राजस्थान के प्रमुख अनुसंधान केन्द्र: फ़सल, बागवानी व कृषि संस्थान – Rajasthan Geography Chapter 67

फ़सल, बागवानी, पशु, शुष्क क्षेत्र, विज्ञान, स्वास्थ्य, लोक-कला और इतिहास के संस्थान — स्थान, वर्ष और ज़िलेवार सूची सहित।

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In this chapter (22 sections)
  1. ज़िलेवार शोध केंद्र
  2. संस्थानों के छह परिवार
  3. अनाज के शोध केंद्र
  4. तिलहन, मसाला व रेशा
  5. बागवानी, फूल व औषधि
  6. केंद्रीय कृषि फ़ार्म
  7. कृषि शोध संस्थान व निदेशालय
  8. जोड़बीड़ — ऊँट व घोड़ा
  9. भेड़, बकरी व चारा
  10. भैंस व मछली
  11. काज़री (CAZRI) — जोधपुर
  12. आफ़री (AFRI) — जोधपुर
  13. सुदूर संवेदन, मृदा व सिंचाई
  14. विज्ञान व रक्षा
  15. हथकरघा, रत्न व औज़ार
  16. शिल्प व डिज़ाइन
  17. स्वास्थ्य व आयुर्वेद
  18. समाज कार्य, मानव विज्ञान व राजस्व
  19. लोक-कला व राजस्थानी शोध
  20. इतिहास, ग्रंथ व पांडुलिपि
  21. जनजाति शोध
  22. रिवीजन पॉइंटर्स

शोध संस्थानों को रटने से बेहतर है उन्हें ज़िले और विषय के हिसाब से बाँटकर पढ़ना — जोधपुर, बीकानेर, जयपुर, उदयपुर और अजमेर में ही ज़्यादातर संस्थान बसे हैं। इस भाग में पहले ज़िलेवार सूची और संस्थानों के छह परिवार हैं। फिर अनाज, तिलहन-मसाला, बागवानी, पशु, शुष्क क्षेत्र-वन-सुदूर संवेदन, विज्ञान-रक्षा, हथकरघा-रत्न, शिल्प-डिज़ाइन, स्वास्थ्य-आयुर्वेद, लोक-कला और इतिहास-जनजाति शोध के संस्थान आते हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के प्रमुख अनुसंधान केन्द्र, 4 चॉक-बोर्ड चित्र, 16 नक्शे, 1 चार्ट, 24 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. ज़िलेवार शोध केंद्र

इस अध्याय के 51 संस्थान राज्य के 14 ज़िलों में फैले हैं। सबसे ज़्यादा जोधपुर में हैं — वहाँ मरुस्थल, वन, सुदूर संवेदन, स्वास्थ्य से लेकर लोक-कला तक के शोध केंद्र हैं।

ज़िलासंस्थान (स्थान)
जोधपुरकाज़री, आफ़री, ईसबगोल (मंडोर), SRSAC, मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान (DMRC), रूपायन (बोरूंदा), राजस्थानी शोध संस्थान (चौपासनी), रक्षा प्रयोगशाला, NBPGR का क्षेत्रीय केंद्र, हथकरघा प्रौद्योगिकी, प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान
बीकानेरउद्यानिकी (बीछवाल), खजूर, बेर, ऊँट (जोड़बीड़), अश्व उप-परिसर (जोड़बीड़), कृषि अनुसंधान निदेशालय, सिरेमिक (CERDC)
जयपुरRARI (दुर्गापुरा), कृषि विपणन संस्थान, झाबरमल शर्मा शोध संस्थान, हस्तशिल्प डिज़ाइन केंद्र, आयुर्वेद शोध संस्थान, रत्न-आभूषण संस्थान, IICD
उदयपुरभैंस (वल्लभनगर), ज्वार (वल्लभनगर), मत्स्य सर्वेक्षण, माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति संस्थान, मानव विज्ञान सर्वेक्षण, मृदा सर्वेक्षण ब्यूरो

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

2. संस्थानों के छह परिवार

औषधीय पादप केंद्र (माउंट आबू) बागवानी में गिना है, पर स्वास्थ्य शाखा में भी उसका ज़िक्र है। माणिक्यलाल वर्मा जनजाति संस्थान को संस्कृति-समूह में रखा है। गिनती से ज़्यादा ज़रूरी है — स्थान और वर्ष।

ट्रिक: “जो-बी-ज-उ-अ” — जोधपुर (11), बीकानेर (7), जयपुर (7), उदयपुर (6), अजमेर (5): संस्थानों की गिनती में ऊपर से नीचे का क्रम।

3. अनाज के शोध केंद्र

केंद्रस्थानख़ास बात
बाजरा अनुसंधान केंद्रगुड़ामालानी (बाड़मेर)शिलान्यास — 27 सितम्बर 2023, तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के हाथों
मक्का अनुसंधान केंद्रबोरवट (बाँसवाड़ा)—
चावल अनुसंधान केंद्रबाँसवाड़ा—

ट्रिक: बाँसवाड़ा = मक्का + चावल (बोरवट में मक्का)। वल्लभनगर (उदयपुर) में ज्वार के साथ भैंस का केंद्र भी है — एक क़स्बा, दो केंद्र।

सबसे नया केंद्र बाजरे का है — बाड़मेर जैसे सूखे ज़िले में, जहाँ बाजरा ही मुख्य फ़सल है।

4. तिलहन, मसाला व रेशा

केंद्रस्थानवर्ष व ब्योरा
राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्रसेवर (भरतपुर)20 अक्टूबर 1993 (8वीं योजना काल) में बना; फ़रवरी 2009 से नया नाम राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय
राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्रतबीजी (अजमेर)भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 2000 में खोला
ईसबगोल अनुसंधान केंद्रमंडोर (जोधपुर)—

सरसों केंद्र का सफ़र

  1. 1993 — राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र
  2. फ़रवरी 2009 — दर्जा बढ़ा
  3. राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान निदेशालय

5. बागवानी, फूल व औषधि

केंद्रस्थानब्योरा
केंद्रीय शुष्क क्षेत्र उद्यानिकी (बागवानी) अनुसंधान केंद्र — NRCAHबीछवाल (बीकानेर)स्थापना 1993
खजूर अनुसंधान केंद्रबीकानेरस्थापना 1978
बेर अनुसंधान केंद्रबीकानेर—

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

6. केंद्रीय कृषि फ़ार्म

फ़ार्मस्थापनाकिसकी मदद सेख़ास
केंद्रीय कृषि फ़ार्म, सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर)15 अगस्त 1956रूसएशिया का सबसे बड़ा कृषि फ़ार्म
केंद्रीय कृषि फ़ार्म, जैतसर (श्रीगंगानगर)1962कनाडा—
काल / क्रमघटनाविवरण
1956सूरतगढ़ फ़ार्म15 अगस्त — रूस की सहायता
1962जैतसर फ़ार्मकनाडा की सहायता
1967कपास सुधार परियोजना केंद्रश्रीगंगानगर

7. कृषि शोध संस्थान व निदेशालय

राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान (RARI) — दुर्गापुरा, जयपुर

  • राज्य में कृषि अनुसंधान केंद्र 1943 में खुला था; आज यही RARI कहलाता है।
  • अब यह श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय की एक इकाई (घटक) है।

तीन शहर, एक संस्था

  1. 1964 — उदयपुर में शोध केंद्र बना
  2. नाम मिला — कृषि अनुसंधान निदेशालय
  3. 1981-82 — उदयपुर से जयपुर

NBPGR का प्रादेशिक केंद्र — जोधपुर

राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR) का राज्य वाला केंद्र — ICAR का; 1965 में काज़री परिसर के भीतर खोला गया।

चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान — जयपुर

8 अगस्त 1988 को बना; कृषि उपज की बिक्री-व्यवस्था (कृषि विपणन) पर प्रशिक्षण और शोध की सुविधा देता है।

याद रखें: जयपुर के दो कृषि संस्थान — दुर्गापुरा का RARI (1943) सबसे पुराना; चरण सिंह विपणन संस्थान (1988) बाज़ार से जुड़ा।

8. जोड़बीड़ — ऊँट व घोड़ा

राष्ट्रीय ऊँट अनुसंधान केंद्र — जोड़बीड़ (बीकानेर)

काल / क्रमघटनाविवरण
5 जुलाई 1984उष्ट्र परियोजना निदेशालयICAR ने बीकानेर में शुरू किया
20 सितम्बर 1995दर्जा बढ़ानया नाम — राष्ट्रीय उष्ट्र (ऊँट) अनुसंधान केंद्र

राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र — उप-परिसर, जोड़बीड़

  • मुख्य केंद्र (मुख्यालय) हिसार (हरियाणा) में है; बीकानेर में केवल उसका एक परिसर।
  • जोड़बीड़ वाला यह उप-परिसर 1989 में खुला।

ध्यान दें: मुख्यालय पूछें तो घोड़े का — हिसार; ऊँट का — बीकानेर ही।

9. भेड़, बकरी व चारा

केंद्रस्थानब्योरा
केंद्रीय भेड़ व ऊन अनुसंधान केंद्रअविकानगर (टोंक)ICAR ने 1962 में खोला
पश्चिम क्षेत्रीय बकरी अनुसंधान केंद्रअविकानगर (टोंक)—
बकरी एवं चारा अनुसंधान केंद्ररामसर (अजमेर)“बकरी विकास एवं चारा उत्पादन परियोजना” के अंतर्गत 1981-82 में बना

10. भैंस व मछली

केंद्रस्थानब्योरा
भैंस प्रजनन एवं अनुसंधान केंद्रवल्लभनगर (उदयपुर)इसे राजुवास (बीकानेर) — राज्य का पशु चिकित्सा व पशु विज्ञान विश्वविद्यालय — चलाता है
मत्स्य सर्वेक्षण एवं अनुसंधान केंद्रउदयपुरस्थापना 1958

झीलों के शहर उदयपुर में मछली का सर्वेक्षण केंद्र होना स्वाभाविक है; यह इस अध्याय के पशु-केंद्रों में सबसे पुराना (1958) है।

11. काज़री (CAZRI) — जोधपुर

  • पूरा नाम ➜ केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान
  • स्थान ➜ जोधपुर
  • स्थापना ➜ 1959
  • आज काज़री के 5 क्षेत्रीय केंद्र हैं — बीकानेर, जैसलमेर, पाली, भुज और लद्दाख।
  • मुख्य काम ➜ राज्य के शुष्क व अर्द्ध-शुष्क इलाक़ों में वन बढ़ाना, मरुस्थल के फैलाव को रोकना, और इन विषयों पर शोध-अध्ययन।
  • इसी के परिसर में 1965 में NBPGR का प्रादेशिक केंद्र खुला।

12. आफ़री (AFRI) — जोधपुर

  • भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद ने 30 जून 1987 को जोधपुर में खोला।
  • 1988 में इसे “आफ़री” नाम मिला।
  • कार्यक्षेत्र ➜ राजस्थान, गुजरात और केंद्रशासित दादरा नगर हवेली व दमन-दीव के शुष्क-अर्द्धशुष्क इलाक़ों में वानिकी शोध।
काज़रीआफ़री
पूरा नामकेंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थानशुष्क वन अनुसंधान संस्थान
वर्ष19591987 (नाम 1988)
किसके अधीन / सहयोगऑस्ट्रेलिया व यूनेस्को का सहयोगभारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

13. सुदूर संवेदन, मृदा व सिंचाई

SRSAC कैसे बना

  1. 1979 — कृषि विभाग में “हवाई फ़ोटो व्याख्या प्रयोगशाला” (AIPL)
  2. 1985 — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को सौंपा
  3. नया नाम — स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर

काम — मिट्टी, पानी, वन, कृषि और खनिज जैसे प्राकृतिक संसाधनों के नक्शे सुदूर संवेदन से तैयार करना, ताकि उनकी पहचान, खनन-दोहन और प्रबंधन ठीक से हो सके।

राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो — पश्चिम क्षेत्रीय केंद्र, उदयपुर

  • शुरुआत 1981 में बड़ोदरा (गुजरात) से — राजस्थान व गुजरात दोनों की ज़रूरत को देखकर।
  • 1990 में इसे उदयपुर लाया गया।

सिंचाई प्रबंधन व प्रशिक्षण संस्थान (IMTI) — कोटा

चम्बल की नहरों वाले कोटा में सिंचाई प्रबंधन का प्रशिक्षण संस्थान।

14. विज्ञान व रक्षा

संस्थानस्थानब्योरा
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान — सीरी (CEERI)पिलानी (झुंझुनूँ)21 सितम्बर 1953 को पं. जवाहरलाल नेहरू ने आधारशिला रखी; इलेक्ट्रॉनिक्स में शोध-विकास का देश का बड़ा केंद्र
रक्षा अनुसंधान प्रयोगशालाजोधपुरभारत सरकार के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रयोगशाला
सिरेमिक विद्युत अनुसंधान एवं विकास केंद्र (CERDC)बीकानेर2007 में “सिरेमिक सेंटर” के रूप में शुरू; 2010 में नाम बदलकर Ceramic Electrical Research & Development Center

बीकानेर का सिरेमिक केंद्र

  1. 2007 — सिरेमिक सेंटर
  2. 2010 — CERDC

15. हथकरघा, रत्न व औज़ार

संस्थानस्थानब्योरा
भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Handloom Technology)जोधपुरकेंद्र के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) ने 16 सितम्बर 1993 को खोला
भारतीय रत्न एवं आभूषण संस्थान (Indian Institute of Gem and Jewellery)जयपुरवाणिज्य-उद्योग मंत्रालय की रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ने RIICO के साथ मिलकर बनाया; इस क्षेत्र का राष्ट्रीय “उत्कृष्टता केंद्र”
हैंड टूल डिज़ाइन डेवलपमेंट एवं ट्रेनिंग सेंटरनागौर1988; नागौर के हस्त-औज़ार (हैंड टूल) उद्योग को बढ़ावा और तकनीकी मदद

16. शिल्प व डिज़ाइन

भारतीय शिल्प और डिज़ाइन संस्थान (IICD) — जयपुर

काल / क्रमघटनाविवरण
20 अप्रैल 1995पंजीकरणराजस्थान सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1958 के तहत एक शिल्प संस्थान के रूप में
27 अप्रैल 1998नया नामIndian Institute of Craft and Design

हस्तशिल्प डिज़ाइन विकास एवं शोध केंद्र — जयपुर

जयपुर के हस्तशिल्प के डिज़ाइन-विकास और शोध के लिए बना केंद्र।

17. स्वास्थ्य व आयुर्वेद

मरुस्थलीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (DMRC) — जोधपुर

  • भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने 27 जून 1984 को खोला।
  • मक़सद ➜ रेगिस्तानी इलाक़े की स्वास्थ्य-शोध संबंधी ज़रूरतें पूरी करना।
  • आज इसे राष्ट्रीय असंचारी रोग कार्यान्वयन अनुसंधान केंद्र (NIIRNCD) कहते हैं।
संस्थानस्थानब्योरा
राजस्थान राज्य आयुष अनुसंधान केंद्रकेकड़ी (अजमेर)खोलने की घोषणा बजट 2021 में
राष्ट्रीय आयुर्वेद शोध संस्थानजयपुर—
औषधीय पादप शोध केंद्रमाउंट आबू (सिरोही)जड़ी-बूटियों का शोध (बागवानी शाखा में भी)

18. समाज कार्य, मानव विज्ञान व राजस्व

संस्थानस्थानब्योरा
सामाजिक कार्य एवं अनुसंधान केंद्र (SWRC)तिलोनिया (अजमेर)फ़रवरी 1972 में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने शुरू किया
भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण — पश्चिमी क्षेत्रीय केंद्रउदयपुरसितम्बर 1975; पश्चिमी भारत, ख़ासकर राजस्थान और गुजरात में मानवशास्त्रीय अध्ययन की ज़रूरत पूरी करने के लिए
राजस्थान राजस्व अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (RRTI)अजमेरजुलाई 1995; राजस्व विभाग के अधिकारियों का प्रशिक्षण

19. लोक-कला व राजस्थानी शोध

संस्थानस्थानब्योरा
रूपायन शोध संस्थानबोरूंदा (जोधपुर)कोमल कोठारी और विजयदान देथा ने 1960 में बनाया
राजस्थानी शोध संस्थानचौपासनी (जोधपुर)स्थापना 1955

20. इतिहास, ग्रंथ व पांडुलिपि

राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान (Rajasthan Oriental Research Institute) — जोधपुर

काल / क्रमघटनाविवरण
1954जयपुर में शुरुआतमुनि जिनविजय के मार्गदर्शन में
1958जोधपुर स्थानांतरणजयपुर से जोधपुर लाया गया
14 सितम्बर 1958नया भवनतत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने जोधपुर में उद्घाटन किया
संस्थानस्थानस्थापना
पंडित झाबरमल शर्मा शोध संस्थानजयपुर2000
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी-फ़ारसी शोध संस्थानटोंक4 दिसम्बर 1978

21. जनजाति शोध

  • संस्थान ➜ माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं सर्वेक्षण संस्थान
  • स्थान ➜ उदयपुर
  • स्थापना ➜ 1964

नाम से ही काम साफ़ है — आदिम जातियों (जनजातियों) पर शोध और सर्वेक्षण। संस्थान माणिक्यलाल वर्मा के नाम पर है।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. अध्याय के 51 संस्थान राज्य के 14 ज़िलों में फैले हैं, और सबसे ज़्यादा जोधपुर में हैं।
  2. संस्थानों की गिनती का क्रम «जो-बी-ज-उ-अ» है — जोधपुर (11), बीकानेर (7), जयपुर (7), उदयपुर (6), अजमेर (5)।
  3. बाजरा अनुसंधान केंद्र गुड़ामालानी (बाड़मेर) में और मक्का केंद्र बोरवट (बाँसवाड़ा) में है; वल्लभनगर (उदयपुर) में ज्वार और भैंस दोनों के केंद्र हैं।
  4. राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र सेवर (भरतपुर) में 20 अक्टूबर 1993 को बना और फ़रवरी 2009 से निदेशालय कहलाता है।
  5. केंद्रीय कृषि फ़ार्म, सूरतगढ़ 15 अगस्त 1956 को रूस की मदद से बना — एशिया का सबसे बड़ा कृषि फ़ार्म; जैतसर फ़ार्म 1962 में कनाडा की मदद से।
  6. ऊँट अनुसंधान केंद्र जोड़बीड़ (बीकानेर) में 5 जुलाई 1984 को उष्ट्र परियोजना निदेशालय बना और 20 सितम्बर 1995 को केंद्र का दर्जा मिला; अश्व केंद्र का मुख्यालय हिसार में है।
  7. केंद्रीय भेड़ व ऊन अनुसंधान केंद्र अविकानगर (टोंक) में 1962 में खुला।
  8. काज़री की स्थापना 1959 में जोधपुर में हुई, जबकि आफ़री 30 जून 1987 को खुला और 1988 में उसे यह नाम मिला।
  9. सीरी (CEERI) पिलानी में है; इसकी आधारशिला 21 सितम्बर 1953 को पं. जवाहरलाल नेहरू ने रखी।

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