जहाँ पानी कम हो, वहाँ उसे सहेजने की कला सबसे ज़्यादा निखरती है — मरुस्थल की झीलें, कुएँ और बावड़ियाँ इसी का नतीजा हैं। इस भाग में माउंट आबू की नक्की से लेकर जोधपुर, जैसलमेर और बीकानेर संभाग की झीलें, बावड़ी का परिचय और संभागवार प्रसिद्ध बावड़ियाँ, «किसकी जीवनरेखा कौन?» और झील संरक्षण व जल विरासत की जानकारी दी गई है।
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1. नक्की झील
- माउंट आबू (सिरोही); 1200 मी पर — राज्य की सबसे ऊँची और सबसे गहरी झील।
- राज्य की इकलौती झील जो सर्दियों में जम जाती है; राज्य की इकलौती हिल स्टेशन झील।
- विवर्तनिक झील का उदाहरण।
- धार्मिक मान्यता ➜ देवताओं ने इसे नाख़ूनों से खोदा; ऐतिहासिक मत — रसिया बालम नाम के भील ने बनाई।
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| चट्टान | किसके जैसी |
|---|---|
| नंदी रॉक | बैल |
| टॉड रॉक | मेंढक |
| नन रॉक | घूँघट ओढ़ी स्त्री |
- गुफ़ाएँ ➜ राम झरोखा, आदि गुफ़ा, चम्पा गुफ़ा, हाथी गुफ़ा; किनारे विवेकानंद गुफ़ा (यहाँ उन्होंने ध्यान किया)।
- मंदिर ➜ रघुनाथ जी का प्राचीन मंदिर, भारत माता मंदिर; किनारे की पहाड़ी पर रामकुंड।
- हनीमून पॉइंट (1 किमी) और सनसेट पॉइंट पास में।
2. जोधपुर व पाली की झीलें
| झील | ख़ास बात |
|---|---|
| बालसमंद (मंडोर) | 1159 में प्रतिहार शासक बालकराव; कृत्रिम; आज जोधपुर को पीने का पानी; गुलाबसागर का पानी नहरों से आता है; बीच में आठ खम्भा महल और दक्षिण में जनाना बाग़ — दोनों सूरसिंह ने बनवाए (रानी के लिए); उत्तर में सूरसिंह की बारादरी; किनारे गुलाब उद्यान |
| गुलाबसागर | 1788 में महाराजा विजयसिंह की पासवान गुलाबराय; पास में महिला बाग़ का झालरा भी उन्हीं का |
| कायलाना (प्रतापसागर) | मूल रूप से प्राकृतिक; 1872 में सर प्रताप (मारवाड़ शासक जसवंत सिंह द्वितीय के भाई) ने आज का रूप दिया — “प्रतापसागर”; एक भाग “तख़्तसागर”; जोधपुर की सबसे बड़ी झील; किनारे भारत का पहला मरु वनस्पति उद्यान “माचिया जैविक उद्यान”; राजीव गांधी लिफ्ट नहर इसमें इंदिरा गांधी नहर का पानी डालती है |
रोचक तथ्य: आज के जोधपुर शहर का रूप सर प्रताप सिंह की देन माना जाता है।
पाली में — चौपड़ा झील और सरदार समंद।
3. जैसलमेर की झीलें
| झील | ख़ास बात |
|---|---|
| गड़सीसर (घड़सीसर) | 14वीं सदी में महारावल घड़सिंह (गड़सी); गड़सीसर दरवाज़े के पास, जैसलमेर का पूर्वी प्रवेश; वर्षा जल पीने के काम आता था; कलात्मक मुख्य द्वार “टीलों की पोल”; गजमंदिर / गजरूपेश्वर शिवालय; किनारे जैसलमेर लोक संस्कृति संग्रहालय; “गड़ीसर तालाब” भी कहते हैं |
| बूझ झील | रूपसी गाँव के पास; कभी-कभी काकनी (मसूरड़ी) का पानी आता है |
| रामदेवरा झील (रामसरोवर) | बाबा रामदेव मंदिर के पास; मान्यता — बाबा रामदेव ने बनवाई; कुष्ठ रोग दूर करने वाली |
बाटाडू का कुआँ (बाटाडू गाँव, बाड़मेर) — रावल गुलाबसिंह का बनवाया संगमरमर का कलात्मक कुआँ; “रेगिस्तान का जलमहल”।
4. बीकानेर संभाग
कोलायत (बीकानेर)
- “शुष्क मरुस्थल का सुंदर उद्यान” / “मरुउद्यान”; मूल रूप से प्राकृतिक।
- सांख्य दर्शन के प्रवर्तक कपिल मुनि का आश्रम और मंदिर; मान्यता — माता की मुक्ति के लिए वे यहाँ पाताल गंगा लाए — इसलिए “कपिल सरोवर”।
- 52 घाट; कार्तिक पूर्णिमा को मेला — जांगल प्रदेश का सबसे बड़ा मेला; दीपदान; यहाँ स्नान गंगा-स्नान जैसा माना जाता है।
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
ट्रिक: पुष्कर और कोलायत — दोनों में 52 घाट, दोनों में कार्तिक पूर्णिमा का मेला और दीपदान।
| झील | ख़ास बात |
|---|---|
| गजनेर (बीकानेर) | गजनेर अभयारण्य में; पीने का पानी; “पानी का शुद्ध दर्पण”; एक ओर महल-बाग़, तीन ओर घने पेड़; 1920 में गंगासिंह ने “गंगा सरोवर” के रूप में बनवाया; किनारे गजनेर पैलेस — गजसिंह ने अकाल राहत में बनवाया |
| अनूपसागर, सूरसागर | बीकानेर |
| तलवाड़ा (हनुमानगढ़) | घग्घर के पानी से |
… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
5. बावड़ी — परिचय
मरुस्थल में पानी की कमी ने यहाँ के लोगों को पानी सहेजने की अनोखी कला सिखाई — कुएँ, कुंड, बावड़ियाँ और टाँके, जो उपयोगी भी थे और सुंदर भी। ज़्यादातर बावड़ियाँ रानियों, राजमाताओं और व्यापारी वर्ग ने बनवाईं; निजी बावड़ियाँ भी आम लोगों के लिए खुली रहती थीं।
- प्राचीन नाम ➜ वापिका, वापी, कर्कधु, शकंधु
- प्रकार ग्रंथ ➜ “अपराजितपृच्छा” (भोज) — 4 प्रकार
- चार प्रकार ➜ नंदा, भद्रा, जया, सर्वतोमुख
- “बावड़ियों का शहर” ➜ बूँदी (लगभग 71 बावड़ियाँ)।
- बावड़ी स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध ➜ शेखावाटी और बूँदी।
- परम्परा पहली सदी में शक लोगों ने शुरू की।
29 दिसम्बर 2017 — छह बावड़ियों पर डाक टिकट
| बावड़ी | ज़िला | टिकट |
|---|---|---|
| पन्ना मीणा (पन्ना मियाँ) की बावड़ी | जयपुर | ₹5 |
| रानीजी की बावड़ी | बूँदी | ₹5 |
| नीमराणा की बावड़ी | कोटपूतली-बहरोड़ | ₹15 |
6. उदयपुर, कोटा, भरतपुर संभाग
उदयपुर संभाग
| बावड़ी | कहाँ | बनवाने वाले |
|---|---|---|
| त्रिमुखी बावड़ी | देबारी (उदयपुर) | महाराणा राजसिंह की रानी रामरसदे |
| विरुपुरी बावड़ी | उदयपुर | 17वीं सदी — रानी विरु |
| बिनोता की बावड़ी | बड़ी सादड़ी (चित्तौड़गढ़) | जागीरदार सूरजसिंह शक्तावत |
| खातण बावड़ी | चित्तौड़गढ़ दुर्ग | — |
कोटा संभाग
| बावड़ी | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| बड़गाँव की बावड़ी | कोटा | कोटा शासक शत्रुशाल की पटरानी जादौण |
| रानीजी की बावड़ी | बूँदी | “बावड़ियों का सिरमौर”; राव राजा अनिरुद्ध की विधवा रानी लाड़ कँवर नाथावत ने 1699 में पुत्र बुद्धसिंह के समय बनवाई; एशिया की सर्वश्रेष्ठ बावड़ियों में; ₹5 का टिकट |
| गुल्ला (गुलाब) बावड़ी | बूँदी | — |
| नागर सागर कुंड | बूँदी | मूल नाम गंगासागर और यमुनासागर; 1885 — राव राजा रामसिंह की रानी चंद्रभान कँवर; ₹15 का टिकट |
भरतपुर संभाग
| बावड़ी | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| ब्रह्मबाद की बावड़ी | भरतपुर | — |
| लम्बी बावड़ी | धौलपुर | सात मंज़िला |
| शाही बावड़ी | धौलपुर | निहालेश्वर मंदिर के पीछे; 1873–1880 |
7. जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर संभाग
चाँद बावड़ी — आभानेरी (दौसा)
- आभानेरी बसाने वाले प्रतिहार राजा चाँद ने बनवाई।
- यहीं हर्षत माता का प्राचीन मंदिर।
- 19.5 मी गहरी, 3500 सीढ़ियाँ — भारत की सबसे गहरी और राजस्थान की सबसे कलात्मक बावड़ी; ₹5 का टिकट।
जयपुर संभाग
| बावड़ी | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| पन्ना मीणा की बावड़ी | जयपुर | जयगढ़ दुर्ग के पास; ₹5 का टिकट |
| नीमराणा की बावड़ी | कोटपूतली-बहरोड़ | 9 मंज़िला; ₹15 का टिकट |
| भांडारेज की बावड़ी | भांडारेज (दौसा) | 1732 में बनी |
लवाण (दौसा), लोहार्गल (झुंझुनूँ) और सीकर की बावड़ियाँ भी इस सूची में हैं।
अजमेर संभाग
| बावड़ी | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| हाड़ी रानी की बावड़ी | टोडारायसिंह (टोंक) | फ़िल्म “पहेली” की शूटिंग; टोडारायसिंह के सोलंकी शासक से ब्याही बूँदी की राजकुमारी ने बनवाई |
| चमना बावड़ी | शाहपुरा (भीलवाड़ा) | 1858 में उम्मेद सिंह ने अपनी गणिका चमना के नाम पर |
| बाई राज की बावड़ी | बनेड़ा (भीलवाड़ा) | — |
जोधपुर संभाग
| बावड़ी | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| तापी बावड़ी | जोधपुर | 1675 — तापोजी तेजावत; जोधपुर शहर की सबसे लम्बी बावड़ी |
| हरबोला की बावड़ी, एजन बावड़ी | जोधपुर | — |
| चाँद बावड़ी | जोधपुर | राव जोधा की रानी चाँद कँवरी |
| तूरजी का झालरा | जोधपुर | अभयसिंह की रानी तँवर (तूर कँवर), 1748 (वि.सं. 1805); ₹5 का टिकट |
बीकानेर संभाग
| जलस्रोत | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| चौतीना का कुआँ (अनूपसागर) | बीकानेर | — |
| सेठानी का जोहड़ा | चूरू | 1886 में चूरू–रतनगढ़ सड़क के पास सेठ भगवानदास बागला की पत्नी बृज कुँवरी ने पति की याद में; असली नाम “भगवान सागर” |
| पिथाणा जोहड़ा | चूरू | पुराना नाम “बीजाणा जोहड़ा” |
पानी से जुड़े स्थानीय शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| ताकिया | तालाब का ऊँचा स्थान जहाँ से तैराक छलाँग लगाते हैं |
| सेजा (मेवाड़) | तालाब के पास कम गहराई पर पानी जमा होने की जगह पर गाड़ा गया खम्भा |
8. किसकी जीवनरेखा कौन?
| किसकी | जीवनरेखा |
|---|---|
| जयपुर | अमानीशाह नाला / द्रव्यवती |
| राजसमंद | नंदसमंद बाँध |
| भरतपुर | मोती झील |
| ब्यावर | नारायण सागर बाँध |
9. झील संरक्षण व जल विरासत
राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना (NLCP)
- राज्य की 6 झीलें — पुष्कर, आनासागर, फतेहसागर, पिछोला, मानसागर, नक्की।
- जून 2001 में पूरी तरह केंद्र के पैसे (100%) से; फ़रवरी 2002 से केंद्र-राज्य 70 : 30।
- 1 अप्रैल 2012 ➜ NLCP और राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण कार्यक्रम (NWCP) मिलकर NPCA (जलीय पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण की राष्ट्रीय योजना) बने।
राजस्थान झील विकास प्राधिकरण
राजस्थान झील (संरक्षण एवं विकास) प्राधिकरण अधिनियम 2015 के तहत 23 फ़रवरी 2015 को बना; उद्देश्य — झीलों के लिए नीति और नियामक ढाँचा; हर ज़िले में कलेक्टर की अध्यक्षता में ज़िला स्तरीय झील समिति।
जल विरासत
देश की 75 जल धरोहरों में से 7 राजस्थान में —
- आनासागर (अजमेर)
- राजसमंद झील
- उदयपुर झील तंत्र
- तूरजी का झालरा (जोधपुर)
10. रैपिड फायर तथ्य
- सबसे ऊँची व सबसे गहरी झील ➜ नक्की (माउंट आबू, 1200 मी); सर्दियों में जमने वाली इकलौती झील
- जोधपुर की सबसे बड़ी झील ➜ कायलाना (प्रतापसागर); 1872 में सर प्रताप ने आज का रूप दिया
- कोलायत (बीकानेर) ➜ कपिल मुनि का आश्रम; 52 घाट; कार्तिक पूर्णिमा का मेला
- «बावड़ियों का शहर» ➜ बूँदी (लगभग 71 बावड़ियाँ)
- बावड़ी के चार प्रकार ➜ नंदा, भद्रा, जया, सर्वतोमुख (ग्रंथ अपराजितपृच्छा)
- भारत की सबसे गहरी बावड़ी ➜ चाँद बावड़ी, आभानेरी (दौसा) — 19.5 मी गहरी, 3500 सीढ़ियाँ
- «बावड़ियों का सिरमौर» ➜ रानीजी की बावड़ी, बूँदी (1699)
- 29 दिसम्बर 2017 को छह बावड़ियों पर डाक टिकट जारी हुए — पन्ना मीणा, रानीजी और नीमराणा की बावड़ी उनमें शामिल हैं।
- राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना की 6 झीलें ➜ पुष्कर, आनासागर, फतेहसागर, पिछोला, मानसागर, नक्की
अगले भाग में राज्य में पानी की स्थिति, सिंचाई के साधन और परियोजनाओं के प्रकार, फिर भाखड़ा-नांगल, व्यास, चम्बल घाटी और माही बजाज सागर परियोजनाएँ।
पिछला भाग: राजस्थान की झीलें: उदयपुर संभाग की झीलें (भाग 2) एवं अजमेर संभाग — पुष्कर व आनासागर
अगला भाग: प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ: चम्बल परियोजना
इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान का अपवाह तंत्र परिचय एवं वर्गीकरण · प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ
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