शोध संस्थानों को रटने से बेहतर है उन्हें ज़िले और विषय के हिसाब से बाँटकर पढ़ना — जोधपुर, बीकानेर, जयपुर, उदयपुर और अजमेर में ही ज़्यादातर संस्थान बसे हैं। इस भाग में पहले ज़िलेवार सूची और संस्थानों के छह परिवार हैं। फिर अनाज, तिलहन-मसाला, बागवानी, पशु, शुष्क क्षेत्र-वन-सुदूर संवेदन, विज्ञान-रक्षा, हथकरघा-रत्न, शिल्प-डिज़ाइन, स्वास्थ्य-आयुर्वेद, लोक-कला और इतिहास-जनजाति शोध के संस्थान आते हैं।
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1. ज़िलेवार शोध केंद्र
इस अध्याय के 51 संस्थान राज्य के 14 ज़िलों में फैले हैं। सबसे ज़्यादा जोधपुर में हैं — वहाँ मरुस्थल, वन, सुदूर संवेदन, स्वास्थ्य से लेकर लोक-कला तक के शोध केंद्र हैं।
| ज़िला | संस्थान (स्थान) |
|---|---|
| जोधपुर | काज़री, आफ़री, ईसबगोल (मंडोर), SRSAC, मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान (DMRC), रूपायन (बोरूंदा), राजस्थानी शोध संस्थान (चौपासनी), रक्षा प्रयोगशाला, NBPGR का क्षेत्रीय केंद्र, हथकरघा प्रौद्योगिकी, प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान |
| बीकानेर | उद्यानिकी (बीछवाल), खजूर, बेर, ऊँट (जोड़बीड़), अश्व उप-परिसर (जोड़बीड़), कृषि अनुसंधान निदेशालय, सिरेमिक (CERDC) |
| जयपुर | RARI (दुर्गापुरा), कृषि विपणन संस्थान, झाबरमल शर्मा शोध संस्थान, हस्तशिल्प डिज़ाइन केंद्र, आयुर्वेद शोध संस्थान, रत्न-आभूषण संस्थान, IICD |
| उदयपुर | भैंस (वल्लभनगर), ज्वार (वल्लभनगर), मत्स्य सर्वेक्षण, माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति संस्थान, मानव विज्ञान सर्वेक्षण, मृदा सर्वेक्षण ब्यूरो |
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2. संस्थानों के छह परिवार
औषधीय पादप केंद्र (माउंट आबू) बागवानी में गिना है, पर स्वास्थ्य शाखा में भी उसका ज़िक्र है। माणिक्यलाल वर्मा जनजाति संस्थान को संस्कृति-समूह में रखा है। गिनती से ज़्यादा ज़रूरी है — स्थान और वर्ष।
ट्रिक: “जो-बी-ज-उ-अ” — जोधपुर (11), बीकानेर (7), जयपुर (7), उदयपुर (6), अजमेर (5): संस्थानों की गिनती में ऊपर से नीचे का क्रम।
3. अनाज के शोध केंद्र
| केंद्र | स्थान | ख़ास बात |
|---|---|---|
| बाजरा अनुसंधान केंद्र | गुड़ामालानी (बाड़मेर) | शिलान्यास — 27 सितम्बर 2023, तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के हाथों |
| मक्का अनुसंधान केंद्र | बोरवट (बाँसवाड़ा) | — |
| चावल अनुसंधान केंद्र | बाँसवाड़ा | — |
ट्रिक: बाँसवाड़ा = मक्का + चावल (बोरवट में मक्का)। वल्लभनगर (उदयपुर) में ज्वार के साथ भैंस का केंद्र भी है — एक क़स्बा, दो केंद्र।
सबसे नया केंद्र बाजरे का है — बाड़मेर जैसे सूखे ज़िले में, जहाँ बाजरा ही मुख्य फ़सल है।
4. तिलहन, मसाला व रेशा
| केंद्र | स्थान | वर्ष व ब्योरा |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र | सेवर (भरतपुर) | 20 अक्टूबर 1993 (8वीं योजना काल) में बना; फ़रवरी 2009 से नया नाम राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय |
| राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र | तबीजी (अजमेर) | भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 2000 में खोला |
| ईसबगोल अनुसंधान केंद्र | मंडोर (जोधपुर) | — |
सरसों केंद्र का सफ़र
- 1993 — राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र
- फ़रवरी 2009 — दर्जा बढ़ा
- राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय
5. बागवानी, फूल व औषधि
| केंद्र | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| केंद्रीय शुष्क क्षेत्र उद्यानिकी (बागवानी) अनुसंधान केंद्र — NRCAH | बीछवाल (बीकानेर) | स्थापना 1993 |
| खजूर अनुसंधान केंद्र | बीकानेर | स्थापना 1978 |
| बेर अनुसंधान केंद्र | बीकानेर | — |
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6. केंद्रीय कृषि फ़ार्म
| फ़ार्म | स्थापना | किसकी मदद से | ख़ास |
|---|---|---|---|
| केंद्रीय कृषि फ़ार्म, सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) | 15 अगस्त 1956 | रूस | एशिया का सबसे बड़ा कृषि फ़ार्म |
| केंद्रीय कृषि फ़ार्म, जैतसर (श्रीगंगानगर) | 1962 | कनाडा | — |
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1956 | सूरतगढ़ फ़ार्म | 15 अगस्त — रूस की सहायता |
| 1962 | जैतसर फ़ार्म | कनाडा की सहायता |
| 1967 | कपास सुधार परियोजना केंद्र | श्रीगंगानगर |
7. कृषि शोध संस्थान व निदेशालय
राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (RARI) — दुर्गापुरा, जयपुर
- राज्य में कृषि अनुसंधान केंद्र 1943 में खुला था; आज यही RARI कहलाता है।
- अब यह श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय की एक इकाई (घटक) है।
तीन शहर, एक संस्था
- 1964 — उदयपुर में शोध केंद्र बना
- नाम मिला — कृषि अनुसंधान निदेशालय
- 1981-82 — उदयपुर से जयपुर
NBPGR का प्रादेशिक केंद्र — जोधपुर
राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR) का राज्य वाला केंद्र — ICAR का; 1965 में काज़री परिसर के भीतर खोला गया।
चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान — जयपुर
8 अगस्त 1988 को बना; कृषि उपज की बिक्री-व्यवस्था (कृषि विपणन) पर प्रशिक्षण और शोध की सुविधा देता है।
याद रखें: जयपुर के दो कृषि संस्थान — दुर्गापुरा का RARI (1943) सबसे पुराना; चरण सिंह विपणन संस्थान (1988) बाज़ार से जुड़ा।
8. जोड़बीड़ — ऊँट व घोड़ा
राष्ट्रीय ऊँट अनुसंधान केंद्र — जोड़बीड़ (बीकानेर)
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 5 जुलाई 1984 | उष्ट्र परियोजना निदेशालय | ICAR ने बीकानेर में शुरू किया |
| 20 सितम्बर 1995 | दर्जा बढ़ा | नया नाम — राष्ट्रीय उष्ट्र (ऊँट) अनुसंधान केंद्र |
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र — उप-परिसर, जोड़बीड़
- मुख्य केंद्र (मुख्यालय) हिसार (हरियाणा) में है; बीकानेर में केवल उसका एक परिसर।
- जोड़बीड़ वाला यह उप-परिसर 1989 में खुला।
ध्यान दें: मुख्यालय पूछें तो घोड़े का — हिसार; ऊँट का — बीकानेर ही।
9. भेड़, बकरी व चारा
| केंद्र | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| केंद्रीय भेड़ व ऊन अनुसंधान केंद्र | अविकानगर (टोंक) | ICAR ने 1962 में खोला |
| पश्चिम क्षेत्रीय बकरी अनुसंधान केंद्र | अविकानगर (टोंक) | — |
| बकरी एवं चारा अनुसंधान केंद्र | रामसर (अजमेर) | “बकरी विकास एवं चारा उत्पादन परियोजना” के अंतर्गत 1981-82 में बना |
10. भैंस व मछली
| केंद्र | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| भैंस प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्र | वल्लभनगर (उदयपुर) | इसे राजुवास (बीकानेर) — राज्य का पशु चिकित्सा व पशु विज्ञान विश्वविद्यालय — चलाता है |
| मत्स्य सर्वेक्षण एवं अनुसंधान केंद्र | उदयपुर | स्थापना 1958 |
झीलों के शहर उदयपुर में मछली का सर्वेक्षण केंद्र होना स्वाभाविक है; यह इस अध्याय के पशु-केंद्रों में सबसे पुराना (1958) है।
11. काज़री (CAZRI) — जोधपुर
- पूरा नाम ➜ केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान
- स्थान ➜ जोधपुर
- स्थापना ➜ 1959
- आज काज़री के 5 क्षेत्रीय केंद्र हैं — बीकानेर, जैसलमेर, पाली, भुज और लद्दाख।
- मुख्य काम ➜ राज्य के शुष्क व अर्द्ध-शुष्क इलाक़ों में वन बढ़ाना, मरुस्थल के फैलाव को रोकना, और इन विषयों पर शोध-अध्ययन।
- इसी के परिसर में 1965 में NBPGR का प्रादेशिक केंद्र खुला।
12. आफ़री (AFRI) — जोधपुर
- भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद ने 30 जून 1987 को जोधपुर में खोला।
- 1988 में इसे “आफ़री” नाम मिला।
- कार्यक्षेत्र ➜ राजस्थान, गुजरात और केंद्रशासित दादरा नगर हवेली व दमन-दीव के शुष्क-अर्द्धशुष्क इलाक़ों में वानिकी शोध।
| काज़री | आफ़री | |
|---|---|---|
| पूरा नाम | केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान | शुष्क वन अनुसंधान संस्थान |
| वर्ष | 1959 | 1987 (नाम 1988) |
| किसके अधीन / सहयोग | ऑस्ट्रेलिया व यूनेस्को का सहयोग | भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद |
13. सुदूर संवेदन, मृदा व सिंचाई
SRSAC कैसे बना
- 1979 — कृषि विभाग में “हवाई फ़ोटो व्याख्या प्रयोगशाला” (AIPL)
- 1985 — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को सौंपा
- नया नाम — स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर
काम — मिट्टी, पानी, वन, कृषि और खनिज जैसे प्राकृतिक संसाधनों के नक्शे सुदूर संवेदन से तैयार करना, ताकि उनकी पहचान, खनन-दोहन और प्रबंधन ठीक से हो सके।
राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो — पश्चिम क्षेत्रीय केंद्र, उदयपुर
- शुरुआत 1981 में बड़ोदरा (गुजरात) से — राजस्थान व गुजरात दोनों की ज़रूरत को देखकर।
- 1990 में इसे उदयपुर लाया गया।
सिंचाई प्रबंधन व प्रशिक्षण संस्थान (IMTI) — कोटा
चम्बल की नहरों वाले कोटा में सिंचाई प्रबंधन का प्रशिक्षण संस्थान।
14. विज्ञान व रक्षा
| संस्थान | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान — सीरी (CEERI) | पिलानी (झुंझुनूँ) | 21 सितम्बर 1953 को पं. जवाहरलाल नेहरू ने आधारशिला रखी; इलेक्ट्रॉनिक्स में शोध-विकास का देश का बड़ा केंद्र |
| रक्षा अनुसंधान प्रयोगशाला | जोधपुर | भारत सरकार के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रयोगशाला |
| सिरेमिक विद्युत अनुसंधान एवं विकास केंद्र (CERDC) | बीकानेर | 2007 में “सिरेमिक सेंटर” के रूप में शुरू; 2010 में नाम बदलकर Ceramic Electrical Research & Development Center |
बीकानेर का सिरेमिक केंद्र
- 2007 — सिरेमिक सेंटर
- 2010 — CERDC
15. हथकरघा, रत्न व औज़ार
| संस्थान | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Handloom Technology) | जोधपुर | केंद्र के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) ने 16 सितम्बर 1993 को खोला |
| भारतीय रत्न एवं आभूषण संस्थान (Indian Institute of Gem and Jewellery) | जयपुर | वाणिज्य-उद्योग मंत्रालय की रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ने RIICO के साथ मिलकर बनाया; इस क्षेत्र का राष्ट्रीय “उत्कृष्टता केंद्र” |
| हैंड टूल डिज़ाइन डेवलपमेंट एवं ट्रेनिंग सेंटर | नागौर | 1988; नागौर के हस्त-औज़ार (हैंड टूल) उद्योग को बढ़ावा और तकनीकी मदद |
16. शिल्प व डिज़ाइन
भारतीय शिल्प और डिज़ाइन संस्थान (IICD) — जयपुर
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 20 अप्रैल 1995 | पंजीकरण | राजस्थान सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1958 के तहत एक शिल्प संस्थान के रूप में |
| 27 अप्रैल 1998 | नया नाम | Indian Institute of Craft and Design |
हस्तशिल्प डिज़ाइन विकास एवं शोध केंद्र — जयपुर
जयपुर के हस्तशिल्प के डिज़ाइन-विकास और शोध के लिए बना केंद्र।
17. स्वास्थ्य व आयुर्वेद
मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (DMRC) — जोधपुर
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने 27 जून 1984 को खोला।
- मक़सद ➜ रेगिस्तानी इलाक़े की स्वास्थ्य-शोध संबंधी ज़रूरतें पूरी करना।
- आज इसे राष्ट्रीय असंचारी रोग कार्यान्वयन अनुसंधान केंद्र (NIIRNCD) कहते हैं।
| संस्थान | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| राजस्थान राज्य आयुष अनुसंधान केंद्र | केकड़ी (अजमेर) | खोलने की घोषणा बजट 2021 में |
| राष्ट्रीय आयुर्वेद शोध संस्थान | जयपुर | — |
| औषधीय पादप शोध केंद्र | माउंट आबू (सिरोही) | जड़ी-बूटियों का शोध (बागवानी शाखा में भी) |
18. समाज कार्य, मानव विज्ञान व राजस्व
| संस्थान | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| सामाजिक कार्य एवं अनुसंधान केंद्र (SWRC) | तिलोनिया (अजमेर) | फ़रवरी 1972 में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने शुरू किया |
| भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण — पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्र | उदयपुर | सितम्बर 1975; पश्चिमी भारत, ख़ासकर राजस्थान और गुजरात में मानवशास्त्रीय अध्ययन की ज़रूरत पूरी करने के लिए |
| राजस्थान राजस्व अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (RRTI) | अजमेर | जुलाई 1995; राजस्व विभाग के अधिकारियों का प्रशिक्षण |
19. लोक-कला व राजस्थानी शोध
| संस्थान | स्थान | ब्योरा |
|---|---|---|
| रूपायन शोध संस्थान | बोरूंदा (जोधपुर) | कोमल कोठारी और विजयदान देथा ने 1960 में बनाया |
| राजस्थानी शोध संस्थान | चौपासनी (जोधपुर) | स्थापना 1955 |
20. इतिहास, ग्रंथ व पांडुलिपि
राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान (Rajasthan Oriental Research Institute) — जोधपुर
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1954 | जयपुर में शुरुआत | मुनि जिनविजय के मार्गदर्शन में |
| 1958 | जोधपुर स्थानांतरण | जयपुर से जोधपुर लाया गया |
| 14 सितम्बर 1958 | नया भवन | तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने जोधपुर में उद्घाटन किया |
| संस्थान | स्थान | स्थापना |
|---|---|---|
| पंडित झाबरमल शर्मा शोध संस्थान | जयपुर | 2000 |
| मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी-फ़ारसी शोध संस्थान | टोंक | 4 दिसम्बर 1978 |
21. जनजाति शोध
- संस्थान ➜ माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं सर्वेक्षण संस्थान
- स्थान ➜ उदयपुर
- स्थापना ➜ 1964
नाम से ही काम साफ़ है — आदिम जातियों (जनजातियों) पर शोध और सर्वेक्षण। संस्थान माणिक्यलाल वर्मा के नाम पर है।
रिवीजन पॉइंटर्स
- अध्याय के 51 संस्थान राज्य के 14 ज़िलों में फैले हैं, और सबसे ज़्यादा जोधपुर में हैं।
- संस्थानों की गिनती का क्रम «जो-बी-ज-उ-अ» है — जोधपुर (11), बीकानेर (7), जयपुर (7), उदयपुर (6), अजमेर (5)।
- बाजरा अनुसंधान केंद्र गुड़ामालानी (बाड़मेर) में और मक्का केंद्र बोरवट (बाँसवाड़ा) में है; वल्लभनगर (उदयपुर) में ज्वार और भैंस दोनों के केंद्र हैं।
- राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र सेवर (भरतपुर) में 20 अक्टूबर 1993 को बना और फ़रवरी 2009 से निदेशालय कहलाता है।
- केंद्रीय कृषि फ़ार्म, सूरतगढ़ 15 अगस्त 1956 को रूस की मदद से बना — एशिया का सबसे बड़ा कृषि फ़ार्म; जैतसर फ़ार्म 1962 में कनाडा की मदद से।
- ऊँट अनुसंधान केंद्र जोड़बीड़ (बीकानेर) में 5 जुलाई 1984 को उष्ट्र परियोजना निदेशालय बना और 20 सितम्बर 1995 को केंद्र का दर्जा मिला; अश्व केंद्र का मुख्यालय हिसार में है।
- केंद्रीय भेड़ व ऊन अनुसंधान केंद्र अविकानगर (टोंक) में 1962 में खुला।
- काज़री की स्थापना 1959 में जोधपुर में हुई, जबकि आफ़री 30 जून 1987 को खुला और 1988 में उसे यह नाम मिला।
- सीरी (CEERI) पिलानी में है; इसकी आधारशिला 21 सितम्बर 1953 को पं. जवाहरलाल नेहरू ने रखी।
पिछला भाग: क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम: जनजाति क्षेत्र कार्यक्रम
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