरद विषुव |
21 मार्च से 23 सितम्बर तक सूर्य उत्तरायण, 23 सितम्बर से 21 मार्च तक दक्षिणायन रहता है।
याद रखें: 21 जून को सूर्य की सीधी किरणें डूँगरपुर, बाँसवाड़ा पर; सबसे सीधी बोरकुंड (कुशलगढ़, बाँसवाड़ा) में और सबसे तिरछी कोणा (श्रीगंगानगर) में।
6. ऋतुओं का बँटवारा
| ऋतु | अवधि |
|---|---|
| ग्रीष्म | मार्च से मध्य जून |
| वर्षा | मध्य जून से सितम्बर |
| शीत — मानसून प्रत्यावर्तन काल | अक्टूबर से मध्य दिसम्बर |
भारतीय परंपरा की छह ऋतुएँ (दो-दो महीने)
| ऋतु | हिंदी महीने | अंग्रेज़ी महीने |
|---|---|---|
| बसंत | चैत्र–वैशाख | मार्च–अप्रैल |
| ग्रीष्म | ज्येष्ठ–आषाढ़ | मई–जून |
| वर्षा | श्रावण–भाद्रपद | जुलाई–अगस्त |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
7. तापमान व तापांतर
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| सबसे ज़्यादा दैनिक तापांतर — स्थान | चूरू |
| सबसे कम दैनिक तापांतर — स्थान | माउंट आबू (सिरोही) |
| सबसे ज़्यादा दैनिक तापांतर — ज़िला | जैसलमेर |
| सबसे कम दैनिक तापांतर — ज़िला | डूँगरपुर |
- जैसलमेर में साफ़ आसमान, कम वनस्पति और मोटे कणों वाली रेत — दिन में सबसे गर्म, रात में सबसे ठंडा; इसलिए दैनिक तापांतर सबसे ज़्यादा।
- चूरू सबसे गर्म क्यों — कम वर्षा, चूना-युक्त धरातल, सबसे कम वन और कम सिंचित क्षेत्र।
- धौलपुर में ज़्यादा तापमान का कारण — बलुआ पत्थर का चट्टानी धरातल।
गर्मियों में तापमान
- अधिकतम ➜ 40°–50°C
- दिन का तापमान छू सकता है ➜ 49°C
8. वाष्पोत्सर्जन व आर्द्रता
जिस प्रक्रिया से पानी भाप बनता है वह वाष्पीकरण है; इसकी मात्रा हवा की गति, तापमान और शुष्कता पर निर्भर करती है।
| वाष्पोत्सर्जन | सबसे ज़्यादा | सबसे कम |
|---|---|---|
| महीना | जून | दिसम्बर |
| ज़िला | जैसलमेर | डूँगरपुर |
आर्द्रता
पानी भाप बनकर हवा में मिलता है; हवा में मौजूद इस जलवाष्प को आर्द्रता कहते हैं। हवा जितनी गर्म, उतनी ज़्यादा भाप सँभाल सकती है। गर्मियों में थार में आर्द्रता 1% तक गिर जाती है।
| आर्द्रता | सबसे ज़्यादा | सबसे कम |
|---|---|---|
| स्थान | माउंट आबू (सिरोही) | फलौदी (सबसे शुष्क स्थान) |
| ज़िला | झालावाड़ | जैसलमेर (सबसे शुष्क ज़िला) |
| संभाग | कोटा | जोधपुर |
9. हवाएँ व स्थानीय नाम
- सबसे तेज़ हवाएँ जून में, सबसे धीमी नवम्बर में; अधिकतम गति 140 किमी/घंटा तक।
- सबसे ज़्यादा आँधियाँ गंगानगर (27 दिन), सबसे कम झालावाड़ (3 दिन) और अजमेर (3 दिन)।
| नाम | कैसी हवा |
|---|---|
| पुरवा / पुरवाई | बंगाल की खाड़ी की मानसूनी हवा — पूर्व से पश्चिम |
| सीली | पौष महीने की ठंडी हवा (शीत लहर) |
| तवा | ज्येष्ठ महीने की गर्म हवा |
| लू / तापलहरी | गर्मियों में पश्चिम से पूर्व चलने वाली गर्म, तेज़ हवा |
रिवीजन पॉइंटर्स
- मौसम कुछ मिनट से 4–5 दिन की वायुमंडलीय दशा है, जबकि जलवायु 30 वर्ष से ज़्यादा की औसत दशा का नाम है।
- वायुदाब की इकाई मिलीबार और मापने का यंत्र बैरोमीटर है; तापमान बढ़ने पर वायुदाब घटता है।
- कर्क रेखा राज्य के दक्षिणी भाग से गुज़रती है — डूँगरपुर-बाँसवाड़ा उष्ण कटिबंध में और बाक़ी 41 ज़िले उपोष्ण में आते हैं।
- समुद्र से दूरी राज्य की जलवायु पर असर डालने वाला सबसे अहम कारक है; अरावली मानसूनी हवाओं के समानांतर होने से उन्हें रोक नहीं पाती।
- धरातल से 165 मी ऊपर जाने पर तापमान 1°C घटता है।
- सबसे आर्द्र स्थान माउंट आबू और सबसे आर्द्र ज़िला झालावाड़ है; सबसे शुष्क स्थान फलौदी और सबसे शुष्क ज़िला जैसलमेर।
- सबसे ज़्यादा दैनिक तापांतर वाला ज़िला जैसलमेर और स्थान चूरू है; सबसे कम वाला ज़िला डूँगरपुर और स्थान माउंट आबू।
- 21 जून को सूर्य कर्क रेखा पर सीधा रहता है — सबसे लम्बा दिन (13 घंटे 27 मिनट); सबसे सीधी किरणें बोरकुंड में और सबसे तिरछी कोणा में पड़ती हैं।
अगले भाग में मानसून क्या है, कैसे बनता है, उसकी दोनों शाखाएँ राजस्थान तक कैसे पहुँचती हैं, कम वर्षा के कारण और ज़िलेवार वर्षा के आँकड़े।
पिछला भाग: आंतरिक अपवाह की नदियाँ
अगला भाग: राजस्थान की जलवायु: वर्षा ऋतु व मानसून एवं वर्षा का वितरण
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